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  • शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनिवार को ऐसे करें व्रत, पूजा विधि से लेकर किन चीजों का करें दान जानें पूरी जानकारी

    शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनिवार को ऐसे करें व्रत, पूजा विधि से लेकर किन चीजों का करें दान जानें पूरी जानकारी

    नई दिल्ली । शनिवार का दिन भगवान शनिदेव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव कर्मों के फलदाता हैं और व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार परिणाम प्रदान करते हैं। माना जाता है कि शनिवार के दिन श्रद्धा और नियम के साथ शनिदेव की पूजा तथा व्रत करने से जीवन में चल रही परेशानियों से राहत पाने की कामना की जा सकती है। नौकरी में बाधा हो कारोबार में परेशानी हो आर्थिक संकट बना हो या किसी कार्य में बार बार रुकावट आ रही हो तो भक्त शनिवार के दिन शनिदेव की आराधना करते हैं। हालांकि व्रत के दौरान मन की शुद्धता और नियमों का पालन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

    शनिवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करनी चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई करके शनिदेव का ध्यान करना चाहिए। यदि संभव हो तो शनिदेव के मंदिर जाकर दर्शन और पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान शनिदेव को सरसों का तेल काले तिल और काले वस्त्र जैसी चीजें अर्पित करने की परंपरा है। कई भक्त शनिदेव को तेल चढ़ाकर उनकी प्रतिमा के सामने दीपक भी जलाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की नकारात्मक परिस्थितियां दूर होने की कामना की जाती है।

    शनिवार व्रत में भगवान हनुमान की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव भगवान हनुमान के भक्तों पर विशेष कृपा रखते हैं। इसलिए शनिवार के दिन हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना और बजरंगबली का ध्यान करना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शनिदेव के मंत्रों का जाप कर सकते हैं और शनि स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। पूजा के दौरान मन को शांत रखना और किसी के प्रति गलत भावना न रखना व्रत की आध्यात्मिक भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    व्रत के दौरान भोजन को लेकर अलग अलग परंपराएं प्रचलित हैं। कुछ लोग पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। कई भक्त शाम के समय पूजा करने के बाद व्रत खोलते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करना चाहिए। विशेष रूप से बच्चों बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को बिना चिकित्सकीय सलाह के कठिन उपवास नहीं करना चाहिए।

    शनिवार के दिन जरूरतमंद लोगों को दान देना भी शुभ माना जाता है। काले तिल काला कपड़ा सरसों का तेल उड़द की दाल और लोहे से जुड़ी वस्तुओं का दान करने की धार्मिक परंपरा है। इसके अलावा किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना भी पुण्यदायक माना जाता है। मान्यता है कि दान करते समय दिखावे से बचना चाहिए और सेवा की भावना रखनी चाहिए।

    शनिवार व्रत के दौरान कुछ बातों से बचने की सलाह धार्मिक मान्यताओं में दी जाती है। किसी का अपमान करना झूठ बोलना क्रोध करना और जरूरतमंद व्यक्ति को परेशान करना शुभ नहीं माना जाता। शनिदेव को कर्मों का न्याय करने वाला देवता माना जाता है इसलिए इस दिन अच्छे कर्म करने और दूसरों की सहायता करने पर विशेष जोर दिया जाता है। इस तरह शनिवार का व्रत केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि संयम सेवा और सदाचार से जुड़ी धार्मिक परंपरा भी है। श्रद्धा के साथ व्रत रखकर शनिदेव का ध्यान करने से भक्त सुख शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव की कामना करते हैं।

  • शनि देव की नजर में अच्छे कर्मों का होता है सबसे बड़ा महत्व, ऐसे करें पूजा और पाएं शुभ आशीर्वाद

    शनि देव की नजर में अच्छे कर्मों का होता है सबसे बड़ा महत्व, ऐसे करें पूजा और पाएं शुभ आशीर्वाद

