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  • करैरा में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ा, शहर काजी पर हमला होने से लोगों में दहशत..

    करैरा में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ा, शहर काजी पर हमला होने से लोगों में दहशत..


    शिवपुरी जिले: के करैरा नगर में बंदरों और आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से स्थानीय नागरिक परेशान हैं। बंदरों के झुंड घरों, छतों और गलियों में उत्पात मचा रहे हैं, जबकि आवारा कुत्तों के समूहों के कारण लोगों को सड़कों पर आने-जाने में परेशानी हो रही है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि काजी मोहल्ले में शहर काजी मंजरे आलम पर बंदरों ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घटना के बाद नगर में लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    जानकारी के अनुसार, शहर काजी मंजरे आलम अपने घर के आंगन में बैठे थे। इसी दौरान पीछे से आए बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। बंदरों ने उनके शरीर के कई हिस्सों में काटकर उन्हें घायल कर दिया। घर के आंगन में हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नागरिकों का कहना है कि जब लोग अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं, तो सार्वजनिक स्थानों पर उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, करैरा में लगभग 20 से 25 बंदरों का झुंड अलग-अलग इलाकों में घूमता रहता है। ये बंदर सुबह और शाम के समय गलियों तथा घरों की छतों पर अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं। लोगों की शिकायत है कि बंदर सामान उठाकर फेंक देते हैं, महिलाओं के हाथों से थैलियां छीन लेते हैं और बच्चों के पीछे दौड़ते हैं। इस वजह से परिवारों को लगातार सतर्क रहना पड़ता है।

    बंदरों के साथ-साथ आवारा कुत्तों की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। नगर की कई गलियों और सड़कों पर कुत्तों के झुंड दिखाई देने से राहगीरों में डर बना रहता है। बच्चों को अकेले स्कूल भेजने में अभिभावक संकोच कर रहे हैं, जबकि बुजुर्गों को मंदिरों और पार्कों तक जाने में परेशानी हो रही है। स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, शाम के समय महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

    पिछले कुछ दिनों में कुत्तों के काटने की कई घटनाएं सामने आने की बात भी कही गई है। समस्या तब और बढ़ जाती है, जब पीड़ितों को इलाज के लिए जरूरी एंटी रेबीज इंजेक्शन स्थानीय अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने की शिकायत मिलती है। ऐसी स्थिति में लोगों को उपचार के लिए शिवपुरी जाना पड़ता है। कुत्ते के काटने के बाद समय पर चिकित्सा और रेबीज से बचाव के लिए टीकाकरण बेहद जरूरी होता है, इसलिए स्थानीय स्तर पर उपचार की उपलब्धता भी नागरिकों की प्रमुख चिंता है।

    नागरिकों का आरोप है कि बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर नगर परिषद और सीएम हेल्पलाइन पर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन उन्हें अब तक ठोस कार्रवाई के बजाय आश्वासन ही मिले हैं। लोगों का कहना है कि समस्या लगातार बनी रहने से बच्चों, बुजुर्गों और अन्य राहगीरों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।

    स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनकी मांग है कि बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और उचित स्थान पर पहुंचाने के लिए वन विभाग की टीम की मदद ली जाए तथा जरूरत के अनुसार पिंजरे लगाए जाएं। आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नसबंदी और टीकाकरण अभियान भी शुरू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कुत्तों के काटने के मामलों को देखते हुए अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। अब नगरवासियों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग समस्या के समाधान के लिए कब ठोस कदम उठाते हैं।

  • पेट्रोल पंप का नोजल टंकी फुल होते ही अपने आप कैसे बंद हो जाता है, जानिए पूरी तकनीक

    पेट्रोल पंप का नोजल टंकी फुल होते ही अपने आप कैसे बंद हो जाता है, जानिए पूरी तकनीक

    नई दिल्ली । कार या बाइक में पेट्रोल-डीजल भरवाते समय आपने अक्सर देखा होगा कि फ्यूल टंकी भरते ही पेट्रोल पंप का नोजल अपने आप बंद हो जाता है। इस दौरान कर्मचारी को न तो कोई बटन दबाना पड़ता है और न ही मशीन को अलग से बंद करने की जरूरत होती है। नोजल का ट्रिगर अपने आप रिलीज हो जाता है और ईंधन का प्रवाह रुक जाता है। यह प्रक्रिया सामान्य दिखाई देती है, लेकिन इसके पीछे एक खास तकनीक काम करती है। इसे ऑटोमैटिक शट-ऑफ या ऑटो कट-ऑफ सिस्टम कहा जाता है।

