Tag: Samajwadi Party

  • लखनऊ मेयर विवाद: हाई कोर्ट के आदेश के बाद सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को दिलाई गई शपथ, मेयर के अधिकार पहले ही सीज

    लखनऊ मेयर विवाद: हाई कोर्ट के आदेश के बाद सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को दिलाई गई शपथ, मेयर के अधिकार पहले ही सीज




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    लखनऊ नगर निगम में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आखिरकार सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिला दी गई। यह शपथ मेयर सुषमा खर्कवाल द्वारा हाई कोर्ट के आदेश के बाद कराई गई, क्योंकि अदालत ने समय सीमा तय करते हुए शपथ न दिलाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

    दरअसल, पार्षद निर्वाचित होने के करीब 5 महीने बाद भी ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिलाई गई थी। मामला लगातार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया था कि 29 मई तक हर हाल में शपथ दिलाई जाए, अन्यथा मेयर को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा और व्यक्तिगत हलफनामा देना होगा।

    कोर्ट ने इस मामले में मेयर सुषमा खर्कवाल के अधिकार भी सीज कर दिए थे, जिससे प्रशासनिक स्तर पर दबाव और बढ़ गया था। गुरुवार को आए आदेश के बाद मामला और तेज हो गया और रविवार को मेयर ने स्वयं सपा पार्षद को शपथ दिलाई।

    जानकारी के अनुसार, मेयर ने पहले अपनी तबीयत खराब होने और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी थी, लेकिन शनिवार को डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने शपथ प्रक्रिया पूरी करने की पुष्टि की।

    यह पूरा विवाद 2023 के नगर निकाय चुनाव से जुड़ा है। वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज-3 में भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने सपा प्रत्याशी ललित किशोर तिवारी को हराया था। बाद में सपा प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार पर शपथ पत्र में गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।

    सुनवाई के बाद कोर्ट ने भाजपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द करते हुए ललित किशोर तिवारी को विजेता घोषित किया था। इसके बावजूद शपथ न दिलाए जाने को लेकर मामला लगातार विवादों में रहा, जो अब जाकर कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुआ।

  • यूपी में सपा सरकार बनी तो पहले 90 दिन में ये करेंगे: अखिलेश यादव का बड़ा प्लान

    यूपी में सपा सरकार बनी तो पहले 90 दिन में ये करेंगे: अखिलेश यादव का बड़ा प्लान



    नई दिल्ली। अखिलेश यादव ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अगर राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो पहले 90 दिनों के भीतर कई अहम फैसले लिए जाएंगे। उन्होंने यह बात PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) ऑडिट को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।इस बैठक में Dimple Yadav और Shivpal Singh Yadav समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    90 दिन में क्या होगा प्लान?
    अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार बनने पर सबसे पहले 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में “न्याय” दिलाने का काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि 90 दिनों के भीतर जातिगत जनगणना कराने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।

    आरक्षण और भर्ती को लेकर आरोप
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आरक्षण व्यवस्था में गड़बड़ी कर रही है और भर्तियों में PDA वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने 69,000 शिक्षक भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें आरक्षण नियमों का सही पालन नहीं हुआ।

    बीजेपी पर तीखा हमला
    सपा प्रमुख ने कहा कि आरक्षण को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और इसे उन्होंने “संवैधानिक अधिकारों पर हमला” बताया। उन्होंने दावा किया कि PDA समाज को नौकरियों से वंचित किया जा रहा है और इसे लेकर सपा सरकार बनने पर सख्त कदम उठाएगी।

    सपा का दावा: नई नीति का रोडमैप तैयार
    अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी ने PDA आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर एक विस्तृत डॉक्यूमेंट तैयार किया है, जिसे भविष्य की सरकार में लागू किया जाएगा

  • हरिद्वार में होगा प्रतीक यादव का अस्थि विसर्जन, अपर्णा यादव परिवार संग होंगी रवाना; यादव परिवार में पसरा मातम

