Tag: Simhastha 2028

  • सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की थाली से पूजा के फूलों तक का रोडमैप तैयार, 15 जिलों से उज्जैन पहुंचेगी उपज, सप्लाई चेन पर रहेगा फोकस

    सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की थाली से पूजा के फूलों तक का रोडमैप तैयार, 15 जिलों से उज्जैन पहुंचेगी उपज, सप्लाई चेन पर रहेगा फोकस


    उज्जैन  । उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को लेकर तैयारियां अभी से तेज होने लगी हैं। आयोजन में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इतने बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान भोजन और पूजा सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए उद्यानिकी विभाग ने सब्जियों और फूलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए दो साल का रोडमैप तैयार किया है। योजना के तहत मध्यप्रदेश के 15 जिलों में करीब 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में उत्पादन क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और लगभग 20 हजार किसानों को इससे जोड़ने की तैयारी है।

    सिंहस्थ करीब 60 दिनों तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही रहेगी और भोजन की व्यवस्था के लिए बड़ी मात्रा में सब्जियों की जरूरत पड़ेगी। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 66 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की आवाजाही हो सकती है। यदि प्रति व्यक्ति रोजाना दो किलोग्राम सब्जी की जरूरत का मानक माना जाए तो संभावित मांग लगभग 13 हजार टन प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। हालांकि यह एक अनुमानित गणना है। वास्तविक खपत श्रद्धालुओं के ठहरने की अवधि भोजन व्यवस्था और सब्जियों के वास्तविक इस्तेमाल पर निर्भर करेगी। इतनी बड़ी संभावित जरूरत को देखते हुए विभाग का जोर स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और दूसरे जिलों से नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।

    योजना के तहत करीब 16 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त उत्पादन का प्रस्ताव है। इसमें आठ हजार हेक्टेयर में सब्जियां और आठ हजार हेक्टेयर में फूलों की खेती विकसित करने की तैयारी की जा रही है। क्लस्टर आधारित मॉडल में एक क्षेत्र के कई किसान मांग के अनुसार योजनाबद्ध तरीके से फसल उगाएंगे। इससे विभाग को पहले से जानकारी मिल सकेगी कि किस जिले और क्षेत्र में कौन सी फसल कितने रकबे में लगाई जा रही है और उससे कितनी उपज मिलने की संभावना है। इस तरह आयोजन के समय अचानक बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन और आपूर्ति की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।

    सब्जियों के उत्पादन के लिए उज्जैन संभाग के उज्जैन आगर-मालवा शाजापुर देवास रतलाम नीमच और मंदसौर जिलों को प्रस्तावित क्लस्टर योजना में शामिल किया गया है। इन जिलों में हाइब्रिड सब्जियों का अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को खेती की तकनीक और फसल चयन के संबंध में प्रशिक्षण देने की तैयारी है। जरूरत के मुताबिक अलग-अलग क्षेत्रों में आलू प्याज टमाटर और हरी सब्जियों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यदि किसी एक क्षेत्र में फसल खराब होती है तो दूसरे जिलों से आपूर्ति बढ़ाकर कमी को पूरा करने की कोशिश की जाएगी।

    सिंहस्थ में पूजा और धार्मिक गतिविधियों के कारण फूलों की मांग भी काफी बढ़ने की संभावना है। इसके लिए उज्जैन इंदौर देवास आगर-मालवा खंडवा छतरपुर मैहर और दतिया में फूलों के उत्पादन क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है। उज्जैन में करीब 4200 हेक्टेयर में गेंदा उत्पादन के लिए 25 क्लस्टर और 240 गांवों को जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा गुलाब की खेती का रकबा बढ़ाकर 250 हेक्टेयर से अधिक करने की तैयारी है। फूलों की आधुनिक खेती और बेहतर पौध सामग्री उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन में करीब 19 एकड़ में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फ्लोरीकल्चर विकसित करने की योजना भी है।

    हालांकि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। खेत से निकली सब्जियों को समय पर उज्जैन तक पहुंचाने के लिए संग्रहण केंद्र ग्रेडिंग पैकिंग और जरूरत के अनुसार कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था भी जरूरी होगी। सब्जियां जल्दी खराब होती हैं इसलिए परिवहन में देरी होने पर उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। विभाग को मांग और उपलब्धता का रिकॉर्ड तैयार कर आपूर्ति की निगरानी भी करनी होगी। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस जिले से कितनी सब्जियां भेजनी हैं और किस क्षेत्र में उनकी जरूरत अधिक है।

    उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक केएस मंडलाई के मुताबिक सिंहस्थ में सब्जियों और फूलों की मांग बढ़ने को देखते हुए दो साल पहले से तैयारी की जा रही है। किसानों को चिह्नित कर प्रशिक्षण देने और विशेष क्लस्टर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। अब इस योजना की सफलता उत्पादन बढ़ाने के साथ परिवहन भंडारण और वितरण के बीच तालमेल पर निर्भर करेगी। यदि पूरी व्यवस्था समय पर तैयार हो जाती है तो सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की जरूरत पूरी करने के साथ किसानों को भी अपनी उपज के लिए बड़ा बाजार मिल सकता है।

  • MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे

    MP: सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच दो दिन के लिए ओंकारेश्वर बंद…. ऑटो-नाव तक थमे


    खंडवा।
    ओंकारेश्वर (Omkareshwar) में सिंहस्थ 2028 (Simhastha 2028) की तैयारियों के तहत बनने वाले प्रोजेक्ट्स से प्रभावित हो रहे स्थानीय लोग अब लामबंद हो गए हैं. जिला प्रशासन से अपनी मांगों पर सहमति नहीं बनने के विरोध में नगरवासियों ने दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का फैसला किया है।

    19 अक्टूबर से बंद के पहले दिन ओंकारेश्वर में लगभग सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद रहीं. यहां तक कि फुटपाथ पर फूल-माला, प्रसाद आदि बेचने वाले छोटे दुकानदारों ने भी अपना कारोबार बंद (Business Closed) रखा. इधर, प्रशासन ने कहा है कि स्थानीय लोगों से बातचीत चल रही है और उनकी लगभग सभी मांगों पर सहमति बन चुकी है।

    ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं. इस विस्तारीकरण योजना के तहत सड़कों और रास्तों के किनारे दुकानें, मकान एवं अन्य गतिविधियां संचालित करने वालों को विस्थापित किया जा रहा है. इसके लिए पूरी कार्ययोजना बनाई गई है.


    प्रशासन के सामने 19 मांगे रखी

    स्थानीय लोगों की समिति ने पिछले महीने जिला प्रशासन के सामने अपनी 19 मांगें रखी थीं. उनका कहना है कि जिला प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं, इसलिए दो दिन ओंकारेश्वर बंद रखने का निर्णय लिया गया है. स्थानीय लोगों की मांग है कि जिनकी दुकानें, मकान एवं रोजगार से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, उन्हें इसके बदले बेहतर पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए।

    ओंकारेश्वर बंद को स्थानीय लोगों के साथ साधु-संतों का भी समर्थन मिला. उनका कहना है कि पिछले साल भी जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. अब वे पक्का और भरोसेमंद आश्वासन चाहते हैं.


    छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद

    ओंकारेश्वर बंद के दौरान छोटी-बड़ी सभी दुकानें बंद रहीं. यहां तक कि होटल और स्थानीय परिवहन सेवाएं भी बंद रहीं. इस कारण बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को खासी परेशानी हुई. श्रद्धालुओं का भी कहना है कि स्थानीय लोगों के रोजगार और आजीविका का ध्यान रखते हुए कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

    इधर, जिला प्रशासन ने कहा कि स्थानीय लोगों से लगातार बातचीत जारी है. उनकी ओर से रखी गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया है और 19 में से 17 मांगें मानी जा चुकी हैं. पुनर्वास के लिए स्थान तय करने को लेकर थोड़ी दिक्कत आ रही है, जिसे भी जल्द सुलझा लिया जाएगा. जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्थानीय लोगों का बेहतर पुनर्वास किया जाए, ताकि उनकी आजीविका पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।

  • सिंहस्थ से पहले अतिक्रमण पर नगर निगम का एक्शन, जयसिंहपुरा में महासिद्ध आश्रम के निर्माण ढहाए, दो नोटिस के बाद कार्रवाई

    सिंहस्थ से पहले अतिक्रमण पर नगर निगम का एक्शन, जयसिंहपुरा में महासिद्ध आश्रम के निर्माण ढहाए, दो नोटिस के बाद कार्रवाई


