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  • महिला समानता दिवस पर सोमी अली ने कहा, सिर्फ चर्चा से नहीं सिस्टम और सोच बदलने से महिलाओं को वास्तविक बराबरी मिलेगी

    महिला समानता दिवस पर सोमी अली ने कहा, सिर्फ चर्चा से नहीं सिस्टम और सोच बदलने से महिलाओं को वास्तविक बराबरी मिलेगी

    नई दिल्ली । महिला समानता दिवस के अवसर पर अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सोमी अली ने महिलाओं की वास्तविक स्थिति और समानता को लेकर अपने विचार साझा किए। करीब दो दशक से महिलाओं के साथ काम करने के दौरान हिंसा और असुरक्षा झेल रही महिलाओं के अनुभवों को करीब से देखने वाली सोमी अली का कहना है कि केवल बराबरी की बातें करने से बदलाव नहीं आएगा। इसके लिए व्यवस्था, सामाजिक सोच और संस्थागत प्रतिक्रिया में ठोस परिवर्तन जरूरी है।

    सोमी अली के अनुसार महिलाओं के मुद्दों पर पहले की तुलना में अधिक बातचीत हो रही है और यह सकारात्मक बदलाव है। लंबे समय तक महिलाओं का चुप रहना सामान्य माना जाता था, जबकि कई मामलों में यही चुप्पी अत्याचार करने वालों को बचाती रही। हालांकि, उनका मानना है कि आवाज उठाने के बाद वास्तविक बदलाव तभी माना जाएगा जब अदालतों, पुलिस, परिवारों और सामाजिक व्यवस्था की प्रतिक्रिया भी बदले।

    उन्होंने विशेष रूप से उन महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताई जो तत्काल खतरे में होती हैं। उनके मुताबिक ऐसी महिलाओं को सहायता मिलने में अक्सर समय लग जाता है। सुरक्षा आदेश, आश्रय और कानूनी प्रक्रिया जैसी व्यवस्थाओं के बीच महिला को कई बार उसी परिस्थिति में रहना पड़ता है जहां उसकी सुरक्षा को खतरा बना रहता है। सोमी अली का कहना है कि सबसे जरूरी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे गंभीर खतरे में मौजूद महिला को जल्द सुरक्षित स्थान मिल सके।

    महिला सशक्तीकरण के लिए आर्थिक स्वतंत्रता, शिक्षा और कानूनी सहायता को भी उन्होंने महत्वपूर्ण माना। लेकिन उनके मुताबिक इन सुविधाओं के साथ आत्मविश्वास भी जरूरी है। कई महिलाएं संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद डर, सामाजिक दबाव या दूसरों की स्वीकृति की आवश्यकता के कारण अपने फैसले लेने में कठिनाई महसूस करती हैं। इसके विपरीत कुछ महिलाओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लिए सुरक्षित और स्वतंत्र जीवन का रास्ता चुना है।

    सोमी अली ने समानता की बहस में संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि महिला समानता का अर्थ हर परिस्थिति में महिला को सही और पुरुष को गलत मान लेना नहीं है। उनके अनुभव में महिलाओं के साथ गंभीर अत्याचार के मामले वास्तविक हैं, लेकिन किसी भी पक्ष को बिना तथ्य के हमेशा सही मान लेना न्याय की भावना के अनुरूप नहीं है।

    उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं और पुरुषों दोनों को इंसान के रूप में देखा जाना चाहिए, जिनके व्यवहार और परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। उनके अनुसार वास्तविक समानता का आधार किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि तथ्य और सच के आधार पर न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए।

    सोमी अली ने यह भी कहा कि झूठे आरोपों की स्थिति उन महिलाओं के लिए भी नुकसानदेह हो सकती है जो वास्तव में हिंसा का सामना कर रही हैं। इससे वास्तविक पीड़ितों की शिकायतों पर संदेह बढ़ सकता है और न्याय पाने की प्रक्रिया कठिन हो सकती है। इसलिए उनका जोर इस बात पर है कि कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति की सुरक्षा हो, लेकिन गलत को केवल किसी पक्ष के आधार पर सही न ठहराया जाए।

