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  • आजम खान के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, जेल में मुलाकात के बाद दिया बड़ा बयान, पत्रकारों के सवाल पर दिखे नाराज

    आजम खान के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, जेल में मुलाकात के बाद दिया बड़ा बयान, पत्रकारों के सवाल पर दिखे नाराज


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जेल पहुंचकर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि आजम खान पहले भी आजम थे आज भी आजम हैं और आगे भी आजम रहेंगे। उन्होंने कहा कि फर्जी मुकदमों में इतनी ताकत नहीं है कि आजम खान को लंबे समय तक जेल में रखा जा सके। अखिलेश के इस बयान को आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन और राजनीतिक एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    जेल से बाहर निकलने के बाद अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आजम खान के साथ अपनी मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया दी। हालांकि जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि आजम खान से मिलने आने में करीब 11 महीने का समय क्यों लग गया तो वह सवाल पर नाराज होते दिखाई दिए। इस दौरान बातचीत का वीडियो भी सामने आया है। मुलाकात के बाद उनके बयान और सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई।

    आजम खान समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और रामपुर की राजनीति में उनका लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों और जेल में रहने को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार बहस होती रही है। समाजवादी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखती रही है जबकि आरोपों और कानूनी मामलों का फैसला अदालतों की प्रक्रिया के तहत होता है। अखिलेश यादव का ताजा बयान इसी राजनीतिक संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

    अखिलेश यादव ने अपने बयान में आजम खान के राजनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्हें फर्जी मुकदमों के जरिए दबाया नहीं जा सकता। समाजवादी पार्टी लंबे समय से आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कानूनी कार्रवाई के नाम पर उनके वरिष्ठ नेता को निशाना बनाया गया है। हालांकि किसी मुकदमे को फर्जी या सही मानने का अंतिम फैसला संबंधित अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    रामपुर जेल में हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खास तौर पर इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने लंबे अंतराल के बाद आजम खान से मुलाकात की। पत्रकारों ने इसी अवधि को लेकर सवाल किया था। सवाल के जवाब में अखिलेश की नाराजगी ने इस मुलाकात को और चर्चा में ला दिया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का विस्तृत ब्यौरा सामने नहीं आया है।

    आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख मुस्लिम नेता के रूप में पहचाने जाते हैं और रामपुर से उनका गहरा राजनीतिक जुड़ाव रहा है। उनके जेल में रहने और कानूनी मामलों को लेकर समाजवादी पार्टी के समर्थक लगातार प्रतिक्रिया देते रहे हैं। अखिलेश यादव का यह दौरा पार्टी के भीतर आजम खान के महत्व को दोहराने वाला कदम माना जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व अपने वरिष्ठ नेता के साथ खड़े होने का संदेश देना चाहता है।

    फिलहाल इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव के बयान और पत्रकारों के सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया चर्चा में है। आजम खान से मिलने के बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आजम खान का राजनीतिक प्रभाव खत्म नहीं हुआ है। वहीं मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई और आगे पार्टी इस मामले को लेकर क्या रणनीति अपनाएगी इस पर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

  • यूपी विधान परिषद चुनाव में फर्जी वोटिंग के आरोपों से गरमाया माहौल, दोपहर 12 बजे तक 24 फीसदी मतदान

    यूपी विधान परिषद चुनाव में फर्जी वोटिंग के आरोपों से गरमाया माहौल, दोपहर 12 बजे तक 24 फीसदी मतदान


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर हो रहे चुनाव के दौरान शुक्रवार को कई जगह हंगामे और मारपीट की घटनाएं सामने आईं। मुजफ्फरनगर में राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के सामने समाजवादी पार्टी और भाजपा के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। फतेहपुर में दोनों दलों के समर्थकों के बीच जमकर मारपीट हुई। वहीं गोरखपुर में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप लगा है। चुनाव के दौरान फर्जी वोटिंग और मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले।

    मुजफ्फरनगर में विवाद उस समय बढ़ गया जब राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के सामने सपा और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी मारपीट में बदल गई। सपा समर्थकों का आरोप था कि मंत्री वोट डालने के दौरान कई लोगों को लेकर मतदान केंद्र के अंदर गए। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    फतेहपुर में खागा तहसील क्षेत्र के विजयीपुर ब्लॉक परिसर के बाहर शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे हंगामा हुआ। सपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेताओं पर फर्जी वोटिंग कराने का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे को दौड़ाकर पीटने लगे। करीब आधे घंटे तक चले विवाद के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराया। इस घटना ने चुनाव के दौरान सुरक्षा और मतदान केंद्रों के आसपास व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

