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  • सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज, उज्जैन के 100 चौराहे बनेंगे हाईटेक

    सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज, उज्जैन के 100 चौराहे बनेंगे हाईटेक

    उज्जैन । उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बड़े स्तर पर शहरी विकास कार्यों को गति दे दी है। श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए शहर के 100 प्रमुख चौराहों को हाईटेक बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

    प्रशासन के अनुसार, इन चौराहों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा, जहां ट्रैफिक सिग्नल और कैमरों की लाइव फीड सीधे एक केंद्रीय कंट्रोल रूम से जुड़ी होगी। इससे शहर के किसी भी हिस्से में ट्रैफिक दबाव या भीड़ बढ़ने की स्थिति पर तुरंत निगरानी और कार्रवाई संभव हो सकेगी।

    कलेक्टर रौशन सिंह ने बताया कि शहर में पहले से ही सड़क चौड़ीकरण और नए मार्गों के विकास का काम चल रहा है। 60 से अधिक सड़कों को चार और छह लेन में विकसित किया जा रहा है, ताकि यातायात का प्रवाह निर्बाध बना रहे। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से चौराहों का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

    नई योजना में सभी चौराहों पर लेफ्ट टर्न और यू-टर्न को विशेष रूप से डिजाइन किया जाएगा, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति कम हो और वाहनों की आवाजाही तेज हो सके।

    प्रशासन का दावा है कि इन हाईटेक चौराहों के जरिए पूरे शहर की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। कंट्रोल रूम से निगरानी के माध्यम से न केवल ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी बल्कि सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    लक्ष्य है कि सिंहस्थ 2028 से पहले सभी प्रस्तावित काम पूरे कर लिए जाएं, ताकि आयोजन के दौरान शहर की व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाया जा सके।

  • महाकाल नगरी सजने को तैयार, सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क और ब्रिज निर्माण तेज

    महाकाल नगरी सजने को तैयार, सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क और ब्रिज निर्माण तेज


    उज्जैन । मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की परिकल्पना के अनुरूप इस महाआयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए शहर में व्यापक स्तर पर विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।

    इसी कड़ी में विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके साथ ही उज्जैन से इंदौर को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग को सिक्स लेन में विकसित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य जारी है।

    शहर की आंतरिक सड़कों के चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए भी व्यापक योजनाएं लागू की जा रही हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए यातायात पार्किंग सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं।

    सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों की समीक्षा के तहत संभाग आयुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने हरि फाटक ब्रिज क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने एमपी आरडीसी द्वारा बनाए जा रहे फोरलेन ब्रिज के कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान अतिक्रमण हटाने निर्माण स्थल के चयन मशीनों की उपलब्धता और कार्य की गति को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।

    प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिंहस्थ महापर्व के पहले सभी आवश्यक अधोसंरचनात्मक कार्य पूर्ण हो जाएं। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

    सिंहस्थ महापर्व देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की आधारभूत संरचना को मजबूत करना और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है।

    अधिकारियों का मानना है कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से न केवल सिंहस्थ के दौरान व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि भविष्य में भी उज्जैन शहर को स्थायी रूप से बेहतर यातायात और सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    प्रशासन की इस सक्रियता से यह स्पष्ट है कि सिंहस्थ 2028 को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए हर स्तर पर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। महाकाल नगरी उज्जैन आने वाले समय में न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि अधोसंरचना और सुविधाओं के मामले में भी एक नए स्वरूप में नजर आएगी।

  • चेटीचंड पर्व अखंड भारत की याद दिलाता है, हृदय में जागृत रखता है अखंड भारत का सपना: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    चेटीचंड पर्व अखंड भारत की याद दिलाता है, हृदय में जागृत रखता है अखंड भारत का सपना: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल । भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के टावर चौक पर चेटीचंड महापर्व पर आयोजित सिंधी समाज के चल समारोह का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि चेटीचंड का पर्व न केवल धार्मिक और सामाजिक उत्सव है, बल्कि यह अखंड भारत की स्मृति दिलाकर भारतीयों के हृदय में अखंड भारत का सपना जागृत रखता है।

    सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक उत्सवों से लोगों में आपसी प्रेम और आत्मीयता बढ़ती है। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य को उनकी वीरता, न्यायप्रियता और दानशीलता के लिए याद किया और कहा कि शासन इन्हीं गुणों से प्रेरित होकर सुशासन के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    विकास और सिंहस्थ-2028 की तैयारी
    विक्रम संवत 2083 में बाबा श्री महाकाल की नगरी से देश और प्रदेशवासियों को चेटीचंड की मंगलकामनाएं दी गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सरकार उज्जैन में विकास कार्य कर रही है, जिससे प्रदेश और उज्जैन को वैश्विक पहचान मिलेगी।

