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  • दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल

    दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उज्जैन की एक जमीन से जुड़े मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों पर सवाल उठाने के बाद जहां भाजपा नेताओं ने दिग्विजय सिंह की खुले तौर पर सराहना की, वहीं कांग्रेस के भीतर उनके बयान को लेकर असहजता और विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे।

    वीर भारत न्यास की जमीन से शुरू हुआ विवाद
    पूरा विवाद 24 जून को उस समय शुरू हुआ, जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन ‘वीर भारत न्यास’ को मात्र एक रुपये में आवंटित कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी इस ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं और आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    दिग्विजय सिंह ने दस्तावेजों का हवाला देकर रखा अलग पक्ष
    कुछ दिनों बाद उज्जैन दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार संबंधित जमीन किसी निजी ट्रस्ट को नहीं, बल्कि एक सरकारी ट्रस्ट को दी गई थी।

    उन्होंने कहा कि वह किसी भी विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करते हैं। उनके अनुसार संबंधित ट्रस्ट का पदेन अध्यक्ष राज्य का मुख्यमंत्री होता है, इसलिए इसे निजी ट्रस्ट कहना सही नहीं है।

    इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए आरोप लगाने वाले लोगों की कमी नहीं है। बाद में इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई।

    भाजपा विधायक से मिली थी शुरुआती जानकारी
    बड़वानी में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने बताया कि जिस जानकारी के आधार पर विवाद खड़ा हुआ, वही जानकारी उन्हें भी एक भाजपा विधायक और स्थानीय अखबार के माध्यम से मिली थी। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें पता चला कि संबंधित ट्रस्ट सरकारी स्वरूप का है, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा।

    भाजपा नेताओं ने की सराहना
    दिग्विजय सिंह के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने उनकी तथ्य आधारित टिप्पणी की प्रशंसा की। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि झूठ ज्यादा समय तक नहीं टिकता और दावा किया कि कांग्रेस के आरोपों को उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता ने तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया।

    भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने भी कहा कि सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है और दिग्विजय सिंह ने यही किया।

    इतना ही नहीं, भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने उनकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए उन्हें भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण भी दे डाला। उन्होंने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह भाजपा में आते हैं तो उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाएगा।

    कांग्रेस के भीतर उठे विरोध के स्वर
    दूसरी ओर, कांग्रेस के अंदर इस बयान को लेकर असहमति सामने आई। पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर आपत्ति थी तो उन्हें यह बात सार्वजनिक मंच की बजाय पार्टी के भीतर उठानी चाहिए थी।

    वहीं, कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि कांग्रेस आखिर कब “दिग्विजय सिंह के नागपाश” से मुक्त होगी।

    साथ आए दिग्विजय और पटवारी, कहा- पार्टी एकजुट
    बढ़ते विवाद के बीच मंगलवार शाम दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी संयुक्त रूप से मीडिया के सामने आए। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार से जुड़े कथित भूमि मामलों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर पूरी तरह एकजुट होकर संघर्ष कर रही है।

    इस दौरान दिग्विजय सिंह ने अपनी ‘दलाल’ वाली टिप्पणी पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस के किसी नेता, विशेषकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, के लिए इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी उनके लिए पुत्र समान हैं और पार्टी में लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान उन्होंने कभी अपने किसी सहयोगी के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया।

  • वर्ल्ड कप के बीच मेसी के पिता गंभीर रूप से बीमार, निधन की अफवाहों पर परिवार ने जारी किया कड़क बयान

    वर्ल्ड कप के बीच मेसी के पिता गंभीर रूप से बीमार, निधन की अफवाहों पर परिवार ने जारी किया कड़क बयान

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत के सबसे बड़े मंच फीफा वर्ल्ड कप के रोमांच के बीच अर्जेंटीना के महान कप्तान और दिग्गज स्ट्राइकर लियोनेल मेसी के परिवार पर दुखों का बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है। टूर्नामेंट के व्यस्त और उच्च दबाव वाले शेड्यूल के दौरान मेसी के परिवार ने उनके पिता जॉर्ज मेसी की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान जारी किया है। परिवार ने पुष्टि की है कि 68 वर्षीय जॉर्ज मेसी इस समय एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण बीमारी का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते उन्हें कड़े मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। इस संवेदनशील खबर के सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और मेसी के प्रशंसकों में गहरी चिंता की लहर दौड़ गई है।

