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  • हूती हमले रुकवाने के लिए सऊदी अरब देगा 1 अरब डॉलर! ईरान के जरिए समझौते की चर्चा

    हूती हमले रुकवाने के लिए सऊदी अरब देगा 1 अरब डॉलर! ईरान के जरिए समझौते की चर्चा


    नई दिल्ली। सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच जारी तनाव के बीच एक अरब डॉलर के कथित वित्तीय समझौते की चर्चा सामने आई है। खाड़ी क्षेत्र के राजनयिक सूत्रों का दावा है कि सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने हूतियों के हमले रुकवाने और संघर्षविराम पर बातचीत के लिए ईरान का दौरा किया। हालांकि, हूतियों को इतनी बड़ी रकम देने या किसी तरह के वित्तीय लेन-देन की सऊदी अरब ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    ईरान के जरिए हूतियों तक रकम पहुंचाने की चर्चा

    राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के तहत सऊदी अरब ईरान के माध्यम से हूती विद्रोहियों को एक अरब डॉलर देने की पेशकश कर सकता है। कुछ सूत्रों ने दावा किया कि सऊदी रक्षा मंत्री यह रकम लेकर सैन्य परिवहन विमान ‘हरक्यूलिस’ से तेहरान पहुंचे थे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार भी नहीं किया गया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बनाए जाने और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता बनी हुई है। बताया जा रहा है कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य हमलों को रोकना और संघर्षविराम की संभावनाएं तलाशना है।

    तनाव कम करने के लिए ईरान ने की मध्यस्थता की पेशकश

    ईरान ने सऊदी अरब और हूतियों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की है। सऊदी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और मक्का संयुक्त रक्षा गठबंधन के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की ईरान यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करने के प्रयास करना है।

    हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने कथित एक अरब डॉलर के भुगतान या रकम हस्तांतरित किए जाने की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में इस कथित पेशकश और इसके तहत संभावित समझौते को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    मक्का समझौते के बावजूद सैन्य मदद पर सवाल

    रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत में तुर्किये के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी शामिल हैं। बताया गया है कि सऊदी अरब के साझेदार देशों ने सैन्य सलाहकार भेजे हैं, लेकिन अतिरिक्त सैन्य बल उपलब्ध नहीं कराया है।

    इससे मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। बताए गए प्रावधानों के अनुसार, किसी सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में दूसरे सदस्य देशों को उसे सैन्य सहायता देनी है। हालांकि, समझौते की शर्तों और इस मामले में संबंधित देशों की वास्तविक प्रतिबद्धताओं की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

    तीन साल पुराने समझौतों को लेकर भी विवाद

    सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव की एक वजह करीब तीन साल पहले हुए समझौतों को लागू करने का विवाद भी है। इन समझौतों के तहत सऊदी अरब की ओर से हूतियों के नियंत्रण वाले इलाकों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन, नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दिए जाने की बात थी। इसके बदले हूतियों से संघर्षविराम बनाए रखने और सऊदी अरब पर हमले रोकने की अपेक्षा की गई थी।

    हाल के महीनों में हूतियों ने आरोप लगाया है कि सऊदी अरब पहले बनी सहमतियों से पीछे हट गया है। इन आरोपों और समझौतों की मौजूदा स्थिति पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

    क्षेत्रीय संघर्ष के बीच सऊदी अरब पर दबाव

    रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान हूतियों को हथियार और अन्य सहायता उपलब्ध करा रहा है। अमेरिका के साथ ईरान के जारी संघर्ष के संदर्भ में यह समर्थन क्षेत्रीय तनाव को और जटिल बना सकता है।

    यदि एक अरब डॉलर की कथित पेशकश की पुष्टि होती है, तो इसे सऊदी अरब की ओर से हमले रोकने और तेल निर्यात को सामान्य करने के लिए बड़ी रियायत के तौर पर देखा जा सकता है। फिलहाल, भुगतान और समझौते से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं होने के कारण इस घटनाक्रम को सावधानी के साथ देखना जरूरी है।

  • सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हमला, 1 की मौत और 8 घायल, कई फ्लाइट्स के रूट बदले

    सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हमला, 1 की मौत और 8 घायल, कई फ्लाइट्स के रूट बदले


    नई दिल्ली। सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार देर रात हुए हमले में एक सऊदी नागरिक की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हो गए। सऊदी सिविल एविएशन अथॉरिटी ने गुरुवार सुबह इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि हमले में एयरपोर्ट को भी नुकसान पहुंचा है। वैश्विक फ्लाइट ट्रैकिंग सेवा Flightradar24 के मुताबिक, घटना के बाद रात में कई उड़ानों के रूट डायवर्ट किए गए।

    किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट फारस की खाड़ी के पास दम्माम में स्थित है। यह बहरीन और कतर के नजदीक है। इससे पहले भी सऊदी अरब के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर मिसाइल और प्रोजेक्टाइल हमलों के दौरान इस एयरपोर्ट को निशाना बनाया जा चुका है। ताजा हमले पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई है। वहीं, सऊदी गठबंधन ने बताया कि उसने देश के पूर्वी क्षेत्र में ड्रोन से किए गए चार हमलों को नाकाम कर दिया।

    तेल क्षेत्र में ड्रोन का मलबा गिरने से 2 की मौत
    एयरपोर्ट पर हमले से पहले दक्षिण-पूर्वी सऊदी अरब में अरामको के संचालन वाले शायबह तेल क्षेत्र में एक इंटरसेप्ट किए गए ड्रोन का मलबा गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य घायल हुए थे।

    सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, मृतकों में नेपाल और फिलीपींस के नागरिक शामिल थे। घायलों में पाकिस्तान और भारत के नागरिक थे। मंत्रालय ने बताया कि ड्रोन का मलबा गिरने से तेल क्षेत्र में एक ठेकेदार के वाहन में आग भी लग गई।

    सऊदी तेल ठिकानों पर लगातार हमले
    सऊदी अरब में हाल के दिनों में तेल प्रतिष्ठानों और अन्य अहम ठिकानों के आसपास ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। पिछले महीने इंटरसेप्ट किए गए हूती ड्रोन का मलबा गिरने से सऊदी अरब में रह रहे एक यमनी नागरिक की मौत हो गई थी। हूतियों की ओर से सऊदी शिपिंग और तेल ठिकानों को निशाना बनाकर हमले बढ़ाए जाने के बीच इसे नागरिक की पहली मौत बताया गया था।

    इस महीने की शुरुआत में भी सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में हुए हमले के बाद दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल अरामको की एक प्रशासनिक इमारत में मामूली आग लग गई थी।

    ताजा घटनाओं ने सऊदी अरब के हवाई और ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। किंग फहद एयरपोर्ट पर हुई मौत और घायलों के अलावा तेल क्षेत्र में हुए नुकसान से क्षेत्र में जारी सुरक्षा चुनौतियां एक बार फिर सामने आई हैं।

  • सऊदी में हूतियों के हमले जारी… तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय को बनाया निशाना

    सऊदी में हूतियों के हमले जारी… तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय को बनाया निशाना


    तेहरान।
    ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने रात में सऊदी अरब (Saudi Arabia) की तेल कंपनी अरामको (Oil company Aramco) के मुख्यालय पर हमला किया, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों के दफ्तरों को नुकसान पहुंचा। अधिकारियों ने बताया कि हमले में कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के इस्तेमाल वाली इमारत की सबसे ऊपरी तीन मंजिलें क्षतिग्रस्त हुई हैं। एक अधिकारी के अनुसार, कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का कार्यालय भी हमले की चपेट में आया। इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हूती विद्रोहियों ने इससे पहले कहा था कि उन्होंने बैलिस्टिक मिसाइल से धहरान को निशाना बनाया, जहां अरामको का मुख्यालय है।

    इससे पहले बुधवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। स्थानीय निवासियों ने इसके लिए पड़ोसी देश यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर आरोप लगाया। हूती विद्रोहियों के एक अधिकारी ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि रूस और चीन समेत कई देशों ने संघर्षविराम समझौते के प्रयासों के तहत उनसे संपर्क किया है। हाल के दिनों में सऊदी अरब के संवेदनशील प्रतिष्ठानों से धुआं उठने की घटनाओं ने क्षेत्र और वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी दबाव बढ़ा है, जिन्होंने कहा है कि वह विचार कर रहे हैं कि अमेरिका को हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के हमलों में शामिल होना चाहिए या नहीं।

    सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बताया कि उसने धहरान की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल, रियाद को निशाना बनाने वाली क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा ड्रोन और प्रिंस सुल्तान एयर बेस एवं सरकारी मिलिट्री इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन वाले खरज की ओर दागी गई एक क्रूज मिसाइल को रोक दिया। हूती विद्रोहियों ने इन हमलों को यमन की राजधानी सना और अन्य विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों पर सऊदी अरब की ”आक्रामकता” का जवाब बताया।

    विद्रोहियों के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को यमन में हुए हमलों में दो लोगों की मौत होने की जानकारी दी और इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। हूती विद्रोही हालिया ईरान युद्ध के एक नए मोर्चे पर सऊदी अरब के हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों को बार-बार निशाना बना रहे हैं। रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पिछले एक सप्ताह में कई हमले हुए हैं, जिनमें कम से कम 18 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

    वर्षों तक चले गृहयुद्ध से मजबूत हुए हूती विद्रोही इस समय ईरान के सबसे प्रभावी सशस्त्र सहयोगी माने जा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उनका अपना एजेंडा भी है। इन हमलों से अमेरिका के प्रमुख सहयोगी सऊदी अरब पर दबाव बढ़ रहा है। हूती विद्रोहियों के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों ने संघर्षविराम समझौते के तहत संपर्क किया है।