    उज्जैन । उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को लेकर प्रशासन ने सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई तेज कर दी है। इसी अभियान के तहत रविवार तड़के नगर निगम की टीम ने जयसिंहपुरा क्षेत्र में नरसिंह घाट के पास स्थित महासिद्ध आश्रम यानी एमएस सुकृत ट्रस्ट के परिसर में बने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की। सुबह करीब पांच बजे पहुंची टीम ने तीन पोकलैंड मशीनों की मदद से नवनिर्मित भवन के कुछ हिस्सों को ध्वस्त किया। हालांकि भवन के भीतर रखा सामान निकालने के लिए समय दिए जाने के बाद कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
    नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर के अनुसार आश्रम परिसर में सिंहस्थ के लिए सुरक्षित रखी गई भूमि पर हाल ही में तीन अलग-अलग पक्के भवनों का निर्माण किया गया था। निगम प्रशासन ने इन निर्माणों को हटाने के लिए आश्रम संचालक को पहले ही दो बार नोटिस जारी किए थे। निर्धारित समय सीमा में निर्माण नहीं हटाए जाने के बाद रविवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासन का उद्देश्य सिंहस्थ क्षेत्र की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना है ताकि आयोजन के दौरान जरूरी व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रह सके।
    कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को पता चला कि नवनिर्मित भवन के अंदर आश्रम का काफी सामान रखा हुआ है। ऐसे में सामान को बाहर निकालने के लिए समय दिया गया। इसके बाद नगर निगम की टीम ने फिलहाल कार्रवाई रोक दी और मौके से लौट गई। अधिकारियों के मुताबिक दी गई समय सीमा समाप्त होने के बाद शेष अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया फिर शुरू की जाएगी। इस तरह भवन के कुछ हिस्सों पर कार्रवाई हो चुकी है जबकि बाकी निर्माण हटाने की प्रक्रिया सामान खाली होने के बाद आगे बढ़ेगी।
    सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान पिछले कुछ समय से लगातार चलाया जा रहा है। प्रशासन का जोर उन जमीनों को खाली कराने पर है जिन्हें सिंहस्थ के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है। ऐसे क्षेत्रों में पक्के निर्माण होने से भविष्य में आयोजन संबंधी सुविधाओं और आवागमन की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए नगर निगम की टीमें अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर निर्माणों की जांच कर रही हैं और नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रही हैं।
    महासिद्ध आश्रम पर कार्रवाई से दो दिन पहले नगर निगम की टीम ने इसी क्षेत्र में स्थित हरियाणा वाले सत्यगिरि महाराज के आश्रम में किए गए अवैध निर्माण को भी पोकलैंड मशीन की मदद से ध्वस्त किया था। लगातार हो रही कार्रवाई से स्पष्ट है कि प्रशासन सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के अभियान को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि हर मामले में संबंधित निर्माण की स्थिति और जारी नोटिस के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
    सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए भूमि और यातायात प्रबंधन महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन को अस्थायी सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत होगी। ऐसे में अतिक्रमण हटाने की मुहिम को आयोजन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। महासिद्ध आश्रम के मामले में फिलहाल कार्रवाई आंशिक रूप से पूरी हुई है और सामान हटाने के लिए निर्धारित समय बीतने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • मंदिर का हिस्सा टूटा लेकिन टस से मस नहीं हुए खड़े हनुमान जी! श्रद्धालुओं ने माना चमत्कार प्रशासन ने अब कहा प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई

    मंदिर का हिस्सा टूटा लेकिन टस से मस नहीं हुए खड़े हनुमान जी! श्रद्धालुओं ने माना चमत्कार प्रशासन ने अब कहा प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई


    उज्जैन । उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर खड़े हनुमान मंदिर का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग तक सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी दौरान करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन सड़क की जद में आया जिसके बाद मंदिर की चाहरदीवारी और भवन के कुछ हिस्से को हटाया गया। इसके बाद मंदिर में विराजमान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की चर्चा सामने आई। दावा किया गया कि प्रतिमा को हटाने के लिए कई प्रयास किए गए लेकिन बजरंगबली की प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे हनुमान जी का दैवीय चमत्कार बताया जाने लगा।

