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  • मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज

    मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज लोगों की नजरों में रहा। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब दक्षिण भारत तक पहुंचता दिखाई दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।

    सिवनी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह पूरे समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आसपास सक्रिय दिखाई दिए। कार्यक्रम में विधायक कभी मुख्यमंत्री के पीछे तो कभी उनके आगे चलते नजर आए। मंच पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री अपना संबोधन समाप्त कर आगे बढ़ गए। यह दृश्य इसलिए भी खास माना गया क्योंकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले यही विधायक मुख्यमंत्री की नीतियों के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए थे। विरोध के बाद उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण मान रहे हैं।

    दूसरी ओर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के विवाद के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज भी चर्चा में रहा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया। मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक रद्द होने के सवाल पर उन्होंने जिम्मेदारी बैठक तय करने वालों पर डाल दी। मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिए लेकिन पूरे समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे संयमित रणनीति और विवादों से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी लोगों के बीच पहचान बना रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही लोग उन्हें देखने पहुंचे भीड़ से मामा मामा के नारे गूंजने लगे। लोगों के उत्साह को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान भी सीधे उनके बीच पहुंचे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। उनका सहज और आत्मीय व्यवहार एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा। भाजपा नेताओं का मानना है कि शिवराज की यही जनसंपर्क शैली उन्हें देशभर में अलग पहचान दिला रही है।

    इसी बीच प्रदेश की नौकरशाही में भी एक रोचक चर्चा सामने आई। राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को कुछ दिनों तक आईपीएस बनने की बधाइयां मिलती रहीं लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल ही नहीं था। इसके बाद यह मामला भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

    प्रदेश की राजनीति में लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज होने वाली हैं। नेताओं की सक्रियता बदलते व्यवहार और नए राजनीतिक संदेश अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अहम मायने रखने लगे हैं।

  • सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा

    सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा


    सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर और नीमच जिलों में रविवार को जनप्रतिनिधियों को जनता के तीखे विरोध और सवालों का सामना करना पड़ा। एक ओर सीहोर में किसानों और कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan का काफिला रोककर अपनी समस्याएं सामने रखीं, तो दूसरी ओर नीमच में भाजपा विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़ना पड़ा।

    सीहोर में इछावर के आजाद मैदान की ओर जा रहे शिवराज सिंह चौहान का काफिला अचानक उस समय रुक गया जब कांग्रेस नेताओं और किसानों के एक समूह ने रास्ते में उन्हें घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे राजनीतिक रूप से भले ही कांग्रेस से जुड़े हों, लेकिन जनप्रतिनिधि के रूप में शिवराज सभी के प्रतिनिधि हैं, इसलिए वे अपनी समस्याएं उनके सामने रखना चाहते हैं।

    इस दौरान किसानों ने बताया कि पिछले कई दिनों से वे खाद और कृषि संबंधी कार्यों के लिए परेशान हैं। डिजिटल पोर्टल के सर्वर डाउन होने के कारण किसानों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, जिससे उनकी समस्याएं बढ़ रही हैं। किसानों ने इस संबंध में केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा।

    किसानों की बात सुनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा और सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे जनता के प्रतिनिधि हैं और हर नागरिक की समस्या का समाधान करना उनकी जिम्मेदारी है।

    बाद में जनकल्याण शिविर में पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी जनता के कामों में बाधा डाल रहे हैं और पात्र लोगों को योजनाओं से बाहर किया जा रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सभी आवेदनों की निष्पक्ष जांच हो और किसी गरीब का हक न छीना जाए।

    इसी बीच नीमच जिले के जावद क्षेत्र में स्थिति अलग रही, जहां विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को जनता के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। वे बांगरेड गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए।

    ग्रामीणों का कहना था कि अस्पताल तो बन रहा है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। जब विधायक ने जवाब देने की कोशिश की, तो भीड़ और अधिक आक्रोशित हो गई और ‘विधायक वापस जाओ’ के नारे लगाने लगी। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों के बीच हस्तक्षेप के बाद विधायक को कार्यक्रम बीच में छोड़कर जाना पड़ा। यह घटनाएं दर्शाती हैं कि जनता अब अपने मुद्दों को लेकर अधिक मुखर हो रही है और जनप्रतिनिधियों से सीधे जवाब की अपेक्षा रखती है।

