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  • रिटायर्ड IAS नियाज खान के बयान पर छिड़ा विवाद: जनसंख्या नियंत्रण पर की कड़ी टिप्पणी, राजनीतिक व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

    रिटायर्ड IAS नियाज खान के बयान पर छिड़ा विवाद: जनसंख्या नियंत्रण पर की कड़ी टिप्पणी, राजनीतिक व्यवस्था पर भी उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और चर्चित लेखक नियाज खान एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए उनके हालिया पोस्टों ने जनसंख्या नियंत्रण, भ्रष्टाचार और देश की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। खान ने अपनी पोस्ट में बढ़ती आबादी पर चिंता जताते हुए सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है, जबकि अन्य पोस्टों में उन्होंने भ्रष्टाचार और राजनीतिक विचारधाराओं के बदलते स्वरूप पर भी टिप्पणी की है।

    शुक्रवार को किए गए एक पोस्ट में नियाज खान ने देश की बढ़ती जनसंख्या को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इस विषय पर सख्त नीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि देश की आबादी तेजी से बढ़ रही है और इससे भविष्य में संसाधनों तथा विकास पर दबाव बढ़ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कठोर उपायों की आवश्यकता बताई। अपने पोस्ट में उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इस समुदाय में अधिक बच्चे पैदा होते हैं और सरकार को इस दिशा में सख्ती से कदम उठाने चाहिए।

    नियाज खान के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे जनसंख्या नियंत्रण पर बहस का विषय बताया, जबकि अन्य लोगों ने उनके बयान की आलोचना करते हुए इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला बताया। हालांकि इस मुद्दे पर किसी सरकारी एजेंसी या संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    इसी दिन किए गए एक अन्य पोस्ट में नियाज खान ने देश में भ्रष्टाचार की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार देश को भीतर से कमजोर कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद आम लोग इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि मतदाता भ्रष्ट छवि वाले नेताओं को भी चुनावों में जीत दिलाते हैं और समाज में नैतिक मूल्यों का ह्रास दिखाई देता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों में भारत को विश्व शक्ति बनाने के दावे कितने व्यवहारिक हैं।

    इससे पहले गुरुवार को किए गए एक पोस्ट में नियाज खान ने देश की राजनीति में वैचारिक संकट का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता प्राप्त करने के लिए कई नेता अपनी विचारधारा बदल लेते हैं। उनके अनुसार राजनीतिक दलों और नेताओं की वैचारिक प्रतिबद्धता कमजोर होती जा रही है और परिस्थितियों के अनुसार विचारधाराएं बदलने का चलन बढ़ा है। खान ने यह भी कहा कि आम जनता अक्सर इन बदलावों को केवल दर्शक बनकर देखती रहती है।

    गौरतलब है कि नियाज खान प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक विषयों पर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए जाने जाते हैं। वे समय-समय पर सोशल मीडिया के माध्यम से विभिन्न मुद्दों पर टिप्पणी करते रहे हैं, जिसके कारण उनके बयान अक्सर चर्चा और विवाद का विषय बन जाते हैं।

    फिलहाल उनके हालिया पोस्टों को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस जारी है। समर्थक जहां उनके बयानों को बेबाक राय के रूप में देख रहे हैं, वहीं आलोचक उनके कुछ दावों और टिप्पणियों पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    मथुरा। वृंदावन में वैष्णव किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हिमांगी सखी ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में बयान देकर नई चर्चा छेड़ दी। पुरुषोत्तम मास के दौरान ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं हिमांगी सखी ने कहा कि यह ऑनलाइन समूह देश में फैले भ्रष्टाचार और सामाजिक अव्यवस्थाओं को उजागर करने का काम कर रहा है।

    मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समाज को सच दिखाने वालों से घबराने की बजाय उनका सामना करना चाहिए। उनके मुताबिक, डर केवल उन्हीं लोगों को लगता है जिनके भीतर गलत काम छिपे होते हैं, जबकि ईमानदार व्यक्ति को किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए।