    महिला समानता दिवस पर उनका संदेश महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के साथ जिम्मेदारी तथा निष्पक्षता को जोड़ता है। उनके मुताबिक बदलाव तभी सार्थक होगा जब महिलाओं को अपनी बात कहने का भरोसा मिले, खतरे के समय व्यवस्था तेजी से काम करे और समाज समानता को केवल चर्चा का विषय न रखकर व्यवहार और संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा बनाए।

  • विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    नई दिल्ली । हजारों फीट की ऊंचाई पर यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में घटित एक गंभीर विमान दुर्घटना के बाद सरकार ने सभी एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू और विमान चालकों के मादक पदार्थ परीक्षण को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब आकस्मिक ड्रग टेस्ट के दायरे को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत से अधिक करने की योजना बनाई जा रही है।

    यह प्रशासनिक पहल फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2379 में हुई एक गंभीर घटना के बाद सामने आई है। उड़ान के दौरान विमान में अचानक तेज हलचल हुई और वह हवा में लगभग 300 फीट नीचे आ गया। इस हादसे में तीन शिशुओं सहित 137 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से कई लोग घायल हो गए थे। जांच के दौरान मुख्य विमान चालक के शरीर में भांग या गांजे जैसे वर्जित नशीले पदार्थ की पुष्टि हुई थी।

    विमानन सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले को देखते हुए विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की अनिवार्य जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के उड़ान परिचालन विभाग ने सभी पायलटों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्जित दवाओं और मादक पदार्थों के सेवन की जांच अब शत-प्रतिशत चालकों के लिए लागू होगी। यह प्रक्रिया कंपनी की गुरुग्राम अकादमी, फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर और संबंधित एयरलाइंस कार्यालयों में संचालित की जा रही है।

    विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा सितंबर 2021 में मादक पदार्थों की जांच से संबंधित नियम जारी किए गए थे, जिन्हें जनवरी 2022 से प्रभावी रूप से लागू किया गया था। वर्तमान नियमों में औचक जांच का प्रावधान है, लेकिन हालिया सुरक्षा चूक को देखते हुए केंद्र सरकार नियमों को अधिक कठोर बनाने पर विचार कर रही है। नए प्रस्ताव के तहत परीक्षणों की आवृत्ति और जांच का दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया जाएगा।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर परिचालन करने वाले उड़ानों में भी यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि क्रू सदस्यों के नियमित और आकस्मिक परीक्षण से उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और इस प्रकार की लापरवाही पर पूर्ण विराम लग सकेगा।

    विमानन मंत्रालय और संबंधित एयरलाइंस का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जांच की नई व्यवस्था से न केवल एयरलाइंस के अनुशासन में सुधार होगा, बल्कि उड़ानों के दौरान यात्रियों का विश्वास भी पुनः मजबूत होगा। सरकार आने वाले दिनों में इस संबंध में नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी कर सकती है।

  • बंद कमरे में बार बार एयर फ्रेशनर छिड़कना पड़ सकता है भारी, जानें किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए

    बंद कमरे में बार बार एयर फ्रेशनर छिड़कना पड़ सकता है भारी, जानें किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए

    नई दिल्ली ।कमरे को खुशबूदार और ताजा रखने के लिए रूम फ्रेशनर, एयर फ्रेशनर और सुगंधित स्प्रे का इस्तेमाल आम हो गया है। घर, कार्यालय और कार में इन उत्पादों का उपयोग खास तौर पर तब बढ़ जाता है, जब बारिश या नमी के कारण कमरे में सीलन और अप्रिय गंध महसूस होने लगती है। हालांकि, लगातार और जरूरत से ज्यादा रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करने से कुछ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।

    रूम फ्रेशनर में खुशबू पैदा करने वाले फ्रेगरेंस कंपाउंड, सॉल्वेंट और दूसरे रासायनिक पदार्थ हो सकते हैं। इन पदार्थों का प्रभाव हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। कुछ संवेदनशील लोगों को तेज खुशबू के संपर्क में आने के बाद सिरदर्द, छींक, खांसी, आंखों में जलन या गले में परेशानी महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में सांस लेने में असहजता भी हो सकती है।

