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  • सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों में हलचल, अब बाजार की अगली चाल पर टिकी नजरें

    सोने-चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों में हलचल, अब बाजार की अगली चाल पर टिकी नजरें

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ रही दोनों कीमती धातुओं के भाव में अचानक बड़ी टूट दर्ज की गई है। इस गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम गिरकर 1,78,900 रुपये पर बंद हुई। वहीं, सोने की कीमत में 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी आई और यह 1,38,419 रुपये पर पहुंच गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 4 प्रतिशत गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस रह गई, जबकि स्पॉट सिल्वर में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट आई और इसका भाव 49.12 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वैश्विक बाजारों में आई इस कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।

    इस गिरावट की प्रमुख वजह कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा स्रोतों की कीमतों में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। महंगी ऊर्जा के कारण दुनिया भर में महंगाई दोबारा बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों को लेकर बाजार की चिंताएं बढ़ गई हैं।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए हैं कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखा जा सकता है। दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना भी बाजार की चिंता का हिस्सा बनी हुई है। इससे निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

    ब्याज दरें ऊंची रहने पर सोने और चांदी जैसी संपत्तियों का आकर्षण प्रभावित होता है। इन धातुओं से नियमित ब्याज या निश्चित आय नहीं मिलती। इसके विपरीत, फिक्स्ड इनकम और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्प बेहतर रिटर्न की संभावना पेश करते हैं। ऐसे माहौल में निवेशक कीमती धातुओं से पैसा निकालकर दूसरे साधनों में निवेश करना पसंद कर सकते हैं। इसी बदलाव ने सोने-चांदी पर बिकवाली का दबाव बढ़ाया है।

    वैश्विक शेयर बाजारों में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट ने भी स्थिति को प्रभावित किया है। बाजार में नुकसान झेल रहे बड़े निवेशकों और संस्थागत कारोबारियों ने नकदी जुटाने तथा घाटे की भरपाई के लिए सोने-चांदी जैसी आसानी से बेची जा सकने वाली संपत्तियों में बिकवाली की। बाजार में इस प्रक्रिया को लिक्विडेशन कहा जाता है।

    चीन से जुड़ी गतिविधियों ने भी दबाव बढ़ाया है। दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल चीन में निवेशकों द्वारा नकदी जुटाने के लिए सोने की बिक्री किए जाने की खबरों ने बाजार की धारणा प्रभावित की। चांदी में गिरावट सोने से अधिक रही, क्योंकि इसका इस्तेमाल निवेश के साथ सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में भी होता है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और शेयर बाजार की अस्थिरता ने इसकी कीमतों को ज्यादा प्रभावित किया।

    कीमतों में आई गिरावट का अंदाजा पुराने रिकॉर्ड से लगाया जा सकता है। जनवरी 2026 में चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी। मौजूदा भाव के आधार पर यह अपने शिखर से 50 प्रतिशत से अधिक नीचे आ चुकी है। वर्ष 2025 में चांदी ने करीब 170 प्रतिशत का रिटर्न दिया था। इसी तरह जनवरी 2026 में सोने का भाव 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। अब यह अपने उच्चतम स्तर से 42,321 रुपये नीचे आ चुका है। इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,40,054 रुपये रह गई है।

    हालांकि, घरेलू बाजार में आने वाले दिनों में मांग बढ़ने से कीमतों को सहारा मिलने की उम्मीद है। नवंबर में धनतेरस, दिवाली और शादी-विवाह के सीजन के कारण आभूषणों तथा भौतिक सोने की खरीदारी बढ़ सकती है। 6 नवंबर को धनतेरस होने के कारण बाजार को त्योहारी खरीदारी से विशेष उम्मीद है।

    इसके अलावा, दुनिया के केंद्रीय बैंक लगातार अपने भंडार में सोना शामिल कर रहे हैं। उनकी खरीदारी से सोने की दीर्घकालिक मांग को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, निकट भविष्य में कीमतों की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों, महंगाई, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक शेयर बाजारों की स्थिति पर निर्भर करेगी। त्योहारी मांग और औद्योगिक खपत से सुधार की संभावना जरूर है, लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं।

  • सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंचा वायदा भाव….

    सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंचा वायदा भाव….