    आधुनिक पेट्रोल पंपों पर इस्तेमाल होने वाले अधिकांश नोजल में यह व्यवस्था मौजूद होती है। इसका मुख्य उद्देश्य फ्यूल टंकी भर जाने पर ईंधन की सप्लाई को अपने आप रोकना है। इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह सामान्य तौर पर किसी इलेक्ट्रॉनिक सेंसर या बाहरी बिजली की मदद के बिना काम करता है। इसके बजाय इसमें हवा के दबाव और वैक्यूम के सिद्धांत का इस्तेमाल किया जाता है।

    नोजल की नोक के पास होता है छोटा छेद

    ऑटो कट-ऑफ सिस्टम को समझने के लिए नोजल की बनावट पर ध्यान देना जरूरी है। इसकी नोक के पास एक छोटा-सा छेद होता है, जो नोजल के भीतर मौजूद एक पतली ट्यूब से जुड़ा रहता है। ईंधन भरने के दौरान यह छेद हवा के प्रवाह में मदद करता है। नोजल के अंदर वेंचुरी प्रभाव के कारण दबाव में अंतर पैदा होता है, जो ऑटोमैटिक शट-ऑफ व्यवस्था को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    जब तक फ्यूल टंकी में पर्याप्त खाली जगह रहती है, तब तक नोजल की नोक के पास मौजूद छेद खुला रहता है। इस स्थिति में हवा का प्रवाह जारी रहता है और ईंधन लगातार टंकी में पहुंचता रहता है। जैसे-जैसे टंकी में पेट्रोल या डीजल का स्तर बढ़ता है, ईंधन नोजल की नोक के करीब आने लगता है। टंकी भरने पर ईंधन इस छोटे छेद को ढक देता है, जिससे हवा का रास्ता बंद हो जाता है।

    छेद बंद होते ही नोजल के अंदर दबाव की स्थिति बदल जाती है और वैक्यूम का प्रभाव बढ़ता है। यह बदलाव नोजल के भीतर मौजूद डायफ्राम को सक्रिय करता है। इसके बाद ट्रिगर को पकड़े रखने वाला मैकेनिज्म रिलीज हो जाता है। नतीजतन, नोजल का वाल्व बंद हो जाता है और पेट्रोल या डीजल की सप्लाई तुरंत रुक जाती है। इस तरह बिना किसी कर्मचारी के हस्तक्षेप के नोजल को पता चल जाता है कि टंकी भर चुकी है।

    ऑटो कट-ऑफ के बाद दोबारा न दबाएं ट्रिगर

    कई वाहन चालक नोजल के पहली बार अपने आप बंद होने के बाद भी उसमें से अतिरिक्त ईंधन भरने की कोशिश करते हैं। इसके लिए वे ट्रिगर को दोबारा दबाते हैं, ताकि टंकी में कुछ और पेट्रोल या डीजल भरा जा सके। हालांकि, ऐसा करने से बचना चाहिए। ऑटो कट-ऑफ सिस्टम का सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि ईंधन टंकी भरने के स्तर तक पहुंच चुकी है।

    जरूरत से ज्यादा ईंधन भरने की कोशिश करने पर पेट्रोल या डीजल बाहर छलक सकता है। इससे ईंधन की बर्बादी के साथ सुरक्षा संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकते हैं। इसलिए नोजल पहली बार अपने आप बंद हो जाए तो ईंधन भरना रोक देना बेहतर है।

    पेट्रोल पंप के नोजल में मौजूद यह व्यवस्था ईंधन भरने की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने में मदद करती है। हवा के प्रवाह, दबाव में बदलाव और वैक्यूम के सिद्धांत से काम करने वाला यह मैकेनिज्म टंकी भरने पर सप्लाई रोक देता है। यही वजह है कि पेट्रोल पंप कर्मचारी को हर वाहन की टंकी भरने पर मशीन को हाथ से बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती।

  • बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से टकराया पक्षी, सभी 148 यात्री सुरक्षित उतरे

    बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से टकराया पक्षी, सभी 148 यात्री सुरक्षित उतरे


    नई दिल्ली । विशाखापत्तनम से बेंगलुरु जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान IX2065 पक्षी से टकरा गई। घटना के बावजूद विमान ने अपनी यात्रा पूरी की और बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की। विमान में सवार सभी 148 यात्री सुरक्षित हैं। अधिकारियों के अनुसार, घटना में किसी यात्री या चालक दल के सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं मिली है।

    विमान के हवाई अड्डे पर उतरने के बाद उसे पार्किंग स्टैंड पर ले जाया गया। निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत ग्राउंड इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने विमान की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इस जांच का उद्देश्य पक्षी से टकराने के कारण विमान के बाहरी ढांचे, इंजन या अन्य तकनीकी हिस्सों को संभावित नुकसान का पता लगाना है। जांच पूरी होने के बाद ही विमान की स्थिति के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

