Tag: Shivraj Singh Chouhan

  • राशन के पैसे के इस्तेमाल पर डिजिटल निगरानी, CBDC आधारित DBT से बदलेगी खाद्य सब्सिडी की व्यवस्था

    राशन के पैसे के इस्तेमाल पर डिजिटल निगरानी, CBDC आधारित DBT से बदलेगी खाद्य सब्सिडी की व्यवस्था


    चंडीगढ़। सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS में खाद्य सब्सिडी की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी आधारित डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर व्यवस्था का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने की। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभणिया भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं।

    इस नई व्यवस्था को खाद्य सब्सिडी के डिजिटल वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है। सरकारी योजना के तहत चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली ऐसे पहले केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां पात्र लाभार्थियों तक खाद्य सब्सिडी प्रोग्रामेबल CBDC यानी डिजिटल रुपये के रूप में पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की जा रही है। इसका मकसद सब्सिडी के वितरण को पारदर्शी और ट्रेसेबल बनाने के साथ यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता निर्धारित उद्देश्य के लिए ही इस्तेमाल हो।

    CBDC आधारित DBT की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रोग्रामेबल होना है। सामान्य बैंक खाते में मिलने वाली नकद राशि का इस्तेमाल लाभार्थी अपनी जरूरत के मुताबिक कर सकता है लेकिन इस व्यवस्था में डिजिटल लाभ को एक निर्धारित उद्देश्य से जोड़ा जा सकता है। खाद्य सब्सिडी के मामले में राशि का इस्तेमाल राशन और जरूरी खाद्य वस्तुओं की खरीद के लिए किया जा सकेगा। इसके लिए अधिकृत या सूचीबद्ध दुकानदारों के माध्यम से डिजिटल भुगतान की व्यवस्था होगी।

    इस व्यवस्था से लाभार्थियों को खाद्य वस्तुओं के चयन में भी अधिक विकल्प मिलने की बात कही गई है। गेहूं और चावल के अलावा दाल या अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की खरीद का विकल्प भी उपलब्ध कराया जा सकता है। तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि सब्सिडी की राशि को किसी दूसरे काम में डायवर्ट न किया जा सके। शिवराज सिंह चौहान ने इस पहल को तकनीक और जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण बताया और इसे विकसित करने वाली विभागीय टीम की सराहना की।

    चंडीगढ़ में शुरू किया गया मॉडल केवल स्थानीय प्रयोग तक सीमित नहीं माना जा रहा है। सरकार इसे भविष्य में अन्य क्षेत्रों में लागू किए जाने वाले मॉडल के रूप में देख रही है। इससे खाद्य सब्सिडी के वितरण में होने वाले लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और पूरी प्रक्रिया को अधिक ट्रेसेबल बनाया जा सकेगा। इससे सरकारी सहायता के सही लाभार्थी तक पहुंचने और उसके निर्धारित उद्देश्य में इस्तेमाल होने की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और गरीबों के हितों को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि कृषि नीति और खाद्य सुरक्षा से जुड़े फैसलों में किसान हित और जनहित सर्वोच्च रहेंगे। उन्होंने देश में गेहूं और धान के पर्याप्त भंडार का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करने में सक्षम है और जरूरत पड़ने पर खाद्यान्न का निर्यात भी कर सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को भी गरीब परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा बताया। उनका कहना था कि खाद्य सुरक्षा से परिवारों के खर्च का बोझ कम होता है और बची हुई राशि बच्चों की शिक्षा तथा दूसरी जरूरी जरूरतों पर खर्च की जा सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ बिना अनावश्यक बाधा के पहुंचे।

    शिवराज सिंह चौहान ने तकनीक आधारित इस पहल को सरकार की उस सोच से जोड़ा जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों और फाइलों तक सीमित न रहकर सीधे लोगों की जिंदगी में दिखाई देना चाहिए। CBDC आधारित DBT इसी दिशा में एक नया प्रयोग है जिसमें डिजिटल रुपये के जरिए खाद्य सब्सिडी को अधिक उद्देश्यपूर्ण और पारदर्शी तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

  • एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित

    एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिली। राज्य सरकार ने सदन में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 पेश कर दिया, जबकि विपक्ष ने उज्जैन जमीन खरीद मामले को लेकर जोरदार हंगामा किया। लगातार शोर-शराबे के चलते विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि UCC विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

    सत्र की शुरुआत से पहले ही कांग्रेस ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विधानसभा पहुंचे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के बजाय दूसरे मुद्दों में उलझी हुई है।

    सदन के भीतर भी विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उमंग सिंघार ने बरगी क्रूज हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और कथित रूप से अव्यवस्था से परेशान नीट परीक्षार्थियों का मुद्दा उठाते हुए विधानसभा सचिवालय पर श्रद्धांजलि सूची में नाम शामिल नहीं करने का सवाल खड़ा किया। इसके बाद उज्जैन में मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े मामले पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव रखा, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस विधायकों ने तीखा विरोध किया और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ने पर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    सरकार ने इस दौरान केवल UCC विधेयक ही नहीं, बल्कि एक साथ कई महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के पटल पर रखे। इनमें मध्य प्रदेश निरसन विधेयक, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, राजमार्ग संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, श्रम और उद्योग से जुड़े कई नए विधेयक शामिल हैं। कांग्रेस ने एक साथ इतने विधेयक पेश किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इन्हें पहले कार्यसूची में शामिल नहीं किया गया था। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी थी और सभी विधायकों को विधेयकों का अध्ययन करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

    इसी बीच ओबीसी महासभा ने भी विधानसभा के बाहर 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और 13 प्रतिशत पदों को होल्ड मुक्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि वर्षों से आंदोलन करने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    विधानसभा के पहले दिन की कार्यवाही ने साफ संकेत दे दिए हैं कि मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। एक तरफ सरकार समान नागरिक संहिता समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष किसानों, आरक्षण, उज्जैन जमीन विवाद और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। अब सबकी निगाहें UCC विधेयक पर होने वाली चर्चा और उज्जैन जमीन मामले में सरकार के अगले रुख पर टिकी हैं।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज

    मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज लोगों की नजरों में रहा। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब दक्षिण भारत तक पहुंचता दिखाई दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।

    सिवनी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह पूरे समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आसपास सक्रिय दिखाई दिए। कार्यक्रम में विधायक कभी मुख्यमंत्री के पीछे तो कभी उनके आगे चलते नजर आए। मंच पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री अपना संबोधन समाप्त कर आगे बढ़ गए। यह दृश्य इसलिए भी खास माना गया क्योंकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले यही विधायक मुख्यमंत्री की नीतियों के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए थे। विरोध के बाद उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण मान रहे हैं।

    दूसरी ओर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के विवाद के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज भी चर्चा में रहा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया। मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक रद्द होने के सवाल पर उन्होंने जिम्मेदारी बैठक तय करने वालों पर डाल दी। मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिए लेकिन पूरे समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे संयमित रणनीति और विवादों से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी लोगों के बीच पहचान बना रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही लोग उन्हें देखने पहुंचे भीड़ से मामा मामा के नारे गूंजने लगे। लोगों के उत्साह को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान भी सीधे उनके बीच पहुंचे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। उनका सहज और आत्मीय व्यवहार एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा। भाजपा नेताओं का मानना है कि शिवराज की यही जनसंपर्क शैली उन्हें देशभर में अलग पहचान दिला रही है।

    इसी बीच प्रदेश की नौकरशाही में भी एक रोचक चर्चा सामने आई। राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को कुछ दिनों तक आईपीएस बनने की बधाइयां मिलती रहीं लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल ही नहीं था। इसके बाद यह मामला भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

    प्रदेश की राजनीति में लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज होने वाली हैं। नेताओं की सक्रियता बदलते व्यवहार और नए राजनीतिक संदेश अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अहम मायने रखने लगे हैं।

  • सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा

    सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा


    सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर और नीमच जिलों में रविवार को जनप्रतिनिधियों को जनता के तीखे विरोध और सवालों का सामना करना पड़ा। एक ओर सीहोर में किसानों और कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan का काफिला रोककर अपनी समस्याएं सामने रखीं, तो दूसरी ओर नीमच में भाजपा विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़ना पड़ा।