    हिमांगी सखी ने कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ युवाओं द्वारा बनाई गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार और सामाजिक गंदगी के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने कहा कि आज का युवा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर पहले से अधिक जागरूक है और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात प्रभावी ढंग से सामने रख रहा है।

    उन्होंने इस पहल को लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलना जरूरी है। हिमांगी सखी ने सार्वजनिक रूप से इस संगठन का समर्थन करते हुए कहा कि वह किन्नर जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में इस मुहिम के साथ खड़ी हैं।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि कम समय में इस संगठन ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है, जो इस बात का संकेत है कि लोग बदलाव और नई सोच को स्वीकार कर रहे हैं।

    हिमांगी सखी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसिक पहल बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक और सामाजिक विवादों से जोड़कर देखा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और पारदर्शिता के समर्थन में है।

    वृंदावन में दिए गए इस बयान के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

  • वायरल ट्रेंड के पीछे छिपा खतरा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर ऑनलाइन ठगी का नया खेल शुरू

    वायरल ट्रेंड के पीछे छिपा खतरा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर ऑनलाइन ठगी का नया खेल शुरू

    नई दिल्ली ।सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने वाले ट्रेंड और डिजिटल अभियानों का प्रभाव युवाओं के बीच लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन लोकप्रियता और उत्सुकता के इस दौर में साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल के दिनों में एक वायरल डिजिटल ट्रेंड के नाम का इस्तेमाल कर साइबर ठगी का नया मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इसके बाद पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की चेतावनी जारी की है।

    जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कुछ संदिग्ध लिंक तेजी से प्रसारित किए जा रहे हैं। इन संदेशों में आकर्षक शब्दों और भावनात्मक अपील के जरिए लोगों को किसी डिजिटल अभियान या समूह से जुड़ने का निमंत्रण दिया जा रहा है। युवाओं को विशेष रूप से ध्यान में रखकर ऐसे संदेश तैयार किए जा रहे हैं ताकि वे उत्सुकतावश लिंक पर क्लिक कर दें।

    पुलिस का कहना है कि यह केवल एक साधारण लिंक नहीं बल्कि साइबर ठगी का हिस्सा हो सकता है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये कथित लिंक फिशिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल या डिजिटल डिवाइस की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके जरिए निजी जानकारी, बैंकिंग विवरण, पासवर्ड और अन्य महत्वपूर्ण डेटा साइबर अपराधियों तक पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है।

    साइबर विशेषज्ञों के अनुसार फिशिंग लिंक आज के समय में ऑनलाइन धोखाधड़ी का सबसे आम तरीका बनते जा रहे हैं। ये लिंक दिखने में सामान्य या भरोसेमंद लग सकते हैं, लेकिन इनके पीछे छिपा उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी हासिल करना होता है। कई मामलों में ऐसे हमलों के जरिए बैंक खातों से रकम निकालने और डिजिटल पहचान के दुरुपयोग जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर ट्रेंड या वायरल अभियान पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता। कई बार लोकप्रिय विषयों का इस्तेमाल करके साइबर ठग लोगों की भावनाओं और उत्सुकता का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि पुलिस और साइबर एजेंसियां लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं।

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करनी चाहिए। यदि कोई संदेश अत्यधिक आकर्षक, भावनात्मक या असामान्य वादा करता दिखाई दे तो सतर्क रहना आवश्यक है। इसके अलावा संदिग्ध संदेशों को आगे साझा करने से भी बचना चाहिए।

    डिजिटल दुनिया ने लोगों को जोड़ने के नए अवसर दिए हैं, लेकिन इसके साथ सतर्कता और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। एक छोटी सी लापरवाही कई बार आर्थिक और व्यक्तिगत नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में ऑनलाइन सुरक्षा नियमों का पालन करना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CJI की टिप्पणी ने खींचा सबका ध्यान