    विमानन क्षेत्र में पक्षियों से टकराने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में विमान के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए सुरक्षित लैंडिंग के बाद भी तकनीकी निरीक्षण आवश्यक होता है। इस मामले में विमान ने बिना किसी अप्रिय घटना के बेंगलुरु में उतरकर अपनी यात्रा पूरी की। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित रही।

    यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी अन्य घटनाओं और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी नजर रखी जा रही है। इसी महीने फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान को सुरक्षा संबंधी अलर्ट के बाद जयपुर में उतारा गया था। उस विमान से कथित तौर पर ‘स्क्वॉक 7500’ संकेत प्रसारित हुआ था। विमानन क्षेत्र में यह कोड विमान अपहरण जैसी गंभीर सुरक्षा स्थिति का संकेत देता है।

    यह अलर्ट अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मिला था। इसके बाद विमान को जयपुर में सुरक्षित उतारा गया। हालांकि, उस समय संकेत जारी होने के वास्तविक कारणों के बारे में तत्काल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई थी। दोनों घटनाएं अलग-अलग परिस्थितियों से संबंधित हैं, लेकिन इनके बीच विमान संचालन और सुरक्षा प्रक्रियाओं का महत्व प्रमुख रूप से सामने आता है।

    इस बीच, पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा हालात का असर भारतीय विमानन कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ रहा है। कई एयरलाइंस ने सऊदी अरब के प्रमुख शहरों के लिए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित की हैं। इनमें रियाद, जेद्दा और दम्माम के साथ कुछ कंपनियों की मदीना जाने वाली उड़ानें भी शामिल हैं।

    एयर इंडिया ने रियाद, दम्माम और जेद्दा से आने-जाने वाली अपनी उड़ानें 20 अक्टूबर तक रद्द रखने की घोषणा की है। प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड दिया जा रहा है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी दम्माम, जेद्दा और रियाद की उड़ानों का निलंबन इसी तारीख तक बढ़ाया है। वहीं, इंडिगो ने इन तीन शहरों के अलावा मदीना की उड़ानें 24 अक्टूबर तक रद्द की हैं। अकासा एयर ने रियाद के लिए निलंबन 24 अक्टूबर और जेद्दा के लिए 21 अक्टूबर तक बढ़ाया है।

    एयरलाइंस ने कहा है कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और वे क्षेत्रीय हालात पर लगातार नजर रख रही हैं। बेंगलुरु में पक्षी से टकराने की घटना के बाद विमान की तकनीकी जांच जारी है, जबकि सभी 148 यात्रियों के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है।

  • दिवाली 2026 पर पटाखे खरीदना होगा महंगा, कच्चे माल की कीमतों और सप्लाई में देरी से 20% तक बढ़ सकते हैं दाम

    दिवाली 2026 पर पटाखे खरीदना होगा महंगा, कच्चे माल की कीमतों और सप्लाई में देरी से 20% तक बढ़ सकते हैं दाम

    नई दिल्ली । दिवाली का त्योहार नजदीक आने के साथ ही पटाखों की खरीदारी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हालांकि, इस बार आतिशबाजी के लिए लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी, जरूरी सामग्री की आपूर्ति में देरी और पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा जांच के कारण बाजार में पटाखों के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों के बजट पर पड़ सकता है।

    भारत में पटाखा उत्पादन का प्रमुख केंद्र तमिलनाडु का शिवकाशी है। यहां बड़ी मात्रा में पटाखे तैयार किए जाते हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी आपूर्ति होती है। इस साल पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और अन्य जरूरी सामग्रियों की कीमतें बढ़ने से निर्माताओं की उत्पादन लागत पर दबाव पड़ा है। कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, बढ़ती लागत के कारण कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है।

    पटाखों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सल्फर की कीमतों में भी उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इसकी कीमत एक समय 75 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 140 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। बाद में कीमत में कुछ गिरावट आई और यह लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। इसके बावजूद सल्फर की कीमत पहले के स्तर से अधिक बनी हुई है। इसके अलावा एल्युमिनियम, सोडियम नाइट्रेट और अन्य आवश्यक सामग्रियों की कीमतों में भी करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई गई है।

    कच्चे माल की महंगाई के साथ-साथ आपूर्ति में देरी भी पटाखा निर्माताओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग से जुड़ी बाधाओं के चलते सल्फर और चिपकाने वाले पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। जरूरी सामग्री समय पर नहीं पहुंचने से उत्पादन की प्रक्रिया में देरी होती है। इससे निर्माताओं को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। कारोबारियों का अनुमान है कि इन परिस्थितियों के कारण पटाखे बनाने की लागत में लगभग 15 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है।

