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  • शिवराज सिंह चौहान पर टूटा दुखों का पहाड़, दूसरी मां काशीबाई ने दुनिया को कहा अलविदा, निधन की खबर से परिवार में शोक

    शिवराज सिंह चौहान पर टूटा दुखों का पहाड़, दूसरी मां काशीबाई ने दुनिया को कहा अलविदा, निधन की खबर से परिवार में शोक


    भोपाल । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार से दुखद खबर सामने आई है। उनकी दूसरी मां काशीबाई का शुक्रवार सुबह भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे करीब 76 वर्ष की थीं। पिछले एक सप्ताह से उनकी तबीयत गंभीर बनी हुई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराकर उपचार दिया जा रहा था। सांस संबंधी परेशानी बढ़ने के बाद उनकी स्थिति लगातार चिंताजनक होती गई जिसके चलते चिकित्सकों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा था। तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से परिवार में शोक का माहौल है।

    परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार काशीबाई का अंतिम संस्कार शुक्रवार दोपहर तीन बजे उनके पैतृक गांव जैत में किया जाएगा। जैत गांव सीहोर जिले में स्थित है और शिवराज सिंह चौहान का भी इस गांव से गहरा जुड़ाव रहा है। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय है। काशीबाई ने परिवार को संभालने और बच्चों के पालन पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके निधन से परिवार ने एक ऐसी महिला को खो दिया है जिन्होंने अपने जीवन में बच्चों की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी।

    काशीबाई के निधन की सूचना मिलते ही शिवराज सिंह चौहान ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम निरस्त कर दिए हैं। शुक्रवार को उन्हें रायसेन में आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होना था लेकिन परिवार में दुखद घटना के कारण अब वे इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे। उनके आगे के कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए हैं। इस कठिन घड़ी में उनका परिवार के साथ रहना स्वाभाविक है।

    शिवराज सिंह चौहान के जीवन में काशीबाई का विशेष स्थान रहा है। उनकी पहली मां सुंदरबाई का निधन बचपन में ही हो गया था। उस समय शिवराज सिंह चौहान और उनके भाई बहनों को मां के स्नेह से वंचित होना पड़ा था। इसके बाद उनके पिता प्रेम सिंह चौहान ने बच्चों की देखभाल और परिवार को संभालने के उद्देश्य से काशीबाई से दूसरी शादी की थी। काशीबाई ने परिवार में आने के बाद बच्चों के लालन पालन की जिम्मेदारी निभाई और उन्हें स्नेह दिया। इसी वजह से परिवार में उनका स्थान महत्वपूर्ण रहा।

    शिवराज सिंह चौहान के परिवार में उनके भाई नरेंद्र सिंह चौहान और रोहित सिंह चौहान तथा बहन शशि हैं। वहीं काशीबाई के बेटे वरुण सिंह चौहान पेशे से वकील हैं। काशीबाई भोपाल के साकेत नगर में रहती थीं। पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। सांस लेने में परेशानी बढ़ने पर उन्हें भोपाल एम्स में भर्ती कराया गया था जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा था।

    काशीबाई के निधन से परिवार को गहरा दुख पहुंचा है। एक सप्ताह तक अस्पताल में उपचार के बाद शुक्रवार सुबह उनके निधन की खबर सामने आई। अब उनके पैतृक गांव जैत में अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है। परिवार और परिचितों के लिए यह अपूरणीय क्षति है।

  • जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते


    कटनी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के अलग अलग अंदाज चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधते नजर आए तो कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व जन्म का जिक्र कर लोगों का ध्यान खींचा। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अपने कार्यकर्ता को खुद जूते पहनाए जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासी ग्रामीणों के साथ थिरकते दिखाई दिए। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में जनसंपर्क और नेताओं की सार्वजनिक छवि को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

    जीतू पटवारी ने मंच से दिखाया भ्रष्टाचार का कथित रेट कार्ड

    कटनी जिले के बरही में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक कार्यक्रम के दौरान सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर हमला बोला। हाल ही में एक अधिकारी का वीडियो सामने आया था जिसमें नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार को लेकर बातें कही गई थीं। इसी मुद्दे को उठाते हुए पटवारी मंच पर डस्टबिन फिनाइल की कैन और बल्ब लेकर पहुंचे। उन्होंने इन वस्तुओं की कीमतों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि एक बाल्टी की कीमत एक लाख रुपये फिनाइल की बोतल की कीमत 36 हजार रुपये और बल्ब की कीमत 11 हजार रुपये बताई जा रही है। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि इन कीमतों और आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है।

