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  • ग्लोबल मार्केट का असर: डॉलर मजबूत होते ही सोना और चांदी धराशाई, कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज

    ग्लोबल मार्केट का असर: डॉलर मजबूत होते ही सोना और चांदी धराशाई, कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती का सीधा असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला है, जहां सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में ही इन दोनों धातुओं पर दबाव बढ़ गया और दाम एक प्रतिशत से अधिक फिसल गए। निवेशकों की नजरें अब अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों और डॉलर इंडेक्स की चाल पर टिकी हुई हैं, जो फिलहाल मजबूत स्थिति में बना हुआ है।

    घरेलू वायदा बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के जून अनुबंध की शुरुआत हल्की गिरावट के साथ हुई, लेकिन कुछ ही समय में गिरावट और गहरी हो गई। कारोबार के दौरान सोने के दाम में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और यह दिन के निचले स्तर की ओर खिसकता नजर आया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर में मजबूती के कारण निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं, जिससे इसकी मांग पर दबाव बढ़ा है।

    इसी तरह चांदी के दामों में भी कमजोर रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही चांदी में गिरावट दर्ज की गई और इसका असर पूरे सत्र में दिखाई दिया। चांदी भी एक प्रतिशत से अधिक कमजोर होकर कारोबार करती रही, जिससे कमोडिटी बाजार में अस्थिरता का माहौल बन गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। डॉलर इंडेक्स में तेजी के चलते अन्य मुद्राओं में सोने की कीमतें महंगी हो गईं, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ा। डॉलर इंडेक्स प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की ताकत को दर्शाता है और जब यह मजबूत होता है तो सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों पर दबाव बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक संकेत और अमेरिकी मुद्रा की स्थिति ही कीमती धातुओं की दिशा तय कर रहे हैं। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बाजार में बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं। इसी कारण सोना और चांदी में कमजोरी का रुझान बना हुआ है।

    भारतीय शेयर बाजार में भी इस दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला और शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में दबाव के कारण प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी आई, जिससे समग्र बाजार धारणा प्रभावित हुई।

    फिलहाल बाजार की नजर डॉलर की आगे की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं।

  • सोने में हल्की हलचल, चांदी फिसली, वैश्विक हालात से कीमती धातुओं पर दबाव बरकरार

    सोने में हल्की हलचल, चांदी फिसली, वैश्विक हालात से कीमती धातुओं पर दबाव बरकरार


    नई दिल्ली ।
    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी अनिश्चितता और राजनीतिक तनाव के बीच कीमती धातुओं के बाजार में हल्की स्थिरता का माहौल देखा जा रहा है। वैश्विक घटनाक्रमों के असर से सोने की कीमतों में सीमित दायरे में कारोबार हो रहा है, जबकि चांदी पर दबाव बना हुआ है। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बाजार में कोई बड़ी दिशा स्पष्ट नहीं दिख रही है।

    घरेलू वायदा बाजार में सोने की शुरुआत सपाट रही और शुरुआती कारोबार में इसमें हल्की तेजी और गिरावट दोनों का असर देखने को मिला। कीमतें एक सीमित दायरे में ऊपर-नीचे होती रहीं, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार फिलहाल किसी बड़े ट्रेंड की प्रतीक्षा कर रहा है। दिन के दौरान सोने ने न्यूनतम और अधिकतम स्तर के बीच सीमित अंतर में ही कारोबार किया, जिससे अस्थिरता के बावजूद स्थिरता का माहौल बना रहा।

    चांदी के बाजार में इसके उलट कमजोरी का रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और पूरे सत्र में दबाव बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों में नरमी का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण चांदी में अस्थिरता अधिक बनी हुई है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं पर दबाव देखा गया, जहां सोना और चांदी दोनों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख देशों की नीतियों को लेकर बनी स्थिति ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। हालांकि सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन मौजूदा समय में इसमें भी सीमित दायरे की गतिविधि देखी जा रही है।

    वैश्विक तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी रहा कि कुछ सैन्य और राजनीतिक फैसलों में नरमी के संकेत मिले हैं, जिससे कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी बाजारों पर भी हल्का असर पड़ा है। इस स्थिति ने सोने की तेज रफ्तार को फिलहाल रोक दिया है और बाजार को एक संतुलित दायरे में ला दिया है।

    पिछले एक वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने और चांदी दोनों ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। सोने में लगभग 40 प्रतिशत और चांदी में इससे भी अधिक तेजी देखी गई है, जिससे लंबे समय के निवेशकों को अच्छा फायदा हुआ है। हालांकि मौजूदा समय में बाजार की चाल धीमी पड़ गई है और निवेशक अगली बड़ी दिशा के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की स्थिति और भू-राजनीतिक तनाव की दिशा ही तय करेगी कि सोना और चांदी किस ओर रुख करेंगे। फिलहाल बाजार में सावधानी और इंतजार का माहौल बना हुआ है, जहां बड़ी तेजी या गिरावट की बजाय सीमित दायरे में कारोबार जारी रहने की संभावना अधिक दिखाई दे रही है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव के बावजूद सोना-चांदी में गिरावट, बाजार में दबाव कायम..

    अमेरिका-ईरान तनाव के बावजूद सोना-चांदी में गिरावट, बाजार में दबाव कायम..


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है, जिसके चलते कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।

    सोने के वायदा बाजार में कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और कीमतें पिछली क्लोजिंग से नीचे स्तर पर खुलीं। दिनभर के कारोबार में भी सोने में बहुत ज्यादा मजबूती नहीं देखी गई और यह सीमित दायरे में ही बना रहा।

    चांदी की कीमतों में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में चांदी कमजोर खुली और पूरे सत्र के दौरान दबाव में बनी रही। बाजार में खरीदारी कमजोर रहने के कारण इसमें कोई बड़ी रिकवरी नहीं दिखी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में नरमी दर्ज की गई है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश से हटकर अन्य विकल्पों की ओर देख रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं की मांग पर असर पड़ा है।

    हालांकि भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन बाजार ने इस पर सीमित प्रतिक्रिया दी है। ऊर्जा बाजार और वैश्विक आर्थिक संकेतों के बीच निवेशक फिलहाल इंतजार की स्थिति में हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिलती, तब तक सोना और चांदी में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना कम है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक बड़े फैसलों से बच रहे हैं।

  • मई की शुरुआत में झटका और राहत साथ-साथ: LPG महंगा, पेट्रोल-डीजल स्थिर, सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव

    मई की शुरुआत में झटका और राहत साथ-साथ: LPG महंगा, पेट्रोल-डीजल स्थिर, सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव


    नई दिल्ली। मई 2026 की शुरुआत आम जनता और कारोबारियों के लिए मिली-जुली खबर लेकर आई है। जहां एक ओर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी ने झटका दिया है। साथ ही, सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट और चांदी में लगातार तीसरे दिन कमजोरी देखने को मिली है।
    देश की राजधानी New Delhi में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद तेल कंपनियों ने आम जनता को राहत देते हुए ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। Mumbai, Kolkata और Chennai जैसे प्रमुख महानगरों में भी दाम जस के तस बने हुए हैं।
    हालांकि, कमर्शियल उपयोग करने वालों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹993 की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में इसकी कीमत ₹3,071.50 तक पहुंच गई है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। राहत की बात यह है कि घरेलू 14.2 किलो एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम घरों पर फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ा है।
    सर्राफा बाजार की बात करें तो सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹1,50,820 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,38,260 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। पिछले कुछ दिनों में सोने की कीमतों में नरमी का रुख बना हुआ है। वहीं चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली है और यह ₹2,49,900 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है।
    विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर Iran और United States के बीच हालात, बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। इसका असर कच्चे तेल से लेकर सोना-चांदी तक सभी कमोडिटी पर देखने को मिल रहा है।
    वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs का अनुमान है कि आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीद और अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती के चलते साल के अंत तक सोना ₹1.63 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। हालांकि, अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई गई है।
    कुल मिलाकर, जहां ईंधन की स्थिर कीमतों ने आम जनता को राहत दी है, वहीं कमर्शियल एलपीजी की बढ़ी कीमतों से व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। सोना-चांदी में जारी उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रहा है।

  • पेट्रोल-डीजल स्थिरता के बीच कीमती धातुओं में गिरावट और वैश्विक दबाव ने बढ़ाई आर्थिक हलचल

    पेट्रोल-डीजल स्थिरता के बीच कीमती धातुओं में गिरावट और वैश्विक दबाव ने बढ़ाई आर्थिक हलचल


    नई दिल्ली।  में देश के ऊर्जा और कीमती धातु बाजार में इन दिनों स्थिरता और उतार-चढ़ाव का मिश्रित प्रभाव देखने को मिल रहा है। एक ओर पेट्रोल और डीजल की कीमतें प्रमुख शहरों में स्थिर बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर सोना और चांदी के दामों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इस स्थिति ने आम उपभोक्ताओं से लेकर निवेशकों तक सभी को प्रभावित किया है और बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

    देश के बड़े महानगरों में ईंधन की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। इससे उपभोक्ताओं को अल्पकालिक राहत जरूर मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिरता लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां आने वाले समय में ईंधन दरों को प्रभावित कर सकती हैं।

    ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन लगातार प्रभावित हो रहा है। कई क्षेत्रों में चल रहे तनाव और अनिश्चितता का असर सीधे तौर पर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश में इसका प्रभाव रिफाइनिंग लागत और आयात बिल पर साफ दिखाई देता है, जिससे भविष्य में कीमतों में बदलाव की संभावना बनी रहती है।

    दूसरी ओर, सोने और चांदी के बाजार में गिरावट का दौर जारी है। सोने की कीमतों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी का अवसर तो बना है, लेकिन निवेशकों के बीच चिंता भी बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक वित्तीय बाजार में बदलाव के कारण सोने की मांग प्रभावित हो रही है।

    चांदी के दामों में भी कमजोरी देखी जा रही है। औद्योगिक मांग में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव के कारण चांदी की कीमतें भी नीचे आ रही हैं। इससे कीमती धातुओं का बाजार फिलहाल दबाव में नजर आ रहा है और निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने की सलाह दी जा रही है।

    हालांकि ईंधन की कीमतों में स्थिरता ने उपभोक्ताओं को राहत दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अस्थायी हो सकती है। वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव आने वाले समय में ईंधन दरों को प्रभावित कर सकता है। इसी तरह सोना और चांदी में गिरावट के बाद भी बाजार में अचानक बदलाव की संभावना बनी रहती है।

    वर्तमान स्थिति में बाजार संतुलन की अवस्था में दिखाई दे रहा है, लेकिन वैश्विक आर्थिक कारक इसे किसी भी समय प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों के लिए सतर्क रहना और सोच-समझकर निर्णय लेना आवश्यक माना जा रहा है

  • सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, सोना ₹927 लुढ़ककर ₹1.51 लाख पर आया, चांदी ₹4,700 सस्ती

    सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, सोना ₹927 लुढ़ककर ₹1.51 लाख पर आया, चांदी ₹4,700 सस्ती


    नई दिल्ली । सोना और चांदी की कीमतों में आज 23 अप्रैल को गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 927 रुपए घटकर 1.51 लाख रुपए पर आ गया। एक दिन पहले यानी 22 अप्रैल को यह 1.52 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम था। वहीं चांदी की कीमत में भी बड़ी कमी आई है और यह 4,700 रुपए गिरकर 2.43 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है, जो पहले 2.48 लाख रुपए थी।

    इस साल अब तक महंगा ही रहा सोना-चांदी
    हालांकि ताजा गिरावट के बावजूद 2026 में सोने-चांदी की कीमतों में कुल मिलाकर बढ़त बनी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपए था, जो अब बढ़कर 1.51 लाख रुपए पर पहुंच चुका है, यानी करीब 18 हजार रुपए की तेजी। इसी तरह चांदी भी 2.30 लाख रुपए प्रति किलो से बढ़कर 2.43 लाख रुपए पर आ गई है।

    ऊंचाई से नीचे आए दाम

    इस साल 29 जनवरी को सोने और चांदी ने रिकॉर्ड स्तर छुआ था। उस दिन सोना 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 3.86 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थी। इसके मुकाबले अब सोना करीब 25 हजार रुपए और चांदी लगभग 1.42 लाख रुपए सस्ती हो चुकी है।

    वैश्विक संकेतों का असर, बाजार में उतार-चढ़ाव
    विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और डॉलर की मजबूती का असर घरेलू कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ दिनों से सोना-चांदी के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। हालांकि, कीमतों में आई ताजा गिरावट ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए कुछ राहत जरूर लेकर आई है।

  • Gold-Silver Price: हफ्तेभर में 70500 रुपये महंगे हुए सोने की आज गिरी कीमत, जानें अपने शहरों में 24 कैरेट का लेटेस्ट भाव

    Gold-Silver Price: हफ्तेभर में 70500 रुपये महंगे हुए सोने की आज गिरी कीमत, जानें अपने शहरों में 24 कैरेट का लेटेस्ट भाव


    नई दिल्ली । Gold-Silver Price Today: सोने की कीमतों में बीते लगभग 7 दिनों से तेजी देखी जा रही थी जिस पर आज ब्रेक लगा है. अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिका में कारोबार को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही थी. आज गुरुवार 26 फरवरी को सोने-चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट देखी जा रही है.

    आज कितनी है सोने की कीमत?

    आज 24 कैरेट सोने की कीमत 1,61,680 रुपये प्रति 10 ग्राम है जो कल के मुकाबले 210 रुपये कम है. कल 24 कैरेट सोने की कीमत 1,61,890 रुपये थी. वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत आज प्रति 10 ग्राम के हिसाब से 1,48,200 रुपये है. इसमें भी बुधवार के मुकाबले 200 रुपये की कमी आई है. एक दिन पहले 10 ग्राम के 22 कैरेट सोने की कीमत 1,48,400 रुपये थी. इसी तरह से 18 कैरेट सोने का भाव भी कल के 1,21,420 रुपये के मुकाबले 160 रुपये सस्ती होकर 1,21,260 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है.

    बुधवार को कितनी बढ़ी थी कीमत?

    गुडरिटर्न्स के मुताबिक बुधवार को भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 11 रुपये प्रति ग्राम बढ़कर 16,189 रुपये प्रति ग्राम हो गया. बीते सात दिनों में 24 कैरेट सोने का दाम करीब 705 रुपये प्रति ग्राम बढ़ा है यानी इसी दौरान 100 ग्राम का दाम करीब 70,500 रुपये बढ़ा है. इसी तरह से बुधवार को भारत में 22 कैरेट सोने का दाम 10 रुपये प्रति ग्राम बढ़कर 14,840 रुपये प्रति ग्राम हो गया और 18 कैरेट सोने का दाम 8 रुपये प्रति ग्राम बढ़कर 12,142 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गया.

    आज कितनी है कीमत?

    मुंबई कोलकाता हैदराबाद केरल बेंगलुरु पुणे नागपुर भुवनेश्वर विजयवाड़ा में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 16,168 रुपये 22 कैरट सोने की कीमत 14,820 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 12,126 रुपये प्रति ग्राम है.
    दिल्ली नोएडा गाजियाबाद गुड़गांव अयोध्या चंडीगढ़ में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 16,183 रुपये 22 कैरट सोने की कीमत 14,835 रुपये और 18 कैरट सोने की कीमत 12,141 रुपये प्रति ग्राम है.
    चेन्नई कोयंबटू मदुरै सेलम जैसे कई शहरों में आज 24 22 और 18 कैरेट सोने की कीमत क्रमश: 16,277 रुपये 14,920 रुपये और 12,765 रुपये है
    .
    चांदी की कितनी है कीमत?
    आज 26 फरवरी को चांदी की भी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. MCX Multi Commodity Exchange पर चांदी की कीमत में 1-1.2 परसेंट की कमी आई है. दिल्ली मुंबई कोलकाता जैसे देश के प्रमुख शहरों में आज चांदी का भाव 2,84,900 रुपये है जिसमें कल के मुकाबले प्रति किलो 100 रुपये तक की कमी आई है

  • सोना दो दिन में ₹4 हजार महंगा, 10 ग्राम 24 कैरेट का भाव ₹1.59 लाख पहुंचा, चांदी की कीमतें गिरीं

    सोना दो दिन में ₹4 हजार महंगा, 10 ग्राम 24 कैरेट का भाव ₹1.59 लाख पहुंचा, चांदी की कीमतें गिरीं


    नई दिल्ली । आज यानी 24 फरवरी को सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,021 बढ़कर ₹1,59,241 प्रति 10 ग्राम हो गया है। इससे पहले यह ₹1,58,220 पर था। यानी दो कारोबारी दिनों में सोना लगभग ₹4 हजार महंगा हुआ है।

    वहीं, चांदी के दामों में गिरावट देखने को मिली। एक किलो चांदी की कीमत आज ₹1,163 घटकर ₹2,62,912 पर आ गई, जबकि कल यह ₹2,64,075 प्रति किलो थी।इस साल सोने और चांदी की कीमतों में पहले से ही तेजी रही है। 2026 में अब तक सोना ₹26,000 और चांदी ₹33,000 महंगी हो चुकी है। जनवरी में 29 तारीख को सोने ने ₹1,76,000 और चांदी ने ₹3,86,000 प्रति किलो का ऑल टाइम हाई भी छुआ था।

    पिछले साल 2025 में भी सोने और चांदी ने निवेशकों को बड़ा लाभ दिया। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹76,000 का था, जो 31 दिसंबर 2025 को ₹1,33,000 हो गया, यानी लगभग ₹57,000 की बढ़ोतरी। चांदी में भी 167% का इजाफा हुआ। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी ₹86,000 थी, जो साल के अंत तक ₹2,30,000 प्रति किलो हो गई।

    आने वाले समय में सोने की कीमतों को लेकर UBS जैसी इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनियों ने अनुमान लगाया है कि मांग और खरीदारी और बढ़ सकती है। 2025 में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था, जबकि 2026 में यह आंकड़ा 950 टन तक पहुंचने का अनुमान है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश भी 825 टन तक होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार साल के मध्य तक सोना $6,200 प्रति औंस तक जा सकता है, यानी भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने का भाव ₹1.80 लाख तक पहुंच सकता है।

    सोना खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें:

    सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड हॉलमार्क वाला सोना खरीदें। हॉलमार्क नंबर अल्फान्यूमेरिक होता है जैसे AZ4524, जिससे कैरेट पता चलता है। कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का वजन और कीमत दिन के हिसाब से कई सोर्सेज से चेक करें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने का भाव अलग होता है। सोने और चांदी में निवेश करते समय सही समय और प्रमाणित गोल्ड चुनना सबसे जरूरी है, ताकि लाभ सुरक्षित और लंबे समय तक टिकाऊ रहे।

  • चांदी में जबरदस्त उछाल, तीन दिन में ₹34 हजार की तेजी; सोना भी सर्वकालिक रिकॉर्ड पर…

    चांदी में जबरदस्त उछाल, तीन दिन में ₹34 हजार की तेजी; सोना भी सर्वकालिक रिकॉर्ड पर…


    नई दिल्ली।देश में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों को चौंका दिया है। बुधवार को सोना और चांदी दोनों ही नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन IBJA के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेज उछाल दर्ज किया गया है। बुधवार को एक किलो चांदी ₹14,145 महंगी होकर ₹2,77,175 के स्तर पर पहुंच गई। बीते महज तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल ₹34 हजार से अधिक की छलांग लग चुकी है जो हालिया वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।

    सोने की कीमतें भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही हैं। 24 कैरेट सोना बुधवार को ₹1,868 की मजबूती के साथ ₹1,42,152 प्रति 10 ग्राम पर खुला। यह अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है। इससे पहले मंगलवार को सोना ₹1,40,482 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर सोने को निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है।बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के कमजोर होने से सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हो गई है, जिससे निवेशकों का रुझान तेजी से सोने की ओर बढ़ा है। वहीं चांदी को केवल कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से आ रही मजबूत औद्योगिक मांग बड़ी वजह है। इसके अलावा अमेरिका में संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर कंपनियां पहले से चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।आईबीजेए द्वारा जारी किए गए सोने और चांदी के भाव में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी कारण दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में खुदरा स्तर पर कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं। आईबीजेए के रेट का उपयोग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने और बैंकों द्वारा गोल्ड लोन की गणना के लिए किया जाता है।

    अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो 2025 में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब ₹57,033 यानी लगभग 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी के दामों में ₹1,44,403 की जबरदस्त तेजी आई है, जो करीब 167 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।भू-राजनीतिक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के संकेतों ने सोने को एक बार फिर सुरक्षित निवेश का मजबूत विकल्प बना दिया है। चीन सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहे हैं, जिससे मांग और कीमतों दोनों को समर्थन मिल रहा है।

    बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी बनी रह सकती है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की चाल और जोखिम को समझते हुए ही निवेश का फैसला लें।देश में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों को चौंका दिया है। बुधवार को सोना और चांदी दोनों ही नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेज उछाल दर्ज किया गया है। बुधवार को एक किलो चांदी ₹14,145 महंगी होकर ₹2,77,175 के स्तर पर पहुंच गई। बीते महज तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल ₹34 हजार से अधिक की छलांग लग चुकी है, जो हालिया वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।सोने की कीमतें भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही हैं। 24 कैरेट सोना बुधवार को ₹1,868 की मजबूती के साथ ₹1,42,152 प्रति 10 ग्राम पर खुला। यह अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है। इससे पहले मंगलवार को सोना ₹1,40,482 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर सोने को निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के कमजोर होने से सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हो गई है, जिससे निवेशकों का रुझान तेजी से सोने की ओर बढ़ा है। वहीं चांदी को केवल कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।विशेषज्ञों के अनुसार चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से आ रही मजबूत औद्योगिक मांग बड़ी वजह है। इसके अलावा अमेरिका में संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर कंपनियां पहले से चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।