    नई दिल्ली । धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। मान्यता है कि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही शुभ और अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। यही वजह है कि शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा और उन्हें प्रसन्न करने के उपायों के लिए विशेष माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में ऐसा माना जाता है कि अगर व्यक्ति ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करे जरूरतमंदों की मदद करे और गलत कार्यों से दूर रहे तो शनिदेव की कृपा प्राप्त हो सकती है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए केवल पूजा पाठ ही नहीं बल्कि अच्छे आचरण और सेवा भाव को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की साफ सफाई करके शनिदेव का ध्यान किया जा सकता है। भक्त शनिदेव के मंदिर जाकर उनकी पूजा भी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिदेव को सरसों का तेल काले तिल और काला वस्त्र अर्पित किया जाता है। कुछ लोग दीपक में सरसों का तेल डालकर शनिदेव के समक्ष दीप प्रज्वलित करते हैं। पूजा के दौरान शनिदेव के मंत्रों का जाप करने और मन को शांत रखने की परंपरा भी है।

    शनिदेव की कृपा पाने के लिए हनुमान जी की पूजा को भी विशेष माना जाता है। मान्यता है कि शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से भक्त को मानसिक मजबूती और सकारात्मकता मिलती है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को काली उड़द काले तिल कंबल कपड़े या भोजन का दान करने की परंपरा भी है। दान करते समय दिखावे से बचना और अपनी क्षमता के अनुसार सहायता करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी गरीब बुजुर्ग असहाय या जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना भी शनिदेव की उपासना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    शनिवार के दिन व्रत रखने की भी परंपरा है। कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार या सात्विक भोजन करके व्रत का पालन करते हैं। हालांकि हर व्यक्ति के लिए उपवास जरूरी नहीं है। जिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है या जिन्हें नियमित दवा और भोजन की आवश्यकता होती है उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के कठोर उपवास नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता में पूजा के साथ व्यक्ति का व्यवहार भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन झूठ बोलने क्रोध करने किसी का अपमान करने छल कपट करने और गलत कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि शनिदेव कर्मों का फल देने वाले देवता हैं इसलिए उनके प्रति सच्ची श्रद्धा का सबसे बड़ा आधार अच्छे कर्म माने जाते हैं। माता पिता बुजुर्गों और जरूरतमंदों का सम्मान करना पशु पक्षियों के प्रति दया रखना और अपने काम के प्रति ईमानदार रहना भी शुभ माना जाता है। इसलिए शनिदेव की कृपा पाने के लिए केवल एक दिन की पूजा के बजाय पूरे जीवन में अच्छे कर्म और संयम अपनाना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • हरियाली अमावस्या पर इन 4 चीजों का दान दिला सकता है विशेष पुण्य, शिव जी शनि देव और पितरों की कृपा पाने का माना जाता है शुभ अवसर

    हरियाली अमावस्या पर इन 4 चीजों का दान दिला सकता है विशेष पुण्य, शिव जी शनि देव और पितरों की कृपा पाने का माना जाता है शुभ अवसर


    नई दिल्ली। सावन मास में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या को धार्मिक मान्यताओं में विशेष महत्व दिया जाता है। यह तिथि भगवान शिव की उपासना, पितरों के स्मरण और दान पुण्य के लिए शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही शनि देव और पितरों का आशीर्वाद मिलने की भी धार्मिक मान्यता है। साल 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को पड़ रही है। इस अवसर पर भक्त स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और पूर्वजों की स्मृति में तर्पण तथा दान जैसे धार्मिक कार्य कर सकते हैं।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा और स्मरण किया जाता है। पूर्वजों की शांति और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए तर्पण आदि कर्म भी किए जाते हैं। इसके बाद जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। मान्यता है कि सच्चे मन और बिना किसी दिखावे के किया गया दान अधिक पुण्यदायी होता है।