    बंद कमरे में लगातार स्प्रे करने से समस्या बढ़ सकती है। कमरे में हवा का पर्याप्त आवागमन नहीं होने पर फ्रेशनर से निकलने वाले रसायनों की मौजूदगी कुछ समय तक हवा में बनी रह सकती है। इसलिए किसी छोटे या पूरी तरह बंद कमरे में बार बार एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल करने के बजाय खिड़की और दरवाजे खोलकर हवा का संचार बनाए रखना बेहतर माना जाता है।

    रूम फ्रेशनर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यह आमतौर पर बदबू के वास्तविक स्रोत को खत्म नहीं करता। अगर कमरे में सीलन, गीला कचरा, नमी, गंदे कपड़े या किसी अन्य कारण से दुर्गंध पैदा हो रही है, तो केवल खुशबू वाला स्प्रे उस समस्या को कुछ समय के लिए ढक सकता है। इसलिए दुर्गंध का कारण पता लगाकर उसे दूर करना ज्यादा प्रभावी तरीका है।

    तेज खुशबू के प्रति संवेदनशील लोगों को ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल विशेष सावधानी से करना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों के आसपास भी जरूरत से ज्यादा सुगंधित उत्पादों का इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है। जिन लोगों को फ्रेगरेंस या परफ्यूम से परेशानी होती है, उन्हें हल्की खुशबू या बिना तेज सुगंध वाले विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    अगर रूम फ्रेशनर इस्तेमाल करने के बाद लगातार सिरदर्द, आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर ताजी हवा में जाना चाहिए। लक्षण बने रहने या गंभीर होने की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करना हो तो उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा मात्रा में स्प्रे करने से बचें और इसे चेहरे या शरीर के बेहद करीब से इस्तेमाल न करें। भोजन, खाने के बर्तनों और ऐसी सतहों पर सीधे स्प्रे नहीं करना चाहिए जहां खाद्य सामग्री रखी जाती है।

    एक साथ कई अलग अलग सुगंधित उत्पादों का इस्तेमाल करना भी जरूरी नहीं है। एयर फ्रेशनर के साथ सुगंधित मोमबत्ती, स्प्रे और दूसरे फ्रेगरेंस उत्पाद लगातार इस्तेमाल करने के बजाय सीमित मात्रा में किसी एक विकल्प का इस्तेमाल करना बेहतर है।

    कमरे को वास्तव में साफ और ताजा रखने के लिए नियमित सफाई सबसे महत्वपूर्ण है। कूड़ा समय पर बाहर निकालना, गीली चीजों को कमरे में जमा नहीं होने देना, सीलन और नमी को नियंत्रित करना तथा खिड़की दरवाजे खोलकर पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना ज्यादा उपयोगी उपाय हैं।

    इसलिए रूम फ्रेशनर को कमरे की सफाई का विकल्प नहीं समझना चाहिए। सीमित मात्रा में इस्तेमाल और पर्याप्त हवा का आवागमन रखते हुए इसका उपयोग किया जा सकता है, लेकिन लगातार तेज खुशबू बनाए रखने के लिए बार बार स्प्रे करना उचित नहीं है। साफ हवा, नियमित सफाई और दुर्गंध के वास्तविक कारण को दूर करना कमरे को स्वस्थ और आरामदायक बनाए रखने का बेहतर तरीका है।

  • एयर इंडिया फुकेट-दिल्ली उड़ान टर्बुलेंस मामले में बड़ा खुलासा, पायलट के अनिद्रा और नशीली दवा लेने की बात आई सामने।

    एयर इंडिया फुकेट-दिल्ली उड़ान टर्बुलेंस मामले में बड़ा खुलासा, पायलट के अनिद्रा और नशीली दवा लेने की बात आई सामने।

