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  • एक बूंद पानी को तरसे गांव इछावर में बिगड़े हालात जल जीवन मिशन पर उठे सवाल

    एक बूंद पानी को तरसे गांव इछावर में बिगड़े हालात जल जीवन मिशन पर उठे सवाल


    इछावर। मध्यप्रदेश के इछावर क्षेत्र में इन दिनों जल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है जहां लोगों की जिंदगी का सबसे बड़ा संघर्ष अब पानी बन चुका है। भीषण गर्मी के बीच हालात इतने खराब हो चुके हैं कि गांवों में रहने वाले लोगों को रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी की तलाश करनी पड़ रही है। सीहोर जिले के आलमपुरा जमनी और बड़ी कुलास जैसे गांवों में पानी के लिए जूझ रहे लोगों की तस्वीरें किसी त्रासदी से कम नहीं हैं

    सुबह होते ही महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग खाली बर्तन लेकर घर से निकल पड़ते हैं और दिनभर पानी की तलाश में भटकते रहते हैं। चिलचिलाती धूप में तपती जमीन पर नंगे पांव या चप्पल पहनकर लंबी दूरी तय करना उनकी मजबूरी बन चुका है। कई बार घंटों की मशक्कत के बाद भी उन्हें साफ पानी नहीं मिल पाता और जो पानी मिलता है वह भी पीने लायक नहीं होता

    ग्रामीणों के अनुसार इलाके के अधिकांश हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं और नलों में कई दिनों से पानी नहीं आया है। पानी की कमी ने न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित किया है बल्कि स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। दूषित पानी पीने से बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है

    इस गंभीर स्थिति को लेकर स्थानीय समाजसेवी और किसान एम.एस. मेवाड़ा ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि यह केवल पानी का संकट नहीं बल्कि मानवता की परीक्षा है जहां हर किसी को मिलकर आगे आना होगा

    सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन भी इस क्षेत्र में बेअसर साबित होती नजर आ रही है। इस योजना का उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना था लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। कई गांवों में नल तो लगाए गए लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा जिससे लोगों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं

    जल संकट का असर अब सामाजिक जीवन पर भी पड़ने लगा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है क्योंकि उन्हें भी पानी लाने में परिवार का साथ देना पड़ता है। महिलाएं घर के कामकाज के साथ साथ पानी लाने की जिम्मेदारी निभाते हुए शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से थक चुकी हैं

    ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाए ताकि लोगों को इस भीषण संकट से राहत मिल सके। जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उनका सही तरीके से क्रियान्वयन हो और हर गांव तक पानी की पहुंच सुनिश्चित की जाए

  • समर्थन मूल्य पर खरीदी ने बदली तस्वीर किसानों ने जश्न में किया डांडिया स्वागत

    समर्थन मूल्य पर खरीदी ने बदली तस्वीर किसानों ने जश्न में किया डांडिया स्वागत


    इछावर । मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की शुरुआत ने किसानों के चेहरे पर लंबे समय बाद सच्ची मुस्कान ला दी है सीहोर जिले के चंदेरी गांव में इसका अनोखा और उत्साहपूर्ण नजारा देखने को मिला जहां किसानों ने खुशी में डांडिया नृत्य कर जश्न मनाया खेतों की मेहनत का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद ने पूरे गांव का माहौल उत्सव में बदल दिया

    दरअसल बीते दिनों सीहोर जिले के किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया था किसानों का कहना था कि उनकी फसल तैयार होने के बावजूद खरीदी में देरी हो रही थी और बाजार में उन्हें गेहूं का सही दाम नहीं मिल पा रहा था मंडियों में गेहूं 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा था जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था वहीं दूसरी ओर कर्ज का दबाव और खराब होती फसल ने उनकी चिंता और बढ़ा दी थी

    इस स्थिति को देखते हुए किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से जल्द खरीदी शुरू कराने की मांग की थी किसानों की मांग पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू कर दी है अब किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य मिलेगा जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी है

    खरीदी शुरू होते ही चंदेरी गांव समेत आसपास के राम खेड़ी और अन्य गांवों के किसानों ने एकजुट होकर अपनी खुशी का इजहार किया पारंपरिक डांडिया नृत्य के माध्यम से किसानों ने न केवल जश्न मनाया बल्कि सरकार के प्रति आभार भी जताया यह दृश्य न केवल गांव के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बन गया जहां मेहनत करने वाले अन्नदाता अपनी जीत का जश्न मना रहे थे

    किसानों ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का धन्यवाद किया उनका कहना है कि सरकार के इस कदम से उन्हें बड़ी राहत मिली है और अब वे अपनी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त कर सकेंगे

    यह पहल केवल आर्थिक राहत ही नहीं बल्कि किसानों के आत्मविश्वास को भी मजबूत करने वाली साबित हो रही है लंबे समय से संघर्ष कर रहे किसानों के लिए यह फैसला उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है गांवों में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल है और किसान भविष्य को लेकर अब पहले से ज्यादा आश्वस्त नजर आ रहे हैं