    पटवारी ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी पर रिश्वत लेने के मामले को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इसी दौरान बरही में उनकी बाइक रैली भी चर्चा में रही। पटवारी खुद बुलेट चलाते नजर आए लेकिन उनके सिर पर हेलमेट नहीं था। रैली में दूसरे कार्यकर्ताओं के भी बिना हेलमेट होने की बात सामने आई। इस घटना को लेकर यातायात नियमों के पालन पर सवाल उठे।

    दिग्विजय सिंह की यात्रा में राम भजन के साथ सियासी नारे

    पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दशहरे पर उज्जैन से राम नाम के साथ सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा लेकर निकले थे। यह यात्रा अयोध्या तक जाने वाली है। शाजापुर पहुंचने पर दिग्विजय सिंह एक राम भजन पर थिरकते नजर आए। लेकिन यात्रा के दौरान राजनीतिक नारे भी सुनाई दिए। रिपोर्ट के मुताबिक वहां भाजपा के खिलाफ चंदा चोरी और वोट चोरी से जुड़े नारे लगाए गए। दिग्विजय सिंह ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली के लिए लोगों को आमंत्रित भी किया। इससे यात्रा के गैरराजनीतिक होने के दावे और उसके दौरान दिखे राजनीतिक संदेशों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    दतिया के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने एक कार्यकर्ता को जूते पहनाने के कारण चर्चा में आए। बताया गया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ता के बूथ पर भाजपा को हार मिली थी। इसके बाद उसने प्रण लिया था कि जब तक वह अपने बूथ पर पार्टी को जीत नहीं दिलाएगा तब तक जूते चप्पल नहीं पहनेगा। हालिया उपचुनाव में उसके बूथ पर भाजपा को अधिक वोट मिलने के बाद जूते पहनने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नरोत्तम मिश्रा ने खुद कार्यकर्ता को जूते पहनाए और उसके लेस बांधे। यह दृश्य पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नेताओं के जुड़ाव के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

    सीएम मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के अलग अंदाज

    बड़वानी जिले के सेंधवा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मलखंब का प्रदर्शन देखा और प्रभावित होकर एक बच्चे को अपने कंधे पर बैठा लिया। एक कार्यक्रम में बारेली बोली का जिक्र होने पर उन्होंने इसे सीखने की बात कही और अपने पूर्व जन्म में बारेला होने का उल्लेख किया। उनके इस बयान की चर्चा जनसंपर्क के संदर्भ में हुई।

    वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने संसदीय क्षेत्र के नीलगढ़ गांव पहुंचे जहां विस्थापन से जुड़े मुद्दों के बीच वे आदिवासी ग्रामीणों के साथ बैठे और भोजन किया। वे ग्रामीणों के साथ नाचते थिरकते भी दिखाई दिए। उन्होंने वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा के लिए गांव छोड़ने के फैसले को त्याग और प्रकृति के प्रति प्रेम का उदाहरण बताया।

    प्रदेश की इन घटनाओं से साफ है कि राजनीतिक गतिविधियों में भाषणों के साथ नेताओं के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरें भी चर्चा का हिस्सा बन रही हैं। कहीं आरोपों के जरिए सरकार को घेरा जा रहा है तो कहीं भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश दिखाई दे रही है।

  • पटना में खरगे के बयान से MP की राजनीति गरमाई, शिवराज से मोहन यादव तक ने उठाए सवाल

    पटना में खरगे के बयान से MP की राजनीति गरमाई, शिवराज से मोहन यादव तक ने उठाए सवाल


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर पटना में की गई टिप्पणी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का घेराव करेंगे। भाजपा कार्यकर्ता रेडक्रॉस हॉस्पिटल के सामने स्थित शिवाजी नगर चौराहे पर एकत्रित होंगे और वहां से पैदल मार्च करते हुए कांग्रेस कार्यालय पहुंचेंगे। इस प्रदर्शन के जरिए भाजपा कांग्रेस नेतृत्व से बयान पर जवाब मांगने की तैयारी में है।
    विवाद की शुरुआत रविवार को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई। बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर बापू सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भाषण दे रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनकी नीतियों पर टिप्पणी कर रहे थे। तभी सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि मोदी नहीं जाने वाले हैं। इसके जवाब में खरगे ने कहा कि मोदी का बाप भी जाएगा। इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में हंगामा हो गया और मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।

    मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सवाल उठाया कि क्या खरगे ने सोनिया गांधी या राहुल गांधी के इशारे पर यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं है तो क्या कांग्रेस अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से इस्तीफा मांगेगी। शिवराज ने टिप्पणी को भारतीय संस्कृति और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब देने की मांग की।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी खरगे के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना राजनीति की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। खंडेलवाल ने सवाल किया कि खरगे इस तरह के बयान खुद देते हैं या इसके पीछे गांधी परिवार का कोई निर्देश होता है। उनके मुताबिक वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर अपनी भाषा और व्यवहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनीति में मर्यादा बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारों का मतभेद स्वाभाविक है लेकिन विरोध करते समय भाषा और व्यवहार में गरिमा बनी रहनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना भी जरूरी है।

    भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और मंत्री विश्वास सारंग ने भी खरगे की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं विश्वास सारंग ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल उचित नहीं है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

    पटना के कार्यक्रम में टिप्पणी के बाद हंगामे की खबर भी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक जिस व्यक्ति ने बीच में अपनी बात कही थी उसके साथ वहां मौजूद कुछ लोगों ने मारपीट की। बाद में उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसकी पूरी बात नहीं सुनी गई थी और वह कह रहा था कि विद्रोह के बिना मोदी नहीं जाएंगे। इस घटनाक्रम ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

    अब भोपाल में होने वाला भाजपा का प्रदर्शन इस राजनीतिक विवाद का अगला अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। कांग्रेस कार्यालय के घेराव के दौरान भाजपा नेता खरगे के बयान को लेकर विरोध दर्ज कराएंगे। दूसरी ओर इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल विवाद का केंद्र बयान की भाषा और राजनीतिक नेताओं से सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा बना हुआ है।

  • रावण दहन में शिवराज की मशक्कत से लेकर पटवा की जुबान फिसलने तक, दशहरे पर MP में नेताओं के बयान और वीडियो चर्चा में

    रावण दहन में शिवराज की मशक्कत से लेकर पटवा की जुबान फिसलने तक, दशहरे पर MP में नेताओं के बयान और वीडियो चर्चा में


    भोपाल । मध्यप्रदेश में दशहरे के मौके पर रावण दहन के साथ राजनीति और दिलचस्प घटनाओं की भी खूब चर्चा रही। कहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने बंगले पर रावण का पुतला जलाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी तो कहीं भाजपा विधायक की जुबान फिसलने से जनता ही रावण बन गई। धार जिले में रावण के पुतले से निकले रॉकेटों ने लोगों को दौड़ने पर मजबूर कर दिया। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा पर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने तीखा राजनीतिक तंज कस दिया। इन घटनाओं के वीडियो और बयान अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    शिवराज सिंह चौहान को रावण दहन में करनी पड़ी मशक्कत

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दशहरे पर अपने बंगले में रावण के पुतले का दहन किया। लेकिन पुतले को जलाने की कोशिश उम्मीद के मुताबिक आसान नहीं रही। कई प्रयासों के बाद पुतले में आग लगी। इसके बावजूद धुआं छंटने पर रावण का पुतला दोबारा दिखाई देने लगा और वह पूरी तरह नहीं जल पाया था। हालांकि बाद में पुतला पूरी तरह जलकर खाक हो गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर चुटकी लेने लगे। लोगों का कहना है कि रावण दहन का वीडियो तो बन गया लेकिन इसके लिए शिवराज सिंह को काफी मेहनत करनी पड़ी।

    भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा ने जनता को ही बता दिया रावण

    भोजपुर से भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा दशहरा कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान ऐसी बात कह गए जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज यहां रावण रूपी जो हमारे सारे लोग यहां पर आए हुए हैं। उनके इस बयान को जुबान फिसलने के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि वह कुछ और कहना चाहते थे लेकिन शब्दों के चयन में चूक हो गई। इसके बाद उनके बयान पर लोगों ने चुटकी ली। कुछ लोगों ने इसे मंच पर बोलते समय हुई सामान्य गलती माना जबकि कुछ ने नाराजगी भी जताई। फिलहाल इस बयान की चर्चा राजनीतिक हलकों में भी हो रही है।

