Tag: SIR

  • Tamilnadu : SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी… 97 लाख से ज्यादा नाम हटाए

    Tamilnadu : SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी… 97 लाख से ज्यादा नाम हटाए


    चेन्नई।
    चुनाव आयोग (Election Commission) ने तमिलनाडु (Tamilnadu) में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Voter Revision- SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) प्रकाशित कर दी है। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक ने सोमवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की, जिसके मुताबिक विभिन्न श्रेणियों के तहत 97.37 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कि राज्य में अब 5.67 करोड़ (5,67,07,380) मतदाता बचे हैं। इसमें 2,77,38,925 पुरुष, 2,89,60,838 महिलाएं और 7,617 तृतीय लिंग (थर्ड जेंडर) मतदाता शामिल हैं। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हटाए गए नामों में एक महत्वपूर्ण हिस्सा मृत मतदाताओं का है।

    पटनायक ने चेन्नई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करने से पहले राज्य में मतदाताओं की संख्या 6.41 करोड़ थी। उन्होंने बताया कि नयी सूची में 18-19 आयु वर्ग के 7.40 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया है जबकि विभिन्न श्रेणियों के तहत कुल 97.37 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। पटनायक ने कहा कि निरंतर अद्यतन करने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएगी।


    SC के आदेश के अनुसार लिस्ट जारी

    संशोधन प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग के 30 जनवरी के उस निर्देश का भी पालन किया गया, जो उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार जारी किया गया था। इस निर्देश में यह अनिवार्य किया गया था कि ‘तार्किक विसंगतियों’ की श्रेणी में हटाए गए नामों को हटाने के कारणों के साथ सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए। ये सूचियाँ ग्राम पंचायत कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों, तालुकों, उप-मंडल कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित की गईं। प्रभावित व्यक्तियों को आपत्ति दर्ज करने या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया था। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलेक्टरों) ने अपने-अपने जिलों में अंतिम मतदाता सूची जारी की।


    लगभग आठ प्रतिशत मतदाताओं को हटाया गया

    इस बीच, विशेष गहन पुनरीक्षण के दूसरे चरण के दौरान नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग आठ प्रतिशत मतदाताओं को हटाया गया है। पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में, कुछ दिन पहले प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, कुल मतदाताओं की संख्या 9,44,211 है। वहीं शोलिंगनल्लूर में कुल 5,36,991 मतदाता हैं जिनमें से 2,62,621 पुरुष मतदाता, 2,74,254 महिला मतदाता और 116 तृतीय लिंग मतदाता हैं।

  • SIR के बाद 6 राज्यों की वोटर लिस्ट जारी… गुजरात में सबसे ज्यादा 68 लाख और MP में हटाए गए 34.25 लाख नाम

    SIR के बाद 6 राज्यों की वोटर लिस्ट जारी… गुजरात में सबसे ज्यादा 68 लाख और MP में हटाए गए 34.25 लाख नाम


    नई दिल्ली।
    भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India- ECI) ने देश के छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों (Voter lists) के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव दर्ज किए गए हैं। लाखों की संख्या में अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

    एसआईआर के आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली गिरावट गुजरात में देखी गई है। यहां कुल 68,12,711 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। पुनरीक्षण से पहले गुजरात में मतदाताओं की संख्या 5,08,43,436 थी, जो अब घटकर 4,40,30,725 रह गई है। यह कुल मतदाता संख्या में 13.40% की भारी गिरावट है। गुजरात के बाद मध्य प्रदेश में भी मतदाता सूची में बड़ी शुद्धि की गई है। यहां 34,25,078 नाम हटाए गए, जिससे मतदाताओं की संख्या 5,74,06,143 से कम होकर 5,39,81,065 (-5.97%) पर आ गई है।


    कहां कितनी हुई कटौती?