    मामला तेजी से बढ़ा तो मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। संत समाज भी इस मुद्दे पर सामने आया और प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की गई। संतों का कहना था कि यदि प्रतिमा को हटाने की कोशिश के बाद भी वह अपनी जगह पर बनी हुई है तो इसे आस्था से जुड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मंदिर में बटुकों की मंडली ने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी किया। श्रद्धालुओं के बीच मंदिर को लेकर उत्सुकता बढ़ती गई और दर्शन करने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ।

    इस बीच कांग्रेस भी इस मामले को लेकर मैदान में उतर आई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भगवा ध्वज लेकर मंदिर पहुंचकर प्रतिमा को हटाए जाने की कथित योजना का विरोध किया। वहां रामधुन गाई गई और हनुमान चालीसा का पाठ कर पूजा अर्चना की गई। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की।

    अब इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से सामने आया बयान चर्चा का नया विषय बन गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया है। यानी जिस प्रतिमा को हटाने की कोशिश और उसके अपनी जगह से नहीं हिलने की चर्चा पिछले दिनों से चल रही थी उस पर प्रशासन ने अलग तस्वीर पेश की है। इस बयान के बाद पूरे मामले में प्रशासन के रुख को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    मंदिर की प्रतिमा को फिलहाल टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर लंबे समय से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव भी काफी गहरा है। चाहरदीवारी का हिस्सा हटने के बाद भी श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।

    मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू प्रतिमा की प्राचीनता से जुड़ा है। बताया गया है कि पुरातत्व विभाग प्रतिमा की उम्र और ऐतिहासिक महत्व को लेकर जांच कर रहा है। शुरुआती स्तर पर इसके करीब 1000 साल पुराने होने की संभावना जताई गई है हालांकि इसकी वास्तविक उम्र को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ धार्मिक भावनाओं का सम्मान बनाए रखने की चुनौती भी है। फिलहाल संत समाज संवाद से समाधान चाहता है जबकि श्रद्धालु प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर प्रशासन आगे क्या फैसला करता है।

  • सिंहस्थ: 2028 के दृष्टिगत मध्य प्रदेश में बढ़ाई जा रही रेल सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ यादव

    सिंहस्थ: 2028 के दृष्टिगत मध्य प्रदेश में बढ़ाई जा रही रेल सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आगामी सिंहस्थ : 2028 के दृष्टिगत राज्य में रेलवे सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर चल रहा है। भोपाल को निशातपुरा के रूप में चौथे रेलवे स्टेशन की सौगात मिली है। इस रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनों के ठहराव (स्टापेज) होगा। निशातपुरा रुकने वाली ट्रेनें शिव और शक्ति की प्रतीक हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार शाम को भोपाल के नव विकसित निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर दो रेल गाड़ियों- डॉ. अंबेडकर नगर-श्रीमाता वैष्णोदेवी कटरा मालवा एक्सप्रेस और वेरावल-जबलपुर एक्सप्रेस ट्रेन के निशातपुर स्टेशन पर नए ठहराव (स्टॉपेज) के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मालवा एक्सप्रेस को झंडी दिखाकर रवाना किया।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। हर विभाग में नए कीर्तिमान गढ़े जा रहे हैं। गत 12 साल में रेलवे का “न भूतो न भविष्यति” विकास हुआ है। भारतीय रेलवे में द्रुत गति से विकास कार्य हो रहे हैं। निशातपुरा स्टेशन के शुभारंभ से अब नई दिल्ली से उज्जैन-इंदौर की ओर जाने वाली रेलगाड़ियों को ट्रैक और इंजन बदलने की जरूरत नहीं होगी।

    अब नई दिल्ली से उज्जैन-इंदौर आने-जाने के लिए बचेगा समय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय रेलवे के माध्यम से उज्जैन सिंहस्थ: 2028 को लेकर लगातार सौगातें मिल रही हैं। सिंहस्थ : 2028 के आयोजन में अनुमानित 40 करोड़ श्रद्धालु मध्य प्रदेश आएंगे। ऐसे में नए रेलवे स्टेशन यात्रियों की भीड़ का दबाव कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे। निशातपुरा क्षेत्र में 14 करोड़ की लागत से विकसित निशातपुरा स्टेशन नागरिकों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा। यहां अनेक नई सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। नई दिल्ली से उज्जैन-इंदौर आने-जाने के लिए समय बचेगा। भोपाल मुख्य स्टेशन जाए बिना डायरेक्ट ट्रेन मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि जब किसी क्षेत्र में रेल लाइन आती है, तो यात्री सुविधाओं के साथ व्यापार, कृषि और माल ढुलाई आदि कार्यों में सुविधा मिलती है। प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव मध्य प्रदेश में रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए पूर्ण सहयोग कर रहे हैं।