  • MP के 81 लाख किसानों को मिलेगी 1,634 करोड़ की सौगात: पीएम किसान की 23वीं किस्त कल जारी, शिवराज बोले- खरीफ से पहले बड़ी राहत

    MP के 81 लाख किसानों को मिलेगी 1,634 करोड़ की सौगात: पीएम किसान की 23वीं किस्त कल जारी, शिवराज बोले- खरीफ से पहले बड़ी राहत


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त शुक्रवार, 20 जून को किसानों के खातों में पहुंच जाएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से देशभर के किसानों के लिए 23वीं किस्त जारी करेंगे। इसके तहत मध्यप्रदेश के 81.67 लाख किसानों के खातों में 1,634 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले मिलने वाली यह आर्थिक सहायता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे बीज, खाद और अन्य कृषि कार्यों के लिए किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से अब तक देशभर के किसानों को 22 किस्तों में लगभग 4.28 लाख करोड़ रुपए की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है।

    केंद्रीय मंत्री के अनुसार 23वीं किस्त के तहत देश के करीब 9 करोड़ किसानों के खातों में 18,800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि हस्तांतरित की जाएगी। इस अवसर को खास बनाने के लिए पूरे देश में “पीएम किसान उत्सव दिवस” मनाया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और पंचायत स्तर तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अनुमान है कि लगभग 4 करोड़ किसान विभिन्न स्थानों से प्रधानमंत्री का संबोधन सुनेंगे और कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

    पश्चिम बंगाल के किसानों को लेकर भी शिवराज सिंह चौहान ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले राज्य के किसानों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था, लेकिन अब वहां के 44.42 लाख किसानों को भी पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिलेगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

    कृषि मंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दलहन खरीदी को लेकर भी संकेत दिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम-आशा योजना के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और गुजरात को मूंग, उड़द और मसूर की खरीदी एमएसपी पर करने की अनुमति दे दी है। मध्यप्रदेश के मामले में राज्य सरकार के साथ चर्चा जारी है और जल्द ही इस संबंध में फैसला लिया जाएगा।

    इस दौरान मानसून और अल नीनो के संभावित प्रभाव पर भी चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मध्यप्रदेश के 16 जिलों में अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए विशेष कंटीजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है। कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने, वैकल्पिक खेती के विकल्प उपलब्ध कराने और बेहतर बीज उपलब्ध कराने की रणनीति पर काम चल रहा है।

    उन्होंने कहा कि यदि सामान्य से कम बारिश होती है या वर्षा में लंबा अंतराल आता है, तो किसानों को नुकसान से बचाने के लिए जिला स्तर पर विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी। साथ ही पराली प्रबंधन को लेकर भी राज्यों को पहले से आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    राजनीतिक सवालों पर भी शिवराज सिंह चौहान ने अपनी शैली में जवाब दिया। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के सत्याग्रह से जुड़े सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।” उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

    कुल मिलाकर, पीएम किसान की 23वीं किस्त किसानों के लिए आर्थिक राहत लेकर आ रही है, वहीं सरकार खरीफ सीजन, मानसून और संभावित मौसमीय चुनौतियों से निपटने के लिए भी व्यापक तैयारी में जुटी हुई है।

  • इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति

    इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय कृषि कूटनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। 9 से 13 जून तक आयोजित BRICS कृषि सम्मेलन के अंतिम दिन शनिवार को सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा।

    सम्मेलन के समापन दिवस से पहले शहर के मेघदूत उपवन में विकसित विशेष “ब्रिक्स वाटिका” में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों और अतिथियों ने फलदार पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री Bhagirath Choudhary, मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री Tulsi Silawat, इंदौर के महापौर Pushyamitra Bhargav तथा विधायक Ramesh Mendola सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