    – राजस्थान: मतदाताओं की संख्या 5,46,56,215 से घटकर 5,15,19,929 हो गई। 31,36,286 नाम काटे गए।
    – छत्तीसगढ़: यहां मतदाता सूची 2,12,30,737 से घटकर 1,87,30,914 रह गई। 24,99,823 नाम काटे गए।
    – केरल: सूची से 8,97,211 नाम हटाए गए, जिसके बाद अब कुल मतदाता 2,69,53,644 हैं।
    – गोवा: मतदाताओं की संख्या में 1,27,468 की गिरावट दर्ज की गई।

    केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति
    – पुडुचेरी: 77,367 मतदाताओं के नाम हटाए गए।
    – अंडमान और निकोबार: 52,364 नामों की कटौती की गई।
    – लक्षद्वीप: यहां सबसे कम केवल 206 नामों में बदलाव हुआ है।

    चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव ‘नेट चेंज’ को दर्शाता है, जिसमें अपात्र मतदाताओं की संख्या में से नए जुड़े पात्र मतदाताओं को घटाया गया है। सूची से नाम हटाने के प्राथमिक कारणों में मृत्यु, स्थायी रूप से स्थानांतरण, एक से अधिक जगहों पर नाम और अन्य पात्रता संबंधी मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने दोहराया कि मतदाता सूची को अपडेट करना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

    उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की बारी
    निर्वाचन आयोग ने देश के 12 राज्यों में इस राष्ट्रव्यापी अभ्यास की शुरुआत की थी। दूसरे चरण के 12 राज्यों में से अब केवल तीन राज्य शेष हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के लिए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) का डेटा इस महीने के अंत में जारी किया जाएगा। आयोग ने शेष राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को भी प्रारंभिक कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

    SIR प्रक्रिया का अगला चरण अप्रैल में शुरू होने वाला है, जो मतदाता सूची के सत्यापन के देशव्यापी अभियान का हिस्सा होगा। फिलहाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, गोवा और अंडमान-निकोबार के लिए अंतिम मतदाता सूचियां आधिकारिक तौर पर प्रकाशित कर दी गई हैं।

  • देश के 12 राज्यों में SIR का तीसरा चरण इसी माह से….शेष 22 में अप्रैल से शुरू होगी प्रक्रिया

    देश के 12 राज्यों में SIR का तीसरा चरण इसी माह से….शेष 22 में अप्रैल से शुरू होगी प्रक्रिया


    नई दिल्ली।
    देश में मतदाता सूची (Voter list) को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया को तेज करते हुए चुनाव आयोग (ईसीआई) Election Commission – ECI) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision- SIR) के तीसरे चरण की तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोग ने गुरुवार को शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को पत्र लिखकर संकेत दिया है कि SIR प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। साथ ही अधिकारियों से तैयारी का काम जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया है।


    अब तक का सफर: चरण 1 और 2

    मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की यह प्रक्रिया चरणों में चल रही है। SIR का पहला चरण बिहार में लागू किया गया था। इसके बाद 27 अक्टूबर 2025 को आयोग ने दूसरे चरण की घोषणा की, जिसमें 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल थे। इन दोनों चरणों में मिलाकर लगभग 60 करोड़ मतदाता कवर किए जा चुके हैं।

    हालांकि, आयोग ने पहले भी बिहार को छोड़कर सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखा था, लेकिन दूसरे चरण में केवल 12 को शामिल किया गया। इससे संकेत मिलता है कि तीसरे चरण में भी सभी 22 शेष राज्यों/यूटी को शामिल किया जाना तय नहीं है। इन 22 राज्यों/यूटी का कुल निर्वाचन क्षेत्र लगभग 39 करोड़ मतदाताओं का है।


    कौन से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं शामिल?