    कॉकरोच जनता पार्टी विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CJI की टिप्पणी ने खींचा सबका ध्यान

    नई दिल्ली ।देश में तेजी से चर्चा का विषय बने कॉकरोच जनता पार्टी विवाद ने अब न्यायिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। इस मुद्दे को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियां सामने आईं। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को स्वीकार तो किया, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि भावनात्मक दृष्टिकोण से अधिक कानूनी तथ्यों और प्रक्रियाओं पर ध्यान देना आवश्यक है।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को शांत रहने की सलाह देते हुए कहा कि मामलों को अत्यधिक भावनात्मक तरीके से देखने के बजाय तथ्यों के आधार पर समझने की आवश्यकता है। अदालत की यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान सबसे अधिक चर्चा का विषय बन गई।

    दरअसल, याचिका में आरोप लगाया गया था कि एक विशेष डिजिटल अभियान और उससे जुड़े कथित नैरेटिव के जरिए न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। याचिकाकर्ता का दावा था कि विवादित टिप्पणियों को वास्तविक संदर्भ से हटाकर अलग तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

    हालांकि अदालत ने मामले को तत्काल सुनवाई योग्य नहीं माना और कहा कि फिलहाल ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति दिखाई नहीं देती, जिसके आधार पर तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। अदालत ने संकेत दिए कि आने वाले समय में सभी पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी और उसके बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।

    याचिकाओं में कई गंभीर मांगें भी रखी गई हैं। इनमें न्यायालय में होने वाली बहसों के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने, फर्जी कानूनी दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों से जुड़े मामलों की जांच तथा विवादित डिजिटल गतिविधियों की निष्पक्ष जांच की मांग शामिल बताई जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक विवादित टिप्पणी से जुड़ी चर्चा के बाद हुई थी, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। बाद में स्पष्ट किया गया कि टिप्पणी का उद्देश्य किसी वर्ग विशेष को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि उन लोगों पर चिंता जताना था जो गलत तरीकों से पेशे में प्रवेश कर व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।

    इसी बीच सोशल मीडिया पर शुरू हुआ व्यंग्यात्मक अभियान धीरे-धीरे एक बड़े डिजिटल विमर्श में बदलता दिखाई दिया। समय के साथ यह केवल मजाक या ऑनलाइन ट्रेंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाने का माध्यम बन गया। इसने शिक्षा, रोजगार और परीक्षा प्रणाली से जुड़े सवालों को लेकर व्यापक चर्चा भी पैदा की।

    फिलहाल यह मामला केवल एक ऑनलाइन बहस नहीं रह गया है बल्कि न्यायपालिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका जैसे बड़े विषयों को भी केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर होने वाली सुनवाई पर कई लोगों की नजर बनी रह सकती है।

  • नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    नेपाल की बालेन शाह सरकार ने देश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति शुरू की है, जिसमें भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सीधे नेपाल आने का न्योता दिया गया है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी। इस अपील के बाद क्षेत्रीय पर्यटन और यात्रा उद्योग में हलचल देखी जा रही है।

    नेपाल सरकार की इस नई पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति के तहत भारतीय यूट्यूबर्स, व्लॉगर्स, पॉडकास्ट क्रिएटर्स और डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को नेपाल यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है। नेपाली दूतावास (नई दिल्ली) की ओर से 30 मई तक आवेदन मांगे गए हैं और इस पहल को भारतीय क्रिएटर्स से तेजी से प्रतिक्रिया मिल रही है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब नेपाल सरकार ने इस तरह सीधे भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन प्रचार के लिए शामिल किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ कुछ ही दिनों में 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि अंतिम तिथि तक यह आंकड़ा 1000 से ज्यादा पहुंच सकता है।