    मध्य प्रदेश के लिए भारत सरकार ने रेल बजट में की 24 गुना बढ़ोतरी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे व्यापार-व्यवसाय की सुगमता और रोजगार बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। भारतीय रेल का नेटवर्क इतना बड़ा है, जिसमें कई देशों की कुल आबादी के बराबर लोग हमारी ट्रेनों में सफर कर रहे होते हैं। देश में रेलवे के 70 मंडल मुख्यालय हैं। मध्य प्रदेश में रेलवे ट्रैक का शत प्रतिशत विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है। भारतीय रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक रेल गाड़ियों की शुरुआत की है। अब भोपाल के पास ट्रेनों के आधुनिक कोच तैयार किए जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि देश के साथ ही मध्य प्रदेश बदल रहा है। वर्ष 2009 से 2014 तक मध्य प्रदेश में रेलवे का बजट केवल 632 करोड़ रुपये था, जो अब वर्ष 2026-27 तक 15 हजार 288 करोड़ रुपये हो गया है। भारत सरकार ने प्रदेश के लिए रेल बजट में 24 गुना वृद्धि की है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में रेलवे के 1 लाख 18 हजार करोड़ लागत के नए कार्य जारी हैं। वर्ष 2014 के बाद प्रदेश में 2800 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनों का निर्माण हुआ है, जो डेनमार्क देश की कुल सीमा से भी अधिक है।

    प्रतिदिन बिछाया जा रहा है 34 किलोमीटर रेलवे ट्रेक
    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में जहां एक दिन में मात्र 4 किलोमीटर रेलवे ट्रैक तैयार होता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में ट्रैक बिछाने की रफ्तार 34 किलोमीटर प्रतिदिन है। भोपाल में अब रानी कमलापति स्टेशन, भोपाल मेन स्टेशन, संत हिरदाराम स्टेशन और अब निशातपुरा स्टेशन हो गए हैं। मध्य प्रदेश को 13 नए अमृत स्टेशनों की सौगात मिली है। वडोदरा -रतलाम और इटारसी-भोपाल-बीना रूट पर तीसरी और चौथी रेल लाइन के काम चल रहे हैं। पहले कभी मीटर गेज लाइनें हुआ करती थीं, जो धीरे-धीरे ब्रॉडगेज हो गईं और ब्रॉडगेज डबल लाइन हो गईं। अब ट्रिपल और फोर लाइन का विकास हो रहा है।

    ध्य प्रदेश में रेल सुविधाएं बढ़ीं

    पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि पश्चिम मध्य रेलवे अपने यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा प्रदान करने के लिए अधोसंरचना के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में रेल मार्गों का विकास, आधुनिक ट्रेनों का संचालन, सेफ्टी और सिक्योरिटी में सुधार रेल यात्रा को नए आयाम प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में मध्य प्रदेश को रेलवे की अनेक सुविधाएं मिली हैं। खजुराहो से वाराणसी वंदेभारत एक्सप्रेस, रीवा-पुणे, डॉ. अंबेडकर नगर-गोंडा के लिए नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। इसी अवधि में बीना-इटारसी और कटनी-बीना की तीसरी लाइन, कटनी अपग्रेड सेपरेटर, इटारसी के अप और डाउन ग्रेड सेपरेटर के साथ ही कटनी-सिंगरौली-रीवा-सतना रेल रूट का दोहरीकरण किया गया है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में फ्लाई ओवर का शुभारंभ किया है, जिसमें मदन महल स्टेशन पर बना केबिल स्टे ब्रिज शामिल है। प्रदेश में 13 अमृत स्टेशनों का जीर्णोद्धार कार्य पूरा हो चुका है। स्टेशनों पर यात्रियों के लिए एस्केलेटर और एफओबी उपलब्ध कराए रहे हैं। भोपाल स्टेशन के पास बने निशातपुरा स्टेशन पर दो नई ट्रेनों के ठहराव से यात्रियों को भोपाल स्टेशन की भीड़भाड़ से राहत मिलेगी। पश्चिम मध्य रेलवे निशानपुरा स्टेशन को यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    कार्यक्रम में विधायक विष्णु खत्री, महापौर मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, भोपाल मंडल रेल प्रबंधक पंकज त्यागी सहित पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों ने रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया और निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर गाड़ियों का ठहराव प्रारंभ होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।