    आयोग द्वारा संपर्क किए गए राज्यों की सूची में वे राज्य भी शामिल हैं जहां विधानसभा चुनाव नजदीक हैं (जैसे मणिपुर और उत्तराखंड, जिनका कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त हो रहा है)।


    सूची में शामिल प्रमुख नाम हैं:

    राज्य: उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना।

    केंद्र शासित प्रदेश: दिल्ली, चंडीगढ़, लद्दाख, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव।
    हालांकि 22 राज्यों को पत्र लिखा गया है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि तीसरे चरण में इन सभी को एक साथ शामिल नहीं किया जाएगा; कुछ को अगले चरणों के लिए रोका जा सकता है।


    जनगणना 2027 के साथ टकराव की स्थिति

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि SIR का तीसरा चरण जनगणना 2027 के ‘हाउसलिस्टिंग’ (मकानों की सूची बनाना) चरण के साथ टकरा सकता है।
    समय सीमा: जनगणना का हाउसलिस्टिंग कार्य इस वर्ष 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच 45 दिनों की अवधि में होना है।
    चुनौती: दिल्ली, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों ने पहले ही अपनी हाउसलिस्टिंग समय सीमा अधिसूचित कर दी है।
    ऐसे में इन राज्यों को या तो अपनी जनगणना की तारीखों को संशोधित करना होगा या चुनाव आयोग से अनुरोध करना होगा कि उन्हें SIR के अगले चरण में रखा जाए। वहीं, जिन राज्यों ने अभी तारीखें तय नहीं की हैं, वे जनगणना को जून-जुलाई के बाद टाल सकते हैं।
    यह तीसरा चरण संभवतः जून या जुलाई की शुरुआत तक खिंच सकता है, खासकर यदि प्रक्रियाओं में विस्तार दिया जाता है।

    स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का उद्देश्य मतदाता सूचियों से मृत, स्थानांतरित या अयोग्य नामों को हटाना और पात्र नए मतदाताओं को जोड़ना है। आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के आम चुनावों को देखते हुए यह प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आगामी महीनों में यह स्पष्ट होगा कि तीसरे चरण में कितने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वास्तविक रूप से शामिल किया जाता है और जनगणना के कार्यक्रम के साथ तालमेल कैसे बैठाया जाता है।

  • मध्य प्रदेश: 10 दिन में 11 लाख वोटर्स को हटाने की साजिश? कांग्रेस का बड़ा आरोप, EC के दरवाज़े पर PCC चीफ

    मध्य प्रदेश: 10 दिन में 11 लाख वोटर्स को हटाने की साजिश? कांग्रेस का बड़ा आरोप, EC के दरवाज़े पर PCC चीफ


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, काटने और सुधार की प्रक्रिया 23 जनवरी को खत्म हो रही है। इसी बीच कांग्रेस ने बीजेपी पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की सुनियोजित साजिश का आरोप लगाया है।कांग्रेस का दावा है कि सिर्फ 10 दिनों में लगभग 11 लाख वोटरों के नाम काटने के लिए बीजेपी ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 उपलब्ध कराए हैं।

    कांग्रेस का मुख्य आरोप: “प्रिंटेड फॉर्म-7” से वोटर हटाए जा रहे हैं
    कांग्रेस का कहना है कि जिन फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाए जा रहे हैं, वे प्री-प्रिंटेड (पहले से भरे हुए) हैं।

    इन फॉर्मों में विधानसभा क्रमांक,विधानसभा का नाम,हटाने वाले मतदाता का नाम और विवरण पहले से दर्ज है।
    लेकिन आवेदक का नाम और हस्ताक्षर कहीं नहीं है।कांग्रेस इसे चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उल्लंघन और लोकतंत्र पर हमला करार दे रही है।

    जीतू पटवारी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, बीजेपी चुनाव हारने के डर से मैदान में नहीं, वोटर लिस्ट में खेल रही है।
    बिना आवेदक के नाम और हस्ताक्षर वाले प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 लोकतंत्र की हत्या का प्रमाण हैं।
    SC, ST, अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग के मताधिकार को छीनने की यह सोची-समझी साजिश है।”उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो कांग्रेस सड़कों से लेकर अदालत तक यह मुद्दा ले जाएगी।हम एक भी मतदाता का नाम गलत तरीके से कटने नहीं देंगे।

    कांग्रेस की मांग: EC तुरंत कार्रवाई करे
    कांग्रेस ने चुनाव आयोग से निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की है
    सभी प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 की तुरंत जांच
    बिना वैध आवेदन और हस्ताक्षर वाले फॉर्मों को निरस्त
    दोषी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई
    कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और मताधिकार की रक्षा का मामला है।