    गोरखपुर में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप सामने आया। बताया गया कि वह मतदान केंद्र के बाहर मीडिया को बयान दे रहे थे। इसी दौरान उनके साथ विवाद हुआ। उधर अलीगढ़ में राज्यमंत्री सुरेंद्र दिलेर के मतदान केंद्र के अंदर जाने को लेकर सपा समर्थकों और एजेंटों ने आपत्ति जताई। यहां भाजपा प्रत्याशी के एजेंट बनकर पहुंचे दो युवकों को पकड़े जाने की भी जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं को लेकर संबंधित पक्षों के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    वाराणसी में मछलीशहर से सपा विधायक रागिनी सोनकर ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक यानी डीआईओएस पर धमकी देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि स्कूलों की मान्यता रद्द करने और शिक्षकों की नौकरी खत्म करने जैसी बातें कही जा रही हैं। दूसरी ओर इटावा के सैफई में सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने अपनी पत्नी सरला यादव के साथ मतदान किया। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी और कुछ मतदाताओं के वोट नहीं पड़ पाने का मुद्दा उठाया। शिवपाल ने कहा कि जहां भी अनियमितता हुई है वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के बयान को भी अनुशासनहीनता के दायरे में बताया और कहा कि इस पर फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे।

    उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक खंड की छह और स्नातक खंड की पांच सीटों पर कुल 152 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इन सीटों के लिए 14.28 लाख मतदाता पंजीकृत हैं और मतदान कराने के लिए 2697 केंद्र बनाए गए हैं। शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। बरेली-मुरादाबाद क्षेत्र में मतदान का स्तर अपेक्षाकृत अधिक बताया गया जबकि लखनऊ और वाराणसी समेत कई क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत इससे कम रहा। मतदान शाम चार बजे तक निर्धारित है और मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। कानपुर कानपुर देहात और उन्नाव में इस चरण में मतदान नहीं हो रहा है। इन क्षेत्रों में चुनाव वर्ष 2029 में प्रस्तावित है। चुनावी प्रक्रिया के बीच सामने आए विवादों के कारण अब प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है।

  • रामपुर जेल में एक घंटे तक अखिलेश-आजम की मुलाकात, भाजपा पर बरसे सपा प्रमुख, बोले- आजम के परिवार के साथ हुआ अन्याय

    रामपुर जेल में एक घंटे तक अखिलेश-आजम की मुलाकात, भाजपा पर बरसे सपा प्रमुख, बोले- आजम के परिवार के साथ हुआ अन्याय


    नई दिल्ली। रामपुर जेल में गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक रिश्ता बताया। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि आजम खान उनके दिल से जुड़े हुए हैं और उनके साथ उनका जुड़ाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। इस मुलाकात को लेकर सियासी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने इस दौरान आजम खान के परिवार पर कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर निशाना साधा और कई गंभीर आरोप लगाए।

    अखिलेश यादव गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे रामपुर पहुंचे। उनका हेलीकॉप्टर जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बने हेलीपैड पर उतरा। यहां से वह कार के जरिए सीधे रामपुर जेल पहुंचे। उनके साथ आजम खान के बड़े बेटे अदीब भी कार में मौजूद थे लेकिन वह जेल के अंदर मुलाकात के लिए नहीं गए। जेल प्रशासन की व्यवस्था के बीच अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत करीब एक घंटे तक चली। जानकारी के मुताबिक अखिलेश यादव दोपहर करीब 1 बजकर 42 मिनट पर जेल के अंदर दाखिल हुए और 2 बजकर 51 मिनट के आसपास बाहर निकले। एक साल के भीतर अखिलेश यादव की आजम खान से यह तीसरी मुलाकात बताई जा रही है।

    जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के परिवार ने जितना अन्याय झेला है वैसा किसी राजनीतिक परिवार के साथ नहीं हुआ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का पढ़ाई लिखाई और शिक्षा से कोई विशेष जुड़ाव नहीं है। जौहर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस विश्वविद्यालय के सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत है। अखिलेश यादव के इस बयान को आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन और उनके परिवार के साथ खड़े रहने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पैन कार्ड से जुड़े मामले में रामपुर जेल में बंद हैं। इस मामले में एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने दोनों को सात सात साल की सजा सुनाई थी। आजम खान ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। ऐसे में उनकी कानूनी लड़ाई और परिवार से जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं। अखिलेश यादव पहले भी आजम खान के समर्थन में बयान देते रहे हैं और अब जेल में मुलाकात के बाद उन्होंने एक बार फिर उनके प्रति भावनात्मक जुड़ाव जाहिर किया।

    मुलाकात के दौरान और उसके बाद अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पहले दिन से चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत की बात कहती रही है और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर वोट चोरी के आरोप भी लगाए। हालांकि ये आरोप अखिलेश यादव के राजनीतिक बयान हैं और इनकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों तथा आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को अलग से देखना जरूरी है।

    अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने पर जौहर विश्वविद्यालय के हेलीपैड के पास आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा उनके बड़े बेटे अदीब और अन्य समर्थक मौजूद रहे। सपा के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी उनका स्वागत किया। इस दौरान अदीब जेल के बाहर ही रहे। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान पार्टी और आजम खान के समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल इस मुलाकात का मुख्य संदेश आजम खान के प्रति अखिलेश यादव का भावनात्मक समर्थन रहा जबकि भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर उनके आरोपों ने राजनीतिक बहस को भी हवा दी है। 

  • सपा के साथ गठबंधन पर इमरान मसूद का दोटूक संदेश, बोले- कांग्रेस मजबूती से लड़ेगी चुनाव, पार्टी को खड़ा करना मेरी पहली प्राथमिकता

    सपा के साथ गठबंधन पर इमरान मसूद का दोटूक संदेश, बोले- कांग्रेस मजबूती से लड़ेगी चुनाव, पार्टी को खड़ा करना मेरी पहली प्राथमिकता


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन तथा सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने गठबंधन की रणनीति और पार्टी की चुनावी तैयारियों पर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन यह समझौता सम्मानजनक होना चाहिए। पार्टी ऐसा कोई समझौता नहीं करेगी जिससे यह संदेश जाए कि कांग्रेस ने आत्मसमर्पण कर दिया है। मसूद के मुताबिक कांग्रेस उत्तर प्रदेश में मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी और सरकार बनाने का लक्ष्य रखेगी।
    लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय में 11 अक्टूबर को पदभार ग्रहण समारोह के दौरान हुए हंगामे पर भी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की खबरें सामने आई थीं। इस विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में मसूद ने कहा कि कभी-कभी कार्यकर्ताओं से गलतियां हो जाती हैं। उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। मसूद ने कहा कि पिछले चुनाव में अजय राय ने मेहनत करके पार्टी को खड़ा करने का काम किया था और उनके योगदान को किसी भी स्थिति में कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।
    समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं पर मसूद ने कहा कि इस बारे में अंतिम फैसला पार्टी का नेतृत्व करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की कोशिश सम्मानजनक समझौते की है ताकि गठबंधन मजबूत बना रहे। सीटों की संख्या को लेकर अलग-अलग चर्चाओं के बीच उन्होंने किसी निश्चित आंकड़े पर मुहर नहीं लगाई। मसूद के अनुसार अभी बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़नी है और उम्मीदवारों की सूची को लेकर भी समाजवादी पार्टी की ओर से कोई औपचारिक मांग नहीं की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अक्टूबर के आखिर तक सूची को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।
    जब उनसे पूछा गया कि यदि गठबंधन नहीं हुआ तो क्या कांग्रेस सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इस तरह की संभावना पर विचार करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक गठबंधन कायम है और पार्टी इसी आधार पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल कांग्रेस के लिए अनुकूल है और पार्टी 2027 में मजबूत प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है।
    पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल दो सीटों पर सिमट गई थी। इस बार पार्टी के लक्ष्य पर बोलते हुए मसूद ने कहा कि राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं। उन्होंने दिल्ली की राजनीति और आम आदमी पार्टी के पिछले चुनावी प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक नैरेटिव चुनाव के नतीजों पर असर डाल सकता है। मसूद का दावा है कि राहुल गांधी ने देशभर में जिस तरह का नैरेटिव खड़ा किया है उससे कांग्रेस की स्थिति पहले के मुकाबले मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के सहयोगी भी राहुल गांधी के साथ खड़े हैं।
    इमरान मसूद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता किसी सरकारी पद या मुख्यमंत्री अथवा उपमुख्यमंत्री बनने की नहीं है। उन्होंने कहा कि वह किसी पद के उम्मीदवार नहीं हैं और उनका काम संगठन को मजबूत करना तथा पार्टी को चुनाव के लिए तैयार करना है। कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने इसे पार्टी का भरोसा बताया और कहा कि वह इस उम्मीद पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। टिकट वितरण में अपनी भूमिका को लेकर उन्होंने कहा कि इसका फैसला भी पार्टी नेतृत्व ही करेगा।
    मसूद ने कांग्रेस की राजनीति पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है। उनके अनुसार अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट करना है। ऐसे में कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के बंटवारे पर होने वाली बातचीत आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति की अहम कड़ी बन सकती है।
  • योगी आदित्यनाथ का कांग्रेस-सपा पर तीखा हमला, 9 लाख से ज्यादा किसानों को राहत, बोले- अब बिचौलियों की नहीं चलेगी