    मेसी परिवार की ओर से जारी किए गए इस आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि जॉर्ज मेसी इस समय एक बड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौती से पूरी बहादुरी से लड़ रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक विशेष दल की सीधी निगरानी में उनका सघन उपचार किया जा रहा है। राहत की बात यह है कि चिकित्सीय प्रक्रिया के बीच उनकी सेहत में धीरे-धीरे सकारात्मक सुधार भी दर्ज किया जा रहा है। हालांकि, गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से परिवार ने वर्तमान में इस गंभीर बीमारी के सटीक स्वरूप या उसके नाम को लेकर किसी भी प्रकार की विस्तृत तकनीकी जानकारी को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करने का फैसला किया है।

    यह आधिकारिक वक्तव्य अर्जेंटीना और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जॉर्ज मेसी के अचानक निधन की भ्रामक और अनियंत्रित अफवाहें तेजी से फैलने के तुरंत बाद सामने आया है। सोशल मीडिया और कुछ अनधिकृत पोर्टल्स पर प्रसारित की जा रही इन झूठी खबरों ने विश्व कप में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे कप्तान और उनके परिजनों को गहरी मानसिक पीड़ा पहुंचाई। स्थिति को बिगड़ते देख मेसी परिवार को स्वयं आगे आकर इन भ्रामक अटकलों का खंडन करना पड़ा। परिवार ने वैश्विक मीडिया और आम जनता से पुरजोर अपील करते हुए कहा है कि इस बेहद संवेदनशील समय में सभी को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी, परम संयम और बुनियादी इंसानियत का परिचय देना चाहिए।

    जारी बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि किसी भी व्यक्ति के नाजुक स्वास्थ्य और उसके परिवार की आंतरिक मानसिक शांति को गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग या सस्पेंस का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। परिवार ने स्पष्ट चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि जॉर्ज मेसी के स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी वास्तविक और प्रामाणिक प्रगति केवल और केवल परिवार द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक बुलेटिन के माध्यम से ही साझा की जाएगी। इसलिए बाहरी स्रोतों या अपुष्ट दावों पर किसी को भी विश्वास नहीं करना चाहिए।

    इससे पहले चालू वर्ल्ड कप के अपने शुरुआती मुकाबले में अर्जेंटीना की टीम ने अल्जीरिया पर 3-0 की एकतरफा और शानदार जीत दर्ज की थी। उस ऐतिहासिक मैच की समाप्ति के बाद स्वयं कप्तान लियोनेल मेसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को स्वीकार किया था कि वह अपनी निजी जिंदगी में एक बेहद कठिन और दर्दनाक दौर से गुजर रहे हैं। उस समय उन्होंने अपनी इस गहरी व्यक्तिगत परेशानी के मुख्य कारण का खुलासा तो नहीं किया था, लेकिन अब इस आधिकारिक बयान के आने के बाद यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि मेसी मैदान पर अपनी राष्ट्रीय टीम की कप्तानी करने के साथ-साथ बैकग्राउंड में अपने पिता की नाजुक सेहत को लेकर कितने गहरे मानसिक तनाव और चिंता से घिरे हुए हैं।

  • रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी

    रणवीर सिंह कंट्रोवर्सी पर आईएफटीडीए अध्यक्ष अशोक पंडित मुखर: कहा- फिल्म उद्योग भरोसे पर टिका, स्टारडम में प्रतिबद्धता भी जरूरी

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के प्रमुख संगठन इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) के अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE) के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहे मौजूदा विवाद पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। अभिनेता रणवीर सिंह के फिल्म ‘डॉन 3’ को अचानक छोड़ने के बाद मनोरंजन उद्योग में शुरू हुई तीखी बहस के बीच अशोक पंडित ने साफ किया है कि किसी भी कलाकार की व्यावसायिक सफलता और उसके कानूनी अनुबंधों को अलग-अलग चश्मे से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फेडरेशन का मकसद केवल फिल्म उद्योग के पेशेवर ताने-बाने की रक्षा करना है।