    पटाखा उद्योग पर सुरक्षा नियमों के पालन का दबाव भी बढ़ा है। पिछले 10 महीनों के दौरान पटाखा फैक्ट्रियों में हुए 24 हादसों में 41 लोगों की मौत हुई और 39 लोग घायल हुए। इन घटनाओं के बाद 700 से अधिक इकाइयों का निरीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन की ओर से फैक्ट्रियों में सुरक्षा व्यवस्था की जांच तेज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि खतरनाक सामग्री से जुड़े कारोबार में निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है।

    बाजार में उपलब्ध पटाखों की कीमतों से भी ग्राहकों के खर्च का अंदाजा लगाया जा सकता है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में 10 बड़े अनार वाले पटाखों के पैकेट की कीमत करीब 55 रुपये बताई गई थी। वहीं, 10 स्पेशल ग्राउंड स्पिनर के पैकेट की कीमत लगभग 80 रुपये और पांच दो-आवाज वाले रॉकेट की कीमत करीब 70 रुपये थी। ये कीमतें उस समय की बताई गई हैं और त्योहार के दौरान इनमें बदलाव हो सकता है।

    दिवाली के नजदीक आने पर पटाखों की मांग बढ़ने से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। ऐसे में कच्चे माल की बढ़ी लागत, आपूर्ति में देरी और सुरक्षा संबंधी जांच का असर बाजार पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, वास्तविक कीमतें अलग-अलग उत्पादों और बाजारों के अनुसार बदल सकती हैं। ग्राहकों को इस बार पटाखों की खरीदारी के लिए पहले से अधिक बजट रखने की जरूरत पड़ सकती है।

  • सऊदी अरब में सुरक्षा चिंताओं से उड़ानें प्रभावित, एयर इंडिया समेत कई कंपनियों ने सेवाएं कीं रद्द

    सऊदी अरब में सुरक्षा चिंताओं से उड़ानें प्रभावित, एयर इंडिया समेत कई कंपनियों ने सेवाएं कीं रद्द

    नई दिल्ली ।सऊदी अरब में सुरक्षा स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारतीय विमानन कंपनियों ने कई शहरों के लिए अपनी उड़ान सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने रियाद, जेद्दा तथा दम्माम के लिए आने-जाने वाली उड़ानें 20 अक्टूबर 2026 तक रद्द रखने का फैसला किया है। वहीं, इंडिगो और अकासा एयर ने भी कुछ सऊदी गंतव्यों के लिए अपनी सेवाओं को अलग-अलग तारीखों तक स्थगित कर दिया है।
    एयर इंडिया ने यात्रियों के लिए जारी यात्रा परामर्श में बताया कि सऊदी अरब में विकसित हो रही स्थिति को देखते हुए रियाद, दम्माम और जेद्दा से संबंधित उसकी सभी उड़ानें 20 अक्टूबर तक संचालित नहीं होंगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि रद्द उड़ानों से प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड दिया जाएगा। एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
    एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी अपने परिचालन से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए दम्माम, जेद्दा और रियाद के लिए आने-जाने वाली उड़ानों का निलंबन 20 अक्टूबर तक बढ़ाने की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार, वह क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और आवश्यकता के मुताबिक उड़ानों के संचालन की समीक्षा करेगी। प्रभावित यात्रियों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित टीमें काम कर रही हैं।
    एयर इंडिया एक्सप्रेस ने रद्द उड़ानों के यात्रियों को दो विकल्प दिए हैं। वे बिना अतिरिक्त शुल्क के अपनी यात्रा की तारीख बदल सकते हैं या टिकट का पूरा रिफंड ले सकते हैं। यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इन विकल्पों और उड़ान की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
    इससे पहले इंडिगो ने भी सऊदी अरब की स्थिति का आकलन करने के बाद रियाद, जेद्दा, दम्माम और मदीना के लिए तथा वहां से संचालित उड़ानों को 24 अक्टूबर 2026 तक रद्द रखने की घोषणा की थी। इस फैसले से इन शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि, उड़ानों की बहाली को लेकर अंतिम निर्णय स्थिति की समीक्षा के आधार पर लिया जाएगा।
    अकासा एयर ने भी सऊदी अरब के लिए अपनी सेवाओं पर अस्थायी रोक बढ़ाई है। एयरलाइन ने रियाद से आने-जाने वाली उड़ानों का निलंबन 24 अक्टूबर तक और जेद्दा के लिए उड़ानों का निलंबन 21 अक्टूबर तक बढ़ाने की जानकारी दी है। प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड लेने या बिना अतिरिक्त शुल्क के यात्रा की तारीख बदलने का विकल्प दिया गया है।
    अलग-अलग एयरलाइंस की ओर से घोषित तारीखों में अंतर होने के कारण यात्रियों के लिए अपनी संबंधित उड़ान की जानकारी अलग से जांचना जरूरी है। फिलहाल एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 20 अक्टूबर तक, जबकि इंडिगो ने 24 अक्टूबर तक कुछ सेवाएं रद्द रखने की घोषणा की है। अकासा एयर की ओर से रियाद और जेद्दा के लिए अलग-अलग समयसीमा तय की गई है।
    एयरलाइंस ने यात्रियों को हवाई अड्डे के लिए रवाना होने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करने की सलाह दी है। साथ ही, टिकट बुकिंग के दौरान दिया गया मोबाइल नंबर और ईमेल पता अपडेट रखने को कहा गया है, ताकि उड़ान में बदलाव या रद्द होने की स्थिति में जरूरी सूचना समय पर मिल सके।
    सऊदी अरब में स्थिति की लगातार समीक्षा के बीच उड़ान सेवाओं की बहाली इस बात पर निर्भर करेगी कि परिचालन को सुरक्षित तरीके से दोबारा शुरू करना कब संभव होता है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी एयरलाइन से संपर्क करें और रिफंड या पुनर्निर्धारण से संबंधित विकल्पों की जानकारी लेकर ही आगे की योजना बनाएं।
  • गुजरात में 5-6 अक्टूबर को हाईवे विकास पर चिंतन शिविर, परियोजनाओं की चुनौतियों और समाधान पर होगा व्यापक मंथन

