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  • रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक का शक्ति प्रदर्शन, राहुल गांधी की अपील से गरमाई दिल्ली, SIR पर चुनाव आयोग से आर-पार

    रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक का शक्ति प्रदर्शन, राहुल गांधी की अपील से गरमाई दिल्ली, SIR पर चुनाव आयोग से आर-पार


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की महारैली आयोजित की जा रही है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित इस कार्यक्रम में 19 विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। विपक्ष ने इसे ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान का हिस्सा बताते हुए लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई करार दिया है।

    रैली से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक हुई। इसमें प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। इसके बाद सभी प्रमुख नेताओं के मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च करने की योजना बनाई गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोगों से इस मार्च और महारैली में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग कनॉट प्लेस पहुंचकर उनके साथ पैदल चलें या सीधे रामलीला मैदान आएं, लेकिन कार्यक्रम में जरूर शामिल हों।

    रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने का दावा विपक्षी नेताओं की ओर से किया गया है। वहीं, दिल्ली पुलिस का अनुमान लगभग 50 हजार लोगों के आने का है। मंच, कुर्सियों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण मैदान में 30 से 40 हजार लोगों के बैठने की क्षमता रहने की बात सामने आई है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे क्षेत्र को अलग-अलग जोन में बांटकर निगरानी की व्यवस्था की है।

    कांग्रेस और सहयोगी दलों के नेताओं ने रैली को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा आंदोलन बताया। सांसद सुखदेव सिंह भगत ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं और उनके आने से होटल, दुकान तथा खानपान से जुड़े स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिल सकता है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने बताया कि निर्धारित समय से पहले ही सुबह 9 बजे से कार्यकर्ताओं का मैदान में पहुंचना शुरू हो गया था। प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल ने भी तैयारियों का जायजा लिया।

    टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति के हित के लिए नहीं, बल्कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष को जनता के मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलने पर नेताओं को सड़क पर उतरना पड़ रहा है। सीपीआई सांसद पी. संतोष ने भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का दावा किया।

    दूसरी ओर, भाजपा और एनडीए नेताओं ने रैली के आयोजन तथा विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए। भाजपा की दिल्ली इकाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर जारी कर INDIA ब्लॉक की रैली को निशाना बनाया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना विपक्ष की आदत बन गई है। केशव प्रसाद मौर्य ने राहुल गांधी के नेतृत्व और रैली पर टिप्पणी करते हुए इसे लोकतंत्र तथा संविधान का मजाक बताया।

    बिहार में जेडीयू महासचिव श्याम रजक ने 10 लाख लोगों के जुटने के दावे को खोखला बताया। पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन ने विपक्ष पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी रैली के मुद्दों तथा समय पर सवाल उठाए। पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने विपक्ष पर व्यापारियों को परेशान करने और लोगों को रैली में लाने के लिए पैसे देने का आरोप लगाया।

    रैली के समय को लेकर व्यापारियों की चिंताओं पर भी राजनीतिक बयानबाजी हुई। शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता कृष्ण हेगड़े ने कहा कि त्योहारों के दौरान राजनीतिक आयोजनों से कारोबार प्रभावित हो सकता है। उत्तर प्रदेश के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने भी आरोप लगाया कि रैली से व्यापारियों की आजीविका पर असर पड़ सकता है। इस तरह SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर आयोजित महारैली में विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन के साथ भाजपा और एनडीए के विरोधी बयान भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे।

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग आज, 21 विपक्षी दलों के नेता होंगे शामिल

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग आज, 21 विपक्षी दलों के नेता होंगे शामिल


