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  • अंतरराष्ट्रीय तनाव घटते ही शेयर बाजार में आई तेजी, सेंसेक्स और निफ्टी ने हरे निशान से की शुरुआत

    अंतरराष्ट्रीय तनाव घटते ही शेयर बाजार में आई तेजी, सेंसेक्स और निफ्टी ने हरे निशान से की शुरुआत

    नई दिल्ली ।  सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को सकारात्मक शुरुआत का संकेत दिया। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिसका सीधा असर घरेलू बाजारों पर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय हालात में नरमी के संकेत मिलते ही बाजार में खरीदारी का माहौल बना और प्रमुख सूचकांकों ने मजबूत बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की।

    कारोबार शुरू होते ही बाजार में चौतरफा तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूत स्थिति में नजर आए और शुरुआती सत्र में बाजार ने हरे निशान के साथ उत्साहजनक शुरुआत दर्ज की। बाजार में निवेशकों का रुझान कई प्रमुख सेक्टरों की ओर देखने को मिला, जिससे व्यापक स्तर पर खरीदारी बढ़ी और बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहा।

    शुरुआती कारोबार में ऑटो सेक्टर ने सबसे अधिक मजबूती दिखाई। इसके अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, तेल एवं गैस, आधारभूत ढांचा और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कई क्षेत्रों में भी तेजी का रुख देखा गया। बाजार में बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग के शेयरों में भी उत्साह नजर आया, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा व्यापक स्तर पर मजबूत हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों में नरमी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर वैश्विक निवेशकों में चिंता बढ़ी हुई थी। लेकिन अब दोनों देशों के बीच बातचीत और समझौते की संभावनाओं ने बाजार की भावनाओं को सकारात्मक दिशा दी है।

    इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी दर्ज की गई, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है। भारत जैसे आयात आधारित देश के लिए तेल कीमतों में कमी से महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और इसका असर बाजार भावना पर भी सकारात्मक रूप से पड़ता है। यही वजह है कि कच्चे तेल में नरमी को निवेशकों ने अच्छे संकेत के रूप में लिया।

    वैश्विक बाजारों का रुख भी घरेलू बाजार को समर्थन देता दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में अधिकतर प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। वहीं अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र के दौरान सकारात्मक माहौल देखने को मिला था, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

    फिलहाल निवेशकों की नजरें वैश्विक घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं पर बनी हुई हैं। यदि आने वाले दिनों में वैश्विक स्तर पर स्थिरता बनी रहती है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो बाजार में यह सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। शुरुआती संकेतों ने फिलहाल निवेशकों के बीच उत्साह और उम्मीद का माहौल जरूर बना दिया है।

  • सेंसेक्स की शीर्ष कंपनियों ने जोड़ी हजारों करोड़ की ताकत, कई दिग्गज पीछे भी फिसले

    सेंसेक्स की शीर्ष कंपनियों ने जोड़ी हजारों करोड़ की ताकत, कई दिग्गज पीछे भी फिसले


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह सकारात्मक माहौल देखने को मिला, जिसका सीधा असर देश की शीर्ष कंपनियों के बाजार मूल्यांकन पर भी दिखाई दिया। सेंसेक्स की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कई बड़े नामों ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपने बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। सप्ताह भर की कारोबारी गतिविधियों के दौरान निवेशकों के भरोसे और बाजार की मजबूती ने दिग्गज कंपनियों को नई ऊर्जा दी, जिसके परिणामस्वरूप शीर्ष 10 कंपनियों में से छह कंपनियों की कुल बाजार हैसियत में 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया।

    बीते सप्ताह बाजार की चाल अपेक्षाकृत संतुलित और सकारात्मक रही। प्रमुख शेयर सूचकांक में बढ़त का असर बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन पर भी स्पष्ट दिखाई दिया। निवेशकों ने वित्तीय, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में भरोसा जताया, जिससे कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर आर्थिक संकेतकों और निवेशकों की सकारात्मक धारणा ने इस बढ़त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इस दौरान सबसे अधिक लाभ हासिल करने वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में सबसे बड़ा उछाल देखने को मिला, जिससे वह सप्ताह की सबसे बड़ी लाभार्थी बनकर उभरी। इसके अलावा बैंकिंग और आईटी सेक्टर से जुड़ी प्रमुख कंपनियों ने भी बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। बड़े निवेशकों के साथ-साथ खुदरा निवेशकों का भरोसा भी इन कंपनियों के पक्ष में दिखाई दिया, जिसका सीधा असर उनके बाजार मूल्यांकन पर पड़ा।