    उन्होंने कहा कि ओमान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर वापस लाने की कोशिश की है, जबकि रूस और चीन ने ईरान के माध्यम से प्रयास किए हैं। इस बीच, विद्रोहियों ने हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों पर हमले जारी रखने की चेतावनी दी है। विमानन विश्लेषण कंपनी सिरियम के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में सऊदी अरब के विभिन्न हवाई अड्डों से रवाना होने वाली तीन हजार से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं या उन्हें परिचालन में नहीं बताया गया है।


    सऊदी अरब मिसाइलों को रोकने वाले हथियारों की कमी का सामना कर रहा

    हमलों में तेजी से सऊदी अरब के सामने हूती मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की चुनौती उजागर हुई है। सऊदी अरब ने अमेरिका सहित अपने सहयोगियों से अधिक सैन्य सहायता मांगी है। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हथियारों का दुनिया में सबसे बड़ा खरीदार सऊदी अरब मिसाइलों को रोकने वाले हथियारों की कमी का सामना कर रहा है। इस बीच, सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में हवाई हमले कर रहा है।


    दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए

    हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि मंगलवार को होदेदा प्रांत के रास ईसा बंदरगाह क्षेत्र में हुए हवाई हमले में दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए। मंत्रालय ने कहा कि हमले में सरकारी तेल कंपनी के एक प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया और इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सना में एक तेल प्रतिष्ठान पर भी हमला किया।

  • रियाद के बाद दम्माम एयरपोर्ट पर हूतियों का हमला, सऊदी अरब में हवाई सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

    रियाद के बाद दम्माम एयरपोर्ट पर हूतियों का हमला, सऊदी अरब में हवाई सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। सऊदी अरब में हवाई अड्डों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले की खबरों के बाद रविवार देर शाम पूर्वी प्रांत के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, दम्माम को भी निशाना बनाए जाने की सूचना सामने आई। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है।

    सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने दम्माम एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक, हवाई अड्डे की सुविधाओं को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और सुरक्षा जांच जारी है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक स्थिति, किसी के हताहत होने और उड़ानों के संचालन पर पड़े प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

    रियाद एयरपोर्ट हमले में भारतीय नागरिक की भी मौत

    इससे पहले शनिवार को रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले के बाद सऊदी अधिकारियों ने शुरुआत में एक अमेरिकी नागरिक समेत 12 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी थी। बाद में भारतीय दूतावास ने बताया कि हमले में घायल एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। इसके बाद मृतकों की संख्या 13 बताई गई, जबकि घायलों की संख्या 300 से अधिक रही।

    रविवार को रियाद एयरपोर्ट के टर्मिनल-4 को भी एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, इस घटना के बाद आग लग गई। अधिकारियों ने नुकसान का आकलन शुरू किया। गठबंधन ने एयरपोर्ट के आसपास एक क्रूज मिसाइल को रोकने का दावा भी किया।

    हूतियों की चेतावनी- हमले और तेज हो सकते हैं

    हूती सैन्य प्रवक्ता याहिया सारे ने टेलीविजन संबोधन में रियाद पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा करते हुए चेतावनी दी थी कि जब तक सऊदी अरब यमन में अपनी कथित ‘आक्रामकता’ बंद नहीं करता, तब तक हालात और बिगड़ सकते हैं।

    समाचार एजेंसी अनादोलु की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने दम्माम और रियाद एयरपोर्ट के अलावा सऊदी अरब की प्रमुख ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा भी किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पूरी पुष्टि होना अभी बाकी है।

    हवाई अड्डों पर हमलों की खबरें ऐसे समय सामने आई हैं, जब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच सैन्य तनाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने हाल के हफ्तों में यमन में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज की है और वहां की सरकारी सेनाओं को समर्थन दिया है।

    यमन पर 124 हवाई हमलों का हूतियों का दावा

    हूती-नियंत्रित विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब ने यमन में सैन्य कार्रवाई और हस्तक्षेप बंद नहीं किया, तो जवाबी हमले और तेज किए जा सकते हैं। हूती पक्ष ने पिछले 24 घंटों में यमन पर 124 हवाई हमले किए जाने का आरोप भी लगाया है। इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य कार्रवाई के दावों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। हवाई अड्डों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की खबरें इस तनाव के व्यापक असर की आशंका बढ़ाती हैं।

    तेल उद्योग के लिहाज से अहम है दम्माम

    दम्माम सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत का प्रमुख शहर है और तेल एवं गैस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र का प्रमुख हवाई संपर्क केंद्र है।

    रियाद के बाद दम्माम एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की खबर से सऊदी अरब के नागरिक विमानन ढांचे की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल हवाई अड्डे पर नुकसान, संभावित हताहतों और उड़ानों के संचालन पर प्रभाव के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि इस घटना का हवाई यातायात पर कितना असर पड़ा है।

  • 2015 में यमन युद्ध से दूर रहा था पाकिस्तान, अब सऊदी के साथ हूतियों के खिलाफ कितना कारगर होगा गठजोड़?

