ग्वालियर में बेकाबू ट्रक का कहर, मंदिर में दर्शन करने पहुंचे 57 श्रद्धालु चपेट में आए, 16 की मौत और 41 घायल


ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने एक और परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल 78 वर्षीय मोतीराम प्रजापति ने मंगलवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। करीब 52 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हादसे में एक बेकाबू ट्रक ने दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं और आसपास मौजूद लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था। हादसे में कुल 57 लोग प्रभावित हुए थे जिनमें 15 लोगों की मौत पहले ही हो चुकी थी जबकि 41 लोग घायल बताए गए हैं।

मोतीराम प्रजापति मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास प्रसाद की दुकान लगाते थे। इसी दुकान से होने वाली कमाई के सहारे वे अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। हादसे की रात वे भी ट्रक की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजन उन्हें इलाज के लिए लिंक हॉस्पिटल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। चिकित्सकों के मुताबिक हादसे में लगी चोट के कारण उनकी खून की नली में थक्का जम गया था। इस स्थिति को सुपरफिशियल फीमोरल थ्रोम्बोसिस बताया गया। मोतीराम को वर्ष 2024 में हार्ट अटैक भी आया था जिसके बाद उनके दिल में स्टेंट डाला गया था। तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार सुबह उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और सातऊ गांव में शोक की लहर फैल गई।

हादसे में गंभीर रूप से घायल संजय शर्मा और 19 वर्षीय कल्पना परिहार को बेहतर उपचार के लिए भोपाल एम्स भेजा गया है। संजय को सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एयर एम्बुलेंस से शिफ्ट किया गया जबकि कल्पना को मंगलवार सुबह एयर एम्बुलेंस के जरिए भोपाल पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इससे पहले घायलों के उपचार की जानकारी ली थी और अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि इलाज में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए।

संजय शर्मा अपने परिवार के साथ शीतला माता मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। वे श्योपुर के निवासी हैं और शनिवार को परिवार के साथ एक तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपने भाइयों से मिलने सहसराम गांव गए थे। वहां से वे अपने बड़े भाई महेश को साथ लेकर ग्वालियर आए थे। संजय यहां मकान बनवा रहे थे और चाहते थे कि महेश निर्माण कार्य की देखरेख करें। रात करीब डेढ़ बजे हुए हादसे में उनके भाई महेश और मासूम शौर्य की मौत हो गई जबकि संजय गंभीर रूप से घायल हो गए।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक धान से भरे दो ओवरलोड ट्रक नो एंट्री वाले रास्ते में करीब सात किलोमीटर तक अंदर आ गए थे। मंदिर के पास संकरे रास्ते और ढलान पर पहुंचने के बाद एक ट्रक रुक गया जबकि दूसरा ट्रक बेकाबू होकर नीचे की ओर बढ़ने लगा। रास्ते में उसने दुकानों और श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले लिया। आखिरकार मंदिर का करीब 200 साल पुराना सीमेंट कंक्रीट का प्रवेश द्वार ट्रक के सामने आ गया और उससे टकराने के बाद वाहन रुक गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यदि ट्रक गेट से नहीं टकराता तो आगे कतार में खड़े अन्य श्रद्धालु भी उसकी चपेट में आ सकते थे।

हादसे के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और नो एंट्री मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तीन शिफ्ट में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है और 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात बताए गए थे। हादसे से करीब 15 मिनट पहले ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह भी मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रित करते दिखाई दिए थे। इसके कुछ ही समय बाद ट्रक के श्रद्धालुओं को कुचलने की सूचना मिली। अब इस दर्दनाक घटना के बाद घायलों के उपचार के साथ यह सवाल भी अहम है कि प्रतिबंधित मार्ग पर ओवरलोड ट्रक कैसे पहुंचा और ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।