    नई दिल्ली । थाईलैंड के फुकेट से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के एक यात्री विमान में हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना के बाद जारी जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। हाल ही में सामने आई आंतरिक सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित उड़ान के मुख्य पायलट लंबे समय से अनिद्रा की समस्या से ग्रस्त थे और इसके निवारण के लिए नींद की गोलियों का सेवन करते थे। इस घटना के दौरान विमान हवा में अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिर गया था, जिससे कई यात्री और क्रू सदस्य घायल हो गए थे।

    उड्डयन दुर्घटना जांच ब्यूरो अर्थात एएआईबी द्वारा इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। प्रारंभिक पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि उड़ान भरने से पूर्व और उड़ान के दौरान सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया गया था। जांच एजेंसियों द्वारा पायलट के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है, जिसमें नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े पहलुओं की भी जांच शामिल है। घटना के समय विमान में 137 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे।

    जांच अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए संबंधित पायलट ने स्वीकार किया है कि वह पारिवारिक चिकित्सक की सलाह पर दवाइयों का सेवन कर रहा था। पायलट का तर्क था कि उड़ानों के अनिश्चित समय और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण उसकी नींद का चक्र प्रभावित हुआ था। हालांकि, उड्डयन नियमों के तहत किसी भी वाणिज्यिक उड़ान को संचालित करने से पहले पायलट का पूर्ण रूप से शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना अनिवार्य है।

    रिपोर्ट में यह गंभीर तथ्य भी सामने आया है कि जिस समय विमान टर्बुलेंस की चपेट में आया, उस दौरान मुख्य पायलट कॉकपिट में अपनी निर्धारित सीट पर मौजूद नहीं था। विमान का नियंत्रण सह-पायलट के हाथों में था। इसके अतिरिक्त, उड़ान भरने से पूर्व फुकेट में चालक दल के सदस्यों के साथ हुई गतिविधियों और बैठकों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के निर्धारित मानकों के तहत इस घटना की जांच की जा रही है। विमान निर्माता कंपनी एयरबस और फ्रांस का नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो भी तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। एएआईबी ने आश्वासन दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। मध्य प्रदेश सहित देश भर के विमान यात्रियों के बीच इस घटना के बाद उड्डयन सुरक्षा को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

    विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकता है। इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा एयरलाइंस कंपनियों और उनके क्रू मेंबर्स के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी किए जाने की संभावना है। फिलहाल मामले से जुड़ी सभी तकनीकी और मेडिकल जांच रिपोर्टों की अंतिम समीक्षा की जा रही है।

  • विमानन सुरक्षा पर मंडराया नशीले पदार्थों का खतरा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के क्रू मेंबर्स की डोप टेस्टिंग बढ़ाने की मांग

    विमानन सुरक्षा पर मंडराया नशीले पदार्थों का खतरा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के क्रू मेंबर्स की डोप टेस्टिंग बढ़ाने की मांग

    नई दिल्ली । फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में हुई हालिया घटना के बाद देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा और जांच मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विमान के पायलट के नशीले पदार्थों के शुरुआती डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद विमानन नियामक ने सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

    विमानन विशेषज्ञों के अनुसार थाईलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों में कुछ पदार्थों की कानूनी सुलभता एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। शराब की उपस्थिति जांचने के लिए नियमित ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन अन्य साइकोएक्टिव पदार्थों का परीक्षण अपेक्षाकृत जटिल प्रक्रिया माना जाता है।

    अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी नशीले पदार्थ के प्रभाव में विमान का संचालन यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। ऐसे पदार्थों का असर शरीर में लंबे समय तक बना रहता है जिससे चालक दल की निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    वर्तमान में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के नियमों के तहत सभी अनुसूचित वाणिज्यिक एयरलाइंस को अपने कम से कम 10 प्रतिशत क्रू मेंबर्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का वार्षिक रूप से रैंडम डोप टेस्ट कराना अनिवार्य है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर अब इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    विमानन अधिकारियों का मानना है कि केवल स्व-घोषणा या नशामुक्ति अभियानों के भरोसे इस समस्या से नहीं निपटा जा सकता। इसके लिए रैंडम डोप जांच की आवृत्ति बढ़ाने और नियमों को अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता जताई जा रही है ताकि उड़ानों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित की जा सके।

