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  • सीहोर कांवड़ यात्रा के कारण भोपाल-इंदौर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही 25 अगस्त तक प्रभावित, जानें नया ट्रैफिक प्लान

    सीहोर कांवड़ यात्रा के कारण भोपाल-इंदौर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही 25 अगस्त तक प्रभावित, जानें नया ट्रैफिक प्लान

    मध्य प्रदेश: में कांवड़ यात्रा को देखते हुए भोपाल और इंदौर के बीच आवागमन करने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। सीहोर क्षेत्र में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ और यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए भोपाल-इंदौर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को सीमित किया गया है। यह व्यवस्था 23 अगस्त की सुबह 9 बजे से 25 अगस्त की रात 8 बजे तक लागू रहेगी।

    इस दौरान भारी वाहनों को भोपाल-इंदौर हाईवे से सीधे गुजरने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। यातायात व्यवस्था में किए गए इस बदलाव का असर दूसरे वाहनों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से यात्रियों को यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने और उसी के अनुसार अपनी योजना तैयार करने की सलाह दी गई है।

    सीहोर में 25 अगस्त को कांवड़ यात्रा का आयोजन होना है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। यात्रा के दौरान सीहोर से होकर गुजरने वाले प्रमुख मार्गों पर भीड़ बढ़ने की आशंका को देखते हुए यातायात को नियंत्रित करने के लिए पहले से व्यवस्था की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य कांवड़ यात्रियों की आवाजाही को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना है।

    भारी वाहनों के लिए रूट में बदलाव किए जाने के कारण भोपाल से इंदौर और इंदौर से भोपाल जाने वाले यात्रियों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। यातायात पुलिस के अनुसार लोगों को अपने सफर में करीब डेढ़ से दो घंटे का अतिरिक्त समय लेकर चलना चाहिए। विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को समय का ध्यान रखते हुए घर से निकलने की सलाह दी गई है।

    यात्रियों के लिए सीहोर और देवास की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भी यातायात की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि आवश्यकता नहीं होने पर भीड़ वाले मुख्य रास्तों से बचें और स्थानीय यातायात निर्देशों का पालन करें। वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को भी निर्धारित दिशा और यातायात नियमों का पालन करना होगा।

    कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यातायात प्रबंधन में अस्थायी बदलाव किए जाते हैं। ऐसे में मार्ग परिवर्तन से होने वाली असुविधा को देखते हुए यात्रियों को पहले से अतिरिक्त समय रखने की जरूरत है। खासकर बस, मालवाहक वाहन और अन्य भारी वाहनों से सफर करने वालों को निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करनी चाहिए।

    भोपाल-इंदौर के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों, बसों और अन्य परिवहन साधनों से आवागमन करते हैं। ऐसे में तीन दिनों के लिए लागू होने वाली यह व्यवस्था यात्रा के समय को प्रभावित कर सकती है। सामान्य यातायात के मुकाबले वैकल्पिक मार्गों पर दूरी और भीड़ के कारण सफर लंबा होने की संभावना है।

    यातायात संबंधी किसी परेशानी या मार्ग को लेकर जानकारी की जरूरत होने पर यातायात पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 0755-2677340 और 2443850 पर संपर्क किया जा सकता है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा के दौरान धैर्य बनाए रखें और यातायात व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

    कांवड़ यात्रा समाप्त होने और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद यातायात व्यवस्था को सामान्य किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल 25 अगस्त की रात 8 बजे तक लागू इस बदलाव के कारण भोपाल और इंदौर के बीच यात्रा करने वालों को अपनी यात्रा का समय पहले से तय करना और संभावित देरी के लिए पर्याप्त समय रखना जरूरी होगा।

  • सीहोर में तेज होगा मानसून का दौर, दो दिन भारी बारिश के आसार; किसानों के लिए राहत की खबर

    सीहोर में तेज होगा मानसून का दौर, दो दिन भारी बारिश के आसार; किसानों के लिए राहत की खबर