    नेपाल एयरलाइंस और होटल इंडस्ट्री ने भी इस अभियान को समर्थन दिया है। काठमांडू के कई फाइव स्टार होटलों ने चयनित इन्फ्लुएंसर्स के लिए विशेष पैकेज तैयार किए हैं। योजना के तहत चुने गए पांच इन्फ्लुएंसर्स को नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे काठमांडू, पोखरा और चितवन का दौरा कराया जाएगा, जहां वे देश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करेंगे।

    नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पर्यटन छवि को मजबूत करना है और भारतीय युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाना है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी’ पर भड़के रैपर सैंटी शर्मा, बोले- देश को इंटरनेट ड्रामा नहीं, असली मुद्दों पर बहस चाहिए

    कॉकरोच जनता पार्टी’ पर भड़के रैपर सैंटी शर्मा, बोले- देश को इंटरनेट ड्रामा नहीं, असली मुद्दों पर बहस चाहिए

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ट्रेंड को लेकर अब विवाद और भी गहरा गया है। इस पूरे मामले में चर्चित रैपर और गीतकार सैंटी शर्मा ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस वायरल ट्रेंड को गंभीर राजनीतिक आंदोलन मानने से इनकार करते हुए इसे “इंटरनेट ड्रामा” करार दिया है। साथ ही उन्होंने इसके पीछे काम कर रहे लोगों और उनके इरादों पर भी सवाल उठाए हैं।

    सैंटी शर्मा का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी बिना किसी तथ्य की जांच किए इंटरनेट पर चल रहे ट्रेंड्स को आंख बंद करके फॉलो करने लगी है, जो समाज और देश दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। उनके मुताबिक, किसी भी आंदोलन या विचारधारा को समझने से पहले उसकी पृष्ठभूमि और उद्देश्य को जानना बेहद जरूरी है।

    रैपर ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि असली सामाजिक मुद्दों पर काम करने के बजाय सोशल मीडिया के जरिए केवल नैरेटिव तैयार किया जा रहा है। सैंटी शर्मा ने कहा कि अगर कोई खुद को राष्ट्रवादी बताता है, तो उसे रोजगार, शिक्षा, विकास, तकनीक और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर काम करना चाहिए, न कि केवल इंटरनेट पर आक्रोश फैलाना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को उग्र विरोध और सड़क राजनीति की ओर धकेलना सही नहीं है। सैंटी शर्मा के अनुसार लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल की आलोचना की जा सकती है, लेकिन देश को केवल विरोध और गुस्से की राजनीति से आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लगातार नफरत और भड़काऊ माहौल तैयार करने से समाज में अस्थिरता बढ़ती है और इससे देश के विकास पर असर पड़ता है।

    सैंटी शर्मा ने सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ संदिग्ध अकाउंट्स को लेकर भी चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि कई बार ऐसे ट्रेंड्स को बाहरी ताकतों और देश विरोधी सोच रखने वाले अकाउंट्स से भी समर्थन मिलता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी वायरल अभियान का हिस्सा बनने से पहले उसकी सच्चाई को जरूर परखें।

    इस पूरे विवाद के बाद लोग यह जानना भी चाहते हैं कि आखिर सैंटी शर्मा कौन हैं। मध्य प्रदेश के रतलाम से आने वाले सैंटी शर्मा का असली नाम गणेश शर्मा है। उन्होंने देसी हिप-हॉप और रैप म्यूजिक की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। साल 2014 के आसपास उन्होंने अपने संगीत करियर की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उनके स्वतंत्र गानों ने युवाओं के बीच अच्छी लोकप्रियता हासिल की। बाद में उन्होंने कमर्शियल म्यूजिक की दुनिया में भी कदम रखा और कई चर्चित रैप ट्रैक्स दिए।

    अपने अनोखे अंदाज और बेबाक बयानों की वजह से सैंटी शर्मा अक्सर चर्चा में रहते हैं। इससे पहले भी वह कई विवादित मुद्दों पर अपनी राय रख चुके हैं। हाल ही में उन्होंने संगीत इंडस्ट्री से जुड़े एक विवाद में भी खुलकर प्रतिक्रिया दी थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी चर्चा हुई थी।

