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  • बैतूल के घोघरा में चार साल से बंद नल-जल योजना, ग्रामीण नदी और कुएं पर निर्भर

    बैतूल के घोघरा में चार साल से बंद नल-जल योजना, ग्रामीण नदी और कुएं पर निर्भर

    बैतूल । बैतूल जिले के आदिवासी बहुल भीमपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत चोहटा पोपटी के अंतर्गत आने वाले ग्राम घोघरा में नल-जल योजना पिछले चार वर्षों से ठप पड़ी हुई है। इस वजह से ग्रामीणों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए आज भी प्राकृतिक स्रोतों नदी और कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

    स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि योजना के तहत बोरवेल और ट्यूबवेल का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके साथ ही पाइपलाइन बिछा दी गई है और संपवेल का निर्माण भी तैयार है। बावजूद इसके योजना को शुरू नहीं किया गया है जिससे गांव के लोग अब भी कठिन परिस्थितियों में जलापूर्ति के लिए प्रयासरत हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि पानी की कमी खासकर गर्मियों में गंभीर रूप ले लेती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन गई है। पंचायत और स्थानीय प्रशासन से बार-बार संपर्क के बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

    वहीं ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि संबंधित विभाग जल्द ही इस योजना को चालू करके गांव में सुरक्षित और नियमित पेयजल की सुविधा सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि योजना शुरू होने से ग्रामीणों का जीवन आसान होगा और स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से भी राहत मिलेगी।

  • मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 33,240 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी, मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स प्रोग्राम शुरू होगा

    मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 33,240 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी, मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स प्रोग्राम शुरू होगा


    भोपाल। मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के विकास और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंत्रि परिषद ने विभिन्न विभागों की योजनाओं को आगामी पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए करीब 33 हजार 240 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की।

    बैठक में युवाओं को प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम को मंजूरी दी गई। इस योजना के तीन वर्ष के क्रियान्वयन के लिए लगभग 190 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कार्यक्रम के तहत युवाओं को शासन प्रशासन की कार्यप्रणाली से जोड़कर नीति निर्माण और सुशासन की प्रक्रियाओं में भागीदारी का अवसर दिया जाएगा।

    कैबिनेट ने मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम 1995 के तहत दिव्यांगजनों को वृत्तिकर से दी जा रही छूट को 31 मार्च 2030 तक जारी रखने का भी निर्णय लिया। इससे प्रदेश के हजारों दिव्यांग नागरिकों को आर्थिक राहत मिलती रहेगी।

    प्रदेश में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक जिला एक उत्पाद परियोजना के तहत सात जिलों को शामिल करने का निर्णय लिया गया। इसमें सीधी में दरी कारपेट दतिया में गुड़ अशोकनगर में चंदेरी हाथकरघा वस्त्र भोपाल में जरी जरदोजी और जूट उत्पाद धार में बाग प्रिंट सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इस परियोजना के लिए आगामी पांच वर्षों में 37.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे जिससे स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को प्रशिक्षण ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।

    न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सिंगरौली जिले के चितरंगी में व्यवहार न्यायालय स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है। इसके तहत कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित कुल सात नए पदों का सृजन किया जाएगा।

    स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए मैहर कैमोर कटनी और निमरानी खरगोन में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तीन नए औषधालय खोलने का निर्णय लिया गया है। इन औषधालयों के लिए चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के 51 पद स्वीकृत किए गए हैं। इससे लगभग 15 686 पंजीकृत श्रमिकों और उनके करीब 62 744 आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

    कैबिनेट ने ग्रामीण और खनिज क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भी बड़ा फैसला लिया। खनिज अधिभार निधि के तहत ग्रामीण अवसंरचना पेयजल आपूर्ति और सड़क विकास कार्यों के लिए 6 090 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।

    इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 7 127 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की 10 योजनाओं के लिए 2 064 करोड़ रुपये जनजातीय कार्य विभाग की योजनाओं के लिए 1 645 करोड़ रुपये और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के लिए 3 773 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।

    उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई विभाग की निवेश संवर्धन और स्टार्ट अप नीति के क्रियान्वयन हेतु 11 361 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। इन फैसलों को प्रदेश के आर्थिक विकास रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्य तिथि पर किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न नानाजी देशमुख की पुण्य तिथि पर किया नमन