    आईटी और बैंकिंग क्षेत्र में मजबूती ने भी बाजार को सहारा दिया। टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बड़ी कंपनियों ने निवेशकों को आकर्षित किया और उनके शेयरों में तेजी का माहौल बना रहा। इसके साथ ही वित्तीय क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने भी अपनी बाजार स्थिति को और मजबूत किया। लगातार बेहतर कारोबारी संभावनाओं और निवेशकों के भरोसे ने इन कंपनियों को बाजार में मजबूती प्रदान की।

    हालांकि दूसरी ओर कुछ प्रमुख कंपनियों को इस दौरान नुकसान का सामना भी करना पड़ा। कुछ दिग्गज कंपनियों की बाजार हैसियत में गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में प्रतिस्पर्धा और उतार-चढ़ाव अभी भी बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग सेक्टरों में निवेशकों की रणनीति और बदलती प्राथमिकताएं कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर रही हैं।

    पूरे सप्ताह के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा अभी भी कायम है। बाजार में बढ़ती गतिविधियां और बड़े समूहों की मजबूती आने वाले समय में निवेश के माहौल को और बेहतर बना सकती हैं। हालांकि बाजार की दिशा वैश्विक परिस्थितियों, आर्थिक संकेतकों और निवेशकों की रणनीति पर भी निर्भर करेगी, लेकिन फिलहाल बाजार में सकारात्मक रुझान ने निवेशकों के उत्साह को जरूर बढ़ाया है।

  • वैश्विक मजबूती का असर: भारतीय शेयर बाजार की दमदार शुरुआत, सेंसेक्स 75,500 के पार, निफ्टी में भी तेज उछाल

    वैश्विक मजबूती का असर: भारतीय शेयर बाजार की दमदार शुरुआत, सेंसेक्स 75,500 के पार, निफ्टी में भी तेज उछाल


    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को सकारात्मक रुख के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में निवेशकों का भरोसा मजबूत नजर आया और प्रमुख सूचकांक हरे निशान में खुले। सेंसेक्स में तेजी के साथ उछाल देखा गया, जबकि निफ्टी ने भी मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया। बाजार की यह चाल वैश्विक आर्थिक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी सकारात्मक स्थिति से प्रभावित मानी जा रही है।

    शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में तेज बढ़त दर्ज की गई और यह 75 हजार के ऊपर कारोबार करता नजर आया। निफ्टी ने भी मजबूत शुरुआत करते हुए 23 हजार के ऊपर अपना स्तर बनाए रखा। बाजार में खासतौर पर डिफेंस सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसने पूरे बाजार के मूड को सकारात्मक बनाए रखा। इसके अलावा पीएसयू बैंक, रियल्टी, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंजप्शन और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में भी तेजी का रुख देखा गया। लगभग सभी प्रमुख सेक्टर शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ ट्रेड करते नजर आए, जिससे बाजार में व्यापक स्तर पर मजबूती का संकेत मिला।

    मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी हुई दिखाई दी। दोनों सेगमेंट में तेजी के साथ खरीदारी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटे शेयरों में भी निवेशकों का भरोसा कायम है। इससे पूरे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा और निवेश गतिविधियां बढ़ीं।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में कई बड़ी कंपनियों के स्टॉक्स में तेजी देखी गई। बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर से जुड़े शेयरों ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। वहीं कुछ आईटी और फार्मा शेयरों में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई, लेकिन इसका प्रभाव व्यापक बाजार पर सीमित रहा।

