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  • चढ़ावा गबन मामले पर गरमाई सियासत, पवन पांडेय बोले- 'बुलडोजर नहीं चला, न्याय में भी दो आंख'

    चढ़ावा गबन मामले पर गरमाई सियासत, पवन पांडेय बोले- 'बुलडोजर नहीं चला, न्याय में भी दो आंख'


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने एक बार फिर इस मुद्दे पर भाजपा सरकार और ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं ने करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंचाई है।

    पवन पांडेय ने कहा कि इतिहास में महमूद गजनवी पर कई बार मंदिरों को लूटने के आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन उनके अनुसार राम मंदिर चढ़ावा मामले में जिस तरह की कथित घटनाएं सामने आई हैं, वे उससे भी अधिक गंभीर हैं। उन्होंने कहा, “40 दिनों में 70 बार लूटा, इन्होंने तो लूटने में गजनवी को भी पीछे छोड़ दिया।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जिन लोगों पर राम मंदिर की व्यवस्था, सुरक्षा और श्रद्धालुओं के चढ़ावे की जिम्मेदारी थी, वही लोग कथित तौर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहे। उनके अनुसार यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ विश्वासघात है।

    पूर्व मंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अपराधों पर सख्त कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन इस मामले में वैसी कठोर कार्रवाई दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि यदि यह इतना बड़ा मामला है तो निष्पक्ष और तेज जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    पवन पांडेय ने कहा कि भगवान श्रीराम का मंदिर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और करोड़ों लोगों की आस्था के आधार पर बना है। ऐसे में यदि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े किसी भी प्रकार के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रह सके।

    राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर पहले भी विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से जांच की मांग उठाई जा चुकी है। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई कर रही हैं। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

  • सपा में जल्द हो सकता है बड़ा राजनीतिक बदलाव, ओपी राजभर के दावों ने अटकलों को दी हवा

    सपा में जल्द हो सकता है बड़ा राजनीतिक बदलाव, ओपी राजभर के दावों ने अटकलों को दी हवा

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर संभावित टूट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख और एनडीए सहयोगी ओमप्रकाश राजभर के लगातार दावों ने इस चर्चा को और हवा दे दी है कि सपा में जल्द बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है।

    राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि सपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर जल्द सामने आएगा। उनके अनुसार, सपा के ‘बागी सांसदों’ के समूह का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के उस क्षेत्र का एक नेता करेगा, जिसे वह ‘बागी भूमि’ कहते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में सपा कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर कुछ वर्गों में नाराजगी बढ़ी है, जिससे पार्टी के अंदर असंतोष और गहरा गया है।

    राजभर ने अपने बयान में यह भी कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को अब “सांसद बचाओ अभियान” शुरू करना चाहिए और नाराज सांसदों से मिलकर स्थिति संभालनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर कई सांसद असंतुष्ट हैं और समय के साथ बड़ा बदलाव सामने आ सकता है।

    अखिलेश यादव का पलटवार
    राजभर के इन बयानों पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भविष्य की भविष्यवाणी करने वालों को पहले अपनी पार्टी की स्थिति देखनी चाहिए। अखिलेश ने एनडीए सहयोगियों पर सीट बंटवारे को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा गठबंधन के भीतर असंतोष की वास्तविकता को छिपाने की कोशिश की जा रही है।

    राजभर का जवाब और तीखी बयानबाजी
    अखिलेश की प्रतिक्रिया के बाद ओमप्रकाश राजभर ने एक और पोस्ट में अपने हमले और तेज कर दिए। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि अखिलेश यादव राजनीतिक रूप से अधिक समझदार हैं, लेकिन अब उनकी यह धारणा बदल गई है। राजभर ने दावा किया कि सपा के अंदरूनी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले समय में कई चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे भविष्य में कुछ और राजनीतिक खुलासे कर सकते हैं।

