Tag: Shivraj Singh Chouhan

  • शिवराज सिंह चौहान के घर आया नन्हा मेहमान…. रिद्धि- कुणाल बने माता-पिता

    शिवराज सिंह चौहान के घर आया नन्हा मेहमान…. रिद्धि- कुणाल बने माता-पिता


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) के घर एक बार फिर से किलकारी गूंजी है। उनके बेटे कुणाल (Son Kunal) की पत्नी रिद्धि (Wife Riddhi) ने बेटे को जन्म (Giving Birth Son) दिया है। इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए शिवराज सिंह ने अपनी खुशू जाहिर की है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, आज हमारे जीवन में एक बार फिर से सौभाग्य का सूर्योदय हुआ है।


    क्या रखा है नाम

    बहू रिद्धि के बच्चे के जन्म के बाद शिवराज सिंह ने बच्चे के नाम का भी खुलासा किया है। शिवराज सिंह चौहान ने पोस्ट करते हुए लिखा, “बेटे के रूप में ‘अहान’ हमारे घर अपार खुशियां लेकर आया है। कुणाल और रिद्धि माता-पिता बने है, मुझे और साधना को फिर से दादा-दादी बनने का सौभाग्य मिला है। कार्तिकेय-अमानत बड़े पापा-बड़ी मम्मी बन गए हैं और हमारी लाड़ली इला का भाई हमारे घर खुशियां लेकर आया है। बेटे ‘अहान’ की नन्ही-सी किलकारी ने पूरे घर को आनंद और प्रेम से भर दिया है। यह हमारे लिए ईश्वर का अनमोल आशीष है। संदीप जैन जी और स्वाति जैन जी को भी नाना-नानी बनने की बहुत-बहुत बधाई।


    2025 में हुई थी शादी

    शिवराज सिंह चौहान के छोटे बेटे कुणाल सिंह चौहान की शादी 14 फरवरी 2015 को भोपाल में हुई थी। भोपाल के वाना ग्रीन होटल में हुई शादी में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता शामिल हुए थे। दोनों की सगाई 23 मई, 2024 को हुई थी। अब रिद्धि ने बेटे को जन्म दिया है। इस दौरान पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।


    इससे पहले भी गूंजी है किलकारी

    छोटे बेटे कुणाल की पत्नी से पहले बड़े बेटे कार्तिकेय की पत्नी अमानत बंसल ने बेटी को जन्म दिया था। 21 जनवरी, 2026 को दिल्ली के अस्पताल में जन्म होने के बाद बेटी का नाम इला रखा गया। पोती इला के जन्म के बाद भई शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए खुशी जताई थी। अब एक बार फिर से चौहान परिवार में किलकारी गूंजी है।

  • बेटियों की सुरक्षा पर शिवराज का बड़ा बयान, पुरुषों और माता-पिता से आत्ममंथन की अपील, बोले ये नारा कभी सफल न हो

    बेटियों की सुरक्षा पर शिवराज का बड़ा बयान, पुरुषों और माता-पिता से आत्ममंथन की अपील, बोले ये नारा कभी सफल न हो


