

दिनभर के कारोबार में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक सहारा दिया। इस सेक्टर में लगातार खरीदारी देखने को मिली, जिसके कारण प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। मजबूत निवेश के चलते तकनीकी क्षेत्र बाजार की बढ़त का प्रमुख आधार बना और निवेशकों ने इस सेक्टर में विशेष रुचि दिखाई।
दूसरी ओर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों पर दबाव बना रहा। कई बड़े बैंकिंग शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे बाजार की बढ़त कुछ सीमित रही। इसके बावजूद अन्य क्षेत्रों में हुई खरीदारी ने इस कमजोरी की भरपाई कर दी और प्रमुख सूचकांकों को सकारात्मक दायरे में बनाए रखा।
कारोबार की शुरुआत भी बेहद उत्साहजनक रही थी। शुरुआती घंटों में सेंसेक्स में 650 अंकों तक की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 24,375 के स्तर के करीब पहुंच गया। आईटी, मेटल, फार्मा और केमिकल सेक्टर में मजबूत खरीदारी के चलते शुरुआती कारोबार में बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि दिन बढ़ने के साथ निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की, जिससे शुरुआती बढ़त कुछ कम हुई, लेकिन बाजार अंत तक मजबूती बनाए रखने में सफल रहा।
विदेशी संकेतों ने भी घरेलू बाजार के माहौल को समर्थन दिया। वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों और निवेशकों की सकारात्मक धारणा का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। इसी कारण दिनभर निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर बना रहा और कई प्रमुख शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई।
मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में रुपये में मजबूती दर्ज होने से आयात आधारित कंपनियों और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की स्थिरता और वैश्विक संकेत निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निकट अवधि में निवेशकों को सतर्क आशावादी रणनीति अपनानी चाहिए। उनका मानना है कि निफ्टी का 24,000 के ऊपर बने रहना तेजी के रुख को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि बाजार 24,300 और उसके ऊपर के स्तर को पार करने में सफल रहता है तो आगे और मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं, किसी भी गिरावट की स्थिति में 24,050 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में सीमित सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि निवेशक वैश्विक तकनीकी शेयरों में चल रही गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखें, क्योंकि आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं कारकों का बाजार की चाल पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

विश्लेषकों के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए हालिया आर्थिक संकेत रहे। जून महीने के रोजगार आंकड़े अपेक्षा से कमजोर रहने के बाद निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में और बढ़ोतरी से बच सकता है। इससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी और उभरते बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार को भी इसका सकारात्मक लाभ मिला।
बाजार खुलते ही विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटो, पूंजीगत वस्तुओं और चुनिंदा आईटी कंपनियों के शेयरों ने शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की। निवेशकों का रुझान मजबूत कंपनियों और बड़े बाजार पूंजीकरण वाले शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ प्रमुख बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि अन्य में सीमित बढ़त रही। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण मजबूती दिखाई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की धारणा में सुधार भी बाजार की तेजी को समर्थन दे रहा है।
अमेरिकी शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिश्रित प्रदर्शन देखने को मिला। प्रमुख औद्योगिक सूचकांक ने नए रिकॉर्ड स्तर को छुआ, जबकि तकनीकी क्षेत्र के कुछ शेयरों में दबाव रहा। इसके बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े ताजा आंकड़ों ने निवेशकों के बीच यह उम्मीद बढ़ाई कि आगे चलकर ब्याज दरों को लेकर राहत मिल सकती है, जिसका सकारात्मक असर वैश्विक निवेश भावना पर पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी भारतीय बाजार के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। कच्चे तेल के दाम नियंत्रित रहने से आयात लागत और महंगाई के दबाव में कमी आने की संभावना रहती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट आय पर पड़ सकता है। यही कारण है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी को भी बाजार के लिए अनुकूल कारक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, विदेशी निवेश प्रवाह और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेत मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन की मजबूत शुरुआत ने निवेशकों के विश्वास को नई मजबूती प्रदान की है।

कारोबार के पहले घंटे के बाद सुबह 10:15 बजे बीएसई सेंसेक्स 395.44 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,874.11 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी 122.15 अंक यानी 0.51 प्रतिशत चढ़कर 23,987.90 अंक के स्तर पर पहुंच गया।