    एशियाई बाजारों में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक के बाजार हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। दूसरी ओर कुछ बाजारों में हल्की कमजोरी भी देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर वैश्विक स्तर पर निवेशकों का मूड सकारात्मक बना रहा। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिसने एशियाई और भारतीय बाजारों को अतिरिक्त समर्थन दिया।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और डॉलर में कमजोरी भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक कारक साबित हुए हैं। इन सभी कारणों ने मिलकर निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और बाजार में खरीदारी को प्रोत्साहित किया।

    हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का दबाव बना हुआ है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने बाजार को स्थिरता प्रदान की है। लगातार निवेश के चलते बाजार में संतुलन बना हुआ है और तेजी का रुझान कायम है। कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियों में भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वैश्विक संकेतों का सकारात्मक लाभ उठाते हुए दिन की शुरुआत मजबूती के साथ की है।

  • वैश्विक दबाव के बीच शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला; निवेशकों में बढ़ी चिंता

    वैश्विक दबाव के बीच शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला; निवेशकों में बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई, जहां वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का सीधा असर घरेलू निवेशकों की धारणा पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए और सेंसेक्स 75,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में भारी बिकवाली के चलते देखने को मिली, जिससे पूरे बाजार का मूड कमजोर बना रहा।

    सुबह के समय सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह कई सौ अंकों की कमजोरी के साथ नीचे कारोबार करता दिखा। इसी तरह निफ्टी में भी गिरावट का रुख बना रहा और यह भी लाल निशान में खुला। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर कमजोर संकेतों, एशियाई बाजारों में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बनने के कारण बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई, जिससे स्पष्ट है कि रियल एस्टेट और सरकारी बैंकों के शेयरों पर दबाव अधिक रहा। इसके अलावा ऑटो, एफएमसीजी, कमोडिटी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर भी गिरावट की चपेट में रहे। हालांकि कुछ चुनिंदा सेक्टर जैसे फार्मा, हेल्थकेयर और आईटी में हल्की मजबूती देखने को मिली, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला।

    मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी गिरावट का असर देखने को मिला, जिससे यह संकेत मिला कि बिकवाली केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यापक बाजार पर इसका असर पड़ा है। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर होता नजर आया और बाजार में सतर्कता का माहौल बना रहा।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशिया के प्रमुख बाजारों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जिससे घरेलू बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना। जापान, चीन, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया जैसे बाजारों में गिरावट का रुख रहा, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर पड़ा। वहीं अमेरिकी बाजार पहले ही बंद थे, जिससे वैश्विक संकेत पूरी तरह से अनिश्चित बने रहे।

    कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली, लेकिन इसका सकारात्मक असर बाजार पर दिखाई नहीं दिया। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बिकवाली और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी के बीच संतुलन की कोशिश जरूर दिखी, लेकिन बाजार का दबाव फिर भी बना रहा।

    कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, सेक्टरवार दबाव और निवेशकों की सतर्कता के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का माहौल बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और संस्थागत निवेश की दिशा ही बाजार की चाल तय करेगी।

  • शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला, वैश्विक संकेतों का असर

    शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला, वैश्विक संकेतों का असर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई, जहां वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का सीधा असर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते नजर आए, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

    सुबह के सत्र में सेंसेक्स में करीब 850 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह 75,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। वहीं निफ्टी भी लगभग 250 अंकों की कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखा। बाजार में यह गिरावट चौतरफा बिकवाली के कारण देखने को मिली, जिसमें लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे।

    निफ्टी के सेक्टोरल इंडेक्स में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी सबसे ज्यादा नुकसान में रहे, जबकि मीडिया, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, पीएसयू बैंक, ऊर्जा और कंजप्शन जैसे सेक्टर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बाजार में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे व्यापक स्तर पर दबाव स्पष्ट नजर आया।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में आईटी सेक्टर की कुछ कंपनियां जैसे इन्फोसिस और टीसीएस हल्की मजबूती में रहीं, लेकिन ज्यादातर बड़ी कंपनियां नुकसान में रहीं। पावर ग्रिड, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और अन्य प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। इससे बाजार में गिरावट और गहरी हो गई।