    भोपाल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बेटियों की सुरक्षा और समाज में महिलाओं के प्रति बदलते नजरिए को लेकर गंभीर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर चर्चित हो रहे एक कचौड़ी दो समोसा इन मर्दों का क्या भरोसा वाले नारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि बेटियों को इस तरह की बात लिखने और कहने की जरूरत महसूस हुई। शिवराज ने कहा कि अगर बेटियां पुरुषों पर भरोसा नहीं कर पाएंगी तो समाज और देश आगे कैसे बढ़ेगा। उन्होंने पुरुषों बेटों और उनके माता पिता से इस विषय पर आत्ममंथन करने की अपील की।
    भोपाल में नवगति एजुकेशन स्कॉलरशिप कार्यक्रम में पहुंचे शिवराज ने कहा कि बेटियों का सम्मान और उनकी सुरक्षा सिर्फ उनके परिवार की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए पूरे समाज को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बेटियों के साथ गलत व्यवहार करने वाले कई बार कोई अनजान व्यक्ति नहीं होते बल्कि परिचित या आसपास के लोग भी हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि परिवार अपने बच्चों के संस्कार और व्यवहार को लेकर गंभीरता से सोचें।
    शिवराज ने कहा कि ऐसा माहौल बनना चाहिए जिसमें बेटियां बिना डर के आगे बढ़ सकें और पुरुषों पर भरोसा कर सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस नारे का आज जिक्र हो रहा है वह कभी सार्थक और सफल नहीं होना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को मां और बेटियों को देवी के समान बताते हुए उनके सम्मान और सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने की बात कही।
    कार्यक्रम में शिवराज ने ड्राइवरों के बच्चों के लिए शुरू की गई छात्रवृत्ति योजना की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ड्राइवर केवल वाहन चलाने वाला व्यक्ति नहीं है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ड्राइवर कई दिनों तक अपने परिवार से दूर रहकर देश के अलग अलग हिस्सों तक सामान पहुंचाते हैं। किसान की उपज को बाजार तक पहुंचाने से लेकर निर्माण सामग्री और जरूरी वस्तुओं की ढुलाई तक उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ड्राइवर देश और लोगों की जिंदगी को चलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
    शिवराज ने छात्रवृत्ति योजना के तहत मिलने वाली सहायता की जानकारी देते हुए बताया कि कक्षा आठवीं से दसवीं तक 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को सालाना चार हजार रुपए की छात्रवृत्ति दी जाएगी। 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए यह राशि 4500 रुपए होगी। वहीं 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को पांच हजार रुपए दिए जाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि मेहनत से पढ़ाई कर अच्छे अंक हासिल करने वाले बच्चों की आगे भी मदद की जाएगी।
    उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल छात्रवृत्ति देना ही उद्देश्य नहीं है बल्कि उन्हें आगे की पढ़ाई कौशल विकास प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जोड़ना भी जरूरी है। शिवराज ने अपने संसदीय क्षेत्र में चल रही मामा कोचिंग क्लास का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में निशुल्क सहयोग देने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है।
    कार्यक्रम के दौरान शिवराज ने भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम की जीत और एशियन गेम्स में खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के बेटे और बेटियां अलग अलग क्षेत्रों में भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं।
    इसके बाद शिवराज सिंह चौहान विदिशा के सांची पहुंचे जहां उन्होंने मधुमेह पर आयोजित वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मधुमेह तेजी से बढ़ती चुनौती है और इससे निपटने के लिए उपचार के साथ रोकथाम जागरूकता और लगातार शोध पर जोर देना जरूरी है। उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई। इस तरह एक ही दिन में शिवराज ने बेटियों की सुरक्षा से लेकर शिक्षा रोजगार खेल और स्वास्थ्य जैसे कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।

  • सब्सिडी के लिए मांगी रिश्वत की शिकायत पहुंची केंद्रीय मंत्री तक सीहोर में कृषि मंत्रालय के अधिकारी पर गिरी गाज

    सब्सिडी के लिए मांगी रिश्वत की शिकायत पहुंची केंद्रीय मंत्री तक सीहोर में कृषि मंत्रालय के अधिकारी पर गिरी गाज


    सीहोर । सीहोर जिले में सब्सिडी की राशि जारी करने के एवज में कथित तौर पर रिश्वत मांगने के मामले में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी पर कार्रवाई की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के विपणन अधिकारी अनुराग को शिकायत सामने आने के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामला उस समय सामने आया जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सीहोर जिले के दौरे पर निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान वेयरहाउस संचालकों ने अधिकारी पर सब्सिडी की राशि जारी करने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाया था।

    बताया गया है कि शिकायत में दो वेयरहाउस संचालकों से रिश्वत मांगने की बात कही गई थी। आरोप है कि शिवाय वेयरहाउस से सब्सिडी की रकम जारी करने के बदले एक लाख रुपए की मांग की गई जबकि श्रीकृष्णा वेयरहाउस संचालक से 60 हजार रुपए मांगे गए। शिकायतकर्ताओं ने इस मामले की जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री तक पहुंचाई थी। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    शिकायत सामने आने के बाद कृषि मंत्रालय के स्तर पर अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सब्सिडी जारी करने के लिए वास्तव में किसी तरह की रकम की मांग की गई थी या नहीं और इस पूरे मामले में अधिकारी की भूमिका क्या रही।

    मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सब्सिडी की राशि सरकारी प्रक्रिया के तहत पात्र लाभार्थियों और संबंधित संस्थानों तक पहुंचाई जाती है। ऐसे में राशि जारी करने के बदले कथित तौर पर पैसे मांगने की शिकायत ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर तय होगी।

