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  • ग्रामीणों के लिए बड़ी सौगात मध्य प्रदेश में शुरू हुई जी राम जी स्कीम 125 दिन रोजगार की गारंटी और मजदूरी में देरी पर मुआवजा

    ग्रामीणों के लिए बड़ी सौगात मध्य प्रदेश में शुरू हुई जी राम जी स्कीम 125 दिन रोजगार की गारंटी और मजदूरी में देरी पर मुआवजा


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण रोजगार और गांवों के समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक जुलाई से जी राम जी योजना लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिन के अकुशल रोजगार की गारंटी मिलेगी। यह अवधि मौजूदा मनरेगा के 100 दिनों की तुलना में 25 दिन अधिक है। योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं बल्कि गांवों में स्थायी विकास कार्यों को गति देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना भी है।

    योजना के तहत सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि कोई पात्र व्यक्ति रोजगार के लिए आवेदन करता है तो उसे 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित समय सीमा में रोजगार नहीं दिया जाता है तो संबंधित व्यक्ति बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा। पहले 30 दिनों तक मजदूरी दर का 25 प्रतिशत और इसके बाद 50 प्रतिशत तक भत्ता देने की व्यवस्था की गई है। इससे रोजगार की कानूनी गारंटी को और मजबूत बनाया गया है।

    सरकार ने मजदूरी भुगतान को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए हैं। योजना में काम करने वाले श्रमिकों को साप्ताहिक आधार पर भुगतान किया जाएगा और किसी भी स्थिति में काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी देना अनिवार्य होगा। यदि भुगतान में देरी होती है तो 16वें दिन से बकाया मजदूरी पर प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत की दर से मुआवजा भी दिया जाएगा। इससे समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और श्रमिकों को आर्थिक नुकसान से बचाने का प्रयास किया गया है।

    रोजगार प्राप्त करने के लिए आवेदन की प्रक्रिया भी सरल बनाई गई है। पात्र व्यक्ति मौखिक लिखित या डिजिटल माध्यम से आवेदन कर सकेगा। आवेदन ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य कार्यक्रम अधिकारी अथवा अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकेगा। आवेदन करने पर रसीद देना भी अनिवार्य होगा ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

    योजना का लाभ केवल उन्हीं ग्रामीण परिवारों को मिलेगा जिनका पंजीकरण होगा और जिनके वयस्क सदस्यों का नाम रोजगार गारंटी कार्ड में दर्ज होगा। परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य रोजगार के लिए आवेदन कर सकेगा। सरकार ने वंचित और जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता देने का भी प्रावधान किया है ताकि रोजगार का लाभ सबसे पहले उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

    जी राम जी योजना के तहत जल संरक्षण सिंचाई ग्रामीण सड़कें आजीविका बढ़ाने वाले कार्य आधारभूत ग्रामीण अधोसंरचना और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विकास कार्य कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य ऐसी स्थायी परिसंपत्तियां तैयार करना है जिनका लाभ गांवों को लंबे समय तक मिलता रहे। साथ ही विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से पंचायत स्तर की योजनाओं को जिला राज्य और राष्ट्रीय विकास योजनाओं से जोड़ने की भी तैयारी की गई है।

    योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। जीपीएस आधारित निगरानी मोबाइल उपस्थिति प्रणाली रियल टाइम डैशबोर्ड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के जरिए कार्यों की निगरानी होगी। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगाने पारदर्शिता बढ़ाने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    इस योजना के वित्तीय मॉडल में केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत खर्च वहन करेगी। सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के साथ गांवों के स्थायी विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

    खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी


    खंडवा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी विकास सौगात दी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत खंडवा जिले की चार महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 13.74 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा, जिसके तहत 14.44 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

    इस स्वीकृति के बाद लंबे समय से लंबित ग्रामीण इलाकों की सड़क सुविधा से जुड़ी मांगों को राहत मिलने की उम्मीद है। नई सड़कों के बनने से न सिर्फ गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और आवागमन व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

    ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार
    इन सड़कों के निर्माण से किसानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी, वहीं विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों के लिए भी आवागमन सुगम हो जाएगा। बरसात के मौसम में जिन इलाकों में संपर्क टूट जाता था, वहां अब स्थायी सड़क सुविधा से राहत मिलेगी। केंद्र सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है, ताकि विकास का लाभ सीधे गांवों तक पहुंच सके।

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी मंजूरी
    इन परियोजनाओं को केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि स्वीकृति पत्र उन्हें सौंपा गया है और यह निर्णय क्षेत्र की वर्षों पुरानी जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने का काम तेजी से किया जा रहा है और खंडवा जिले को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

    कौन-कौन से मार्ग बनेंगे
    स्वीकृत परियोजनाओं में कुल चार सड़क मार्ग शामिल हैं:
    बरमलाय से कुकडाल मार्ग – 7.64 किमी, लागत 7.18 करोड़ रुपये
    बरमलाय से सुकलतालाई-4 मार्ग – 3.20 किमी, लागत 3.13 करोड़ रुपये
    लहाड़पुर से पारवाड़ी मार्ग – 2.24 किमी, लागत 2.06 करोड़ रुपये
    मालूद रोड से खेड़ी रैयत मार्ग – 1.36 किमी, लागत 1.35 करोड़ रुपये
    इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने पर ग्रामीण क्षेत्रों की आवाजाही व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

    ग्रामीणों में खुशी का माहौल
    सड़क निर्माण की स्वीकृति के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से खराब और कच्चे रास्तों के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब स्थायी सड़क बनने से उनकी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।

  • ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा, नई 125 दिन की गारंटी वाली योजना की चर्चा तेज

    ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा, नई 125 दिन की गारंटी वाली योजना की चर्चा तेज


    नई दिल्ली ।ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को लेकर हाल ही में सामने आए एक दावे ने देशभर में चर्चा को तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि मौजूदा रोजगार गारंटी प्रणाली की जगह एक नए ढांचे को लागू करने की तैयारी की जा रही है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को पहले से अधिक दिनों तक रोजगार की गारंटी देने का प्रस्ताव सामने आया है। इस कथित बदलाव में रोजगार की अवधि को बढ़ाकर 125 दिन करने की बात कही जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को और मजबूत बनाने का दावा किया जा रहा है।

    इस कथित योजना के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल अस्थायी मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक स्थायी आधार देना बताया जा रहा है। इसमें गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास, जल संरक्षण, कृषि कार्यों को बढ़ावा देने और सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण जैसे कार्यों पर अधिक ध्यान देने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि इस बदलाव के लिए एक बड़ा बजट निर्धारित किया गया है, ताकि रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सके और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति दी जा सके।

    हालांकि इन दावों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में इस तरह का कोई नया कानून या अधिनियम लागू किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ग्रामीण रोजगार की मौजूदा व्यवस्था एक स्थापित कानून के तहत संचालित होती है, जो लंबे समय से देश के ग्रामीण परिवारों को रोजगार सुरक्षा प्रदान कर रही है। इस प्रणाली में किसी बड़े बदलाव के लिए संसद की प्रक्रिया, कानूनी मंजूरी और औपचारिक अधिसूचना आवश्यक होती है। लेकिन इस कथित नए ढांचे को लेकर ऐसी किसी भी आधिकारिक प्रक्रिया की स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है।

    इसी कारण विशेषज्ञ इस तरह की खबरों को लेकर सतर्क रहने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि रोजगार से जुड़ी योजनाएं सीधे तौर पर करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ी होती हैं, इसलिए किसी भी बदलाव की जानकारी केवल प्रमाणिक और आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही मानी जानी चाहिए। बिना पुष्टि के फैलने वाली जानकारी अक्सर भ्रम पैदा करती है और लोगों के बीच गलतफहमी को जन्म देती है।

    ग्रामीण विकास नीतियों का उद्देश्य हमेशा से यही रहा है कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ें और लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम मिल सके, ताकि शहरों की ओर पलायन कम हो। ऐसे में किसी भी नई योजना या सुधार का असली प्रभाव तभी समझा जा सकता है जब वह पूरी तरह लागू हो और उसके परिणाम सामने आएं।