    फिलहाल, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर दिया गया उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने वाला बयान बता रहे हैं। हालांकि सैंटी शर्मा का साफ कहना है कि भारत को इंटरनेट पर फैलने वाले आक्रोश से ज्यादा रचनात्मक बहस और समाधान आधारित सोच की जरूरत है।

  • ‘वर्क फ्रॉम होम’ की जगह निकला ‘होम फ्रॉम वर्क’, रवि किशन ने वायरल वीडियो पर पहली बार तोड़ी चुप्पी

    ‘वर्क फ्रॉम होम’ की जगह निकला ‘होम फ्रॉम वर्क’, रवि किशन ने वायरल वीडियो पर पहली बार तोड़ी चुप्पी

    नई दिल्ली ।  इंटरनेट के दौर में कौन कब वायरल हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। कभी फोटो तो कभी लोगों की जुबान से निकले शब्द सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं। जब लोग कुछ सोच पाते हैं तब तक वह हजारों लोगों तक पहुंच जाता है। ऐसे में कुछ लोगों को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। ऐसा ही एक वीडियो गोरखपुर सांसद रवि किशन का वायरल हो गया। रवि किशन के इस वीडियो पर लोगों ने अब मीम्स बनाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि रवि किशन ने इसको लेकर सफाई भी दी।
    गोरखपुर से भाजपा सांसद और अभिनेता रवि किशन का कहना है कि वह आज तक यह नहीं समझ पाए हैं कि सोशल मीडिया पर उनके वीडियो और ‘मीम्स’ क्यों प्रसारित होते रहते हैं। उन्होंने कहा कि वह महज एक आम इंसान हैं और दूसरों की तरह उनसे भी गलतियां हो जाती हैं। अभिनेता रवि किशन से शुक्रवार शाम उनकी आगामी फिल्म ‘मां बहन’ के ट्रेलर जारी करने के मौके पर उनकी हालिया वायरल हुई वीडियो के संबंध में पूछा गया था, जिसमें उन्होंने गलती से ‘वर्क फ्रॉम होम’ कहने के बजाय ‘होम फ्रॉम वर्क’ कह दिया। वह इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘वर्क फ्रॉम होम’ की अपील के समर्थन में बोल रहे थे।
    मां-बहन फिल्म में नजर आएंगे रवि किशन
    गोरखपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद रवि किशन ने कहा, मैं महादेव की कसम खाकर कहता हूं कि मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि मैं क्यों वायरल होता रहता हूं। मैं उस समय संसद जा रहा था और कहना चाहता था कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) करने की जरूरत है, लेकिन उसकी जगह मुंह से ‘होम फ्रॉम वर्क’ निकल गया। बतादें कि ‘मां बहन’ फिल्म में रवि किशन के साथ माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर धारणा दुर्गा मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगी। नेटफ्लिक्स की इस फिल्म का निर्देशन ‘सूबेदार’ और ‘तुम्हारी सुलू’ फिल्म के निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने किया है।
    साइकिल चलाकर दिया था पेट्रोल-डीजल बचत का संदेश
    ईंधन बचाने को लेकर पीएम मोदी की अपील के बाद पिछले दिनों सांसद रवि किशन ने साइकिल चलाकर लोगों को पेट्रोल-डीजल बचत का संदेश दिया था। इसका भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। सांसद रवि किशन शुक्ला ने पेट्रोल-डीजल संकट से निपटने के लिए तारामंडल क्षेत्र में साइकिल चलाकर लोगों को जागरूक किया। सांसद ने अपने समर्थकों के साथ रामगढ़झील क्षेत्र में साइकिल चलाई। मीडिया से बातचीत में कहा कि मध्य पूर्व एशिया में युद्ध से उपजे हालात से क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार उछाल हो रहा है। पेट्रोलियम पदार्थ की खरीद में देश को करोड़ों डॉलर आयात में खर्च करना पड़ रहा है। सासंद ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर खर्च होने वाले डॉलर को देश वासी जागरूकता से बचा सकते हैं।
  • रवि किशन के एक बयान में हुई जुबानी गलती सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिस पर उन्होंने हंसते हुए प्रतिक्रिया दी और खुद का मजाक उड़ाया।