    धार में रावण के पुतले से निकले रॉकेट तो भागने लगे लोग

    धार जिले के टांडा में रावण दहन के दौरान एक अलग ही नजारा देखने को मिला। बताया गया कि राम की भूमिका निभा रहे युवक ने रावण दहन के लिए जलता हुआ तीर चलाया तो पुतले में रखे पटाखे और रॉकेट फूटने लगे। रॉकेट इधर-उधर जाने लगे और कुछ लोगों की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इससे मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इस बार रावण ने भी पलटवार कर दिया। हालांकि ऐसी घटनाएं सार्वजनिक कार्यक्रमों में पटाखों के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत भी याद दिलाती हैं।

    दिग्विजय सिंह को धृतराष्ट्र और बेटे को बताया दुर्योधन

    कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज है। गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना धृतराष्ट्र से की और उनके बेटे को दुर्योधन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह अपने बेटे को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पदयात्रा कर रहे हैं। यह भाजपा विधायक का राजनीतिक आरोप है। यात्रा के उद्देश्य और इसके पीछे की मंशा को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन इस बयान ने मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर परिवारवाद और राजनीतिक विरासत की बहस को हवा दे दी है।

    सत्ताधारी दल के नेताओं की खींचतान में अफसर परेशान

    राज्य में सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के मुताबिक महाकौशल क्षेत्र के एक जिले में बच्चों की सेहत से जुड़े मुद्दे पर भाजपा विधायक प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। मामला कथित तौर पर सत्ताधारी दल के एक पूर्व सांसद के बेटे से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विधायक ने सरकार से शिकायत की है और अब इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि संबंधित जिले और मामले का विस्तृत विवरण सामने नहीं रखा गया है। ऐसे में पूरे प्रकरण पर निष्कर्ष निकालने से पहले प्रशासन की जांच और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।

    कुल मिलाकर दशहरे के दौरान मध्यप्रदेश में धार्मिक उत्सव के साथ राजनीतिक बयान और कई घटनाएं सुर्खियों में रहीं। शिवराज सिंह के रावण दहन से लेकर सुरेंद्र पटवा की जुबान फिसलने और दिग्विजय सिंह पर किए गए तंज तक अलग-अलग मुद्दों ने लोगों का ध्यान खींचा। वहीं प्रशासन और सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों के बीच कथित खींचतान ने शासन व्यवस्था में तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

  • जनादेश के आगे साबुन के बुलबुले की तरह फूटे सत्ता परिवर्तन के सपने, शिवराज ने विपक्ष को घेरा, कल खोलेंगे राज

    जनादेश के आगे साबुन के बुलबुले की तरह फूटे सत्ता परिवर्तन के सपने, शिवराज ने विपक्ष को घेरा, कल खोलेंगे राज


    भोपाल । केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता परिवर्तन यानी रिजीम चेंज की बहस के बीच कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने रिजीम चेंज गैंग का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता परिवर्तन के सपने देख रहे हैं और इसके लिए तरह-तरह के नैरेटिव गढ़ रहे हैं। शिवराज ने कहा कि जनता के जनादेश के सामने ऐसे सपने साबुन के बुलबुले की तरह फूट जाते हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर भारत में उनकी दाल क्यों नहीं गल रही। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि अगर विपक्ष को अपनी स्थिति समझ नहीं आती तो वे अगले दिन इसका जवाब देंगे।
    शिवराज सिंह चौहान की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब देश की राजनीति में रिजीम चेंज को लेकर बयानबाजी तेज है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा चुनाव के जरिए सरकार बदलने की बात कह चुके हैं। वहीं वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी सत्ता परिवर्तन की लड़ाई का उल्लेख किया था। इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर बहस जारी है। शिवराज ने अपनी पोस्ट में किसी नेता का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया लेकिन रिजीम चेंज गैंग कहकर विपक्षी खेमे पर निशाना साधा।
    केंद्रीय मंत्री ने अपने तंज में चुनावी नतीजों और छात्र संगठनों की जीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी की जीत का जिक्र किया। इसके साथ ही ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में एबीवीपी को मिली सफलता को भी अपने तर्क का हिस्सा बनाया। शिवराज का कहना था कि इन नतीजों को जनता के रुख के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने गुजरात के निकाय चुनावों और असम पश्चिम बंगाल तथा पुडुचेरी के उपचुनावों का भी उल्लेख किया।
    शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोस्ट में कहा कि गांव हो या शहर युवा हों या आम नागरिक जनता का मूड कुछ और है जबकि रिजीम चेंज गैंग की स्क्रिप्ट कुछ और चल रही है। उनके बयान का संकेत इस ओर था कि राजनीतिक विरोधियों की रणनीति और जनता के वास्तविक रुझान के बीच अंतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार चुनावी हार के बाद भी विपक्ष अपनी रणनीति पर आत्ममंथन क्यों नहीं कर रहा है।
    केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा कि उसे अपनी स्थिति का आकलन करना चाहिए और यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि जनता उसके संदेश को किस तरह स्वीकार कर रही है। उनके मुताबिक केवल सत्ता परिवर्तन की बात करने या राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने से जनसमर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में जनता का फैसला सबसे अहम होता है और चुनावी नतीजे उसी का संकेत देते हैं।
    अपनी पोस्ट के अंत में शिवराज ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि रिजीम चेंज गैंग आत्ममंथन के बाद भी बात नहीं समझ पाता तो वे अगले दिन बताएंगे कि उसकी दाल क्यों नहीं गल रही। उनके इस बयान ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि शिवराज सिंह चौहान अगले दिन अपने वादे के मुताबिक क्या नया तर्क रखते हैं और विपक्ष की ओर से इस टिप्पणी पर कैसी प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल उनका बयान सत्ता परिवर्तन की बहस के बीच भाजपा और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक जुबानी जंग का नया हिस्सा बन गया है।

  • आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन

    आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन


    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। गुरुवार देर शाम केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात की। बैठक में वन विभाग की कार्रवाई से प्रभावित आदिवासी परिवारों की स्थिति और उनकी समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घटनाक्रम के बाद प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
    मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में प्रभावित आदिवासी परिवारों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। शिवराज सिंह चौहान ने कोसमी गांव में हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। वह पहले भी इस मामले पर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना था कि मौके पर उन्होंने बच्चों को परेशान होते और महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से गुजरते देखा था। अब मुख्यमंत्री के सामने मामला रखने के बाद उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान की जरूरत पर जोर दिया।
    जानकारी के मुताबिक 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 परिवारों के मकान तोड़े गए थे। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने अपने नुकसान को लेकर सवाल उठाए और मुआवजे की मांग की। परिवारों का कहना है कि उन्हें जमीन के पट्टे दिए जाएं और मकानों के साथ फसलों को हुए नुकसान की भरपाई की जाए। उन्होंने कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग की है। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री के आश्वासन पर परिवारों की नजर बनी हुई है।
    बैठक के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कलेक्टर के. बालागुरु रात में कोनझीर पहुंचे और प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। परिवारों को बस के जरिए वापस उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी आदिवासी परिवार को परेशान नहीं किया जाए और जहां लोग स्थापित हैं वहां उनके साथ संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए। हालांकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और कार्रवाई की परिस्थितियों का स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा।
    कोसमी गांव की घटना अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें केवल आश्वासन ही नहीं बल्कि वास्तविक राहत भी मिले। उनके अनुसार मकान और फसलें प्रभावित होने से उनके सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हुई हैं। ऐसे में मुआवजे और जमीन के पट्टों से संबंधित मांगों पर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
    इधर कोसमी मामले को लेकर आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों ने भोपाल की ओर पैदल मार्च भी शुरू किया है। जानकारी के अनुसार ये परिवार शुक्रवार शाम तक राजधानी पहुंच सकते हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि मकान तोड़े जाने के मामले में न्याय मिले और हुए नुकसान की भरपाई की जाए। मुख्यमंत्री की ओर से जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रभावित परिवारों को किस तरह राहत मिलती है इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी से हलचल, राजेंद्र शुक्ल ने दी गोपनीय बातें लीक न करने की चेतावनी, जनार्दन मिश्रा के बयान पर भी तंज

    मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी से हलचल, राजेंद्र शुक्ल ने दी गोपनीय बातें लीक न करने की चेतावनी, जनार्दन मिश्रा के बयान पर भी तंज


