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  • सिंहस्थ: 2028 के दृष्टिगत मध्य प्रदेश में बढ़ाई जा रही रेल सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ यादव

    सिंहस्थ: 2028 के दृष्टिगत मध्य प्रदेश में बढ़ाई जा रही रेल सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आगामी सिंहस्थ : 2028 के दृष्टिगत राज्य में रेलवे सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर चल रहा है। भोपाल को निशातपुरा के रूप में चौथे रेलवे स्टेशन की सौगात मिली है। इस रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनों के ठहराव (स्टापेज) होगा। निशातपुरा रुकने वाली ट्रेनें शिव और शक्ति की प्रतीक हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार शाम को भोपाल के नव विकसित निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर दो रेल गाड़ियों- डॉ. अंबेडकर नगर-श्रीमाता वैष्णोदेवी कटरा मालवा एक्सप्रेस और वेरावल-जबलपुर एक्सप्रेस ट्रेन के निशातपुर स्टेशन पर नए ठहराव (स्टॉपेज) के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मालवा एक्सप्रेस को झंडी दिखाकर रवाना किया।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। हर विभाग में नए कीर्तिमान गढ़े जा रहे हैं। गत 12 साल में रेलवे का “न भूतो न भविष्यति” विकास हुआ है। भारतीय रेलवे में द्रुत गति से विकास कार्य हो रहे हैं। निशातपुरा स्टेशन के शुभारंभ से अब नई दिल्ली से उज्जैन-इंदौर की ओर जाने वाली रेलगाड़ियों को ट्रैक और इंजन बदलने की जरूरत नहीं होगी।

    अब नई दिल्ली से उज्जैन-इंदौर आने-जाने के लिए बचेगा समय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय रेलवे के माध्यम से उज्जैन सिंहस्थ: 2028 को लेकर लगातार सौगातें मिल रही हैं। सिंहस्थ : 2028 के आयोजन में अनुमानित 40 करोड़ श्रद्धालु मध्य प्रदेश आएंगे। ऐसे में नए रेलवे स्टेशन यात्रियों की भीड़ का दबाव कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे। निशातपुरा क्षेत्र में 14 करोड़ की लागत से विकसित निशातपुरा स्टेशन नागरिकों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा। यहां अनेक नई सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। नई दिल्ली से उज्जैन-इंदौर आने-जाने के लिए समय बचेगा। भोपाल मुख्य स्टेशन जाए बिना डायरेक्ट ट्रेन मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि जब किसी क्षेत्र में रेल लाइन आती है, तो यात्री सुविधाओं के साथ व्यापार, कृषि और माल ढुलाई आदि कार्यों में सुविधा मिलती है। प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव मध्य प्रदेश में रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए पूर्ण सहयोग कर रहे हैं।

    मध्य प्रदेश के लिए भारत सरकार ने रेल बजट में की 24 गुना बढ़ोतरी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे व्यापार-व्यवसाय की सुगमता और रोजगार बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। भारतीय रेल का नेटवर्क इतना बड़ा है, जिसमें कई देशों की कुल आबादी के बराबर लोग हमारी ट्रेनों में सफर कर रहे होते हैं। देश में रेलवे के 70 मंडल मुख्यालय हैं। मध्य प्रदेश में रेलवे ट्रैक का शत प्रतिशत विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है। भारतीय रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक रेल गाड़ियों की शुरुआत की है। अब भोपाल के पास ट्रेनों के आधुनिक कोच तैयार किए जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि देश के साथ ही मध्य प्रदेश बदल रहा है। वर्ष 2009 से 2014 तक मध्य प्रदेश में रेलवे का बजट केवल 632 करोड़ रुपये था, जो अब वर्ष 2026-27 तक 15 हजार 288 करोड़ रुपये हो गया है। भारत सरकार ने प्रदेश के लिए रेल बजट में 24 गुना वृद्धि की है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में रेलवे के 1 लाख 18 हजार करोड़ लागत के नए कार्य जारी हैं। वर्ष 2014 के बाद प्रदेश में 2800 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइनों का निर्माण हुआ है, जो डेनमार्क देश की कुल सीमा से भी अधिक है।