    2015 में यमन युद्ध से दूर रहा था पाकिस्तान, अब सऊदी के साथ हूतियों के खिलाफ कितना कारगर होगा गठजोड़?


    नई दिल्ली। 2015 में सऊदी अरब के आग्रह के बावजूद पाकिस्तान ने यमन में हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया था। अब 11 साल बाद सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या यह गठजोड़ हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य ताकत को निर्णायक बढ़त दिला पाएगा?

    2015 में संसद ने युद्ध से दूर रहने का फैसला किया था
    मार्च 2015 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान से यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियान के लिए लड़ाकू विमान, नौसैनिक जहाज और सैनिक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इस मुद्दे पर पाकिस्तान की संसद में पांच दिन तक बहस हुई। 10 अप्रैल 2015 को संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यमन संघर्ष में पाकिस्तान को तटस्थ रखने का फैसला किया।

    हालांकि, पाकिस्तान ने सऊदी अरब के समर्थन को स्पष्ट रखा था। संसद के प्रस्ताव में कहा गया था कि सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता या मक्का-मदीना के पवित्र स्थलों को खतरा होने की स्थिति में पाकिस्तान उसके साथ खड़ा रहेगा। उस समय पाकिस्तान ने संघर्ष का सैन्य हिस्सा बनने के बजाय राजनयिक भूमिका निभाने पर जोर दिया था।

    11 साल बाद बदले हालात, लागू हुआ मक्का रक्षा समझौता
    7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब के मक्का में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के मुताबिक, तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला बाकी दोनों पर हमले के तौर पर माना जाएगा और रक्षा सहयोग को मजबूत किया जाएगा।

    यमन में हूतियों के हमले बढ़ने के बीच 5 अक्टूबर को रियाद में समझौते की रणनीतिक समिति की आपात बैठक हुई। इसके बाद तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को लागू करने और सऊदी अरब में आवश्यक सैन्य बलों तथा क्षमताओं की तेजी से तैनाती की दिशा में कदम उठाने पर सहमति जताई। हालांकि, कितने सैनिक भेजे जाएंगे और उनकी सटीक भूमिका क्या होगी, इसका पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    कागज पर बड़ी सैन्य ताकत, लेकिन यमन में चुनौती अलग
    सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये की संयुक्त सैन्य क्षमता हूतियों की तुलना में काफी बड़ी है। सऊदी अरब के पास आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम हैं। पाकिस्तान बड़ी थल सेना और वायुसेना के साथ सैन्य अभियान का अनुभव रखता है। वहीं तुर्किये के पास ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसी क्षमताएं हैं।

    लेकिन यमन का भूगोल किसी भी बड़ी सैन्य ताकत के लिए चुनौती पैदा करता है। उत्तरी यमन के पहाड़ी इलाके, गुफाएं और सुरंगें हूतियों को छिपकर हमला करने की क्षमता देते हैं। उनके पास मोबाइल मिसाइल लॉन्चर और अपेक्षाकृत बिखरी हुई सैन्य संरचना भी है। ऐसे में सिर्फ हवाई हमलों या बड़ी सैन्य ताकत के दम पर उन्हें पूरी तरह पराजित करना आसान नहीं होगा।

    सऊदी अरब पहले भी लंबी लड़ाई में उलझ चुका है
    सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन 2015 से यमन में सैन्य अभियान चलाता रहा है, लेकिन वह हूतियों को पूरी तरह खत्म नहीं कर सका। बाद के वर्षों में अमेरिका और ब्रिटेन ने भी हूती ठिकानों पर हमले किए, लेकिन संगठन की मिसाइल और ड्रोन क्षमता बनी रही।

    मौजूदा संघर्ष में भी हूतियों ने सऊदी क्षेत्र और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता दिखाई है। 7 अक्टूबर को भी हूतियों ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जबकि सऊदी नेतृत्व वाली सेनाएं यमन में अपने अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।

    पाकिस्तान और तुर्किये की भूमिका निर्णायक हो सकती है, लेकिन…
    विश्लेषण के मुताबिक, पाकिस्तान और तुर्किये सऊदी अरब की एयर डिफेंस, खुफिया जानकारी, निगरानी और सैन्य तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर सकते हैं। तुर्किये ने पहले ही कहा है कि वह सऊदी अरब की जरूरत के मुताबिक सैन्य तकनीकी सहायता देने के लिए तैयार है।

    हालांकि, मौजूदा समझौते का सार्वजनिक स्वरूप मुख्य रूप से सऊदी अरब की रक्षा और सामूहिक प्रतिरोध क्षमता मजबूत करने पर केंद्रित है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान और तुर्किये यमन के अंदर सीधे जमीनी युद्ध या हूती ठिकानों के खिलाफ संयुक्त हमलों में किस स्तर तक शामिल होंगे। सितंबर में हुई सैन्य बैठकों के बाद भी उपलब्ध बयानों में संयुक्त जमीनी अभियान या सीधे हमलों की घोषणा नहीं हुई थी।