    फिलहाल यह मामला दावों और चर्चाओं के बीच बना हुआ है, और जब तक किसी आधिकारिक घोषणा या ठोस दस्तावेज के माध्यम से इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे केवल एक अपुष्ट जानकारी के रूप में ही देखा जा सकता है।

  • वित्तीय साक्षरता शिविर में पहुंचकर आरबीआई गवर्नर ने दिया आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश

    वित्तीय साक्षरता शिविर में पहुंचकर आरबीआई गवर्नर ने दिया आर्थिक सशक्तिकरण का संदेश

    नई दिल्ली। देहरादून जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम के दौरान आर्थिक जागरूकता और वित्तीय सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े लोगों को वित्तीय प्रणाली की बुनियादी समझ देना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना था।

    कार्यक्रम के दौरान यह बात विशेष रूप से सामने रखी गई कि आज के समय में आर्थिक स्थिरता केवल बचत पर निर्भर नहीं है, बल्कि सही जानकारी और योजनाओं के उपयोग पर भी आधारित है। लोगों को बताया गया कि पेंशन और बीमा जैसी योजनाएं भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हर नागरिक को इनके बारे में जागरूक होना चाहिए।

    इस अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। यह भी कहा गया कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक बैंकिंग और वित्तीय सुविधाएं सरल तरीके से पहुंचनी चाहिए, ताकि वे मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जुड़ सकें।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने अपने स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन भी किया। उनके प्रयासों की सराहना करते हुए यह संदेश दिया गया कि ऐसे समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और इन्हें और अधिक प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है।

    लोगों को यह भी समझाया गया कि वित्तीय जानकारी को केवल व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों के साथ भी साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें।

    इस दौरान बैंकिंग सेवाओं को आसान बनाने के लिए मौके पर ही कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे लोगों को सीधे लाभ मिला। छोटे स्तर पर नकद और सिक्कों के आदान-प्रदान जैसी सेवाओं ने भी ग्रामीण लोगों के लिए सुविधा का काम किया।

    इसके अलावा, वित्तीय सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए मोबाइल बैंकिंग जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया, जिससे लोगों को अपने क्षेत्र में ही बैंकिंग सेवाएं प्राप्त हो सकें।

    कार्यक्रम में विभिन्न वित्तीय संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और वित्तीय समावेशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि वित्तीय शिक्षा ही एक मजबूत और आत्मनिर्भर समाज की नींव है।

  • दमोह में गौशालाओं की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए 25 अप्रैल को अहम बैठक

    दमोह में गौशालाओं की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए 25 अप्रैल को अहम बैठक


    दमोह, 24 अप्रैल:
    जिले में संचालित गौशालाओं की व्यवस्था को बेहतर और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में विभिन्न गौशालाओं के निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर व्यवस्थाओं में खामियां सामने आईं, जिन्हें सुधारने के लिए अब ठोस रणनीति तैयार की जा रही है।

    इसी क्रम में कलेक्टर ने 25 अप्रैल को गौशाला संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस बैठक में गौशालाओं के संचालन, उपलब्ध संसाधनों, साफ-सफाई, पशुओं के स्वास्थ्य, चारे-पानी की व्यवस्था और गौवंश की समुचित देखभाल जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कई गौशालाओं में मूलभूत सुविधाओं की कमी है, जिससे गौवंश के रखरखाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रशासन अब इन कमियों को दूर करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने जा रहा है, ताकि हर गौशाला में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

    कलेक्टर श्री यादव ने आमजन से भी इस पहल में सहभागिता की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से ही गौशालाओं की व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। नागरिक अपने सुझाव देकर इस अभियान को मजबूत बना सकते हैं।

    प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य है कि जिले की सभी गौशालाओं में गौ माताओं को बेहतर सुविधा, पर्याप्त पोषण और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी देखभाल उच्च स्तर पर सुनिश्चित हो सके।

  • ग्रामीण धरोहरों को विकास का आधार बनाने के लिए विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्र!