    प्रतिदिन बिछाया जा रहा है 34 किलोमीटर रेलवे ट्रेक
    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में जहां एक दिन में मात्र 4 किलोमीटर रेलवे ट्रैक तैयार होता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में ट्रैक बिछाने की रफ्तार 34 किलोमीटर प्रतिदिन है। भोपाल में अब रानी कमलापति स्टेशन, भोपाल मेन स्टेशन, संत हिरदाराम स्टेशन और अब निशातपुरा स्टेशन हो गए हैं। मध्य प्रदेश को 13 नए अमृत स्टेशनों की सौगात मिली है। वडोदरा -रतलाम और इटारसी-भोपाल-बीना रूट पर तीसरी और चौथी रेल लाइन के काम चल रहे हैं। पहले कभी मीटर गेज लाइनें हुआ करती थीं, जो धीरे-धीरे ब्रॉडगेज हो गईं और ब्रॉडगेज डबल लाइन हो गईं। अब ट्रिपल और फोर लाइन का विकास हो रहा है।

    ध्य प्रदेश में रेल सुविधाएं बढ़ीं

    पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि पश्चिम मध्य रेलवे अपने यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा प्रदान करने के लिए अधोसंरचना के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में रेल मार्गों का विकास, आधुनिक ट्रेनों का संचालन, सेफ्टी और सिक्योरिटी में सुधार रेल यात्रा को नए आयाम प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में मध्य प्रदेश को रेलवे की अनेक सुविधाएं मिली हैं। खजुराहो से वाराणसी वंदेभारत एक्सप्रेस, रीवा-पुणे, डॉ. अंबेडकर नगर-गोंडा के लिए नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। इसी अवधि में बीना-इटारसी और कटनी-बीना की तीसरी लाइन, कटनी अपग्रेड सेपरेटर, इटारसी के अप और डाउन ग्रेड सेपरेटर के साथ ही कटनी-सिंगरौली-रीवा-सतना रेल रूट का दोहरीकरण किया गया है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में फ्लाई ओवर का शुभारंभ किया है, जिसमें मदन महल स्टेशन पर बना केबिल स्टे ब्रिज शामिल है। प्रदेश में 13 अमृत स्टेशनों का जीर्णोद्धार कार्य पूरा हो चुका है। स्टेशनों पर यात्रियों के लिए एस्केलेटर और एफओबी उपलब्ध कराए रहे हैं। भोपाल स्टेशन के पास बने निशातपुरा स्टेशन पर दो नई ट्रेनों के ठहराव से यात्रियों को भोपाल स्टेशन की भीड़भाड़ से राहत मिलेगी। पश्चिम मध्य रेलवे निशानपुरा स्टेशन को यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    कार्यक्रम में विधायक विष्णु खत्री, महापौर मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, भोपाल मंडल रेल प्रबंधक पंकज त्यागी सहित पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों ने रोड शो में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया और निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर गाड़ियों का ठहराव प्रारंभ होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।

  • खजराना गणेश मंदिर में तेज़ी से विकास कार्य, डेढ़ फीट नीचे होगा सभामंडप, लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा होगी दोगुनी

    खजराना गणेश मंदिर में तेज़ी से विकास कार्य, डेढ़ फीट नीचे होगा सभामंडप, लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा होगी दोगुनी


    इंदौर इंदौर का विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए बड़े बदलावों से गुजर रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के इस प्रमुख केंद्र पर दर्शन व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए मंदिर परिसर में व्यापक विकास कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य यह है कि भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या के बावजूद दर्शन व्यवस्था सुचारु और व्यवस्थित बनी रहे।