    सीहोर में इछावर के आजाद मैदान की ओर जा रहे शिवराज सिंह चौहान का काफिला अचानक उस समय रुक गया जब कांग्रेस नेताओं और किसानों के एक समूह ने रास्ते में उन्हें घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे राजनीतिक रूप से भले ही कांग्रेस से जुड़े हों, लेकिन जनप्रतिनिधि के रूप में शिवराज सभी के प्रतिनिधि हैं, इसलिए वे अपनी समस्याएं उनके सामने रखना चाहते हैं।

    इस दौरान किसानों ने बताया कि पिछले कई दिनों से वे खाद और कृषि संबंधी कार्यों के लिए परेशान हैं। डिजिटल पोर्टल के सर्वर डाउन होने के कारण किसानों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, जिससे उनकी समस्याएं बढ़ रही हैं। किसानों ने इस संबंध में केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा।

    किसानों की बात सुनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा और सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे जनता के प्रतिनिधि हैं और हर नागरिक की समस्या का समाधान करना उनकी जिम्मेदारी है।

    बाद में जनकल्याण शिविर में पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी जनता के कामों में बाधा डाल रहे हैं और पात्र लोगों को योजनाओं से बाहर किया जा रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सभी आवेदनों की निष्पक्ष जांच हो और किसी गरीब का हक न छीना जाए।

    इसी बीच नीमच जिले के जावद क्षेत्र में स्थिति अलग रही, जहां विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को जनता के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। वे बांगरेड गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए।

    ग्रामीणों का कहना था कि अस्पताल तो बन रहा है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। जब विधायक ने जवाब देने की कोशिश की, तो भीड़ और अधिक आक्रोशित हो गई और ‘विधायक वापस जाओ’ के नारे लगाने लगी। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों के बीच हस्तक्षेप के बाद विधायक को कार्यक्रम बीच में छोड़कर जाना पड़ा। यह घटनाएं दर्शाती हैं कि जनता अब अपने मुद्दों को लेकर अधिक मुखर हो रही है और जनप्रतिनिधियों से सीधे जवाब की अपेक्षा रखती है।

  • MP के 81 लाख किसानों को मिलेगी 1,634 करोड़ की सौगात: पीएम किसान की 23वीं किस्त कल जारी, शिवराज बोले- खरीफ से पहले बड़ी राहत

    MP के 81 लाख किसानों को मिलेगी 1,634 करोड़ की सौगात: पीएम किसान की 23वीं किस्त कल जारी, शिवराज बोले- खरीफ से पहले बड़ी राहत


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त शुक्रवार, 20 जून को किसानों के खातों में पहुंच जाएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से देशभर के किसानों के लिए 23वीं किस्त जारी करेंगे। इसके तहत मध्यप्रदेश के 81.67 लाख किसानों के खातों में 1,634 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले मिलने वाली यह आर्थिक सहायता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे बीज, खाद और अन्य कृषि कार्यों के लिए किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से अब तक देशभर के किसानों को 22 किस्तों में लगभग 4.28 लाख करोड़ रुपए की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है।

    केंद्रीय मंत्री के अनुसार 23वीं किस्त के तहत देश के करीब 9 करोड़ किसानों के खातों में 18,800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि हस्तांतरित की जाएगी। इस अवसर को खास बनाने के लिए पूरे देश में “पीएम किसान उत्सव दिवस” मनाया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और पंचायत स्तर तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अनुमान है कि लगभग 4 करोड़ किसान विभिन्न स्थानों से प्रधानमंत्री का संबोधन सुनेंगे और कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

    पश्चिम बंगाल के किसानों को लेकर भी शिवराज सिंह चौहान ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले राज्य के किसानों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था, लेकिन अब वहां के 44.42 लाख किसानों को भी पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिलेगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

    कृषि मंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दलहन खरीदी को लेकर भी संकेत दिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम-आशा योजना के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और गुजरात को मूंग, उड़द और मसूर की खरीदी एमएसपी पर करने की अनुमति दे दी है। मध्यप्रदेश के मामले में राज्य सरकार के साथ चर्चा जारी है और जल्द ही इस संबंध में फैसला लिया जाएगा।

