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  • चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष का बड़ा हमला, 23 दलों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा संयुक्त पत्र, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष का बड़ा हमला, 23 दलों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा संयुक्त पत्र, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । देश में चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों ने एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्षी गठबंधन से जुड़े 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र लिखकर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया, चुनाव आयोग की निष्पक्षता तथा चुनावी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। अब इस पत्र को सार्वजनिक किए जाने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    संयुक्त पत्र में विपक्षी दलों ने दावा किया है कि देश की चुनावी प्रक्रिया के संबंध में कई गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। पत्र में कहा गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव अनिवार्य हैं तथा इस व्यवस्था की रक्षा करना न्यायपालिका का महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्व है। विपक्ष का कहना है कि जब लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तब न्यायपालिका से अपेक्षा की जाती है कि वह संविधान की भावना के अनुरूप आवश्यक हस्तक्षेप करे।

    पत्र में चुनाव आयोग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग की निष्पक्षता को लेकर जनता के बीच संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रियाओं के दौरान आयोग का रवैया कई अवसरों पर पक्षपातपूर्ण प्रतीत हुआ है। विपक्ष का यह भी कहना है कि आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघनों पर समान रूप से कार्रवाई नहीं होने के कारण चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई है।

    विपक्षी दलों ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्र अपेक्षित स्तर पर प्रभावी दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सभी संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास बना रहना आवश्यक है और यदि किसी संस्था की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं तो उसका समाधान संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।

    पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि विपक्ष न्यायपालिका की भूमिका और स्वतंत्रता का सम्मान करता है तथा उसका उद्देश्य किसी संस्था की गरिमा पर प्रश्न उठाना नहीं है। इसके विपरीत, विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब विभिन्न स्तरों पर मतभेद या विवाद उत्पन्न होते हैं, तब न्यायपालिका अंतिम संवैधानिक मंच के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी आधार पर मुख्य न्यायाधीश से चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया है।

    विपक्षी दलों का यह भी कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनके अनुसार यदि चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर संदेह बढ़ता है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी कारण उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    इस घटनाक्रम के बाद चुनावी सुधार, निर्वाचन आयोग की भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों, संवैधानिक संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रिया की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाएगी। फिलहाल विपक्ष का यह संयुक्त पत्र देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर जारी बहस का एक अहम राजनीतिक दस्तावेज बनकर सामने आया है।

  • NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में SIR के बारे में पढ़ेंगे बच्चे, समाजवाद-धर्मनिरपेक्षता की पुरानी व्याख्या हटाई

    NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में SIR के बारे में पढ़ेंगे बच्चे, समाजवाद-धर्मनिरपेक्षता की पुरानी व्याख्या हटाई


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की नई पाठ्यपुस्तक में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस बार छात्रों को चुनाव प्रक्रिया से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बारे में पढ़ाया जाएगा। वहीं, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र से संबंधित कुछ व्याख्याओं को पहले की तुलना में बदले हुए स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। नई सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों को संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की व्यापक समझ देना बताया गया है। इन बदलावों को लेकर शिक्षा और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

    संविधान की व्याख्या का बदला स्वरूप
    नई पुस्तक में संविधान को समझाने का तरीका भी बदला गया है। इसमें संविधान निर्माण की प्रक्रिया, संविधान सभा की भूमिका और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के कार्यों पर अधिक जोर दिया गया है। इसके अलावा समानता, स्वतंत्रता, अधिकार और नागरिकों की जिम्मेदारियों जैसे विषयों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।

    पहले की पुस्तकों में संविधान की प्रस्तावना और उसमें शामिल शब्दों की विस्तृत व्याख्या दी जाती थी, जबकि नई किताब में प्रस्तावना को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया है। साथ ही समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे शब्दों को भी पहले की तरह विस्तार से प्रस्तुत नहीं किया गया है।

    पहली बार कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में इमरजेंसी
    नई किताब में पहली बार वर्ष 1975 की इमरजेंसी को भी शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि उस दौर में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा और उस समय लिए गए फैसलों को लेकर किस तरह की चर्चाएं हुईं। इसे लोकतंत्र के सामने आने वाली चुनौतियों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    SIR को पाठ्यक्रम में क्यों मिली जगह
    पुस्तक में चुनाव आयोग की जिम्मेदारियों के साथ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को भी समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाए रखने की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की जाती है।