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन शनिवार को मॉक महाभियोग आयोजित करने जा रहा है। इस कार्यक्रम में विपक्ष के करीब 21 राजनीतिक दलों के नेता शामिल होंगे। आयोजन दोपहर 3:30 बजे राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर किया जाएगा। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर गठबंधन लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस कार्यक्रम को चुनाव प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की एकजुटता दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    दरअसल, INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग कार्यक्रम पहले शुक्रवार को आयोजित किया जाना था, लेकिन दिल्ली में भारी बारिश के कारण इसे टालना पड़ा। अब इसे शनिवार दोपहर 3:30 बजे आयोजित करने का फैसला लिया गया है। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और विभिन्न वामपंथी दलों के नेता हिस्सा लेंगे। राजनीतिक दलों के नेताओं के अलावा सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और SIR प्रक्रिया से प्रभावित लोगों के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। विपक्ष इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाना चाहता है।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार करेंगी। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग विपक्षी दलों के प्रतिनिधि निर्धारित समय के भीतर अपनी बात रखेंगे। आयोजन में करीब 30 नेताओं के संबोधन की संभावना जताई गई है। कार्यक्रम को संसद की कार्यवाही की तर्ज पर संचालित करने की तैयारी है। इसमें प्रस्ताव पेश करने, नेताओं के भाषण और चर्चा के लिए एक निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि, यह पूरी कवायद प्रतीकात्मक होगी। इसे वास्तविक संवैधानिक महाभियोग की प्रक्रिया नहीं माना जाएगा।

    इस आयोजन से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को वोट चोरी के आरोपों पर संसद में बहस करने की चुनौती दी है। लखनऊ में भाजपा की राज्य कार्यसमिति की बैठक के दौरान शाह ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद अंपायर को दोष देने के बजाय मेहनत करनी चाहिए। शाह की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।

    मॉक महाभियोग के बाद INDIA गठबंधन अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली भी आयोजित करेगा। इस रैली में मुख्य रूप से वोट चोरी के आरोपों और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का मुद्दा उठाया जाएगा। विपक्षी दल इन मुद्दों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं। मॉक महाभियोग और प्रस्तावित रैली को गठबंधन के साझा अभियान के दो महत्वपूर्ण हिस्सों के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखने और इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ‘जनता का महाभियोग’ की तैयारी, खड़गे के आवास पर जुटे इंडिया गठबंधन के नेता

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ‘जनता का महाभियोग’ की तैयारी, खड़गे के आवास पर जुटे इंडिया गठबंधन के नेता


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी इंडिया गठबंधन ने ‘जनता का महाभियोग’ कार्यक्रम की तैयारी तेज कर दी है। इसी सिलसिले में गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित गठबंधन के कई नेता शामिल हुए। बैठक में आगामी विरोध कार्यक्रम और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर चर्चा की गई। विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंकाओं को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं।

    कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी मांग के तहत विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, 30 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे नई दिल्ली स्थित 10 राजाजी मार्ग पर ‘जनता का महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। यह स्थान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आवास है। कार्यक्रम के जरिए विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच उठाने और चुनावी व्यवस्था से जुड़े अपने आरोपों को सामने रखने की तैयारी कर रहा है। इसके अगले दिन यानी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली प्रस्तावित है। बैठक को इस रैली से पहले विपक्षी दलों की रणनीति तय करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने प्रस्तावित कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए इसके सफल होने की उम्मीद जताई। उनके मुताबिक, इसमें सांसदों, राजनीतिक दलों के नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, बुद्धिजीवियों और उन मतदाताओं की भागीदारी हो सकती है, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित लोग अपने विचार रखेंगे और यह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का माध्यम बनेगा।

    दिल्ली के व्यापारियों की ओर से गठबंधन की रैली को लेकर जताई जा रही चिंता पर भी महुआ माजी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें कार्यक्रम को लोकतंत्र की रक्षा और लोगों की आवाज उठाने के उद्देश्य से आयोजित बताया गया है। महुआ माजी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग स्वीकार कर लेती है, तो उनके अनुसार विरोध प्रदर्शन 30 सेकंड में समाप्त हो सकता है। यह उनकी ओर से दिया गया राजनीतिक बयान है।

    बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ गौरव गोगोई ने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गौरव गोगोई ने भाजपा पर कथित अनियमितताओं से जुड़ी सच्चाई सामने आने से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता के सामने यह मुद्दा रखना चाहता है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां किस तरह हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

    विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर संविधान की भावना का उल्लंघन करने और चुनावी लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं। फिलहाल, 30 अक्टूबर के प्रस्तावित कार्यक्रम और 1 नवंबर की रैली पर राजनीतिक गतिविधियां केंद्रित हैं। इन आयोजनों के जरिए विपक्ष एसआईआर, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।

  • SIR से जुड़े प्रमुख फैसले सामूहिक रूप से लिए गए…. SC में चुनाव आयोग ने किया अपना बचाव!

