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  • कटरीना कैफ ने बॉडी शेमिंग करने वालों को दिया जवाब, बोलीं- आलोचनाओं से डरती तो जिंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाती

    कटरीना कैफ ने बॉडी शेमिंग करने वालों को दिया जवाब, बोलीं- आलोचनाओं से डरती तो जिंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाती

    नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री कटरीना कैफ ने सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और बॉडी शेमिंग को लेकर अपनी बात रखी है। अभिनेत्री को हाल ही में डिलीवरी के बाद बढ़े वजन को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। अब उन्होंने इस तरह की टिप्पणियों के प्रभाव और उनसे निपटने के तरीके पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कटरीना का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोगों की राय को इतना महत्व नहीं देना चाहिए कि उसका असर व्यक्ति के फैसलों और जिंदगी में आगे बढ़ने की क्षमता पर पड़ने लगे। उनके मुताबिक, दूसरों की टिप्पणियों के आधार पर अपनी जिंदगी के फैसले लेना व्यक्ति के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

    कटरीना कैफ ने लंदन में अपने ब्यूटी ब्रांड के एक कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर बात की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को लेकर कई तरह की धारणाएं और राय सामने आती हैं। ऐसे में यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन बातों का खुद पर नकारात्मक प्रभाव न पड़ने दिया जाए। अभिनेत्री के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति लगातार दूसरों की राय और टिप्पणियों पर ध्यान देता रहेगा, तो उसके लिए अपने हित में सही फैसले लेना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि अगर वह बार-बार मिलने वाली आलोचनाओं और टिप्पणियों के आधार पर काम करने लगतीं, तो डर के कारण आगे बढ़ना उनके लिए मुश्किल हो जाता। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वह डर के मारे पैरालाइज हो जातीं और जिंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पातीं।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि जीवन में कई बार ऐसे दौर आते हैं, जब व्यक्ति को लगता है कि उसने सब कुछ सही किया है, लेकिन इसके बावजूद परिस्थितियां उसके मुताबिक नहीं चलतीं। कभी इंसान को लगता है कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ कर रहा है, तो कभी उसे महसूस होता है कि वह अभी उस स्थिति तक पहुंचने की कोशिश में है, जहां वह होना चाहता है। कटरीना के मुताबिक, इन उतार-चढ़ावों को जीवन का हिस्सा मानना चाहिए और हर परिस्थिति में खुद पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय जिंदगी का आनंद लेना चाहिए। उनकी इस प्रतिक्रिया को सोशल मीडिया पर होने वाली व्यक्तिगत टिप्पणियों और खासकर महिलाओं के शरीर को लेकर की जाने वाली आलोचना के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    दरअसल, कटरीना कैफ को कुछ समय पहले अपने पति विक्की कौशल के साथ अंबानी परिवार के गणपति समारोह में देखा गया था। इस दौरान उनके डिलीवरी के बाद बढ़े वजन को लेकर कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर टिप्पणियां की थीं। हालांकि, कई लोगों ने अभिनेत्री का समर्थन भी किया था। समर्थकों ने कहा था कि मां बनने के बाद शरीर में बदलाव आना सामान्य बात है और इस आधार पर किसी महिला का मजाक उड़ाना उचित नहीं है। इस मामले में सलमान खान ने भी कटरीना का समर्थन किया था। उन्होंने टेलीविजन कार्यक्रम ‘बिग बॉस’ के वीकेंड का वार एपिसोड में बॉडी शेमिंग करने वालों को फटकार लगाई थी।

    सलमान खान ने कहा था कि गर्भावस्था के बाद महिलाओं का वजन बढ़ना आम बात है। ऐसे समय में किसी महिला का मजाक उड़ाना या उसके शरीर को लेकर भद्दी टिप्पणियां करना गलत मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि कटरीना जब फिल्मों में वापसी करेंगी, तो दोबारा फिट हो जाएंगी। फिलहाल वह अपने परिवार के साथ समय बिता रही हैं। सलमान की इस प्रतिक्रिया के बाद भी कटरीना के वजन को लेकर हुई टिप्पणियों का मुद्दा चर्चा में रहा।

