स्थानीय लोग इस हादसे को लेकर गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले दंपती और पिकअप चालक के परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
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नीमच से लौट रहे दंपती की सड़क दुर्घटना में मौत तीन लोग मारे गए
नीमच । राजस्थान के निंबाहेड़ा बायपास पर शुक्रवार रात को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में नीमच जिले के एक दंपती सहित तीन लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना नेशनल हाईवे 56 पर बडौली माधोसिंह मार्ग के चौराहे पर हुई जब एक मांगलिक कार्यक्रम से लौट रहे दंपती की कार पिकअप से टकराई और उसके बाद पीछे से आ रही थार ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में दोनों दंपती के सदस्यों और पिकअप चालक की मौके पर ही मौत हो गई।सभी मृतक नीमच जिले के सरवानिया महाराज क्षेत्र के निवासी थे। दुर्घटना का शिकार हुआ दंपती लखन मालू 40 वर्ष और उनकी पत्नी सविता डॉली मालू 36 वर्ष चित्तौड़गढ़ जिले में एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौट रहे थे। उनकी मारुति वेन नेशनल हाईवे पर बायपास पर एक खड़ी पिकअप से टकराई जो पंचर होने के कारण वहां रुकी हुई थी।इस दौरान एक थार जीप पीछे से तेजी से आई और वेन को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वेन बुरी तरह पिचक गई और उसमें सवार दोनों दंपती की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा पिकअप चालक बसंतीलाल प्रजापत 30 वर्ष भी इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठा। वह ग्राम भूनियाखेड़ी का निवासी था। पिकअप में सवार एक अन्य व्यक्ति हस्तीमल पामेचा को गंभीर चोटें आईं जिसे उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।निंबाहेड़ा पुलिस ने घटना के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस दुर्घटना में शामिल सभी वाहनों का सही तरीके से निरीक्षण किया जा रहा है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।सदर थाना प्रभारी संजय शर्मा ने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल घायलों को अस्पताल भेजा। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटवाकर यातायात को सुचारू किया गया। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इसके कारणों का पता लगाया जाएगा।यह हादसा क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह हादसा उस समय हुआ जब लोग मांगलिक कार्यक्रम से लौट रहे थे और यह घटना उस समय हुई जब सड़क पर गाड़ी की स्थिति बिगड़ गई थी।
स्थानीय लोग इस हादसे को लेकर गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले दंपती और पिकअप चालक के परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई है।सड़क हादसों के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने नेशनल हाईवे पर सड़क सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता जताई है। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के महत्व को उजागर किया है और लोगों से आग्रह किया गया है कि वे यात्रा के दौरान अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। -

सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना
नई दिल्ली। भारत में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 2024 में 2.3 प्रतिशत बढ़कर 1.77 लाख से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में प्रतिदिन औसतन 485 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा रहे हैं। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।गडकरी ने कहा कि फरवरी 2020 में सड़क सुरक्षा पर आयोजित तीसरे वैश्विक मंत्री स्तरीय सम्मेलन में ‘स्टॉकहोम घोषणापत्र’ अपनाया गया था। इसके तहत 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और चोटों को 50 प्रतिशत तक कम करने का वैश्विक लक्ष्य तय किया गया है।
मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2024 में देश में सभी प्रकार की सड़कों पर दुर्घटनाओं में मरने वालों की कुल संख्या 1,77,177 थी। इसमें ईडीएआर पोर्टल से प्राप्त पश्चिम बंगाल का डेटा भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस द्वारा कुल 4,80,583 सड़क हादसों की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिसमें 1,72,890 लोगों की मौत हुई और 4,62,825 लोग घायल हुए।
सड़क दुर्घटनाओं में भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर चिंताजनक बनी हुई है। ‘वर्ल्ड रोड स्टेटिस्टिक्स 2024’ के अनुसार, चीन में प्रति लाख आबादी सड़क दुर्घटनाओं में मौत की दर 4.3 है, अमेरिका में यह 12.76 है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 11.89 है। यानी भारत का दर अमेरिका के बराबर करीब है और चीन से कई गुना अधिक।
सड़क सुरक्षा सुधार के लिए सरकार ने 4-‘ई’ रणनीति अपनाई है। इसका आधार चार स्तंभ हैं: एजुकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों की गुणवत्ता), एनफोर्समेंट (कानून का प्रवर्तन) और इमरजेंसी केयर (आपातकालीन उपचार)। इस बहुआयामी रणनीति के तहत सड़क सुरक्षा के लिए कई पहलें की गई हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने awareness कार्यक्रम और सड़क सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाए हैं, ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं। इंजीनियरिंग के तहत सड़कों और वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए मानक तय किए गए हैं। एनफोर्समेंट के क्षेत्र में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, और इमरजेंसी केयर के तहत दुर्घटना के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक पहुँचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस विभागों के सहयोग से सड़क सुरक्षा को लेकर निगरानी और आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। इससे यह पहचानने में मदद मिलती है कि किन सड़कों और क्षेत्रों में सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं और उन्हें सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार की यह पहल समय की मांग है, क्योंकि बढ़ती आबादी और वाहन संख्या के कारण सड़क हादसों में लगातार वृद्धि हो रही है। 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में मौतों और चोटों को आधा करने का लक्ष्य एक महत्वाकांक्षी कदम है। इसके सफल होने के लिए जनता, सरकार और सड़क उपयोगकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा।
गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कानून या प्रशासन का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज की जिम्मेदारी भी है। सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित वाहन और सुरक्षित ड्राइविंग की संस्कृति ही सड़क दुर्घटनाओं की दर को घटा सकती है। सरकार ने इसके लिए व्यापक कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट, हाईवे पर CCTV निगरानी, ट्रैफिक नियमों के कड़े प्रवर्तन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का विस्तार शामिल है।
सरकारी आंकड़े और वैश्विक तुलना यह दर्शाते हैं कि भारत को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में और भी कदम उठाने की आवश्यकता है। जनता की भागीदारी और सरकारी प्रयासों के समन्वय से ही सड़क हादसों में मौत और चोटों को कम किया जा सकता है।