    गुजरात में 5-6 अक्टूबर को हाईवे विकास पर चिंतन शिविर, परियोजनाओं की चुनौतियों और समाधान पर होगा व्यापक मंथन

    नई दिल्ली । सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देशभर में राजमार्ग अवसंरचना के विकास और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम 5 और 6 अक्टूबर को होगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित हितधारक शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और हर्ष मल्होत्रा भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।

    मंत्रालय के अनुसार, चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करना और उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना है। इसके साथ विभिन्न पक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा। यह आयोजन केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा जमीनी स्तर पर सामने आए अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। इसमें विभिन्न राज्यों के सड़क परिवहन और लोक निर्माण विभागों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।

    मंत्रालय के मुताबिक, कार्यक्रम में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान के साथ नए और दोहराए जा सकने वाले समाधानों पर विचार किया जाएगा। नीति और संस्थागत सुधारों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि अलग-अलग राज्यों और संबंधित एजेंसियों के अनुभवों को एक मंच पर लाने से सड़क अवसंरचना विकास से जुड़े मुद्दों पर साझा समझ विकसित करने में मदद मिलेगी और परियोजनाओं की गति बढ़ाई जा सकेगी।

    दो दिवसीय चिंतन शिविर में पांच प्रमुख विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें पीएम गतिशक्ति और एकीकृत अवसंरचना योजना, भूमि अधिग्रहण और भूमि राशि प्लेटफॉर्म, मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और रेटिंग्स, हाईवे सुरक्षा तथा गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना निगरानी शामिल हैं। पीएम गतिशक्ति से जुड़े सत्र में विभिन्न अवसंरचना क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत योजना निर्माण पर चर्चा होगी। भूमि अधिग्रहण से संबंधित सत्र में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं और उन्हें दूर करने के संभावित उपायों पर विचार किया जाएगा।

    मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और रेटिंग्स से जुड़े सत्र में अनुबंध संबंधी मुद्दों तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। हाईवे सुरक्षा के सत्र में सुरक्षित सड़क डिजाइन और सुरक्षा उपायों को परियोजना की योजना तथा निर्माण प्रक्रिया में अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने पर चर्चा होगी। वहीं गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना निगरानी सत्र में निर्माण की गुणवत्ता सुधारने, परियोजनाओं की निगरानी मजबूत करने और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, चिंतन शिविर से सड़क और राजमार्ग अवसंरचना विकास को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने के लिए केंद्र तथा राज्यों के बीच सहयोग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • सीहोर में जर्जर पुल के पास नाले में पलटा पानी के केन से भरा ऑटो, बाल-बाल बचा चालक, मरम्मत पर उठे सवाल

    सीहोर में जर्जर पुल के पास नाले में पलटा पानी के केन से भरा ऑटो, बाल-बाल बचा चालक, मरम्मत पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश: के सीहोर नगर के जमशेदनगर इलाके में रविवार को छोटे पुल के पास एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। पानी के केन और कैंपर से भरा एक ऑटो अनियंत्रित होकर नाले के किनारे पलट गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई और ऑटो चालक समेत आसपास मौजूद लोग सुरक्षित बच गए। हालांकि, इस घटना ने इलाके में स्थित जर्जर पुल की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।