    मंदिर के गर्भगृह का प्रवेश द्वार पहले ही चौड़ा किया जा चुका है। अब गर्भगृह के बाहर स्थित सभामंडप को लगभग डेढ़ फीट नीचे किया जा रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ सामान्य श्रद्धालुओं को मिलेगा। अभी तक सभामंडप में विशेष पूजन, वीआईपी दर्शन या नवविवाहित दंपतियों के धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पीछे खड़े श्रद्धालुओं का दृश्य बाधित हो जाता था, जिससे भगवान के दर्शन करने में कठिनाई होती थी।

    मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार सभामंडप का स्तर नीचे किए जाने से लाइन में खड़े श्रद्धालुओं को बिना किसी अवरोध के सीधे भगवान गणेश के दर्शन हो सकेंगे। इससे मंदिर में आने वाले प्रत्येक भक्त को बेहतर धार्मिक अनुभव मिलेगा और भीड़ प्रबंधन भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

    मंदिर परिसर के लिए तैयार मास्टर प्लान के तहत केवल सभामंडप ही नहीं बल्कि कई अन्य विकास कार्य भी प्रस्तावित हैं। आने वाले समय में यहां आधुनिक दर्शन हॉल का निर्माण भी किया जाएगा। इस हॉल के बनने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ व्यवस्थित तरीके से कतारबद्ध होकर भगवान के दर्शन कर सकेंगे। इससे त्योहारों और विशेष अवसरों पर लगने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में भी आसानी होगी।

    सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के इंदौर स्थित खजराना गणेश मंदिर पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन अभी से सभी आवश्यक तैयारियों में जुटा हुआ है। यही कारण है कि मंदिर की आधारभूत सुविधाओं को आधुनिक स्वरूप देने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है।

    खजराना गणेश मंदिर देशभर के प्रमुख गणेश मंदिरों में शामिल है और यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष पर्वों और बुधवार के दिन यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मंदिर परिसर में किए जा रहे ये विकास कार्य भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इन सुधारों के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को पहले से कहीं अधिक सहज, सुरक्षित और व्यवस्थित दर्शन का अनुभव मिलेगा।

  • सिंहस्थ-2028 होगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, सीएम मोहन यादव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

    सिंहस्थ-2028 होगा दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, सीएम मोहन यादव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

     
    मध्यप्रदेश । उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर आयोजित कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगामी महापर्व को विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बताते हुए सभी विभागों को अभी से व्यापक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में अधोसंरचना विकास से लेकर यातायात, आवास, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं तक हर व्यवस्था को समय रहते मजबूत करना होगा।

    मुख्यमंत्री शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर उज्जैन पहुंचे जहां उन्होंने सिंहस्थ-2016 का संकल्प सिंहस्थ-2028 का संकल्प विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में वर्ष 2016 के सिंहस्थ के दौरान जिम्मेदारी संभाल चुके अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और आगामी आयोजन को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए सुझाव दिए। उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और विकास कार्यों पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सिंहस्थ में सबसे बड़ी चुनौती यातायात और भीड़ प्रबंधन रही थी। कई स्थानों पर लंबा जाम लगने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस बार ऐसी स्थिति से बचने के लिए मध्य प्रदेश की सीमाओं से जुड़े राज्यों के साथ पहले से समन्वय स्थापित करना होगा ताकि विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 की तुलना में अब उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में सड़क और रेल नेटवर्क काफी बेहतर हो चुका है। फतेहाबाद रेलवे ट्रैक शुरू हो चुका है और अधिकांश प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण भी पूरा हो गया है। इन सुविधाओं का बेहतर उपयोग करते हुए श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक सुगम बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ केवल क्षिप्रा नदी में स्नान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि श्रद्धालु पूरे उज्जैन के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन भी करेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक अनुभव मिल सके।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उज्जैन से लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में स्थित ढाबों, होटलों और अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जाए। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं को पर्याप्त आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी इंतजामों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि सरकार का प्रयास रहेगा कि श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए निजी व्यवस्थाओं पर निर्भर न रहना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सभी विभागों के समन्वित प्रयास और पड़ोसी राज्यों के सहयोग से सिंहस्थ-2028 को पहले से अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक बनाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर सभी तैयारियां तय समय सीमा में पूरी करने का आह्वान किया।