    सीहोर । सीहोर जिले में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और आगामी 48 घंटे जिले के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। मौसम विभाग ने 20 और 21 जुलाई को जिले में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी के कारण मध्य प्रदेश के मध्य हिस्सों में मजबूत मौसमी सिस्टम बन रहा है, जिसका असर सीहोर सहित आसपास के क्षेत्रों में साफ दिखाई देगा।

    जिला भू-अभिलेख शाखा के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 19 जुलाई तक जिले में औसतन 14 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि यह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले कम है। पिछले साल 19 जुलाई तक जिले में 17.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इसके बावजूद हाल के दिनों में बारिश की रफ्तार बढ़ने से मौसम सुहावना हुआ है और किसानों के चेहरों पर उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है।

    ब्लॉकवार वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो आष्टा जिले का सबसे अधिक बारिश वाला क्षेत्र बनकर सामने आया है, जहां अब तक 19.6 इंच वर्षा दर्ज की गई है। इसके बाद जावर में 16.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। दूसरी ओर श्यामापुर क्षेत्र सबसे पीछे रहा, जहां केवल 7.7 इंच वर्षा हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश के इस अंतर के कारण खेती और जल उपलब्धता पर भी अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विभाग ने बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े न होने, खुले मैदानों से दूर रहने और खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

    आगामी बारिश को खरीफ फसलों के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त वर्षा होने से सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों को आवश्यक नमी मिलेगी, जिससे उनकी बढ़वार बेहतर होगी। साथ ही जिले के बांधों, तालाबों और जलाशयों का जलस्तर भी बढ़ेगा, जिससे सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    प्रशासन भी मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। संभावित भारी बारिश को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।

  • सीहोर में सीवेज खुदाई से फूटी पेयजल पाइपलाइन, हजारों लीटर पानी बहा; दलदल बनी सड़कें, लोग परेशान

    सीहोर में सीवेज खुदाई से फूटी पेयजल पाइपलाइन, हजारों लीटर पानी बहा; दलदल बनी सड़कें, लोग परेशान


    सीहोर । सीहोर के मंडी क्षेत्र स्थित फ्रीगंज में सीवेज लाइन बिछाने का कार्य स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन गया है। निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार की लापरवाही से पेयजल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे रोजाना नलों की सप्लाई के समय हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। पानी की बर्बादी के साथ-साथ सड़कों पर कीचड़ और दलदल जैसी स्थिति बन गई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क खोदने के बाद एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक मरम्मत का काम पूरा नहीं किया गया। ठेकेदार ने केवल मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी, जिससे सड़कें ऊबड़-खाबड़ और कीचड़ से भर गई हैं। बारिश और पानी के रिसाव के कारण हालात और खराब हो गए हैं।

    क्षेत्र में दोपहिया और चारपहिया वाहन आए दिन कीचड़ में फंस रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और पैदल आने-जाने वाले लोगों को हो रही है। घरों के सामने गंदगी और पानी जमा रहने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

    वार्डवासियों ने नगर पालिका पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिम्मेदार इंजीनियर मौके का निरीक्षण नहीं करते, जिससे ठेकेदार मनमानी कर रहा है। पाइपलाइन टूटने के बाद भी समय पर मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे लगातार पानी की बर्बादी हो रही है।

    मामले पर सीहोर नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सुधीर सिंह ने कहा कि संबंधित ठेकेदार और इंजीनियर को तत्काल पाइपलाइन की मरम्मत के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पानी की बर्बादी रोकी जाएगी और सड़क की स्थिति भी जल्द सुधारी जाएगी, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके।

  • सलकनपुर मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ से 2 घंटे जाम, गुप्त नवरात्रि पर वाहनों की लगी लंबी कतार

    सलकनपुर मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ से 2 घंटे जाम, गुप्त नवरात्रि पर वाहनों की लगी लंबी कतार