    इस दिन छतरी का दान करना शुभ माना जाता है। सावन का मौसम वर्षा से जुड़ा होता है इसलिए जरूरतमंद व्यक्ति को छतरी देना सेवा का भी एक सुंदर माध्यम हो सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जूते या चप्पल का दान भी किया जा सकता है। कहा जाता है कि ऐसे दान से पितरों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है और जीवन में आने वाली बाधाओं से राहत की कामना की जाती है।

    हरियाली अमावस्या पर दूध या दही का दान करने की भी परंपरा बताई गई है। दूध भगवान शिव की पूजा से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद को दूध, दही, चावल, आटा या चीनी जैसी उपयोगी खाद्य सामग्री का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस तरह के दान से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख शांति तथा सकारात्मकता बनी रहती है।

    काली उड़द की दाल का दान भी इस दिन विशेष माना जाता है। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में काले रंग की कुछ वस्तुओं का संबंध शनि देव से जोड़ा जाता है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर काली उड़द का दान करने को शनि की कृपा प्राप्त करने से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि जीवन में लगातार आ रही बाधाओं और कार्यों में बनते बिगड़ते हालात के बीच श्रद्धा से किया गया दान मन को सकारात्मक भाव देता है।

    काले तिल का दान भी अमावस्या तिथि पर महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्वजों के नाम से काले तिल का दान करने और तर्पण में तिल के उपयोग की धार्मिक परंपरा रही है। मान्यता है कि इससे पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि दान करते समय मात्रा से अधिक भावना को महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को उपयोगी वस्तु देना सबसे बड़ा उद्देश्य होना चाहिए।

    हरियाली अमावस्या का संदेश केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है बल्कि सेवा, दया और जरूरतमंदों की सहायता से भी जुड़ा है। इसलिए इस दिन शिव पूजा और पितरों के स्मरण के साथ भोजन, वस्त्र या दैनिक जरूरत की वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है। श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से किया गया दान मन में संतोष और सकारात्मकता का भाव पैदा करता है।

  • शनिवार को क्या करें और क्या न करें? जानें शनिदेव को प्रसन्न करने के आसान उपाय और जरूरी नियम

    शनिवार को क्या करें और क्या न करें? जानें शनिदेव को प्रसन्न करने के आसान उपाय और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। शनिवार का दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। माना जाता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यही वजह है कि शनिवार को लोग शनिदेव की पूजा करने के साथ साथ हनुमान जी का स्मरण भी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियों से राहत मिल सकती है। वहीं कुछ ऐसे काम भी बताए गए हैं जिन्हें शनिवार के दिन करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि इन मान्यताओं को धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं के रूप में ही देखना चाहिए।

    शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर शनिदेव का ध्यान करना शुभ माना जाता है। भक्त शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करते हैं। कई जगहों पर शनिवार को शनि मंदिर में जाकर तेल चढ़ाने और दीपक जलाने की परंपरा है। इसके साथ ही शनिदेव के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ शनिदेव की आराधना करने से व्यक्ति को धैर्य रखने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

    शनिवार को हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि हनुमान जी के भक्तों पर शनिदेव की विशेष कृपा रहती है। ऐसे में शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना और हनुमान जी के मंदिर में दर्शन करना शुभ माना जाता है। भक्त भगवान हनुमान को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करते हैं। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और गरीबों को भोजन या आवश्यक वस्तुएं दान करना भी इस दिन पुण्यदायक माना जाता है।

    शनिवार के दिन काले तिल काला कपड़ा सरसों का तेल और लोहे से जुड़ी वस्तुओं का दान करने की धार्मिक परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने से नकारात्मक प्रभाव कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा कौवे को भोजन कराने की परंपरा भी कई स्थानों पर निभाई जाती है। इसे पितरों के सम्मान से भी जोड़कर देखा जाता है।

    वहीं शनिवार के दिन कुछ कामों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किसी के साथ छल कपट झूठ या अन्याय करने से बचना चाहिए। किसी गरीब कमजोर या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। क्रोध में आकर किसी को अपशब्द कहना भी उचित नहीं माना जाता। शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है इसलिए इस दिन विशेष रूप से अच्छे कर्म करने और दूसरों के साथ ईमानदारी से व्यवहार करने पर जोर दिया जाता है।

