Tag: Saharanpur

  • सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद हटाने के बाद जमीन के नीचे मिला कुआं, प्रशासन ने जांच के लिए तकनीकी टीम बुलाने की तैयारी की

    सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद हटाने के बाद जमीन के नीचे मिला कुआं, प्रशासन ने जांच के लिए तकनीकी टीम बुलाने की तैयारी की

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने के बाद जमीन के नीचे एक कुएं जैसी संरचना मिलने से प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है। मलबा हटाने के दौरान जमीन के भीतर ईंटों से बनी संरचना दिखाई दी, जिसे शुरुआती तौर पर कुआं माना जा रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक प्रकृति, आकार और गहराई के बारे में अभी कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।

    मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने मौके पर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों के अनुसार, संरचना की तकनीकी जांच कराई जाएगी। विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के नीचे मिली संरचना वास्तव में कुआं है या किसी अन्य प्रकार का पुराना निर्माण। फिलहाल प्रशासन ने इसे ढक दिया है और मौके पर निगरानी रखी जा रही है।

    कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को हटाने की कार्रवाई अदालत के आदेश के आधार पर की गई थी। एसडीएम सदर सुबोध कुमार के अनुसार, प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के तहत कार्रवाई की और इसके बाद परिसर की सफाई कराई गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं तथा आगे की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है।

    मस्जिद हटाए जाने के बाद वहां मौजूद मलबे को भी हटाकर दूसरी जगह भेज दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, मलबे को सहारनपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर निर्धारित स्थान पर डाला गया। इसी दौरान जमीन के नीचे ईंटों से बनी संरचना सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने मौके की स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल ढक दिया और तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया।

    अधिकारियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल इस संरचना की वास्तविक बनावट और स्थिति को लेकर है। यह कितनी गहरी है, इसका व्यास कितना है और इसका निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था, इन सभी पहलुओं की जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। प्रशासन जल्द तकनीकी टीम के माध्यम से इसकी जांच कराने की तैयारी में है।

    इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल रविवार को सहारनपुर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने वाला है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर गठित दल स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और संबंधित लोगों से जानकारी जुटाएगा।

    समाजवादी पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि 4 सितंबर की शाम प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने की बात कही गई थी और उसे नहीं हटाने का भरोसा दिया गया था। पार्टी के अनुसार, इसके बाद अदालत के आदेश का हवाला देते हुए मस्जिद को बुलडोजर की मदद से हटा दिया गया।

    प्रशासन और राजनीतिक दलों के दावों के बीच अब जमीन के नीचे मिली संरचना की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इसके बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ाते हुए किसी भी तरह की अफवाह से बचने तथा तथ्य सामने आने तक स्थिति को नियंत्रित रखने पर जोर दिया है।

    घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद संरचना की प्रकृति, उसकी गहराई और संभावित पुराने निर्माण से संबंध जैसी जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। तब तक इसे लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

  • सरकारी जमीन पर अवैध घोषित मस्जिद हटाई गई, सहारनपुर में पीएसी और आरआरएफ तैनाती के बीच प्रशासन ने कार्रवाई की

    सरकारी जमीन पर अवैध घोषित मस्जिद हटाई गई, सहारनपुर में पीएसी और आरआरएफ तैनाती के बीच प्रशासन ने कार्रवाई की


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने अदालत के आदेश के अनुपालन में ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई। प्रशासन की ओर से पहले ही अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया था, ताकि कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।

    मस्जिद को लेकर विवाद सरकारी जमीन पर निर्माण किए जाने के आरोप से जुड़ा था। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मामले की सुनवाई के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित इस निर्माण को अवैध घोषित किया था। अदालत ने संबंधित मामले में 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद मस्जिद पक्ष की ओर से आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में अपील दाखिल की गई थी।

    मस्जिद कमेटी ने 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत का रुख किया था। वहां से भी उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन के सामने अदालत के आदेश को लागू करने का रास्ता साफ हुआ। शनिवार को सुबह प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई और मस्जिद का निर्माण हटा दिया गया।

    इस विवाद की शुरुआत 24 मार्च 2025 को हुई थी। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में सार्वजनिक परिसर में स्थित निर्माण को लेकर पीपी एक्ट के तहत याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान निर्माण की वैधता और जमीन के स्वामित्व से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया। अदालत के आदेश के बाद यह मामला लगातार कानूनी प्रक्रिया में बना रहा।

    ध्वस्तीकरण से पहले सहारनपुर में सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए गए थे। पांच कंपनी पीएसी और आरआरएफ के जवानों की तैनाती की गई। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस ने गश्त बढ़ाने के साथ फ्लैग मार्च भी किया। कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास आने-जाने वालों पर निगरानी रखी गई, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल को तैनात किया गया।

    इसी बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर रोके जाने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान पुलिस की टीम उनके आवास पर पहुंची और उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद उन्हें घर में नजरबंद रखा गया। सांसद के सहारनपुर जाने के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा संबंधी कदम उठाया गया।

    सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि ध्वस्तीकरण से पहले नोटिस और अपील सहित निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाह पर भरोसा नहीं करने की अपील की। साथ ही सोशल मीडिया पर भ्रामक या अफवाह फैलाने वाली सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।

    प्रशासन की कार्रवाई के बाद भी क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती जारी रखी गई है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में निगरानी बनाए रखी जा रही है। पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन ने कार्रवाई को न्यायिक आदेश के अनुपालन से जुड़ा बताया है, जबकि मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।