    सीहोर । सीहोर जिले के बुधनी स्थित प्रसिद्ध सलकनपुर विजयासन देवी धाम में गुप्त नवरात्रि और रविवार के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दर्शन के लिए पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं के कारण पहाड़ी पर मंदिर जाने वाले सड़क मार्ग पर लंबा जाम लग गया। करीब दो घंटे तक चार पहिया वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    स्थिति की जानकारी मिलते ही सलकनपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने यातायात को व्यवस्थित करने के लिए लगातार प्रयास किए और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद मार्ग को सुचारु कराया। इसके बाद धीरे-धीरे वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकी।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, जाम लगने की बड़ी वजह सूर्य द्वार सीढ़ी मार्ग के आसपास सड़क किनारे लगी अस्थायी दुकानें हैं। आरोप है कि कुछ दुकानदार श्रद्धालुओं की कारों को बीच चढ़ाई में ही रुकवाकर सड़क किनारे खड़ा करवा देते हैं और उन्हें सीढ़ियों से मंदिर जाने की सलाह देते हैं। इससे सड़क संकरी हो जाती है और पीछे आने वाले वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।

    रविवार, अवकाश और विशेष धार्मिक अवसरों पर सलकनपुर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क किनारे अतिक्रमण यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी दुकानों को व्यवस्थित किया जाए, ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं को जाम की समस्या से राहत मिल सके।

  • करंट हादसों से भड़का किसानों का गुस्सा, सीहोर से भोपाल पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली मुख्यालय घेरा, कार्रवाई और मुआवजे की उठाई मांग

    करंट हादसों से भड़का किसानों का गुस्सा, सीहोर से भोपाल पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली मुख्यालय घेरा, कार्रवाई और मुआवजे की उठाई मांग

    मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में करंट लगने की लगातार सामने आई घटनाओं के विरोध में किसानों और ग्रामीणों का आक्रोश राजधानी भोपाल तक पहुंच गया। जिले के कई गांवों से सैकड़ों किसान भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के गोविंदपुरा मुख्यालय पहुंचे और बिजली विभाग की कथित लापरवाही के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जर्जर बिजली लाइनों और झूलते तारों की बार-बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए, जिसके कारण कई गंभीर हादसे हुए। किसानों ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

    सीहोर जिले के बड़वेली, चंदेरी, बिलकिसगंज, ढाबला, मंगरखेड़ा, पचामा, पाली, जामुनिया, रामाखेड़ी और अन्य गांवों से पहुंचे किसानों ने समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में मुख्यालय के बाहर करीब तीन घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि खेतों के ऊपर से गुजर रही जर्जर 11 केवी और एलटी लाइनें किसानों की जान के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था सुधारने में गंभीरता नहीं दिखाई।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बताया कि हाल के वर्षों में करंट की चपेट में आने से पांच किसान गंभीर हादसों का शिकार हुए। इनमें तीन किसानों की मौत हो चुकी है, जबकि दो किसानों के हाथ काटने पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि इन हादसों ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल दिया है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

    प्रदर्शनकारियों ने विद्युत मंडल के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की मांग की। किसानों ने यह भी कहा कि वे पहले मुख्यमंत्री कार्यालय, ऊर्जा मंत्री, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि यदि समय रहते बिजली लाइनों की मरम्मत और रखरखाव किया जाता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

    धरने के बाद प्रबंध निदेशक ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों ने हालांकि स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा और यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जानी चाहिए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

    इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने मानव अधिकार आयोग और महिला आयोग को भी ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। आयोग के अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने का भरोसा दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा और अन्य मांगें पूरी नहीं हुईं तो सीहोर, भोपाल, शाजापुर और उज्जैन सहित आसपास के जिलों के किसान संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

  • सीहोर में किसान की फसल पर चढ़ा दिए ट्रैक्टर: रोकने पर दबंग बोले- कोई पटवारी नहीं आएगा, यहीं से निकलेगी गाड़ी

    सीहोर में किसान की फसल पर चढ़ा दिए ट्रैक्टर: रोकने पर दबंग बोले- कोई पटवारी नहीं आएगा, यहीं से निकलेगी गाड़ी