    इस दौरान मानसून और अल नीनो के संभावित प्रभाव पर भी चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मध्यप्रदेश के 16 जिलों में अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए विशेष कंटीजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है। कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने, वैकल्पिक खेती के विकल्प उपलब्ध कराने और बेहतर बीज उपलब्ध कराने की रणनीति पर काम चल रहा है।

    उन्होंने कहा कि यदि सामान्य से कम बारिश होती है या वर्षा में लंबा अंतराल आता है, तो किसानों को नुकसान से बचाने के लिए जिला स्तर पर विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी। साथ ही पराली प्रबंधन को लेकर भी राज्यों को पहले से आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    राजनीतिक सवालों पर भी शिवराज सिंह चौहान ने अपनी शैली में जवाब दिया। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के सत्याग्रह से जुड़े सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।” उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

    कुल मिलाकर, पीएम किसान की 23वीं किस्त किसानों के लिए आर्थिक राहत लेकर आ रही है, वहीं सरकार खरीफ सीजन, मानसून और संभावित मौसमीय चुनौतियों से निपटने के लिए भी व्यापक तैयारी में जुटी हुई है।

  • इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति

    इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों का महामंथन आज, खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूल खेती पर बनेगी साझा रणनीति


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय कृषि कूटनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। 9 से 13 जून तक आयोजित BRICS कृषि सम्मेलन के अंतिम दिन शनिवार को सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों की अहम बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा।

    सम्मेलन के समापन दिवस से पहले शहर के मेघदूत उपवन में विकसित विशेष “ब्रिक्स वाटिका” में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों और अतिथियों ने फलदार पौधों का रोपण किया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री Bhagirath Choudhary, मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री Tulsi Silawat, इंदौर के महापौर Pushyamitra Bhargav तथा विधायक Ramesh Mendola सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

    ब्रिक्स वाटिका को अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है। यहां कुल 51 फलदार पौधे लगाए जाने की योजना बनाई गई है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह वाटिका आने वाले वर्षों में BRICS देशों की साझेदारी और हरित विकास के संकल्प का प्रतीक बनेगी। इससे पहले इंदौर में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान ग्लोबल गार्डन और यूरेशियन सम्मेलन के दौरान यूरेशिया गार्डन भी विकसित किए गए थे।

    मेघदूत उपवन को BRICS सम्मेलन के अनुरूप विशेष रूप से सजाया गया है। परिसर में “BRICS INDIA” थीम आधारित आकर्षक आइलैंड, गुलाब उद्यान, संगीतमय फाउंटेन, कमल थीम आधारित सजावट और आधुनिक लैंडस्केपिंग तैयार की गई है। साथ ही BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय ध्वज भी लगाए गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक विविधता की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

    सम्मेलन के अंतिम दिन होने वाली कृषि मंत्रियों की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि कृषि क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करेंगे। विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा कृषि व्यापार को बढ़ावा देने, सदस्य देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने और कृषि उत्पादकता सुधारने पर भी चर्चा होगी।

    बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और लचीला बनाना रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं के बीच कृषि क्षेत्र को नई तकनीकों और वैज्ञानिक नवाचारों की आवश्यकता है। इसी दिशा में BRICS देश साझा अनुसंधान, तकनीकी साझेदारी और नवाचार आधारित कृषि मॉडल पर विचार करेंगे।

    शनिवार को सुबह 10 बजे से कृषि मंत्रियों की बैठक शुरू होगी। इसके बाद विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों का दौर चलेगा। सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों की सहमति से एक साझा दस्तावेज तैयार किया जाएगा, जिसमें कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक खाद्य संकट, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों के बीच इंदौर में आयोजित यह BRICS सम्मेलन भविष्य की कृषि नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।

  • इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

    इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। कल यानी 9 जून से यहां ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों का अहम सम्मेलन शुरू होगा, जिसमें भारत सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में यह महत्वपूर्ण बैठक इंदौर में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज यह समूह 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ वैश्विक स्तर पर बेहद प्रभावशाली बन चुका है।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों से जुड़ा है, जिससे यह मंच वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

    भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। 2016 में भारत ने ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच जैसी बड़ी पहल शुरू की थी, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देना था।

    इस बार इंदौर सम्मेलन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    सम्मेलन में मुख्य रूप से चार प्रमुख विषयों पर फोकस किया जाएगा-खाद्य सुरक्षा एवं पोषण, कृषि व्यापार और सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, तथा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी।

    मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति का केंद्र हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। उनके अनुसार, किसानों की आय बढ़ाना, कृषि ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और कृषि अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य है।

    कार्यक्रम के दौरान 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी, जबकि 12 से 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी। इसी दौरान “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर विशेष चर्चा भी होगी।

    पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन में “ब्रिक्स वाटिका” का निर्माण और सामूहिक वृक्षारोपण भी किया जाएगा। साथ ही विदेशी प्रतिनिधियों को इंदौर के प्रसिद्ध स्थलों जैसे राजवाड़ा, छप्पन दुकान और मांडू का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

    सरकार का मानना है कि इंदौर में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक कृषि सहयोग को नई दिशा देगा और छोटे किसानों के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित करेगा।

  • खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

    खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी


    खंडवा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी विकास सौगात दी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत खंडवा जिले की चार महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 13.74 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा, जिसके तहत 14.44 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

    इस स्वीकृति के बाद लंबे समय से लंबित ग्रामीण इलाकों की सड़क सुविधा से जुड़ी मांगों को राहत मिलने की उम्मीद है। नई सड़कों के बनने से न सिर्फ गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और आवागमन व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

    ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार
    इन सड़कों के निर्माण से किसानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी, वहीं विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों के लिए भी आवागमन सुगम हो जाएगा। बरसात के मौसम में जिन इलाकों में संपर्क टूट जाता था, वहां अब स्थायी सड़क सुविधा से राहत मिलेगी। केंद्र सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है, ताकि विकास का लाभ सीधे गांवों तक पहुंच सके।

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी मंजूरी
    इन परियोजनाओं को केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि स्वीकृति पत्र उन्हें सौंपा गया है और यह निर्णय क्षेत्र की वर्षों पुरानी जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने का काम तेजी से किया जा रहा है और खंडवा जिले को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

    कौन-कौन से मार्ग बनेंगे
    स्वीकृत परियोजनाओं में कुल चार सड़क मार्ग शामिल हैं:
    बरमलाय से कुकडाल मार्ग – 7.64 किमी, लागत 7.18 करोड़ रुपये
    बरमलाय से सुकलतालाई-4 मार्ग – 3.20 किमी, लागत 3.13 करोड़ रुपये
    लहाड़पुर से पारवाड़ी मार्ग – 2.24 किमी, लागत 2.06 करोड़ रुपये
    मालूद रोड से खेड़ी रैयत मार्ग – 1.36 किमी, लागत 1.35 करोड़ रुपये
    इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने पर ग्रामीण क्षेत्रों की आवाजाही व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

    ग्रामीणों में खुशी का माहौल
    सड़क निर्माण की स्वीकृति के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से खराब और कच्चे रास्तों के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब स्थायी सड़क बनने से उनकी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।

  • प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ मर्डर केस अब पहुंचा राजनीति तक, आरोपी की तस्वीरों पर बवाल

    प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ मर्डर केस अब पहुंचा राजनीति तक, आरोपी की तस्वीरों पर बवाल