    जानकारी के अनुसार, जमशेदनगर के छोटे पुल के पास से पानी के केन और कैंपर लेकर गुजर रहा ऑटो अचानक अनियंत्रित हो गया। इसके बाद वाहन नाले के किनारे पलट गया। ऑटो में बड़ी संख्या में पानी के पीले केन और कैंपर रखे हुए थे। वाहन के पलटने से ये सभी सामान नाले के आसपास और गंदगी से भरे किनारे पर बिखर गए।

    हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और चालक की मदद करने लगे। ऑटो चालक और आसपास मौजूद लोगों ने नाले के किनारे उतरकर बिखरे हुए पानी के केन और कैंपर को संभाला। पलटे हुए वाहन से सामान निकालने और उसे सुरक्षित जगह पर रखने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    इस हादसे के बाद जमशेदनगर के छोटे पुल की जर्जर स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों की चिंताएं फिर सामने आई हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पुल लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। इसकी मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम भी हाल ही में चल रहा था, लेकिन पुल की मौजूदा हालत के कारण यहां से गुजरने वाले लोगों और वाहनों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पुल की मरम्मत के दौरान पहले भी एक गंभीर घटना सामने आ चुकी है। निर्माण कार्य के समय पुल का एक बड़ा कंक्रीट का टुकड़ा नीचे गिर गया था। उस दौरान वहां काम कर रहे मजदूर बाल-बाल बच गए थे। इस घटना के बाद भी पुल की सुरक्षा और मरम्मत कार्य को लेकर लोगों की चिंता बनी हुई है।

    क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त पुल और संकरे रास्ते के कारण यहां से गुजरना जोखिम भरा बना हुआ है। दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को इस रास्ते से निकलते समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल की बदहाल स्थिति के चलते कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है। रविवार को पानी से भरे ऑटो के पलटने की घटना ने इन आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

    लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण स्थानीय निवासियों में नाराजगी भी है। लोगों का कहना है कि पुल की स्थिति में सुधार और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जल्द कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पुल का निर्माण और मरम्मत कार्य सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए जल्द पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

    फिलहाल इस हादसे में किसी के घायल होने या जनहानि की जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, जमशेदनगर के छोटे पुल के पास हुई घटना ने जर्जर पुलों की मरम्मत और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत को फिर उजागर किया है।

  • इंदौर में गणेश विसर्जन की हाईटेक व्यवस्था, पोकलेन, लिफ्ट और नावों से प्रतिमाओं का सुरक्षित विसर्जन

    इंदौर में गणेश विसर्जन की हाईटेक व्यवस्था, पोकलेन, लिफ्ट और नावों से प्रतिमाओं का सुरक्षित विसर्जन

    इंदौर में गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर नगर निगम की ओर से इस बार विशेष और हाईटेक व्यवस्था की गई है। विसर्जन के दौरान होने वाले हादसों को रोकने के उद्देश्य से जवाहर टेकरी पर मानव रहित मशीनों के जरिए प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जा रहा है। इसके लिए पोकलेन मशीन, बड़ी नाव और लिफ्ट सहित पांच प्रकार की मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    नगर निगम ने इस व्यवस्था के तहत 15 से 20 लाख गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का लक्ष्य रखा है। प्रतिमाओं को तालाब में विसर्जित करने के लिए श्रद्धालुओं को सीधे पानी में जाने की जरूरत नहीं होगी। मशीनों और अन्य साधनों की मदद से प्रतिमाओं को तालाब में सुरक्षित तरीके से विसर्जित किया जा रहा है।

    विसर्जन के दौरान लोगों के पानी में उतरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जवाहर टेकरी पर प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है, जिसमें श्रद्धालु तालाब के पानी से दूरी बनाए रखते हुए पूजा और विधि-विधान पूरा कर सकेंगे। इसके बाद प्रतिमा को निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से विसर्जित किया जाएगा।

    शहर के अलग-अलग कॉलोनियों और वार्ड स्तर पर भी प्रतिमाओं के एकत्रीकरण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए 140 से अधिक स्थान निर्धारित किए गए हैं। इन स्थानों पर प्रतिमाएं एकत्र की जा रही हैं और मौके पर ही जल कुंड बनाकर विसर्जन की व्यवस्था भी की गई है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली प्रतिमाओं के विसर्जन को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