    हूतियों को पूरी तरह हराना अब भी बड़ी चुनौती
    सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्किये का सैन्य सहयोग मिलने से उसकी रक्षा क्षमता और यमन में उसके समर्थित बलों को बढ़त मिल सकती है। तीनों देशों की संयुक्त ताकत हूतियों पर भारी दबाव डाल सकती है और उनके मिसाइल-ड्रोन हमलों से निपटने में मदद कर सकती है।

    लेकिन सना और उत्तरी यमन के पहाड़ी इलाकों पर कब्जा कर हूतियों के संगठनात्मक और सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म करना अलग चुनौती है। यमन की लंबी लड़ाई का अनुभव भी यही बताता है कि हवाई शक्ति और आधुनिक हथियारों के बावजूद हूतियों को निर्णायक रूप से समाप्त करना आसान नहीं रहा है। इसलिए पाकिस्तान और तुर्किये की भागीदारी सऊदी अरब की स्थिति मजबूत कर सकती है, लेकिन इससे हूतियों का पूरी तरह सफाया तय नहीं माना जा सकता।

  • सऊदी अरब में नागरिक उड़ानें असुरक्षित….. हूतियों ने चेतावनी के बाद मचा हड़कंप

    सऊदी अरब में नागरिक उड़ानें असुरक्षित….. हूतियों ने चेतावनी के बाद मचा हड़कंप


    नई दिल्ली।
    ईरान (Iran) के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) के हवाई क्षेत्र को नागरिक उड़ानों (Civil flights) के लिए असुरक्षित बताते हुए चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार सऊदी हवाई समर्थन के साथ हूतियों के कब्जे वाले इलाकों पर जवाबी हमला कर रही है। यमन की सरकारी समाचार एजेंसी सबा ने बताया कि हूतियों की HOCC एजेंसी ने कहा कि सऊदी हवाई क्षेत्र सुरक्षित नहीं है और यह हमारी सेना की कार्रवाई का ठिकाना होगा। हालांकि, इस चेतावनी में पवित्र शहरों मक्का और मदीना के ऊपर के हवाई क्षेत्र को छूट दी गई है। यानी इन दोनों शहरों की ओर जाने वाली उड़ानों को इस चेतावनी से बाहर रखा गया है।

    सऊदी अरब और हूथियों के बीच जुलाई 2022 में हुआ समझौता टूटने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव फिर बढ़ गया था। पिछले महीने हूती विद्रोहियों ने यमन के पूरे लाल सागर तट पर कब्जा कर लिया और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को भी अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद से दोनों तरफ से हमले जारी हैं। संघर्ष विराम टूटने के बाद हूथी पड़ोसी सऊदी अरब पर भी हमले कर रहे हैं और उसके जहाजों पर समुद्री नाकाबंदी की घोषणा कर चुके हैं।

    इसी बीच यमन की सेना ने करीब 100 सऊदी लड़ाकू विमानों के साथ हूथी ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह जवाबी अभियान हूथियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए चलाया जा रहा है। इसमें राजधानी सना भी शामिल है। यमनी सेना ने दावा किया है कि उसने अब तक 1,000 से ज्यादा हमले किए हैं।दूसरी ओर हूथी विद्रोहियों ने कहा है कि रविवार को उन्होंने यमन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में तुरबाह शहर समेत और इलाकों पर कब्जा कर लिया है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं और जमीन पर स्थिति तेजी से बदल रही है।

    यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एरियानी ने सोमवार को रॉयटर्स को बताया कि सऊदी समर्थन वाली यमनी सरकारी सेनाओं ने बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर प्रभावी नियंत्रण हासिल कर लिया है। उनके मुताबिक, सऊदी हवाई मदद से यमनी सेनाएं तट के साथ तेजी से आगे बढ़ीं और धुबाब इलाके की अहम जगहों पर कब्जा कर लिया। धुबाब जलडमरूमध्य के सबसे संकरे बिंदु पर स्थित है, इसलिए इस इलाके का सामरिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है।मंत्री ने कहा कि यह जलमार्ग खासतौर पर सऊदी तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि इस साल फरवरी में पश्चिम एशिया में लड़ाई शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद पड़ा है। ऐसे में बाब अल-मंदब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच समुद्री आवाजाही के लिए अहम रास्ता बन गया है।

    अल-एरियानी के अनुसार, यमनी सेना ने धुबाब पट्टी पर कब्जा कर लिया है और इलाके में बची हुई हूथी सेना को मुख्य बल से काट दिया है। उनका कहना है कि सरकारी बलों की बढ़त जारी है। हालांकि, एक अन्य सरकारी सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि जलडमरूमध्य के पास एक सैन्य अड्डे पर लड़ाई अभी भी चल रही है। इसका मतलब है कि पूरे इलाके पर पूरा नियंत्रण अभी पुष्ट नहीं हुआ है।