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार: उज्जैन में बन रहे 4 नए सबस्टेशन, 750 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

    सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार: उज्जैन में बन रहे 4 नए सबस्टेशन, 750 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

    मध्यप्रदेश । उज्जैन शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर शहर के दौरे पर पहुंचेंगे। दोनों नेता विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ-साथ राज्य की महत्वपूर्ण विकास और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा भी करेंगे।

    जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ओंकारेश्वर दौरे के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद इंदौर एयरपोर्ट पर उन्हें विदाई देंगे। इसके बाद वे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ इंदौर में निर्धारित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और वहां से उज्जैन के लिए रवाना होंगे। दोनों नेताओं के शाम करीब 4:30 बजे उज्जैन पहुंचने की संभावना है।

    उज्जैन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। कार्यक्रमों में कपिला गौशाला का दौरा भी प्रस्तावित माना जा रहा है। प्रशासन ने दोनों नेताओं के दौरे को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं।

    दौरे का मुख्य केंद्र प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित होने वाली दो महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें रहेंगी। पहली बैठक शाम 6 बजे आयोजित होगी, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में चल रहे कार्यों और उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स, कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई अभियान और जनभागीदारी के प्रयासों पर चर्चा की जाएगी।

    इसके बाद दूसरी बैठक पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) को लेकर होगी। इस बैठक में प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, बिजली नुकसान कम करने, अधोसंरचना विकास और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना की समीक्षा में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

    केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी को देखते हुए इन बैठकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेता प्रदेश में चल रही प्रमुख योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के साथ आगामी कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा करेंगे।

    उज्जैन में होने वाली ये बैठकें न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को गति देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन बैठकों से कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई दिशा तय होगी।

  • 20 जून को होगा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का भूमि पूजन, 30 मिनट में तय होगा सफर; सिंहस्थ-2028 को मिलेगी नई रफ्तार

    20 जून को होगा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का भूमि पूजन, 30 मिनट में तय होगा सफर; सिंहस्थ-2028 को मिलेगी नई रफ्तार


    मध्यप्रदेश । मालवा क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। 20 जून को इंदौर जिले के चंद्रावतीगंज में इस परियोजना का भूमि पूजन किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर विशेष रूप से शामिल होंगे। इस परियोजना को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    करीब 48.10 किलोमीटर लंबे इस एक्सेस-कंट्रोल्ड फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) द्वारा हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत कराया जाएगा। इसकी अनुमानित निर्माण लागत लगभग 1,089 करोड़ रुपए है। परियोजना का उद्देश्य इंदौर और उज्जैन के बीच तेज, सुरक्षित और बाधारहित यातायात सुविधा उपलब्ध कराना है।

    भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बुधवार को कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मंच व्यवस्था, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और बैठक व्यवस्था जैसी सुविधाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली जाएं।

    ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण के बाद इंदौर से उज्जैन की दूरी महज 30 से 35 मिनट में तय की जा सकेगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच बढ़ते ट्रैफिक और यात्रा समय की समस्या को देखते हुए यह परियोजना एक बड़ी राहत साबित होगी। इससे मौजूदा हाईवे पर वाहनों का दबाव भी कम होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनेगी।

    धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। उज्जैन में महाकाल मंदिर, महाकाल लोक और सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं इंदौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ हवाई और व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। नया कॉरिडोर दोनों शहरों को आधुनिक और तेज संपर्क मार्ग से जोड़कर श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक वर्ग को बड़ी सुविधा देगा।