    ब्रिक्स वाटिका को अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है। यहां कुल 51 फलदार पौधे लगाए जाने की योजना बनाई गई है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह वाटिका आने वाले वर्षों में BRICS देशों की साझेदारी और हरित विकास के संकल्प का प्रतीक बनेगी। इससे पहले इंदौर में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान ग्लोबल गार्डन और यूरेशियन सम्मेलन के दौरान यूरेशिया गार्डन भी विकसित किए गए थे।

    मेघदूत उपवन को BRICS सम्मेलन के अनुरूप विशेष रूप से सजाया गया है। परिसर में “BRICS INDIA” थीम आधारित आकर्षक आइलैंड, गुलाब उद्यान, संगीतमय फाउंटेन, कमल थीम आधारित सजावट और आधुनिक लैंडस्केपिंग तैयार की गई है। साथ ही BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय ध्वज भी लगाए गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक विविधता की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

    सम्मेलन के अंतिम दिन होने वाली कृषि मंत्रियों की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि कृषि क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करेंगे। विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा कृषि व्यापार को बढ़ावा देने, सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने और कृषि उत्पादकता सुधारने पर भी चर्चा होगी।

    बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और लचीला बनाना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के बीच कृषि क्षेत्र को नई तकनीकों और वैज्ञानिक नवाचारों की आवश्यकता है। इसी दिशा में BRICS देश साझा अनुसंधान, तकनीकी साझेदारी और नवाचार आधारित कृषि मॉडल पर विचार करेंगे।

    शनिवार को सुबह 10 बजे से कृषि मंत्रियों की बैठक शुरू होगी। इसके बाद विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों का दौर चलेगा। सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों की सहमति से एक साझा दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसमें कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक खाद्य संकट, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों के बीच इंदौर में आयोजित यह BRICS सम्मेलन भविष्य की कृषि नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।

  • इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

    इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। कल यानी 9 जून से यहां ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों का अहम सम्मेलन शुरू होगा, जिसमें भारत सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में यह महत्वपूर्ण बैठक इंदौर में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज यह समूह 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ वैश्विक स्तर पर बेहद प्रभावशाली बन चुका है।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों से जुड़ा है, जिससे यह मंच वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

    भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। 2016 में भारत ने ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच जैसी बड़ी पहल शुरू की थी, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देना था।

    इस बार इंदौर सम्मेलन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    सम्मेलन में मुख्य रूप से चार प्रमुख विषयों पर फोकस किया जाएगा-खाद्य सुरक्षा एवं पोषण, कृषि व्यापार और सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, तथा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी।

    मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति का केंद्र हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। उनके अनुसार, किसानों की आय बढ़ाना, कृषि ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और कृषि अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य है।

    कार्यक्रम के दौरान 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी, जबकि 12 से 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी। इसी दौरान “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर विशेष चर्चा भी होगी।

    पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन में “ब्रिक्स वाटिका” का निर्माण और सामूहिक वृक्षारोपण भी किया जाएगा। साथ ही विदेशी प्रतिनिधियों को इंदौर के प्रसिद्ध स्थलों जैसे राजवाड़ा, छप्पन दुकान और मांडू का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

    सरकार का मानना है कि इंदौर में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक कृषि सहयोग को नई दिशा देगा और छोटे किसानों के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित करेगा।

  • खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

    खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी


    खंडवा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी विकास सौगात दी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत खंडवा जिले की चार महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 13.74 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा, जिसके तहत 14.44 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

    इस स्वीकृति के बाद लंबे समय से लंबित ग्रामीण इलाकों की सड़क सुविधा से जुड़ी मांगों को राहत मिलने की उम्मीद है। नई सड़कों के बनने से न सिर्फ गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और आवागमन व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

    ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार
    इन सड़कों के निर्माण से किसानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी, वहीं विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों के लिए भी आवागमन सुगम हो जाएगा। बरसात के मौसम में जिन इलाकों में संपर्क टूट जाता था, वहां अब स्थायी सड़क सुविधा से राहत मिलेगी। केंद्र सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है, ताकि विकास का लाभ सीधे गांवों तक पहुंच सके।

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी मंजूरी
    इन परियोजनाओं को केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि स्वीकृति पत्र उन्हें सौंपा गया है और यह निर्णय क्षेत्र की वर्षों पुरानी जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने का काम तेजी से किया जा रहा है और खंडवा जिले को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