    नियामक संस्थाएं अब चिकित्सा अधिकारियों के साथ मिलकर परीक्षण प्रक्रियाओं को और अधिक सटीक बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस निलंबन जैसे कड़े प्रावधान लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

  • मानसून में टायर प्रेशर से न करें समझौता, सही हवा और बेहतर ग्रिप से कम होगा हादसों का जोखिम

    मानसून में टायर प्रेशर से न करें समझौता, सही हवा और बेहतर ग्रिप से कम होगा हादसों का जोखिम


    नई दिल्ली ।
    बारिश का मौसम शुरू होते ही सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं और ऐसे में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए वाहन की तकनीकी स्थिति पर विशेष ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। अधिकांश चालक इस दौरान वाइपर, ब्रेक और हेडलाइट की जांच तो कराते हैं, लेकिन टायर प्रेशर की अनदेखी कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सही टायर प्रेशर वाहन की ग्रिप, ब्रेकिंग क्षमता और सड़क पर संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए मानसून के दौरान टायर में हवा का स्तर हमेशा निर्माता कंपनी की सिफारिश के अनुरूप ही होना चाहिए।

    हर वाहन के लिए टायर प्रेशर अलग-अलग निर्धारित किया जाता है। इसकी जानकारी आमतौर पर ड्राइवर साइड के दरवाजे पर लगे स्टिकर या वाहन के ओनर मैनुअल में उपलब्ध रहती है। मौसम बदलने के कारण अपनी ओर से टायर में हवा कम या ज्यादा करना उचित नहीं माना जाता। वाहन निर्माता जिस प्रेशर की सलाह देते हैं, उसी का पालन करने से टायर का सड़क से संपर्क संतुलित बना रहता है और वाहन की पकड़ बेहतर रहती है।

    यदि टायर में आवश्यकता से अधिक हवा भर दी जाए तो उसका सड़क से संपर्क क्षेत्र कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में गीली सड़क पर टायर की ग्रिप कमजोर पड़ सकती है। तेज गति में अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ लेने पर वाहन के फिसलने की आशंका बढ़ जाती है। अधिक हवा होने से बारिश के दौरान नियंत्रण बनाए रखना कठिन हो सकता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    दूसरी ओर, कई लोगों का मानना है कि बारिश में टायर का प्रेशर थोड़ा कम रखने से सड़क पर पकड़ बेहतर होती है। हालांकि विशेषज्ञ इस धारणा को सही नहीं मानते। कम हवा होने पर टायर का घिसाव तेजी से बढ़ सकता है, ईंधन की खपत अधिक हो सकती है और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान टायर का तापमान भी सामान्य से अधिक बढ़ सकता है। इससे टायर की कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ उसके क्षतिग्रस्त होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

    मानसून के दौरान केवल टायर प्रेशर ही नहीं, बल्कि टायर की स्थिति की नियमित जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि टायर का ट्रेड काफी घिस चुका हो या उसकी ग्रिप कमजोर हो गई हो, तो समय रहते उसे बदल देना चाहिए। घिसे हुए टायर गीली सड़क पर पानी को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाते, जिससे वाहन के फिसलने का खतरा बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महीने में कम से कम एक बार टायर प्रेशर की जांच अवश्य करानी चाहिए। यदि लंबी यात्रा पर जाना हो तो प्रस्थान से पहले टायर की हवा, ट्रेड की गहराई और किसी भी प्रकार की क्षति की जांच कर लेना बेहतर होता है। साथ ही स्पेयर टायर की स्थिति भी देखनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में परेशानी न हो।

    बारिश के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग केवल सावधानी से वाहन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन के रखरखाव पर भी समान रूप से निर्भर करती है। सही टायर प्रेशर, अच्छी ग्रिप वाले टायर और नियमित निरीक्षण न केवल वाहन के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना को भी कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में मानसून के दौरान टायरों की नियमित देखभाल को अपनी ड्राइविंग आदत का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए।