    गेहूं खरीदी की यह शुरुआत प्रदेश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है जो न केवल उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगी बल्कि कृषि क्षेत्र को भी नई दिशा देगी इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि जब किसानों की आवाज सुनी जाती है तो उसका परिणाम खुशहाली और उत्सव के रूप में सामने आता है

  • Vijayasan Mata Mandir: दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट, गुप्त नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब

    Vijayasan Mata Mandir: दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट, गुप्त नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित विजयासन माता मंदिरगुप्त नवरात्र के दौरान आस्था और भक्ति का अद्भुत केंद्र बन जाता है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाए जाने वाले गुप्त नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन काल में मां दुर्गा के स्वरूप विजयासन माता के दर्शन करने मात्र से ही भक्तों के जीवन से कष्ट, बाधाएं और संकट दूर हो जाते हैं। गुप्त नवरात्र का विशेष महत्व साधना और तंत्र-उपासना से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है, जिसमें साधक विशेष व्रत, अनुष्ठान और मंत्र साधना के माध्यम से सिद्धि प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। विजयासन माता मंदिर में इन नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्तों का विश्वास है कि इस अवधि में मां की आराधना करने से शत्रु भय समाप्त होता है, मानसिक शांति मिलती है और जीवन में हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

    गुप्त नवरात्र के अवसर पर मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा रहता है। सुबह से देर रात तक मां के जयकारों से पहाड़ी गूंजती रहती है। नवरात्र के दौरान यहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मेले का भी आयोजन होता है, जिसमें आसपास के जिलों ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई भक्त मनोकामना पूरी होने पर विशेष पूजा, चुनरी अर्पण और प्रसाद वितरण भी करते हैं। विजयासन माता की महिमा को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि मां अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं और हर कार्य में विजय प्रदान करती हैं। यही कारण है कि परीक्षा, मुकदमे, नौकरी, व्यापार या जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में फंसे श्रद्धालु यहां आकर माता से प्रार्थना करते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई आराधना कभी निष्फल नहीं जाती।

    विजयासन माता मंदिर का स्थान भी इसकी विशेषता को और बढ़ाता है। यह मंदिर सीहोर जिले के सलकनपुर गांव में एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। नवरात्र के दौरान इन सीढ़ियों पर भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं, लेकिन मां के दर्शन की आस्था हर थकान को भुला देती है। यदि पहुंचने की बात करें तो श्रद्धालु सड़क और रेल मार्ग से आसानी से सीहोर पहुंच सकते हैं। सीहोर रेलवे स्टेशन से सलकनपुर गांव सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा भोपाल है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इंदौर मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह स्थान सुगम है। कुल मिलाकर, विजयासन माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह विश्वास का प्रतीक भी है, जहां भक्त मां की शरण में जाकर अपने जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं।

  • सीहोर 2026 में होगा ‘कृषि वर्ष’, किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने सड़कों पर उतरेगा कृषि रथ

    सीहोर 2026 में होगा ‘कृषि वर्ष’, किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने सड़कों पर उतरेगा कृषि रथ


    सीहोर । सीहोर जिले में वर्ष 2026 को विशेष रूप से ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। किसानों को खेती की आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और नवाचारों की सीधी जानकारी देने के उद्देश्य से जिलेभर में कृषि रथ अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान रबी सीजन के दौरान जिले के हर विकासखंड में संचालित होगा, जिससे अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके।

    मंगलवार को कलेक्टर बालागुरु के. ने कृषि विभाग के अधिकारियों को राज्य शासन के निर्देशों के अनुरूप कृषि रथों के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करना है।

    कृषि रथ बताएगा खेती के नए रास्ते
    कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, उन्नत बीजों का चयन, कीट एवं रोग प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। इसके साथ ही फसल विविधीकरण, कृषि आधारित उद्यमिता, ई-तकनीक से जुड़ी योजनाएं और पराली प्रबंधन जैसे अहम विषयों पर भी मार्गदर्शन किया जाएगा।

    अभियान की शुरुआत जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कृषि रथों को हरी झंडी दिखाकर की जाएगी, जिससे गांव-गांव तक इसका प्रभावी संदेश पहुंचे।

    जिला और ब्लॉक स्तर पर होगी सख्त निगरानी
    अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में और विकासखंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अध्यक्षता में विशेष क्रियान्वयन समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां रथों के संचालन, कार्यक्रमों की रूपरेखा और पूरे अभियान की निगरानी करेंगी।

    तकनीकी विशेषज्ञ देंगे मौके पर समाधान
    प्रत्येक कृषि रथ के साथ एक तकनीकी दल रहेगा, जिसमें कृषि विभाग के अधिकारी और विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे।

    यह दल गांवों में जाकर किसानों की समस्याएं सुनेगा और उन्हें मौके पर ही आधुनिक कृषि समाधान उपलब्ध कराएगा।

    कृषि रथ अभियान की दैनिक प्रगति की जिला स्तर पर समीक्षा की जाएगी और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से किसानों की आय में वृद्धि होगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और जिले में नवाचार आधारित खेती को नई दिशा मिलेगी।

    कृषि वर्ष 2026 सीहोर के किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक और समृद्धि का नया अध्याय साबित होने की उम्मीद है।