    पुराने मुद्दों का भी जिक्र
    अपने बयान में राजभर ने 2008 के चर्चित ‘वोट के बदले नोट’ प्रकरण का भी उल्लेख किया और उस दौर की राजनीति पर सवाल उठाए। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई नया प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

  • मैनपुरी में बड़ा राजनीतिक-सांस्कृतिक दृश्य: डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने टेका माथा, मांगी माफी

    मैनपुरी में बड़ा राजनीतिक-सांस्कृतिक दृश्य: डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने टेका माथा, मांगी माफी


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही हलकों में चर्चा तेज कर दी। बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी गौ रक्षा यात्रा के तहत जिले में पहुंचे थे। इसी दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव उनसे मिलने पहुंचीं और उनके चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    कार्यक्रम के दौरान डिंपल यादव ने शंकराचार्य को शॉल भेंट की और जमीन पर बैठकर उनसे बातचीत की। इस मुलाकात में उन्होंने सबसे पहले कन्नौज की उस घटना का जिक्र किया, जिसमें शंकराचार्य को कथित तौर पर रात सड़क पर गुजारनी पड़ी थी। डिंपल यादव ने इस घटना को लेकर खेद जताते हुए माफी भी मांगी और कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा।

    डिंपल यादव ने शंकराचार्य के गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने के अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मुद्दे पर उनके साथ हैं और आगे भी सहयोग करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से शंकराचार्य का अपमान हुआ है, वह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। अपने बयान में डिंपल यादव ने कहा कि “प्रकृति ऐसे अपमान का जवाब जरूर देती है।”

    मुलाकात के दौरान शंकराचार्य ने भी अपनी यात्रा और गौ रक्षा आंदोलन की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का है और जब तक इसे संवैधानिक मान्यता नहीं मिलती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान कई स्थानों पर प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका अभियान नहीं रुकेगा।

    करीब एक घंटे चली इस मुलाकात के बाद शंकराचार्य किशनी के लिए रवाना हो गए। इससे पहले वे सपा नेता और पूर्व विधायक राजकुमार यादव के मैरिज हॉल में ठहरे हुए थे। बातचीत के दौरान डिंपल यादव ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव को इस पूरे घटनाक्रम का दुख है और यदि उन्हें जानकारी होती तो बेहतर व्यवस्थाएं की जातीं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर इसे धार्मिक संत के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी समझा जा रहा है।

    कुछ महीने पहले ही लखनऊ में अखिलेश यादव ने भी शंकराचार्य से मुलाकात की थी, जहां वह उनके सामने जमीन पर बैठे नजर आए थे। उसी मुलाकात के बाद से दोनों के बीच संवाद और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा लगातार सुर्खियों में बनी हुई है।

    मैनपुरी की यह मुलाकात अब सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखी जा रही है, जिस पर आगे भी चर्चाएं तेज रहने की संभावना है।

  • रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस

    रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस




    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर रामचरितमानस को लेकर समाजवादी पार्टी का रुख चर्चा में है। लोकसभा चुनाव से पहले जिस मुद्दे पर सपा के भीतर विवाद और राजनीतिक टकराव देखने को मिला था, अब उसी पर पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का रुख काफी नरम और अलग नजर आ रहा है।

    हाल ही में लखनऊ में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक वकील के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद मामला फिर सुर्खियों में आया। बताया गया कि वकील के हाथ में रामचरितमानस की प्रति थी। इसी घटना के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए रामचरितमानस को “सांस्कृतिक संविधान का एक रूप” और “नैतिक आचार संहिता” बताया, जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।

    पहले विवाद, अब नया रुख
    लोकसभा चुनाव 2024 से पहले समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस के कुछ दोहों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इन दोहों को महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति अपमानजनक बताते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी। इस बयान के बाद बीजेपी ने सपा पर तीखा हमला बोला था और मामला राजनीतिक रूप से काफी गरमा गया था।