    कौन-कौन से मार्ग बनेंगे
    स्वीकृत परियोजनाओं में कुल चार सड़क मार्ग शामिल हैं:
    बरमलाय से कुकडाल मार्ग – 7.64 किमी, लागत 7.18 करोड़ रुपये
    बरमलाय से सुकलतालाई-4 मार्ग – 3.20 किमी, लागत 3.13 करोड़ रुपये
    लहाड़पुर से पारवाड़ी मार्ग – 2.24 किमी, लागत 2.06 करोड़ रुपये
    मालूद रोड से खेड़ी रैयत मार्ग – 1.36 किमी, लागत 1.35 करोड़ रुपये
    इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने पर ग्रामीण क्षेत्रों की आवाजाही व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

    ग्रामीणों में खुशी का माहौल
    सड़क निर्माण की स्वीकृति के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से खराब और कच्चे रास्तों के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब स्थायी सड़क बनने से उनकी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।

  • प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ मर्डर केस अब पहुंचा राजनीति तक, आरोपी की तस्वीरों पर बवाल

    प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ मर्डर केस अब पहुंचा राजनीति तक, आरोपी की तस्वीरों पर बवाल


    नरसिंहपुर —मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के चर्चित साईंखेड़ा हत्याकांड में अब राजनीतिक एंगल भी जुड़ गया है। हत्या के आरोपी अरुण पटेल की भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। तस्वीरों के सामने आने के बाद क्षेत्र में आरोपी की राजनीतिक पहुंच और रसूख को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
    वायरल  तस्वीरों में आरोपी अरुण पटेल, Darshan Singh Choudhary, Narendra Shivaji Patel और पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan के साथ नजर आ रहा है। कुछ तस्वीरों में वह नेताओं को माला और गुलदस्ता भेंट करता दिखाई दे रहा है, जबकि एक फोटो सांसद के केबिन की बताई जा रही है। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, अब तक किसी भी भाजपा नेता की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
     प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह
    पूरा मामला साईंखेड़ा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां राजस्थान निवासी पप्पू उर्फ वीर जाट की हत्या कर शव को बोरी में पैक कर रायसेन जिले की सीमा में नागन मोड़ सिरवारा ब्रिज के नीचे फेंक दिया गया था। बाड़ी पुलिस ने शव बरामद कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मौके से मिले थैले, नोटबुक और हस्ताक्षरों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी रीना किरार का पहले अरुण पटेल से प्रेम संबंध था और अरुण ही उसका खर्च उठाता था। इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए रीना की दोस्ती राजस्थान निवासी वीर जाट से हो गई और दोनों करीब आ गए। पुलिस के अनुसार अरुण पटेल को यह रिश्ता पसंद नहीं था। इसी रंजिश के चलते 29 अप्रैल को रीना किरार, अरुण पटेल और उनके साथियों ने मिलकर वीर जाट की हत्या कर दी।
    चार आरोपी गिरफ्तार, हथियार और वाहन जब्त
    पुलिस ने मामले में रीना किरार, अरुण पटेल, हरनाम सिंह और कन्हैया उर्फ अजय को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल बेसबॉल डंडा और एक चारपहिया वाहन भी बरामद किया गया है। इसके अलावा साईंखेड़ा स्थित आरोपी के घर को भी सील कर दिया गया है।
    सोशल मीडिया पर गरमाया मामला
    गिरफ्तारी के बाद जैसे ही आरोपी की नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर मामला तेजी से वायरल हो गया। लोग आरोपी की राजनीतिक पहचान और प्रभाव को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। इस मामले में कांग्रेस नेता और तेंदूखेड़ा के पूर्व विधायक Sanjay Sharma ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और सरकार को संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

  • PM Fasal Bima Yojana: अब जंगली जानवरों से बर्बाद फसल पर भी मिलेगा मुआवजा, किसानों को बड़ी राहत

    PM Fasal Bima Yojana: अब जंगली जानवरों से बर्बाद फसल पर भी मिलेगा मुआवजा, किसानों को बड़ी राहत