    SIR से जुड़े प्रमुख फैसले सामूहिक रूप से लिए गए…. SC में चुनाव आयोग ने किया अपना बचाव!


    नई दिल्ली।
    चुनाव आयोग ( Election Commission) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपने कामकाज और फैसले लेने की प्रक्रिया का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची (Electoral Roll) के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special In-depth Review- SIR) से जुड़े प्रमुख फैसले सामूहिक रूप से लिए गए थे। आयोग के तीनों सदस्यों ने हलफनामा दाखिल करने को भी सर्वसम्मति से मंजूरी दी।

    हालांकि, आयोग के इस जवाब से उसके कामकाज को लेकर उठे सभी सवालों का समाधान नहीं हुआ है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार अपनी टिप्पणियां दर्ज की थीं। इनमें कई मामलों में उन्होंने फैसले लिए जाने के बाद इसकी जानकारी मिलने की बात कही थी। यही इस पूरे विवाद का अहम पहलू है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आयोग ने आखिरकार किसी फैसले को मंजूरी दी या नहीं, बल्कि यह भी है कि क्या उसके दोनों अन्य सदस्यों को आयोग के नाम पर की जा रही कार्रवाई की जानकारी और उसमें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिला। आरोप ये लग रहे हैं कि सभी फैसले ज्ञानेश कुमार खुद ले रहे थे।


    फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर क्या विवाद है?

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 को लेकर भी आयोग के हलफनामे में सफाई दी गई है। मई में चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित फॉर्म 6 में बदलाव करने के लिए निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 में संशोधन जरूरी है। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस बात से सहमति जताई थी।

    इसके बावजूद जुलाई में फॉर्म 6 के ऑनलाइन वर्जन में बदलाव दिखाई दिया। संधू को इसकी जानकारी एक अखबार की रिपोर्ट से मिली। अगस्त में उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म में जोड़ी गई घोषणा को अनधिकृत और अवैध बताया था।

    अब आयोग ने हलफनामे में कहा है कि SIR के दौरान जोड़ी गई घोषणा फॉर्म 6 में संशोधन नहीं थी, बल्कि एक अलग दस्तावेज था। हालांकि, आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन में घोषणा को जिस तरह दिखाया गया, उससे ऐसा लग सकता था कि फॉर्म 6 में बदलाव किया गया है।

    आयोग ने माना कि अधिकारियों की ओर से उठाए गए कुछ कदमों में सुधार की जरूरत थी। इसके बाद आयोग के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण प्रभाग ने 21 अक्टूबर को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में वैधानिक फॉर्म 6 और SIR से जुड़ी घोषणा को अलग-अलग करने का फैसला लिया।

    लेकिन हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जुलाई में ऑनलाइन फॉर्म में घोषणा जोड़ने की मंजूरी किसने दी थी। यह भी नहीं बताया गया कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से इस संबंध में लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने के बावजूद यह बदलाव कैसे लागू हुआ।


    ECINet के कामकाज पर भी उठे सवाल

    चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इस प्लेटफॉर्म के जरिये मतदाता सूची से जुड़े कई काम किए जाते हैं। हलफनामे में आयोग ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव करने की वैधानिक जिम्मेदारी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की होती है। आयोग के मुताबिक, ERO के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम जोड़ा, हटाया या संशोधित नहीं किया जाता। सॉफ्टवेयर का उद्देश्य अधिकारियों को उनके अधिकारों का इस्तेमाल करने में मदद करना है।

    आयोग ने प्लेटफॉर्म की कानूनी अनुपालन प्रक्रिया की समीक्षा और नए आईटी मॉड्यूल की जांच के लिए भी नई व्यवस्था का उल्लेख किया। इसके तहत आईआईटी मुंबई और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के विशेषज्ञों वाली समिति का प्रावधान किया गया है।

    हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी ही व्यवस्था का सुझाव विवेक जोशी ने 29 मई को दिया था। उन्होंने मतदाता सूची के डेटाबेस में अधिकारों के धीरे-धीरे केंद्रीकरण को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि आईआईटी के किसी बाहरी विशेषज्ञ की मदद से यह प्रमाणित कराया जाए कि डेटाबेस में बदलाव करने का अधिकार केवल संबंधित वैधानिक अधिकारियों के पास हो।

    सुखबीर सिंह संधू ने भी जुलाई में इस सुझाव का समर्थन किया था। लेकिन 14 अगस्त को दर्ज अपनी टिप्पणी में संधू ने कहा था कि उनके पहले के सुझावों पर क्या हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। आयोग के हलफनामे में समिति बनाने के फैसले का जिक्र है, लेकिन मई में दिए गए इस सुझाव का उल्लेख नहीं किया गया है।


    गोवा में 97 मतदाताओं के नाम का मामला

    गोवा में मतदाता सूची से जुड़े मामले का भी हलफनामे में उल्लेख है। आयोग के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची से बाहर रह गए 97 मतदाताओं में से 88 ने बाद में फॉर्म 6 के जरिए आवेदन किया। हालांकि, इससे पहले फरवरी में सामने आई समस्या का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के निर्वाचन अधिकारियों ने सात दिनों के भीतर आठ बार सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलाव करने का अनुरोध किया था, ताकि हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने के उनके फैसलों को लागू किया जा सके।

    आयोग के एक उप निर्वाचन आयुक्त ने भी टिप्पणी की थी कि आईटी सिस्टम जरूरी कार्रवाई को नहीं रोक सकता। हलफनामे में बाद में 88 मतदाताओं के आवेदन करने की जानकारी तो दी गई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि फरवरी में अधिकारियों को अपने फैसले लागू करने में परेशानी क्यों हुई थी।


    पश्चिम बंगाल में अपीलों को लेकर भी सवाल

    पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ दाखिल अपीलों का मामला भी हलफनामे में उठाया गया है। आयोग ने कहा कि ये अपीलें राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अधिकारियों ने दाखिल की थीं और इस मामले को आयोग के सामने नहीं लाया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत संबंधित अधिकारियों को अपील दाखिल करने का अधिकार था। हालांकि, इस मामले में भी कुछ सवाल बिना जवाब के ही रहे।

  • राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब, मार्च पर भी की टिप्पणी

    राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब, मार्च पर भी की टिप्पणी

    नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से जवाब मांगा है। विपक्ष की इन याचिकाओं में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है।

    विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिकाओं में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से संबंधित मुद्दे को उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है। इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने को कहा है।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विरोध मार्च का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कोई भी अदालत को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता। ऐसी कोशिशें बेकार हैं और उन पर कोई ध्यान नहीं देता। मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।

    इस सुनवाई से पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ याचिकाएं दाखिल कीं। बैज के मुताबिक, अदालत ने इन याचिकाओं पर संज्ञान लिया और 15 अक्टूबर को सुनवाई हुई।

    दीपक बैज ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वोटों की चोरी करके सत्ता हासिल की गई और चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी के बीच गठबंधन है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इन आरोपों से जुड़े सबूत सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे हैं। बैज ने यह भी कहा कि विपक्ष को मामले में अपने पक्ष में फैसला आने की उम्मीद है। हालांकि, ये बातें कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए आरोप और व्यक्त किया गया विश्वास हैं।

    इस मामले में विपक्षी नेताओं ने अदालत से मुलाकात करने और ज्ञापन सौंपने के लिए पहले भी समय मांगा था। 11 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुलाकात का समय देने का अनुरोध किया था। वे अपनी मांगों और शिकायतों से संबंधित ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन उन्हें मुलाकात का समय नहीं मिला।

    इसके अगले दिन, यानी 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। इसके बाद उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर याचिकाएं दाखिल कीं। विपक्ष की ओर से इस कदम के जरिए चुनाव आयोग की प्रक्रिया को न्यायिक चुनौती दी गई है।