सेंसेक्स ने 66.54 अंकों की बढ़त के साथ 76,545.21 अंक पर कारोबार की शुरुआत की थी। शुरुआती खरीदारी के दम पर सूचकांक लगातार ऊपर बढ़ता गया, हालांकि बीच-बीच में मुनाफावसूली का असर भी देखने को मिला। इसके बावजूद बाजार की सकारात्मक धारणा कायम रही।
इसी तरह निफ्टी ने 31.90 अंकों की बढ़त के साथ 23,897.65 अंक पर ओपनिंग की। कारोबार के दौरान यह करीब 10 बजे 23,996.40 अंक तक पहुंच गया और बाद में मामूली उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती के साथ कारोबार करता रहा।
शुरुआती कारोबार में महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, नेस्ले, हिंदुस्तान यूनिलीवर और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। इनमें करीब 2.01 प्रतिशत से 2.99 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई।
वहीं दूसरी ओर टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एचसीएल टेक्नोलॉजी, डॉ. रेड्डीज लेबोरेट्रीज और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इन शेयरों में 0.77 प्रतिशत से 2.08 प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई।
बाजार की चौड़ाई भी सकारात्मक रही। शुरुआती एक घंटे में 2,732 शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें 1,837 शेयर बढ़त के साथ हरे निशान में रहे, जबकि 895 शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 19 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 11 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी के 50 शेयरों में से 30 बढ़त और 20 गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।
गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। बीएसई सेंसेक्स 249.70 अंक (0.33 प्रतिशत) टूटकर 76,478.67 अंक पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 80.50 अंक (0.34 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 23,865.75 अंक पर बंद हुआ था।

साप्ताहिक कारोबार के दौरान निफ्टी में 0.18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई जबकि अंतिम कारोबारी सत्र में यह 24 हजार 56 अंक पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 109 अंक की बढ़त के साथ 77 हजार 100 अंक पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह सेंसेक्स में करीब 0.39 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। हालांकि प्रमुख सूचकांकों की मजबूती के बीच व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य होते हालात से कच्चे तेल की कीमतें फिर से युद्ध पूर्व स्तर के करीब पहुंच गई हैं। इसका सीधा फायदा भारत जैसे तेल आयातक देशों को मिल रहा है। सस्ता कच्चा तेल महंगाई पर दबाव कम करता है और चालू खाते के घाटे तथा राजकोषीय स्थिति को भी बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक के लिए मौद्रिक नीति में लचीलापन बनाए रखने की संभावना मजबूत होती है।
इस सप्ताह सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। निजी बैंकों के शेयरों को भी आरबीआई की एफसीएनआर जमा स्वैप योजना से जुड़ी स्पष्टता का लाभ मिला। दूसरी ओर धातु क्षेत्र के शेयरों पर कमोडिटी कीमतों में गिरावट का असर दिखाई दिया जबकि उपभोक्ता मांग को लेकर बनी चिंताओं के कारण कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी दबाव में रहा।
हालांकि बाजार के लिए कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में मानसून का असमान वितरण कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकता है जिससे महंगाई बढ़ने का जोखिम बना रहेगा। इसके बावजूद निवेशकों का रुझान फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निकट भविष्य में निफ्टी के लिए 24 हजार 400 और 24 हजार 500 अंक प्रमुख प्रतिरोध स्तर रहेंगे जबकि 23 हजार 900 और 23 हजार 800 अंक मजबूत समर्थन माने जा रहे हैं। बैंक निफ्टी के लिए 57 हजार 500 से 57 हजार 400 का दायरा सपोर्ट और 58 हजार 900 से 59 हजार का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों पर रहेगी। इसके साथ ही अमेरिका के पीसीई महंगाई आंकड़े नॉन फार्म पेरोल बेरोजगारी दर तथा भारत के औद्योगिक उत्पादन और जून महीने के पीएमआई आंकड़े भी बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में लंबी अवधि के निवेश के अवसर अभी भी बने हुए हैं।

कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 109 अंक की बढ़त के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी 34 अंकों की मजबूती के साथ 24,056 के स्तर पर पहुंच गया। सुबह के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने तेज रफ्तार दिखाई थी और एक समय सेंसेक्स 77,800 के पार तथा निफ्टी 24,260 के ऊपर पहुंच गया था। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ा और शुरुआती बढ़त का बड़ा हिस्सा कम हो गया।
बाजार की शुरुआत सकारात्मक वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच हुई थी। निवेशकों ने ऑटो, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी दिखाई, जिससे सूचकांकों को मजबूती मिली। हालांकि आईटी, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार को सीमित कर दिया। इन क्षेत्रों में कमजोरी के कारण दिन के अंतिम घंटों में बाजार पर दबाव बढ़ा।