    सीहोर में निरीक्षण के दौरान सामने आई इस शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया गया है। अब जांच में शिकायत से जुड़े दस्तावेजों रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान लिए जा सकते हैं। इसके आधार पर यह स्पष्ट होगा कि सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।

    इस मामले में अभी विभागीय जांच के परिणाम सामने नहीं आए हैं। इसलिए रिश्वत मांगने के आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारी अनुराग के निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। सीहोर में सामने आए इस मामले ने सरकारी सब्सिडी से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर भी ध्यान खींचा है।

  • भोपाल से सिंगरौली तक सवालों के घेरे में भाजपा नेता अतिथि विद्वानों ने शिवराज को रोका मंत्रियों से मीडिया ने पूछे तीखे सवाल

    भोपाल से सिंगरौली तक सवालों के घेरे में भाजपा नेता अतिथि विद्वानों ने शिवराज को रोका मंत्रियों से मीडिया ने पूछे तीखे सवाल


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेताओं को अलग अलग मुद्दों पर तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। सिंगरौली में भाजपा विधायक रीति पाठक से यूजीसी से जुड़े सवाल पर जवाब मांगा गया तो उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया और कुछ देर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चली गईं। वहीं सागर में मंत्री प्रहलाद पटेल से शराबकांड को लेकर सवाल हुआ जबकि शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार से वंदे मातरम् को लेकर सवाल पूछा गया। इसी बीच भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर उन्हें 11 सितंबर 2023 के आश्वासन की याद दिलाई।

    सिंगरौली में सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इसी दौरान विधायक रीति पाठक से यूजीसी को लेकर सवाल किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सवाल सुनने के बाद उन्होंने कहा कि प्रेस वार्ता जिस विषय पर रखी गई है उसी विषय पर बात की जाए। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिए बिना कार्यक्रम समाप्त कर दिया और वहां से चली गईं।

    उधर भोपाल में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के आवास के बाहर अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शन कर रहे करीब 200 अतिथि विद्वानों ने वहां से गुजर रहे शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोक लिया। अतिथि विद्वानों ने उन्हें 11 सितंबर 2023 को भोपाल में हुई महापंचायत में किए गए आश्वासनों की याद दिलाई। उनका कहना है कि उस समय लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने और फॉलन आउट की स्थिति से बचाने की बात कही गई थी।

    2023 की उस महापंचायत में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों के लिए कई घोषणाएं की थीं। इनमें फॉलन आउट अतिथि विद्वानों को रिक्त पदों पर दोबारा अवसर देने और लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने की बात शामिल थी। इसके अलावा मासिक मानदेय और पीएससी भर्ती में आरक्षण से संबंधित घोषणाएं भी की गई थीं।

    मौजूदा प्रदर्शन में अतिथि विद्वानों की मुख्य मांग नियमितीकरण और नौकरी की स्थिरता को लेकर नीति बनाने की है। उनका कहना है कि जब तक स्थायी नीति नहीं बनती तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकी जाए। प्रदर्शनकारियों के अनुसार उच्च शिक्षा मंत्री से बातचीत के बाद भी इस मुद्दे पर तत्काल सहमति नहीं बनी।

    शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात के दौरान अतिथि विद्वानों ने अपने पुराने आश्वासनों का मुद्दा उठाया। रिपोर्टों के अनुसार चौहान ने कहा कि एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे मुख्यमंत्री को पूरी करनी चाहिए और उनकी मांग सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया।

    सागर में सेवा संकल्प अभियान की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री प्रहलाद पटेल से बंडा शराबकांड को लेकर सवाल किया गया। मीडिया ने पूछा कि ऐसे मामले के बीच सेवा कार्यक्रमों का आयोजन कितना जरूरी है और इस घटना पर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है। मंत्री ने कार्यक्रमों को सेवा से जुड़ा बताया लेकिन शराबकांड से जुड़े सवाल पर कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया।

    शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार से वंदे मातरम् को लेकर सवाल हुआ। मंत्री से पूछा गया कि क्या उन्हें पूरा वंदे मातरम् आता है। जवाब में उन्होंने कहा कि वे भी सीख रहे हैं और सभी को सीखते रहना चाहिए। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल कुछ देर के लिए सवाल जवाब पर केंद्रित हो गया।