    ग्रामीण धरोहरों को विकास का आधार बनाने के लिए विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्र!

    नई दिल्ली। वर्ल्ड हेरिटेज डे के अवसर पर नई दिल्ली में ग्रामीण धरोहर संरक्षण और सतत विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें देश की सांस्कृतिक और ग्रामीण विरासत को बचाने और उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर यह विचार प्रमुख रूप से सामने आया कि धरोहर केवल ऐतिहासिक पहचान नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का एक मजबूत आधार भी हो सकती है। कार्यक्रम में पिछले कई वर्षों में किए गए प्रयासों और ग्रामीण क्षेत्रों में धरोहर संरक्षण से जुड़े कार्यों की समीक्षा भी की गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते समय में धरोहर संरक्षण को नई चुनौतियों के अनुरूप ढालना आवश्यक है ताकि इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में धरोहर संरक्षण के लिए मजबूत कानूनी प्रावधान मौजूद हैं लेकिन असली चुनौती उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर जागरूकता की कमी और संवेदनशीलता का अभाव देखा जाता है जिससे ऐतिहासिक स्थलों और ग्रामीण विरासत को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वहां धरोहर को संरक्षित करने के लिए अधिक सक्रिय प्रयासों की आवश्यकता है ताकि स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक परंपराएं सुरक्षित रह सकें।

    संस्था के अध्यक्ष ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ग्रामीण धरोहर को केवल संरक्षण की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इसे स्थानीय विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने बताया कि संस्था पिछले कई वर्षों से उपेक्षित धरोहर स्थलों को पुनर्जीवित करने और उन्हें स्थानीय समुदायों के साथ जोड़ने के लिए कार्य कर रही है। उनका मानना है कि जब स्थानीय लोग अपनी विरासत से जुड़ते हैं तो उसका संरक्षण स्वाभाविक रूप से मजबूत होता है और यह क्षेत्रीय विकास में भी योगदान देता है।

    कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को भी साझा किया गया जिसमें बताया गया कि कई देशों में धरोहर संरक्षण में समुदाय की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह देखा गया कि जब लोग अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं तो धरोहर अधिक सुरक्षित रहती है और पीढ़ियों तक आगे बढ़ती है। इस दौरान यह भी कहा गया कि धरोहर केवल भौतिक संरचनाओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें ज्ञान परंपराएं, सामाजिक मूल्य और सांस्कृतिक भावनाएं भी शामिल हैं जिन्हें संरक्षित करना आवश्यक है।

    चर्चा में यह बात भी सामने आई कि भारत की ग्रामीण धरोहर जिसमें पारंपरिक खेती, हस्तशिल्प, लोक कलाएं और स्थानीय भाषाएं शामिल हैं अभी भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाई हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि यदि इन संसाधनों को आर्थिक अवसरों से जोड़ा जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और सतत विकास को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की बड़ी ग्रामीण आबादी को ध्यान में रखते हुए धरोहर आधारित विकास मॉडल अपनाना समय की आवश्यकता है।

    कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया और कहा गया कि नई पीढ़ी को धरोहर से जोड़ना और उनके भीतर सांस्कृतिक जागरूकता विकसित करना भविष्य के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर यह भी कहा गया कि धरोहर संरक्षण केवल सरकारी या संस्थागत जिम्मेदारी नहीं है बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।

  • किसान क्रेडिट कार्ड योजना से किसानों की आर्थिक स्थिति में आया बड़ा बदलाव शिवराज सिंह चौहान

    किसान क्रेडिट कार्ड योजना से किसानों की आर्थिक स्थिति में आया बड़ा बदलाव शिवराज सिंह चौहान

    रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव 2026 के अंतिम दिन किसान सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना ने देश के किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने इस योजना को किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बताते हुए कहा कि इससे किसानों को समय पर सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध हो रहा है, जिससे वे खेती से जुड़े आवश्यक कार्य बिना आर्थिक दबाव के कर पा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि इस महोत्सव का उद्देश्य केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं और कृषि क्षेत्र में हो रहे नए नवाचारों से अवगत कराना भी है। किसानों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत उपकरणों और नई कृषि पद्धतियों की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहले किसानों को खाद और बीज जैसी आवश्यकताओं के लिए ऊंचे ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता था, जिससे उनकी पूरी फसल का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में ही चला जाता था। ऐसे में किसान क्रेडिट कार्ड योजना ने इस समस्या का समाधान किया है और किसानों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।

    उन्होंने कृषि अवसंरचना को मजबूत करने पर भी जोर देते हुए कहा कि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड जैसी योजनाएं किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही हैं। इसके माध्यम से भंडारण, प्रसंस्करण और अन्य कृषि सुविधाओं का विकास हो रहा है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल पा रहा है।

    साथ ही प्रधानमंत्री कुसुम योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को सोलर पंप और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए पर्याप्त सब्सिडी दी जा रही है। इससे न केवल ऊर्जा लागत में कमी आ रही है बल्कि किसान स्वच्छ ऊर्जा की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में किसान योजनाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पाते, इसलिए जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

    किसान सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण की भी झलक देखने को मिली, जहां किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने उत्पादों और नवाचारों के माध्यम से विशेष पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा कि ये महिलाएं अपनी मेहनत और उद्यमशीलता से न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही हैं।

    महोत्सव के दौरान आधुनिक तकनीक, नवाचार और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर विशेष जोर दिया गया, जिससे खेती को एक नई दिशा मिल रही है। यह आयोजन किसानों के लिए नए अवसरों और संभावनाओं का मंच बनकर उभरा है, जहां वे भविष्य की कृषि के लिए तैयार हो रहे हैं।

  • मध्यप्रदेश कैबिनेट में 286.26 करोड़ की मीडवासा सिंचाई परियोजना को मिली मंजूरी..

    मध्यप्रदेश कैबिनेट में 286.26 करोड़ की मीडवासा सिंचाई परियोजना को मिली मंजूरी..

    भोपाल। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी राज्य के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में बड़े स्तर पर विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से कई योजनाओं और परियोजनाओं को स्वीकृति दी है, जिससे प्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

    कैबिनेट बैठक में सागर जिले की मीडवासा मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 286.26 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना से क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और किसानों को कृषि उत्पादन में सीधा लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस तरह की परियोजनाओं से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    इसके साथ ही प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन के लिए 2250 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना के तहत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा, जिससे उत्पादन क्षमता और दक्षता में वृद्धि हो सके।

    महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, वन स्टॉप सेंटर योजना और महिला हेल्पलाइन 181 के संचालन के लिए 240.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत प्रदेश में आठ नए वन स्टॉप सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे महिलाओं को आपातकालीन सहायता और सुरक्षा सेवाएं और अधिक सुलभ हो सकेंगी।

    इसके अलावा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1005 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही प्रदेश में नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना के लिए 1674 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए 3553.35 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना और विकास कार्यों को गति मिलेगी। वहीं लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों के लिए 10801 करोड़ रुपये की बड़ी राशि को मंजूरी प्रदान की गई है, जिससे सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाएगा।

    कैबिनेट बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को शीघ्र लागू करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाने के निर्णय का स्वागत किया गया है। राज्य सरकार ने इस पहल के लिए आभार व्यक्त किया है।

    कैबिनेट के इन निर्णयों को प्रदेश के समग्र विकास, महिला सशक्तिकरण, कृषि आधुनिकीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में व्यापक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

  • भोपाल में अभिमुखीकरण प्रशिक्षण का समापन, मंत्री पटेल ने अधिकारियों को दिए प्रभावी प्रशासन के मंत्र

    भोपाल में अभिमुखीकरण प्रशिक्षण का समापन, मंत्री पटेल ने अधिकारियों को दिए प्रभावी प्रशासन के मंत्र