    जवाहर टेकरी पर सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। पुलिसकर्मियों के साथ एनडीआरएफ की टीम और पांच विशेष तैराकों को तैनात किया गया है। इनकी मौजूदगी का उद्देश्य विसर्जन के दौरान किसी भी संभावित आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    श्रद्धालुओं को भी तालाब के कुंड से दूर रखा जा रहा है। प्रतिमा विसर्जन के दौरान उन्हें पानी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। प्रतिमाओं को मशीनों और अन्य निर्धारित माध्यमों से तालाब में कुछ दूरी से ही विसर्जित करने की व्यवस्था की गई है। इस तरह प्रतिमा विसर्जन की धार्मिक प्रक्रिया को बनाए रखते हुए लोगों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है।

    तालाब और विसर्जन स्थल के आसपास निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इनके जरिए आयोजन स्थल और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत मशीनों से होने वाले विसर्जन और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर भी निगरानी रखी जा रही है।

    इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य गणेश प्रतिमा विसर्जन को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरा करना है। खासतौर पर पानी में उतरने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मानव रहित मशीनों और सुरक्षा दलों की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही शहर के विभिन्न हिस्सों में बनाए गए एकत्रीकरण केंद्रों और जल कुंडों के जरिए विसर्जन व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर भी संचालित किया जा रहा है।

    जवाहर टेकरी पर पोकलेन, लिफ्ट, नाव और अन्य मशीनों के इस्तेमाल के साथ सुरक्षा टीमों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं को पानी से दूर रखकर प्रतिमाओं का विसर्जन कराने की व्यवस्था के जरिए इस धार्मिक आयोजन को सुरक्षित तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • भोपाल के 5-स्टार होटल में लिफ्ट फंसने के बाद खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, तीन लिफ्टों पर लगा अस्थायी ताला

    भोपाल के 5-स्टार होटल में लिफ्ट फंसने के बाद खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, तीन लिफ्टों पर लगा अस्थायी ताला

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की पत्नी समेत तीन लोग फंस गए। घटना के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद होटल की लिफ्ट और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई, जिसमें कई कमियां सामने आईं।

    यह घटना अरेरा हिल्स स्थित कोर्टयार्ड बाय मैरियट होटल में रविवार सुबह हुई। जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की पत्नी एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए होटल पहुंची थीं। उनके साथ एक डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ का सदस्य भी था।

    करीब 10:40 बजे तीनों लिफ्ट में सवार हुए। इसी दौरान लिफ्ट बीच में रुक गई और सभी अंदर फंस गए। करीब 20 से 25 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहने के बाद मदद के लिए प्रयास किए गए। लिफ्ट में उपलब्ध संपर्क नंबर पर फोन किया गया, लेकिन तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद महिला ने अपने पति को घटना की जानकारी दी।

    सूचना मिलने के बाद नगर निगम का फायर ब्रिगेड, विद्युत विभाग और स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त अमला होटल पहुंचा। टीम ने लिफ्ट खोलकर अंदर फंसे तीनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद अधिकारियों ने केवल घटना की जांच तक सीमित न रहते हुए होटल में लिफ्ट और सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण शुरू किया।

    जांच में सामने आया कि संबंधित लिफ्ट में ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस यानी ARD की व्यवस्था नहीं थी। यह उपकरण बिजली जाने या किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में लिफ्ट को सुरक्षित तरीके से नजदीकी मंजिल तक पहुंचाने में मदद करता है।

    लिफ्ट के नियमित रखरखाव को लेकर भी कमी मिली। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि 31 अगस्त 2026 को निर्धारित मासिक मेंटेनेंस नहीं कराया गया था। जिस लिफ्ट में लोग फंसे थे, उसका पिछला निर्धारित निरीक्षण 29 मई 2026 को हुआ था।

    नगर निगम की टीम ने लिफ्ट के अलावा होटल की फायर सेफ्टी व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और एग्जिट गेट की स्थिति की जांच की गई। अधिकारियों के मुताबिक कुछ व्यवस्थाएं निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं।

    इन कमियों के सामने आने के बाद नगर निगम ने होटल की तीन लिफ्टों को अस्थायी रूप से सील कर दिया। इसके साथ ही होटल के खाद्य सुरक्षा लाइसेंस और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की गई।

    नगर निगम के अनुसार होटल का पहले भी निरीक्षण किया जा चुका है और सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए नोटिस दिए गए थे। इसके बावजूद लिफ्ट रखरखाव और फायर सेफ्टी से संबंधित कमियां मिलने के बाद कार्रवाई की गई।

    घटना के बाद भोपाल में अन्य बहुमंजिला इमारतों, होटलों और अस्पतालों की लिफ्टों की जांच कराने की तैयारी भी की गई है। इस अभियान में लिफ्टों के नियमित मेंटेनेंस, सुरक्षा उपकरणों और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