    एक व्यक्ति ने 25-25 आपत्तियां”कांग्रेस का नया आरोप
    पटवारी ने कहा कि नियमों के अनुसार एक व्यक्ति केवल एक ही आपत्ति दर्ज करा सकता है, लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं ने एक ही व्यक्ति द्वारा 25-25 आपत्तियां दर्ज कराई हैं।उन्होंने कहा कि इसके प्रमाण चुनाव आयोग को सौंप दिए गए हैं।

    BLO को चेतावनी: अनियमितता मिली तो FIR
    पटवारी ने BLOs को चेतावनी दी कि, यदि किसी भी बूथ पर अनियमितता पाई गई, तो संबंधित BLO के खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी।
    उन्होंने कहा कि कुछ BLO ईमानदारी से काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ भाजपा नेताओं के दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे उनकी सर्विस रिकॉर्ड (CR) खराब हो सकती है।

    फर्जी आपत्तियों का आरोप
    पटवारी ने आरोप लगाया कि कई मतदाताओं को जानकारी तक नहीं है, और उनके नाम से ऑनलाइन फर्जी आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं।

    यह खासकर अल्पसंख्यक और आदिवासी क्षेत्रों में हो रहा है।उन्होंने कहा:वोट चोरी करके चुनाव जीतने की कोशिश की जा रही है।

    मंत्री विश्वास सारंग पर भी सवाल
    पटवारी ने कहा कि मंत्री विश्वास सारंग पिछले चुनाव हार चुके थे।
    उनकी सीट और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों से करीब एक-एक लाख वोट कम हुए हैं, जहाँ जीत-हार का अंतर अक्सर इतना ही रहता है।उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मांग की कि इन गड़बड़ियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया पर भारी आरोप लगाए हैं और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।अब सवाल यह है कि चुनाव आयोग इस मामले में कब और क्या कार्रवाई करता है, क्योंकि 23 जनवरी तक समय बहुत कम है।

  • SIR में धांधली का डर: MP कांग्रेस अलर्ट मोड में, 19 से 22 जनवरी तक रोज दावे-आपत्ति पर नजर रखने के निर्देश

    SIR में धांधली का डर: MP कांग्रेस अलर्ट मोड में, 19 से 22 जनवरी तक रोज दावे-आपत्ति पर नजर रखने के निर्देश


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन–SIR को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान संभावित गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने गंभीर आशंका जताई है और पार्टी संगठन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा इस प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में हेरफेर कर वोट चोरी की कोशिश कर सकती है, इसलिए हर स्तर पर सतर्कता बेहद जरूरी है।

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि 19 जनवरी से 22 जनवरी तक दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पर रोजाना नजर रखी जाए। पार्टी ने सभी जिला, ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर के पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में फॉर्म भरने की स्थिति, नाम जोड़ने या काटने की गतिविधियों की प्रतिदिन जानकारी जुटाएं और उसे संगठन के वरिष्ठ स्तर तक पहुंचाएं। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी कीमत पर यह सुनिश्चित किया जाए कि न तो कोई गलत नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाए और न ही किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाए।

    कांग्रेस ने विशेष रूप से फॉर्म-7 को लेकर सतर्क रहने को कहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक फॉर्म-7 ही मान्य है। यदि कहीं भी बाहर छपे हुए या अनधिकृत फॉर्म-7 का इस्तेमाल होता दिखाई दे, तो उस पर तत्काल आपत्ति दर्ज कराई जाए और इसकी सूचना संबंधित निर्वाचन अधिकारी के साथ-साथ पार्टी संगठन को भी दी जाए। कांग्रेस का आरोप है कि पूर्व में भी इसी तरह के फॉर्म का दुरुपयोग कर मतदाता सूची से नाम हटाने के प्रयास किए गए हैं। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे बूथ स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएं और आम मतदाताओं, खासकर कमजोर, वंचित और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों की मदद करें। यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से काटा गया हो या काटने का प्रयास हो रहा हो, तो तुरंत दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कराई जाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है।