    बाद में यह विवाद इतना बढ़ा कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उस समय अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद पर खुलकर कोई सख्त रुख नहीं अपनाया था, लेकिन अब उनका बदला हुआ स्टैंड राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    चुनावी रणनीति या जनभावना का असर?
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अपनी छवि को व्यापक जनसमर्थन के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रही है। रामचरितमानस जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर नरम रुख अपनाकर सपा आम मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

    वहीं बीजेपी का आरोप है कि सपा राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए अब धार्मिक प्रतीकों का सहारा ले रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे हैं, वे अब धार्मिक ग्रंथों का सम्मान दिखा रहे हैं।

    विपक्ष और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
    इस मुद्दे पर कांग्रेस ने अखिलेश यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि रामचरितमानस भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का हिस्सा है और इसे राजनीति से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। वहीं बसपा ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी से दूरी बनाए रखी है।

    यूपी की सियासत में नया मोड़
    रामचरितमानस को लेकर सपा के बदले सुर ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सांस्कृतिक और धार्मिक विमर्श को केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।फिलहाल यह साफ है कि यूपी की राजनीति में धर्म और संस्कृति एक बार फिर रणनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं।

  • लखनऊ मेयर विवाद: हाई कोर्ट के आदेश के बाद सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को दिलाई गई शपथ, मेयर के अधिकार पहले ही सीज

    लखनऊ मेयर विवाद: हाई कोर्ट के आदेश के बाद सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को दिलाई गई शपथ, मेयर के अधिकार पहले ही सीज




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    लखनऊ नगर निगम में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आखिरकार सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिला दी गई। यह शपथ मेयर सुषमा खर्कवाल द्वारा हाई कोर्ट के आदेश के बाद कराई गई, क्योंकि अदालत ने समय सीमा तय करते हुए शपथ न दिलाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

    दरअसल, पार्षद निर्वाचित होने के करीब 5 महीने बाद भी ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिलाई गई थी। मामला लगातार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया था कि 29 मई तक हर हाल में शपथ दिलाई जाए, अन्यथा मेयर को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा और व्यक्तिगत हलफनामा देना होगा।

    कोर्ट ने इस मामले में मेयर सुषमा खर्कवाल के अधिकार भी सीज कर दिए थे, जिससे प्रशासनिक स्तर पर दबाव और बढ़ गया था। गुरुवार को आए आदेश के बाद मामला और तेज हो गया और रविवार को मेयर ने स्वयं सपा पार्षद को शपथ दिलाई।

    जानकारी के अनुसार, मेयर ने पहले अपनी तबीयत खराब होने और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी थी, लेकिन शनिवार को डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने शपथ प्रक्रिया पूरी करने की पुष्टि की।

    यह पूरा विवाद 2023 के नगर निकाय चुनाव से जुड़ा है। वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज-3 में भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने सपा प्रत्याशी ललित किशोर तिवारी को हराया था। बाद में सपा प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार पर शपथ पत्र में गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।

    सुनवाई के बाद कोर्ट ने भाजपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द करते हुए ललित किशोर तिवारी को विजेता घोषित किया था। इसके बावजूद शपथ न दिलाए जाने को लेकर मामला लगातार विवादों में रहा, जो अब जाकर कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुआ।

  • यूपी में सपा सरकार बनी तो पहले 90 दिन में ये करेंगे: अखिलेश यादव का बड़ा प्लान

    यूपी में सपा सरकार बनी तो पहले 90 दिन में ये करेंगे: अखिलेश यादव का बड़ा प्लान



    नई दिल्ली। अखिलेश यादव ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अगर राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो पहले 90 दिनों के भीतर कई अहम फैसले लिए जाएंगे। उन्होंने यह बात PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) ऑडिट को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।इस बैठक में Dimple Yadav और Shivpal Singh Yadav समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    90 दिन में क्या होगा प्लान?
    अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार बनने पर सबसे पहले 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में “न्याय” दिलाने का काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि 90 दिनों के भीतर जातिगत जनगणना कराने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।