    हरिद्वार में होगा प्रतीक यादव का अस्थि विसर्जन, अपर्णा यादव परिवार संग होंगी रवाना; यादव परिवार में पसरा मातम



    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव के निधन के बाद अब परिवार हरिद्वार में अस्थि विसर्जन की तैयारी में जुट गया है। जानकारी के मुताबिक, उनकी पत्नी अपर्णा यादव जल्द ही पूरे परिवार के साथ हरिद्वार रवाना होंगी, जहां गंगा घाट पर विधि-विधान के साथ अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा।

    प्रतीक यादव का बुधवार तड़के निधन हो गया था। उन्हें गंभीर हालत में लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को लखनऊ के भैंसाकुंड धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शुक्रवार को फूल चुनने की रस्म पूरी की गई, जिसके बाद अब परिवार हरिद्वार जाकर गंगा में अस्थि विसर्जन करेगा।

    सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें फेफड़ों से जुड़ी दिक्कत बताई जा रही थी और कुछ समय पहले उनका इलाज मेदांता अस्पताल में भी चला था। वहीं, पोस्टमॉर्टम से पहले उनके शरीर पर चोट के निशान मिलने की चर्चा भी सामने आई, जिसके बाद मामले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि परिवार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

    बताया जा रहा है कि घटना के समय अपर्णा यादव लखनऊ में मौजूद नहीं थीं। वह असम के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गई थीं। पति के निधन की सूचना मिलते ही वह तुरंत लखनऊ लौट आईं।

    प्रतीक और अपर्णा यादव की शादी साल 2011 में हुई थी। दोनों एक-दूसरे को स्कूल के दिनों से जानते थे और बाद में यह दोस्ती रिश्ते में बदल गई। परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक, दोनों के बीच गहरी समझ और मजबूत रिश्ता था। अब प्रतीक यादव के निधन से परिवार और समर्थकों में शोक का माहौल है।

  • लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक

    लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक



    नई दिल्ली। लखनऊ में समाजवादी राजनीति के बीच शुक्रवार को भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जब वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अदीब आजम खान ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात हाल ही में दिवंगत हुए मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए की गई।

    मुलाकात के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “दुख की घड़ी में सब साथ हैं।” इस मुलाकात को राजनीतिक औपचारिकता से ज्यादा मानवीय संवेदना और आपसी समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

    बता दें कि प्रतीक यादव का 38 वर्ष की उम्र में बुधवार को हृदय और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के चलते निधन हो गया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को लखनऊ के बैकुंठ धाम में किया गया, जहां उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, अंतिम यात्रा विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास से शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में परिजन और समर्थक शामिल हुए।

    आजम परिवार की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब समाजवादी पार्टी पहले से ही शोक की स्थिति से गुजर रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे एकजुटता और संवेदना के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • दुखद खबर: Akhilesh Yadav के भाई प्रतीक यादव का निधन, डॉक्टरों ने कही बड़ी बात

    दुखद खबर: Akhilesh Yadav के भाई प्रतीक यादव का निधन, डॉक्टरों ने कही बड़ी बात


    नई दिल्ली। लखनऊ  समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के छोटे भाई Prateek Yadav का बुधवार सुबह निधन हो गया। 38 वर्षीय प्रतीक को सुबह करीब 6 बजे गंभीर हालत में लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर फैल गई।

    सिविल अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डीसी पांडेय के अनुसार, जब प्रतीक यादव को अस्पताल लाया गया, तब तक उनकी धड़कन पूरी तरह बंद हो चुकी थी और पल्स भी डाउन थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेजा गया। प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम में शरीर पर किसी तरह की बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। हालांकि मौत के कारण स्पष्ट नहीं होने की वजह से डॉक्टरों ने बिसरा सुरक्षित रख लिया है, ताकि आगे की जांच की जा सके।

    घटना के समय उनकी पत्नी और भाजपा नेता Aparna Yadav असम में थीं। वे मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गुवाहाटी गई थीं। पति के निधन की सूचना मिलते ही वे तुरंत लखनऊ पहुंचीं और सीधे घर रवाना हुईं।