    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राष्ट्रसेवक और महान समाज सुधारक नानाजी देशमुख की पुण्य तिथि पर उन्हें विनम्र नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि भारत रत्न से सम्मानित स्वर्गीय नानाजी देशमुख ने देश की प्रगति के लिए ग्रामीण विकास शिक्षा और गरीब कल्याण को आधार बनाया। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की धारा पहुंचाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नानाजी देशमुख का कृतित्व उनके विचार और दूरदर्शी दृष्टिकोण राष्ट्र के नव निर्माण की दिशा में सदैव प्रेरणादायी रहेंगे। उन्होंने ग्रामोदय से राष्ट्रोदय की परिकल्पना को साकार करने के लिए जो कार्य किए वे आज भी प्रासंगिक हैं और आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देते रहेंगे।डॉ. यादव ने ईश्वर से प्रार्थना की कि हम सभी नानाजी देशमुख के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

  • मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत किया संतुलित विकास का आदर्श उदाहरण: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, जीडीपी में 11.14% वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,69,050 रुपये

    मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत किया संतुलित विकास का आदर्श उदाहरण: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, जीडीपी में 11.14% वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,69,050 रुपये


    भोपाल । मध्यप्रदेश ने अपनी दूरदर्शी आर्थिक नीतियों और योजनाबद्ध विकास रणनीतियों के जरिए संतुलित और समावेशी विकास का आदर्श प्रस्तुत किया है। उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश करते हुए कहा कि राज्य योजनाबद्ध, संतुलित और परिणामोन्मुख विकास पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि, उद्योग, सेवा, सामाजिक क्षेत्र और वित्तीय अनुशासन हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति हुई है।

    देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत को विश्व की मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश पूरी क्षमता से योगदान दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य ने जो आर्थिक सुधारात्मक कदम उठाए, उनके परिणाम दिखाई देने लगे हैं।

    आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद GSDP प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 15,02,428 करोड़ रुपये की तुलना में 11.14 प्रतिशत अधिक है। स्थिर 2011-12 भाव पर GSDP 7,81,911 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय प्रचलित भाव में 1,69,050 रुपये और स्थिर भाव में 76,971 रुपये तक बढ़ गई है।

    प्राथमिक क्षेत्र में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 6,79,817 करोड़ रुपये रहा, जिसमें फसलें 30.17 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख रहीं। पशुधन, वानिकी, मत्स्य एवं खनन ने भी योगदान दिया। कृषि एवं ग्रामीण विकास के मोर्चे पर फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत तथा खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत वृद्धि हुई। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन और 72,975 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण से ग्रामीण आधार मजबूत हुआ।

    द्वितीयक क्षेत्र का GSVA 3,12,350 करोड़ रुपये रहा, जिसमें निर्माण, विनिर्माण और उपयोगी सेवाओं का योगदान प्रमुख रहा। इस क्षेत्र में 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिससे ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार सृजित हुए। वर्ष 2024-25 में MSME सहायता 2,162 करोड़ रुपये रही। स्टार्टअप्स और इनक्यूबेशन केंद्र सक्रिय हैं, जबकि CSR व्यय 600.47 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    तृतीयक क्षेत्र ने सर्वाधिक तेज वृद्धि दिखाई। वर्ष 2025-26 में इसका GSVA 5,85,588 करोड़ रुपये रहा, जिसमें व्यापार, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, होटल-रेस्टोरेंट और पर्यटन प्रमुख योगदानकर्ता रहे। 13.18 करोड़ पर्यटकों की आवक इस क्षेत्र की गति को दिखाती है।

    वित्तीय अनुशासन में सुधार भी दिखा; राजस्व 618 करोड़ रुपये बढ़ा और ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहा। नगरीय विकास के तहत AMRUT 2.0 में 4,065 करोड़ रुपये का आवंटन और 1,134 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत 8.75 लाख आवास पूरे हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र में 34,112 करोड़ रुपये खर्च किए गए और मातृ मृत्यु दर घटकर 142 प्रति लाख जन्म रह गई।

    शिक्षा एवं कौशल विकास में बजट का 10.37 प्रतिशत आवंटित किया गया। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट शून्य और कक्षा 6-8 में 6.3 प्रतिशत रह गया। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई और 45,668 विद्यार्थियों को 500 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। देवड़ा ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित रही, लेकिन उद्योग और सेवा क्षेत्र में भी संतुलित विस्तार हुआ है, जिससे मध्यप्रदेश ने संतुलित विकास का आदर्श प्रस्तुत किया है।

  • सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण

    सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण


    सीधी । सोशल मीडिया के दौर में अगर आवाज बुलंद हो और इरादे मजबूत हों तो बदलाव मुमकिन हैयह साबित कर दिखाया है सीधी जिले की यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर लीला साहू ने। वर्षों से खराब सड़क को लेकर संघर्ष कर रहीं लीला की मांग अब पूरी हो गई है। सड़क निर्माण का काम शुरू होते ही गांव में खुशी और उत्साह का माहौल है।

    जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर ग्राम खड्डी से बैगहा टोला तक करीब 10 किलोमीटर का यह सड़क मार्ग वर्षों से बदहाल स्थिति में था। खासकर बरसात के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते थे कि गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल ले जाना मानो टेढ़ी खीर बन गया था। इसी दुर्दशा को लेकर लीला साहू ने सोशल मीडिया को हथियार बनाया और सड़क की सच्चाई देश-दुनिया के सामने रखी।

    लीला साहू ने सड़क की बदहाली को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जो देखते ही देखते वायरल हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री तक गुहार लगाई वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसदों पर भी नाराजगी जाहिर की थी। उनके वीडियो ने न सिर्फ प्रशासन का ध्यान खींचा बल्कि यह मुद्दा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।

    अब जब सड़क निर्माण कार्य शुरू हो गया है तो लीला साहू ने गांव वालों के साथ खुशी जाहिर करते हुए एक बार फिर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उन्होंने प्रदेश के मुखिया स्थानीय सांसद और मीडिया का धन्यवाद किया है। उनका कहना है कि यह जीत अकेले उनकी नहीं बल्कि पूरे गांव की है जिसने वर्षों तक कठिनाइयों का सामना किया।

    ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क बनने से अब उन्हें शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। बच्चों को स्कूल पहुंचने में आसानी होगी और आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना सरल होगा। गांव में विकास की नई उम्मीद जगी है।

    लीला साहू की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब आम नागरिक अपनी बात मजबूती से और सही मंच पर रखता है तो सिस्टम को भी सुनना पड़ता है। सोशल मीडिया की ताकत और जनआवाज ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बदलाव संभव है।

  • नर्मदा परिक्रमा पथ पर आश्रय स्थलों पर होगा व्यापक वृक्षारोपण: मंत्री प्रहलाद पटेल..

    नर्मदा परिक्रमा पथ पर आश्रय स्थलों पर होगा व्यापक वृक्षारोपण: मंत्री प्रहलाद पटेल..


    नई दिल्ली। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने नर्मदा परिक्रमा पथ पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आश्रय स्थलों पर व्यापक वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए। यह निर्णय राज्य स्तरीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिया गयाजिसकी अध्यक्षता मंत्री श्री पटेल ने की। बैठक में जीवनदायिनी माँ नर्मदा के जल संरक्षणप्रवाह को अविरल बनाए रखने और नर्मदा से जुड़े समग्र विकास कार्यों पर विशेष चर्चा हुई।

    बैठक में सर्वश्री छोटे सिंहदिनेश जैनश्रीमती हर्षिका सिंहश्री अविप्रसाद और श्री दीपक आर्य उपस्थित रहे। मंत्री श्री पटेल ने अधिकारियों को परिक्रमा पथ पर प्रस्तावित पुलपुलिया और ब्रिज का शीघ्र सर्वेक्षण करने और सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।इसके साथ ही बैठक में विधानसभा से संबंधित लंबित प्रकरणों की विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा की गई। मंत्री ने सभी लंबित प्रकरणों के त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दियाताकि जनहित से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान हो सके।

    मंत्री श्री पटेल ने यह भी कहा कि माँ नर्मदा के संरक्षण और विकास को जनभागीदारी से जोड़ना बेहद आवश्यक है। उन्होंने नर्मदा परिक्रमा पथ के विकासपर्यावरण संरक्षण और आश्रय स्थलों पर वृक्षारोपण की गतिविधियों में स्थानीय जनता और समुदायों को सक्रिय रूप से शामिल करने पर जोर दिया।

