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  • सीहोर में अवैध शराबखोरी पर पुलिस की दबिश, तीन ढाबों पर जांच में शराब पीते मिले लोग..

    सीहोर में अवैध शराबखोरी पर पुलिस की दबिश, तीन ढाबों पर जांच में शराब पीते मिले लोग..


    मध्य प्रदेश: के सीहोर में ढाबों पर कथित तौर पर अवैध रूप से शराब पिलाए जाने की शिकायतों के बाद कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस टीम ने शहर के तीन ढाबों पर अचानक दबिश देकर वहां की गतिविधियों की जांच की। इस दौरान कुछ लोग शराब का सेवन करते हुए मिले। पुलिस ने मौके से नियमों के उल्लंघन से जुड़े साक्ष्य जुटाए हैं और संबंधित ढाबा संचालकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई का नेतृत्व कोतवाली थाना प्रभारी गिरीश दुबे ने किया।

    पुलिस को पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि शहर के कुछ ढाबों पर नियमों के विरुद्ध ग्राहकों को शराब परोसी जा रही है। शिकायतों में विशेष रूप से रात के समय और बंद कमरों में शराब पिलाए जाने की बात कही गई थी। इसके अलावा, ऐसे स्थानों पर असामाजिक तत्वों के जमावड़े की आशंका भी जताई गई थी। इन सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच की और संबंधित स्थानों पर कार्रवाई की योजना बनाई।

    योजना के तहत कोतवाली पुलिस की टीम ने शहर के तीन प्रमुख ढाबों पर औचक दबिश दी। अचानक पहुंची पुलिस टीम ने वहां मौजूद लोगों और गतिविधियों की पड़ताल की। जांच के दौरान कुछ लोग शराब का सेवन करते पाए गए। पुलिस ने मौके पर मौजूद परिस्थितियों का निरीक्षण किया और कथित अनियमितताओं से संबंधित साक्ष्य एकत्र किए। कार्रवाई का उद्देश्य शिकायतों की वास्तविकता की जांच करना और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाना था।

    पुलिस अब संबंधित ढाबा संचालकों के खिलाफ आबकारी अधिनियम और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तीनों ढाबों में से प्रत्येक पर किस तरह का उल्लंघन पाया गया। इसी तरह, कितने लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है या किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

    कोतवाली थाना प्रभारी गिरीश दुबे ने स्पष्ट किया कि सीहोर जिले और आसपास के क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अभियान जारी रखने की बात कही। पुलिस के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    ढाबों पर रात के समय शराब परोसे जाने से संबंधित शिकायतों को देखते हुए पुलिस की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में शिकायतों की जांच और कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है। फिलहाल, तीन ढाबों पर हुई दबिश के बाद संचालकों के खिलाफ प्रक्रिया शुरू की गई है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों से नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है या नहीं। पुलिस ने संकेत दिया है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

  • सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में भोपाल कूच, 35 से अधिक गांवों के हजारों लोगों ने उठाई न्याय की मांग

    सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में भोपाल कूच, 35 से अधिक गांवों के हजारों लोगों ने उठाई न्याय की मांग

    मध्य प्रदेश। के सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलों को नुकसान पहुंचाने के मामले में विरोध तेज हो गया है। खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के एक हजार से ज्यादा आदिवासी न्याय की मांग को लेकर भोपाल की ओर कूच कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर अपनी शिकायतें और जमीन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही है। इस आंदोलन के कारण प्रदेश की सियासत में भी हलचल बढ़ गई है।

    आदिवासियों की ओर से निकाली जा रही पदयात्रा में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हैं। प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यह आंदोलन शुरुआत में कोसमी गांव के 12 आदिवासी परिवारों को बेदखल किए जाने के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन अब आसपास के दर्जनभर गांवों के लोग भी इसमें शामिल हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उनके साथ हुई कार्रवाई की जांच हो और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले।

    इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, सीहोर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। आयोग की ओर से जवाब तलब किए जाने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से दिए गए जवाब की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    कोसमी गांव में 11 अक्टूबर को वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए थे। प्रभावित परिवारों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस कार्रवाई में उनकी फसलें बर्बाद कर दी गईं और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने गांव में लगातार तीन दिन तक धरना दिया था। उनका कहना है कि मकान टूटने और फसलें नष्ट होने से परिवारों के सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो गई हैं।