    15 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अब इन याचिकाओं में उठाए गए सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना है। मामले में आगे की कार्रवाई अदालत के समक्ष प्रस्तुत जवाब और सुनवाई के दौरान होने वाली कार्यवाही के आधार पर आगे बढ़ेगी।

  • दिल्ली में मतदाता सूची में नाम जोड़ने का एक और मौका मिलेगा…. SIR में छूटे वोटरों की टेंशन हुई कम

    दिल्ली में मतदाता सूची में नाम जोड़ने का एक और मौका मिलेगा…. SIR में छूटे वोटरों की टेंशन हुई कम


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार (Chief Electoral Officer Ashok Kumar) ने सोमवार को कहा कि एसआईआर प्रक्रिया (SIR Process) के दौरान मतदाता सूची से छूटे पात्र मतदाताओं के लिए 18 और 25 अक्तूबर को विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इनमें जवाब दाखिल कर निस्तारण करा सकेंगे, वहीं पात्र लोग फॉर्म-6 भरकर जमा कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि फॉर्म-6 (Form-6) के साथ जरूरी दस्तावेज जमा करने वाले सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची (Voter List) में शामिल किए जाएंगे। कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर नहीं छूटेगा।

    दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के मुताबिक 33 लाख नोटिस पाने वाले मतदाताओं में से करीब 20 लाख मतदाताओं के नोटिस का निस्तारण किया जा चुका है। सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में सभी एसडीएम ने अपने-अपने क्षेत्रों में जारी नोटिस के निस्तारित हो चुके मामलों की जानकारी दी।

    सीईओ कार्यालय का कहना है कि तार्किक विसंगतियों और नो-मैपिंग के कारण जिन मतदाताओं को नोटिस जारी हुए थे, उनकी ओर से दस्तावेज जमा कराकर नोटिस का निस्तारण कराया जा रहा है। अब तक ऐसे चार विशेष कैंप लगाए जा चुके हैं।


    पिछले हफ्ते मिले थे विपक्षी दल

    इससे पहले इंडिया गठबंधन के नेताओं ने बीते बुधवार को दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात की थी और एसआईआर को रद्द करने और राष्ट्रीय राजधानी की मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए 47.56 लाख लोगों के नाम पुनः जोड़ने की मांग की थी। विपक्षी दलों द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, कश्मीरी गेट से दिल्ली निर्वाचन कार्यालय तक मार्च निकालने के बाद कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, माले और तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीईओ अशोक कुमार को एक ज्ञापन सौंपा।

    जानकारी के मुताबिक एसआईआर के दौरान तैयार की गई मसौदा सूची से 47 लाख से अधिक नाम बाहर कर दिए गए हैं, जबकि रिकॉर्ड में विसंगतियां होने के कारण 33 लाख से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। बयान में कहा गया था कि विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने नोटिस वापस लेने और उन सभी पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बहाल करने की मांग की, जिनके नाम हटा दिए गए हैं।

  • राहुल गांधी से लेकर अभिजीत दीपके तक, विरोध प्रदर्शनों पर BJP की जवाबी रणनीति की तैयारी

    राहुल गांधी से लेकर अभिजीत दीपके तक, विरोध प्रदर्शनों पर BJP की जवाबी रणनीति की तैयारी


    नई दिल्‍ली । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं से बातचीत के लिए तैयार है। साथ ही, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के रुख का राजनीतिक जवाब देने तथा चुनाव आयोग के कामकाज पर तथ्य आधारित जानकारी सामने रखने की तैयारी भी की जा रही है। हालांकि, भाजपा ने अपनी रणनीति को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिया है कि मौजूदा हालात से निपटने के लिए बातचीत और राजनीतिक स्तर पर जवाब देने, दोनों विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इस बीच, विपक्षी गठबंधन INDIA, कांग्रेस से जुड़े संगठनों और अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से विरोध जारी रहने की संभावना है।

    चुनाव आयोग के मुद्दे पर फैक्टशीट तैयार करने की चर्चा

    रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए एक फैक्टशीट तैयार कर रही है। पार्टी की रणनीति में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के आरोपों का राजनीतिक जवाब देना भी शामिल बताया गया है। हालांकि, किसी भाजपा नेता ने सार्वजनिक रूप से इन तैयारियों की पुष्टि नहीं की है।