    इस दौरान Dimple Yadav, Shivpal Singh Yadav समेत कई बड़े नेता और परिवारजन प्रतीक यादव के आवास पहुंचे। Akhilesh Yadav भी पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे और परिवार के सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह परिवार के लिए बेहद दुखद क्षण है और आगे जो भी निर्णय परिवार लेगा, वही मान्य होगा।

    जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें 30 अप्रैल को गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक वे पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, जिसमें फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जम जाता है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है।

    Prateek Yadav राजनीति से दूर रहते थे और रियल एस्टेट व फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे। उन्होंने करीब 14 साल पहले Aparna Yadav से लव मैरिज की थी। दोनों की दो बेटियां हैं।

    फिलहाल उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए लोगों का पहुंचना जारी है। प्रशासन और पुलिस भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

  • X पर वायरल पोस्ट से गरमाई जौनपुर की सियासत: सपा सांसद प्रिया सरोज पर क्षेत्र से दूरी के गंभीर आरोप

    X पर वायरल पोस्ट से गरमाई जौनपुर की सियासत: सपा सांसद प्रिया सरोज पर क्षेत्र से दूरी के गंभीर आरोप




    नई दिल्ली। जौनपुर की राजनीति में समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स X पर एक कथित सपा समर्थक का पोस्ट वायरल होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। इस पोस्ट में सांसद पर क्षेत्र में सक्रिय न रहने और जनता के कामों से दूरी बनाए रखने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    वायरल पोस्ट में यूजर ने दावा किया है कि उन्होंने चुनाव के समय प्रिया सरोज और उनके परिवार के समर्थन में प्रचार किया था, लेकिन जीत के बाद सांसद क्षेत्र में कम सक्रिय रहती हैं और ज्यादा समय कथित तौर पर नोएडा और लखनऊ में बिताती हैं। पोस्ट में यह भी लिखा गया है कि अगर भविष्य में फिर से उन्हें टिकट दिया गया तो वह उनके खिलाफ प्रचार करेंगे।

    यह पोस्ट सीधे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को टैग करते हुए लिखा गया है, जिसके बाद मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। पोस्ट वायरल होने के बाद अलग-अलग यूजर्स की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ ने आरोपों का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे व्यक्तिगत नाराजगी या राजनीतिक बयान बताया।

    कुछ अन्य यूजर्स ने भी सांसद की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में अधिक समय देना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने इसे पार्टी के अंदरूनी असंतोष के संकेत के रूप में भी देखा है।

    फिलहाल इस पूरे मामले पर प्रिया सरोज या समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह बहस जौनपुर की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है और इसे आने वाले समय में राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
  • योगी का मास्टरस्ट्रोक: कैबिनेट विस्तार से PDA पर वार, 2027 चुनाव से पहले बदला पूरा सियासी गेम!

    योगी का मास्टरस्ट्रोक: कैबिनेट विस्तार से PDA पर वार, 2027 चुनाव से पहले बदला पूरा सियासी गेम!



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट विस्तार के जरिए एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इस विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका सीधा टारगेट समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूला (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को कमजोर करना माना जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार नए मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरों को शामिल किया गया है, जिसमें तीन OBC, दो दलित और एक ब्राह्मण नेता को जगह दी गई है। इसके साथ ही कुछ नेताओं को प्रमोशन भी दिया गया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधकर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

    इस विस्तार में खास ध्यान उन समुदायों पर दिया गया है, जो लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी से कुछ हद तक दूर माने जा रहे थे। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि हर वर्ग को सरकार में हिस्सेदारी दी जा रही है।

    विशेष रूप से ओबीसी और दलित समुदाय के छोटे-छोटे जातीय समूहों को शामिल कर बीजेपी ने अपनी “सोशल इंजीनियरिंग” को और मजबूत किया है। वहीं एक ब्राह्मण नेता को शामिल कर उच्च जातियों के संतुलन को भी बनाए रखने की कोशिश की गई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह चुनावी रणनीति है, जिसका उद्देश्य 2027 से पहले सपा के PDA फॉर्मूला नैरेटिव को कमजोर करना है।

    हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह बदलाव चुनावी फायदा लेने की कोशिश है, जबकि बीजेपी का दावा है कि यह सामाजिक प्रतिनिधित्व और विकास आधारित प्रशासन का हिस्सा है।

    कुल मिलाकर यह कैबिनेट विस्तार उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जहां जातीय समीकरण और वोट बैंक की राजनीति एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभाने वाली है।

  • गोंडा में अनोखी शादी बनी चर्चा का विषय, संविधान की शपथ लेकर दूल्हा-दुल्हन ने लिए सात जन्म साथ निभाने के संकल्प

    गोंडा में अनोखी शादी बनी चर्चा का विषय, संविधान की शपथ लेकर दूल्हा-दुल्हन ने लिए सात जन्म साथ निभाने के संकल्प



    नई दिल्ली। गोंडा में एक अनोखी शादी इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जहां आमतौर पर शादियां पारंपरिक रीति-रिवाजों, मंत्रों और धार्मिक रस्मों के बीच संपन्न होती हैं, वहीं जिले के नवाबगंज क्षेत्र में एक युवक ने संविधान की प्रस्तावना पढ़कर और उसकी शपथ लेकर विवाह रचाया। इस अनोखे “संवैधानिक विवाह” को लेकर अब सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक बहस छिड़ गई है।

    दरअसल, नवाबगंज ब्लॉक के ग्राम सतिया सुरजापुर निवासी जयश वर्मा, जो समाजवादी पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव के भतीजे बताए जा रहे हैं, ने अपनी शादी को अलग अंदाज देने का फैसला किया। उन्होंने पारंपरिक धार्मिक रस्मों के बजाय भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़ते हुए विवाह किया और समानता, स्वतंत्रता तथा आपसी सम्मान के मूल्यों को अपने वैवाहिक जीवन का आधार बताया।

    शादी समारोह में मौजूद लोगों के सामने जयश वर्मा और उनकी जीवनसाथी ने संविधान के प्रति आस्था जताते हुए नई जिंदगी की शुरुआत की। इस दौरान समारोह में शामिल लोगों ने भी इस अनोखी पहल को उत्सुकता से देखा। शादी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला जिलेभर में चर्चा का विषय बन गया है।

    जयश वर्मा का कहना है कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में हर धर्म और समुदाय की अपनी परंपराएं हैं, लेकिन सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा भारतीय संविधान देता है। उनका मानना है कि जब संविधान हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करता है, तो जीवन के सबसे महत्वपूर्ण फैसले की शुरुआत भी उसी मूल भावना के साथ होनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी परंपरा का विरोध करना नहीं, बल्कि संविधान में निहित समानता, न्याय और सम्मान के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना है। जयश के इस फैसले को कुछ लोग नई सोच और सामाजिक बदलाव की मिसाल बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे परंपराओं से अलग कदम मानकर चर्चा कर रहे हैं।

    फिलहाल गोंडा की यह अनोखी शादी लोगों के बीच बहस और जिज्ञासा दोनों का विषय बनी हुई है। कई लोग इसे आधुनिक सोच और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ी नई पहल बता रहे हैं, तो कुछ इसे सामाजिक परंपराओं से हटकर उठाया गया साहसिक कदम मान रहे हैं।

  • यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया

    यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कहीं भी गोहत्या नहीं हो रही है और किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि गो माता को खरोंच तक पहुंचा सके। उन्होंने यह बात सोमवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। मौर्य ने कहा कि सरकार गो संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में पहले भी व्यापक आंदोलन किए गए हैं।

    यह बयान Keshav Prasad Maurya ने उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गोहत्या होने के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया, जो स्वामी Avimukteshwaranand द्वारा लगाए गए थे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी Avimukteshwaranand को कहीं भी आने-जाने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और सरकार उनके सम्मान की पूरी सुरक्षा करती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सब समझती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिनके शासनकाल में शिव भक्तों, राम भक्तों और गो भक्तों पर अत्याचार हुए, वे आज गो रक्षा की बात कर रहे हैं।