    परियोजना का प्रारंभ इंदौर के पित्र पर्वत क्षेत्र के पास से होगा और इसका अंतिम छोर उज्जैन के सिंहस्थ बायपास क्षेत्र तक रहेगा। यह सड़क भविष्य में यातायात की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए विस्तार योग्य भी होगी। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

    सरकार ने निर्माण एजेंसी को परियोजना पूरा करने के लिए लगभग 24 महीने का समय दिया है। लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 से पहले यह कॉरिडोर पूरी तरह तैयार हो जाए ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मालवा क्षेत्र के धार्मिक, आर्थिक और पर्यटन विकास के नए कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। महाकाल लोक, ओंकारेश्वर, इंदौर एयरपोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्र के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारी में जुटी मंदसौर पुलिस: भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर विशेष प्रशिक्षण शुरू

    सिंहस्थ 2028 की तैयारी में जुटी मंदसौर पुलिस: भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर विशेष प्रशिक्षण शुरू

    मध्य प्रदेश । उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर मध्यप्रदेश पुलिस ने अभी से व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में मंदसौर पुलिस द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया है, जिसमें पुलिस अधिकारियों और जवानों को आने वाले महाकुंभ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं से बेहतर संवाद के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
    इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल ने किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों और जवानों से संवाद कर तैयारियों की समीक्षा की और प्रशिक्षण की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में एसपी विनोद कुमार मीना, एडिशनल एसपी टी.एस. बघेल, सीएसपी जितेंद्र भास्कर सहित जिले के सभी थाना प्रभारी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।

    छह दिवसीय प्रशिक्षण से शुरू हुआ अभियान, आगे बनेगा बड़ा नेटवर्क
    डीआईजी निमिष अग्रवाल ने जानकारी दी कि पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर यह विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू किया गया है। फिलहाल छह दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग चलाया जा रहा है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते हुए अगले छह माह से एक वर्ष तक सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में सामान्य पुलिस ड्यूटी से कहीं अधिक जटिल परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, जिनसे निपटने के लिए पूर्व तैयारी अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।

    मास्टर ट्रेनर्स तैयार होंगे, पूरे जिले में फैलाएंगे प्रशिक्षण
    कार्यशाला के अंतर्गत मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं, जो आगे चलकर जिले के अन्य पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देंगे। इन प्रशिक्षकों को भीड़ प्रबंधन, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने की विशेष तकनीकें सिखाई जा रही हैं।इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान किसी भी स्थिति में पुलिस बल पूरी तरह सक्षम और प्रशिक्षित रहे।

    श्रद्धालुओं से व्यवहार पर विशेष जोर
    प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों को यह भी सिखाया जा रहा है कि महाकुंभ के दौरान उनका व्यवहार केवल सुरक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि श्रद्धालुओं की सहायता और मार्गदर्शन भी उनकी जिम्मेदारी हो। डीआईजी ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं के साथ विनम्र और सेवा भाव से पेश आएं। यदि किसी को मार्गदर्शन, सहायता या जानकारी की आवश्यकता हो तो उसे तुरंत और सकारात्मक तरीके से मदद उपलब्ध कराई जाए।

    नगर सुरक्षा समिति को भी मिलेगा प्रशिक्षण
    जानकारी के अनुसार, सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे पुलिस और स्थानीय नागरिकों के बीच समन्वय मजबूत होगा और बड़े आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सकेगी।

    विश्वस्तरीय आयोजन को लेकर पहले से तैयारी
    एसपी विनोद कुमार मीना ने कहा कि सिंहस्थ महाकुंभ दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहती है। ऐसे आयोजन में भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन बड़ी चुनौती होती है।

    इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए मंदसौर पुलिस ने अभी से प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है, ताकि 2028 के सिंहस्थ के दौरान पूरी पुलिस व्यवस्था मुस्तैद और सक्षम नजर आए।