    इस तरह सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और कार्यक्रमों में अभियान के साथ साथ अलग अलग मुद्दे भी सामने आए। सिंगरौली में यूजीसी का सवाल हो या सागर में शराबकांड से जुड़ा मुद्दा और भोपाल में अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन सभी घटनाओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक विषयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

  • MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना

    MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को अलग अलग घटनाओं ने सियासी माहौल को खासा दिलचस्प बना दिया। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे तो दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित मनमुटाव की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक मंच पर साथ नजर आए। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा को लेकर पूछे गए सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए।

    दरअसल ट्रंप ने कहा है कि अगर उनकी रिपब्लिकन पार्टी चुनाव जीतती है तो हर अमेरिकी वयस्क को 5000 डॉलर दिए जाएंगे। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना से जोड़कर कई पोस्ट और तस्वीरें वायरल होने लगीं। शिवराज समर्थकों ने इसे मामा के मॉडल की वैश्विक चर्चा से जोड़ दिया। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ट्रेंड में आ गए।

    जब उनसे पूछा गया कि सोशल मीडिया पर यह चर्चा है कि ट्रंप भी आपके मॉडल को अपना रहे हैं तो शिवराज ने कहा कि लाड़ली बहना योजना सस्ती लोकप्रियता के लिए नहीं लाई गई थी। उनका कहना था कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को उनका अधिकार और न्याय दिलाना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और लोगों ने ट्रंप के ऐलान को लाड़ली बहना योजना से जोड़कर अपनी राय जाहिर की।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित खटपट की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साथ आकर अलग संदेश देने की कोशिश की। दोनों नेता भाजपा कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक साथ नजर आए। जब दोनों की दोस्ती को लेकर सवाल किया गया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी दोस्ती तो पहले से ही प्रगाढ़ है। इस दौरान दोनों नेता मुस्कुराते दिखाई दिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के घर पहुंचे। वहां दोनों के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। इसके बाद दोनों एक ही वाहन से भाजपा कार्यालय पहुंचे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष को बीच की कुर्सी पर बैठने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आप प्रदेश अध्यक्ष हैं इसलिए यहां बैठिए। इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    उधर दतिया में कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपनी सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान भाजपा की ओर से यात्रा पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर उनसे सवाल किया गया। पत्रकार के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए और इसके बाद वहां से चले गए।

    इसी बीच सागर के जहरीली शराबकांड की न्यायिक जांच से जुड़ी फाइल को लेकर भी मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है। सरकार ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग बनाने का ऐलान किया है लेकिन दावा किया जा रहा है कि जांच से संबंधित फाइल वल्लभ भवन की चौथी मंजिल पर पिछले कुछ दिनों से आगे नहीं बढ़ी है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार जांच का ऐलान कर चुकी है तो प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • ‘मामा वापस आओ’ से ‘जीतू को CM बनाओ’ तक गूंजे नारे: MP की सियासत में नया सियासी शोर, विधायक प्रतिनिधि पर ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप

    ‘मामा वापस आओ’ से ‘जीतू को CM बनाओ’ तक गूंजे नारे: MP की सियासत में नया सियासी शोर, विधायक प्रतिनिधि पर ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नारों और बयानों ने सियासी माहौल को अलग ही रंग दे दिया है। कहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए मामा वापस आओ के नारे गूंज रहे हैं तो कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को मुख्यमंत्री बनाने की आवाज उठ रही है। दूसरी तरफ मंदसौर जिले में सड़क की समस्या को लेकर भाजपा विधायक का काफिला रोकने के बाद विवाद खड़ा हो गया है और विधायक प्रतिनिधि पर एक ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप लगा है। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में चर्चा का नया विषय पैदा कर दिया है।

    भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति लोगों का पुराना मामा वाला प्यार एक बार फिर दिखाई दिया। कार्यक्रम में लोगों ने आई लव यू मामा और मामा वापस आ जाइए जैसे नारे लगाए। जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने लोगों की ओर फ्लाइंग किस भेजे और आई लव यू टू कहकर उनका अभिवादन किया। उन्होंने मंच से कहा कि वह सभी से प्यार करते हैं और यह प्यार का सिलसिला जिंदगी भर चलता रहेगा।