    नई दिल्ली । देश में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। 31 अक्टूबर 2026 को सोने के वायदा भाव में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शनिवार सुबह तक 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 66 रुपये यानी 0.05 प्रतिशत घटकर 1,38,419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी दिन यह 1,38,485 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहने के कारण अब कारोबार अगले कारोबारी सत्र में होगा।

    बुलियंस के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 1,38,830 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 3,884.90 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में सोने की कीमत गिरकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इस दर में सभी कर शामिल हैं। दूसरी ओर, शहरों के खुदरा भाव के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,410 रुपये, 22 कैरेट की 1,30,550 रुपये और 18 कैरेट की 1,06,840 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    देश के अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, अयोध्या, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, जयपुर, चंडीगढ़ और अमृतसर में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,410 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इन शहरों में 22 कैरेट सोना 1,30,550 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,06,840 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पुणे, नागपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद, रायपुर, भुवनेश्वर और गुवाहाटी जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,260 रुपये प्रति 10 ग्राम है। यहां 22 कैरेट सोना 1,30,400 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,06,690 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै और तमिलनाडु के कई अन्य शहरों में 18 कैरेट सोने की कीमत 1,06,670 रुपये दर्ज की गई है।

    पटना, इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में 24 कैरेट सोना 1,42,310 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। इन शहरों में 22 कैरेट का भाव 1,30,450 रुपये और 18 कैरेट का 1,06,740 रुपये है। नासिक, वसई-विरार, भिवंडी और लातूर में 24 कैरेट सोना 1,42,290 रुपये, 22 कैरेट 1,30,430 रुपये और 18 कैरेट 1,06,720 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    इससे पहले शुक्रवार को भी घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,300 रुपये टूटकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। बृहस्पतिवार को इसकी कीमत 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 122.06 डॉलर यानी 3.04 प्रतिशत गिरकर 3,899.33 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था और 4,000 डॉलर के स्तर से नीचे बना रहा।

    वायदा बाजार में भी शुक्रवार को सोने पर दबाव दिखाई दिया। कमजोर हाजिर मांग के बीच कारोबारियों ने अपने सौदों का आकार घटाया। इसके चलते एमसीएक्स पर दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने के अनुबंध का भाव 976 रुपये यानी 0.68 प्रतिशत गिरकर 1,41,620 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। न्यूयॉर्क के बाजार में सोना 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,983.99 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता रहा।

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल कारकों के चलते बाजार की धारणा प्रभावित हुई। इसका असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर भी पड़ा और शुक्रवार को गिरावट जारी रही। कमजोर हाजिर मांग को भी वायदा कीमतों में कमी की प्रमुख वजह बताया गया। इस तरह 31 अक्टूबर को वायदा भाव में मामूली गिरावट के साथ सोना 1.38 लाख रुपये के स्तर के करीब बना रहा, जबकि सर्राफा और खुदरा बाजार में अलग-अलग दरें दर्ज की गईं।

  • अक्टूबर में सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 39,485 रुपये टूटी, सोना भी सात महीने के निचले स्तर पर

    अक्टूबर में सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 39,485 रुपये टूटी, सोना भी सात महीने के निचले स्तर पर


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सर्राफा बाजार में अक्टूबर 2026 के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार कमजोर होते भाव ने कीमती धातुओं में निवेश करने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। चांदी करीब 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, जबकि सोने की कीमतों में भी पिछले सात महीनों की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। महीनेभर के आंकड़ों के अनुसार चांदी लगभग 40 हजार रुपये और सोना आठ हजार रुपये से अधिक सस्ता हो गया है।

    चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने बाजार में सबसे ज्यादा असर दिखाया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी के वायदा सौदों में शुक्रवार को 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद भाव 1.80 लाख रुपये के स्तर से नीचे फिसलकर 1,79,600 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। इस स्तर पर चांदी का कारोबार पिछली बार दिसंबर 2025 में देखने को मिला था।

    महीने के शुरुआती और अंतिम कारोबारी दिनों की तुलना करें तो चांदी में बड़ी गिरावट सामने आती है। इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर को चांदी की कीमत 2,20,829 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वहीं 30 अक्टूबर को इसका भाव घटकर 1,81,344 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। इस तरह एक महीने में चांदी 39,485 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई। अन्य कारोबार आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में इसकी कुल गिरावट करीब 45 हजार रुपये तक पहुंची।

    सोने की कीमतों में भी लगातार कमजोरी बनी हुई है। शुक्रवार को सोना 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरकर 1,38,249 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह मार्च 2026 के बाद का सबसे कम भाव बताया गया है। सोने में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। सितंबर में इसकी कीमत करीब 5,400 रुपये घटी थी, जबकि अक्टूबर में 10,787 रुपये प्रति 10 ग्राम की अतिरिक्त गिरावट सामने आई।