    घटना के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधायक रमाकांत भार्गव प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिलने पहुंचे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने वन विभाग की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे अत्याचार की पराकाष्ठा बताते हुए धरने पर बैठकर प्रभावित परिवारों की शिकायतें सुनी थीं। इस घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया।

    दूसरी ओर, प्रशासन की रिपोर्ट में संबंधित जमीन पर कब्जे को अवैध बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग की ओर से यह कहा गया है कि आरक्षित वन भूमि पर पौधे काटकर अतिक्रमण किया गया था। इस तरह मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोप और प्रशासन का पक्ष अलग-अलग हैं। जमीन पर कब्जे की स्थिति और कार्रवाई से जुड़े मुद्दे विवाद के प्रमुख बिंदु बने हुए हैं।

    प्रदर्शनकारी आदिवासी परिवारों की मांग है कि जिस जमीन पर वे पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं, उसका पट्टा दिया जाए। इसके अलावा बेदखल परिवारों के पुनर्वास, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करने तथा नष्ट हुई फसलों के लिए मुआवजा देने की मांग भी उठाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उन्हें रहने तथा आजीविका के लिए उचित व्यवस्था मिलनी चाहिए।

    आंदोलन में शामिल लोग कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। भोपाल कूच का उद्देश्य मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायतें और जमीन से संबंधित दस्तावेज रखना है। अब इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा मांगे गए जवाब, प्रशासन के पक्ष और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • सीहोर में जर्जर पुल के पास नाले में पलटा पानी के केन से भरा ऑटो, बाल-बाल बचा चालक, मरम्मत पर उठे सवाल

    सीहोर में जर्जर पुल के पास नाले में पलटा पानी के केन से भरा ऑटो, बाल-बाल बचा चालक, मरम्मत पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश: के सीहोर नगर के जमशेदनगर इलाके में रविवार को छोटे पुल के पास एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। पानी के केन और कैंपर से भरा एक ऑटो अनियंत्रित होकर नाले के किनारे पलट गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई और ऑटो चालक समेत आसपास मौजूद लोग सुरक्षित बच गए। हालांकि, इस घटना ने इलाके में स्थित जर्जर पुल की स्थिति और सुरक्षा इंतजामों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।

    जानकारी के अनुसार, जमशेदनगर के छोटे पुल के पास से पानी के केन और कैंपर लेकर गुजर रहा ऑटो अचानक अनियंत्रित हो गया। इसके बाद वाहन नाले के किनारे पलट गया। ऑटो में बड़ी संख्या में पानी के पीले केन और कैंपर रखे हुए थे। वाहन के पलटने से ये सभी सामान नाले के आसपास और गंदगी से भरे किनारे पर बिखर गए।

    हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और चालक की मदद करने लगे। ऑटो चालक और आसपास मौजूद लोगों ने नाले के किनारे उतरकर बिखरे हुए पानी के केन और कैंपर को संभाला। पलटे हुए वाहन से सामान निकालने और उसे सुरक्षित जगह पर रखने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    इस हादसे के बाद जमशेदनगर के छोटे पुल की जर्जर स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों की चिंताएं फिर सामने आई हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पुल लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। इसकी मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम भी हाल ही में चल रहा था, लेकिन पुल की मौजूदा हालत के कारण यहां से गुजरने वाले लोगों और वाहनों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पुल की मरम्मत के दौरान पहले भी एक गंभीर घटना सामने आ चुकी है। निर्माण कार्य के समय पुल का एक बड़ा कंक्रीट का टुकड़ा नीचे गिर गया था। उस दौरान वहां काम कर रहे मजदूर बाल-बाल बच गए थे। इस घटना के बाद भी पुल की सुरक्षा और मरम्मत कार्य को लेकर लोगों की चिंता बनी हुई है।

    क्षेत्रवासियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त पुल और संकरे रास्ते के कारण यहां से गुजरना जोखिम भरा बना हुआ है। दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को इस रास्ते से निकलते समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल की बदहाल स्थिति के चलते कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है। रविवार को पानी से भरे ऑटो के पलटने की घटना ने इन आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

    लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण स्थानीय निवासियों में नाराजगी भी है। लोगों का कहना है कि पुल की स्थिति में सुधार और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जल्द कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पुल का निर्माण और मरम्मत कार्य सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए जल्द पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