  • खजराना गणेश मंदिर में तेज़ी से विकास कार्य, डेढ़ फीट नीचे होगा सभामंडप, लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा होगी दोगुनी

    खजराना गणेश मंदिर में तेज़ी से विकास कार्य, डेढ़ फीट नीचे होगा सभामंडप, लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा होगी दोगुनी


    इंदौर । इंदौर का विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए बड़े बदलावों से गुजर रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के इस प्रमुख केंद्र पर दर्शन व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए मंदिर परिसर में व्यापक विकास कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य यह है कि भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या के बावजूद दर्शन व्यवस्था सुचारु और व्यवस्थित बनी रहे।

    मंदिर के गर्भगृह का प्रवेश द्वार पहले ही चौड़ा किया जा चुका है। अब गर्भगृह के बाहर स्थित सभामंडप को लगभग डेढ़ फीट नीचे किया जा रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ सामान्य श्रद्धालुओं को मिलेगा। अभी तक सभामंडप में विशेष पूजन, वीआईपी दर्शन या नवविवाहित दंपतियों के धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पीछे खड़े श्रद्धालुओं का दृश्य बाधित हो जाता था, जिससे भगवान के दर्शन करने में कठिनाई होती थी।

    मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार सभामंडप का स्तर नीचे किए जाने से लाइन में खड़े श्रद्धालुओं को बिना किसी अवरोध के सीधे भगवान गणेश के दर्शन हो सकेंगे। इससे मंदिर में आने वाले प्रत्येक भक्त को बेहतर धार्मिक अनुभव मिलेगा और भीड़ प्रबंधन भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

    मंदिर परिसर के लिए तैयार मास्टर प्लान के तहत केवल सभामंडप ही नहीं बल्कि कई अन्य विकास कार्य भी प्रस्तावित हैं। आने वाले समय में यहां आधुनिक दर्शन हॉल का निर्माण भी किया जाएगा। इस हॉल के बनने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ व्यवस्थित तरीके से कतारबद्ध होकर भगवान के दर्शन कर सकेंगे। इससे त्योहारों और विशेष अवसरों पर लगने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में भी आसानी होगी।

    सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के इंदौर स्थित खजराना गणेश मंदिर पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन अभी से सभी आवश्यक तैयारियों में जुटा हुआ है। यही कारण है कि मंदिर की आधारभूत सुविधाओं को आधुनिक स्वरूप देने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है।

    खजराना गणेश मंदिर देशभर के प्रमुख गणेश मंदिरों में शामिल है और यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष पर्वों और बुधवार के दिन यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मंदिर परिसर में किए जा रहे ये विकास कार्य भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इन सुधारों के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को पहले से कहीं अधिक सहज, सुरक्षित और व्यवस्थित दर्शन का अनुभव मिलेगा।

  • सिंहस्थ-2028 होगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, सीएम मोहन यादव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

    सिंहस्थ-2028 होगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, सीएम मोहन यादव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

     
    मध्यप्रदेश । उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर आयोजित कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगामी महापर्व को विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बताते हुए सभी विभागों को अभी से व्यापक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में अधोसंरचना विकास से लेकर यातायात, आवास, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं तक हर व्यवस्था को समय रहते मजबूत करना होगा।