    वैश्विक बाजारों में भी इसी तरह का नकारात्मक रुख देखने को मिला। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, हांगकांग और जकार्ता जैसे प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल सोल का बाजार हरे निशान में रहा। इससे यह संकेत मिला कि वैश्विक निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं।

    अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में गिरावट दर्ज की गई थी, जहां प्रमुख सूचकांक डाओ जोन्स और नैस्डैक में एक प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखने को मिली। इसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी पड़ा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट के पीछे मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और आर्थिक दबाव की चिंता बढ़ गई है।

    इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, जिससे इक्विटी बाजारों से पूंजी निकलने का दबाव बन रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है, जबकि घरेलू निवेशकों की गतिविधियां भी सीमित रहीं।

    कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय शेयर बाजार पर मिलकर दबाव बनाया है, जिससे निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी 2% से ज्यादा टूटे, निवेशकों में चिंता

    शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी 2% से ज्यादा टूटे, निवेशकों में चिंता


    नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को इस सप्ताह गहरे दबाव में डाल दिया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों की धारणा कमजोर रही, जिसका असर सीधे तौर पर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला। दोनों सूचकांक सप्ताह के अंत में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए।

    एनएसई निफ्टी-50 इस सप्ताह 2.2 प्रतिशत यानी 532 अंक टूटकर 23,643.5 के स्तर पर आ गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स 2.7 प्रतिशत यानी 2,000 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 75,238 पर बंद हुआ। बाजार में यह गिरावट केवल बड़े इंडेक्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार भी इसकी चपेट में आ गया। मिडकैप इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति पर और अधिक दबाव बना।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी और आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। बीएसई रियल्टी इंडेक्स में लगभग 8 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज हुई, जबकि आईटी इंडेक्स 5.7 प्रतिशत टूट गया। ऑटो, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल, बैंकिंग और पीएसयू सेक्टर में भी लगातार बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कुछ रक्षात्मक सेक्टर जैसे मेटल और हेल्थकेयर ने थोड़ी मजबूती दिखाई और मामूली बढ़त दर्ज की।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाइटन सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला स्टॉक रहा, जिसमें 7.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे बड़े शेयरों में भी कमजोरी देखी गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, जो महंगाई और आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने उभरते बाजारों से विदेशी निवेश को बाहर खींचा है, जिससे एफआईआई की लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है।

    हालांकि, इस नकारात्मक माहौल के बीच घरेलू निवेशकों की भागीदारी बाजार के लिए एक सहारा बनी रही। एसआईपी के जरिए लगातार आने वाले निवेश ने बाजार को कुछ हद तक स्थिर बनाए रखने में मदद की। अप्रैल में एसआईपी निवेश 31,115 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसने विदेशी बिकवाली के असर को आंशिक रूप से संतुलित किया।

    कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, तेल कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार में दबाव बना हुआ है, और आने वाले समय में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कच्चे तेल के रुझानों पर टिकी रहेगी।

  • शेयर बाजार की रफ्तार थमी, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी गिरावट..

    शेयर बाजार की रफ्तार थमी, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी गिरावट..

    नई दिल्ली । सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। शुरुआती कारोबार में तेजी दिखाने के बावजूद दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार ने कमजोर रुख के साथ कारोबार समाप्त किया। निवेशकों के बीच मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों की कमजोरी का असर बाजार पर साफ दिखाई दिया।

    कारोबार की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई थी और शुरुआती घंटों में बाजार में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूत ओपनिंग दी थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिके रहने में सफल नहीं हो सके। दिन चढ़ने के साथ बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा और प्रमुख सूचकांक धीरे-धीरे लाल निशान में पहुंच गए।

    दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 161 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी कमजोरी के साथ 23,650 के स्तर के नीचे फिसल गया। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की सतर्कता को और बढ़ा दिया है। विशेष रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली, जिससे व्यापक बाजार पर दबाव बढ़ गया।

    मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में बेंचमार्क सूचकांकों की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में इन शेयरों में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना, जिसके चलते इन सेगमेंट्स में दबाव बढ़ा।