    इस दौरान शिवराज सिंह चौहान का एक बयान खासा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री आते जाते रहते हैं लेकिन मामा परमानेंट हैं। शिवराज के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि शिवराज सिंह चौहान के लिए मामा वाला संबोधन कोई नया नहीं है। लंबे समय से उनके समर्थक और आम लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते रहे हैं और मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी कई कार्यक्रमों में उनके लिए मामा वापस आओ जैसे नारे सुनाई देते रहे हैं।

    उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए भी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगाए। देवास जिले के खातेगांव में कार्यकर्ताओं ने प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसा हो जीतू पटवारी जैसा हो के नारे लगाए। इसके बाद भोपाल में चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान जीतू पटवारी जब अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में पहुंचे तो वहां भी उनके पक्ष में मुख्यमंत्री बनाने के नारे गूंजे। समर्थकों ने हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो जीतू पटवारी जैसा हो और अगला सीएम कैसा हो जीतू भैया जैसा हो जैसे नारे लगाए।

    हालांकि मध्यप्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव अभी दूर है और मुख्यमंत्री पद की संभावनाओं पर अभी से कोई ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस के भीतर भी भविष्य में मुख्यमंत्री पद के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में आ सकते हैं। फिलहाल जीतू पटवारी के समर्थन में लग रहे नारे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और कार्यकर्ताओं के उत्साह को जरूर दिखा रहे हैं।

    वहीं मंदसौर जिले के गरोठ में भाजपा विधायक चंदर सिंह सिसोदिया के काफिले को ग्रामीणों ने सड़क की समस्या बताने के लिए रोक लिया। आरोप है कि काफिला रोके जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें विधायक ग्रामीणों से बात करते दिखाई दे रहे हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान विधायक प्रतिनिधि अनिल राठौर ने एक ग्रामीण को थप्पड़ मार दिया। कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि वीडियो बना रहे लोगों के मोबाइल ले लिए गए। मामले को लेकर एक ग्रामीण ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है और अब पूरा विवाद थाने तक पहुंच गया है। आरोपों की जांच और पुलिस की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है।

    इधर इंदौर भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा का एक बयान भी चर्चा में रहा। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते समय उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल को देश का पहला प्रधानमंत्री बता दिया। जबकि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे और सरदार पटेल कभी प्रधानमंत्री नहीं रहे। इस बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा नेता के सामान्य ज्ञान और इतिहास की जानकारी पर सवाल उठाए।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयान नारे और विवाद लगातार सुर्खियां बना रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान के मामा परमानेंट वाले बयान से लेकर जीतू पटवारी के लिए मुख्यमंत्री के नारों और गरोठ में विधायक प्रतिनिधि पर लगे थप्पड़ के आरोप तक हर मामला राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे रहा है।

  • राशन के पैसे के इस्तेमाल पर डिजिटल निगरानी, CBDC आधारित DBT से बदलेगी खाद्य सब्सिडी की व्यवस्था

    राशन के पैसे के इस्तेमाल पर डिजिटल निगरानी, CBDC आधारित DBT से बदलेगी खाद्य सब्सिडी की व्यवस्था


    चंडीगढ़। सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS में खाद्य सब्सिडी की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी आधारित डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर व्यवस्था का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने की। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभणिया भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं।

    इस नई व्यवस्था को खाद्य सब्सिडी के डिजिटल वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है। सरकारी योजना के तहत चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली ऐसे पहले केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां पात्र लाभार्थियों तक खाद्य सब्सिडी प्रोग्रामेबल CBDC यानी डिजिटल रुपये के रूप में पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की जा रही है। इसका मकसद सब्सिडी के वितरण को पारदर्शी और ट्रेसेबल बनाने के साथ यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता निर्धारित उद्देश्य के लिए ही इस्तेमाल हो।

    CBDC आधारित DBT की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रोग्रामेबल होना है। सामान्य बैंक खाते में मिलने वाली नकद राशि का इस्तेमाल लाभार्थी अपनी जरूरत के मुताबिक कर सकता है लेकिन इस व्यवस्था में डिजिटल लाभ को एक निर्धारित उद्देश्य से जोड़ा जा सकता है। खाद्य सब्सिडी के मामले में राशि का इस्तेमाल राशन और जरूरी खाद्य वस्तुओं की खरीद के लिए किया जा सकेगा। इसके लिए अधिकृत या सूचीबद्ध दुकानदारों के माध्यम से डिजिटल भुगतान की व्यवस्था होगी।