    अखबार से बातचीत में पार्टी से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि देश में कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है और प्रदर्शन सहित सभी गतिविधियां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के दायरे में होनी चाहिए। सूत्र ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है और इसके लिए महाभियोग की प्रक्रिया अपनानी होती है।

    प्रदर्शनकारियों के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन का दावा

    रिपोर्ट में भाजपा से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चुनाव आयोग ने SIR के मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की कोशिश की है। वहीं, सरकार ने दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में प्रदर्शनकारियों से निपटते समय संयम बरता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन रखने की कोशिश की गई।

    भाजपा से जुड़े एक सूत्र ने रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति का हवाला देते हुए कहा कि सरकार विरोध के अधिकार के खिलाफ नहीं है। पार्टी का तर्क है कि निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन होने से लोगों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है और आम नागरिकों को होने वाली परेशानी भी कम की जा सकती है। ये दावे पार्टी से जुड़े सूत्रों के हैं; सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक रणनीति जारी नहीं की गई है।

    INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर लग सकता है विराम

    पिछले सप्ताह से विपक्षी गठबंधन INDIA के नेता दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, माकपा महासचिव एमए बेबी ने कहा कि उन्हें कांग्रेस की ओर से फोन आया था। कांग्रेस का मानना था कि सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने और याचिका दाखिल करने के बाद मंगलवार को नए मार्च या प्रदर्शन की जरूरत नहीं है।

    हालांकि, गठबंधन के साझा प्रदर्शन पर विराम लगने की स्थिति में भी कांग्रेस से जुड़े कुछ संगठन अपना विरोध जारी रख सकते हैं। इनमें भारतीय युवा कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के नाम शामिल हैं। ऐसे में दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की आगे की दिशा इन संगठनों के फैसलों पर भी निर्भर करेगी।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने पुलिस को दिया 24 घंटे का समय

    अभिजीत दीपके से जुड़ी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सक्रिय है। सोमवार को पार्टी के प्रतिनिधि दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग लेकर पहुंचे थे। पार्टी ने पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया था।

    सीजेपी नेता सौरभ दास ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार है और उनकी पार्टी इसी अधिकार के तहत प्रदर्शन करना चाहती है। उन्होंने कहा कि पुलिस अक्सर प्रदर्शन की अनुमति के लिए पहले से संपर्क करने की बात कहती है, इसलिए इस बार तारीख और समय तय करने का फैसला पुलिस पर छोड़ा गया है।

    पार्टी पदाधिकारी आशुतोष रांका ने भी कहा था कि सीजेपी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पुलिस से समय मांग रही है। उनके मुताबिक, अनुमति मिलने पर पार्टी 24 घंटे के भीतर निर्धारित स्थल पर जुटने के लिए तैयार है।

    मंगलवार को नए ऐलान पर नजर

    सीजेपी की ओर से पुलिस को दिया गया 24 घंटे का समय मंगलवार को पूरा होने की बात कही जा रही है। ऐसे में पार्टी की अगली घोषणा पर नजर रहेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस से जुड़े छात्र और युवा संगठन विरोध जारी रखने का फैसला कर सकते हैं, भले ही INDIA गठबंधन के स्तर पर साझा प्रदर्शन न हो।

    फिलहाल भाजपा की ओर से बातचीत और राजनीतिक जवाब की संभावित रणनीति की खबरें सामने आई हैं, लेकिन पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अपने अगले कदमों का खुलासा नहीं किया है। दिल्ली में आगे विरोध प्रदर्शन किस रूप में जारी रहेंगे, यह संबंधित दलों और संगठनों के फैसलों के साथ-साथ पुलिस की अनुमति पर भी निर्भर करेगा।

  • ममता बनर्जी ने ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ के अंदाज में BJP और मुख्य चुनाव आयुक्त पर साधा निशाना, सुप्रिया सुले ने साझा किया वीडियो

    ममता बनर्जी ने ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ के अंदाज में BJP और मुख्य चुनाव आयुक्त पर साधा निशाना, सुप्रिया सुले ने साझा किया वीडियो