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज, उज्जैन के 100 चौराहे बनेंगे हाईटेक

    सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज, उज्जैन के 100 चौराहे बनेंगे हाईटेक

    उज्जैन  उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बड़े स्तर पर शहरी विकास कार्यों को गति दे दी है। श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए शहर के 100 प्रमुख चौराहों को हाईटेक बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

    प्रशासन के अनुसार, इन चौराहों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा, जहां ट्रैफिक सिग्नल और कैमरों की लाइव फीड सीधे एक केंद्रीय कंट्रोल रूम से जुड़ी होगी। इससे शहर के किसी भी हिस्से में ट्रैफिक दबाव या भीड़ बढ़ने की स्थिति पर तुरंत निगरानी और कार्रवाई संभव हो सकेगी।

    कलेक्टर रौशन सिंह ने बताया कि शहर में पहले से ही सड़क चौड़ीकरण और नए मार्गों के विकास का काम चल रहा है। 60 से अधिक सड़कों को चार और छह लेन में विकसित किया जा रहा है, ताकि यातायात का प्रवाह निर्बाध बना रहे। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से चौराहों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

    नई योजना में सभी चौराहों पर लेफ्ट टर्न और यू-टर्न को विशेष रूप से डिजाइन किया जाएगा, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति कम हो और वाहनों की आवाजाही तेज हो सके।

    प्रशासन का दावा है कि इन हाईटेक चौराहों के जरिए पूरे शहर की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। कंट्रोल रूम से निगरानी के माध्यम से न केवल ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी बल्कि सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    लक्ष्य है कि सिंहस्थ 2028 से पहले सभी प्रस्तावित काम पूरे कर लिए जाएं, ताकि आयोजन के दौरान शहर की व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाया जा सके।

  • महाकाल नगरी सजने को तैयार, सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क और ब्रिज निर्माण तेज

    महाकाल नगरी सजने को तैयार, सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क और ब्रिज निर्माण तेज


    उज्जैन । मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की परिकल्पना के अनुरूप इस महाआयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए शहर में व्यापक स्तर पर विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।

    इसी कड़ी में विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके साथ ही उज्जैन से इंदौर को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग को सिक्स लेन में विकसित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य जारी है।

    शहर की आंतरिक सड़कों के चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए भी व्यापक योजनाएं लागू की जा रही हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए यातायात पार्किंग सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं।

    सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों की समीक्षा के तहत संभाग आयुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने हरि फाटक ब्रिज क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने एमपी आरडीसी द्वारा बनाए जा रहे फोरलेन ब्रिज के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान अतिक्रमण हटाने निर्माण स्थल के चयन मशीनों की उपलब्धता और कार्य की गति को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।

    प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिंहस्थ महापर्व के पहले सभी आवश्यक अधोसंरचनात्मक कार्य पूर्ण हो जाएं। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

    सिंहस्थ महापर्व देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की आधारभूत संरचना को मजबूत करना और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है।

    अधिकारियों का मानना है कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से न केवल सिंहस्थ के दौरान व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि भविष्य में भी उज्जैन शहर को स्थायी रूप से बेहतर यातायात और सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    प्रशासन की इस सक्रियता से यह स्पष्ट है कि सिंहस्थ 2028 को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए हर स्तर पर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। महाकाल नगरी उज्जैन आने वाले समय में न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि अधोसंरचना और सुविधाओं के मामले में भी एक नए स्वरूप में नजर आएगी।

  • चेटीचंड पर्व अखंड भारत की याद दिलाता है, हृदय में जागृत रखता है अखंड भारत का सपना: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    चेटीचंड पर्व अखंड भारत की याद दिलाता है, हृदय में जागृत रखता है अखंड भारत का सपना: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल । भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के टावर चौक पर चेटीचंड महापर्व पर आयोजित सिंधी समाज के चल समारोह का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि चेटीचंड का पर्व न केवल धार्मिक और सामाजिक उत्सव है, बल्कि यह अखंड भारत की स्मृति दिलाकर भारतीयों के हृदय में अखंड भारत का सपना जागृत रखता है।

    सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक उत्सवों से लोगों में आपसी प्रेम और आत्मीयता बढ़ती है। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य को उनकी वीरता, न्यायप्रियता और दानशीलता के लिए याद किया और कहा कि शासन इन्हीं गुणों से प्रेरित होकर सुशासन के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    विकास और सिंहस्थ-2028 की तैयारी
    विक्रम संवत 2083 में बाबा श्री महाकाल की नगरी से देश और प्रदेशवासियों को चेटीचंड की मंगलकामनाएं दी गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सरकार उज्जैन में विकास कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश और उज्जैन को वैश्विक पहचान मिलेगी।

    चल समारोह का विवरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवा ध्वज लहराकर समारोह का शुभारंभ किया। रैली में उपस्थित गणमान्य अतिथियों में शामिल थे: राज्यसभा सांसद और अभिनेत्री सुश्री जयाप्रदा अभिनेता श्री आफताब शिवदासानी तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम गोली सांसद श्री अनिल फिरोजिया, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर श्री मुकेश टटवाल अन्य गणमान्यजन और सिंधी समाज के अनेक सदस्य चेटीचंड महापर्व ने उज्जैन में धार्मिक आस्था, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक गौरव का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे अखंड भारत की स्मृति और सामाजिक प्रेम का प्रतीक बताया और उज्जैन को आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

  • सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के राम घाट पर आयोजित विक्रमोत्सव-2026 और गुड़ी पड़वा सृष्टि आरंभ उत्सव के अवसर पर कहा कि उज्जैन का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व विश्व स्तर पर अनोखा है। उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ-2028 में पूरी दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव को देखेगी।

    उज्जैन का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
    उज्जैन प्राचीन अवंतिका और उज्जयिनी के नाम से विख्यात 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का धाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन का पावन शिप्रा तट और यह नगरी जीवन में आस्था और आध्यात्मिक संबल देती है। उन्होंने महान सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा का उल्लेख किया जिनके 32 पुतलियों वाले सिंहासन नवरत्नों की विद्वता और वीरता आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

    सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ

    उज्जैन के सभी मार्गों को फोरलेन और सिक्सलेन बनाया जा रहा है। मां शिप्रा के तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे नवीन घाट विकसित किए जा रहे हैं। शहर को व्यापार और उद्योग के दृष्टिकोण से भी विकसित किया जा रहा है विक्रम उद्योगपुरी मेडिकल डिवाइस पार्क 12,500 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र और अतिरिक्त 5,000 एकड़ में नया पार्क तैयार। नए एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं से तीर्थाटन को नई ऊंचाई देने का प्रयास।

    सृष्टि आरंभ उत्सव की भव्य झलक

    कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पार्श्व गायक श्री विशाल मिश्रा के संगीत से हुई। भव्य ड्रोन-शो लेजर-शो और आतिशबाजी ने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया। उत्सव ने आस्था संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

    साहित्य और ज्ञान का विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ का विक्रम पंचांग 2083 संस्कृति संचालनालय का कला पंचांग विभिन्न ग्रंथों और मोनोग्राफ का विमोचन किया। विमोचित ग्रंथों में अष्टावक्र गीता नारद गीता ब्राह्मण गीता गर्भ गीता समेत महर्षियों और वीर भारत न्यास के विभिन्न ग्रंथ शामिल थे।

    राष्ट्रीय और स्थानीय गणमान्यजन उपस्थित

    राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा महापौर श्री मुकेश टटवाल नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव शोधपीठ निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी और अन्य गणमान्यजन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन को धार्मिक सांस्कृतिक औद्योगिक और वैश्विक पहचान का केंद्र बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों का विवरण दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिंहस्थ-2028 में दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव और उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देखेगी।