    नरसिंहपुर —मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के चर्चित साईंखेड़ा हत्याकांड में अब राजनीतिक एंगल भी जुड़ गया है। हत्या के आरोपी अरुण पटेल की भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। तस्वीरों के सामने आने के बाद क्षेत्र में आरोपी की राजनीतिक पहुंच और रसूख को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
    वायरल  तस्वीरों में आरोपी अरुण पटेल, Darshan Singh Choudhary, Narendra Shivaji Patel और पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan के साथ नजर आ रहा है। कुछ तस्वीरों में वह नेताओं को माला और गुलदस्ता भेंट करता दिखाई दे रहा है, जबकि एक फोटो सांसद के केबिन की बताई जा रही है। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, अब तक किसी भी भाजपा नेता की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
     प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह
    पूरा मामला साईंखेड़ा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां राजस्थान निवासी पप्पू उर्फ वीर जाट की हत्या कर शव को बोरी में पैक कर रायसेन जिले की सीमा में नागन मोड़ सिरवारा ब्रिज के नीचे फेंक दिया गया था। बाड़ी पुलिस ने शव बरामद कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मौके से मिले थैले, नोटबुक और हस्ताक्षरों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी रीना किरार का पहले अरुण पटेल से प्रेम संबंध था और अरुण ही उसका खर्च उठाता था। इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए रीना की दोस्ती राजस्थान निवासी वीर जाट से हो गई और दोनों करीब आ गए। पुलिस के अनुसार अरुण पटेल को यह रिश्ता पसंद नहीं था। इसी रंजिश के चलते 29 अप्रैल को रीना किरार, अरुण पटेल और उनके साथियों ने मिलकर वीर जाट की हत्या कर दी।
    चार आरोपी गिरफ्तार, हथियार और वाहन जब्त
    पुलिस ने मामले में रीना किरार, अरुण पटेल, हरनाम सिंह और कन्हैया उर्फ अजय को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल बेसबॉल डंडा और एक चारपहिया वाहन भी बरामद किया गया है। इसके अलावा साईंखेड़ा स्थित आरोपी के घर को भी सील कर दिया गया है।
    सोशल मीडिया पर गरमाया मामला
    गिरफ्तारी के बाद जैसे ही आरोपी की नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर मामला तेजी से वायरल हो गया। लोग आरोपी की राजनीतिक पहचान और प्रभाव को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। इस मामले में कांग्रेस नेता और तेंदूखेड़ा के पूर्व विधायक Sanjay Sharma ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और सरकार को संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

  • PM Fasal Bima Yojana: अब जंगली जानवरों से बर्बाद फसल पर भी मिलेगा मुआवजा, किसानों को बड़ी राहत

    PM Fasal Bima Yojana: अब जंगली जानवरों से बर्बाद फसल पर भी मिलेगा मुआवजा, किसानों को बड़ी राहत


    नई दिल्ली। खेती-किसानी में मौसम के साथ-साथ जंगली जानवरों का खतरा भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है। कई बार खेतों में घुसकर नीलगाय, जंगली सूअर और दूसरे वन्य जीव पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अब किसानों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव करते हुए जंगली जानवरों और जलभराव से खराब होने वाली फसलों को भी बीमा कवर में शामिल करने का फैसला किया है।

    केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जानकारी दी कि खरीफ 2026 सीजन से यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत अगर किसी किसान की फसल जंगली जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचाने या भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से खराब होती है, तो उसे भी बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाएगा। लंबे समय से किसान इस तरह के नुकसान को योजना में शामिल करने की मांग कर रहे थे।

    सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था का फायदा देशभर के हजारों किसानों को मिलेगा। अब तक फसल बीमा योजना में प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से होने वाले नुकसान को ही प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब खेती को प्रभावित करने वाले दूसरे बड़े जोखिमों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

    कैसे मिलेगा बीमा क्लेम?
    नई गाइडलाइन के अनुसार, फसल खराब होने की स्थिति में किसान को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देनी होगी। किसान मोबाइल ऐप या संबंधित पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ खेत की जियो-टैग फोटो भी अपलोड करनी होगी, ताकि नुकसान की पुष्टि की जा सके। इसके बाद अधिकारी मौके पर जांच करेंगे और रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा जारी किया जाएगा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किन जंगली जानवरों से हुए नुकसान को योजना में शामिल किया जाएगा और किन जिलों में यह सुविधा लागू होगी, इसका फैसला संबंधित राज्य सरकारें करेंगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, जो हर साल जंगली जानवरों या जलभराव के कारण भारी नुकसान झेलते हैं। सरकार का कहना है कि खेती को सुरक्षित और किसानों की आय को मजबूत बनाने के लिए योजनाओं में लगातार सुधार किए जा रहे हैं और यह कदम उसी दिशा में अहम माना जा रहा है।