    नई दिल्ली। खेती-किसानी में मौसम के साथ-साथ जंगली जानवरों का खतरा भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है। कई बार खेतों में घुसकर नीलगाय, जंगली सूअर और दूसरे वन्य जीव पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अब किसानों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव करते हुए जंगली जानवरों और जलभराव से खराब होने वाली फसलों को भी बीमा कवर में शामिल करने का फैसला किया है।

    केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जानकारी दी कि खरीफ 2026 सीजन से यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत अगर किसी किसान की फसल जंगली जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचाने या भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से खराब होती है, तो उसे भी बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाएगा। लंबे समय से किसान इस तरह के नुकसान को योजना में शामिल करने की मांग कर रहे थे।

    सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था का फायदा देशभर के हजारों किसानों को मिलेगा। अब तक फसल बीमा योजना में प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से होने वाले नुकसान को ही प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब खेती को प्रभावित करने वाले दूसरे बड़े जोखिमों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

    कैसे मिलेगा बीमा क्लेम?
    नई गाइडलाइन के अनुसार, फसल खराब होने की स्थिति में किसान को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देनी होगी। किसान मोबाइल ऐप या संबंधित पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ खेत की जियो-टैग फोटो भी अपलोड करनी होगी, ताकि नुकसान की पुष्टि की जा सके। इसके बाद अधिकारी मौके पर जांच करेंगे और रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा जारी किया जाएगा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किन जंगली जानवरों से हुए नुकसान को योजना में शामिल किया जाएगा और किन जिलों में यह सुविधा लागू होगी, इसका फैसला संबंधित राज्य सरकारें करेंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, जो हर साल जंगली जानवरों या जलभराव के कारण भारी नुकसान झेलते हैं। सरकार का कहना है कि खेती को सुरक्षित और किसानों की आय को मजबूत बनाने के लिए योजनाओं में लगातार सुधार किए जा रहे हैं और यह कदम उसी दिशा में अहम माना जा रहा है।

  • बंगाल के रुझानों में भाजपा की बढ़त पर भोपाल में जश्न, शिवराज सिंह ने बांटी 'झालमुड़ी', बोले- मोदी है तो मुमकिन है

    बंगाल के रुझानों में भाजपा की बढ़त पर भोपाल में जश्न, शिवराज सिंह ने बांटी 'झालमुड़ी', बोले- मोदी है तो मुमकिन है

    भोपाल । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक रुझानों ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी उत्सव का माहौल पैदा कर दिया है। जैसे ही बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) जीत की ओर बढ़ी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल स्थित निवास पर ‘महाविजय’ का जश्न शुरू हो गया। इस खास मौके पर उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर बंगाल के प्रसिद्ध व्यंजन ‘झालमुड़ी’ का आनंद लिया और जीत की खुशी साझा की।

    ‘मामा’ के घर पर आतिशबाजी और ढोल-नगाड़े
    सोमवार को जैसे-जैसे मतगणना के रुझान स्पष्ट हुए, शिवराज सिंह चौहान के आवास पर कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। पूरे परिसर में ढोल-नगाड़ों की थाप और आतिशबाजी के बीच “जय श्री राम” और “मोदी-मोदी” के नारे गूंजते रहे। जीत के जश्न को बंगाली टच देने के लिए खास तौर पर झालमुड़ी बनवाई गई, जिसे केंद्रीय मंत्री ने खुद कार्यकर्ताओं को बांटकर बधाई दी। शिवराज सिंह ने कहा कि यह ‘असाधारण और अद्भुत’ है, उन्‍होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व का परिणाम बताया।

    “श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा आज गदगद होगी”
    मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक होते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मुझे उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूरा विश्वास था कि बंगाल में इस बार महाविजय होगी। आज एक बड़ा संकल्प पूरा हुआ है और एक सपना साकार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा आज गदगद होगी।”

    उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि “जनता ने घटिया वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति को सिरे से नकार दिया है। घुसपैठ को बढ़ावा देने वाली ताकतों को करारा जवाब मिला है। अब हारने वाले ईवीएम (EVM) का बहाना ढूंढेंगे, लेकिन सच तो यह है कि जनता ने मोदी जी के पीछे खड़े होकर ऐतिहासिक जनादेश दिया है।”