    चल समारोह का विवरण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवा ध्वज लहराकर समारोह का शुभारंभ किया। रैली में उपस्थित गणमान्य अतिथियों में शामिल थे: राज्यसभा सांसद और अभिनेत्री सुश्री जयाप्रदा अभिनेता श्री आफताब शिवदासानी तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम गोली सांसद श्री अनिल फिरोजिया, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर श्री मुकेश टटवाल अन्य गणमान्यजन और सिंधी समाज के अनेक सदस्य चेटीचंड महापर्व ने उज्जैन में धार्मिक आस्था, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक गौरव का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे अखंड भारत की स्मृति और सामाजिक प्रेम का प्रतीक बताया और उज्जैन को आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

  • सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के राम घाट पर आयोजित विक्रमोत्सव-2026 और गुड़ी पड़वा सृष्टि आरंभ उत्सव के अवसर पर कहा कि उज्जैन का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व विश्व स्तर पर अनोखा है। उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ-2028 में पूरी दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव को देखेगी।

    उज्जैन का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
    उज्जैन प्राचीन अवंतिका और उज्जयिनी के नाम से विख्यात 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का धाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन का पावन शिप्रा तट और यह नगरी जीवन में आस्था और आध्यात्मिक संबल देती है। उन्होंने महान सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा का उल्लेख किया जिनके 32 पुतलियों वाले सिंहासन नवरत्नों की विद्वता और वीरता आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

    सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ

    उज्जैन के सभी मार्गों को फोरलेन और सिक्सलेन बनाया जा रहा है। मां शिप्रा के तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे नवीन घाट विकसित किए जा रहे हैं। शहर को व्यापार और उद्योग के दृष्टिकोण से भी विकसित किया जा रहा है विक्रम उद्योगपुरी मेडिकल डिवाइस पार्क 12,500 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र और अतिरिक्त 5,000 एकड़ में नया पार्क तैयार। नए एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं से तीर्थाटन को नई ऊंचाई देने का प्रयास।

    सृष्टि आरंभ उत्सव की भव्य झलक

    कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पार्श्व गायक श्री विशाल मिश्रा के संगीत से हुई। भव्य ड्रोन-शो लेजर-शो और आतिशबाजी ने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया। उत्सव ने आस्था संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

    साहित्य और ज्ञान का विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ का विक्रम पंचांग 2083 संस्कृति संचालनालय का कला पंचांग विभिन्न ग्रंथों और मोनोग्राफ का विमोचन किया। विमोचित ग्रंथों में अष्टावक्र गीता नारद गीता ब्राह्मण गीता गर्भ गीता समेत महर्षियों और वीर भारत न्यास के विभिन्न ग्रंथ शामिल थे।

    राष्ट्रीय और स्थानीय गणमान्यजन उपस्थित

    राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा महापौर श्री मुकेश टटवाल नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव शोधपीठ निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी और अन्य गणमान्यजन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन को धार्मिक सांस्कृतिक औद्योगिक और वैश्विक पहचान का केंद्र बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों का विवरण दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिंहस्थ-2028 में दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव और उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देखेगी।

  • आस्था, आध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत समागम होगा सिंहस्थ-2028 का आयोजन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    आस्था, आध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत समागम होगा सिंहस्थ-2028 का आयोजन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 का आयोजन आस्था, आध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत समागम होगा। सिंहस्थ 2028 के मुख्य राजसी स्नान और अन्य स्नान शिप्रा के जल से ही हो, यह सुनिश्चित करने के लिए सिलारखेड़ी सेवरखेड़ी परियोजना प्रगतिरत है।

    मुख्यंत्री डॉ. यादव गुरुवार को उज्जैन में मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा सिंहस्थ-2028 के कार्यों की जानकारी प्रदान करने के लिए आयोजित सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में सोशल मीडिया बहुत महत्वपूर्ण है, जो सुशासन और समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करने का सशक्त मार्ग है।

    कार्यशाला में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने सिंहस्थ-2028 के लिए कान्ह क्लोज डक्ट, सेवरखेड़ी सिलारखेड़ी परियोजना, शहर के आंतरिक मार्गों का चौड़ीकरण, सीवरेज कार्य, मेला क्षेत्र विकास, जिले की कनेक्टविटी को देश से जोड़ने के लिए बनाए जा रहे 6 लेन और 4 लेन मार्गों, रेलवे लाइन, एयरपोर्ट आदि विकास कार्यों की जानकारी दी।

    पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने सिंहस्थ 2028 के लिए किए जा रहे भीड़ प्रबंधन के उपाय, सुरक्षा व्यवस्था ,एआई टेक्नोलॉजी का क्रॉउड मैनेजमेंट, श्रद्धालुओं को जानकारी प्रदान करने, पार्किंग आदि में उपयोग संबंधी जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर सेंसिटव जानकारी पोस्ट करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने के बारे में चर्चा की।

  • सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा

    सिंहस्थ-2028 के लिए इंदौर में बनेंगे अस्थायी सैटेलाइट टाउन:उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर से पहले रोका जाएगा