    फिलहाल इस हादसे में किसी के घायल होने या जनहानि की जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, जमशेदनगर के छोटे पुल के पास हुई घटना ने जर्जर पुलों की मरम्मत और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत को फिर उजागर किया है।

  • MP: सीहोर के इस गांव में पानी फिल्टर प्लांट से क्लोरीन गैस लीक… आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ, 6 लोग पहुंचे अस्पताल

    MP: सीहोर के इस गांव में पानी फिल्टर प्लांट से क्लोरीन गैस लीक… आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ, 6 लोग पहुंचे अस्पताल


    सीहोर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीहोर जिले (Sehore district) में पानी साफ करने के लिए इस्तेमाल होने वाली क्लोरीन गैस (Chlorine Gas) जब अचानक हवा में फैल जाए तो क्या होगा? आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और फिर लोगों का अस्पताल की तरफ दौड़ना।

    मामला लसुड़िया खास गांव (Lasudiya Khas village) का है. यहां एक पानी फिल्टर प्लांट (Water filtration plant) है, जहां तालाब के पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन गैस का इस्तेमाल किया जा रहा था. सब कुछ सामान्य था, लेकिन इसी दौरान क्लोरीन गैस के टैंक में लीकेज हो गया।

    गैस टैंक से बाहर निकली तो आसपास मौजूद लोगों को इसका असर महसूस होने लगा. कुछ लोगों की आंखों में तेज जलन होने लगी, तो कुछ को सांस लेने में परेशानी हुई. देखते ही देखते इलाके में हड़कंप मच गया।

    गैस के संपर्क में आए लोगों को इलाज के लिए सीहोर जिला अस्पताल पहुंचाया गया. यहां डॉक्टरों ने प्रभावित लोगों का इलाज करना शुरू किया. अस्पताल पहुंचे लोगों की हालत को लेकर चिंता जरूर थी, लेकिन डॉक्टरों ने राहत की खबर दी. जिला अस्पताल के डॉक्टर हरिओम गुप्ता के मुताबिक, गैस से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को गंभीर परेशानी नहीं हुई है और सभी लोग खतरे से बाहर हैं।


    पानी साफ करने वाली गैस ने बढ़ाई चिंता

    क्लोरीन का इस्तेमाल आमतौर पर पानी को साफ करने के लिए किया जाता है. लसुड़िया खास के इस फिल्टर प्लांट में भी तालाब के पानी को साफ करने के लिए इसका उपयोग हो रहा था. लेकिन टैंक में लीकेज के बाद यही गैस लोगों के लिए परेशानी की वजह बन गई।

    घटना की सूचना के बाद प्लांट में स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिशें शुरू की गईं. हालांकि, गैस लीक होने की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया।

    राहत की बात यही है कि आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जरूर हुई, लेकिन किसी की हालत गंभीर नहीं बताई गई है. सभी प्रभावित लोग खतरे से बाहर हैं. लोगों का सवाल है कि पानी को साफ करने के लिए इस्तेमाल हो रहा क्लोरीन गैस का टैंक आखिर लीक कैसे हुआ? और क्या प्लांट में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे?

  • सीहोर कांवड़ यात्रा के कारण भोपाल-इंदौर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही 25 अगस्त तक प्रभावित, जानें नया ट्रैफिक प्लान

    सीहोर कांवड़ यात्रा के कारण भोपाल-इंदौर हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही 25 अगस्त तक प्रभावित, जानें नया ट्रैफिक प्लान

    मध्य प्रदेश: में कांवड़ यात्रा को देखते हुए भोपाल और इंदौर के बीच आवागमन करने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। सीहोर क्षेत्र में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ और यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए भोपाल-इंदौर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को सीमित किया गया है। यह व्यवस्था 23 अगस्त की सुबह 9 बजे से 25 अगस्त की रात 8 बजे तक लागू रहेगी।

    इस दौरान भारी वाहनों को भोपाल-इंदौर हाईवे से सीधे गुजरने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। यातायात व्यवस्था में किए गए इस बदलाव का असर दूसरे वाहनों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से यात्रियों को यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने और उसी के अनुसार अपनी योजना तैयार करने की सलाह दी गई है।