    ये निर्देश ऐसे समय जारी किए गए हैं, जब SIR के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में लाखों नाम कटने को लेकर प्रदेशभर में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला बता रही है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और नियमों के तहत की जा रही है। बावजूद इसके कांग्रेस का मानना है कि सतर्कता में ही सुरक्षा है और किसी भी स्तर पर ढिलाई भारी पड़ सकती है। कांग्रेस ने साफ किया है कि 22 जनवरी 2026 दावे-आपत्ति की अंतिम तिथि है। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो वह सड़क से लेकर आयोग तक हर स्तर पर आवाज उठाएगी।

  • ‘उंगली नीचे करो’ TMC सांसदों ने चुनाव आयोग से की तीखी बहस SIR और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप

    ‘उंगली नीचे करो’ TMC सांसदों ने चुनाव आयोग से की तीखी बहस SIR और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप




    नई दिल्ली।
    तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से SIR (सर्विलांस इन्टरव्यू रिकॉर्ड) और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर करीब ढाई घंटे तक बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनसे उंगली उठाकर बात करने की कोशिश की, जिस पर बनर्जी ने कहा, “उंगली नीचे करके बात करें।
    आप मनोनीत हैं, हम निर्वाचित हैं। हम किसी के दास नहीं हैं।”

    अभिषेक बनर्जी ने कहा कि देश में अब ईवीएम से वोट चोरी नहीं हो रही, बल्कि सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम के जरिए वोटर लिस्ट में हेरफेर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के 10 सांसदों और पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने आयोग से सवाल किए, लेकिन आयोग ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया।

    साथ ही उन्होंने आयोग पर 28 नवंबर को पूछे गए सवालों का जवाब न देने और चयनित मीडिया को जानकारी देने का भी आरोप लगाया।

    TMC नेता ने दावा किया कि SIR के तहत 1.36 करोड़ मामलों में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी बताई जा रही है, लेकिन आयोग ने अभी तक सूची सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि ECI ऐप में गड़बड़ी है, दस्तावेज जमा होने के बावजूद नोटिस जारी नहीं हो रहे और नाम सॉफ्टवेयर के जरिए हटाए जा रहे हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों, दिव्यांग और गंभीर बीमार लोगों को घंटों वेरिफिकेशन के लिए बैठाना अमानवीय है।

    अभिषेक बनर्जी ने बंगाल को बदनाम करने की कोशिश पर सवाल उठाया और कहा, रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम पर झूठा प्रचार किया जा रहा है। अगर अवैध प्रवासी हैं तो उन्हें बाहर करने का हम समर्थन करेंगे, लेकिन झूठा प्रचार बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य 11 राज्यों में SIR चल रहा है, लेकिन बंगाल में सबसे कम डिलीशन होने के बावजूद सबसे ज्यादा सख्ती की जा रही है।

    अभिषेक बनर्जी ने विपक्षी दलों को चेताया कि वोट चोरी ईवीएम से नहीं, वोटर लिस्ट और सॉफ्टवेयर के जरिए हो रही है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी इसी तरीके से महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और बिहार में जीत हासिल कर रही है। अंत में उन्होंने कहा, “पहले मतदाता तय करते थे कि सरकार कौन बनाएगा, अब सरकार तय कर रही है कि वोट डालने कौन जाएगा। लेकिन संविधान हमेशा रहेगा और 2026 में बंगाल की जनता फिर बीजेपी को हराएगी।

  • SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी: जानिए आपका नाम है या नहीं, ऑनलाइन-ऑफलाइन चेक करने का तरीका

    SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी: जानिए आपका नाम है या नहीं, ऑनलाइन-ऑफलाइन चेक करने का तरीका


    नई दिल्‍ली । पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, गोवा, राजस्थान और लक्षद्वीप में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत फॉर्म भरने की समयसीमा पूरी हो चुकी है। चुनाव आयोग 16 दिसंबर को इन राज्यों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करेगा। आयोग के मुताबिक, केवल पश्चिम बंगाल में करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हो सकते हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में SIR फॉर्म में गड़बड़ियां पाई गई हैं।