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और सियासी घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक की बातें बाहर आने पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी है कि गोपनीय चर्चा सार्वजनिक करने वाले नेता को भविष्य में बैठक में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। दूसरी ओर सीहोर में आदिवासी परिवारों के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की आलोचना कर रहे विधायक कमलेश्वर डोडियार को एक व्यक्ति ने टोक दिया। वहीं रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का उद्योगपति इलॉन मस्क को लेकर दिया गया बयान भी चर्चा में है। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और अंदरूनी समीकरणों को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

    भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक में मंत्रियों द्वारा सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने की खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि बैठक में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने भी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते। जब रीवा में मीडिया ने उनसे बैठक की चर्चाओं को लेकर सवाल किए तो वे नाराज दिखाई दिए। शुक्ल ने साफ कहा कि कोर ग्रुप की बैठक में हुई बातें बाहर पहुंचाने वाला व्यक्ति भविष्य में उस बैठक में बैठने लायक नहीं रहेगा। उनके बयान के बाद पार्टी के भीतर गोपनीय जानकारी बाहर जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि किसने जानकारी साझा की है इस बारे में कोई नाम सामने नहीं आया है।

    इसी बीच सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के मामले को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। रतलाम जिले के सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। वहां उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका पर सवाल उठाए। विधायक ने कहा कि शिवराज मुख्यमंत्री रहे हैं और आदिवासियों को पट्टे देने का अधिकार उनके पास था लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। इसी दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें टोकते हुए कहा कि मामा उनके सुख-दुख के साथी हैं और इस समय आदिवासियों का साथ दे रहे हैं।

    इसके बाद विधायक के बयान का रुख बदल गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को बुरा आदमी नहीं कहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में मोहन यादव से हजार गुना अच्छे थे। इस घटनाक्रम को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद विरोध जारी है और प्रभावित लोग जमीन के अधिकारों तथा मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

    रीवा में भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान भी सुर्खियों में रहा। एक कार्यक्रम में उन्होंने दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल इलॉन मस्क को लेकर तीखी टिप्पणी की। सांसद ने कहा कि वे मस्क को दो घूंसे मारकर भगा देंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को कोई झुका नहीं सकता। सांसद ने यह भी कहा कि मस्क को भारत में अनुमति तभी मिलेगी जब वे प्रधानमंत्री की शर्तें मानेंगे। उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके बयान पर तंज कसा तो कुछ ने इसे सुर्खियां बटोरने वाला बयान बताया।

    इन राजनीतिक घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों में एक वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अधिकारी उनकी मौजूदा शक्तियां कम कराने की कोशिश कर रहे थे लेकिन हालिया तबादला सूची में उनकी जिम्मेदारियां बरकरार रखी गईं और उन्हें एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई। हालांकि इस घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में भाजपा की आंतरिक बैठकों की गोपनीयता से लेकर आदिवासी मुद्दे और नेताओं के तीखे बयानों तक कई विषय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इन बयानों और घटनाओं पर पार्टी तथा विपक्ष की प्रतिक्रिया किस तरह सामने आती है इस पर सबकी नजर रहेगी।

  • आदिवासियों के मकान तोड़ने पर घमासान, वन विभाग ने अतिक्रमण बताया, पीड़ित आज मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे पक्ष

    आदिवासियों के मकान तोड़ने पर घमासान, वन विभाग ने अतिक्रमण बताया, पीड़ित आज मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे पक्ष


    सीहोर 
    । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के आदिवासी गुरुवार को भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करने की तैयारी में हैं। वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखेंगे और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी दिखाएंगे। कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद पिछले तीन दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पीड़ित परिवारों से मिल चुके हैं। उन्होंने कार्रवाई को अत्याचार की पराकाष्ठा बताते हुए नाराजगी जताई थी।

    वन विभाग ने 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। इस दौरान आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और खेती के जरिए अपना जीवनयापन करते हैं। मकान टूटने से 12 परिवारों के सामने रहने और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। आंदोलन में शामिल रमेश बारेला के मुताबिक आदिवासी समाज की मांग है कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाए जाएं। प्रभावित परिवारों को जमीन के पट्टे दिए जाएं और उनके रहने भोजन तथा स्वास्थ्य की व्यवस्था की जाए। साथ ही फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा भी दिया जाए।