    चार विषय अब एक ही पुस्तक में
    इस बार इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र को अलग-अलग पुस्तकों के बजाय एकीकृत कर एक ही पुस्तक में शामिल किया गया है। NCERT का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के बीच आपसी संबंधों की समग्र समझ प्रदान करना है।

    शिक्षा मंत्री का बयान
    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विद्यार्थियों को देश के इतिहास और लोकतंत्र से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी होना आवश्यक है। उनके अनुसार, ऐसे विषयों का अध्ययन करने से नई पीढ़ी में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और इतिहास के प्रति बेहतर समझ विकसित होगी।

  • हम हारे नहीं, हराए गए, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; बंगाल में सियासी संग्राम तेज

    हम हारे नहीं, हराए गए, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; बंगाल में सियासी संग्राम तेज



    नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं हारी, बल्कि उन्हें हराया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में कई अनियमितताएं देखने को मिलीं।

    ‘सीटों में गड़बड़ी’ का दावा
    TMC प्रमुख ने आरोप लगाया कि कई सीटों पर नतीजे प्रभावित किए गए। उनका कहना है कि विपक्ष के वोटों को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया गया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    मतदाता सूची को लेकर विवाद
    ममता ने SIR (स्पेशल रिवीजन) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव परिणामों पर असर पड़ा। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

    विपक्ष का समर्थन
    उन्होंने बताया कि राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने उनसे बातचीत कर समर्थन जताया है।कोलकाता की एक महत्वपूर्ण सीट पर मतों की दोबारा गिनती जारी है। अधिकारियों के अनुसार, अंतिम नतीजे पुनर्गणना पूरी होने के बाद ही घोषित किए जाएंगे।

    ED की कार्रवाई से बढ़ा सियासी तापमान
    इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने भी माहौल को और गरमा दिया है। एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

    भाजपा का पलटवार
    भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह जनता का स्पष्ट जनादेश है। पार्टी नेताओं का दावा है कि जीत संगठन की मेहनत और रणनीति का नतीजा है। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक टकराव अपने चरम पर है। एक ओर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सत्ताधारी पक्ष इसे लोकतांत्रिक जनादेश बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत हैं।

  • West Bengal. चुनाव से पहले TMC ने किया SIR में काटे गए 90 लाख नाम फिर जोड़ने का ऐलान

    West Bengal. चुनाव से पहले TMC ने किया SIR में काटे गए 90 लाख नाम फिर जोड़ने का ऐलान


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) की तारीखें नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी हमले तेज होते दिख रहे हैं। भाजपा (BJP) ने जहां आज चुनावी घोषणा पत्र (Election Manifesto) में लोक लुभावन वादे कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बड़े वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश की है, वहीं TMC महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के हिन्दू कार्ड पर नया दांव चल दिया है। इतना ही नहीं बनर्जी ने चुनावों से पहले एक बड़ा ऐलान भी कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर उनकी पार्टी टीएमसी फिर से सत्ता में आती है तो SIR में काटे गए सभी 90 लाख लोगों के नाम फिर से मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे।

    एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में अभिषेक बनर्जी ने इसका ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतादाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग और भाजपा यह कहे कि जिन 90 लाख लोगों के नाम काटे गए हैं, वे सभी बांग्लादेशी थे।


    63% नाम हिंदुओं के काटे गए

    AITC के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा, “…मैं यह भरोसा दिलाता हूँ कि जब TMC फिर जीतेगी, तो वोटर लिस्ट से हटाए गए सभी लोगों के नाम वापस जोड़ दिए जाएँगे।” उन्होंने कहा, “BJP और चुनाव आयोग को यह कहना चाहिए कि जिन 90 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे सभी बांग्लादेशी थे।” बनर्जी ने कहा, “उनके बयानों के अनुसार, इनमें से 63% नाम हिंदुओं के थे, तो फिर वे भी ज़रूर बांग्लादेशी या रोहिंग्या होंगे…यानी 90 में से 57 लाख हिन्दू बांग्लादेशी रोहिंग्या हैं।”