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें वह बच्चों की लोकप्रिय कविता ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ की तर्ज पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधती नजर आ रही हैं। वीडियो में ममता ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग की भूमिका और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को उठाया है। उनके इस अंदाज को चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है।

    वीडियो में ममता बनर्जी कविता की शैली में कहती हैं, “जॉनी-जॉनी यस पापा, एसआईआर नो पापा, ज्ञानेश कुमार यस पापा, रेजिग्नेश यस पापा, रिमूव यस पापा, अरेस्ट एस पापा, सेव डेमोक्रेसी यस पापा, सेव इंडिया यस पापा।” इस रचनात्मक प्रस्तुति के जरिए उन्होंने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अपनी आपत्ति जाहिर की। कविता के परिचित अंदाज का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक संदेश को सामने रखा। वीडियो में भाजपा सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर भी टिप्पणी की गई है।

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने यह वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया। उन्होंने ममता बनर्जी की तारीफ करते हुए लिखा कि ममता दीदी हमेशा की तरह कमाल हैं। सुले ने वीडियो के संदेश को हास्य के साथ लोकतंत्र बचाने की गंभीर अपील बताया। उन्होंने ‘लोकतंत्र बचाओ, भारत बचाओ’ के संदेश का उल्लेख किया। वीडियो साझा किए जाने के बाद SIR और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे फिर चर्चा में आ गए।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी नेताओं की प्रमुख आपत्तियों में मतदाता सूची से संबंधित कथित अनियमितताएं और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता शामिल हैं। ममता बनर्जी ने भी अपने वीडियो के माध्यम से इन मुद्दों पर विरोध जताया है। हालांकि, वीडियो में लगाए गए राजनीतिक आरोप अपने आप में किसी अनियमितता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते।

    इससे पहले 9 अक्टूबर को विपक्षी गठबंधन INDIA के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था। इस प्रतिनिधिमंडल में ममता बनर्जी भी शामिल थीं। मुलाकात का उद्देश्य विपक्ष की ओर से उठाई जा रही चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखना था।

    मुलाकात के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की चिंताओं को सुना। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए थे। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए थे और उनकी स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    विपक्ष लगातार SIR और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर सवाल उठा रहा है। ममता बनर्जी का वायरल वीडियो इसी राजनीतिक विरोध की कड़ी के रूप में सामने आया है। बच्चों की कविता के अंदाज में दिए गए संदेश के जरिए उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ अपनी आपत्तियां जाहिर कीं। सुप्रिया सुले द्वारा वीडियो साझा किए जाने से यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में और प्रमुखता से आया है। फिलहाल, चुनावी प्रक्रिया में कथित धांधली और अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रात 8 बजे मिलेंगे INDIA ब्लॉक के 10 सांसद, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर रखेंगे अपना पक्ष

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रात 8 बजे मिलेंगे INDIA ब्लॉक के 10 सांसद, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर रखेंगे अपना पक्ष

    नई दिल्ली । मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल को शुक्रवार, 9 अक्टूबर की रात 8 बजे मुलाकात का समय दिया है। विपक्षी सांसद इस बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में संशोधन और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं राष्ट्रपति के सामने रखेंगे। दिल्ली में पिछले चार दिनों से विपक्षी दलों का प्रदर्शन जारी है।

    मुलाकात के लिए शुरुआत में 15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का समय मांगा गया था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति से मिलने के लिए 10 सांसदों को समय दिया गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि राष्ट्रपति से मुलाकात का पहला अनुरोध 2 अक्टूबर को भेजा गया था। विपक्षी दल चाहते हैं कि SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों पर राष्ट्रपति को अपनी बात बताई जाए। शुक्रवार रात होने वाली बैठक में प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों और चिंताओं को सामने रखेगा।

    INDIA ब्लॉक के दल SIR प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची में किए गए बदलावों और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

    विपक्ष का प्रदर्शन 6 अक्टूबर को उस समय तेज हुआ, जब INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। अगले दिन, 7 अक्टूबर को भी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा और जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इन घटनाओं के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी सांसदों के बीच तनाव की स्थिति बनी।