    महीने के आधार पर देखें तो 24 कैरेट सोने की कीमत 1 अक्टूबर को 1,48,138 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 30 अक्टूबर को यह घटकर 1,40,054 रुपये रह गई। इस तरह अक्टूबर में सोना 8,084 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। लगातार दो महीनों से जारी गिरावट ने सोने के बाजार में तेजी के पिछले रुख को कमजोर किया है।

    दोनों धातुओं की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर से भी काफी नीचे आ चुकी हैं। चांदी का सर्वकालिक उच्च स्तर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम रहा है। मौजूदा कीमतों के आधार पर इसमें रिकॉर्ड स्तर से करीब 57 प्रतिशत की गिरावट बताई जा रही है। वर्ष 2025 में चांदी ने लगभग 170 प्रतिशत की तेजी दर्ज की थी, लेकिन हालिया गिरावट ने उस बढ़त का बड़ा हिस्सा खत्म कर दिया है। इसी तरह सोने का सर्वकालिक उच्च स्तर 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा है। मौजूदा भाव इससे 42,321 रुपये नीचे है।

    कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। अमेरिका में महंगाई बढ़ने से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका मजबूत हुई है। सितंबर में अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (पीसीई) प्राइस इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो मार्च के बाद सबसे अधिक थी। सालाना महंगाई दर भी बढ़कर 3.6 प्रतिशत पहुंच गई।

    ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना से सोने और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की मांग प्रभावित होती है। निवेशक ऐसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जहां उन्हें ब्याज या अन्य रिटर्न मिलने की संभावना हो।

    इसके अलावा मध्य पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हमले से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे महीने तेजी दर्ज की गई। इससे वैश्विक महंगाई लंबे समय तक बने रहने की आशंका पैदा हुई है।

    अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती भी सोने-चांदी पर दबाव का एक कारण मानी जा रही है। तीसरी तिमाही में अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर 3.4 प्रतिशत रही, जो अनुमान से बेहतर बताई गई। मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में निवेश के कारण डॉलर को भी समर्थन मिला है।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरों को 3.75 से 4 प्रतिशत के बीच स्थिर रखा है। हालांकि महंगाई के दबाव के चलते दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसी आशंका के बीच निवेशकों की रणनीति में बदलाव आया है और सोने-चांदी में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।

  • दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

    दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

    नई दिल्ली । दिवाली और धनतेरस से पहले सोने-चांदी की खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार से राहत भरी खबर सामने आई है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 0.59 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में करीब 1.96 प्रतिशत की गिरावट आई। कारोबार के दौरान चांदी 3,730 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई। वैश्विक बाजार में कमजोर रुख और अमेरिका की आर्थिक परिस्थितियों को इस गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले कारोबारी बंद भाव 1,42,596 रुपये प्रति 10 ग्राम से 843 रुपये नीचे आकर 1,41,753 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान इसमें लगभग 0.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, चांदी का भाव पिछले बंद स्तर 1,89,453 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 1,85,723 रुपये पर आ गया। इसमें 3,730 रुपये यानी करीब 1.96 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर सोना लगभग 0.28 प्रतिशत गिरकर 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी की कीमत 1.20 प्रतिशत टूटकर 51.750 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बदलती परिस्थितियों का असर सोने-चांदी की मांग पर पड़ रहा है।

    बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह अमेरिका में महंगाई के आंकड़े हैं। सितंबर में अमेरिकी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई दर में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि सालाना दर 3.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा तीसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई। इन आंकड़ों से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

    बाजार में यह आशंका भी बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। उपलब्ध बाजार अनुमानों के अनुसार, इस संभावना को 80 प्रतिशत से अधिक माना जा रहा है। ब्याज दरें ऊंची रहने पर निवेशकों का रुझान उन विकल्पों की ओर बढ़ सकता है, जिनसे नियमित ब्याज मिलता है। सोना और चांदी ब्याज नहीं देते, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में इनकी मांग प्रभावित होती है।

    तकनीकी स्तरों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1.40 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि कीमत इस दायरे से नीचे जाती है तो इसमें 1.37 लाख से 1.38 लाख रुपये तक गिरावट की संभावना बन सकती है। चांदी के लिए 1.83 लाख से 1.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर अहम माना जा रहा है।

    चांदी की मौजूदा कीमतों की तुलना इस साल बने रिकॉर्ड स्तर से करें तो गिरावट काफी बड़ी दिखाई देती है। जनवरी के आखिरी सप्ताह में चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर छुआ था। इसके बाद कीमतों में लगातार कमजोरी आई और अब यह अपने रिकॉर्ड स्तर के आधे से भी कम भाव पर कारोबार कर रही है।

    इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं से तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई पर दबाव आ सकता है, जिसके कारण केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती का फैसला टाल सकते हैं।

    अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 8 और 9 दिसंबर को होने वाली बैठक पर है। साथ ही महंगाई और रोजगार से जुड़े आगामी आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। यदि आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका घटती है तो सोने-चांदी की कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है। इसके विपरीत महंगाई के मजबूत आंकड़े आने पर गिरावट का दबाव जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

  • गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोने के मुकाबले चांदी हुई सस्ती, जानिए अब किस धातु में निवेश का पलड़ा भारी

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोने के मुकाबले चांदी हुई सस्ती, जानिए अब किस धातु में निवेश का पलड़ा भारी

    नई दिल्ली ।धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों को लेकर निवेशकों और खरीदारों की नजर बाजार के नए संकेतों पर है। इस बीच गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर करीब 76 तक पहुंच गया है। इस बदलाव ने दोनों कीमती धातुओं के प्रदर्शन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। बाजार के जानकारों के अनुसार, मौजूदा अनुपात बताता है कि सोने की तुलना में चांदी अपेक्षाकृत सस्ती हो गई है। ऐसे में आने वाले समय में सोने की कीमतों में और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, यह अनुपात अपने आप में कीमतों की दिशा तय करने वाला संकेत नहीं है।

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो का इस्तेमाल सोने और चांदी की तुलनात्मक कीमत समझने के लिए किया जाता है। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि रेशियो 76 है तो एक औंस सोने के बराबर कीमत हासिल करने के लिए लगभग 76 औंस चांदी चाहिए। इस अनुपात में बढ़ोतरी का अर्थ है कि सोना चांदी के मुकाबले महंगा हो रहा है या चांदी का प्रदर्शन कमजोर पड़ रहा है। इसके विपरीत रेशियो घटने पर चांदी की स्थिति मजबूत मानी जाती है।

    मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर रेशियो इस साल करीब 27 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले एक महीने में ही इसमें लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका स्तर लंबे समय के औसत 65 से 70 के दायरे से भी ऊपर पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने सोने के मुकाबले उसे सस्ता बना दिया है।

    साल 2026 की शुरुआत में दोनों धातुओं के अनुपात में इसके उलट स्थिति देखने को मिली थी। उस समय चांदी की कीमत बढ़कर 121.6 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके चलते गोल्ड-सिल्वर रेशियो गिरकर लगभग 43.6 रह गया था। यह स्तर एक दशक से अधिक समय में सबसे कम था। इसके बाद बाजार में परिस्थितियां बदलीं और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई।

    आंकड़ों के अनुसार, चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 55 प्रतिशत से अधिक टूट चुकी है। इस साल इसकी कीमत में लगभग 27 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह करीब 52.8 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है। दूसरी ओर सोने की कीमत में इस साल लगभग 7 प्रतिशत की कमी आई है और इसका भाव करीब 4,027 डॉलर प्रति औंस बताया गया है। दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट की रफ्तार अलग-अलग रहने से रेशियो में बढ़ोतरी हुई है।

    कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड-सिल्वर रेशियो को खरीदारी या बिकवाली का अंतिम संकेत मानने के बजाय निवेश की रणनीति समझने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। जब यह अनुपात ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर चला जाता है, तब निवेशक सोने की तुलना में चांदी में निवेश धीरे-धीरे बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, रेशियो बहुत नीचे आने पर चांदी में कुछ मुनाफा निकालकर सोने में निवेश बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

    इतिहास में भी इस अनुपात के आधार पर बाजार के बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान गोल्ड-सिल्वर रेशियो लगभग 126 तक पहुंच गया था। इसके बाद अगले पांच महीनों में चांदी की कीमतों में करीब 140 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। आमतौर पर 80 से ऊपर का अनुपात चांदी के लिए अनुकूल स्थिति का संकेत माना जाता है, जबकि 50 से नीचे का स्तर सोने के बेहतर प्रदर्शन की ओर इशारा करता है।

    निवेशकों के लिए इस अनुपात का एक अन्य उपयोग पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना है। इसके तहत सोने और चांदी में निवेश का एक निश्चित हिस्सा तय किया जा सकता है। रेशियो में बड़ा बदलाव आने पर उसी के अनुसार निवेश का अनुपात बदला जा सकता है। हालांकि, केवल एक संकेतक के आधार पर निवेश का फैसला करने के बजाय चरणबद्ध निवेश और जोखिम का ध्यान रखना जरूरी है।

  • धनतेरस-दिवाली से पहले सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव, जानिए 24 से 14 कैरेट तक के ताजा रेट..