    हूथियों ने इन दावों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यमनी सेना को मैदान पर कोई खास फायदा नहीं हुआ है। दोनों पक्षों के बयान एक-दूसरे से अलग हैं और स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।फिलहाल यमन में लड़ाई फिर तेज हो गई है। एक तरफ सरकारी सेना सऊदी हवाई समर्थन के साथ आगे बढ़ने का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ हूथी नए इलाकों पर कब्जे और सऊदी हवाई क्षेत्र को असुरक्षित बताने की चेतावनी दे रहे हैं। बाब अल-मंदब जैसे संकरे और व्यस्त समुद्री रास्ते पर नियंत्रण की लड़ाई पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • सऊदी अरब पर हूतियों के हमले जारी…. मक्का के बाद अब मदीना में पावर स्टेशन पर अटैक…

    सऊदी अरब पर हूतियों के हमले जारी…. मक्का के बाद अब मदीना में पावर स्टेशन पर अटैक…


    दुबई।
    मुसलमानों (Muslims) के सबसे पवित्र स्थलों में से एक मक्का (Mecca) पर हमले के बाद अब सऊदी अरब (Saudi Arabia) के मदीना (Medina) पर हमले की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यमन के हूती विद्रोहियों ने मदीना (Medina) पर एक बड़ा हमला किया है। सऊदी की सैन्य गठबंधन ने बताया है कि हमला मदीना स्थित ताइबा पावर डिस्ट्रीब्यूशन स्टेशन (Taiba Power Distribution Station) पर हुआ और हूती विद्रोहियों ने इसे ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। अहम बात यह है कि यह पावर स्टेशन सीधे तौर पर ‘मस्जिद-ए-नबवी’ मस्जिद को बिजली की आपूर्ति करता है।

    सऊदी सेना के एक प्रवक्ता ने सोशल मीडिया एक्स पर हमले का आरोप लगाया है। पर उन्होंने बताया कि यह हमला बीते मंगलवार को हुआ। ड्रोन हमले में एक ट्रांसफार्मर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि, पावर नेटवर्क को तुरंत बहाल कर दिया गया और इसलिए बिजली सेवा पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।


    दोनों पवित्र मस्जिदों पर हमले की कोशिश

    सऊदी की गठबंधन ने हूती विद्रोहियों के इस कदम की कड़ी निंदा की है। प्रवक्ता अल-मल्की ने कहा कि यह हमला दोनों पवित्र मस्जिदों को निशाना बनाने की कोशिशों का हिस्सा है। गौरतलब है कि इससे पहले बीते महीने हुती विद्रोहियों द्वारा मक्का को भी निशाना बनाने की खबरें सामने आई थीं। कथित तौर पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की और ड्रोन हमले किए। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया था। भारत समेत कई देशों ने इस हमले की कड़ी निंदा की थी।


    बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की खबर

    मदीना हमले के अलावा, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अन्य हिस्सों पर भी ताबड़तोड़ हमले किए हैं। बीते गुरुवार को सऊदी की एयर डिफेंस सिस्टम ने लाल सागर तट के पास खमिस मुशैत और जाज़ान में दो बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया। सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक खमिस मुशैत में मिसाइल और ड्रोन के मलबे गिरने के कारण कई इमारतों और वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है।


    आतंक मचा रहे हूती

    हूती विद्रोहियों के इन बढ़ते हमलों ने क्षेत्र में तनाव भड़का दिया है। समूह ने यमन में लाल सागर की तटरेखा और रणनीतिक रूप से बेहद अहम बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के द्वीपों पर लगभग नियंत्रण कर लिया है। हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका और ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज पहले से ही ठप पड़ा है। ऐसे में वैश्विक तेल आपूर्ति दबाव में है। अब बाब अल-मंडेब पर हमलों से मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

  • सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान का बड़ा ऐलान, कहा- जो सैन्य संसाधन हैं, सब उपलब्ध कराएंगे

    सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान का बड़ा ऐलान, कहा- जो सैन्य संसाधन हैं, सब उपलब्ध कराएंगे


    नई दिल्ली। सऊदी अरब पर हमला होने की स्थिति में पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल उसकी रक्षा के लिए कर सकता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा है कि सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान के पास उपलब्ध सैन्य संसाधन इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहेंगे। उनका यह बयान यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच आया है।

    रोम दौरे के दौरान मंगलवार को मीडिया से बातचीत में आसिफ से पूछा गया कि क्या पाकिस्तानी सेना यमन में ईरानी ठिकानों पर हवाई हमलों में शामिल हुई है। उन्होंने इसकी न तो पुष्टि की और न ही इनकार किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान नए रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उसके पास उपलब्ध सैन्य क्षमताएं जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब के लिए उपलब्ध रहेंगी। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि रियाद ने पाकिस्तान से सैन्य सहायता मांगी है या नहीं।

    पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किए के रक्षा समझौते का क्या मतलब?

    पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। तीनों देशों ने इसे रक्षात्मक समझौता बताया है और कहा है कि यह किसी खास देश के खिलाफ नहीं है।

    ख्वाजा आसिफ का ताजा बयान इस समझौते की व्यावहारिक भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित बलों के बीच संघर्ष तेज हुआ है। इससे पहले भी आसिफ कह चुके हैं कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक फैलता है तो मक्का रक्षा समझौता सक्रिय हो सकता है।

    हूती हमलों से सऊदी अरब की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

    आसिफ के मुताबिक हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि हूतियों ने हाल में यमन के लाल सागर तट पर स्थित बंदरगाह शहर मोखा और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा किया है। इससे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास उनकी मौजूदगी बढ़ी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने यह भी कहा कि हूती विद्रोहियों और इराक में उनके सहयोगी मिलिशिया समूहों ने सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया है। उनके मुताबिक, सऊदी टैंकरों को इस जलमार्ग से गुजरने से रोकने की कोशिश भी की गई है।

    आसिफ ने हूतियों को हमलावर बताते हुए कहा कि सऊदी अरब का कोई भी दुश्मन पाकिस्तान का दुश्मन है।

    अभी तैयार हो रहा गठबंधन का ढांचा

    मक्का में हुए रक्षा समझौते के बाद तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को लागू करने का ढांचा अभी विकसित किया जा रहा है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के सैन्य प्रमुखों ने हाल में रियाद में बैठक की थी। इसमें खुफिया जानकारी साझा करने, सैन्य समन्वय और क्षमताओं को एक-दूसरे से जोड़ने सहित क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा हुई।

    समझौते के तहत सचिवालय और अन्य संचालन व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके पूर्ण संचालन की प्रक्रिया अभी स्पष्ट रूप से तय नहीं हुई है। समझौते का पूरा पाठ भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    ईरान से बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहता है पाकिस्तान

    सऊदी अरब को सैन्य समर्थन की प्रतिबद्धता जताने के साथ पाकिस्तान ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क भी बनाए रखना चाहता है। आसिफ ने कहा है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय संघर्ष को खत्म करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत दोबारा शुरू कराने के पक्ष में है।

    पाकिस्तान ने इसी साल अप्रैल में इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की मेजबानी की थी। हालांकि, बाद में क्षेत्रीय संघर्ष फिर बढ़ गया और बातचीत के लिए तय समयसीमा आगे नहीं बढ़ सकी।

    इस तरह पाकिस्तान एक ओर नए रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद और क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों को भी जारी रखने की स्थिति में है।

  • सऊदी अरब में हूती के हमलों के बाद US में बड़ा अलर्ट… यात्रा के लिए अनुमति लेना अनिवार्य

    सऊदी अरब में हूती के हमलों के बाद US में बड़ा अलर्ट… यात्रा के लिए अनुमति लेना अनिवार्य


    वाशिंगटन।
    यमन (Yemen) के हूती समूह (Houthi Group) के मिसाइल और ड्रोन हमलों (Missile- Drone Attacks) के बाद सऊदी अरब (Saudi Arabia) में सुरक्षा को लेकर अमेरिका ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी मिशन ने सऊदी अरब में काम कर रहे अपने सरकारी कर्मचारियों को ताइफ और यनबू शहरों की यात्रा के लिए विशेष अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम सरकारी काम के साथ-साथ निजी यात्रा पर भी लागू होगा। अमेरिकी मिशन ने कहा कि यह फैसला मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए लिया गया है। साथ ही सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।


    हूतियों ने सऊदी अरब को कैसे निशाना बनाया?

    यह अमेरिकी अलर्ट ऐसे समय आया है जब हूती समूह ने सऊदी अरब की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इनमें राजधानी रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि मिसाइल को रास्ते में ही रोक दिया गया। गठबंधन ने बिश, ताइफ, फरासन और यनबू में नागरिक आबादी और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिशों की भी जानकारी दी है। रियाद में एयरपोर्ट के पास विस्फोट और धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने की खबर भी सामने आई, हालांकि सऊदी अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में किसी के हताहत होने या नुकसान की सूचना नहीं है।


    अमेरिका ने सऊदी अरब में रहने वाले नागरिकों को क्या कहा?