    कटरीना कैफ की पेशेवर जिंदगी की बात करें तो वह आखिरी बार फिल्म ‘मैरी क्रिसमस’ में नजर आई थीं, जो वर्ष 2024 में रिलीज हुई थी। इसके बाद से वह फिल्मों से दूर हैं और उनके आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर कोई नई जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल अभिनेत्री अपने बच्चे और परिवार के साथ समय बिता रही हैं। वह सोशल मीडिया पर अपने ब्यूटी प्रोडक्ट्स से जुड़ी पोस्ट साझा करती रहती हैं और परिवार के साथ बिताए पलों की झलक भी प्रशंसकों के साथ साझा करती हैं।

  • विजय माल्या बोले- कॉकरोच बन जाना चाहिए, शायद उनकी जिंदगी बेहतर है

    विजय माल्या बोले- कॉकरोच बन जाना चाहिए, शायद उनकी जिंदगी बेहतर है


    नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी स्थिति की तुलना ‘कॉकरोच’ से करते हुए कहा है कि शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर होती है। माल्या का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का व्यंग्यात्मक युवा आंदोलन चर्चा में है। माल्या ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को कथित अन्याय से जोड़ते हुए यह टिप्पणी की है।

    माल्या ने एक्स पर क्या लिखा?
    माल्या ने एक्स पर लिखा, “मैंने जितनी भी नाइंसाफियां झेली हैं और झेल रहा हूं, उन्हें देखते हुए सोचता हूं कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर हो।”

    माल्या लंबे समय से अपने खिलाफ हुई कार्रवाई और लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते रहे हैं। हालिया पोस्ट में भी उन्होंने खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई और दावा किया कि ब्रिटेन के कानूनी प्रतिबंधों के चलते वह वहां से बाहर नहीं जा सकते।

    ‘कॉकरोच’ शब्द से शुरू हुआ व्यंग्यात्मक आंदोलन

    2026 में ‘कॉकरोच’ शब्द सोशल मीडिया की राजनीति में एक अलग प्रतीक के तौर पर सामने आया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP की शुरुआत व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में हुई थी। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके हैं। आंदोलन के जरिए बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे उठाए गए।

    CJP के नाम को उस समय ज्यादा चर्चा मिली, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से कुछ बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। आंदोलन से जुड़े लोगों ने ‘कॉकरोच’ शब्द को अपमान के बजाय व्यंग्यात्मक पहचान के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

    इसके बाद आंदोलन सोशल मीडिया से आगे बढ़कर सड़क पर भी दिखाई दिया और शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए गए। जुलाई में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भी आंदोलन से जुड़े दबाव के संदर्भ में बताया गया है।

    विजय माल्या पर क्या मामले हैं?

    विजय माल्या कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में गिने जाते थे। वह यूनाइटेड ब्रुअरीज समूह से जुड़े रहे और किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमोटर थे। एयरलाइन के वित्तीय संकट के बाद भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया सामने आया।

    माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और बकाये से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। भारत सरकार उनकी वापसी के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया भी चला रही है।

    संपत्तियों को लेकर माल्या का दावा

    माल्या का कहना है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई में उनके साथ अन्याय हुआ है। हालिया बयानों में उन्होंने दावा किया है कि उनकी संपत्तियों से बैंकों और एजेंसियों ने उनकी देनदारी से अधिक रकम वसूल की है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, माल्या ने दावा किया कि करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जबकि वह अपनी देनदारी करीब 6,203 करोड़ रुपये बताते हैं। ये आंकड़े माल्या के दावे के तौर पर ही देखे जाने चाहिए, अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।

    अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या की संपत्तियों की जब्ती और बैंक रिकवरी से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद को खत्म करने की जरूरत पर टिप्पणी की थी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से मामले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। माल्या के वकील ने अदालत में दावा किया था कि बैंकों ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है।