    सीहोर में 25 अगस्त को कांवड़ यात्रा का आयोजन होना है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। यात्रा के दौरान सीहोर से होकर गुजरने वाले प्रमुख मार्गों पर भीड़ बढ़ने की आशंका को देखते हुए यातायात को नियंत्रित करने के लिए पहले से व्यवस्था की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य कांवड़ यात्रियों की आवाजाही को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना है।

    भारी वाहनों के लिए रूट में बदलाव किए जाने के कारण भोपाल से इंदौर और इंदौर से भोपाल जाने वाले यात्रियों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लग सकता है। यातायात पुलिस के अनुसार लोगों को अपने सफर में करीब डेढ़ से दो घंटे का अतिरिक्त समय लेकर चलना चाहिए। विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को समय का ध्यान रखते हुए घर से निकलने की सलाह दी गई है।

    यात्रियों के लिए सीहोर और देवास की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भी यातायात की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि आवश्यकता नहीं होने पर भीड़ वाले मुख्य रास्तों से बचें और स्थानीय यातायात निर्देशों का पालन करें। वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को भी निर्धारित दिशा और यातायात नियमों का पालन करना होगा।

    कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यातायात प्रबंधन में अस्थायी बदलाव किए जाते हैं। ऐसे में मार्ग परिवर्तन से होने वाली असुविधा को देखते हुए यात्रियों को पहले से अतिरिक्त समय रखने की जरूरत है। खासकर बस, मालवाहक वाहन और अन्य भारी वाहनों से सफर करने वालों को निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करनी चाहिए।

    भोपाल-इंदौर के बीच रोजाना बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों, बसों और अन्य परिवहन साधनों से आवागमन करते हैं। ऐसे में तीन दिनों के लिए लागू होने वाली यह व्यवस्था यात्रा के समय को प्रभावित कर सकती है। सामान्य यातायात के मुकाबले वैकल्पिक मार्गों पर दूरी और भीड़ के कारण सफर लंबा होने की संभावना है।

    यातायात संबंधी किसी परेशानी या मार्ग को लेकर जानकारी की जरूरत होने पर यातायात पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 0755-2677340 और 2443850 पर संपर्क किया जा सकता है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा के दौरान धैर्य बनाए रखें और यातायात व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

    कांवड़ यात्रा समाप्त होने और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद यातायात व्यवस्था को सामान्य किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल 25 अगस्त की रात 8 बजे तक लागू इस बदलाव के कारण भोपाल और इंदौर के बीच यात्रा करने वालों को अपनी यात्रा का समय पहले से तय करना और संभावित देरी के लिए पर्याप्त समय रखना जरूरी होगा।

  • सीहोर में तेज होगा मानसून का दौर, दो दिन भारी बारिश के आसार; किसानों के लिए राहत की खबर

    सीहोर में तेज होगा मानसून का दौर, दो दिन भारी बारिश के आसार; किसानों के लिए राहत की खबर


    सीहोर । सीहोर जिले में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और आगामी 48 घंटे जिले के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। मौसम विभाग ने 20 और 21 जुलाई को जिले में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी के कारण मध्य प्रदेश के मध्य हिस्सों में मजबूत मौसमी सिस्टम बन रहा है, जिसका असर सीहोर सहित आसपास के क्षेत्रों में साफ दिखाई देगा।

    जिला भू-अभिलेख शाखा के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 19 जुलाई तक जिले में औसतन 14 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि यह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले कम है। पिछले साल 19 जुलाई तक जिले में 17.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इसके बावजूद हाल के दिनों में बारिश की रफ्तार बढ़ने से मौसम सुहावना हुआ है और किसानों के चेहरों पर उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है।

    ब्लॉकवार वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो आष्टा जिले का सबसे अधिक बारिश वाला क्षेत्र बनकर सामने आया है, जहां अब तक 19.6 इंच वर्षा दर्ज की गई है। इसके बाद जावर में 16.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। दूसरी ओर श्यामापुर क्षेत्र सबसे पीछे रहा, जहां केवल 7.7 इंच वर्षा हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश के इस अंतर के कारण खेती और जल उपलब्धता पर भी अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विभाग ने बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े न होने, खुले मैदानों से दूर रहने और खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

    आगामी बारिश को खरीफ फसलों के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त वर्षा होने से सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों को आवश्यक नमी मिलेगी, जिससे उनकी बढ़वार बेहतर होगी। साथ ही जिले के बांधों, तालाबों और जलाशयों का जलस्तर भी बढ़ेगा, जिससे सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    प्रशासन भी मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। संभावित भारी बारिश को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।