    अमेरिकी मिशन ने अपने नागरिकों से सतर्क रहने, स्थानीय मीडिया और सरकारी घोषणाओं पर नजर रखने तथा फोन चार्ज रखने को कहा है। हवाई हमले की स्थिति में लोगों को खिड़कियों और कांच के दरवाजों से दूर रहने की सलाह दी गई है। अमेरिका ने लोगों से प्रदर्शन और बड़ी भीड़ से बचने तथा ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने को भी कहा है, जिन्हें सार्वजनिक रूप से अमेरिका से जुड़ा माना जाता है। अमेरिकी विदेश विभाग सऊदी अरब के लिए फिलहाल लेवल-3 ‘यात्रा पर पुनर्विचार करें’ की सलाह दे रहा है। इसमें ड्रोन और मिसाइल हमलों, सशस्त्र संघर्ष और आतंकवाद का खतरा बताया गया है।


    ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को क्या चेतावनी दी?

    सऊदी अरब पर हमलों के बीच ईरान ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य केंद्रीय कमान ने रविवार को सरकारी मीडिया पर कहा कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी कोई नया बड़ा हमला करते हैं तो ईरान अमेरिका के खिलाफ लगातार जवाबी कार्रवाई करेगा। ईरान ने यह भी कहा कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के सहयोगियों को संघर्ष का पक्ष माना जाएगा। हालांकि, ईरान ने उस कथित हमले की कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी, जिसकी तैयारी होने की बात उसने कही है।


    कतर ने हूती हमलों पर क्या कहा?

    कतर ने रियाद को निशाना बनाकर किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमले और बिश, ताइफ, फरासन तथा यनबू में नागरिक आबादी और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिशों की कड़ी निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को सऊदी अरब की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है। इस बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया की यात्रा करने या वहां से गुजरने वाले अपने नागरिकों को भी सतर्क रहने को कहा है। अमेरिकी चेतावनी में उड़ानें रद्द होने और हवाई क्षेत्र बंद होने जैसी संभावित परेशानियों का भी जिक्र किया गया है।

  • हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर किया बैलिस्टिक मिसाइल से हमला, राजधानी रियाद को बनाया निशाना

    हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर किया बैलिस्टिक मिसाइल से हमला, राजधानी रियाद को बनाया निशाना


    रियाद।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने पुष्टि की है कि यमन के हूती विद्रोहियों (Yemen’s Houthi rebels) ने उसकी राजधानी रियाद (Riyadh) को बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile attack) से निशाना बनाने की कोशिश की। शनिवार देर रात सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह जानकारी दी। गठबंधन यमन में हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी समर्थित बलों का नेतृत्व करता है। उसके मुताबिक, मिसाइल को हमले के प्रयास के दौरान ही रोक लिया गया था। यह रियाद को निशाना बनाकर किया गया पहला हमला था, जब से ईरान समर्थित हूतियों और सऊदी समर्थन वाले यमनी सरकारी बलों के बीच लड़ाई तेज हुई है।


    हूतियों ने सऊदी अरब में और किन जगहों को निशाना बनाने की कोशिश की?

    सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि हूतियों ने लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू के अलावा ताइफ, बायश और फरासन में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की भी कोशिश की। गठबंधन के मुताबिक इन प्रयासों को भी नाकाम कर दिया गया। हालांकि, बयान में इन हमलों के बारे में इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी गई।


    हूतियों ने हमले को लेकर क्या दावा किया?

    हूतियों ने इससे पहले दावा किया था कि उन्होंने रियाद में कुछ ‘संवेदनशील ठिकानों’ और यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको को निशाना बनाया। हूतियों ने दावा किया कि इन हमलों के कारण ‘भारी आग’ लगी। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको ने टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोध का जवाब नहीं दिया।


    तुर्की ने सऊदी अरब को सैन्य मदद देने का संकेत दिया

    इस बीच तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने संकेत दिया है कि हाल ही में हुए रक्षा समझौते के तहत तुर्की सऊदी अरब को सैन्य मदद दे सकता है। एक टीवी इंटरव्यू में जब उनसे तीन देशों के उस गठबंधन (जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है) के यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की संभावना के बारे में पूछा गया, तो फिदान ने कहा कि तुर्की को किसी भी सैन्य ज़रूरत को पूरा करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने कहा, ‘हम सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर बहुत गंभीर हमले देख रहे हैं। हमारे बीच गठबंधन का समझौता है और हम अपनी बात पर कायम हैं।

    इससे पहले भी सऊदी के तेल ढांचे पर हुआ था हमला
    रियाद पर ताजा मिसाइल हमले की कोशिश से पहले सऊदी अरब के अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला हुआ था। 11 सितंबर को हुए इस हमले के बाद पाइपलाइन का संचालन रोकना पड़ा, जिससे सऊदी के लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह से तेल निर्यात प्रभावित हुआ। इसी के चलते सऊदी अरामको ने यूरोप के कम से कम दो रिफाइनिंग ग्राहकों को अक्तूबर में दी जाने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति नहीं करने की जानकारी दी है। सऊदी और इराकी अधिकारियों ने कहा है कि ड्रोन इराक से आए थे, लेकिन हमले के पीछे वास्तव में कौन था, इसकी स्पष्ट जिम्मेदारी अभी सामने नहीं आई है।