    शेयरों की बात करें तो कुछ चुनिंदा कंपनियों में अच्छी तेजी भी देखने को मिली। ऑटो और आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की, लेकिन धातु, बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में कमजोरी ने बाजार की दिशा को नीचे की ओर बनाए रखा। आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि मेटल और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे।

    सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो मीडिया, आईटी, फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर में सीमित तेजी दर्ज की गई। वहीं मेटल, पीएसयू बैंक, डिफेंस और रियल्टी सेक्टर में बड़ी गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने ऊर्जा और ऑयल एंड गैस शेयरों पर भी दबाव बनाया।

    विश्लेषकों के अनुसार बाजार में फिलहाल निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। वैश्विक आर्थिक हालात, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। इसके अलावा घरेलू स्तर पर महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सावधानी के साथ निवेश करने और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। कुल मिलाकर, शुक्रवार का कारोबारी सत्र यह संकेत देता है कि बाजार अभी भी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और निवेशकों की नजरें अब आने वाले वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर टिकी रहेंगी।

  • शेयर बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुले, मिड और स्मॉलकैप पर दबाव

    शेयर बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुले, मिड और स्मॉलकैप पर दबाव


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत वैश्विक संकेतों के मिले-जुले रुख के बीच लगभग सपाट स्तर पर की। शुरुआती कारोबार में बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मिश्रित संकेतों के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जिससे शुरुआती गति सीमित रही।

    सुबह के शुरुआती सत्र में सेंसेक्स में हल्की मजबूती देखी गई और यह मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी सीमित बढ़त के साथ हरे निशान में बना रहा। हालांकि इस दौरान लार्जकैप शेयरों में स्थिरता देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट यह संकेत देती है कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि थोड़ी कमजोर रही।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और ऑटो सेक्टर ने बाजार को सपोर्ट देने का काम किया। इन सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे निफ्टी को सहारा मिला। इसके अलावा सर्विसेज, एफएमसीजी, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर भी सकारात्मक दायरे में रहे। इसके विपरीत डिफेंस, मेटल, कमोडिटीज, रियल्टी, ऑयल एंड गैस और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में दबाव देखने को मिला, जिससे समग्र बाजार में असंतुलित रुझान बना रहा।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशिया के कई प्रमुख बाजारों में कमजोरी का रुख देखने को मिला, जबकि कुछ बाजारों में हल्की मजबूती बनी रही। अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में अच्छी तेजी के साथ बंद होकर सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन एशियाई बाजारों की सुस्ती ने भारतीय बाजार की दिशा को सीमित रखा। इसी कारण घरेलू निवेशकों ने भी शुरुआत में सतर्क रुख अपनाया।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों में बदलाव भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत रहा। लंबे समय बाद विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला। इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी लगातार निवेश जारी रखा, जो बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मददगार साबित हुआ।

    इसके अलावा आर्थिक मोर्चे पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी बाजार की धारणा पर देखा गया। ईंधन कीमतों में वृद्धि से महंगाई और लागत दबाव को लेकर चिंता बढ़ सकती है, जिसका असर आने वाले दिनों में उपभोक्ता आधारित सेक्टरों पर पड़ सकता है।

  • 13 मई को शेयर बाजार में रह सकती है बड़ी हलचल, निफ्टी-सेंसेक्स पर रहेगा दबाव

    13 मई को शेयर बाजार में रह सकती है बड़ी हलचल, निफ्टी-सेंसेक्स पर रहेगा दबाव

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में आज 13 मई को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिल सकता है। मंगलवार को बाजार में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों की नजर आज के कारोबार पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर आज भी निफ्टी और सेंसेक्स पर दिखाई दे सकता है।

    मंगलवार को बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही कमजोर होकर बंद हुए थे। आज बाजार की शुरुआत भी दबाव के साथ हो सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

    निफ्टी के लिए 23,600 अहम स्तर

    मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार निफ्टी के लिए 23,600 का स्तर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर निफ्टी इस स्तर से नीचे जाता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं 24,000 का स्तर फिलहाल मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। बैंक निफ्टी अपेक्षाकृत मजबूत नजर आ सकता है और बैंकिंग शेयर बाजार को सहारा दे सकते हैं।