    बैठक में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयनपर्यावरणीय संरक्षण और जल संरक्षण के उपायों पर विशेष बल दिया गया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विकास कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।इस बैठक से स्पष्ट संदेश गया कि नर्मदा परिक्रमा पथ का विकास केवल भौतिक संरचना तक सीमित नहीं होगा बल्कि पर्यावरण संरक्षणजल सुरक्षा और जनभागीदारी के माध्यम से इसे समग्र और सतत बनाया जाएगा

  • अब तक 1.57 लाख ग्रामीण कृषकों को मात्र 5 रुपये में मिला नया विद्युत कनेक्शन

    अब तक 1.57 लाख ग्रामीण कृषकों को मात्र 5 रुपये में मिला नया विद्युत कनेक्शन


    भोपाल ।मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने कार्यक्षेत्र में ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को अब मात्र 5 रुपये में स्थायी घरेलू एवं कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध करा रही है। दिसंबर 2024 से यह योजना शुरू हुई है तब से अब तक इस योजना का लाभ 01 लाख 57 हजार 359 ग्रामीण कृषकों को मिल चुका है। इनमें से 58 हजार 711 घरेलू तथा 98 हजार 648 कृषि पंप कनेक्शन शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू तथा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिये ऐसे कृषक जो विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं उनको सुविधानुसार आसानी से स्थाई कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है।

    नवीन घरेलू एवं कृषि पंप के लिये स्थायी विद्युत कनेक्शन का आवेदन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। इसके लिए portal.mpcz.in पर मांगी गई आवश्यक जानकारी देनी होती है। अधिक जानकारी के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

  • लोकसभा में हंगामे के बीच VB–G Ram G बिल पास, विपक्ष ने फाड़े कागज और किया नारेबाजी

    लोकसभा में हंगामे के बीच VB–G Ram G बिल पास, विपक्ष ने फाड़े कागज और किया नारेबाजी


    नई दिल्ली/18 दिसंबर 2025 को लोकसभा में एक बार फिर हंगामे का माहौल देखने को मिला। भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानी VB–G Ram G बिल पर मतदान के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया। विरोध के स्वर इतना तेज थे कि कई सांसद वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे और बिल से जुड़े कागज फाड़कर सदन में फेंक दिए। इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।

    विपक्ष का कड़ा विरोध
    विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस अहम बिल को पर्याप्त चर्चा और बहस के बिना जल्दबाजी में पास करवा दिया। उनका कहना था कि ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक और खुली बहस आवश्यक थी। हंगामे के दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी कर रहे थे और सदन की कार्यवाही बाधित होती रही।विपक्ष का मुख्य आरोप यह भी था कि विधेयक पारित करते समय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और पारदर्शिता की अनदेखी की गई। विपक्ष ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य भले ही ग्रामीण रोजगार सृजन और आजीविका बढ़ाना है, लेकिन इसे बिना पर्याप्त चर्चा के पास कराना संसद की गरिमा के खिलाफ है।

    कृषि मंत्री का जवाब
    बिल पर चर्चा के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री ने कहा, हम किसी से भेदभाव नहीं करते। बापू हमारी प्रेरणा और श्रद्धा हैं। हमारे लिए पूरा देश एक है। देश केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है।
    उन्होंने आगे बताया कि सरकार का उद्देश्य हर जरूरतमंद तक रोजगार और आजीविका के अवसर पहुंचाना है। इस बिल के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लाखों ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे।

    सदन में बढ़ता हंगामा और स्थगन

    मंत्री के जवाब के बावजूद विपक्ष का विरोध कम नहीं हुआ। सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी और कई ने कागज फाड़कर सदन में फेंक दिए। लगातार हंगामे के चलते स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित करने का फैसला किया। यह स्थिति यह दर्शाती है कि बिल का पारित होना राजनीतिक तौर पर कितनी संवेदनशील स्थिति पैदा कर गया है।

    राजनीतिक सरगर्मी तेज

    VB–G Ram G बिल के पारित होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। जहां सरकार इसे ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस बिल को लेकर संसद के बाहर भी राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस बिल के प्रभाव और इसके क्रियान्वयन की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आजीविका के अवसर और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बिल का क्रियान्वयन प्रभावी और पारदर्शी होना चाहिए।VB–G Ram G बिल न केवल ग्रामीण भारत के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि यह संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया, बहस और राजनीतिक गतिशीलता का उदाहरण भी बन गया है। यह देखना रोचक होगा कि अगले हफ्तों में इस बिल को लेकर क्या नीति और क्रियान्वयन कदम उठाए जाते हैं।