    6 माह में UCC लागू करेंगे: BJP

    बता दें कि बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने पर छह महीने के भीतर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू (यूसीसी) लागू की जाएगी और ‘बंगाल के सपूत’ को मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही ‘राम राज्य’ स्थापित किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ जारी करते हुए कहा कि घुसपैठ और तुष्टीकरण के खिलाफ भाजपा के रुख को कल्याणकारी प्रयासों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के इस आरोप को भी खारिज किया कि भाजपा पश्चिम बंगाल के लोगों की खान-पान की आदतों में दखल देगी। दूसरी तरफ, अभिषेक बनर्जी 63 फीसदी हिन्दू मतदाताओं के नाम काटे जाने के बहाने भाजपा को हिन्दू विरोधी ठहराने की कोशिश कर रहे हैं और टीएमसी के पक्ष में ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं।

  • सर पास कर दो…. MP में 10वीं-12वीं की कॉपियों में किसी ने रखे 500 के नोट, तो किसी ने की ऑनलाइन पैसे भेजने की पेशकश

    सर पास कर दो…. MP में 10वीं-12वीं की कॉपियों में किसी ने रखे 500 के नोट, तो किसी ने की ऑनलाइन पैसे भेजने की पेशकश


    ग्वालियर।
    हाईस्कूल (High school.) और हायर सेकेंडरी (Higher Secondary.) की परीक्षा खत्म होने के बाद ग्वालियर में इन कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की कॉपियों को जांचने (Copies Checking) का काम हुआ। इस बारे में जानकारी देते हुए शिक्षकों ने बताया कि इस साल स्टू़डेंट्स की कॉपियों को जांचने के दौरान उन्हें 100 से ज्यादा अनोखी गुहारें (Unique requests) मिली, जिसे पढ़कर शिक्षक भी हैरान रह गए और उन्हें हंसी भी आई। इनमें से कुछ छात्र-छात्राओं ने अपने फोन नंबर कॉपियों में लिखकर पास करने के बदले शिक्षकों को ऑनलाइन रिश्वत भेजने की पेशकश की, तो वहीं कुछ ने माता-पिता की बीमारी की बात लिखते हुए पास करने की अपील की। कॉपी जांचने वाले शिक्षकों ने बताया कि कुछ छात्र-छात्राओं ने कॉपी के साथ 500 रुपए का नोट कॉपी में रखा और लिखा कि सर पास कर दीजिए, वहीं कुछ छात्रों ने कॉपी में इमोशनल शायरी लिख दी।

    कॉपियां जांचने वाले शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब 100 कॉपियों में परीक्षार्थियों ने शिक्षकों के लिए अलग-अलग तरह की फरियादें लिखी हैं। इनमें छात्राओं की संख्या अधिक रही।


    छात्र ने लिखा- पास कर दीजिए, साली से शादी करवा दूंगा

    इस बारे में जानकारी देते हुए शिक्षकों ने बताया कि एक स्टूडेंट ने गजब का ऑफर देते हुए लिखा, ‘सर मुझे पास कर दो मेरी साली से आपकी शादी करवा दूंगा।’ वहीं एक अन्य छात्रा ने लिखा, ‘सर मैं फेल हो गई तो मेरी शादी टूट जाएगी, प्लीज पास कर दीजिए।’। एक अन्य छात्र ने लिखा, ‘सर गर्लफ्रेंड ने ब्रेकअप कर लिया तो पढ़ाई नहीं कर पाया। कृपा मुझे पास कर दीजिए।’


    छात्रा ने लिखा- फेल हो गई तो पति प्रताड़ित करेगा

    एक अन्य छात्रा ने लिखा, ‘सर शादी होने वाली है फेल हो गई तो पति प्रताड़ित करेगा, मुझे पास कर दीजिए।’ शिक्षकों के अनुसार करीब 23 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने अपने माता-पिता को कैंसर या अन्य बीमारी होना बताया और लिखा कि बीमारी के चलते पढ़ाई नहीं हो पाई, आप पास कर दीजिए हमारी मां आपको दुआएं देंगी।

    QR कोड होने से कॉपियों की जानकारी मिलना मुश्किल
    उधर मूल्यांकन प्रभारी का कहना है कि कॉपियों पर QR कोड होने से छात्र-छात्राओं और अभिवावकों को कॉपियों वाले स्थान का पता ही नहीं लगता है, यही वजह है कि कमजोर और पढ़ाई न करने वाले छात्र-छात्राएं कॉपियों में इमोशनल संदेश लिखते हैं। इस बार 100 से ज्यादा छात्र-छात्राओं की कॉपी में गुजारिश, दलील, प्रपोज की पेशकश लिखी हुई थी, लेकिन शिक्षकों ने इस पर ध्यान देने की बजाय सिर्फ मूल्यांकन किया है।