    योगी आदित्यनाथ का कांग्रेस-सपा पर तीखा हमला, 9 लाख से ज्यादा किसानों को राहत, बोले- अब बिचौलियों की नहीं चलेगी


    गोरखपुर । गोरखपुर में सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को राहत राशि वितरित करने के साथ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 9 लाख 18 हजार 91 किसानों के बैंक खातों में 493 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की। यह रकम बाढ़ और अतिवृष्टि के साथ ओलावृष्टि तथा चक्रवात के कारण फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए दी गई है। सरकार के मुताबिक हाल के दिनों में खराब मौसम के कारण किसानों की फसलों को भारी क्षति पहुंची है। ऐसे में प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर देश में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए यदि अराजकता फैलाने से बाज नहीं आती है तो जनता उसका बचा हुआ राजनीतिक अस्तित्व भी समाप्त कर सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को अपने नेतृत्व में बदलाव करने की जरूरत है। जिस नेतृत्व पर जनता का विश्वास कमजोर पड़ गया है उसे बदलने पर विचार करना चाहिए। उनके इस बयान को कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक रणनीति और नेतृत्व पर निशाने के रूप में देखा जा रहा है।
    मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर भी किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने 2014 में आए हुदहुद चक्रवात का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय किसानों की मदद के लिए केंद्र सरकार की ओर से 3200 करोड़ रुपये भेजे गए थे। योगी के मुताबिक इस राशि में से किसानों तक केवल 800 करोड़ रुपये ही पहुंचे और बाकी रकम का सही इस्तेमाल नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों के हक का पैसा तत्कालीन सपा सरकार के लोगों ने हड़प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों का श्राप सपा को ले डूबा और इसी वजह से उसे सत्ता से बाहर होना पड़ा। ये आरोप मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान लगाए।
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार ने हुदहुद चक्रवात से जुड़े मुआवजे की जांच कराई थी। उनके अनुसार जांच में सामने आया कि कई किसानों को पूरी सहायता राशि नहीं मिली थी। इसके बाद अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था कर प्रभावित किसानों के खातों में भुगतान कराया गया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मौजूदा सरकार प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रभावित किसानों को जल्द राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
    उन्होंने कहा कि हाल ही में चक्रवात और भारी बारिश के कारण फसलों के साथ जनजीवन और पशुधन को भी नुकसान पहुंचा है। सरकार प्रभावित किसानों को फसल क्षति के अलावा जनहानि और मकानों को हुए नुकसान के लिए भी सहायता उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब 500 करोड़ रुपये की राहत राशि सीधे खातों में भेजी जा रही है। उनके मुताबिक अब तक किसानों को लगभग 1000 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।
    मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आकाशीय बिजली से होने वाली जनहानि रोकने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया जा रहा है। यह व्यवस्था मोबाइल फोन के माध्यम से बिजली गिरने की चेतावनी देकर लोगों को सतर्क करती है। उन्होंने कहा कि आकाशीय बिजली की चपेट में आने से किसी व्यक्ति की मौत होने पर निर्धारित सहायता राशि के तहत 24 घंटे के भीतर पांच लाख रुपये उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। योगी ने अधिकारियों को बाढ़ से प्रभावित कटान वाले इलाकों में तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश भी दिए।
    कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि डीबीटी के माध्यम से 9 लाख से अधिक किसानों को 493 करोड़ रुपये से ज्यादा की राहत राशि दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार ने पिछली सरकारों की तुलना में धान और गेहूं सहित दूसरी फसलों की खरीद में बढ़ोतरी की है और कृषि बजट भी तीन गुना से अधिक बढ़ाया गया है। कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने मिशन शक्ति के छठे चरण के तहत जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रैली में 500 से अधिक महिलाएं शामिल हुईं। सरकार ने राहत वितरण और महिला सुरक्षा जागरूकता अभियान को अपने जनकल्याणकारी प्रयासों का हिस्सा बताया।
  • यूपी में सपा ने बदले दो MLC प्रत्याशी: आगरा से आकाश अग्रवाल, गोरखपुर-फैजाबाद से संजयन त्रिपाठी