    कई धार्मिक मान्यताओं में शनिवार को तेल नमक और लोहे जैसी वस्तुओं की खरीदारी को लेकर भी अलग अलग धारणाएं मिलती हैं। हालांकि इन मान्यताओं का पालन व्यक्ति अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शनिवार को किसी अंधविश्वास के डर से नहीं बल्कि श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ पूजा और सेवा करनी चाहिए। शनिदेव की उपासना का मूल संदेश भी यही माना जाता है कि व्यक्ति अपने कर्मों को बेहतर बनाए और ईमानदारी तथा न्याय के रास्ते पर चले।

    इस तरह शनिवार को पूजा पाठ के साथ जरूरतमंदों की मदद करना हनुमान जी का स्मरण करना और अच्छे कर्म करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा के साथ किए गए ऐसे कार्य व्यक्ति के मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है।

  • Vastu Tips: शनिवार को नमक दान करना शुभ है या अशुभ? जानें नियम

    Vastu Tips: शनिवार को नमक दान करना शुभ है या अशुभ? जानें नियम


    नई दिल्ली । वास्तु और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन नमक का दान करने से बचना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन नमक दान करने से शनिदेव नाराज हो सकते हैं, जिससे व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
    शनिवार को नमक दान करने से क्या हो सकते हैं नुकसान?
    आर्थिक तंगी और बरकत में कम
    मान्यता है कि शनिवार को नमक दान करने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है। इससे धन हानि और आर्थिक परेशानियां बढ़ने की आशंका रहती है।

    नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
    वास्तु शास्त्र के अनुसार नमक ऊर्जा से जुड़ी वस्तु माना जाता है। शनिवार को इसका दान या खरीदारी करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और कर्ज संबंधी परेशानियां सामने आ सकती हैं।

    परिवार में तनाव
    ऐसी भी मान्यता है कि शनिवार को नमक देने से परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद और दूरी बढ़ सकती है। घर का माहौल तनावपूर्ण हो सकता है।

    शनिवार को किन चीजों का दान करना शुभ माना गया है?
    शनिवार के दिन शनिदेव की कृपा पाने और शनि दोष कम करने के लिए इन चीजों का दान शुभ माना जाता है-
    सरसों का तेल
    काले तिल
    उड़द की दाल
    काले कपड़े या कंबल
    लोहे की वस्तुएं
    मान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से शनि दोष शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

    क्या करें
    अगर शनिवार को किसी जरूरतमंद की मदद करनी हो, तो नमक की जगह अन्न, वस्त्र या तेल का दान करना बेहतर माना जाता है। साथ ही शनिदेव की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

  • शनि दोष से बचना है तो जान लें जूते-चप्पल खरीदने के सही और गलत दिन

    शनि दोष से बचना है तो जान लें जूते-चप्पल खरीदने के सही और गलत दिन


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र और ज्योतिष मान्यताओं में रोजमर्रा की चीजों की खरीदारी को भी शुभ-अशुभ से जोड़ा गया है। खासतौर पर जूते-चप्पल खरीदने को लेकर कई नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि गलत दिन पर जूते-चप्पल खरीदने से जीवन में नकारात्मकता, आर्थिक परेशानी और शनिदेव की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। अमावस्या, मंगलवार, शनिवार और ग्रहण वाले दिन जूते-चप्पल खरीदने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इन दिनों खरीदे गए फुटवियर दुर्भाग्य और मानसिक तनाव को बढ़ा सकते हैं।

    शनिवार को जूते-चप्पल खरीदना क्यों माना जाता है अशुभ?
    ज्योतिष शास्त्र में पैरों का संबंध शनिदेव से माना गया है। इसलिए शनिवार के दिन जूते-चप्पल खरीदना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे शनि दोष बढ़ सकता है और व्यक्ति को आर्थिक तंगी, तनाव और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    नए जूते-चप्पल खरीदने का सबसे शुभ दिन कौन सा है?
    वास्तु शास्त्र के अनुसार शुक्रवार का दिन नए जूते-चप्पल खरीदने और पहनने के लिए सबसे शुभ माना गया है। कहा जाता है कि शुक्रवार को खरीदे गए फुटवियर सुख-सुविधा और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आते हैं।