    धनतेरस-दिवाली से पहले सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव, जानिए 24 से 14 कैरेट तक के ताजा रेट..

    नई दिल्ली ।धनतेरस और दिवाली से पहले सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव अहम बना हुआ है। घरेलू सर्राफा बाजार से लेकर वायदा कारोबार तक दोनों कीमती धातुओं के भाव में बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में त्योहारों के लिए आभूषण खरीदने या सोने-चांदी में निवेश करने की योजना बना रहे लोगों की नजर ताजा दरों पर है। बाजार में कीमतों की दिशा अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, डॉलर की मजबूती और रुपये की स्थिति से प्रभावित हो रही है।

    गुरुवार, 29 अक्टूबर को कारोबार शुरू होने से पहले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 105 रुपये यानी 0.07 प्रतिशत गिरकर 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,43,705 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, बुलियन बाजार के उपलब्ध आंकड़ों में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,44,000 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,054 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतों में 700 रुपये की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला 24 कैरेट सोना सभी करों सहित 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। खुदरा बाजार के एक अन्य मूल्य आकलन के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव 1,44,100 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट का 1,32,100 रुपये और 18 कैरेट का 1,08,110 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के 28 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने की दर 1,42,707 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 916 शुद्धता वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,30,720 रुपये और 750 शुद्धता वाले 18 कैरेट सोने की कीमत 1,07,030 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। वहीं, 585 शुद्धता वाले 14 कैरेट सोने का भाव 83,484 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इन दरों में अलग-अलग बाजारों, करों और आभूषणों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क के कारण अंतर हो सकता है।

    चांदी की कीमतों में भी मिला-जुला रुख दिखाई दिया। गुरुवार को बाजार खुलने से पहले एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 125 रुपये यानी 0.06 प्रतिशत बढ़कर 1,94,450 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। पिछले सत्र में यह 1,94,325 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बुलियन बाजार के आंकड़ों में चांदी की कीमत 1,94,990 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। वहीं, 28 अक्टूबर तक के उपलब्ध आंकड़ों में 999 शुद्धता वाली चांदी का भाव 1,93,442 रुपये प्रति किलोग्राम था।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी 1.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। दूसरी ओर, खुदरा बाजार के कुछ आकलनों में इसका भाव 2.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी में गिरावट दर्ज की गई और यह 1.23 प्रतिशत टूटकर 53.75 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती नजर आई। अलग-अलग समय और बाजारों के आंकड़ों के कारण चांदी की कीमतों में अंतर दिखाई दे रहा है।

    घरेलू बाजार पर रुपये की कमजोरी का भी असर पड़ रहा है। बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे गिरकर 95.28 प्रति डॉलर पर आ गया। डॉलर की मजबूती और सऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। रुपये के कमजोर होने से सोने का आयात महंगा पड़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी के बावजूद घरेलू कीमतों को सहारा मिल सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के नीतिगत फैसलों पर भी है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले से पहले वैश्विक बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। मिराए एसेट शेयरखान के प्रवीण सिंह ने कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को बाजार के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

    मांग के मामले में भी भारत और चीन के खरीदारों का रुख अलग दिखाई दे रहा है। उपलब्ध बाजार आकलन के अनुसार, चीन में कुछ परिवार कीमतों में नरमी का लाभ उठाकर खरीदारी कर रहे हैं, जबकि भारत में कई खरीदार त्योहारों से पहले और गिरावट की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं। धनतेरस और दिवाली पर खरीदारी करने वालों के लिए कैरेट, शुद्धता और स्थानीय भाव की तुलना करना महत्वपूर्ण है। आभूषण खरीदते समय सोने की कीमत के साथ मेकिंग चार्ज और लागू करों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

  • करवाचौथ से पहले सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 22 कैरेट गोल्ड सस्ता, जानें दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव

    करवाचौथ से पहले सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 22 कैरेट गोल्ड सस्ता, जानें दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव


    नई दिल्ली । करवाचौथ से पहले सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम नीचे आए। सोने की कीमत में करीब 660 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की कमी आई, जबकि चांदी का भाव लगभग 3,260 रुपये प्रति किलोग्राम टूट गया। त्योहारी सीजन में खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए कीमतों में यह बदलाव महत्वपूर्ण है।