    जिन मतदाताओं के फॉर्म अधूरे हैं या जिनका सत्यापन नहीं हो पाया है, उनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं किए जाएंगे। ऐसे मामलों में मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है, जहां पासपोर्ट, डोमिसाइल सर्टिफिकेट और जन्म प्रमाणपत्र जैसे चुनाव आयोग द्वारा मान्य 12 दस्तावेजों के आधार पर जांच के बाद नाम जोड़ा जाएगा।

    मतदाता ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम देख सकते हैं। ऑनलाइन जांच के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट eci.gov.in पर नाम या EPIC नंबर डालकर सर्च किया जा सकता है। वहीं ऑफलाइन जांच के लिए हर पोलिंग स्टेशन पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास ड्राफ्ट लिस्ट उपलब्ध होगी।

    अगर किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो वह दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है। चुनाव आयोग ने इसके लिए एक महीने का समय दिया है। दावों की जांच और जरूरत पड़ने पर सुनवाई के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।

  • भोपाल में साढ़े चार लाख में से 1.30 लाख मतदाताओं को नोटिस, नाम काटने की प्रक्रिया तेज

    भोपाल में साढ़े चार लाख में से 1.30 लाख मतदाताओं को नोटिस, नाम काटने की प्रक्रिया तेज


    भोपाल । भोपाल में सात विधानसभा क्षेत्रों में एक सप्ताह पहले शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के बाद मतदाता सूची में नाम कटने वालों की संख्या में वृद्धि हो गई है। वर्तमान में, इन मतदाताओं की संख्या बढ़कर 4 लाख 45 हजार 32 हो गई है जिसमें हर 24 घंटे में करीब 1500 और मतदाताओं का नाम कटने का आंकड़ा सामने आ रहा है। अब इन नामों को बिना किसी नोटिस के सीधे मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। यह प्रक्रिया जिले के चुनाव कार्यालय के निर्देशों के अनुसार चल रही है।

    इस विशेष पुनरीक्षण के दौरान मुख्य रूप से मृतक अनुपस्थित स्थानांतरित या दोहरी पंजीकरण के कारण नाम कटने की संभावना है। जिले के निर्वाचन कार्यालय ने बीएलओ को यह निर्देश दिए हैं कि वे मृत, अनुपस्थित और स्थानांतरित मतदाताओं की जानकारी इकट्ठा कर सूची से बाहर करें। इसके अलावा, ‘नो मैपिंग’ वाले मतदाताओं के आंकड़े भी जुटाए जा रहे हैं और इस वर्ग के मतदाताओं के नाम सीधे अनकलेक्टेबल श्रेणी में डाले जा रहे हैं।

    यह विशेष अभियान इस उद्देश्य से चलाया जा रहा है ताकि चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक रखा जा सके। जिला निर्वाचन कार्यालय ने सभी बीएलओ से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि बिना किसी गलतफहमी के किसी का भी नाम न कटे।इस पुनरीक्षण के तहत, 85 वार्डों में मतदाताओं की सुनवाई की जाएगी। यह प्रक्रिया 18 दिसंबर तक जारी रहेगी जिसमें मतदाता अपनी नागरिकता को प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज़ पेश करेंगे।

    जिला निर्वाचन कार्यालय ने 23 दिसंबर को ड्रॉफ्ट रोल जारी करने की तारीख तय की है जिसके बाद अंतिम नामों की सूची तैयार की जाएगी।दूसरी ओर, बैरसिया तहसील में सुनवाई की प्रक्रिया अलग से की जाएगी। जबकि शेष मतदान क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर ही सुनवाई की जाएगी, जहां पर संबंधित मतदाता अपनी स्थिति का स्पष्टिकरण देंगे।