    रवि किशन के एक बयान में हुई जुबानी गलती सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिस पर उन्होंने हंसते हुए प्रतिक्रिया दी और खुद का मजाक उड़ाया।


    नई दिल्ली: भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और सांसद Ravi Kishan एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में हैं। हाल ही में उनके एक सार्वजनिक बयान के दौरान हुई जुबानी चूक ने इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोरीं और देखते ही देखते यह मामला मीम्स का विषय बन गया। “होम फ्रॉम वर्क” और “जल्दी द लेट” जैसे शब्दों की गलत प्रस्तुति ने सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को मनोरंजन का नया कारण दे दिया, जिसके बाद हर तरफ मजेदार प्रतिक्रियाओं और व्यंग्यात्मक पोस्ट्स की बाढ़ आ गई।

    यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब रवि किशन एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को लेकर अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान बोलचाल में उनसे “वर्क फ्रॉम होम” की जगह “होम फ्रॉम वर्क” निकल गया, जो तुरंत ही लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद “जल्दी द लेट” जैसे शब्दों ने भी लोगों का ध्यान खींचा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह क्लिप तेजी से वायरल हो गई। देखते ही देखते इस पर आधारित मीम्स की एक लंबी श्रृंखला बन गई, जिसमें लोगों ने मजाकिया अंदाज में इस बयान को अलग-अलग तरीकों से प्रस्तुत किया।

    अब इस पूरे मामले पर रवि किशन ने खुद आगे आकर प्रतिक्रिया दी है। एक फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान उन्होंने इस वायरल ट्रेंड पर हल्के-फुल्के अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें खुद समझ नहीं आता कि वह अक्सर ऐसे मामलों में क्यों वायरल हो जाते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि बोलचाल के दौरान कभी-कभी जुबान फिसल जाती है और ऐसे में अनजाने में शब्दों का क्रम बदल जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह कोई मशीन नहीं हैं, बल्कि एक सामान्य इंसान हैं, जिससे गलती होना स्वाभाविक है।

    रवि किशन ने मजाकिया लहजे में यह भी कहा कि कभी उन्हें “वर्क फ्रॉम होम” बोलना था, लेकिन गलती से “होम फ्रॉम वर्क” निकल गया और इसी तरह “जल्दी द लेट” जैसे शब्द भी जुबान से निकल गए। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीरता से न लेते हुए इसे मनोरंजन का हिस्सा बताया और लोगों से अपील की कि हर छोटी गलती को बड़े मुद्दे की तरह न देखा जाए।

    इस दौरान उन्होंने यह भी साझा किया कि कई बार उनके राजनीतिक सहयोगी भी उनसे यह सवाल करते हैं कि वह हमेशा चर्चा में कैसे आ जाते हैं, जिस पर उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया कि शायद यह उनकी किस्मत है या फिर उनकी बेबाक शैली का परिणाम है। उनके इस आत्म-हास्य वाले अंदाज ने एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लिया और सोशल मीडिया पर उनकी यह प्रतिक्रिया भी तेजी से वायरल हो गई।

    कुल मिलाकर यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल युग में किसी भी सार्वजनिक बयान की छोटी-सी चूक भी कितनी तेजी से वायरल हो सकती है। हालांकि रवि किशन ने जिस सहजता और हास्य के साथ इस स्थिति को स्वीकार किया, उसने इस पूरे विवाद को हल्का और मनोरंजक बना दिया।