    शिक्षकों को दिया गया करीब 67 लाख रुपए का मानदेय

    बोर्ड के संभागीय अधिकारी मारुति सोमकुंवर ने बताया कि इस बार जिले के 49 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं दोनों परीक्षाओं में शामिल हुए थे। कॉपियों की जांच पूरी हो चुकी है और रिजल्ट 12 अप्रैल तक घोषित किया जा सकता है। आपको बता दें कि वर्ष 2025 में 2 लाख 79 हजार 895 कॉपियां जांची गई थीं। उस समय शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को मानदेय के रूप में 69 लाख रुपए दिए गए थे। इस बार कॉपियां कुछ कम हैं, लेकिन मानदेय लगभग 67 लाख रुपए रहने का अनुमान है।


    12 अप्रैल तक घोषित हो सकता है हायर सेकेंड्री का रिजल्ट

    एमपी बोर्ड की हायर सेकेंडरी और हाईस्कूल परीक्षाओं का मूल्यांकन शासकीय कन्या विद्यालय, शिंदे की छावनी में एक दिन पहले पूरा हो चुका है। मूल्यांकन केंद्र पर कॉपियां जांचने का काम 22 फरवरी से शुरू हुआ, इस दौरान कुल 2 लाख 66 हजार 173 कॉपियों का मूल्यांकन किया गया। अब रिजल्ट की तैयारी चल रही है, जो 12 अप्रैल तक घोषित होने की संभावना है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष रिजल्ट 6 मई को जारी हुआ था।

  • पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट: चुनाव से पहले राजनीतिक तूफ़ान तेज, एसआईआर और दस्तावेज़ विवाद से बढ़ी चिंता

    पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट: चुनाव से पहले राजनीतिक तूफ़ान तेज, एसआईआर और दस्तावेज़ विवाद से बढ़ी चिंता

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन की अटकलों ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। राज्यपाल के अचानक बदलाव, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे पर विवाद और चुनाव आयोग की टीम के दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने इस संभावना को और गहरा कर दिया है।

    इतिहास और संवैधानिक पहलू
    पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू होने का इतिहास बहुत लंबा नहीं है। 30 अप्रैल 1977 को तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जो वाममोर्चा सरकार के शपथ ग्रहण तक 52 दिनों तक जारी रहा। अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या बंगाल एक बार फिर राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है।

    चुनाव आयोग का दौरा और विरोध प्रदर्शन
    चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने कोलकाता दौरे के दौरान सभी राजनीतिक दलों और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया। हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर सीधे जवाब देने से परहेज किया और कहा कि कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद चुनाव की तारीख और चरण तय किए जाएंगे।

    तृणमूल कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने एक या दो चरणों में मतदान कराने की मांग की। आयोग को कोलकाता और आसपास बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। तृणमूल समर्थकों ने काले झंडे दिखाए और “लोकतंत्र का हत्यारा” जैसे पोस्टर भी लगाए।

    एसआईआर प्रक्रिया पर विवाद
    राज्य में नवंबर से चल रही एसआईआर (Special Summary Revision) प्रक्रिया के तहत लगभग 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेज विचाराधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेजों की जांच में न्यायिक अधिकारियों को दो महीने का समय लगने की संभावना है। राजनीतिक दलों का कहना है कि इस स्थिति में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण होगा।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से वैध वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अचानक राज्यपाल सीवी आनंद बोस की जगह आर.एन. रवि को क्यों नियुक्त किया गया, जो तमिलनाडु में विवादित रहे हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा और विवाद
    राष्ट्रपति का दौरा सिलीगुड़ी में आदिवासी सम्मेलन के लिए था। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसे लेकर असंतोष जताया और कहा कि उन्हें न्यूनतम प्रोटोकॉल तक नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस पर राष्ट्रपति के अपमान का आरोप लगाया।

    राजनीतिक माहौल और भविष्य की चुनौतियां
    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एसआईआर के तहत विचाराधीन 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेज समय पर जांच कर लिए जाएंगे। यदि यह कार्य पूरा नहीं हुआ, तो या तो चुनाव टालना पड़ सकता है या बिना पूरी सूची के चुनाव कराना पड़ सकता है। इससे राष्ट्रपति शासन की संभावना बढ़ सकती है।अगले कुछ दिनों में केंद्र और चुनाव आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा साफ होगी।

  • SIR के बाद पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची जारी, 63 लाख नाम कटे

    SIR के बाद पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची जारी, 63 लाख नाम कटे