    CJP से जुड़े विवाद भी जारी

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ हाल के दिनों में भी सक्रिय रही है। सितंबर में इसके समर्थकों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने तक मार्च किया और एक प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग की।

    9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से CJP के प्रदर्शन में शामिल एक कानून छात्र को नोटिस जारी किए जाने के मामले पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस मामले में प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही।

    इसी बीच CJP से जुड़ा एक और कानूनी विवाद सामने आया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने CJP, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।

  • उर्फी जावेद ने तोड़ी चुप्पी, आंदोलन के लिए पैसे लेने के आरोपों को बताया झूठ और भ्रामक

    उर्फी जावेद ने तोड़ी चुप्पी, आंदोलन के लिए पैसे लेने के आरोपों को बताया झूठ और भ्रामक


    नई दिल्ली। उर्फी जावेद एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार विवाद की वजह वह खबर बनी जिसमें दावा किया गया कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने आंदोलन के समर्थन के लिए कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज को पैसे दिए थे और इसी कड़ी में उर्फी जावेद को भी एक लाख रुपये दिए गए। यह दावा सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई लेकिन उर्फी जावेद ने इस पूरे मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया देते हुए इन आरोपों को पूरी तरह झूठ और भ्रामक बताया।

    उर्फी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर वायरल खबर का स्क्रीनशॉट साझा किया और तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक लाख रुपये जैसी छोटी रकम के लिए वह किसी आंदोलन का प्रचार क्यों करेंगी। उर्फी ने कहा कि वह एक सोशल मीडिया पोस्ट या रील के लिए इससे कहीं अधिक फीस लेती हैं और इस तरह के दावों का कोई आधार नहीं है।

    उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी पर भी निशाना साधा। उर्फी ने कहा कि यह वही व्यक्ति है जिसने पहले भी उनके बारे में कई झूठे दावे किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी उनके जेंडर और निजी जिंदगी को लेकर फर्जी खबरें फैलाई गई थीं और अब फिर बिना किसी सबूत के उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उर्फी का कहना है कि इस तरह की अफवाहें केवल चर्चा में बने रहने और मीडिया का ध्यान खींचने के लिए फैलाई जाती हैं।

    उर्फी जावेद ने अपने बयान में साफ कहा कि उन्हें किसी भी तरह का भुगतान नहीं मिला बल्कि ऐसे विवादों की वजह से उनके काम पर असर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की खबरों के बाद कई ब्रांड्स ने उनसे दूरी बना ली है जिससे उनका आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि उन्होंने किसी से पैसे लेकर प्रचार किया है तो वह अपना इंस्टाग्राम अकाउंट बंद कर देंगी और अपनी कमाई के सभी साधन छोड़ देंगी। उनका कहना है कि बिना किसी प्रमाण के किसी की छवि खराब करना गलत है और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    यह पहली बार नहीं है जब उर्फी जावेद को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले भी उनके धर्म परिवर्तन और नाम बदलने जैसी अफवाहें वायरल हुई थीं जिनका उन्होंने खुलकर खंडन किया था। उस समय भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला है और उनके बारे में फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह झूठी हैं। उर्फी लगातार यह कहती रही हैं कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली हर जानकारी पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।

    फिलहाल इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं उर्फी जावेद ने सभी दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए आरोप लगाने वालों को सबूत पेश करने की खुली चुनौती दी है। सोशल मीडिया पर यह विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे इस मामले में क्या नया मोड़ आता है।

  • चीन में भारतीयों की बढ़ी चिंता: सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी कंटेंट, वीजा और रोजगार प्रतिबंध के मुद्दे उठे

    चीन में भारतीयों की बढ़ी चिंता: सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी कंटेंट, वीजा और रोजगार प्रतिबंध के मुद्दे उठे


    नई दिल्ली। चीन में रह रहे भारतीय समुदाय ने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के ‘ओपन हाउस’ कार्यक्रम में सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी सामग्री, कार्य वीजा में कमी और भारतीयों के जीवनसाथियों के रोजगार पर प्रतिबंध जैसे कई अहम मुद्दे उठाए। भारतीय राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने इन चिंताओं पर चर्चा करते हुए समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जाने का भरोसा दिलाया।