    इस व्यवस्था से लाभार्थियों को खाद्य वस्तुओं के चयन में भी अधिक विकल्प मिलने की बात कही गई है। गेहूं और चावल के अलावा दाल या अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की खरीद का विकल्प भी उपलब्ध कराया जा सकता है। तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि सब्सिडी की राशि को किसी दूसरे काम में डायवर्ट न किया जा सके। शिवराज सिंह चौहान ने इस पहल को तकनीक और जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण बताया और इसे विकसित करने वाली विभागीय टीम की सराहना की।

    चंडीगढ़ में शुरू किया गया मॉडल केवल स्थानीय प्रयोग तक सीमित नहीं माना जा रहा है। सरकार इसे भविष्य में अन्य क्षेत्रों में लागू किए जाने वाले मॉडल के रूप में देख रही है। इससे खाद्य सब्सिडी के वितरण में होने वाले लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और पूरी प्रक्रिया को अधिक ट्रेसेबल बनाया जा सकेगा। इससे सरकारी सहायता के सही लाभार्थी तक पहुंचने और उसके निर्धारित उद्देश्य में इस्तेमाल होने की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और गरीबों के हितों को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि कृषि नीति और खाद्य सुरक्षा से जुड़े फैसलों में किसान हित और जनहित सर्वोच्च रहेंगे। उन्होंने देश में गेहूं और धान के पर्याप्त भंडार का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपनी घरेलू जरूरतें पूरी करने में सक्षम है और जरूरत पड़ने पर खाद्यान्न का निर्यात भी कर सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को भी गरीब परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा बताया। उनका कहना था कि खाद्य सुरक्षा से परिवारों के खर्च का बोझ कम होता है और बची हुई राशि बच्चों की शिक्षा तथा दूसरी जरूरी जरूरतों पर खर्च की जा सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ बिना अनावश्यक बाधा के पहुंचे।

    शिवराज सिंह चौहान ने तकनीक आधारित इस पहल को सरकार की उस सोच से जोड़ा जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ कागजों और फाइलों तक सीमित न रहकर सीधे लोगों की जिंदगी में दिखाई देना चाहिए। CBDC आधारित DBT इसी दिशा में एक नया प्रयोग है जिसमें डिजिटल रुपये के जरिए खाद्य सब्सिडी को अधिक उद्देश्यपूर्ण और पारदर्शी तरीके से लाभार्थियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

  • एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित

    एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिली। राज्य सरकार ने सदन में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 पेश कर दिया, जबकि विपक्ष ने उज्जैन जमीन खरीद मामले को लेकर जोरदार हंगामा किया। लगातार शोर-शराबे के चलते विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि UCC विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

    सत्र की शुरुआत से पहले ही कांग्रेस ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विधानसभा पहुंचे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के बजाय दूसरे मुद्दों में उलझी हुई है।

    सदन के भीतर भी विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उमंग सिंघार ने बरगी क्रूज हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और कथित रूप से अव्यवस्था से परेशान नीट परीक्षार्थियों का मुद्दा उठाते हुए विधानसभा सचिवालय पर श्रद्धांजलि सूची में नाम शामिल नहीं करने का सवाल खड़ा किया। इसके बाद उज्जैन में मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े मामले पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव रखा, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस विधायकों ने तीखा विरोध किया और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ने पर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    सरकार ने इस दौरान केवल UCC विधेयक ही नहीं, बल्कि एक साथ कई महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के पटल पर रखे। इनमें मध्य प्रदेश निरसन विधेयक, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, राजमार्ग संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, श्रम और उद्योग से जुड़े कई नए विधेयक शामिल हैं। कांग्रेस ने एक साथ इतने विधेयक पेश किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इन्हें पहले कार्यसूची में शामिल नहीं किया गया था। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी थी और सभी विधायकों को विधेयकों का अध्ययन करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

    इसी बीच ओबीसी महासभा ने भी विधानसभा के बाहर 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और 13 प्रतिशत पदों को होल्ड मुक्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि वर्षों से आंदोलन करने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    विधानसभा के पहले दिन की कार्यवाही ने साफ संकेत दे दिए हैं कि मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। एक तरफ सरकार समान नागरिक संहिता समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष किसानों, आरक्षण, उज्जैन जमीन विवाद और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। अब सबकी निगाहें UCC विधेयक पर होने वाली चर्चा और उज्जैन जमीन मामले में सरकार के अगले रुख पर टिकी हैं।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज

    मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज लोगों की नजरों में रहा। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब दक्षिण भारत तक पहुंचता दिखाई दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।

    सिवनी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह पूरे समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आसपास सक्रिय दिखाई दिए। कार्यक्रम में विधायक कभी मुख्यमंत्री के पीछे तो कभी उनके आगे चलते नजर आए। मंच पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री अपना संबोधन समाप्त कर आगे बढ़ गए। यह दृश्य इसलिए भी खास माना गया क्योंकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले यही विधायक मुख्यमंत्री की नीतियों के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए थे। विरोध के बाद उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण मान रहे हैं।

    दूसरी ओर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के विवाद के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज भी चर्चा में रहा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया। मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक रद्द होने के सवाल पर उन्होंने जिम्मेदारी बैठक तय करने वालों पर डाल दी। मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिए लेकिन पूरे समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे संयमित रणनीति और विवादों से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी लोगों के बीच पहचान बना रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही लोग उन्हें देखने पहुंचे भीड़ से मामा मामा के नारे गूंजने लगे। लोगों के उत्साह को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान भी सीधे उनके बीच पहुंचे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। उनका सहज और आत्मीय व्यवहार एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा। भाजपा नेताओं का मानना है कि शिवराज की यही जनसंपर्क शैली उन्हें देशभर में अलग पहचान दिला रही है।

    इसी बीच प्रदेश की नौकरशाही में भी एक रोचक चर्चा सामने आई। राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को कुछ दिनों तक आईपीएस बनने की बधाइयां मिलती रहीं लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल ही नहीं था। इसके बाद यह मामला भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

    प्रदेश की राजनीति में लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज होने वाली हैं। नेताओं की सक्रियता बदलते व्यवहार और नए राजनीतिक संदेश अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अहम मायने रखने लगे हैं।

  • सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा

    सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा


    सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर और नीमच जिलों में रविवार को जनप्रतिनिधियों को जनता के तीखे विरोध और सवालों का सामना करना पड़ा। एक ओर सीहोर में किसानों और कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan का काफिला रोककर अपनी समस्याएं सामने रखीं, तो दूसरी ओर नीमच में भाजपा विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़ना पड़ा।

    सीहोर में इछावर के आजाद मैदान की ओर जा रहे शिवराज सिंह चौहान का काफिला अचानक उस समय रुक गया जब कांग्रेस नेताओं और किसानों के एक समूह ने रास्ते में उन्हें घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे राजनीतिक रूप से भले ही कांग्रेस से जुड़े हों, लेकिन जनप्रतिनिधि के रूप में शिवराज सभी के प्रतिनिधि हैं, इसलिए वे अपनी समस्याएं उनके सामने रखना चाहते हैं।

    इस दौरान किसानों ने बताया कि पिछले कई दिनों से वे खाद और कृषि संबंधी कार्यों के लिए परेशान हैं। डिजिटल पोर्टल के सर्वर डाउन होने के कारण किसानों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, जिससे उनकी समस्याएं बढ़ रही हैं। किसानों ने इस संबंध में केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा।

    किसानों की बात सुनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा और सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे जनता के प्रतिनिधि हैं और हर नागरिक की समस्या का समाधान करना उनकी जिम्मेदारी है।

    बाद में जनकल्याण शिविर में पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी जनता के कामों में बाधा डाल रहे हैं और पात्र लोगों को योजनाओं से बाहर किया जा रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सभी आवेदनों की निष्पक्ष जांच हो और किसी गरीब का हक न छीना जाए।

    इसी बीच नीमच जिले के जावद क्षेत्र में स्थिति अलग रही, जहां विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को जनता के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। वे बांगरेड गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए।

    ग्रामीणों का कहना था कि अस्पताल तो बन रहा है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। जब विधायक ने जवाब देने की कोशिश की, तो भीड़ और अधिक आक्रोशित हो गई और ‘विधायक वापस जाओ’ के नारे लगाने लगी। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों के बीच हस्तक्षेप के बाद विधायक को कार्यक्रम बीच में छोड़कर जाना पड़ा। यह घटनाएं दर्शाती हैं कि जनता अब अपने मुद्दों को लेकर अधिक मुखर हो रही है और जनप्रतिनिधियों से सीधे जवाब की अपेक्षा रखती है।