    कोलकाता।
    आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। इस प्रक्रिया में करीब 63 लाख 66 हजार अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट नाम हटा दिए गए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि ड्राफ्ट सूची में दर्ज सात करोड़ 66 लाख मतदाताओं की संख्या अब सात करोड़ चार लाख रह गई है।

    अग्रवाल ने विस्तार से कहा, “विशेष गहन पुनरीक्षण के पहले चरण में ड्राफ्ट सूची से तीन लाख 75 हजार मतदाता हटाए गए, जबकि एक लाख 82 हजार नए मतदाता शामिल किए गए। इसके अलावा 60 लाख मतदाता ‘विचाराधीन’ श्रेणी में हैं, जिनके मताधिकार पर स्थानीय न्यायिक अधिकारी निर्णय लेंगे।”

    उन्होंने इस विशाल अभियान में हुई छोटी-मोटी गलतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि आयोग ने तुरंत सुधार किया। दिसंबर में जारी ड्राफ्ट सूची से पहले ही 58 लाख से अधिक नाम हटा चुके थे, और ‘विचाराधीन’ नामों के फैसले के बाद यह संख्या और बढ़ेगी।

    प्रक्रिया में कुल सात करोड़ आठ लाख लोगों ने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किया था, जिनमें से एक करोड़ 50 लाख से अधिक मतदाताओं, जिनमें तार्किक विसंगतियों और अननियोजित श्रेणी वाले शामिल थे, की विभिन्न केंद्रों पर सुनवाई की गई। सूत्रों के अनुसार, शनिवार दोपहर से सभी जिलों में मतदाता सूची की भौतिक प्रतियां वितरित हो रही हैं, और शाम तक यह ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगी।

    ममता बनर्जी के भवानीपुर क्षेत्र में 47 हजार नाम हटे

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दक्षिण कोलकाता स्थित भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र (कुल एक लाख 61 हजार मतदाता) से 47 हजार 111 अनुपस्थित-स्थानांतरित-मृत-डुप्लिकेट नाम हटा दिए गए। साथ ही 14 हजार 154 नाम ‘विचाराधीन’ हैं, जिनका फैसला न्यायिक अधिकारियों को करना है। अप्रैल के अंत में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले यह तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो के लिए गंभीर चुनौती है। ममता ने हाल ही में स्थानीय नेताओं, बूथ स्तरीय एजेंटों और कार्यकर्ताओं के साथ कई बैठकें की हैं।

    शुभेंदु के विधानसभा में कटे 11 हजार नाम

    वहीं, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के पूर्वी मिदनापुर जिले के नंदीग्राम क्षेत्र से करीब 11 हजार नाम हटे। 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने ममता को महज 1900 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। कोलकाता उत्तर जिले से चार लाख से अधिक और कोलकाता दक्षिण (भवानीपुर सहित) से दो लाख 15 हजार नाम हटाए गए। कुल मिलाकर दो प्रमुख कोलकाता जिलों से छह लाख से अधिक मतदाता सूची से बाहर हो गए।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप-प्रत्यारोप

    केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री व पूर्व बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने मीडिया से कहा, “अभी तक हटे 65 लाख नामों में 24 लाख मृत मतदाता हैं। तृणमूल कांग्रेस इन मृत वोटरों के नाम पर झूठे वोट डलवाकर चुनाव जीतती रही है। इस बार सत्ताधारी दल की यह मशीनरी फेल हो जाएगी।” भाजपा ने इसे स्वच्छ चुनाव की दिशा में बड़ा कदम बताया।

    उल्लेखनीय है कि नवंबर 2024 से शुरू हुई यह तीन माह की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरे राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, सड़क प्रदर्शनों और अदालती लड़ाइयों के बीच संपन्न हुई। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध बनाना था, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव निष्पक्ष हों। निर्वाचन आयोग का यह कदम चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

  • Tamilnadu : SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी… 97 लाख से ज्यादा नाम हटाए

    Tamilnadu : SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी… 97 लाख से ज्यादा नाम हटाए


    चेन्नई।
    चुनाव आयोग (Election Commission) ने तमिलनाडु (Tamilnadu) में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Voter Revision- SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) प्रकाशित कर दी है। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक ने सोमवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की, जिसके मुताबिक विभिन्न श्रेणियों के तहत 97.37 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कि राज्य में अब 5.67 करोड़ (5,67,07,380) मतदाता बचे हैं। इसमें 2,77,38,925 पुरुष, 2,89,60,838 महिलाएं और 7,617 तृतीय लिंग (थर्ड जेंडर) मतदाता शामिल हैं। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हटाए गए नामों में एक महत्वपूर्ण हिस्सा मृत मतदाताओं का है।

