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  • राम रहीम बरी, हाईकोर्ट ने किया खुलासा: 3 अन्य की उम्रकैद बरकरार, सबूतों के अभाव में मिली राहत

    राम रहीम बरी, हाईकोर्ट ने किया खुलासा: 3 अन्य की उम्रकैद बरकरार, सबूतों के अभाव में मिली राहत


    नई दिल्ली। पंचकूला की स्पेशल CBI कोर्ट द्वारा 7 साल पहले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में सुनाई गई उम्रकैद की सजा अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद राम रहीम के लिए खत्म हो गई है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया, हालांकि तीन अन्य आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद बरकरार रखी गई है।

    राम रहीम के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि हत्या में इस्तेमाल हुई गोलियों पर कोई स्पष्ट निशान नहीं हैं और सबूतों में छेड़छाड़ की संभावना है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 2002 की घटना को अब 23 साल बीत चुके हैं, जिससे फोरेंसिक जांच पर भी असर पड़ा है। हाईकोर्ट ने कहा कि राम रहीम के साजिशकर्ता होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

    रामचंद्र छत्रपति हरियाणा के सिरसा जिले के रहने वाले थे। वर्ष 2000 में उन्होंने अपना अखबार शुरू किया था और डेरे के साध्वियों के साथ कथित यौन शोषण की चिट्ठी प्रकाशित की थी। इसके बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलीं। 19 अक्टूबर 2002 की रात को छत्रपति की पांच गोलियों से हत्या कर दी गई थी।

    राम रहीम के खिलाफ साध्वियों के यौन शोषण मामले में पहले ही 10 साल की सजा हो चुकी है, इसलिए उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा। रामचंद्र के परिवार ने हाईकोर्ट के फैसले पर निराशा जताई और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का एलान किया है।

    हाईकोर्ट के अनुसार, कुलदीप, निर्मल और कृष्ण लाल के खिलाफ सबूत और गवाहों के बयान उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं, इसलिए उनकी उम्रकैद बरकरार रखी गई।

    राम रहीम इससे पहले डेरा मैनेजर रणजीत हत्याकांड में भी हाईकोर्ट से बरी हो चुके हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को सजा नहीं दी जा सकती।

    मुख्य बिंदु:

    राम रहीम बरी, तीन अन्य आरोपियों की उम्रकैद बरकरार।

    हाईकोर्ट ने कहा, पर्याप्त सबूत नहीं।

    फोरेंसिक जांच और गोलियों पर निशान स्पष्ट नहीं।

    रामचंद्र छत्रपति की हत्या 2002 में हुई, पांच गोलियां मारकर।

    साध्वियों के यौन शोषण मामले में राम रहीम की सजा जारी।

    परिवार सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा।

  • मप्र विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश, 13476.94 करोड़ रुपये का प्रावधान

    मप्र विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश, 13476.94 करोड़ रुपये का प्रावधान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा सदन में वित्त वर्ष 2025–26 के लिए द्वितीय अनुपूरक अनुमान पेश किया है। इस पर गुरुवार, चार दिसंबर को 3:30 घंटे चर्चा होगी। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किए गए दूसरे अनुपूरक बजट में कुल 13476 करोड़ 94 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसमें राजस्व मद में 8,448.57 करोड़ और पूंजीगत मद में 5,028.37 करोड़ शामिल हैं। सरकार ने इस अनुपूरक बजट में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचा, जल संसाधन और औद्योगिक निवेश जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया है।

    दूसरे अनुपूरक बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण विकास विभाग को 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान दिया गया है। पंचायत विभाग को पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार 1,633 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023 के लिए राजस्व मद में 1,794 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अंतर्गत उत्पादन संस्थाओं को ऋण सहायता हेतु 2,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत राशि का प्रावधान किया गया। इसी तरह, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को भूमि अधिग्रहण, सर्वे, डिमार्केशन और सेवा शुल्क हेतु 650 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

    नर्मदा घाटी एवं जल संसाधन परियोजनाओं में बड़ा निवेश
    नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए सरदार सरोवर डूब प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और अन्य कार्यों के लिए 600 करोड़ रुपये, बरगी नहर विस्तार योजना के लिए 200 करोड़ रुपये, इंदिरा सागर परियोजना (एमसीएडी) के लिए 94 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जल संसाधन विभाग को भी बांध व संबंधित कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये तथा बहुती फिल्टर संयंत्र-2 फेज-2 के लिए 63 रुपये करोड़ आवंटित हुए हैं। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के अंतर्गत भावांतर/लेट रेट योजना पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    शहरी विकास एवं अमृत मिशन में अमृत 2.0 मिशन के तहत अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन के लिए 150 करोड़, मिलियन प्लस शहरों के लिए 115 करोड़, एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लोक निर्माण विभाग को भूमि अधिग्रहण मुआवजे के लिए 300 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा शिक्षा विभाग में पीएम जनमन (समग्र शिक्षा) हेतु 122 करोड़, जबकि धरती आबा जनजातीय ग्राम उन्नयन अभियान के लिए 108 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।