    ताजा दरों के अनुसार, 22 कैरेट सोने की कीमत कई प्रमुख शहरों में 1,31,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ गई है। वहीं, 24 कैरेट सोने का भाव भी 1,42,900 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम दर्ज किया गया। बीते सप्ताह के दौरान भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली थी। ऐसे में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों की नजर अब बाजार के ताजा भाव पर है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 27 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,870 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं, 22 कैरेट सोने का भाव 1,30,964 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। जयपुर और लखनऊ में भी दोनों श्रेणियों की कीमतें दिल्ली के समान रहीं।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,720 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,814 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। कोलकाता और बेंगलुरु में भी सोने के भाव इसी स्तर पर रहे। इन शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,720 रुपये और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,814 रुपये प्रति 10 ग्राम रही।

    अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,42,770 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। यहां 22 कैरेट सोने का भाव 1,30,864 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी कीमतें अहमदाबाद के समान रहीं। यहां 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,770 रुपये और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,864 रुपये प्रति 10 ग्राम रही।

    चांदी की कीमतों में भी मंगलवार को उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सोमवार की तुलना में इसका भाव करीब 3,260 रुपये प्रति किलोग्राम नीचे आया। इसके बाद अधिकांश प्रमुख शहरों में चांदी की कीमत लगभग 1,93,150 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। सोने के साथ चांदी के दाम घटने से त्योहारों के दौरान इन धातुओं की खरीदारी पर विचार कर रहे ग्राहकों को ताजा कीमतों की जानकारी लेना जरूरी हो गया है।

    करवाचौथ से पहले सोने और चांदी के भाव में आई कमी ऐसे समय हुई है, जब बाजार में त्योहारों के लिए खरीदारी की गतिविधियां जारी हैं। हालांकि, कीमतों में गिरावट को खरीदारी के लिए निश्चित रूप से बेहतर अवसर नहीं माना जा सकता, क्योंकि वास्तविक खर्च आभूषण के डिजाइन, वजन, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू करों पर भी निर्भर करता है।

    खरीदारी करने से पहले ग्राहकों को अपने शहर के सर्राफा बाजार में उपलब्ध दरों की पुष्टि करनी चाहिए। अलग-अलग दुकानों पर मेकिंग चार्ज और अन्य लागतों में अंतर हो सकता है। इसके अलावा, सोने की शुद्धता और आभूषण पर हॉलमार्क की जांच करना भी जरूरी है। बाजार में कीमतों में होने वाले बदलाव के कारण खरीदारी के समय अंतिम बिल में दर्ज राशि घोषित दर से अलग हो सकती है।

  • लगातार गिरावट के बाद सोने-चांदी में लौटी तेजी, चांदी 0.74% उछली, अब फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजरें

    लगातार गिरावट के बाद सोने-चांदी में लौटी तेजी, चांदी 0.74% उछली, अब फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी नजरें

    नई दिल्ली । लगातार कई दिनों तक गिरावट का सामना करने के बाद सोमवार, 26 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी लौटी। पिछले सप्ताह सोने और चांदी के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की। हालांकि, बाजार में आई इस तेजी को फिलहाल गिरावट के बाद की रिकवरी के रूप में देखा जा रहा है। आगे कीमतों की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और महंगाई से जुड़े आंकड़ों पर निर्भर कर सकती है।

    घरेलू वायदा बाजार में सोने के दिसंबर अनुबंध का भाव लगभग 0.50 प्रतिशत यानी 761 रुपये बढ़कर 1,42,733 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान सोने ने पिछले बंद भाव 1,42,024 रुपये प्रति 10 ग्राम से 864 रुपये की बढ़त हासिल करते हुए 1,42,888 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ। यह तेजी लगभग 0.60 प्रतिशत रही।

    चांदी के दिसंबर वायदा अनुबंध में भी मजबूती दर्ज की गई। इसका भाव करीब 0.49 प्रतिशत यानी 968 रुपये बढ़कर 1,96,687 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान चांदी ने पिछले बंद स्तर 1,95,719 रुपये से 1,467 रुपये की छलांग लगाई और 1,97,186 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इस दौरान चांदी में 0.74 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

    पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद दोनों धातुओं में आई खरीदारी को बाजार की अहम गतिविधि माना जा रहा है। उस दौरान सोने की कीमत लगभग 4 प्रतिशत और चांदी की कीमत 7 प्रतिशत से अधिक टूट गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव का असर दिखाई दिया था। स्पॉट गोल्ड जुलाई के बाद पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया था।

    अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार कॉमेक्स में सोमवार सुबह सोना लगभग 0.48 प्रतिशत बढ़कर 4,027 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। सत्र के दौरान इसने 4,032.90 डॉलर प्रति औंस का उच्चतम स्तर भी छुआ। चांदी लगभग 0.74 प्रतिशत की तेजी के साथ 54.35 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची और कारोबार के दौरान 54.47 डॉलर प्रति औंस का स्तर दर्ज किया।

