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  • ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसे में 16 मौतों के बाद बड़ा फैसला, हर मृतक के परिवार के एक सदस्य को मिलेगी नगर निगम में नौकरी

    ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसे में 16 मौतों के बाद बड़ा फैसला, हर मृतक के परिवार के एक सदस्य को मिलेगी नगर निगम में नौकरी


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को अब रोजगार केGwalior Accident, Sheetla Mata Temple, Municipal Corporation Job, Madhya Pradesh News, Road Safety Investigation जरिए सहारा देने की तैयारी है। ग्वालियर नगर निगम परिषद ने निर्णय लिया है कि हादसे में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिवार के एक सदस्य को नगर निगम में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नौकरी दी जाएगी। इसके साथ ही हादसे में घायल हुए लोगों की मदद करने पर भी सहमति बनी है। नगर निगम परिषद में इस मुद्दे पर शोक प्रस्ताव के दौरान चर्चा हुई और भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस के पार्षद पीड़ित परिवारों की सहायता के फैसले पर एकमत नजर आए।

    18 अक्टूबर की देर रात शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार के पास हुए हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। चीनौर रोड पर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालु सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर अनियंत्रित हो गया और लोगों को अपनी चपेट में लेता चला गया। इस दर्दनाक घटना में 16 लोगों की मौत हो गई जबकि 42 लोग घायल हुए। मृतकों में पुरुषों के साथ महिला और बच्चे भी शामिल थे। हादसे के बाद प्रभावित परिवारों के सामने अपनों को खोने के दुख के साथ आर्थिक और पारिवारिक मुश्किलें भी खड़ी हो गईं।

    नगर निगम परिषद में पीड़ित परिवारों की स्थिति को देखते हुए रोजगार उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। हर मृतक के परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्सिंग पर नौकरी देने का उद्देश्य परिवार को नियमित आय का सहारा उपलब्ध कराना है। हादसे के कारण जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है उनके लिए यह सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि नौकरी की प्रक्रिया कब शुरू होगी और पात्र परिवारों के सदस्यों का चयन किस तरह किया जाएगा इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

    नगर निगम सभापति मनोज सिंह तोमर ने पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। परिषद के फैसले को हादसे से प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। घायलों को भी सहायता देने की बात कही गई है। हादसे के बाद कई परिवार इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में आर्थिक मदद और रोजगार संबंधी सहायता उन्हें आगे की जिंदगी संभालने में सहारा दे सकती है।

    दूसरी ओर महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने हादसे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब मंदिर तक दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित थी तो धान से भरा ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया। उन्होंने सुरक्षा में संभावित चूक की जांच कराने की मांग की ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। हादसे के समय ट्रक पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए श्रद्धालुओं को कुचलकर मंदिर की बाहरी दीवार और प्रवेश द्वार से टकरा गया था। टक्कर के कारण दीवार ढह गई और कुछ लोग मलबे में दब गए।

    घटना के बाद घायलों को जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने पुलिस व्यवस्था पर लापरवाही के आरोप भी लगाए। पुलिस ने ट्रक चालक और मालिक को गिरफ्तार किया था। चालक ने पूछताछ में ट्रक के ब्रेक फेल होने की बात कही थी। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई और सिटी एसपी को हटाने के साथ आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। अब नगर निगम के रोजगार संबंधी फैसले से पीड़ित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जबकि सुरक्षा में चूक और हादसे के वास्तविक कारणों की जांच भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

  • ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल

    ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने एक और परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल 78 वर्षीय मोतीराम प्रजापति ने मंगलवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। करीब 52 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हादसे में एक बेकाबू ट्रक ने दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं और आसपास मौजूद लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में कुल 57 लोग प्रभावित हुए थे जिनमें 15 लोगों की मौत पहले ही हो चुकी थी जबकि 41 लोग घायल बताए गए हैं।

    मोतीराम प्रजापति मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास प्रसाद की दुकान लगाते थे। इसी दुकान से होने वाली कमाई के सहारे वे अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। हादसे की रात वे भी ट्रक की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजन उन्हें इलाज के लिए लिंक हॉस्पिटल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। चिकित्सकों के मुताबिक हादसे में लगी चोट के कारण उनकी खून की नली में थक्का जम गया था। इस स्थिति को सुपरफिशियल फीमोरल थ्रोम्बोसिस बताया गया। मोतीराम को वर्ष 2024 में हार्ट अटैक भी आया था जिसके बाद उनके दिल में स्टेंट डाला गया था। तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार सुबह उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और सातऊ गांव में शोक की लहर फैल गई।