    राज्य सरकार ने लगातार गो संरक्षण को प्राथमिकता दी है। गौशालाओं और गो रक्षा समितियों के माध्यम से गो माता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, और कानूनी प्रावधानों के तहत गोहत्या और हिंसा के मामलों पर सख्त कार्रवाई होती है। इस दिशा में सरकार ने पुलिस और वन विभाग के साथ मिलकर नियमित निगरानी प्रणाली लागू की है।

    Keshav Prasad Maurya का यह बयान प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या संगठन कानून का उल्लंघन करते हुए गो माता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    इस प्रकार के राजनीतिक और धार्मिक बयान समाज में चर्चा का विषय बनते हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री ने इसे संतुलित और शांतिपूर्ण तरीके से पेश किया है, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि गो माता की सुरक्षा और कानून की पालना दोनों सुनिश्चित हों।

  • यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की नई राजनीति, ओमप्रकाश राजभर की बड़ी रैली

    यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की नई राजनीति, ओमप्रकाश राजभर की बड़ी रैली

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की राजनीति तेज हो गई है। मायावती के सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले से प्रेरित अब ओमप्रकाश राजभर ने आजमगढ़ में 10 हजार ब्राह्मणों की रैली कर अपनी रणनीति का ऐलान कर दिया। राजभर ने रैली में ब्राह्मणों के सम्मान में कसीदे पढ़े और नारे लगाए जय सुहेलदेव जय परशुराम साथ ही साफ कर दिया कि उनका निशाना समाजवादी पार्टी है।

    बीते 20 सालों में मायावती और बीएसपी ने ब्राह्मण-दलित गठजोड़ और दलित मुस्लिम फॉर्मूले के कई प्रयोग किए लेकिन 2022 में बीएसपी केवल एक सीट पर सिमट गई। ऐसे में ओमप्रकाश राजभर ने ओबीसी-ब्राह्मण गठजोड़ की नींव आजमगढ़ से रखी है जहां समाजवादी पार्टी का दबदबा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी रैली से आजमगढ़ की सभी 10 विधानसभा सीटें एनडीए के पक्ष में जा सकती हैं।

    रैली में राजभर ने मुख्य रूप से तीन बातें कही: ब्राह्मण वर्ग की प्रबुद्धता और समाज में भूमिका यूजीसी गाइडलाइंस पर विश्वास और सुप्रीम कोर्ट की सहायता और ब्राह्मणों के प्रति सम्मानजनक संदेश। उनके प्रयास में बीजेपी और ब्राह्मण वर्ग को साधने की राजनीतिक रणनीति साफ झलक रही है। यूपी में ब्राह्मण आबादी लगभग 12 फीसदी है और सवर्ण आबादी 18-20 फीसदी इसलिए इसे साधना किसी भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है।

    ब्राह्मणों की राजनीति पर नज़र डालें तो ओमप्रकाश राजभर के मंच पर अलग मंच लखनऊ में ब्रजेश पाठक द्वारा तिलक और पूजा और प्रयागराज में हुए अपमान का विरोध सभी संकेत देते हैं कि जातिगत सियासत सक्रिय है। समाजवादी पार्टी बीएसपी और बीजेपी की कोशिशें इस वोट बैंक को आकर्षित करने में लगी हैं। मायावती ने हाल ही में घोसखोर पंडत विवाद में हस्तक्षेप कर ब्राह्मणों का समर्थन किया। वहीं कांग्रेस ने फिलहाल खामोशी अख्तियार कर रखी है हालांकि अतीत में इसका जनाधार मजबूत था।

    यूपी की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक अब नए दौर में सोशल इंजीनियरिंग 2.0 का केंद्र बन गया है। ओमप्रकाश राजभर के प्रयास समाजवादी पार्टी के गढ़ आजमगढ़ पर चुनौती और बीजेपी-बीएसपी के फॉर्मूले इसे और दिलचस्प बना रहे हैं। आने वाले चुनाव में ब्राह्मण वर्ग की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।