    बाजार में सोने के लिए 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालिया गिरावट के बाद इस स्तर के आसपास खरीदारी लौटने से कीमतों को सहारा मिला है। हालांकि, ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जिससे निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक पर है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना सीमित है, लेकिन दिसंबर में दरों में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। ब्याज दरों को लेकर संकेत सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

    इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर यानी पीसीई महंगाई आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि महंगाई अनुमान से अधिक रहती है, तो ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति कीमती धातुओं पर दबाव डाल सकती है।

    चांदी ने हालिया कारोबार में सोने की तुलना में बेहतर रिकवरी दिखाई है, लेकिन तकनीकी संकेतों के अनुसार इसमें अभी पूरी तरह सुधार नहीं हुआ है। घरेलू बाजार में चांदी के लिए 2 लाख से 2.02 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का क्षेत्र प्रतिरोध माना जा रहा है, जबकि 1.92 लाख से 1.94 लाख रुपये का स्तर समर्थन दे सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ब्रेंट क्रूड हाल के दिनों में 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा था। तेल महंगा रहने से महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में कटौती टलने का जोखिम रहता है। ऐसे में निवेशकों की नजर डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और ऊर्जा बाजार की चाल पर भी बनी हुई है।

  • दिवाली से पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, जानिए किन वजहों से टूटा भाव और कब लौट सकती है तेजी

    दिवाली से पहले सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, जानिए किन वजहों से टूटा भाव और कब लौट सकती है तेजी


    नई दिल्ली ।
    दिवाली और त्योहारी सीजन से पहले सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारत के वायदा और खुदरा बाजार तक सोने के भाव में कमजोरी दर्ज की गई है। महंगे कच्चे तेल, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि, कीमतों में आई इस नरमी को त्योहारों और शादी के सीजन के लिए खरीदारी के संभावित अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर इस सप्ताह सोने का वायदा भाव करीब 3.50 प्रतिशत गिर गया। खुदरा बाजार में भी कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव पहले 1,46,426 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 23 अक्टूबर तक घटकर 1,41,630 रुपये रह गया। इस तरह एक सप्ताह में इसकी कीमत 4,796 रुपये प्रति 10 ग्राम कम हो गई।

    इसी अवधि में 22 कैरेट सोने के दाम भी नीचे आए। इसका भाव 1,34,207 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर 1,29,566 रुपये रह गया। यानी 22 कैरेट सोना 4,641 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। कीमतों में इस गिरावट से उन ग्राहकों को राहत मिल सकती है, जो दिवाली या आगामी शादी समारोहों के लिए आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।

    वैश्विक बाजार में भी सोने की स्थिति कमजोर बनी हुई है। शुक्रवार को इसकी कीमत करीब तीन महीने के निचले स्तर तक पहुंच गई। पूरे सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में लगभग चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो जून के बाद इसका सबसे कमजोर साप्ताहिक प्रदर्शन बताया गया है। इस गिरावट के बाद निवेशकों की नजर 4,000 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर पर टिकी है। यह स्थिति अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक से ठीक पहले बनी है।

    सोने की कीमतों में गिरावट की एक प्रमुख वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। सऊदी अरब में हूती हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी, जिससे ब्रेंट क्रूड पांच महीने से अधिक के उच्च स्तर पर पहुंच गया। महंगा तेल महंगाई को बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं, जिससे सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित होती है।

    अमेरिका में उपभोक्ता और उत्पादक महंगाई के आंकड़े भी बाजार की चिंता बढ़ाने वाले रहे हैं। कारोबारियों को आगामी बैठक में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने की उम्मीद है, लेकिन साल के अंत में मौद्रिक नीति सख्त रहने की आशंका बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स में कुछ नरमी के बावजूद इसका स्तर करीब 101.5 बना हुआ है। फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के समय से सोने में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट का भी उल्लेख किया गया है।

    तकनीकी संकेतों के मुताबिक, निकट अवधि में सोने पर दबाव बना रह सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे टिकती है, तो 3,950 डॉलर तक गिरावट की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर, 3,950 से 4,000 डॉलर का दायरा संभावित खरीदारी और समर्थन का क्षेत्र माना जा रहा है। चांदी के लिए 50 से 55 डॉलर के स्तर को अहम समर्थन बताया गया है। कुछ विशेषज्ञों ने आने वाले हफ्तों में 10 से 15 प्रतिशत तक सुधार की संभावना जताई है, जबकि सोने में तेजी का रुझान मजबूत होने के लिए 4,200 डॉलर के ऊपर टिकना महत्वपूर्ण माना गया है।