    मुख्यमंत्री शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर उज्जैन पहुंचे जहां उन्होंने सिंहस्थ-2016 का संकल्प सिंहस्थ-2028 का संकल्प विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में वर्ष 2016 के सिंहस्थ के दौरान जिम्मेदारी संभाल चुके अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और आगामी आयोजन को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए सुझाव दिए। उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और विकास कार्यों पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सिंहस्थ में सबसे बड़ी चुनौती यातायात और भीड़ प्रबंधन रही थी। कई स्थानों पर लंबा जाम लगने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस बार ऐसी स्थिति से बचने के लिए मध्य प्रदेश की सीमाओं से जुड़े राज्यों के साथ पहले से समन्वय स्थापित करना होगा ताकि विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 की तुलना में अब उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में सड़क और रेल नेटवर्क काफी बेहतर हो चुका है। फतेहाबाद रेलवे ट्रैक शुरू हो चुका है और अधिकांश प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण भी पूरा हो गया है। इन सुविधाओं का बेहतर उपयोग करते हुए श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक सुगम बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ केवल क्षिप्रा नदी में स्नान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि श्रद्धालु पूरे उज्जैन के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन भी करेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक अनुभव मिल सके।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उज्जैन से लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में स्थित ढाबों, होटलों और अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जाए। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं को पर्याप्त आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी इंतजामों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि सरकार का प्रयास रहेगा कि श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए निजी व्यवस्थाओं पर निर्भर न रहना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सभी विभागों के समन्वित प्रयास और पड़ोसी राज्यों के सहयोग से सिंहस्थ-2028 को पहले से अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर सभी तैयारियां तय समय सीमा में पूरी करने का आह्वान किया।

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार: उज्जैन में बन रहे 4 नए सबस्टेशन, 750 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

    सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार: उज्जैन में बन रहे 4 नए सबस्टेशन, 750 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

    मध्यप्रदेश । उज्जैन शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर शहर के दौरे पर पहुंचेंगे। दोनों नेता विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ-साथ राज्य की महत्वपूर्ण विकास और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा भी करेंगे।

    जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ओंकारेश्वर दौरे के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद इंदौर एयरपोर्ट पर उन्हें विदाई देंगे। इसके बाद वे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ इंदौर में निर्धारित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और वहां से उज्जैन के लिए रवाना होंगे। दोनों नेताओं के शाम करीब 4:30 बजे उज्जैन पहुंचने की संभावना है।

    उज्जैन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। कार्यक्रमों में कपिला गौशाला का दौरा भी प्रस्तावित माना जा रहा है। प्रशासन ने दोनों नेताओं के दौरे को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं।

    दौरे का मुख्य केंद्र प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित होने वाली दो महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें रहेंगी। पहली बैठक शाम 6 बजे आयोजित होगी, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में चल रहे कार्यों और उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स, कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई अभियान और जनभागीदारी के प्रयासों पर चर्चा की जाएगी।

    इसके बाद दूसरी बैठक पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) को लेकर होगी। इस बैठक में प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, बिजली नुकसान कम करने, अधोसंरचना विकास और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना की समीक्षा में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

    केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी को देखते हुए इन बैठकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेता प्रदेश में चल रही प्रमुख योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के साथ आगामी कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा करेंगे।

    उज्जैन में होने वाली ये बैठकें न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को गति देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन बैठकों से कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई दिशा तय होगी।

  • 20 जून को होगा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का भूमि पूजन, 30 मिनट में तय होगा सफर; सिंहस्थ-2028 को मिलेगी नई रफ्तार

    20 जून को होगा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का भूमि पूजन, 30 मिनट में तय होगा सफर; सिंहस्थ-2028 को मिलेगी नई रफ्तार


    मध्यप्रदेश । मालवा क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। 20 जून को इंदौर जिले के चंद्रावतीगंज में इस परियोजना का भूमि पूजन किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर विशेष रूप से शामिल होंगे। इस परियोजना को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    करीब 48.10 किलोमीटर लंबे इस एक्सेस-कंट्रोल्ड फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) द्वारा हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत कराया जाएगा। इसकी अनुमानित निर्माण लागत लगभग 1,089 करोड़ रुपए है। परियोजना का उद्देश्य इंदौर और उज्जैन के बीच तेज, सुरक्षित और बाधारहित यातायात सुविधा उपलब्ध कराना है।

    भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बुधवार को कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मंच व्यवस्था, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और बैठक व्यवस्था जैसी सुविधाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली जाएं।

    ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण के बाद इंदौर से उज्जैन की दूरी महज 30 से 35 मिनट में तय की जा सकेगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच बढ़ते ट्रैफिक और यात्रा समय की समस्या को देखते हुए यह परियोजना एक बड़ी राहत साबित होगी। इससे मौजूदा हाईवे पर वाहनों का दबाव भी कम होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनेगी।

    धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। उज्जैन में महाकाल मंदिर, महाकाल लोक और सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं इंदौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ हवाई और व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। नया कॉरिडोर दोनों शहरों को आधुनिक और तेज संपर्क मार्ग से जोड़कर श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक वर्ग को बड़ी सुविधा देगा।

    परियोजना का प्रारंभ इंदौर के पित्र पर्वत क्षेत्र के पास से होगा और इसका अंतिम छोर उज्जैन के सिंहस्थ बायपास क्षेत्र तक रहेगा। यह सड़क भविष्य में यातायात की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए विस्तार योग्य भी होगी। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

    सरकार ने निर्माण एजेंसी को परियोजना पूरा करने के लिए लगभग 24 महीने का समय दिया है। लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 से पहले यह कॉरिडोर पूरी तरह तैयार हो जाए ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मालवा क्षेत्र के धार्मिक, आर्थिक और पर्यटन विकास के नए कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। महाकाल लोक, ओंकारेश्वर, इंदौर एयरपोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्र के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारी में जुटी मंदसौर पुलिस: भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर विशेष प्रशिक्षण शुरू

    सिंहस्थ 2028 की तैयारी में जुटी मंदसौर पुलिस: भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर विशेष प्रशिक्षण शुरू

    मध्य प्रदेश । उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर मध्यप्रदेश पुलिस ने अभी से व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में मंदसौर पुलिस द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया है, जिसमें पुलिस अधिकारियों और जवानों को आने वाले महाकुंभ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं से बेहतर संवाद के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
    इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल ने किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों और जवानों से संवाद कर तैयारियों की समीक्षा की और प्रशिक्षण की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में एसपी विनोद कुमार मीना, एडिशनल एसपी टी.एस. बघेल, सीएसपी जितेंद्र भास्कर सहित जिले के सभी थाना प्रभारी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।

    छह दिवसीय प्रशिक्षण से शुरू हुआ अभियान, आगे बनेगा बड़ा नेटवर्क
    डीआईजी निमिष अग्रवाल ने जानकारी दी कि पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर यह विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू किया गया है। फिलहाल छह दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग चलाया जा रहा है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते हुए अगले छह माह से एक वर्ष तक सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में सामान्य पुलिस ड्यूटी से कहीं अधिक जटिल परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, जिनसे निपटने के लिए पूर्व तैयारी अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।

    मास्टर ट्रेनर्स तैयार होंगे, पूरे जिले में फैलाएंगे प्रशिक्षण
    कार्यशाला के अंतर्गत मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं, जो आगे चलकर जिले के अन्य पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देंगे। इन प्रशिक्षकों को भीड़ प्रबंधन, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने की विशेष तकनीकें सिखाई जा रही हैं।इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान किसी भी स्थिति में पुलिस बल पूरी तरह सक्षम और प्रशिक्षित रहे।

    श्रद्धालुओं से व्यवहार पर विशेष जोर
    प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों को यह भी सिखाया जा रहा है कि महाकुंभ के दौरान उनका व्यवहार केवल सुरक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि श्रद्धालुओं की सहायता और मार्गदर्शन भी उनकी जिम्मेदारी हो। डीआईजी ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं के साथ विनम्र और सेवा भाव से पेश आएं। यदि किसी को मार्गदर्शन, सहायता या जानकारी की आवश्यकता हो तो उसे तुरंत और सकारात्मक तरीके से मदद उपलब्ध कराई जाए।

    नगर सुरक्षा समिति को भी मिलेगा प्रशिक्षण
    जानकारी के अनुसार, सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे पुलिस और स्थानीय नागरिकों के बीच समन्वय मजबूत होगा और बड़े आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सकेगी।

    विश्वस्तरीय आयोजन को लेकर पहले से तैयारी
    एसपी विनोद कुमार मीना ने कहा कि सिंहस्थ महाकुंभ दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहती है। ऐसे आयोजन में भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन बड़ी चुनौती होती है।

    इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए मंदसौर पुलिस ने अभी से प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है, ताकि 2028 के सिंहस्थ के दौरान पूरी पुलिस व्यवस्था मुस्तैद और सक्षम नजर आए।