    हादसे में गंभीर रूप से घायल संजय शर्मा और 19 वर्षीय कल्पना परिहार को बेहतर उपचार के लिए भोपाल एम्स भेजा गया है। संजय को सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एयर एम्बुलेंस से शिफ्ट किया गया जबकि कल्पना को मंगलवार सुबह एयर एम्बुलेंस के जरिए भोपाल पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इससे पहले घायलों के उपचार की जानकारी ली थी और अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।

    संजय शर्मा अपने परिवार के साथ शीतला माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। वे श्योपुर के निवासी हैं और शनिवार को परिवार के साथ एक तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपने भाइयों से मिलने सहसराम गांव गए थे। वहां से वे अपने बड़े भाई महेश को साथ लेकर ग्वालियर आए थे। संजय यहां मकान बनवा रहे थे और चाहते थे कि महेश निर्माण कार्य की देखरेख करें। रात करीब डेढ़ बजे हुए हादसे में उनके भाई महेश और मासूम शौर्य की मौत हो गई जबकि संजय गंभीर रूप से घायल हो गए।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक धान से भरे दो ओवरलोड ट्रक नो एंट्री वाले रास्ते में करीब सात किलोमीटर तक अंदर आ गए थे। मंदिर के पास संकरे रास्ते और ढलान पर पहुंचने के बाद एक ट्रक रुक गया जबकि दूसरा ट्रक बेकाबू होकर नीचे की ओर बढ़ने लगा। रास्ते में उसने दुकानों और श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले लिया। आखिरकार मंदिर का करीब 200 साल पुराना सीमेंट कंक्रीट का प्रवेश द्वार ट्रक के सामने आ गया और उससे टकराने के बाद वाहन रुक गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यदि ट्रक गेट से नहीं टकराता तो आगे कतार में खड़े अन्य श्रद्धालु भी उसकी चपेट में आ सकते थे।

    हादसे के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और नो एंट्री मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तीन शिफ्ट में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है और 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात बताए गए थे। हादसे से करीब 15 मिनट पहले ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह भी मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रित करते दिखाई दिए थे। इसके कुछ ही समय बाद ट्रक के श्रद्धालुओं को कुचलने की सूचना मिली। अब इस दर्दनाक घटना के बाद घायलों के उपचार के साथ यह सवाल भी अहम है कि प्रतिबंधित मार्ग पर ओवरलोड ट्रक कैसे पहुंचा और ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

  • ग्वालियर में देर रात भीषण हादसे से मचा कोहराम, दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को कुचला, CSP हटाए गए और 8 निलंबित

    ग्वालियर में देर रात भीषण हादसे से मचा कोहराम, दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को कुचला, CSP हटाए गए और 8 निलंबित


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। चीनौर रोड पर दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं को धान से भरे एक बेकाबू ट्रक ने कुचल दिया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो पुलिसकर्मियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और मंदिर परिसर के आसपास चीख-पुकार सुनाई देने लगी।
    जानकारी के मुताबिक हादसा शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे हुआ। उस समय शीतला माता मंदिर में दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। कई लोग सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर अचानक बेकाबू हो गया। बताया गया है कि घटनास्थल पर सड़क का ढलान काफी तीखा है। ट्रक लोगों को रौंदता हुआ आगे बढ़ा और पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए मंदिर की बाहरी दीवार तथा गेट से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मंदिर की दीवार ढह गई और कई लोग मलबे में दब गए।
    ट्रक चालक ने पुलिस को बताया कि वाहन के ब्रेक फेल हो गए थे। खबर के मुताबिक वह गूगल मैप की मदद से ट्रक चला रहा था। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों और उसमें किसी तरह की लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद पुलिस और राहत दल ने घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। घायलों को ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई है।
    हादसे में घायल थाटीपुर निवासी अभिषेक ने बताया कि वह उस समय हाथ-पैर धो रहे थे जब अचानक सामने से ट्रक आ गया। उनके मुताबिक ट्रक उन्हें घसीटते हुए आगे ले गया। एक व्यक्ति ने उन्हें तलाशकर बाहर निकाला जिससे उनकी जान बच सकी। हादसे में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद मृतकों के शव उनके परिजनों तक पहुंचाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
    घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को पद से हटाया गया है। इसके साथ ही आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। इनमें झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव और आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा सहित यातायात पुलिस के अधिकारी तथा अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। यह कार्रवाई हादसे के दौरान कथित लापरवाही के मामले में की गई है।
    मुख्यमंत्री ने मृतकों की मौत पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि इस कठिन समय में सरकार प्रभावित परिवारों के साथ है। उन्होंने हादसे में घायल सभी लोगों का निशुल्क इलाज कराने की घोषणा की है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी घटना पर दुख जताया और मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
    अष्टमी के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहने के बीच इस हादसे ने धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीखे ढलान वाले मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा जरूरी मानी जा रही है। हादसे की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रक के बेकाबू होने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में चूक के लिए कौन से कारण जिम्मेदार थे।