    सीहोर सीहोर जिले के अहमदपुर थाना क्षेत्र के पीपलखेड़ा गांव में एक किसान की मेहनत पर दबंगों ने ट्रैक्टर चलाकर पानी फेर दिया। आपसी रंजिश के चलते गांव के कुछ लोगों ने खेत में जबरन ट्रैक्टर और खेती के उपकरण उतार दिए तथा बोई हुई फसल को रौंदकर नष्ट कर दिया। जब किसान और उसके परिजनों ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने खुलेआम दादागिरी दिखाते हुए गाली गलौज की और जान से मारने की धमकी तक दे डाली। पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।

    वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक ही खेत में कई ट्रैक्टर कल्टीवेटर और बोनी मशीन के साथ लोग जबरन जुताई कर रहे हैं। किसान पक्ष के लोग ट्रैक्टर रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन आरोपी उन्हें धक्का देकर हटाने का प्रयास करते हैं। विरोध के दौरान एक युवक ट्रैक्टर के सामने जमीन पर बैठ जाता है ताकि फसल को बचाया जा सके लेकिन दबंग बेखौफ होकर कहते हैं कि ट्रैक्टर इसी रास्ते से जाएगा और जो होना है हो जाने दो। जब पीड़ित पक्ष पटवारी की मौजूदगी में फैसला कराने की बात करता है तो आरोपी साफ शब्दों में कहते हैं कि कोई पटवारी नहीं आएगा और ट्रैक्टर यहीं चलेगा। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस धक्का मुक्की और मारपीट जैसी स्थिति बन जाती है।

    पीड़ित किसान मानसिंह ने अहमदपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि गांव के राजू महेंद्र चंदरसिंह अरविंद और योगेंद्र ने पुरानी रंजिश के चलते उनकी कृषि भूमि में घुसकर जानबूझकर ट्रैक्टर चलाया जिससे बोई हुई फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। किसान का कहना है कि विरोध करने पर आरोपियों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और भविष्य में भी खेत को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।

    घटना के बाद किसान ने पुलिस से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा फसल के नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद और आपसी रंजिश के कारण किसानों को होने वाले नुकसान की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा

    सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा


    सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर और नीमच जिलों में रविवार को जनप्रतिनिधियों को जनता के तीखे विरोध और सवालों का सामना करना पड़ा। एक ओर सीहोर में किसानों और कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan का काफिला रोककर अपनी समस्याएं सामने रखीं, तो दूसरी ओर नीमच में भाजपा विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़ना पड़ा।

    सीहोर में इछावर के आजाद मैदान की ओर जा रहे शिवराज सिंह चौहान का काफिला अचानक उस समय रुक गया जब कांग्रेस नेताओं और किसानों के एक समूह ने रास्ते में उन्हें घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे राजनीतिक रूप से भले ही कांग्रेस से जुड़े हों, लेकिन जनप्रतिनिधि के रूप में शिवराज सभी के प्रतिनिधि हैं, इसलिए वे अपनी समस्याएं उनके सामने रखना चाहते हैं।

    इस दौरान किसानों ने बताया कि पिछले कई दिनों से वे खाद और कृषि संबंधी कार्यों के लिए परेशान हैं। डिजिटल पोर्टल के सर्वर डाउन होने के कारण किसानों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, जिससे उनकी समस्याएं बढ़ रही हैं। किसानों ने इस संबंध में केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा।

    किसानों की बात सुनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा और सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे जनता के प्रतिनिधि हैं और हर नागरिक की समस्या का समाधान करना उनकी जिम्मेदारी है।

    बाद में जनकल्याण शिविर में पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी जनता के कामों में बाधा डाल रहे हैं और पात्र लोगों को योजनाओं से बाहर किया जा रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सभी आवेदनों की निष्पक्ष जांच हो और किसी गरीब का हक न छीना जाए।

    इसी बीच नीमच जिले के जावद क्षेत्र में स्थिति अलग रही, जहां विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को जनता के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। वे बांगरेड गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए।