    सोशल मीडिया और वीजा से जुड़े मुद्दे प्रमुख
    शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में बीजिंग में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों ने भाग लिया। उन्होंने चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारतीयों, उनके खान-पान और संस्कृति के खिलाफ बढ़ती आपत्तिजनक सामग्री पर चिंता जताई।

    इसके अलावा भारतीय पेशेवरों को कार्य वीजा मिलने में कमी, उनके जीवनसाथियों के रोजगार पर लगी पाबंदियों और दूतावास संबंधी सेवाओं में आने वाली दिक्कतों को भी प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया गया।

    चीनी अधिकारियों से लगातार संवाद
    मई में चीन में भारत के राजदूत का कार्यभार संभालने वाले विक्रम दुरईस्वामी ने बताया कि उन्होंने इन मुद्दों पर चीनी अधिकारियों के साथ संवाद बढ़ाया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अगले सप्ताह से भारतीय वीजा के लिए आवेदन करने वाले चीनी नागरिकों के दस्तावेजों की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा, ताकि दोनों देशों के बीच यात्रा और संपर्क को बढ़ावा मिल सके।

    भ्रामक प्रचार का तथ्यात्मक जवाब
    भारत-विरोधी और भ्रामक सामग्री के मुद्दे पर राजदूत ने कहा कि चीनी सरकार भी इस तरह की सामग्री को लेकर चिंतित है और उस पर नियंत्रण के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों के जरिए तथ्यात्मक जानकारी साझा कर गलत सूचनाओं का जवाब दे रहा है।

    भारतीय संस्कृति के प्रचार की तैयारी
    दुरईस्वामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और व्यंजनों की विविधता को बढ़ावा देने के लिए दूतावास भविष्य में और अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगा। उन्होंने बताया कि वसंत मेला जैसे आयोजनों को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद इस दिशा में प्रयास बढ़ाए जाएंगे।

    कानूनी सहायता और नियमित संवाद
    राजदूत ने बताया कि कार्यस्थल से जुड़े विवादों या अन्य समस्याओं का सामना कर रहे भारतीयों की मदद के लिए दूतावास कानूनी विशेषज्ञों के साथ एक सहयोग तंत्र विकसित कर रहा है। साथ ही भारतीय समुदाय की समस्याओं के समाधान और बेहतर दूतावास सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर ‘ओपन हाउस’ कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

  • इंस्टाग्राम पोस्ट से बढ़ा विवाद, RSS शाखा का वीडियो शेयर करने वाले छात्र पर पुलिस ने दर्ज की FIR

    इंस्टाग्राम पोस्ट से बढ़ा विवाद, RSS शाखा का वीडियो शेयर करने वाले छात्र पर पुलिस ने दर्ज की FIR


    इंदौर । इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने एक छात्र के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि छात्र ने शाखा का वीडियो रिकॉर्ड कर इंस्टाग्राम पर साझा किया और उसके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी पोस्ट कीं, जिससे संगठन की छवि खराब करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।

    पुलिस के अनुसार मामला संघ के सदस्य मोहनलाल मालवीय की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत में बताया गया है कि वीणा नगर निवासी छात्र क्षितिज वाने ने आरएसएस की नियमित शाखा का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वीडियो के साथ संगठन के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी गईं और धमकी भरे अंदाज में पोस्ट साझा किए गए।

    जानकारी के मुताबिक हीरानगर क्षेत्र के नॉर्थ एवेन्यू स्थित एक खाली मैदान में आरएसएस की शाखा प्रतिदिन संचालित होती है। यहां संघ के सदस्य मोहनलाल मालवीय, दीपक शर्मा, लोकेंद्र कोष्ठी, लालजी प्रतापत, नितिन विश्वकर्मा सहित कई स्वयंसेवक नियमित रूप से शाखा में शामिल होते हैं। शिकायत में कहा गया है कि करीब छह महीने पहले भी संबंधित छात्र शाखा स्थल पर पहुंचा था और वीडियो रिकॉर्ड करते हुए शाखा लगाए जाने पर सवाल उठाए थे। उस समय स्वयंसेवकों ने उसे समझाकर वहां से भेज दिया था।