    आदिवासी समाज ने आरोप लगाया है कि खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों में जनजातीय किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। इससे उन परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है जो लंबे समय से कृषि और जंगल पर निर्भर हैं। समाज ने सीहोर जिले के कई गांवों के साथ विदिशा जिले के ग्यारसपुर मेहंदीपुर डगरवाड़ा बदनपुर शमशाबाद लटेरी और सिरोंज क्षेत्रों में भी जमीन से जुड़े विवादों और बेदखली की शिकायतें उठाई हैं। आदिवासी प्रतिनिधियों ने पुराने पट्टों और जमीन के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।

    आंदोलनकारियों का दावा है कि जून 2025 में खिवनी क्षेत्र में 50 से अधिक परिवारों के मकान तोड़े गए थे। यारनगर में 18 परिवारों के पट्टे अमान्य किए जाने और ग्यारसपुर में करीब 115 लोगों की फसलें नष्ट किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन शिकायतों की जांच और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर आदिवासी समाज मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करेगा। रमेश बारेला ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित पदयात्रा में शिवराज सिंह चौहान के शामिल होने की जानकारी उनके पास नहीं है और इसमें आदिवासी समाज के लोग ही हिस्सा लेंगे।

    दूसरी ओर वन विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित परिवारों ने वन भूमि पर अवैध कब्जा किया था। सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि सामान्य वन मंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2021 में इसके 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3 लाख 37 हजार 500 सागौन के पौधे लगाए गए थे। इनमें से 78 हजार 700 पौधे काटे जाने और 31.48 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

    जांच रिपोर्ट में गूगल अर्थ की टाइमलाइन तस्वीरों को भी आधार बनाया गया है। इसके मुताबिक वर्ष 2021 तक संबंधित क्षेत्र खाली दिखाई देता था जबकि 2022 से वहां झोपड़ियों और खेती के संकेत मिले। रिपोर्ट के अनुसार 11 अक्टूबर की कार्रवाई में नौ झोपड़ियां हटाई गईं और पूरी प्रक्रिया की ड्रोन वीडियोग्राफी कराई गई। वन विभाग का दावा है कि रिजर्व फॉरेस्ट की 31.48 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।

    इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मध्यप्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। अब मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात और सरकारी पक्ष की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रभावित परिवारों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल जमीन के अधिकारों और वन भूमि से जुड़े नियमों को लेकर विवाद जारी है।


  • शिवराज के बेटे कार्तिकेय को मिली बड़ी जिम्मेदारी, एमपी वॉलीबॉल संघ की कमान संभाली, गांव-गांव तक खेल पहुंचाने का लक्ष्य

    शिवराज के बेटे कार्तिकेय को मिली बड़ी जिम्मेदारी, एमपी वॉलीबॉल संघ की कमान संभाली, गांव-गांव तक खेल पहुंचाने का लक्ष्य


    भोपाल । मध्य प्रदेश में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने खेल प्रशासन के क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्हें मध्य प्रदेश वॉलीबॉल संघ का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है। रविवार को भोपाल में आयोजित चुनाव में प्रदेश के 33 जिला वॉलीबॉल संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्तिकेय को वर्ष 2026 से 2030 तक के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष चुना गया है। इस जिम्मेदारी के साथ अब प्रदेश में वॉलीबॉल के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उनसे कई उम्मीदें जुड़ गई हैं।
    अध्यक्ष चुने जाने के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान ने प्रदेश में वॉलीबॉल को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश वॉलीबॉल खेल नीति 2026 का प्रारूप जल्द तैयार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में इस खेल के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य नई प्रतिभाओं को सामने लाना और खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही खेल से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने और जिला संघों को आर्थिक सहायता देने की दिशा में भी काम करने की बात कही गई है।
    कार्तिकेय ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने के लिए संघ के पदाधिकारियों जिला संघों के प्रतिनिधियों और सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी ने जिस भरोसे के साथ उन्हें यह जिम्मेदारी दी है उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उनका लक्ष्य वॉलीबॉल को प्रदेश के गांवों और युवाओं तक पहुंचाना है ताकि अधिक से अधिक खिलाड़ी इस खेल से जुड़ सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    चुनाव प्रक्रिया एडवोकेट दिलीप मालवीय की देखरेख में संपन्न हुई। नई कार्यकारिणी में अनवर खान को वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना गया है। विधायक आशीष शर्मा और राम पांडे को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। सतीश जोशी महासचिव और विशाल शर्मा कोषाध्यक्ष चुने गए हैं। वहीं डीआर सिंह और राजेश शुक्ला संयुक्त सचिव बनाए गए हैं। कार्यकारिणी में आशीष सिंह भूपेन्द्र कांत राजेन्द्र चतुर्वेदी मेरिट खिलाड़ी श्वेता शर्मा और रीवा के कृष्णानंद को भी शामिल किया गया है।
    बैठक में विभिन्न आयु वर्गों की राज्य स्तरीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप आयोजित कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इससे प्रदेश के अलग-अलग जिलों के खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने और अपनी प्रतिभा साबित करने का मंच मिल सकेगा। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं नए खिलाड़ियों को अनुभव देने और बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की पहचान करने में उपयोगी साबित हो सकती हैं।
    नई कार्यकारिणी के सामने अब प्रदेश में वॉलीबॉल के विस्तार और जिला संघों को मजबूत करने की चुनौती होगी। खेल नीति का प्रारूप तैयार करना सुविधाओं में सुधार करना और खिलाड़ियों को प्रशिक्षण तथा प्रतियोगिताओं के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। कार्तिकेय सिंह चौहान ने गांव-गांव तक वॉलीबॉल पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। अब इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए संघ की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।