    दिवाली के दौरान सोने और आभूषणों की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। भारतीय खरीदार सोने को निवेश और पारंपरिक खरीदारी, दोनों के लिहाज से महत्व देते हैं। बाजार में हल्के वजन के आभूषणों और पुराने सोने के बदले नए आभूषण खरीदने की योजनाओं की मांग भी बढ़ रही है। ग्राहक अब डिजाइन के साथ शुद्धता, प्रामाणिकता और पारदर्शिता पर भी ध्यान दे रहे हैं। हालांकि, दिवाली से पहले कीमतों में दोबारा उछाल आएगा या गिरावट जारी रहेगी, यह वैश्विक बाजार, डॉलर की चाल और अमेरिकी मौद्रिक नीति के संकेतों पर निर्भर करेगा।

  • सोने-चांदी में गिरावट के बीच तांबे की कीमतों में तेजी, सप्लाई संकट से बढ़ी बाजार की चिंता..

    सोने-चांदी में गिरावट के बीच तांबे की कीमतों में तेजी, सप्लाई संकट से बढ़ी बाजार की चिंता..

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में 23 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के बीच तांबे में तेजी दर्ज की गई। घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स तक तांबे की कीमतों में बढ़त देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर औद्योगिक जरूरतों के लिए तांबे की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, जबकि इसकी आपूर्ति को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं। मांग और उपलब्धता के बीच इसी अंतर का असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

    घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर तांबे का भाव 0.53 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,369.90 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में इसकी कीमत 0.95 प्रतिशत बढ़कर 6.4590 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई। दोनों बाजारों में तेजी के बीच तांबा निवेशकों और औद्योगिक क्षेत्र की नजर में बना हुआ है। दूसरी ओर, इसी दिन सोने का भाव एमसीएक्स पर 1,42,871 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 1,95,999 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।

    तांबे की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे प्रमुख कारण वैश्विक मांग में बढ़ोतरी और आपूर्ति का सीमित होना है। आधुनिक उद्योगों में इस धातु का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण, बिजली के पावर ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास में तांबे की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े डाटा सेंटरों के विस्तार के कारण भी तांबे की जरूरत बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में बिजली के तारों, विद्युत प्रणालियों और अन्य उपकरणों के लिए तांबे की आवश्यकता होती है।

    मांग में इस बढ़ोतरी के बावजूद उत्पादन में कई बाधाएं सामने आ रही हैं। दुनिया की विभिन्न तांबा खदानों में उत्पादन प्रभावित होने से बाजार में उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है। चिली जैसे प्रमुख तांबा उत्पादक क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर असर पड़ने की जानकारी है। कुछ खदानों में हड़तालों के कारण कामकाज बाधित हुआ है, जबकि दूसरी जगहों पर अयस्क की गुणवत्ता घटने से उत्पादन संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इससे मौजूदा खदानों से तांबे की आपूर्ति बनाए रखना कठिन हो रहा है।

    नई खदानें विकसित करना भी आसान नहीं है। इसके लिए लंबा समय और बड़ी पूंजी की जरूरत होती है। दूरदराज के क्षेत्रों में खनन परियोजनाएं शुरू करने पर लागत बढ़ जाती है। नई परियोजनाओं से उत्पादन शुरू होने में देरी होने के कारण बढ़ती वैश्विक मांग के अनुरूप आपूर्ति बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में तांबे के बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।

    अमेरिका की टैरिफ नीतियों को लेकर बनी आशंकाएं भी बाजार की परिस्थितियों को प्रभावित कर रही हैं। संभावित शुल्क संबंधी बदलावों के मद्देनजर अमेरिका में तांबे का भंडार बढ़ाए जाने से वैश्विक आपूर्ति के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इससे विभिन्न बाजारों में उपलब्ध धातु की मात्रा और कीमतों पर दबाव की स्थिति बन सकती है।

    बाजार में तांबे की भविष्य की कीमतों को लेकर भी चर्चा तेज है। मजबूत औद्योगिक मांग, सीमित उत्पादन और नई खदानों के विकास में लगने वाला समय इसकी कीमतों के लिए महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। हालांकि, भविष्य में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह मांग, आपूर्ति, उत्पादन और व्यापार नीतियों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा। फिलहाल, सोने-चांदी में गिरावट के विपरीत तांबे में दर्ज तेजी ने कमोडिटी बाजार में इस धातु की अलग स्थिति को रेखांकित किया है।