    नगर निगम प्रशासन ने संबंधित संस्थानों को लिफ्टों का समय पर रखरखाव कराने और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जहां सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • बच्चों को पढ़ाई के साथ सिखाएं ये 10 जरूरी स्किल, मुश्किल हालात में समझदारी से फैसला लेने में आएंगी काम

    बच्चों को पढ़ाई के साथ सिखाएं ये 10 जरूरी स्किल, मुश्किल हालात में समझदारी से फैसला लेने में आएंगी काम


    नई दिल्ली ।
    बच्चों की परवरिश में पढ़ाई, होमवर्क और अच्छे व्यवहार के साथ उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरी स्किल सिखाना भी बेहद अहम है। कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं, जहां किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता और बच्चे को अपनी सुरक्षा के लिए व्यावहारिक समझ की जरूरत पड़ती है। उम्र के अनुसार कुछ जरूरी बातें सिखाकर बच्चों को मुश्किल समय में घबराने के बजाय समझदारी से कदम उठाने के लिए तैयार किया जा सकता है।

    सबसे पहले बच्चे को अपना पूरा नाम, माता-पिता का नाम और जरूरत के मुताबिक घर से जुड़ी जरूरी जानकारी याद करानी चाहिए। छोटी उम्र में इसे खेल-खेल में दोहराकर सिखाया जा सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चा बिना घबराए अपनी पहचान और जरूरी जानकारी बता सके।

    बच्चों को यह भी पता होना चाहिए कि आपात स्थिति में किससे मदद मांगनी है। परिवार के जरूरी फोन नंबर याद कराने के साथ उन्हें यह समझाना जरूरी है कि फोन पर अपनी स्थिति और परेशानी को साफ शब्दों में कैसे बताया जाए।

    अनजान लोगों से सावधानी बरतना भी बच्चों के लिए महत्वपूर्ण स्किल है। उन्हें समझाएं कि हर व्यक्ति पर तुरंत भरोसा करना जरूरी नहीं है। अगर कोई अनजान व्यक्ति कुछ देने, कहीं ले जाने या माता-पिता के बारे में गलत जानकारी देने की कोशिश करे, तो बच्चे को वहां से हटकर किसी भरोसेमंद बड़े से मदद मांगनी चाहिए।

    अगर बच्चा भीड़ या किसी सार्वजनिक स्थान पर परिवार से अलग हो जाए, तो उसे इधर-उधर भागने के बजाय सुरक्षित जगह पर रुकना चाहिए। पुलिसकर्मी या किसी जिम्मेदार कर्मचारी से मदद मांगने की आदत उसे ऐसी स्थिति में सुरक्षित रहने में मदद कर सकती है।

    घर में आग लगने जैसी स्थिति के लिए भी बच्चों को पहले से सामान्य सुरक्षा नियम समझाना जरूरी है। उन्हें बताया जाना चाहिए कि घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान की ओर जाना है और आग या धुएं वाली जगह पर वापस जाकर सामान लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

    पानी के आसपास सुरक्षा को लेकर भी बच्चों को जागरूक करना जरूरी है। स्विमिंग पूल, तालाब या किसी जलाशय के पास अकेले नहीं जाने और जरूरत पड़ने पर तुरंत किसी बड़े को बुलाने की आदत डालनी चाहिए।

    उम्र के अनुसार बच्चों को बेसिक फर्स्ट एड की जानकारी भी दी जा सकती है। छोटी चोट या कट लगने पर क्या करना है, यह समझाने के साथ उन्हें यह भी बताना चाहिए कि गंभीर चोट की स्थिति में खुद इलाज करने के बजाय तुरंत किसी बड़े से मदद लें।

    बड़े बच्चों को धीरे-धीरे किचन सेफ्टी के नियम सिखाए जा सकते हैं। गैस, गर्म बर्तन, चाकू और बिजली के उपकरणों से जुड़ी सावधानियां उनकी उम्र और समझ के अनुसार बताना जरूरी है।

    बच्चों को जरूरत पड़ने पर साफ तौर पर ‘ना’ कहना भी सिखाएं। अगर कोई बात या स्थिति उन्हें असहज लगे, तो वे बिना डर अपनी बात कह सकें और तुरंत माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े को जानकारी दें।

    सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चा परेशानी छिपाने के बजाय समय पर मदद मांगे। गलती होने या डर लगने पर सच बताना जरूरी है। इन स्किल्स को बच्चों पर दबाव डालकर नहीं, बल्कि रोजमर्रा के उदाहरणों, रोल-प्ले और छोटे अभ्यास के जरिए सहज तरीके से सिखाया जा सकता है।