    नई दिल्ली। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए इंदौर पुलिस ने भीड़ प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी है। पुलिस ने योजना बनाई है कि उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश से पहले इंदौर में ही रोका जाएगा। इसके लिए शहर के बाहरी क्षेत्रों में अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन और पुलिस के बीच हुई संयुक्त बैठक में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की रणनीति पर चर्चा की गई।

    इंदौर से सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की सबसे ज्यादा आवाजाही इंदौर मार्ग से होने की संभावना है। ऐसे में भीड़ का दबाव कम करने के लिए पहले से व्यवस्था तैयार की जा रही है।

    प्रस्तावित सैटेलाइट टाउन में श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, पेयजल, भोजन, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन स्थानों से श्रद्धालुओं को नियंत्रित तरीके से उज्जैन की ओर भेजा जाएगा।

    बाहरी क्षेत्रों में स्थानों का चयन

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार शहर के बाहरी इलाकों में ऐसे कई स्थानों का चयन किया गया है, जहां अस्थायी सैटेलाइट टाउन विकसित किए जाएंगे। इससे उज्जैन में अचानक भीड़ का दबाव नहीं बढ़ेगा।

    ट्रैफिक प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण

    एडिशनल पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) आर.के. सिंह के अनुसार सिंहस्थ को देखते हुए ट्रैफिक प्रबंधन के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

    तीन नए ट्रैफिक थानों का प्रस्ताव

    शहर में फिलहाल एक ही ट्रैफिक थाना है। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए तीन नए ट्रैफिक थानों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है।

    इनमें चंदन नगर क्षेत्र में धार रोड, बाणगंगा में सुपर कॉरिडोर और लसूड़िया में महालक्ष्मी नगर में ट्रैफिक थाना बनाने की योजना है। धार रोड के लिए प्रशासन ने जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

    कई थानों में बल बढ़ाने का प्रस्ताव

    पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने तिलक नगर, राऊ और द्वारकापुरी थानों में अतिरिक्त बल बढ़ाने का प्रस्ताव भी पुलिस मुख्यालय को भेजा है। इसके अलावा ट्रैफिक थानों के लिए भी अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की जाएगी।

    सिंहस्थ-2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए इंदौर पुलिस तैयारियों को लेकर योजना बना रही है।

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारी: उज्जैन में शंकराचार्य मठ की तीन मंजिला इमारत पर चला बुलडोजर, अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई

    सिंहस्थ 2028 की तैयारी: उज्जैन में शंकराचार्य मठ की तीन मंजिला इमारत पर चला बुलडोजर, अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई


    उज्जैन । उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर नगर निगम ने व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया है। बुधवार को जोन क्रमांक 03 क्षेत्र में नृसिंह घाट से लालपुल ब्रिज मार्ग तक 2016 के बाद बने पक्के निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की गई। निगम अमले ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया। प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ मेले के दौरान साधु संतों के डेरों टेंट व्यवस्था और श्रद्धालुओं की पार्किंग के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

    कार्रवाई के दौरान नर्मदा घाट क्षेत्र स्थित शंकराचार्य मठ में पुण्यानंद गिरी महाराज के आश्रम पर भी बुलडोजर चला। यहां 54 कमरों का तीन मंजिला भवन निर्मित किया गया था जिसमें एसी और नॉन एसी कमरे उपलब्ध थे। प्रशासन के अनुसार इस भवन में अवैध रूप से होटल का संचालन किया जा रहा था। करीब 10 से 15 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बने इस स्थायी ढांचे को नगर निगम की टीम ने ध्वस्त करना शुरू किया।

    इसी क्रम में नरसिंह घाट रोड पर लगभग 60×80 फीट क्षेत्र में बने माधवानंद आश्रम को हटाया गया। साथ ही करीब 80×150 फीट में निर्मित कलोता समाज की धर्मशाला पर भी कार्रवाई की गई। बागली समाज सहित अन्य स्थानों पर बने अवैध निर्माणों को भी चिह्नित कर हटाया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सिंहस्थ क्षेत्र में 2016 के बाद बने सभी स्थायी निर्माणों की सूची तैयार कर ली गई है और नियमों के विरुद्ध खड़े किए गए ढांचों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।

    नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने कहा कि सिंहस्थ क्षेत्र में किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद यदि निर्माण किए गए हैं तो वे नियमों का उल्लंघन हैं और उन्हें हटाया जाना अनिवार्य है। अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने बताया कि जिला प्रशासन से प्राप्त सूची के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। सिंहस्थ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं और साधु संतों की आवाजाही रहती है इसलिए सुरक्षा यातायात और व्यवस्था बनाए रखने के लिए खुला क्षेत्र आवश्यक है।

    प्रशासन के अनुसार सिंहस्थ क्षेत्र लगभग 180 हेक्टेयर में फैला हुआ है और इस पूरे क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी विशेष संस्था या व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि मेला व्यवस्था को सुचारु और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। सिंहस्थ 2028 को लेकर शासन प्रशासन पहले से ही तैयारियों में जुटा है और अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में अन्य चिन्हित स्थलों पर भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।