क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑटो सेक्टर सबसे मजबूत रहा। वाहन कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। उद्योग जगत का मानना है कि कच्चे माल की लागत में कमी, सप्लाई चेन की स्थिति में सुधार और उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी से ऑटो कंपनियों के प्रदर्शन को समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा एफएमसीजी और रियल्टी क्षेत्र ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया।
दूसरी ओर आईटी और धातु क्षेत्र के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर बनी अनिश्चितता और निर्यात आधारित कंपनियों पर संभावित असर के कारण निवेशकों ने इन क्षेत्रों में सतर्क रुख अपनाया। कुछ बड़े आईटी और मेटल शेयरों में कमजोरी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।
वृहद बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जिससे दोनों सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा बड़े और मजबूत शेयरों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं, जबकि छोटे शेयरों में सतर्कता बरती जा रही है।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम बनी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार विदेशी बिकवाली तेजी की गति को सीमित कर सकती है। हालांकि घरेलू निवेशकों की सक्रिय भागीदारी फिलहाल बाजार को समर्थन दे रही है।
इस बीच भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले बढ़त के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को सहारा दिया है, जिससे आयात लागत और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर पहली तिमाही के कारोबारी नतीजों, मानसून की प्रगति और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। यदि ये कारक अनुकूल रहते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है, हालांकि उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल करते हुए ऊंचे स्तर पर कारोबार किया, जबकि निफ्टी भी मजबूती के साथ आगे बढ़ा। शुरुआती घंटों में बाजार की चाल से यह संकेत मिला कि निवेशक घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा बाजार में स्थिरता और तेल कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दे रहा है।
बाजार में सबसे अधिक मजबूती सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों में देखने को मिली। आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से इस क्षेत्र का सूचकांक तेजी से ऊपर गया। वहीं रियल एस्टेट क्षेत्र में भी निवेशकों की सक्रियता बढ़ी, जिससे संबंधित कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान दिखाई दिया।
लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। व्यापक बाजार में खरीदारी के संकेत इस बात को दर्शाते हैं कि तेजी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, व्यापक भागीदारी किसी भी तेजी को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में रहे। एशियाई बाजारों में अधिकांश प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इससे निवेशकों की धारणा को समर्थन मिला। हालांकि कुछ बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला, फिर भी क्षेत्रीय स्तर पर जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सुधार का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचना भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। तेल कीमतों में कमी से आयात बिल पर दबाव घट सकता है, जिससे चालू खाता घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला दबाव कम होने से महंगाई को नियंत्रित रखने में भी सहायता मिल सकती है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक नियंत्रित रहती हैं तो इसका लाभ आर्थिक विकास दर पर भी दिखाई दे सकता है। कम लागत वाले आर्थिक माहौल में उद्योगों की लाभप्रदता बढ़ सकती है और निवेश गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। यही वजह है कि बाजार ने तेल कीमतों में आई गिरावट को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।
फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की दिशा और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है। गुरुवार की शुरुआती तेजी ने यह संकेत जरूर दिया है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल मजबूत बना हुआ है और बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहा है।

कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 790.54 अंकों की बढ़त के साथ 76,991.22 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 197.55 अंक चढ़कर 24,021.65 पर पहुंच गया। बाजार की शुरुआत भी सकारात्मक रही और दिनभर निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर बना रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 77,190.37 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,090.05 तक पहुंच गया।