    यह विशेष पुनरीक्षण इस बात को सुनिश्चित करेगा कि चुनावी प्रक्रिया में शामिल हर मतदाता का नाम सही तरीके से और निष्पक्ष रूप से लिस्ट में हो। भोपाल में सात विधानसभा क्षेत्रों में एक सप्ताह पहले शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान, 1.30 लाख मतदाताओं के नाम कटने की संभावना है। बीएलओ द्वारा मृत, अनुपस्थित स्थानांतरित और अन्य कारणों से नाम हटाए जाएंगे। 18 दिसंबर तक दस्तावेज़ जमा होंगे और 23 दिसंबर को ड्रॉफ्ट रोल जारी किया जाएगा।

  • ग्वालियर में विशेष गहन पुनरीक्षण: मतदाताओं के लिए बीएलओ से संपर्क करने का अंतिम मौका

    ग्वालियर में विशेष गहन पुनरीक्षण: मतदाताओं के लिए बीएलओ से संपर्क करने का अंतिम मौका


    ग्वालियर । ग्वालियर जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची के अंतिम आंकड़े तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि अब भी कुछ मतदाता हैं जिन्होंने अपना फार्म अभी तक जमा नहीं किया है। ऐसे मतदाताओं के लिए अब एक अंतिम अवसर दिया गया है। यदि आप ग्वालियर में रहते हैं और आपका फार्म अभी तक जमा नहीं हुआ है तो आप अपने बीएलओ बूथ लेवल ऑफिसर से संपर्क कर फार्म जमा कर सकते हैं।

    ग्वालियर जिले में पिछले कुछ दिनों में 14 हजार मतदाताओं का पता चलने के बाद उनके फार्म डिजिटाइज्ड कर दिए गए हैं। बीएलओ पिछले दो दिनों से अपने बूथों पर बैठकर काम कर रहे हैं और इस प्रक्रिया को पूरा कर रहे हैं। इसके बावजूद अभी भी 2 लाख 70 हजार नाम ऐसे हैं जो मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके हैं। यह वे लोग हैं जिनका रिकार्ड नहीं मिल पाया या वे अनुपस्थित हैं मृत हैं या शिफ्ट हो चुके हैं।

    आखिरी अवसर फार्म जमा करने के लिए संपर्क करें

    ग्वालियर जिले में कुल 16 लाख 49 हजार फार्म डिजिटाइज्ड किए जा चुके हैं लेकिन इस सूची में कुछ नाम अब भी छूटे हुए हैं। इस समय में बीएलओ द्वारा पुनः वाचन किया जा रहा है और मतदाता संपर्क कर अपने फार्म जमा कर सकते हैं। अगर आपने अपना फार्म घर पर प्राप्त किया है और अभी तक उसे जमा नहीं किया है तो कृपया बीएलओ से तुरंत संपर्क करें। इसके अलावा इस दौरान बीएलओ और बीएलए द्वारा बैठकें आयोजित की जा रही हैं ताकि उन मतदाताओं का डेटा अपडेट किया जा सके जो अभी तक सूची में नहीं शामिल हो पाए हैं।

    विधानसभा निर्वाचन की तैयारियां और समय सीमा

    भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर  के कार्य के लिए सात दिन का अतिरिक्त समय और बढ़ा दिया गया है। अब बीएलओ को अधिक समय मिलेगा ताकि वे उन मतदाताओं को सूची में शामिल कर सकें जो अभी तक अनमैप हैं। यह सात दिनों की अवधि बीएलओ को सूची में बदलाव करने अनमैप मतदाताओं का डेटा अपडेट करने और फार्म जमा करने के लिए दी गई है।

    ग्वालियर जिले में विशेष प्रयास जारी

    ग्वालियर जिले में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य बड़े पैमाने पर चल रहा है। जिले के 1679 बूथों पर बीएलओ बैठे हुए हैं और यहां से मतदाता संपर्क कर अपने फार्म जमा कर सकते हैं। यदि आपको किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता हो तो आप कलेक्ट्रेट कार्यालय या अन्य संबंधित अधिकारियों से भी संपर्क कर सकते हैं।