    पुराने जूते-चप्पल कब हटाने चाहिए
    मान्यता के अनुसार फटे-पुराने या इस्तेमाल में नहीं आने वाले जूते-चप्पल शनिवार के दिन किसी शनि मंदिर के बाहर छोड़ना शुभ माना जाता है। इससे शनि की अशुभ दृष्टि कम होती है और नकारात्मकता दूर होती है।

    जूते-चप्पल रखने से जुड़े वास्तु नियम

    बेड के नीचे जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिए
    पूजा घर के पास फुटवियर रखना अशुभ माना जाता है
    घर के मुख्य दरवाजे पर बिखरे जूते नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं
    गंदे और टूटे फुटवियर घर में रखने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है
    वास्तु मान्यताओं के अनुसार साफ-सुथरे और व्यवस्थित जूते-चप्पल घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • शनि जयंती 2026: 16 मई को बनेगा दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि, महत्व और शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय

    शनि जयंती 2026: 16 मई को बनेगा दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि, महत्व और शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार शनिदेव की जयंती हर साल ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाती है, जिसे शनि जयंती या शनि अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन न्याय और कर्म के देवता शनिदेव का प्राकट्य हुआ था। वर्ष 2026 में यह पर्व 16 मई (शनिवार) को मनाया जाएगा, और यह संयोग इसलिए खास है क्योंकि शनिवार स्वयं शनिदेव को समर्पित दिन होता है।

    शनि जयंती 2026 की सही तिथि
    पंचांग के अनुसार
    अमावस्या प्रारंभ: 16 मई 2026, सुबह 4:12 बजे
    अमावस्या समाप्त: 17 मई 2026, रात 1:31 बजे
    उदया तिथि के अनुसार शनि जयंती 16 मई 2026 (शनिवार) को ही मनाई जाएगी।

    शनि जयंती का धार्मिक महत्व
    शनि जयंती को अत्यंत शक्तिशाली दिन माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन की गई पूजा सेशनि दोष का प्रभाव कम होता हैजीवन में चल रही बाधाएं दूर होती हैंकर्मों के अनुसार फल देने वाले शनि देव प्रसन्न होते हैं

    शनि जयंती पूजा विधि
    1. सुबह की शुरुआत
    सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
    काले या गहरे रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें

    2. पूजा स्थापना
    पूजा स्थान पर काले कपड़े का आसन बिछाएं
    शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें

    3. अभिषेक और पूजन
    पंचामृत या गंगाजल से स्नान कराएं
    कुमकुम, काजल और फूल अर्पित करें
    सरसों के तेल का दीपक जलाएं

    4. भोग और मंत्र जाप
    तेल से बने मीठे व्यंजन या काले तिल का भोग लगाएं
    ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें
    शनि चालीसा का पाठ करें

    ‍ 5. आरती और क्षमा प्रार्थना
    विधिवत आरती करें
    पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें

    शनिदेव को प्रसन्न करने के सरल उपाय
    1. काले चने का दान
    काले चने का प्रसाद बनाकर बंदरों को खिलाना बेहद शुभ माना जाता है।

    2. पीपल पूजा
    पीपल के वृक्ष पर जल और काले तिल अर्पित करें तथा नीचे सरसों तेल का दीपक जलाएं।

    3. मंत्र जाप
    ॐ शं शनैश्चराय नमः
    ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः
    इन मंत्रों का 108 बार जाप करें।