बाजार में तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी निवेशकों ने सक्रियता दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा विभिन्न वर्गों के शेयरों में बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि व्यापक स्तर पर निवेशकों की भागीदारी बाजार की मजबूती का सकारात्मक संकेत मानी जाती है।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन दोनों क्षेत्रों के सूचकांकों में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर ऑटोमोबाइल और धातु क्षेत्र के कुछ शेयरों में दबाव दिखाई दिया, जिसके कारण इन सेक्टरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
दिनभर के कारोबार में कई प्रमुख कंपनियों के शेयर निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। एविएशन, वित्तीय सेवाओं और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में मजबूत तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत ऊर्जा और धातु क्षेत्र की कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। हालांकि इन चुनिंदा शेयरों की कमजोरी बाजार की समग्र तेजी को प्रभावित नहीं कर सकी।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों द्वारा की गई खरीदारी ने बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। तकनीकी चार्ट पर निफ्टी ने मजबूत तेजी का संकेत देने वाला पैटर्न बनाया है, जिससे निकट भविष्य में बाजार की दिशा को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमुख सूचकांक का महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर बने रहना निवेशकों के विश्वास को मजबूत करता है।
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर निफ्टी ने एक बार फिर अपने महत्वपूर्ण औसत स्तर के ऊपर जगह बनाई है। साथ ही बाजार की गति को मापने वाले प्रमुख संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि हालिया करेक्शन के बाद बाजार में खरीदारी की वापसी हो रही है और निवेशकों का रुझान फिर से सकारात्मक बना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 24,140 से 24,170 के बीच का क्षेत्र महत्वपूर्ण प्रतिरोध साबित हो सकता है। यदि सूचकांक इस दायरे को पार कर स्थिरता बनाए रखने में सफल रहता है तो आगे और तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 23,900 से 23,870 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। जब तक निफ्टी इस दायरे के ऊपर बना रहेगा, तब तक बाजार की समग्र धारणा सकारात्मक रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया। इससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता में राहत मिली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। इसी का लाभ भारतीय बाजार को भी मिला, जहां निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में जमकर खरीदारी की।
सप्ताह के दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने मजबूत प्रदर्शन किया। हालांकि अंतिम कारोबारी सत्र में आईटी शेयरों में बिकवाली और निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूली के कारण बाजार पर दबाव देखने को मिला। इसके बावजूद पूरे सप्ताह का रुख सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक उल्लेखनीय बढ़त के साथ बंद हुए। इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार में कायम है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी बाजार को महत्वपूर्ण समर्थन दिया। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में गिरावट का सीधा असर उन अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करती हैं। भारत के लिए यह स्थिति महंगाई नियंत्रण, व्यापार संतुलन और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से सकारात्मक मानी जाती है। इसी कारण निवेशकों ने कई क्षेत्रों में सक्रियता दिखाई।
सप्ताह के दौरान भारतीय मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति बेहतर होने से विदेशी निवेशकों के दृष्टिकोण में सुधार देखा गया। वित्तीय बाजारों में मुद्रा की स्थिरता को निवेश के लिए अनुकूल संकेत माना जाता है और इसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखाई दिया।
क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु, रियल एस्टेट, फार्मा और रक्षा क्षेत्र के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और इस क्षेत्र ने सप्ताह के दौरान उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की। मजबूत ऑर्डर बुक, दीर्घकालिक विकास संभावनाएं और सरकारी नीतिगत समर्थन इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में रहा। वैश्विक स्तर पर तकनीकी सेवाओं की मांग को लेकर जारी चिंताओं और कमजोर कारोबारी अनुमानों के कारण आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इससे संबंधित सूचकांक सप्ताह के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।
मौद्रिक नीति के मोर्चे पर भी निवेशकों की नजरें बनी हुई हैं। प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाए जा रहे सतर्क रुख के कारण ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं भारत में भी नीति निर्माताओं का दृष्टिकोण फिलहाल संतुलित और सावधानीपूर्ण माना जा रहा है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मानसून की प्रगति, कृषि क्षेत्र की गतिविधियों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। विशेष रूप से खरीफ फसलों की बुआई और ग्रामीण मांग से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव में और कमी आती है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की सतर्क निगाह बनी रहेगी।