    आरक्षण और भर्ती को लेकर आरोप
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आरक्षण व्यवस्था में गड़बड़ी कर रही है और भर्तियों में PDA वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने 69,000 शिक्षक भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें आरक्षण नियमों का सही पालन नहीं हुआ।

    बीजेपी पर तीखा हमला
    सपा प्रमुख ने कहा कि आरक्षण को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और इसे उन्होंने “संवैधानिक अधिकारों पर हमला” बताया। उन्होंने दावा किया कि PDA समाज को नौकरियों से वंचित किया जा रहा है और इसे लेकर सपा सरकार बनने पर सख्त कदम उठाएगी।

    सपा का दावा: नई नीति का रोडमैप तैयार
    अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी ने PDA आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर एक विस्तृत डॉक्यूमेंट तैयार किया है, जिसे भविष्य की सरकार में लागू किया जाएगा

  • हरिद्वार में होगा प्रतीक यादव का अस्थि विसर्जन, अपर्णा यादव परिवार संग होंगी रवाना; यादव परिवार में पसरा मातम

    हरिद्वार में होगा प्रतीक यादव का अस्थि विसर्जन, अपर्णा यादव परिवार संग होंगी रवाना; यादव परिवार में पसरा मातम



    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव के निधन के बाद अब परिवार हरिद्वार में अस्थि विसर्जन की तैयारी में जुट गया है। जानकारी के मुताबिक, उनकी पत्नी अपर्णा यादव जल्द ही पूरे परिवार के साथ हरिद्वार रवाना होंगी, जहां गंगा घाट पर विधि-विधान के साथ अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा।

    प्रतीक यादव का बुधवार तड़के निधन हो गया था। उन्हें गंभीर हालत में लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को लखनऊ के भैंसाकुंड धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शुक्रवार को फूल चुनने की रस्म पूरी की गई, जिसके बाद अब परिवार हरिद्वार जाकर गंगा में अस्थि विसर्जन करेगा।

    सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें फेफड़ों से जुड़ी दिक्कत बताई जा रही थी और कुछ समय पहले उनका इलाज मेदांता अस्पताल में भी चला था। वहीं, पोस्टमॉर्टम से पहले उनके शरीर पर चोट के निशान मिलने की चर्चा भी सामने आई, जिसके बाद मामले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि परिवार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

    बताया जा रहा है कि घटना के समय अपर्णा यादव लखनऊ में मौजूद नहीं थीं। वह असम के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गई थीं। पति के निधन की सूचना मिलते ही वह तुरंत लखनऊ लौट आईं।

    प्रतीक और अपर्णा यादव की शादी साल 2011 में हुई थी। दोनों एक-दूसरे को स्कूल के दिनों से जानते थे और बाद में यह दोस्ती रिश्ते में बदल गई। परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक, दोनों के बीच गहरी समझ और मजबूत रिश्ता था। अब प्रतीक यादव के निधन से परिवार और समर्थकों में शोक का माहौल है।

  • लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक

    लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक



    नई दिल्ली। लखनऊ में समाजवादी राजनीति के बीच शुक्रवार को भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जब वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अदीब आजम खान ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात हाल ही में दिवंगत हुए मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए की गई।

    मुलाकात के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “दुख की घड़ी में सब साथ हैं।” इस मुलाकात को राजनीतिक औपचारिकता से ज्यादा मानवीय संवेदना और आपसी समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

    बता दें कि प्रतीक यादव का 38 वर्ष की उम्र में बुधवार को हृदय और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के चलते निधन हो गया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को लखनऊ के बैकुंठ धाम में किया गया, जहां उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, अंतिम यात्रा विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास से शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में परिजन और समर्थक शामिल हुए।

    आजम परिवार की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब समाजवादी पार्टी पहले से ही शोक की स्थिति से गुजर रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे एकजुटता और संवेदना के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • दुखद खबर: Akhilesh Yadav के भाई प्रतीक यादव का निधन, डॉक्टरों ने कही बड़ी बात