    4. दान-पुण्य
    गरीबों को काले जूते, काला छाता, काले तिल और भोजन दान करें।

    ज्योतिषीय मान्यता
    ज्योतिष के अनुसार शनि ग्रह व्यक्ति के कर्मों का फल देने वाला ग्रह है। इसलिए इस दिन किए गए अच्छे कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। साथ ही यह दिन धैर्य, अनुशासन और कर्म सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।शनि जयंती केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्म-सुधार और कर्म सुधार का अवसर माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा आने की मान्यता है।

  • कुंभ राशिफल: खत्म होने वाला है संघर्ष का दौर; शनि के राशि परिवर्तन से मिलेगी साढ़ेसाती से मुक्ति, चमक उठेगा भाग्य

    कुंभ राशिफल: खत्म होने वाला है संघर्ष का दौर; शनि के राशि परिवर्तन से मिलेगी साढ़ेसाती से मुक्ति, चमक उठेगा भाग्य


    नई दिल्ली । उज्जैन/वाराणसी: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और ‘न्याय का देवता’ माना जाता है। वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। कुंभ राशि के जातकों के लिए पिछले कुछ वर्ष काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं, लेकिन अब उनके अच्छे दिन आने के संकेत मिल रहे हैं। शनि देव, जो कुंभ राशि के स्वामी भी हैं, जल्द ही अपना गोचर पूरा कर कुंभ राशि वालों को साढ़ेसाती के कष्टों से पूरी तरह मुक्त करने वाले हैं।

    कुंभ राशि और शनि का गहरा संबंध

    कुंभ राशि के अधिपति स्वयं शनि देव हैं और इस राशि के आराध्य देव भगवान शिव (महादेव) माने जाते हैं। इस राशि के जातकों का शुभ रंग आसमानी और भाग्यशाली अंक 10 व 11 होता है। वर्तमान में शनि देव मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। चूंकि शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं, इसलिए उनके संचरण का प्रभाव बहुत गहरा और लंबे समय तक रहने वाला होता है।

    साढ़ेसाती का अंतिम चरण: अब मिलेगी राहत

    कुंभ राशि के जातक फिलहाल शनि की साढ़ेसाती के अंतिम चरण तीसरे चरण से गुजर रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, साढ़ेसाती का अंतिम चरण जाते-जाते व्यक्ति को उसके संघर्षों का फल देकर जाता है। वर्तमान स्थिति: कुंभ राशि वालों को पिछले कुछ समय से करियर में अनिश्चितता, पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य संबंधी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ रहा था। बदलाव का संकेत: शनि के अगले राशि परिवर्तन के साथ ही कुंभ राशि साढ़ेसाती के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो जाएगी। इसके बाद जातकों के जीवन में मानसिक शांति, वित्तीय स्थिरता और रुके हुए कार्यों में गति आएगी।

    भाग्य परिवर्तन और नए अवसर

    शनि के साढ़ेसाती से मुक्त होते ही कुंभ राशि के जातकों के लिए ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत हो सकती है। करियर में उन्नति: नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और व्यापारियों को नए निवेश से भारी लाभ मिलने की संभावना है। आर्थिक लाभ: लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है और पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ सकते हैं। स्वास्थ्य में सुधार: साढ़ेसाती के कारण चल रही पुरानी बीमारियों और मानसिक तनाव से राहत मिलेगी।

    महादेव और शनि की कृपा पाने के उपाय

    कुंभ राशि के जातकों को साढ़ेसाती के इस अंतिम दौर को सुखद बनाने के लिए कुछ विशेष उपाय करने चाहिए शिव उपासना: चूंकि कुंभ के आराध्य महादेव हैं, इसलिए प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाना और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना अत्यंत लाभकारी है। शनिवार का दान: शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और काले तिल व काली उड़द का दान करें। अनुशासन और सेवा: शनि देव अनुशासन प्रिय हैं, इसलिए असहाय लोगों की मदद करें और अपने आचरण को शुद्ध रखें। कुंभ राशि वालों के लिए यह समय धैर्य रखने का है। जैसे ही शनि का गोचर पूर्ण होगा, आपके जीवन की बाधाएं स्वतः दूर होने लगेंगी और भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा।