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  • सोना दो दिन में ₹4 हजार महंगा, 10 ग्राम 24 कैरेट का भाव ₹1.59 लाख पहुंचा, चांदी की कीमतें गिरीं

    सोना दो दिन में ₹4 हजार महंगा, 10 ग्राम 24 कैरेट का भाव ₹1.59 लाख पहुंचा, चांदी की कीमतें गिरीं


    नई दिल्ली । आज यानी 24 फरवरी को सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,021 बढ़कर ₹1,59,241 प्रति 10 ग्राम हो गया है। इससे पहले यह ₹1,58,220 पर था। यानी दो कारोबारी दिनों में सोना लगभग ₹4 हजार महंगा हुआ है।

    वहीं, चांदी के दामों में गिरावट देखने को मिली। एक किलो चांदी की कीमत आज ₹1,163 घटकर ₹2,62,912 पर आ गई, जबकि कल यह ₹2,64,075 प्रति किलो थी।इस साल सोने और चांदी की कीमतों में पहले से ही तेजी रही है। 2026 में अब तक सोना ₹26,000 और चांदी ₹33,000 महंगी हो चुकी है। जनवरी में 29 तारीख को सोने ने ₹1,76,000 और चांदी ने ₹3,86,000 प्रति किलो का ऑल टाइम हाई भी छुआ था।

    पिछले साल 2025 में भी सोने और चांदी ने निवेशकों को बड़ा लाभ दिया। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹76,000 का था, जो 31 दिसंबर 2025 को ₹1,33,000 हो गया, यानी लगभग ₹57,000 की बढ़ोतरी। चांदी में भी 167% का इजाफा हुआ। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी ₹86,000 थी, जो साल के अंत तक ₹2,30,000 प्रति किलो हो गई।

    आने वाले समय में सोने की कीमतों को लेकर UBS जैसी इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनियों ने अनुमान लगाया है कि मांग और खरीदारी और बढ़ सकती है। 2025 में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था, जबकि 2026 में यह आंकड़ा 950 टन तक पहुंचने का अनुमान है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश भी 825 टन तक होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार साल के मध्य तक सोना $6,200 प्रति औंस तक जा सकता है, यानी भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने का भाव ₹1.80 लाख तक पहुंच सकता है।

    सोना खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें:

    सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड हॉलमार्क वाला सोना खरीदें। हॉलमार्क नंबर अल्फान्यूमेरिक होता है जैसे AZ4524, जिससे कैरेट पता चलता है। कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का वजन और कीमत दिन के हिसाब से कई सोर्सेज से चेक करें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने का भाव अलग होता है। सोने और चांदी में निवेश करते समय सही समय और प्रमाणित गोल्ड चुनना सबसे जरूरी है, ताकि लाभ सुरक्षित और लंबे समय तक टिकाऊ रहे।

  • चांदी में जबरदस्त उछाल, तीन दिन में ₹34 हजार की तेजी; सोना भी सर्वकालिक रिकॉर्ड पर…

    चांदी में जबरदस्त उछाल, तीन दिन में ₹34 हजार की तेजी; सोना भी सर्वकालिक रिकॉर्ड पर…


    नई दिल्ली।देश में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों को चौंका दिया है। बुधवार को सोना और चांदी दोनों ही नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन IBJA के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेज उछाल दर्ज किया गया है। बुधवार को एक किलो चांदी ₹14,145 महंगी होकर ₹2,77,175 के स्तर पर पहुंच गई। बीते महज तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल ₹34 हजार से अधिक की छलांग लग चुकी है जो हालिया वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।

    सोने की कीमतें भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही हैं। 24 कैरेट सोना बुधवार को ₹1,868 की मजबूती के साथ ₹1,42,152 प्रति 10 ग्राम पर खुला। यह अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है। इससे पहले मंगलवार को सोना ₹1,40,482 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर सोने को निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है।बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के कमजोर होने से सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हो गई है, जिससे निवेशकों का रुझान तेजी से सोने की ओर बढ़ा है। वहीं चांदी को केवल कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से आ रही मजबूत औद्योगिक मांग बड़ी वजह है। इसके अलावा अमेरिका में संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर कंपनियां पहले से चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।आईबीजेए द्वारा जारी किए गए सोने और चांदी के भाव में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी कारण दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में खुदरा स्तर पर कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं। आईबीजेए के रेट का उपयोग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने और बैंकों द्वारा गोल्ड लोन की गणना के लिए किया जाता है।

    अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो 2025 में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब ₹57,033 यानी लगभग 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी के दामों में ₹1,44,403 की जबरदस्त तेजी आई है, जो करीब 167 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।भू-राजनीतिक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के संकेतों ने सोने को एक बार फिर सुरक्षित निवेश का मजबूत विकल्प बना दिया है। चीन सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहे हैं, जिससे मांग और कीमतों दोनों को समर्थन मिल रहा है।

    बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी बनी रह सकती है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की चाल और जोखिम को समझते हुए ही निवेश का फैसला लें।देश में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों को चौंका दिया है। बुधवार को सोना और चांदी दोनों ही नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेज उछाल दर्ज किया गया है। बुधवार को एक किलो चांदी ₹14,145 महंगी होकर ₹2,77,175 के स्तर पर पहुंच गई। बीते महज तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल ₹34 हजार से अधिक की छलांग लग चुकी है, जो हालिया वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।सोने की कीमतें भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही हैं। 24 कैरेट सोना बुधवार को ₹1,868 की मजबूती के साथ ₹1,42,152 प्रति 10 ग्राम पर खुला। यह अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है। इससे पहले मंगलवार को सोना ₹1,40,482 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर सोने को निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के कमजोर होने से सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हो गई है, जिससे निवेशकों का रुझान तेजी से सोने की ओर बढ़ा है। वहीं चांदी को केवल कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।विशेषज्ञों के अनुसार चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से आ रही मजबूत औद्योगिक मांग बड़ी वजह है। इसके अलावा अमेरिका में संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर कंपनियां पहले से चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।

    आईबीजेए द्वारा जारी किए गए सोने और चांदी के भाव में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी कारण दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में खुदरा स्तर पर कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं। आईबीजेए के रेट का उपयोग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने और बैंकों द्वारा गोल्ड लोन की गणना के लिए किया जाता है।अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो 2025 में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब ₹57,033 यानी लगभग 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी के दामों में ₹1,44,403 की जबरदस्त तेजी आई है, जो करीब 167 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।

    भू-राजनीतिक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के संकेतों ने सोने को एक बार फिर सुरक्षित निवेश का मजबूत विकल्प बना दिया है। चीन सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहे हैं, जिससे मांग और कीमतों दोनों को समर्थन मिल रहा है।बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी बनी रह सकती है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की चाल और जोखिम को समझते हुए ही निवेश का फैसला लें।

  • Good News: चांदी की कीमत में आ सकती है 60% तक की बड़ी गिरावट, जानें क्या है वजह

    Good News: चांदी की कीमत में आ सकती है 60% तक की बड़ी गिरावट, जानें क्या है वजह

    नई दिल्ली। पिछले साल चांदी की कीमतों ने रिकॉर्ड उछाल देखा था। तेजी के चलते चांदी की कीमत प्रति किलो 2.54 लाख रुपये तक पहुँच गई थी। हालांकि, अब घरेलू बाजार में यह गिरकर 2.35 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई है। 2025 में चांदी की कीमत में लगभग 180% की बढ़ोतरी हुई थी, जिसका मुख्य कारण बढ़ती डिमांड और सप्लाई में कमी थी। लेकिन अब मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि FY27 के अंत तक चांदी की कीमत में 60% तक की बड़ी गिरावट आ सकती है।

    तेजी के पीछे की वजहें

    चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी के पीछे कई कारण थे। सबसे पहले, सैमसंग द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी में बदलाव की घोषणा ने इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ा दी। इसके अलावा, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव के कारण पेरू और चाड से सप्लाई प्रभावित हुई। साथ ही, 1 जनवरी 2026 से चीन द्वारा चांदी के एक्सपोर्ट पर अप्रत्यक्ष बैन ने भी कीमतें बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। ये सभी कारक मिलकर चांदी को बाजार में महँगी बनाने का काम कर रहे थे।

    एक्सपर्ट्स क्यों जताते हैं गिरावट की आशंका?

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी की कीमतें अब खतरनाक स्तर पर पहुँच गई हैं। इंडस्ट्रियल डिमांड पर कीमतों की बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ सकता है। फोटोवोल्टिक सेल और सोलर पैनल इंडस्ट्री पहले ही चांदी की जगह तांबे का इस्तेमाल बढ़ा रही है। वहीं बैटरी सेक्टर में भी चांदी से कॉपर बाइंडिंग तकनीक अपनाने की कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में चांदी की मांग घटने की संभावना है और FY27 के अंत तक कीमतों में 60% तक की गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है।

    इतिहास खुद को दोहरा सकता है

    चांदी के इतिहास पर नजर डालें तो अक्सर बुल मार्केट के बाद इसमें भारी गिरावट देखी गई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता बताते हैं कि 1980 में हंट ब्रदर्स ने दुनिया के लगभग एक-तिहाई सिल्वर रिजर्व जमा कर लिए थे। इसके बाद एक्सचेंजों ने मार्जिन मनी बढ़ा दी, जिससे सिल्वर की कीमत $49.50 से गिरकर $11 प्रति औंस हो गई। इसी तरह 2011 में भी चांदी $48 प्रति औंस पर पहुंचने के बाद लगभग 75% गिर गई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतिहास एक बार फिर दोहरा सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

    निवेशकों के लिए संदेश

    चांदी में हाल की तेजी निवेशकों के लिए अवसर और जोखिम दोनों लेकर आई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडस्ट्री की मांग घटने और विकल्पों के इस्तेमाल के चलते चांदी की कीमतें तेजी से घट सकती हैं। ऐसे में निवेशकों को सिर्फ भावनाओं के आधार पर निवेश करने की बजाय सावधानीपूर्वक योजना और मार्केट ट्रेंड्स की निगरानी करनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, पिछले साल की रिकॉर्ड तेजी के बावजूद चांदी के बाजार में मंदी की संभावना बढ़ गई है। FY27 तक 60% तक गिरावट की चेतावनी निवेशकों और इंडस्ट्री दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।

  • IBJA रिपोर्ट: चांदी और सोने ने तोड़े रिकॉर्ड, निवेशकों के लिए नई रफ्तार

    IBJA रिपोर्ट: चांदी और सोने ने तोड़े रिकॉर्ड, निवेशकों के लिए नई रफ्तार


    नई दिल्ली।देश के सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों ने नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन IBJA की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी ने साल 2025 में 165 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की और 26 दिसंबर को यह ₹2,28,107 प्रति किलो पर पहुंच गई। 19 दिसंबर को चांदी ₹2,00,336 प्रति किलो पर थी, जो मात्र एक हफ्ते में 27,771 रुपए की तेज वृद्धि दर्शाती है। यह लगातार पांचवां सप्ताह है जब चांदी में मजबूती देखने को मिली है।हफ्तेभर के कारोबार में चांदी ने चार बार नया ऑल टाइम हाई बनाया। शुक्रवार को यह ₹9,124 की एकदिनी तेजी के साथ बंद हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी केवल सट्टा नहीं, बल्कि मजबूत मांग और वैश्विक आर्थिक कारकों का नतीजा है।

    सोने की कीमतों में भी उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। 19 दिसंबर को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,31,779 पर था, जो 26 दिसंबर को बढ़कर ₹1,37,956 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह अब तक का उच्चतम स्तर है। घरेलू सोने की कीमतों में यह बढ़त न सिर्फ स्थानीय मांग बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों से भी प्रभावित मानी जा रही है।साल 2025 की शुरुआत के आंकड़े देखें तो 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोना ₹76,162 प्रति 10 ग्राम था। इसका मतलब है कि सोने में इस साल 81 प्रतिशत की बढ़त हुई। वहीं, चांदी ₹86,017 प्रति किलो से बढ़कर ₹2,28,107 प्रति किलो पर पहुंच गई, यानी सालाना आधार पर 165 प्रतिशत की तेज वृद्धि।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में तेजी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहला, अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती के संकेतों से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोना निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन गया। दूसरा, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनाव ने सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत किया। तीसरा, चीन और अन्य देशों के केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोने की खरीद कर रहे हैं।चांदी की कीमतों में उछाल की वजहें थोड़ी अलग हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में बढ़ती खपत ने औद्योगिक मांग को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, अमेरिका में संभावित टैरिफ के डर से कंपनियां चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं। मैन्युफैक्चरर्स भी संभावित उत्पादन बाधा के चलते अग्रिम खरीद कर रहे हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना है।

    IBJA की दरों में GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होते। इसलिए अलग-अलग शहरों में कीमतों में थोड़ी भिन्नता देखी जा सकती है। यही दरें RBI के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंकों के गोल्ड लोन के लिए आधार बनती हैं।विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशक इस तेजी को ध्यान में रखते हुए सोने और चांदी में निवेश की रणनीति बनाएं। खासकर चांदी में लगातार पांचवे सप्ताह तक मजबूती ने निवेशकों और ज्वेलर्स दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और औद्योगिक मांग को देखते हुए, आने वाले हफ्तों में कीमती धातुओं की कीमतों में और उछाल की संभावना भी बनी हुई है।