  • यूसीसी महिलाओं और बेटियों को समाज में सुरक्षा और बराबरी का अधिकार दिलाएगा ; हेमंत खण्डेलवाल

    यूसीसी महिलाओं और बेटियों को समाज में सुरक्षा और बराबरी का अधिकार दिलाएगा ; हेमंत खण्डेलवाल


    भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने यूसीसी लागू कर इतिहास रचा दिया है। भाजपा सरकार का यह निर्णय मध्यप्रदेश के इतिहास में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को सशक्त बनाने वाला ऐतिहासिक अध्याय है। यूसीसी महिलाओं और बेटियों को समाज में सुरक्षा और बराबरी का अधिकार दिलाएगा। इस कानून से सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिरण के साथ संवैधानिक मूल्यों को नई मजबूती मिलेगी।

    मध्यप्रदेश ने समान न्याय, समान अधिकारों की भावना को साकार किया
    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि विधानसभा द्वारा यूसीसी विधेयक पारित कर मध्यप्रदेश ने समान न्याय, समान अधिकारों की भावना को साकार किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के समान न्याय और समान अधिकारों की भावना को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लिव-इन रिलेशनशिप का 1 महीने में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करना दण्डनीय अपराध है। हमारी सरकार ने जनजातीय समाज को यूसीसी कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा है। जनजातीय समुदाय की संस्कृति से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। मध्यप्रदेश में अब एक ही कानून चलेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, सामाजिक समरसता तथा पारदर्शी कानूनी व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में यह एक दूरगामी और प्रभावी निर्णय सिद्ध होगा।

    विधानसभा की स्वीकृति से संविधान की मूल भावना को मिली मजबूती
    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि समान नागरिक संहिता विधेयक का विधानसभा से पारित होना संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में निहित उस भावना को साकार करने वाला कदम है, जिसमें सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की परिकल्पना की गई है। समान नागरिक संहिता समाज के सभी वर्गों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी, जिससे नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्य किसी पंथ अथवा व्यक्तिगत परंपराओं के आधार पर अलग-अलग न होकर संविधान की भावना के अनुरूप समान रूप से लागू होंगे। यह निर्णय न्यायिक समानता, सामाजिक समरसता और सुशासन को नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण विशेषकर महिलाओं को न्याय प्राप्त करने में अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। समान नागरिक संहिता इन चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करते हुए महिलाओं को अधिक अधिकार-संपन्न बनाने तथा उनके हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समान नागरिक संहिता मध्यप्रदेश को अधिक समरस, न्यायपूर्ण और प्रगतिशील राज्य बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
  • स्टोर रूम की सफाई से लेकर वन विभाग की मदद तक, बारिश के मौसम में इन जरूरी घरेलू सुरक्षा नियमों का करें पालन

    स्टोर रूम की सफाई से लेकर वन विभाग की मदद तक, बारिश के मौसम में इन जरूरी घरेलू सुरक्षा नियमों का करें पालन


    नई दिल्ली । देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही आम नागरिकों के लिए मौसमी बीमारियों के अलावा एक और बड़ा और गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। भारी बारिश, जलभराव और जमीन के भीतर नमी बढ़ने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले रेंगने वाले जीव अपने प्राकृतिक आवासों यानी बिलों से बाहर निकलने के लिए मजबूर हो जाते हैं। सुरक्षित और सूखी जगहों की तलाश में ये जीव अक्सर इंसानी बस्तियों, घरों के बगीचों, स्टोर रूम और बेसमेंट जैसी जगहों पर शरण ले लेते हैं। इस स्थिति से निपटने और अपने परिवार को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए गृह स्वामियों को कुछ विशेष और महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को अमल में लाने की तत्काल आवश्यकता है।