    यूपी में सपा ने बदले दो MLC प्रत्याशी: आगरा से आकाश अग्रवाल, गोरखपुर-फैजाबाद से संजयन त्रिपाठी


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपने दो प्रत्याशियों को बदल दिया है। पार्टी ने आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है।

    सपा ने इससे पहले आगरा खंड शिक्षक सीट से प्रकाश चंद्र गुप्ता और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट से कमलेश यादव को प्रत्याशी घोषित किया था। अब दोनों नामों को बदलकर नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि यह बदलाव पहले घोषित प्रत्याशियों की सहमति से किया गया है।

    भाजपा से टिकट नहीं मिला तो संजयन ने दाखिल किया था नामांकन

    गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट पर डॉ. संजयन त्रिपाठी का नाम पहले भाजपा के संभावित दावेदारों में था। भाजपा ने इस सीट से मौजूदा एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी बनाया। इसके बाद संजयन त्रिपाठी ने अलग से चुनाव लड़ने का ऐलान किया था और 2 अक्टूबर को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भी दाखिल किया था।

    अब सपा ने उन्हें अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस घटनाक्रम से गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट का चुनावी मुकाबला भी बदल गया है। ध्रुव कुमार त्रिपाठी को भाजपा ने 29 सितंबर को प्रत्याशी घोषित किया था। वह इस सीट से तीन बार एमएलसी रह चुके हैं।

    आकाश अग्रवाल की भी बदली राजनीतिक भूमिका

    आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. आकाश अग्रवाल मौजूदा निर्दलीय एमएलसी हैं। 2020 के चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा से टिकट की दावेदारी के बीच अब वह सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरेंगे।

    सपा ने पहले इसी सीट से प्रकाश चंद्र गुप्ता को प्रत्याशी बनाया था। वहीं आगरा खंड स्नातक सीट अलग निर्वाचन क्षेत्र है, जहां पार्टी ने पहले शशांक यादव को प्रत्याशी घोषित किया था।

    23 अक्टूबर को मतदान, 27 को मतगणना

    उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 सीटों के लिए चुनाव होना है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।

    अखिलेश बोले- नई पीढ़ी भाजपा से नाराज

    प्रत्याशियों के बदलाव के साथ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2024 में समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने भाजपा को हराया था और इस बार पीडीए की ताकत के सामने भाजपा नहीं टिक पाएगी।

    अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के पीडीए में प्रेम, दया और अपनापन है। पार्टी हर दुखी, पीड़ित और अपमानित व्यक्ति के साथ खड़ी है। उन्होंने भाजपा पर समाज के विभिन्न तबकों के शोषण और उन्हें धोखा देने का आरोप लगाया।

    उन्होंने बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नई पीढ़ी और जेन-जी के पास नौकरी और रोजगार नहीं है तथा बेरोजगारी बढ़ रही है। उनके मुताबिक, नई पीढ़ी भाजपा से नाराज है। अखिलेश ने यह भी कहा कि भाजपा समाजवादी पार्टी के विकास कार्यों का मुकाबला नहीं कर सकती।

  • गोरखपुर में सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बवाल: पूर्व जिलाध्यक्ष को जड़ा थप्पड़, बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद

    गोरखपुर में सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बवाल: पूर्व जिलाध्यक्ष को जड़ा थप्पड़, बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद


    गोरखपुर।
    समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुक्रवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब नेताओं के बीच बैठने की जगह को लेकर शुरू हुई कहासुनी हाथापाई में बदल गई। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में चल रही प्रेस वार्ता के दौरान सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के साथ मारपीट और थप्पड़ मारने की घटना हुई। विवाद के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को बीच में ही रोकना पड़ा।

    घटना के दौरान मौके पर मौजूद पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर स्थिति संभालने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची, हालांकि घटना को लेकर किसी पक्ष की ओर से पुलिस को अभी तहरीर नहीं दी गई है।

    बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद
    दरअसल, लोकतंत्र बचाओ सप्ताह और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का आयोजन सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम की ओर से किया गया था।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा महानगर अध्यक्ष सबीर कुरैशी, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश यादव, पूर्व विधायक विजय बहादुर यादव, काजल निषाद, संजय पहलवान, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री डॉ. मोहसिन, जय प्रकाश यादव और रणजीत पासवान समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे।

    इसी दौरान सपा नेता अंशुमान सिंह के पुत्र कमलेश प्रेस क्लब पहुंचे। उन्होंने काजल निषाद के पास बैठने की कोशिश की, लेकिन वहां जगह नहीं थी। इसके बाद उनकी पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से बातचीत हुई। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

    कहासुनी के बाद हाथापाई, नगीना साहनी को थप्पड़
    मामूली विवाद देखते ही देखते बढ़ गया और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। आरोप है कि इस दौरान नगीना साहनी के साथ मारपीट की गई और उन्हें थप्पड़ भी मारा गया। घटना के दौरान अभद्र भाषा के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

    मौके पर मौजूद पार्टी के अन्य नेताओं ने दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। हंगामे के चलते प्रेस कॉन्फ्रेंस को बीच में ही रोकना पड़ा।

    जिस समय सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम मीडिया के सामने लोकतंत्र और वोट बचाने के मुद्दे पर पार्टी की बात रख रहे थे, उसी दौरान पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष के साथ हुई मारपीट से कार्यक्रम का पूरा माहौल बदल गया। राजनीतिक मुद्दों की जगह प्रेस क्लब में हुए विवाद और थप्पड़ कांड की चर्चा होने लगी।

    जिलाध्यक्ष बोले- निंदनीय घटना, राष्ट्रीय अध्यक्ष को देंगे जानकारी
    घटना पर सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम ने इसे निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को दी जाएगी और इस तरह की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के किसी कार्यक्रम में इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि मामले की जानकारी पार्टी नेतृत्व को देकर उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी।

    सूचना पर पहुंची पुलिस, नहीं मिली तहरीर
    प्रेस क्लब में विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत या तहरीर नहीं दी गई है।

    वहीं, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में प्रेस क्लब के भीतर नेताओं के बीच विवाद और हाथापाई का घटनाक्रम दिखाई दे रहा है। घटना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी के भीतर सामने आए विवाद को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

  • राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    उत्तर प्रदेश: के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो भाजपा नौवां प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। उन्होंने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी।

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को लखनऊ में राज्यसभा चुनाव की तैयारियों और विपक्षी दलों की रणनीति को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अगर राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो भाजपा की ओर से नौवां प्रत्याशी उतारा जाएगा।

    केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा राज्यसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे जा सकते हैं। अगर समाजवादी पार्टी तीसरे उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारती है तो भाजपा भी नौवां प्रत्याशी उतार सकती है। इस बयान के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुकाबले की चर्चा तेज हो गई है।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सीटों के गणित के बीच उम्मीदवारों की संख्या महत्वपूर्ण हो गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावना पर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में भाजपा की ओर से नौवां उम्मीदवार उतारने की बात सामने आने से चुनावी समीकरण और अधिक चर्चा में आ गए हैं।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल साथ मिलकर चुनाव लड़ें या अलग-अलग, भाजपा वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने विपक्षी दलों की एकजुटता और चुनावी रणनीति को लेकर भी अपनी बात रखी।

    चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनावी परिस्थितियों के अनुसार चुनाव व्यवस्था को लेकर अपना रुख बदलते हैं। उनके अनुसार, जब इन दलों को चुनाव में सफलता मिलती है तो उन्हें चुनाव व्यवस्था ठीक दिखाई देती है, जबकि भाजपा या एनडीए को सफलता मिलने पर वही व्यवस्था सवालों के घेरे में बताई जाती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने चुनाव परिणामों को अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने वर्ष 2004 और 2009 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बनने का उल्लेख किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन के प्रदर्शन का भी जिक्र किया।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में, जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, भाजपा गठबंधन ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 सीटें जीती थीं। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 325 सीटें हासिल की थीं, जबकि समाजवादी पार्टी 47 सीटों तक सीमित रह गई थी। मौर्य ने कहा कि चुनावी परिणामों को अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग तरीके से देखना उचित नहीं है।

    विपक्षी दलों की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ये दल अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव परिणामों की व्याख्या करते हैं। उन्होंने इसके लिए “मीठा-मीठा गप-गप और तीखा-तीखा थू-थू” वाली टिप्पणी का इस्तेमाल किया।

    केशव प्रसाद मौर्य ने अपने राजनीतिक और वैचारिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए राम, कृष्ण और विश्वनाथ से जुड़े विषयों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य मंदिर बन चुका है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विश्वनाथ से जुड़े विषय अभी शेष हैं। तेलंगाना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयानों से भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और पार्टी संगठन के विस्तार तथा जनसेवा के संकल्प के साथ काम कर रही है।

  • UP में एक और बड़ा चुनाव: 5 स्नातक और 6 शिक्षक सीटों पर होगा मतदान, 27 अक्टूबर को आएगा MLC चुनाव का रिजल्ट

    UP में एक और बड़ा चुनाव: 5 स्नातक और 6 शिक्षक सीटों पर होगा मतदान, 27 अक्टूबर को आएगा MLC चुनाव का रिजल्ट


    उत्तर प्रदेश  । उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक और महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य की 11 विधान परिषद सीटों के लिए अक्टूबर में चुनाव होना है। इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की तैयारियां तेज हो गई हैं। भाजपा पांच सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम पहले ही घोषित कर चुकी है जबकि छह सीटों पर उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी सभी 11 सीटों के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। विधान परिषद की इन सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा जबकि 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार विधान परिषद की पांच खंड स्नातक और छह खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव कराया जाएगा। इन निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचित मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को पूरा हो रहा है। चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी और उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित की गई है। इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।

    जिन 11 सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है उनमें लखनऊ खंड स्नातक से अवनीश कुमार सिंह वाराणसी से आशुतोष सिन्हा आगरा से डॉक्टर मानवेंद्र प्रताप सिंह मेरठ से दिनेश कुमार गोयल और इलाहाबाद झांसी से डॉक्टर मान सिंह यादव शामिल हैं। इनके अलावा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से उमेश द्विवेदी लाल बिहारी यादव डॉक्टर आकाश अग्रवाल श्रीचंद शर्मा हरि सिंह ढिल्लों और ध्रुव कुमार त्रिपाठी का कार्यकाल भी समाप्त होने जा रहा है।

    भाजपा ने फिलहाल पांच सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। पार्टी ने लखनऊ सीतापुर स्नातक सीट से अवनीश कुमार सिंह लखनऊ सीतापुर शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी बरेली मुरादाबाद सीट से हरि सिंह ढिल्लों आगरा स्नातक सीट से डॉक्टर मानवेंद्र सिंह और मेरठ सहारनपुर सीट से श्रीचंद शर्मा को फिर मौका दिया है। बाकी छह सीटों पर उम्मीदवारों के नाम सामने आने बाकी हैं। पार्टी स्तर पर इन सीटों को लेकर कई दौर की चर्चा हो चुकी है और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन जारी है।

    भाजपा को गोरखपुर शिक्षक सीट इलाहाबाद स्नातक सीट वाराणसी शिक्षक और स्नातक सीट आगरा शिक्षक सीट तथा मेरठ स्नातक सीट पर उम्मीदवार घोषित करने हैं। संभावित नामों को लेकर राजनीतिक और शिक्षक संगठनों से जुड़े कई चेहरे चर्चा में हैं। गोरखपुर शिक्षक सीट से ध्रुव कुमार त्रिपाठी और प्रयागराज स्नातक सीट से सुरेश त्रिपाठी के नाम की चर्चा है। वहीं आगरा स्नातक सीट पर पिछले चुनाव में निर्दलीय जीत हासिल करने वाले आकाश अग्रवाल और कर्मचारी नेता हरिकिशोर तिवारी भी दावेदारी से जुड़े बताए जा रहे हैं।

    दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने सभी 11 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। ऐसे में अब दोनों प्रमुख दलों की चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं। विधान परिषद की इन सीटों का चुनाव विधानसभा चुनाव से अलग निर्वाचन प्रक्रिया के तहत होगा और इसमें संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता मतदान करेंगे।

    चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही प्रदेश के अधिकांश जिलों में आदर्श आचार संहिता के प्रावधान लागू हो गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार कानपुर कानपुर देहात और उन्नाव को छोड़कर उत्तर प्रदेश के बाकी जिलों में विधान परिषद निर्वाचन के संबंध में आचार संहिता के संबंधित प्रावधान प्रभावी हैं। अब 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी और अक्टूबर के अंत तक सभी 11 सीटों पर नए सदस्यों की तस्वीर साफ हो जाएगी।

  • यूपी में सपा के खिलाफ पोस्टर वार, अखिलेश के साथ आजम-अतीक-मुख्तार की तस्वीरें, लिखा- ‘यही चलाते थे सरकार’

    यूपी में सपा के खिलाफ पोस्टर वार, अखिलेश के साथ आजम-अतीक-मुख्तार की तस्वीरें, लिखा- ‘यही चलाते थे सरकार’


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाकर पोस्टर अभियान सामने आया है। सोमवार को लखनऊ समेत कई शहरों में लगाए गए पोस्टरों में अखिलेश यादव के साथ आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें लगाई गई हैं। पोस्टरों पर ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ और ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ जैसे नारे लिखे गए हैं।

    ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का नारा
    इन पोस्टरों में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का स्लोगन भी इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अवध से लेकर पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नामों की सूची वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान के अलावा कई अन्य नाम भी शामिल हैं। पोस्टरों के जरिए सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था और कथित माफिया प्रभाव को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।

    लखनऊ से कई जिलों तक पहुंचे पोस्टर
    लखनऊ के अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई शहरों में ऐसे पोस्टर सामने आने की रिपोर्ट है। इस अभियान में सपा शासनकाल से जुड़े कथित माफिया नेटवर्क को मुद्दा बनाकर अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश की गई है। हालांकि, पोस्टरों पर उन्हें लगाने वाले किसी संगठन या व्यक्ति का नाम स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन पोस्टरों के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    गोंडा में सपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर फाड़े
    गोंडा में अखिलेश यादव के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखाई दी। बालपुर चौराहे पर सपा नेता लालचंद्र गौतम ने एक पोस्टर फाड़ दिया। पोस्टर में आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ वही नारे लिखे गए थे।

    अंबेडकरनगर में तीन जगह होर्डिंग
    अंबेडकरनगर के अकबरपुर में शिव बाबा धाम के आसपास तीन स्थानों पर रात में विवादित होर्डिंग लगाए गए। इनमें अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी, गुलशन यादव, मित्रसेन यादव और रिजवान जहीर की तस्वीरें लगाई गई थीं। होर्डिंग पर ‘माफियाराज और अखिलेश, लूट लिया था पूरा प्रदेश’ लिखा गया था। सुबह जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सपा कार्यकर्ताओं ने इन्हें हटाया। पुलिस और एलआईयू ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की, लेकिन पोस्टर लगाने वालों का पता नहीं चल सका।

    अयोध्या में राम मंदिर मार्ग पर भी पोस्टर
    अयोध्या में राम मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्ग टेढ़ी बाजार ओवरब्रिज पर भी सपा के खिलाफ पोस्टर लगाया गया। इसमें अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ और ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ जैसे नारे लिखे थे। पोस्टर की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने शहर के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पोस्टर-बैनर हटवाए। लगाने वालों की पहचान अभी सामने नहीं आई है।

    चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था पर सियासी घेराबंदी
    2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए इस पोस्टर अभियान में सपा के पिछले शासनकाल की कानून-व्यवस्था और अपराध से जुड़े मुद्दों को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, पोस्टर लगाने वाले की पहचान और उसके पीछे किसी राजनीतिक संगठन की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए पोस्टरों में लगाए गए आरोपों को संबंधित पोस्टर के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में इस अभियान पर सपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि इन पोस्टरों के पीछे कौन है।