  • सीहोर में सीवेज खुदाई से फूटी पेयजल पाइपलाइन, हजारों लीटर पानी बहा; दलदल बनी सड़कें, लोग परेशान

    सीहोर में सीवेज खुदाई से फूटी पेयजल पाइपलाइन, हजारों लीटर पानी बहा; दलदल बनी सड़कें, लोग परेशान


    सीहोर । सीहोर के मंडी क्षेत्र स्थित फ्रीगंज में सीवेज लाइन बिछाने का कार्य स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन गया है। निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार की लापरवाही से पेयजल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे रोजाना नलों की सप्लाई के समय हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। पानी की बर्बादी के साथ-साथ सड़कों पर कीचड़ और दलदल जैसी स्थिति बन गई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क खोदने के बाद एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक मरम्मत का काम पूरा नहीं किया गया। ठेकेदार ने केवल मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी, जिससे सड़कें ऊबड़-खाबड़ और कीचड़ से भर गई हैं। बारिश और पानी के रिसाव के कारण हालात और खराब हो गए हैं।

    क्षेत्र में दोपहिया और चारपहिया वाहन आए दिन कीचड़ में फंस रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और पैदल आने-जाने वाले लोगों को हो रही है। घरों के सामने गंदगी और पानी जमा रहने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

    वार्डवासियों ने नगर पालिका पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिम्मेदार इंजीनियर मौके का निरीक्षण नहीं करते, जिससे ठेकेदार मनमानी कर रहा है। पाइपलाइन टूटने के बाद भी समय पर मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे लगातार पानी की बर्बादी हो रही है।

    मामले पर सीहोर नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सुधीर सिंह ने कहा कि संबंधित ठेकेदार और इंजीनियर को तत्काल पाइपलाइन की मरम्मत के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पानी की बर्बादी रोकी जाएगी और सड़क की स्थिति भी जल्द सुधारी जाएगी, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके।

  • सलकनपुर मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ से 2 घंटे जाम, गुप्त नवरात्रि पर वाहनों की लगी लंबी कतार

    सलकनपुर मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ से 2 घंटे जाम, गुप्त नवरात्रि पर वाहनों की लगी लंबी कतार


    सीहोर । सीहोर जिले के बुधनी स्थित प्रसिद्ध सलकनपुर विजयासन देवी धाम में गुप्त नवरात्रि और रविवार के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दर्शन के लिए पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं के कारण पहाड़ी पर मंदिर जाने वाले सड़क मार्ग पर लंबा जाम लग गया। करीब दो घंटे तक चार पहिया वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    स्थिति की जानकारी मिलते ही सलकनपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने यातायात को व्यवस्थित करने के लिए लगातार प्रयास किए और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद मार्ग को सुचारु कराया। इसके बाद धीरे-धीरे वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकी।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, जाम लगने की बड़ी वजह सूर्य द्वार सीढ़ी मार्ग के आसपास सड़क किनारे लगी अस्थायी दुकानें हैं। आरोप है कि कुछ दुकानदार श्रद्धालुओं की कारों को बीच चढ़ाई में ही रुकवाकर सड़क किनारे खड़ा करवा देते हैं और उन्हें सीढ़ियों से मंदिर जाने की सलाह देते हैं। इससे सड़क संकरी हो जाती है और पीछे आने वाले वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।

    रविवार, अवकाश और विशेष धार्मिक अवसरों पर सलकनपुर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क किनारे अतिक्रमण यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी दुकानों को व्यवस्थित किया जाए, ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं को जाम की समस्या से राहत मिल सके।

  • करंट हादसों से भड़का किसानों का गुस्सा, सीहोर से भोपाल पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली मुख्यालय घेरा, कार्रवाई और मुआवजे की उठाई मांग

    करंट हादसों से भड़का किसानों का गुस्सा, सीहोर से भोपाल पहुंचे ग्रामीणों ने बिजली मुख्यालय घेरा, कार्रवाई और मुआवजे की उठाई मांग

    मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में करंट लगने की लगातार सामने आई घटनाओं के विरोध में किसानों और ग्रामीणों का आक्रोश राजधानी भोपाल तक पहुंच गया। जिले के कई गांवों से सैकड़ों किसान भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के गोविंदपुरा मुख्यालय पहुंचे और बिजली विभाग की कथित लापरवाही के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जर्जर बिजली लाइनों और झूलते तारों की बार-बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए, जिसके कारण कई गंभीर हादसे हुए। किसानों ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

    सीहोर जिले के बड़वेली, चंदेरी, बिलकिसगंज, ढाबला, मंगरखेड़ा, पचामा, पाली, जामुनिया, रामाखेड़ी और अन्य गांवों से पहुंचे किसानों ने समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में मुख्यालय के बाहर करीब तीन घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि खेतों के ऊपर से गुजर रही जर्जर 11 केवी और एलटी लाइनें किसानों की जान के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था सुधारने में गंभीरता नहीं दिखाई।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बताया कि हाल के वर्षों में करंट की चपेट में आने से पांच किसान गंभीर हादसों का शिकार हुए। इनमें तीन किसानों की मौत हो चुकी है, जबकि दो किसानों के हाथ काटने पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि इन हादसों ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल दिया है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

    प्रदर्शनकारियों ने विद्युत मंडल के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की मांग की। किसानों ने यह भी कहा कि वे पहले मुख्यमंत्री कार्यालय, ऊर्जा मंत्री, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि यदि समय रहते बिजली लाइनों की मरम्मत और रखरखाव किया जाता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

    धरने के बाद प्रबंध निदेशक ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों ने हालांकि स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा और यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जानी चाहिए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

    इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने मानव अधिकार आयोग और महिला आयोग को भी ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। आयोग के अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने का भरोसा दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा और अन्य मांगें पूरी नहीं हुईं तो सीहोर, भोपाल, शाजापुर और उज्जैन सहित आसपास के जिलों के किसान संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

  • सीहोर में किसान की फसल पर चढ़ा दिए ट्रैक्टर: रोकने पर दबंग बोले- कोई पटवारी नहीं आएगा, यहीं से निकलेगी गाड़ी

    सीहोर में किसान की फसल पर चढ़ा दिए ट्रैक्टर: रोकने पर दबंग बोले- कोई पटवारी नहीं आएगा, यहीं से निकलेगी गाड़ी


    सीहोर । सीहोर जिले के अहमदपुर थाना क्षेत्र के पीपलखेड़ा गांव में एक किसान की मेहनत पर दबंगों ने ट्रैक्टर चलाकर पानी फेर दिया। आपसी रंजिश के चलते गांव के कुछ लोगों ने खेत में जबरन ट्रैक्टर और खेती के उपकरण उतार दिए तथा बोई हुई फसल को रौंदकर नष्ट कर दिया। जब किसान और उसके परिजनों ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने खुलेआम दादागिरी दिखाते हुए गाली गलौज की और जान से मारने की धमकी तक दे डाली। पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।

    वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक ही खेत में कई ट्रैक्टर कल्टीवेटर और बोनी मशीन के साथ लोग जबरन जुताई कर रहे हैं। किसान पक्ष के लोग ट्रैक्टर रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन आरोपी उन्हें धक्का देकर हटाने का प्रयास करते हैं। विरोध के दौरान एक युवक ट्रैक्टर के सामने जमीन पर बैठ जाता है ताकि फसल को बचाया जा सके लेकिन दबंग बेखौफ होकर कहते हैं कि ट्रैक्टर इसी रास्ते से जाएगा और जो होना है हो जाने दो। जब पीड़ित पक्ष पटवारी की मौजूदगी में फैसला कराने की बात करता है तो आरोपी साफ शब्दों में कहते हैं कि कोई पटवारी नहीं आएगा और ट्रैक्टर यहीं चलेगा। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस धक्का मुक्की और मारपीट जैसी स्थिति बन जाती है।

    पीड़ित किसान मानसिंह ने अहमदपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि गांव के राजू महेंद्र चंदरसिंह अरविंद और योगेंद्र ने पुरानी रंजिश के चलते उनकी कृषि भूमि में घुसकर जानबूझकर ट्रैक्टर चलाया जिससे बोई हुई फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। किसान का कहना है कि विरोध करने पर आरोपियों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और भविष्य में भी खेत को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।

    घटना के बाद किसान ने पुलिस से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा फसल के नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विवाद और आपसी रंजिश के कारण किसानों को होने वाले नुकसान की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।