    घरेलू सुरक्षा के दृष्टिकोण से सबसे पहला और बुनियादी कदम घर के आसपास के बाहरी वातावरण को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखना है। घर के परिसर या बगीचे में जमा होने वाले कचरे, सूखी लकड़ियों के गट्ठर, पुरानी ईंटों के ढेर और बेतरतीब उगी झाड़ियों को तुरंत साफ किया जाना चाहिए, क्योंकि ये स्थान सांप और बिच्छुओं के छिपने के लिए सबसे अनुकूल माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि घर के लॉन या आसपास के मैदान में घास अधिक बढ़ गई है, तो उसकी नियमित रूप से छंटाई कराना अनिवार्य है, ताकि खुले और साफ स्थान पर ये जीव ठहर न सकें।

    सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के अगले चरण में घर के भौतिक ढांचे का बारीकी से निरीक्षण करना आवश्यक है। भवन की दीवारों, खिड़कियों के कोनों, मुख्य दरवाजों के निचले हिस्सों और फर्श में मौजूद किसी भी प्रकार की छोटी-बड़ी दरारों या गैप की सघन जांच की जानी चाहिए। बिच्छू और छोटे सांप बेहद महीन दरारों के रास्ते भी घर के भीतर सुगमता से प्रवेश कर जाते हैं। अतः ऐसी किसी भी संभावित एंट्री पॉइंट या झिरी के दिखाई देने पर उसे अविलंब सीमेंट, सिलिकॉन सीलेंट या अन्य मजबूत निर्माण सामग्री की सहायता से पूरी तरह एयरटाइट बंद कर देना चाहिए।

    बरसात के दिनों में घर के आंतरिक वातावरण को सूखा रखना और वहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना भी सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। स्टोर रूम, बेसमेंट और घर के उन कोनों में जहां हवा और रोशनी कम पहुंचती है, वहां नियमित रूप से सफाई और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए। अक्सर लोग जूते, चप्पल, पुराने कपड़े या कार्डबोर्ड के बक्से लंबे समय तक एक ही स्थान पर रख देते हैं, जो इन जीवों के लिए छिपने का आदर्श स्थान बन जाते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस मौसम में किसी भी रखे हुए सामान, कपड़ों या जूतों का उपयोग करने से पहले उन्हें एक बार अच्छी तरह से झाड़कर और जांचकर ही इस्तेमाल में लाएं।

    इन तमाम सावधानियों के बावजूद यदि कभी घर के भीतर या आसपास कोई जहरीला सांप अथवा अन्य जीव दिखाई दे, तो नागरिकों को अत्यधिक संयम बरतने की आवश्यकता है। ऐसी आपातकालीन स्थिति में जीव को खुद पकड़ने, सहलाने या लाठी-डंडों से मारने का प्रयास बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि भयभीत होने पर ये जीव और अधिक आक्रामक होकर हमला कर सकते हैं। इसके स्थान पर स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों, पशु बचाव दल (एनिमल रेस्क्यू टीम) या किसी प्रमाणित और प्रशिक्षित सर्प विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करना चाहिए, जो आधुनिक उपकरणों की मदद से सुरक्षित रूप से जीव को वहां से रेस्क्यू कर सकें।

  • तेज रफ्तार का कहर नर्मदापुरम हाईवे पर खड़े ट्रक से भिड़ी कार दो की दर्दनाक मौत

    तेज रफ्तार का कहर नर्मदापुरम हाईवे पर खड़े ट्रक से भिड़ी कार दो की दर्दनाक मौत


    नर्मदापुरम । मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में नेशनल हाईवे 46 पर शनिवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया सुबह करीब चार बजे हुई इस भीषण दुर्घटना में तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से पीछे से जा टकराई टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया

    प्राप्त जानकारी के अनुसार कार नागपुर के हिंगनघाट क्षेत्र से शाजापुर जिले के बेरछा गांव की ओर जा रही थी वाहन में तीन लोग सवार थे जो अपने परिचित के घर जा रहे थे लेकिन रास्ते में नर्मदापुरम के निटाया क्षेत्र के पास यह हादसा हो गया बताया जा रहा है कि कार तेज रफ्तार में थी और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका जिसके चलते कार सीधे सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से घुस गई