    असम से तमिलनाडु तक ‘भगवा’ लहर
    शिवराज सिंह ने केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के रुझानों पर भी संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि असम में भाजपा का प्रदर्शन असाधारण है और पुडुचेरी में एक बार फिर एनडीए (NDA) की सरकार बनने जा रही है। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए गृह मंत्री अमित शाह की ‘अचूक रणनीति’ और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मेहनत को इस सफलता का श्रेय दिया।

    शिवराज ने कहा कि पूरा देश मानता है “मोदी है तो मुमकिन है।” उन्होंने बंगाल, असम और पुडुचेरी की जनता का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब हार सामने दिखती है, तो खिसियानी बिल्ली खंभा नोचने लगती है, विपक्ष भी अब हार के बहाने तलाशेगा।

  • जहां बहता था पानी वहां बस गई कॉलोनियां नहर पर कब्जे ने खड़ा किया बड़ा सवाल

    जहां बहता था पानी वहां बस गई कॉलोनियां नहर पर कब्जे ने खड़ा किया बड़ा सवाल


    विदिशा ।
    मध्य प्रदेश के विदिशा से सामने आया एक मामला इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक तंत्र दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है यहां दशकों पुरानी एक सिंचाई नहर का अस्तित्व लगभग खत्म हो चुका है और जहां कभी किसानों के खेतों तक पानी पहुंचता था वहां अब कंक्रीट की कॉलोनियां खड़ी नजर आ रही हैं इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल किसानों की चिंता बढ़ाई है बल्कि सियासत को भी गरमा दिया है

    दरअसल दौलतपुरा और मदनखेड़ा इलाके में वर्षों पहले उद्वहन सिंचाई योजना के तहत एक नहर बनाई गई थी इस योजना का उद्देश्य था कि हर खेत तक पानी पहुंचे और किसानों की फसल सुरक्षित रहे लेकिन समय के साथ इस नहर की जमीन पर धीरे धीरे कब्जे होते चले गए और अब स्थिति यह है कि नहर का नामोनिशान तक मिटता जा रहा है

    स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां कभी पानी बहता था वहां अब पक्के निर्माण हो चुके हैं और आलीशान कॉलोनियां बस गई हैं केवल एक जर्जर ढांचा बचा है जो इस बात की गवाही देता है कि यहां कभी सिंचाई व्यवस्था मौजूद थी बाकी जमीन पूरी तरह कब्जे में जा चुकी है

    यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है क्योंकि यह वही क्षेत्र है जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संबंध है कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला है कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने आरोप लगाया कि किसानों के हितों की बात करने वाले नेता के जिले में ही किसानों की नहर गायब हो गई और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी

    उन्होंने यह भी कहा कि भू माफियाओं ने नहर की जमीन पर कब्जा कर लिया है और भाजपा सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल कार्रवाई कर कब्जा हटाया जाए और किसानों को उनका अधिकार वापस दिलाया जाए

    वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि यह मामला 40 से 50 साल पुराना है और पुराने दस्तावेजों को खंगालने में समय लग रहा है अधिकारियों के अनुसार जैसे जैसे रिकॉर्ड मिल रहे हैं उन्हें राजस्व विभाग को सौंपा जा रहा है ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके

    इस बीच राजस्व विभाग ने भी सक्रियता दिखाते हुए अब तक 11 लोगों को नोटिस जारी किए हैं जिन पर नहर की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है तहसीलदार निधि लोधी ने बताया कि जांच जारी है और जल्द ही अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी

    यह मामला केवल जमीन के कब्जे तक सीमित नहीं है बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि सरकारी योजनाओं की निगरानी और संरक्षण कैसे किया जा रहा है यदि दशकों पुरानी एक महत्वपूर्ण सिंचाई व्यवस्था इस तरह खत्म हो सकती है तो अन्य योजनाओं की स्थिति क्या होगी

    अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस नहर को कब्जामुक्त कर पाएगा और किसानों को उनका हक वापस मिल पाएगा या यह मामला भी केवल सियासी बयानबाजी और खबरों तक ही सीमित रह जाएगा