    8 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर प्रदर्शन किया और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भी SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए गए। प्रदर्शन के साथ-साथ विपक्षी दलों के नेताओं ने अपनी आगे की रणनीति पर भी चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लगातार दो दिनों तक विपक्षी सांसदों के लिए दिल्ली में दोपहर के भोजन की बैठक आयोजित की। 7 अक्टूबर को सांसद जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में जुटे, जबकि 8 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के मोएट्स रेस्टोरेंट में बैठक हुई। इन बैठकों के बाद सांसद प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे।

    7 अक्टूबर की बैठक में समाजवादी पार्टी के सांसद शामिल नहीं हुए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सपा की ओर से समय पर सूचना नहीं मिलने की बात कही गई थी। कांग्रेस ने कहा था कि सभी विपक्षी दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कम समय मिलने के कारण कुछ दल अपने प्रतिनिधि नहीं भेज सके। अगले दिन समाजवादी पार्टी के सांसद भी बैठक और प्रदर्शन में शामिल हुए।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विपक्षी सांसदों के बीच हुए टकराव से जुड़े मामलों में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ नेताओं पर पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और सरकारी कामकाज में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन मामलों की जांच जारी है। प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों के साबित होने का प्रमाण नहीं है। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ होने वाली बैठक पर नजरें टिकी हैं। विपक्षी सांसदों की कोशिश होगी कि वे मतदाता सूची, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के समक्ष रखें।

  • जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस की मंजूरी नहीं, धारा 163 लागू कर सुरक्षा व्यवस्था सख्त

    जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस की मंजूरी नहीं, धारा 163 लागू कर सुरक्षा व्यवस्था सख्त

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन नहीं दिए जाने और संगठन के पिछले प्रदर्शन के रिकॉर्ड को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। साथ ही, नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने की जानकारी दी गई है।

    दिल्ली पुलिस की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने बताया कि CJP की ओर से सौरव दास ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के संबंध में आवेदन दिया था। प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही तय करने की मांग उठाना था। पुलिस ने आवेदन पर विचार करने के बाद पाया कि प्रदर्शन की सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी। निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन से कम से कम 10 दिन पहले सूचना मिलनी चाहिए। इस प्रक्रिया का पालन नहीं होने के कारण प्रदर्शन को मंजूरी नहीं दी गई।

    नूपुर प्रसाद ने बताया कि नई दिल्ली क्षेत्र में BNSS की धारा 163 लागू है। इसके तहत सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए निवारक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने CJP और उसके समर्थकों को चेतावनी दी है कि बिना अनुमति प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से बचें। अधिकारियों ने कहा कि प्रतिबंधों का पालन करना जरूरी है और नियम तोड़ने की स्थिति में कार्रवाई हो सकती है।

    पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे CJP के पिछले रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त के अनुसार, पहले संगठन को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन उस दौरान कानूनी निर्देशों और दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया गया। पुलिस का कहना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए इस बार प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने को लेकर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर 10 अक्टूबर के कार्यक्रम को मंजूरी नहीं देने का फैसला किया गया है।

    दूसरी ओर, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास ने घोषणा की है कि 10 अक्टूबर को प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों पर जवाबदेही देनी चाहिए। अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि पुलिस या सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों को रोकेंगे, तो वे जिस स्थान पर रोके जाएंगे, वहीं विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता भले ही सरकार के पास हो, लेकिन सड़कें देश की जनता की हैं और नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

    प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े कई एहतियाती कदमों की जानकारी भी दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम से 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने को कहा गया है। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से लागू होने हैं और शनिवार को स्थिति सामान्य होने तक जारी रह सकते हैं। संबंधित स्टेशनों पर मेट्रो ट्रेनों की आवृत्ति भी घटाई जा सकती है।

    रेलवे के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। प्रदर्शन के कारण सड़कों पर भारी जाम लगने की आशंका के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के एहतियाती उपाय के तौर पर दिल्ली में खुदरा शराब की दुकानों को 9 और 10 अक्टूबर को बंद रखने का आदेश दिया गया है।