    आईबीजेए द्वारा जारी किए गए सोने और चांदी के भाव में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी कारण दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में खुदरा स्तर पर कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं। आईबीजेए के रेट का उपयोग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने और बैंकों द्वारा गोल्ड लोन की गणना के लिए किया जाता है।अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो 2025 में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब ₹57,033 यानी लगभग 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी के दामों में ₹1,44,403 की जबरदस्त तेजी आई है, जो करीब 167 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।

    भू-राजनीतिक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के संकेतों ने सोने को एक बार फिर सुरक्षित निवेश का मजबूत विकल्प बना दिया है। चीन सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहे हैं, जिससे मांग और कीमतों दोनों को समर्थन मिल रहा है।बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी बनी रह सकती है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की चाल और जोखिम को समझते हुए ही निवेश का फैसला लें।

  • Good News: चांदी की कीमत में आ सकती है 60% तक की बड़ी गिरावट, जानें क्या है वजह

    Good News: चांदी की कीमत में आ सकती है 60% तक की बड़ी गिरावट, जानें क्या है वजह

    नई दिल्ली। पिछले साल चांदी की कीमतों ने रिकॉर्ड उछाल देखा था। तेजी के चलते चांदी की कीमत प्रति किलो 2.54 लाख रुपये तक पहुँच गई थी। हालांकि, अब घरेलू बाजार में यह गिरकर 2.35 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई है। 2025 में चांदी की कीमत में लगभग 180% की बढ़ोतरी हुई थी, जिसका मुख्य कारण बढ़ती डिमांड और सप्लाई में कमी थी। लेकिन अब मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि FY27 के अंत तक चांदी की कीमत में 60% तक की बड़ी गिरावट आ सकती है।

    तेजी के पीछे की वजहें

    चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी के पीछे कई कारण थे। सबसे पहले, सैमसंग द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी में बदलाव की घोषणा ने इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ा दी। इसके अलावा, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव के कारण पेरू और चाड से सप्लाई प्रभावित हुई। साथ ही, 1 जनवरी 2026 से चीन द्वारा चांदी के एक्सपोर्ट पर अप्रत्यक्ष बैन ने भी कीमतें बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। ये सभी कारक मिलकर चांदी को बाजार में महँगी बनाने का काम कर रहे थे।

    एक्सपर्ट्स क्यों जताते हैं गिरावट की आशंका?

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी की कीमतें अब खतरनाक स्तर पर पहुँच गई हैं। इंडस्ट्रियल डिमांड पर कीमतों की बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ सकता है। फोटोवोल्टिक सेल और सोलर पैनल इंडस्ट्री पहले ही चांदी की जगह तांबे का इस्तेमाल बढ़ा रही है। वहीं बैटरी सेक्टर में भी चांदी से कॉपर बाइंडिंग तकनीक अपनाने की कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में चांदी की मांग घटने की संभावना है और FY27 के अंत तक कीमतों में 60% तक की गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है।

    इतिहास खुद को दोहरा सकता है

    चांदी के इतिहास पर नजर डालें तो अक्सर बुल मार्केट के बाद इसमें भारी गिरावट देखी गई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता बताते हैं कि 1980 में हंट ब्रदर्स ने दुनिया के लगभग एक-तिहाई सिल्वर रिजर्व जमा कर लिए थे। इसके बाद एक्सचेंजों ने मार्जिन मनी बढ़ा दी, जिससे सिल्वर की कीमत $49.50 से गिरकर $11 प्रति औंस हो गई। इसी तरह 2011 में भी चांदी $48 प्रति औंस पर पहुंचने के बाद लगभग 75% गिर गई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतिहास एक बार फिर दोहरा सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

    निवेशकों के लिए संदेश

    चांदी में हाल की तेजी निवेशकों के लिए अवसर और जोखिम दोनों लेकर आई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडस्ट्री की मांग घटने और विकल्पों के इस्तेमाल के चलते चांदी की कीमतें तेजी से घट सकती हैं। ऐसे में निवेशकों को सिर्फ भावनाओं के आधार पर निवेश करने की बजाय सावधानीपूर्वक योजना और मार्केट ट्रेंड्स की निगरानी करनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, पिछले साल की रिकॉर्ड तेजी के बावजूद चांदी के बाजार में मंदी की संभावना बढ़ गई है। FY27 तक 60% तक गिरावट की चेतावनी निवेशकों और इंडस्ट्री दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।