    संघ के सदस्यों का आरोप है कि हाल ही में छात्र दोबारा शाखा का वीडियो रिकॉर्ड करने पहुंचा और बाद में उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा कर दिया। शिकायत के अनुसार उसने कथित रूप से “आरएसएस देशद्रोही” शीर्षक से पोस्ट भी साझा की, जिसे संगठन के सदस्यों ने आपत्तिजनक बताया। उनका कहना है कि इस तरह की पोस्ट से सामाजिक माहौल खराब हो सकता है और संगठन की छवि प्रभावित होती है।

    घटना के बाद संघ के पदाधिकारियों ने पहले आपस में चर्चा की और फिर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद शनिवार देर रात संघ के सदस्य हीरानगर थाने पहुंचे और कथित वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट तथा अन्य डिजिटल सामग्री पुलिस को सौंपते हुए शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर छात्र के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    हीरानगर थाना पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो, पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट, पोस्ट की सामग्री और वीडियो की सत्यता का परीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान सभी पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के पीछे क्या उद्देश्य था तथा कानून के तहत कौन-कौन सी धाराएं लागू होती हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील विषय से जुड़ी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करते समय जिम्मेदारी और कानून का पूरा ध्यान रखें, ताकि अनावश्यक विवाद और सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा न हो।

  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह बोले- BJP में पद नहीं, देश और छात्रों का हित सर्वोपरि

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह बोले- BJP में पद नहीं, देश और छात्रों का हित सर्वोपरि


    नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में किसी भी पद से अधिक महत्व देश, युवाओं और विद्यार्थियों के हित का है। उन्होंने कहा कि प्रधान का इस्तीफा इसी सोच और संगठन की कार्यशैली का प्रतीक है।

    अमित शाह ने शनिवार देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्र, युवा पीढ़ी और छात्र हैं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी सिद्धांत को दर्शाता है।

    छात्रों के हित में लिया गया फैसला
    धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों और NEET पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा था कि यह निर्णय छात्रों के भविष्य की रक्षा और जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।

    पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के लिए सरकार प्रतिबद्ध
    अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधार लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं और इससे NEET में सफल विद्यार्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित होगा।

    प्रधान के कार्यकाल की उपलब्धियों का किया उल्लेख
    गृह मंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री के रूप में किए गए कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं को बढ़ावा देने, पीएम श्री स्कूलों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहन, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने में प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए भी कई अहम पहल कीं। अमित शाह के अनुसार उनका कार्यकाल विकसित भारत के लक्ष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिचायक रहा।

  • कोर्ट की कार्यवाही नहीं बनेगी वायरल कंटेंट, सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर लगाई रोक

    कोर्ट की कार्यवाही नहीं बनेगी वायरल कंटेंट, सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर लगाई रोक


    नई दिल्ली । देश में अदालतों की कार्यवाही के वीडियो और ऑडियो क्लिप्स को सोशल मीडिया पर वायरल करने के बढ़ते चलन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अदालत कोई मनोरंजन चैनल नहीं है” और न्यायिक कार्यवाही के छोटे-छोटे हिस्सों को संदर्भ से अलग करके सोशल मीडिया पर प्रसारित करना न्यायपालिका की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया दोनों को प्रभावित करता है। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर कोर्ट की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो क्लिप्स के प्रसारण पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार अब किसी भी अदालत की कार्यवाही का वीडियो या ऑडियो अंश सोशल मीडिया पर पोस्ट, रीपोस्ट, अपलोड, संपादित, स्टोर, प्रसारित या व्यावसायिक उपयोग करने से पहले संबंधित न्यायालय की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह निर्देश केवल सुप्रीम कोर्ट ही नहीं बल्कि देश के सभी हाई कोर्ट की कार्यवाहियों पर भी लागू रहेगा। सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के लिए सेक्रेटरी जनरल और हाई कोर्ट की कार्यवाही के लिए संबंधित रजिस्ट्रार जनरल की अनुमति आवश्यक होगी।

    मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड के वीडियो क्लिप्स को संदर्भ से अलग प्रस्तुत किया जाता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गलत तस्वीर सामने आती है। कई बार ऐसे वीडियो भ्रामक कैप्शन, संपादित अंशों या मीम्स के रूप में वायरल किए जाते हैं, जिससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर अनावश्यक सवाल खड़े हो सकते हैं।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका में पारदर्शिता का उद्देश्य जनता को न्यायिक प्रक्रिया से अवगत कराना है, न कि उसे मनोरंजन या वायरल कंटेंट का माध्यम बनाना। लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा का दुरुपयोग कर अदालत की कार्यवाही को सनसनीखेज तरीके से पेश करना न्यायिक संस्थाओं की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

    हाल के महीनों में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग से लिए गए वीडियो क्लिप्स सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए थे। कई मामलों में इन क्लिप्स को संदर्भ से हटाकर साझा किया गया, जिससे न्यायालयों ने गंभीर चिंता व्यक्त की। इसी पृष्ठभूमि में शीर्ष अदालत ने यह अंतरिम आदेश जारी किया है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए निर्देशों के बाद अदालत की कार्यवाही से जुड़े किसी भी ऑडियो या वीडियो अंश को साझा करने से पहले संबंधित न्यायालय की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

  • मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती जेल भेजे गए, सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस तक पहुंची जानकारी

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती जेल भेजे गए, सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस तक पहुंची जानकारी


    इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आवास के बाहर बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे दंपती के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। साथ ही टंट्या भील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान भी प्रदर्शनकारियों से मंत्री के घर तक चलने का आग्रह किया था।

    जानकारी के मुताबिक, बुधवार दोपहर प्रहलाद पांडेय और उनकी पत्नी संगीता हाथ में संविधान की प्रति लेकर मंत्री के आवास के बाहर पहुंचे थे। इससे पहले ही पुलिस को सोशल मीडिया के माध्यम से संभावित प्रदर्शन की सूचना मिल गई थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मंत्री के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी।

    पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दंपती ने कई लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया था, लेकिन निर्धारित समय पर कोई भी उनके समर्थन में नहीं पहुंचा। जांच में यह भी पता चला कि उन्होंने टंट्या भील चौराहे पर चल रहे छात्र धरना-प्रदर्शन में मौजूद लोगों से भी मंत्री के आवास तक चलने की अपील की थी, लेकिन वहां से भी किसी ने उनका साथ नहीं दिया।

    जब दंपती मंत्री के आवास के बाहर पहुंचे तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और बिना अनुमति प्रदर्शन न करने की सलाह दी। इसके बावजूद वे सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद पुलिस ने प्रहलाद पांडेय को उठाकर वाहन में बैठाया और उनकी पत्नी को भी हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया, जहां दोनों से पूछताछ की गई।

    परदेशीपुरा थाना प्रभारी आर.डी. कानवा ने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने लोगों को प्रदर्शन के लिए बुलाया था। उन्होंने यह भी माना कि बिना अनुमति प्रदर्शन करना उनकी गलती थी। इसके बाद पुलिस ने शांति भंग की आशंका और बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 151 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

    इससे पहले भी दंपती ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हालिया बयानों से आहत होने की बात कहते हुए उनके आवास के बाहर प्रदर्शन करने का प्रयास किया था। उस दौरान भी पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे प्रदर्शन पर अड़े रहे थे।

  • छात्र आंदोलन पर स्तुति मिश्रा की पोस्ट वायरल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा की पत्नी के समर्थन से बढ़ी चर्चा

    छात्र आंदोलन पर स्तुति मिश्रा की पोस्ट वायरल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा की पत्नी के समर्थन से बढ़ी चर्चा


    भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा की पत्नी स्तुति मिश्रा का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों राजनीतिक और सोशल मीडिया गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने दिल्ली में NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने की अपील की है।

    स्तुति मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके आंदोलन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समन्वय और संवाद के माध्यम से समाधान निकलना चाहिए। बड़े पदों पर बैठे लोगों को जिद नहीं करनी चाहिए, बल्कि बच्चों की बात सुननी चाहिए। उन्होंने लिखा कि यदि छात्र सरकार से उम्मीद नहीं करेंगे तो फिर किससे करेंगे। उनके अनुसार, प्रेम और सहानुभूति किसी भी समस्या के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और हर बच्चे को सम्मान व संवेदनशील व्यवहार मिलना चाहिए।

    पोस्ट के शुरुआती संस्करण में उन्होंने यह भी लिखा था कि गलती होने पर क्षमा मांगने से कोई छोटा नहीं होता और जो लोग इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें दंड मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि छात्रों की मांगों को सुनना आवश्यक है और उनके साथ न्याय होना चाहिए। हालांकि, पोस्ट वायरल होने के बाद उन्होंने इस हिस्से को संपादित कर हटा दिया।

    स्तुति मिश्रा का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद इसे लेकर विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालांकि, उन्होंने बाद में अपने संदेश में संशोधन करते हुए केवल छात्रों के प्रति संवेदनशीलता और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

    यह पहला अवसर नहीं है जब स्तुति मिश्रा का कोई सोशल मीडिया पोस्ट सुर्खियों में आया हो। इससे पहले बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर उन्होंने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए लिखा था कि भविष्य में बैंक होम लोन और कार लोन की तरह पेट्रोल-डीजल लोन भी ईएमआई पर उपलब्ध कराएंगे। उस पोस्ट के वायरल होने के बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी टिप्पणी पर सफाई भी दी थी।

    वर्तमान पोस्ट ने एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, इसे लेकर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश

    भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें मांग की गई है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को माता-पिता या कानूनी संरक्षक की अनुमति के बिना सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और चलाने की इजाजत नहीं दी जाए।

    सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) की विधायक सारा अहमद ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने साइबर उत्पीड़न, ऑनलाइन यौन शोषण और बच्चों में बढ़ती डिजिटल निर्भरता को देखते हुए सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने की मांग उठाई।

    बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग
    सारा अहमद पंजाब बाल संरक्षण ब्यूरो की अध्यक्ष भी हैं। उनके द्वारा पेश किया गया यह प्रस्ताव पाकिस्तान की किसी प्रांतीय या संघीय विधायिका में अपनी तरह का पहला प्रस्ताव बताया जा रहा है।

    प्रस्ताव में संघीय सरकार से बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को नियंत्रित करने और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक कानून बनाने की सिफारिश की गई है।

    प्रस्ताव में कहा गया है कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक विकास की सुरक्षा करना राज्य की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया के अनियंत्रित इस्तेमाल से बच्चे साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, अनुचित सामग्री, मानसिक तनाव और डिजिटल लत जैसी समस्याओं का सामना कर सकते हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐज वेरिफिकेशन की मांग
    प्रस्ताव में पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA) से देश में संचालित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रभावी उम्र सत्यापन प्रणाली (Age Verification System) लागू करने की मांग भी की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रस्तावित नियमों का सही तरीके से पालन हो सके।

    दुनिया के कई देश भी बना रहे हैं सख्त नियम
    यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए नियमों पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ऑनलाइन गतिविधियों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, साइबर उत्पीड़न और हानिकारक कंटेंट के संपर्क के बीच संबंधों को देखते हुए सरकारें नियमन बढ़ा रही हैं।

    कई देशों में लागू हो चुके हैं आयु आधारित नियम
    ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों समेत दुनिया के कई देशों ने बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को सीमित करने के लिए आयु आधारित प्रतिबंध लागू किए हैं। वहीं कुछ देश अधिक सख्त आयु सत्यापन व्यवस्था और ऑनलाइन बाल सुरक्षा कानूनों पर काम कर रहे हैं।