    अनमैप मतदाताओं का आंकड़ा घटाने की चुनौती

    ग्वालियर जिले में अभी दो लाख से ज्यादा मतदाता ऐसे हैं जिनका नाम सूची में शामिल नहीं हो पाया है। इन अनमैप मतदाताओं को सही तरीके से सूची में शामिल करने के लिए बीएलओ को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि सात दिनों के इस अतिरिक्त समय के दौरान बीएलओ इस आंकड़े को कम करने में सक्षम हो सकते हैं। यह समय अनमैप मतदाताओं का डेटा पूरी तरह से अपडेट करने के लिए है।

    ग्वालियर जिले के मतदाताओं के लिए यह आखिरी अवसर है कि वे अपने फार्म जमा करें और मतदाता सूची में नाम सुनिश्चित करें। बीएलओ से संपर्क कर फार्म जमा करें और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। निर्वाचन आयोग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए बीएलओ को अतिरिक्त समय दिया है जिससे किसी भी मतदाता को कोई समस्या न हो।

  • SIR को चुनौती…. SC बोला- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर क्या आंखें मूंद ले चुनाव आयोग?

    SIR को चुनौती…. SC बोला- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर क्या आंखें मूंद ले चुनाव आयोग?


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special in-depth review-SIR) को लेकर जारी अधिसूचना में ‘माइग्रेशन’ शब्द की व्याख्या केवल देश के भीतर के प्रवासन तक सीमित नहीं मानी जा सकती, बल्कि इसमें सीमा पार प्रवासन भी शामिल हो सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की जिनमें बिहार में SIR को चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग (Election Commission- ECI) नागरिकता पर संदेह के आधार पर लोगों को मतदाता सूची से हटाकर मताधिकार छीन रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR कोई नियमित प्रक्रिया नहीं है और बिहार में यह 2003 के बाद पहली बार किया जा रहा है। कोर्ट ने पूछा, “क्या चुनाव आयोग मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी ‘शुद्धिकरण और छंटनी’ की प्रक्रिया नहीं अपना सकता? यदि गड़बड़ियां मिलें तो क्या आयोग को आंख मूंद लेनी चाहिए?”

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, “माइग्रेशन ट्रांस-कंट्री भी हो सकता है। यह केवल देश के भीतर का प्रवासन नहीं है। आजीविका और अन्य कारणों से लोग विदेशी सीमाएं पार करते हैं। ‘ब्रेन ड्रेन’ भी प्रवासन ही है।”

    पीठ की यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन के उस तर्क के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि चुनाव आयोग नागरिकता की जांच करना चाहता था, तो उसे 24 जून के आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख करना चाहिए था। आदेश में SIR का आधार केवल “तेजी से शहरीकरण” और “शिक्षा व आजीविका के लिए बार-बार होने वाला जनसंख्या का स्थानांतरण” बताया गया था।


    BLO के संदेह पर नाम हटाना खतरनाक— याचिकाकर्ता

    रामचंद्रन ने दलील दी कि SIR को विदेशी नागरिकों की पहचान से जोड़ना असंवैधानिक है, क्योंकि नागरिकता की जांच के लिए पहले से वैधानिक प्रक्रिया मौजूद है। उन्होंने कहा, “सिर्फ बूथ लेवल ऑफिसर के संदेह पर किसी को मतदाता सूची से हटाना बेहद खतरनाक है।” कोर्ट ने जवाब दिया कि उनकी टिप्पणियां अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं बल्कि मुद्दे पर बेहतर तर्कों के लिए एक प्रयास हैं।

    याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया ‘गलत संदेह’ पर आधारित है और बड़े पैमाने पर मतदाताओं को अयोग्य घोषित करने की कोशिश है। रामचंद्रन ने कहा, “ECI का कर्तव्य मतदाता को सक्षम बनाना है, निष्क्रिय करना नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में SIR को लागू करना “कॉपी-पेस्ट” जैसा है, जो चुनाव आयोग की “मस्तिष्क-प्रक्रिया की कमी” दर्शाता है।

    अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर के लिए तय की है, जब चुनाव आयोग अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देगा। अगले सप्ताह उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पुदुचेरी और पश्चिम बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।