  • मां की भक्ति तभी सार्थक जब महिलाओं का हो सम्मान, शिवराज ने रील शेयर कर देशवासियों से कही बड़ी बात

    मां की भक्ति तभी सार्थक जब महिलाओं का हो सम्मान, शिवराज ने रील शेयर कर देशवासियों से कही बड़ी बात


    भोपाल। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए महिलाओं के सम्मान का संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक रील साझा कर लोगों से अपील की कि मां दुर्गा की पूजा अर्चना और व्रत उपवास के साथ घर परिवार और समाज में बेटियों बहनों तथा माताओं का सम्मान करना भी अपनी जिम्मेदारी समझें। शिवराज ने कहा कि यदि हम अपनी बेटी बहन और मां का सम्मान नहीं करते हैं तो मां की उपासना का कोई लाभ नहीं है। उनका यह संदेश नवरात्रि के धार्मिक महत्व के साथ महिलाओं के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है।
    शिवराज सिंह चौहान ने अपने संदेश में कहा कि नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की आराधना को समर्पित है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु मां की भक्ति में लीन रहते हैं और व्रत उपवास रखकर परिवार की सुख समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हमें अपनी अंतरात्मा और हृदय से यह भी विचार करना चाहिए कि हम अपने आसपास की महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। पूजा पाठ के वास्तविक अर्थ को जीवन में उतारना और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखना भी जरूरी है।
    केंद्रीय मंत्री ने अपने संदेश में बहनों भाइयों और बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी लोग नवरात्रि के दौरान व्रत रखें उपवास करें और मां की उपासना करें लेकिन इसके साथ ही अपनी बेटियों बहनों और माताओं को पूरा सम्मान भी दें। उन्होंने कहा कि बेटियां देवियों के समान हैं और बहनों तथा माताओं में भी देवी का स्वरूप देखा जाता है। ऐसे में हर व्यक्ति को अपने जीवन में महिलाओं के सम्मान को सर्वोपरि रखने का संकल्प लेना चाहिए।
    शिवराज सिंह चौहान की अपील का मुख्य संदेश यही रहा कि देवी आराधना केवल मंदिरों में पूजा करने या धार्मिक परंपराओं का पालन करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसका प्रभाव हमारे व्यवहार और विचारों में भी दिखाई देना चाहिए। परिवार में बेटियों को सम्मान देना उनकी बात सुनना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसी तरह बहनों और माताओं के प्रति आदर का भाव रखना भी आवश्यक है। महिलाओं की गरिमा और उनके अधिकारों का सम्मान करने से ही समाज में सकारात्मक वातावरण बन सकता है।
    नवरात्रि के दौरान देशभर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं और श्रद्धालु भक्ति भाव से माता के दर्शन करते हैं। ऐसे अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मूल्यों को जोड़ते हुए लोगों से महिलाओं के सम्मान का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने अपने संदेश के अंत में मां शैलपुत्री से सभी पर कृपा और आशीर्वाद बनाए रखने की कामना की तथा देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए जय माता दी कहा।
    उनका संदेश इस बात पर जोर देता है कि त्योहारों की सार्थकता तभी बढ़ती है जब उनसे मिलने वाली सीख को रोजमर्रा के जीवन में अपनाया जाए। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ बेटियों बहनों और माताओं को सम्मान देना तथा उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।