    इन सेक्टरों में दिख सकती है हलचल

    आज आईटी सेक्टर दबाव में रह सकता है। ग्लोबल मांग में कमजोरी का असर टेक कंपनियों पर दिखाई दे सकता है। दूसरी तरफ ऑयल एंड गैस सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का फायदा इस सेक्टर को मिल सकता है। फार्मा सेक्टर में भी कंपनियों के तिमाही नतीजों के चलते हलचल बनी रह सकती है।

    इन शेयरों पर निवेशकों की नजर

    आज के कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, डॉ. रेड्डीज और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहने वाली है। इन शेयरों में खबरों और रिजल्ट के आधार पर अच्छी मूवमेंट देखने को मिल सकती है।

    निवेशकों को क्या करना चाहिए?

    विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता के साथ निवेश करना जरूरी है। जल्दबाजी में खरीदारी से बचना चाहिए और ट्रेडिंग करते समय स्टॉप लॉस जरूर लगाना चाहिए। बाजार में किसी भी ग्लोबल खबर का असर तेजी से देखने को मिल सकता है, इसलिए सोच-समझकर निवेश करना ही बेहतर रणनीति होगी।

  • ग्लोबल टेंशन और क्रूड की आग से हिला शेयर बाजार, निफ्टी में और गिरावट के संकेत

    ग्लोबल टेंशन और क्रूड की आग से हिला शेयर बाजार, निफ्टी में और गिरावट के संकेत


    नई दिल्ली ।शेयर बाजार में इस कारोबारी सत्र की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई, जहां निवेशकों के रुझान में साफ तौर पर घबराहट दिखाई दी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही इंडेक्स गैपडाउन ओपन हुए और शुरुआती मिनटों से ही दबाव में कारोबार करते नजर आए। बाजार की चाल पूरी तरह से बिकवाली की तरफ झुकी हुई दिखी, जिससे पूरे ट्रेडिंग सेशन में कमजोरी बनी रही।

    निफ्टी ने 23800 का महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ दिया, जो पिछले कई सत्रों से एक मजबूत आधार के रूप में काम कर रहा था। इस लेवल के टूटते ही बाजार में सेलिंग प्रेशर और तेज हो गया और इंडेक्स 23700 के नीचे तक फिसल गया। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, जब किसी प्रमुख सपोर्ट लेवल का ब्रेकडाउन होता है, तो बाजार में तेजी से गिरावट का जोखिम बढ़ जाता है और इसी तरह की स्थिति फिलहाल देखने को मिल रही है।

    वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भी घरेलू बाजार पर साफ नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण हालात ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है, जो लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है। क्रूड ऑयल की यह ऊंची कीमतें महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर पड़ रहा है।

    बाजार में सेक्टोरल प्रदर्शन भी काफी असमान रहा। आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला, जहां बड़े स्टॉक्स में लगभग तीन प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों पर बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है, जिससे पूरा आईटी इंडेक्स कमजोर दिखाई दिया। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा शेयरों में हल्की मजबूती जरूर देखने को मिली, लेकिन वह बाजार की समग्र कमजोरी को संभालने में नाकाफी रही।

    ऑयल और गैस सेक्टर में कुछ स्टॉक्स में तेजी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। वहीं, ऑटो और टेलीकॉम सेक्टर के कुछ शेयरों में भी हल्की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि यह तेजी सीमित दायरे में रही और पूरे बाजार की दिशा को बदल नहीं सकी।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार ‘सेल ऑन राइज’ पैटर्न में काम कर रहा है, जहां हर छोटी तेजी पर बिकवाली देखने को मिल रही है। इसके अलावा, वीकली एक्सपायरी के कारण भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी हुई है। इंडिया विक्स का 18 के ऊपर जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है।

    कुल मिलाकर बाजार फिलहाल दबाव में है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। निफ्टी का अहम सपोर्ट टूटने के बाद आगे की दिशा अब नए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर निर्भर करती नजर आ रही है।