    हादसा इतना भीषण था कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला मौके पर ही विशाल बाड़कुरे निवासी हिंगनघाट नागपुर और ज्ञान सिंह मासोध निवासी बैतूल की मौत हो गई दोनों की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवारों में कोहराम मच गया वहीं तीसरा युवक रूपेश गहलोत गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया

    घटना की सूचना मिलते ही इटारसी से 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची आपातकालीन सेवा के कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू किया ईएमटी विसराम अहिरवार ने घायल रूपेश को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया जिससे उसकी स्थिति कुछ हद तक स्थिर हो सकी इसके बाद एम्बुलेंस पायलट प्रशांत ने तेजी दिखाते हुए उसे सरकारी अस्पताल नर्मदापुरम पहुंचाया जहां उसका इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं

    हादसे के बाद पुलिस भी तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है साथ ही दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है

    यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार के खतरों की ओर इशारा करता है खासकर हाईवे पर जहां थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है सड़क किनारे खड़े वाहनों से टकराव के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं लेकिन इसके बावजूद सावधानी बरतने में अक्सर चूक हो जाती है

    नर्मदापुरम का यह हादसा न केवल एक दुखद घटना है बल्कि यह एक गंभीर चेतावनी भी है कि यात्रा के दौरान सतर्कता और गति नियंत्रण कितना जरूरी है जरा सी जल्दबाजी कई जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल सकती है

  • बृजेश्वरी कॉलोनी अग्निकांड का खुलासा शॉर्ट सर्किट बना मौत का कारण, जांच जारी

    बृजेश्वरी कॉलोनी अग्निकांड का खुलासा शॉर्ट सर्किट बना मौत का कारण, जांच जारी


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया रोड स्थित बृजेश्वरी एनएक्स कॉलोनी में 18 मार्च को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था उस समय एक ही परिवार के आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और इस घटना की वजह लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं लेकिन अब पुलिस जांच में अहम सुराग सामने आए हैं और स्पष्ट हुआ है कि यह हादसा शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ था

    जांच के दौरान पुलिस को बताया गया कि घर में खड़ी इलेक्ट्रिक कार को रोजाना की तरह रात में चार्ज पर लगाया गया था परिवार के सदस्यों सौरभ पुगलिया सौमिल पुगलिया और हर्षित पुगलिया ने पुलिस को बयान दिया कि भले ही सौरभ ने कार की चार्जिंग बंद कर दी थी लेकिन रात करीब 11 बजे हर्षित ने कार को फिर से चार्ज पर लगा दिया इसी दौरान अचानक शॉर्ट सर्किट से आग भड़क उठी और देखते ही देखते पूरा घर अपनी चपेट में आ गया

    इस दर्दनाक हादसे में मनोज पुगलिया उनकी बहू सिमरन और अन्य परिवार के छह सदस्य समेत कुल आठ लोगों की जान चली गई जिसमें बच्चे भी शामिल थे इस घटना ने पूरे इलाके में मातम और शोक की लहर दौड़ा दी आग लगने के तुरंत बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और उन्हें ढांढस बंधाया

    शुरुआती दौर में परिवार की ओर से आग लगने की वजह घर के पास स्थित इलेक्ट्रिक पोल बताई गई थी लेकिन अब जांच में स्पष्ट हो गया कि असली कारण घर के भीतर चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट की वजह से आग भड़की थी इसके बाद जब परिवार के सदस्य जले हुए घर में सामान देखने पहुंचे तो उन्हें कुछ अवशेष मिले जिन्हें पुलिस की मौजूदगी में परिवार ने दफना दिया

    एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग से जुड़े नियमों और सुरक्षा उपायों की सख्ती से निगरानी की जाएगी ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके

    इस घटना ने इलेक्ट्रिक वाहनों और घरों में चार्जिंग की सुरक्षा के मुद्दे पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि छोटे से लापरवाही का कितना भयावह परिणाम हो सकता है इंदौर अग्निकांड ने सभी को आग और इलेक्ट्रिक सुरक्षा के प्रति सचेत किया है और प्रशासन की जांच आगे इसे रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है