    ग्रामीणों का कहना था कि अस्पताल तो बन रहा है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। जब विधायक ने जवाब देने की कोशिश की, तो भीड़ और अधिक आक्रोशित हो गई और ‘विधायक वापस जाओ’ के नारे लगाने लगी। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों के बीच हस्तक्षेप के बाद विधायक को कार्यक्रम बीच में छोड़कर जाना पड़ा। यह घटनाएं दर्शाती हैं कि जनता अब अपने मुद्दों को लेकर अधिक मुखर हो रही है और जनप्रतिनिधियों से सीधे जवाब की अपेक्षा रखती है।

  • रास्ते के विवाद ने लिया हिंसक रूप, बुजुर्ग महिला को घसीटा; लाठी-डंडों से हुई मारपीट का वीडियो वायरल

    रास्ते के विवाद ने लिया हिंसक रूप, बुजुर्ग महिला को घसीटा; लाठी-डंडों से हुई मारपीट का वीडियो वायरल


    मध्यप्रदेश । सीहोर शहर में गणेश मंदिर के पास रास्ते और जमीन के अधिकार को लेकर हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट तक पहुंच गया, जिसमें लाठी-डंडे, लात-घूंसे और धक्का-मुक्की का दौर चला। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इलाके में सनसनी फैला दी है।

    जानकारी के अनुसार, विवाद एक छोटे से जमीन के टुकड़े और उससे जुड़े रास्ते के उपयोग को लेकर शुरू हुआ था। दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही देर में मामला इतना बढ़ गया कि लोग एक-दूसरे पर हमला करने लगे। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि विवाद के दौरान किसी ने भी संयम नहीं बरता और देखते ही देखते पूरा क्षेत्र रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।

    वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे पर लाठी-डंडों और लात-घूंसों से हमला कर रहे हैं। मारपीट के दौरान महिलाओं और बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया। वीडियो में एक बुजुर्ग महिला को घसीटते हुए देखा जा सकता है, जबकि कुछ लोग उन्हें बचाने का प्रयास करते नजर आते हैं। इस दौरान महिलाओं की चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल साफ दिखाई देता है।

    घटना के दौरान कई लोगों को चोटें आई हैं। वीडियो में एक युवक जमीन पर बेसुध अवस्था में पड़ा दिखाई देता है, जबकि आसपास मौजूद लोग हंगामे को देखते रहते हैं। कुछ लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि विवाद को तुरंत शांत नहीं कराया जा सका।

    सबसे चिंताजनक बात यह रही कि बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद झगड़ा रोकने के बजाय अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाते रहे। इससे मारपीट का सिलसिला और लंबा चलता रहा। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद काफी समय से चल रहा था और दोनों पक्षों के बीच पहले भी तनातनी की स्थिति बन चुकी थी। हालांकि इस बार मामला पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस को जानकारी दी गई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।

    पुलिस अब वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की जा रही है और जांच के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे विवादों को समय रहते सुलझाने की आवश्यकता है, ताकि छोटी-छोटी बातों पर हिंसा की नौबत न आए।

    फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन घटना के बाद इलाके में तनाव और चर्चा का माहौल बना हुआ है। पुलिस मामले पर नजर बनाए हुए है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।

  • बिलकिसगंज जोड़ पर खुली नाली में गिरा बाइक सवार, सुरक्षा इंतजामों की पोल खुली

    बिलकिसगंज जोड़ पर खुली नाली में गिरा बाइक सवार, सुरक्षा इंतजामों की पोल खुली


    मध्यप्रदेश । सीहोर जिले के बिलकिसगंज जोड़ पर गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब एक बाइक सवार सड़क किनारे निर्माणाधीन खुली नाली में जा गिरा। दुर्घटना में बाइक सवार को गंभीर चोटें नहीं आईं, लेकिन इस घटना ने निर्माण कार्यों में बरती जा रही लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सड़क किनारे नाली निर्माण का कार्य लंबे समय से चल रहा है। बावजूद इसके, मौके पर न तो किसी प्रकार की बैरिकेडिंग की गई थी और न ही लोगों को सतर्क करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे। इसी कारण बाइक सवार अचानक संतुलन खो बैठा और सीधे खुली नाली में जा गिरा। हादसे के बाद बाइक नाली में पड़े मलबे और लोहे के सरियों के बीच बुरी तरह फंस गई, जिसे निकालने के लिए आसपास मौजूद लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

    घटना की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें बाइक की स्थिति साफ दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इस मार्ग पर पहले भी कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और ठेकेदारों ने अब तक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ रही है।

    रिहायशी क्षेत्र और मुख्य सड़क के पास चल रहे इस निर्माण कार्य में सुरक्षा उपायों की कमी को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि नाली के आसपास बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत लगाए गए होते तो इस तरह की दुर्घटना टाली जा सकती थी। लोगों ने संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन अक्सर हादसों के बाद कार्रवाई का आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आता। यही कारण है कि क्षेत्र में लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है। उनका मानना है कि केवल जांच या चेतावनी से काम नहीं चलेगा, बल्कि दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

    फिलहाल हादसे के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खुली नालियों और निर्माण स्थलों पर तत्काल सुरक्षा इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी की जान खतरे में न पड़े। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि विकास कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन भी उतना ही जरूरी है।

  • सीहोर में ग्रामीणों ने पकड़े रेत से भरे ट्रैक्टर, चालक के पास न रॉयल्टी मिली न लाइसेंस

    सीहोर में ग्रामीणों ने पकड़े रेत से भरे ट्रैक्टर, चालक के पास न रॉयल्टी मिली न लाइसेंस


    सीहोर  सीहोर जिले के रफीगंज-लोदड़ी गांव में गुरुवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब ग्रामीणों ने रेत से भरे कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को गांव के भीतर से गुजरते हुए रोक लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से अवैध रेत परिवहन में लगे वाहन गांव के रास्तों का उपयोग कर रहे हैं और तेज रफ्तार के कारण लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए इस पूरे मामले को कानून व्यवस्था और जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।

    ग्रामीणों के अनुसार, रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना किसी रोक-टोक के गांव की सड़कों पर दौड़ते हैं। कई बार वाहन चालक ग्रामीणों की चेतावनियों को नजरअंदाज कर चुके हैं। गांव के चौकीदार द्वारा भी उन्हें रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक और वाहन मालिकों ने किसी की बात नहीं मानी। ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज रफ्तार के कारण बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

    हाल ही में गांव में हुए एक हादसे ने लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है। कुछ दिन पहले एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित एक दुकान में घुस गई थी। घटना के समय दुकान में मौजूद एक बच्ची को ग्रामीणों ने समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया और उन्होंने अवैध रेत परिवहन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

    ग्रामीणों द्वारा रोके गए एक ट्रैक्टर चालक ने कैमरे के सामने स्वीकार किया कि उसके पास रेत परिवहन की कोई वैध रॉयल्टी नहीं है। इतना ही नहीं, वह ड्राइविंग लाइसेंस भी प्रस्तुत नहीं कर सका। चालक ने बताया कि वाहन मालिक के निर्देश पर वह गांव के रास्ते से रेत लेकर जा रहा था क्योंकि यह मार्ग छोटा और सीधा पड़ता है। इस खुलासे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    घटना के बाद माइनिंग विभाग, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वाहन बिना नंबर प्लेट, बिना रॉयल्टी और बिना लाइसेंस के खुलेआम सड़कों पर चल रहे हैं तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। कई ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट तक नहीं लगी थी, जिससे उनकी पहचान करना भी मुश्किल था।

    ग्रामीणों ने मामले की सूचना पुलिस को डायल-100 के माध्यम से दी है और मांग की है कि गांव के अंदर से रेत परिवहन पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यदि रेत का वैध कारोबार किया जा रहा है तो वाहनों को मुख्य मार्गों का उपयोग करना चाहिए और सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखने चाहिए।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के डर से रेत कारोबारी अब मुख्य सड़कों के बजाय ग्रामीण मार्गों का उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल गांव की सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। अब सभी की नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है और अवैध रेत परिवहन पर कितना प्रभावी अंकुश लगा पाता है।