    पटनायक ने चेन्नई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करने से पहले राज्य में मतदाताओं की संख्या 6.41 करोड़ थी। उन्होंने बताया कि नयी सूची में 18-19 आयु वर्ग के 7.40 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया है जबकि विभिन्न श्रेणियों के तहत कुल 97.37 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। पटनायक ने कहा कि निरंतर अद्यतन करने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएगी।


    SC के आदेश के अनुसार लिस्ट जारी

    संशोधन प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग के 30 जनवरी के उस निर्देश का भी पालन किया गया, जो उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार जारी किया गया था। इस निर्देश में यह अनिवार्य किया गया था कि ‘तार्किक विसंगतियों’ की श्रेणी में हटाए गए नामों को हटाने के कारणों के साथ सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए। ये सूचियाँ ग्राम पंचायत कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों, तालुकों, उप-मंडल कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित की गईं। प्रभावित व्यक्तियों को आपत्ति दर्ज करने या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया था। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलेक्टरों) ने अपने-अपने जिलों में अंतिम मतदाता सूची जारी की।


    लगभग आठ प्रतिशत मतदाताओं को हटाया गया

    इस बीच, विशेष गहन पुनरीक्षण के दूसरे चरण के दौरान नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग आठ प्रतिशत मतदाताओं को हटाया गया है। पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में, कुछ दिन पहले प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, कुल मतदाताओं की संख्या 9,44,211 है। वहीं शोलिंगनल्लूर में कुल 5,36,991 मतदाता हैं जिनमें से 2,62,621 पुरुष मतदाता, 2,74,254 महिला मतदाता और 116 तृतीय लिंग मतदाता हैं।

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    SIR के बाद 6 राज्यों की वोटर लिस्ट जारी… गुजरात में सबसे ज्यादा 68 लाख और MP में हटाए गए 34.25 लाख नाम


    नई दिल्ली।
    भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India- ECI) ने देश के छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों (Voter lists) के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव दर्ज किए गए हैं। लाखों की संख्या में अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

    एसआईआर के आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली गिरावट गुजरात में देखी गई है। यहां कुल 68,12,711 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। पुनरीक्षण से पहले गुजरात में मतदाताओं की संख्या 5,08,43,436 थी, जो अब घटकर 4,40,30,725 रह गई है। यह कुल मतदाता संख्या में 13.40% की भारी गिरावट है। गुजरात के बाद मध्य प्रदेश में भी मतदाता सूची में बड़ी शुद्धि की गई है। यहां 34,25,078 नाम हटाए गए, जिससे मतदाताओं की संख्या 5,74,06,143 से कम होकर 5,39,81,065 (-5.97%) पर आ गई है।


    कहां कितनी हुई कटौती?

    – राजस्थान: मतदाताओं की संख्या 5,46,56,215 से घटकर 5,15,19,929 हो गई। 31,36,286 नाम काटे गए।
    – छत्तीसगढ़: यहां मतदाता सूची 2,12,30,737 से घटकर 1,87,30,914 रह गई। 24,99,823 नाम काटे गए।
    – केरल: सूची से 8,97,211 नाम हटाए गए, जिसके बाद अब कुल मतदाता 2,69,53,644 हैं।
    – गोवा: मतदाताओं की संख्या में 1,27,468 की गिरावट दर्ज की गई।

    केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति
    – पुडुचेरी: 77,367 मतदाताओं के नाम हटाए गए।
    – अंडमान और निकोबार: 52,364 नामों की कटौती की गई।
    – लक्षद्वीप: यहां सबसे कम केवल 206 नामों में बदलाव हुआ है।

    चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव ‘नेट चेंज’ को दर्शाता है, जिसमें अपात्र मतदाताओं की संख्या में से नए जुड़े पात्र मतदाताओं को घटाया गया है। सूची से नाम हटाने के प्राथमिक कारणों में मृत्यु, स्थायी रूप से स्थानांतरण, एक से अधिक जगहों पर नाम और अन्य पात्रता संबंधी मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने दोहराया कि मतदाता सूची को अपडेट करना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

    उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की बारी
    निर्वाचन आयोग ने देश के 12 राज्यों में इस राष्ट्रव्यापी अभ्यास की शुरुआत की थी। दूसरे चरण के 12 राज्यों में से अब केवल तीन राज्य शेष हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के लिए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) का डेटा इस महीने के अंत में जारी किया जाएगा। आयोग ने शेष राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को भी प्रारंभिक कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

    SIR प्रक्रिया का अगला चरण अप्रैल में शुरू होने वाला है, जो मतदाता सूची के सत्यापन के देशव्यापी अभियान का हिस्सा होगा। फिलहाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, गोवा और अंडमान-निकोबार के लिए अंतिम मतदाता सूचियां आधिकारिक तौर पर प्रकाशित कर दी गई हैं।

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    देश के 12 राज्यों में SIR का तीसरा चरण इसी माह से….शेष 22 में अप्रैल से शुरू होगी प्रक्रिया


    नई दिल्ली।
    देश में मतदाता सूची (Voter list) को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया को तेज करते हुए चुनाव आयोग (ईसीआई) Election Commission – ECI) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision- SIR) के तीसरे चरण की तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोग ने गुरुवार को शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को पत्र लिखकर संकेत दिया है कि SIR प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। साथ ही अधिकारियों से तैयारी का काम जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया है।


    अब तक का सफर: चरण 1 और 2

    मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की यह प्रक्रिया चरणों में चल रही है। SIR का पहला चरण बिहार में लागू किया गया था। इसके बाद 27 अक्टूबर 2025 को आयोग ने दूसरे चरण की घोषणा की, जिसमें 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल थे। इन दोनों चरणों में मिलाकर लगभग 60 करोड़ मतदाता कवर किए जा चुके हैं।

    हालांकि, आयोग ने पहले भी बिहार को छोड़कर सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखा था, लेकिन दूसरे चरण में केवल 12 को शामिल किया गया। इससे संकेत मिलता है कि तीसरे चरण में भी सभी 22 शेष राज्यों/यूटी को शामिल किया जाना तय नहीं है। इन 22 राज्यों/यूटी का कुल निर्वाचन क्षेत्र लगभग 39 करोड़ मतदाताओं का है।


    कौन से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं शामिल?

    आयोग द्वारा संपर्क किए गए राज्यों की सूची में वे राज्य भी शामिल हैं जहां विधानसभा चुनाव नजदीक हैं (जैसे मणिपुर और उत्तराखंड, जिनका कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त हो रहा है)।


    सूची में शामिल प्रमुख नाम हैं:

    राज्य: उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना।

    केंद्र शासित प्रदेश: दिल्ली, चंडीगढ़, लद्दाख, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव।
    हालांकि 22 राज्यों को पत्र लिखा गया है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि तीसरे चरण में इन सभी को एक साथ शामिल नहीं किया जाएगा; कुछ को अगले चरणों के लिए रोका जा सकता है।


    जनगणना 2027 के साथ टकराव की स्थिति

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि SIR का तीसरा चरण जनगणना 2027 के ‘हाउसलिस्टिंग’ (मकानों की सूची बनाना) चरण के साथ टकरा सकता है।
    समय सीमा: जनगणना का हाउसलिस्टिंग कार्य इस वर्ष 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच 45 दिनों की अवधि में होना है।
    चुनौती: दिल्ली, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों ने पहले ही अपनी हाउसलिस्टिंग समय सीमा अधिसूचित कर दी है।
    ऐसे में इन राज्यों को या तो अपनी जनगणना की तारीखों को संशोधित करना होगा या चुनाव आयोग से अनुरोध करना होगा कि उन्हें SIR के अगले चरण में रखा जाए। वहीं, जिन राज्यों ने अभी तारीखें तय नहीं की हैं, वे जनगणना को जून-जुलाई के बाद टाल सकते हैं।
    यह तीसरा चरण संभवतः जून या जुलाई की शुरुआत तक खिंच सकता है, खासकर यदि प्रक्रियाओं में विस्तार दिया जाता है।

    स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का उद्देश्य मतदाता सूचियों से मृत, स्थानांतरित या अयोग्य नामों को हटाना और पात्र नए मतदाताओं को जोड़ना है। आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के आम चुनावों को देखते हुए यह प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आगामी महीनों में यह स्पष्ट होगा कि तीसरे चरण में कितने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वास्तविक रूप से शामिल किया जाता है और जनगणना के कार्यक्रम के साथ तालमेल कैसे बैठाया जाता है।