    दुखद खबर: Akhilesh Yadav के भाई प्रतीक यादव का निधन, डॉक्टरों ने कही बड़ी बात


    नई दिल्ली। लखनऊ  समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के छोटे भाई Prateek Yadav का बुधवार सुबह निधन हो गया। 38 वर्षीय प्रतीक को सुबह करीब 6 बजे गंभीर हालत में लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर फैल गई।

    सिविल अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डीसी पांडेय के अनुसार, जब प्रतीक यादव को अस्पताल लाया गया, तब तक उनकी धड़कन पूरी तरह बंद हो चुकी थी और पल्स भी डाउन थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेजा गया। प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम में शरीर पर किसी तरह की बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। हालांकि मौत के कारण स्पष्ट नहीं होने की वजह से डॉक्टरों ने बिसरा सुरक्षित रख लिया है, ताकि आगे की जांच की जा सके।

    घटना के समय उनकी पत्नी और भाजपा नेता Aparna Yadav असम में थीं। वे मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गुवाहाटी गई थीं। पति के निधन की सूचना मिलते ही वे तुरंत लखनऊ पहुंचीं और सीधे घर रवाना हुईं।

    इस दौरान Dimple Yadav, Shivpal Singh Yadav समेत कई बड़े नेता और परिवारजन प्रतीक यादव के आवास पहुंचे। Akhilesh Yadav भी पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे और परिवार के सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह परिवार के लिए बेहद दुखद क्षण है और आगे जो भी निर्णय परिवार लेगा, वही मान्य होगा।

    जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें 30 अप्रैल को गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक वे पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, जिसमें फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जम जाता है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है।

    Prateek Yadav राजनीति से दूर रहते थे और रियल एस्टेट व फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे। उन्होंने करीब 14 साल पहले Aparna Yadav से लव मैरिज की थी। दोनों की दो बेटियां हैं।

    फिलहाल उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए लोगों का पहुंचना जारी है। प्रशासन और पुलिस भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

  • X पर वायरल पोस्ट से गरमाई जौनपुर की सियासत: सपा सांसद प्रिया सरोज पर क्षेत्र से दूरी के गंभीर आरोप

    X पर वायरल पोस्ट से गरमाई जौनपुर की सियासत: सपा सांसद प्रिया सरोज पर क्षेत्र से दूरी के गंभीर आरोप




    नई दिल्ली। जौनपुर की राजनीति में समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स X पर एक कथित सपा समर्थक का पोस्ट वायरल होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। इस पोस्ट में सांसद पर क्षेत्र में सक्रिय न रहने और जनता के कामों से दूरी बनाए रखने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    वायरल पोस्ट में यूजर ने दावा किया है कि उन्होंने चुनाव के समय प्रिया सरोज और उनके परिवार के समर्थन में प्रचार किया था, लेकिन जीत के बाद सांसद क्षेत्र में कम सक्रिय रहती हैं और ज्यादा समय कथित तौर पर नोएडा और लखनऊ में बिताती हैं। पोस्ट में यह भी लिखा गया है कि अगर भविष्य में फिर से उन्हें टिकट दिया गया तो वह उनके खिलाफ प्रचार करेंगे।

    यह पोस्ट सीधे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को टैग करते हुए लिखा गया है, जिसके बाद मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। पोस्ट वायरल होने के बाद अलग-अलग यूजर्स की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ ने आरोपों का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे व्यक्तिगत नाराजगी या राजनीतिक बयान बताया।

    कुछ अन्य यूजर्स ने भी सांसद की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में अधिक समय देना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने इसे पार्टी के अंदरूनी असंतोष के संकेत के रूप में भी देखा है।

    फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रिया सरोज या समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह बहस जौनपुर की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है और इसे आने वाले समय में राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।