    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबन्ध संस्थान में नवागत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत और विकास खंड अधिकारियों के अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और नवनियुक्त अधिकारियों से सीधा संवाद किया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री पटेल ने अधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्यशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्षों में ऐसा कार्य करें जिससे उन्हें स्वयं संतुष्टि प्राप्त हो सके। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आपकी आत्मसंतुष्टि ही इस बात का प्रमाण होगी कि आपने आमजन के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण का भाव रखने की प्रेरणा दी।

    मंत्री पटेल ने अधिकारियों से उनके कार्यक्षेत्र भविष्य की योजनाओं और संभावित चुनौतियों को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रशासन में निरंतर संवाद अत्यंत आवश्यक है क्योंकि संवाद ही बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है और इससे पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ती है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सलाह दी कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और आम जनता के साथ सतत संवाद बनाए रखें ताकि योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

    उन्होंने आगे कहा कि कई बार व्यक्ति यह सोचता है कि वह सभी कार्य कर सकता है जो एक सकारात्मक सोच है लेकिन बेहतर परिणाम तब मिलते हैं जब व्यक्ति अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कार्य करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर कार्य को स्पष्ट लक्ष्य मजबूत योजना और टीम वर्क के साथ किया जाए तो सफलता निश्चित होती है।

    इस दौरान नव नियुक्त अधिकारियों ने प्रशिक्षण अवधि के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि पिछले 45 दिनों में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने और जमीनी स्तर पर काम करने के व्यावहारिक पहलुओं को सीखने का अवसर दिया। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कराया गया जिससे उन्हें वास्तविक परिस्थितियों और चुनौतियों को समझने में मदद मिली।

    अधिकारियों ने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने कार्य की रूपरेखा तैयार करने और भविष्य में बेहतर तरीके से जिम्मेदारी निभाने की दिशा में मार्गदर्शन मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    कार्यक्रम के समापन अवसर पर मंत्री श्री पटेल ने सभी नवनियुक्त अधिकारियों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने का माध्यम बना बल्कि अधिकारियों को जनहित में कार्य करने की नई दृष्टि और ऊर्जा भी प्रदान कर गया।

  • पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

    पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की ताज़ा कड़ी में देशवासियों से जल संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों में जागरूकता पैदा की है और अब गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण के प्रयास शुरू हो गए हैं। पीएम मोदी ने विशेष रूप से बताया कि अमृत सरोवर अभियान के तहत देशभर में लगभग 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं और बारिश से पहले उनकी साफ-सफाई भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के गांवों में हुए प्रेरक प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे छोटे प्रयास बड़े बदलाव की ओर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में वांगमुन गांव 3000 फीट की ऊंचाई पर बसा है और वहां पहले पानी की कमी गंभीर समस्या थी। गर्मियों में गांव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे। लेकिन गांववासियों ने मिलकर बारिश का पानी सहेजने का संकल्प लिया और अब लगभग हर घर में ‘रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ स्थापित है। यह गांव जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।

    छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी किसानों ने छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाकर बारिश के पानी को खेतों में रोकने और धीरे-धीरे जमीन में जाने का असर सुनिश्चित किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपनाकर अपने क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने में सफल रहे हैं। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव के लोगों ने मिलकर अपने घरों में सोख गड्ढे बनाए और जल संरक्षण का एक जन-आंदोलन खड़ा किया। इससे गांव का भूजल स्तर सुधरा है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों में भी कमी आई है।

    पीएम मोदी ने कहा कि जल संकट से निपटना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा और गांव-गांव में इस दिशा में किए गए छोटे प्रयासों को पूरे देश में प्रेरणा के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के इलाकों में जल संचयन के उपाय अपनाएं और जल को बचाने के लिए अपनी आदतों में बदलाव लाएं।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले 11 साल में जल संचय अभियान और अमृत सरोवर जैसी पहलें देशभर में व्यापक रूप से फैल चुकी हैं। अब हर क्षेत्र में जल संरक्षण की नई मिसालें बन रही हैं और ये अनुभव अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि जल हमारी जीवनधारा है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की बात कही कि जल संरक्षण के प्रयास केवल योजनाओं तक सीमित न रहें बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली में भी इसका पालन किया जाए।