    हाल ही में वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज फेडरेशन द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ जारी किए गए असहयोग निर्देश (नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव) को वापस लिए जाने के बाद इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया था। इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करते हुए अशोक पंडित ने एक मीडिया बातचीत में बताया कि प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह को उस दौर में अपनी आगामी फिल्म के लिए साइन किया था, जब उनका हालिया स्टारडम वापस नहीं आया था। उन्होंने याद दिलाया कि जब अभिनेता की लगातार चार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई थीं, तब मेकर्स ने उन पर भरोसा जताते हुए ‘डॉन 3’ के लिए बहुत पहले ही अनुबंधित कर लिया था।

    अशोक पंडित के अनुसार, सिनेमाई दुनिया में जब किसी भी कलाकार का करियर ऊंचाइयों को छूने लगता है, तब भी उसे उद्योग के पुराने रिश्तों और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले निर्माताओं को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बेहद सुखद बात है कि अभिनेता की हालिया फिल्म सफल रही है और वे वर्तमान में एक बेहद मजबूत स्थिति में काम कर रहे हैं, लेकिन नैतिकता का तकाजा यही कहता है कि विपरीत परिस्थितियों में हाथ थामने वाले लोगों के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। फिल्म उद्योग पूरी तरह से आपसी विश्वास, लिखित वादों और समय पर किए गए कमिटमेंट के बलबूते ही संचालित होता है।

    बॉलीवुड में स्टारडम के बदलते स्वरूप पर बेहद बेबाकी से टिप्पणी करते हुए फिल्म समीक्षक और संगठन प्रमुख ने कहा कि इस फिल्म नगरी ने समय-समय पर कई ऐतिहासिक और विशाल स्टारडम देखे हैं। उन्होंने महान अभिनेता राजेश खन्ना, शाहरुख खान और सलमान खान के दौर के अभूतपूर्व स्टारडम का उदाहरण देते हुए कहा कि दर्शकों का असीम प्यार निश्चित रूप से अनमोल और सर्वोपरि होता है, परंतु व्यावसायिक प्रोफेशनलिज्म ही इस पूरी इंडस्ट्री की असली और मजबूत बुनियाद है। जनता फिल्मों के लिए तालियां बजाती है और सफलता का जश्न मनाती है, लेकिन फिल्म निर्माण के पर्दे के पीछे आपसी भरोसा सबसे ज्यादा मायने रखता है।

    इसके साथ ही अशोक पंडित ने फिल्म निर्देशक आदित्य धर और उनकी हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ की जमकर तारीफ की। उनका मानना है कि इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने हिंदी फिल्म उद्योग को एक बहुत ही जरूरी और नया जीवनदान दिया है। उन्होंने ‘धुरंधर’ को बिजनेस के लिहाज से एक बेहतरीन ऑक्सीजन बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी शानदार फिल्म है जिसने दर्शकों को दोबारा भारी तादाद में सिनेमाघरों तक खींचने का काम किया है। हालांकि, फिल्म की इस शानदार कामयाबी का जश्न मनाने के साथ ही उन्होंने पुरजोर तरीके से यह स्पष्ट किया कि ‘धुरंधर’ की सफलता को ‘डॉन 3’ के विवाद के साथ मिलाकर बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए।

    अपनी बात को विराम देते हुए आईएफटीडीए के अध्यक्ष ने कहा कि दो अलग-अलग मामलों को आपस में मिलाने से केवल भ्रम और जटिलताएं पैदा होती हैं। फेडरेशन का एकमात्र और व्यापक उद्देश्य फिल्म उद्योग के पूरे इकोसिस्टम को सुरक्षित रखना और छोटे-बड़े सभी हितधारकों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने एक बार फिर इस बात को दोहराया कि संस्था का किसी भी अभिनेता या निर्माता से कोई व्यक्तिगत झगड़ा या शिकायत नहीं है, बल्कि उनकी एकमात्र चिंता यह सुनिश्चित करना है कि देश की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री के भीतर काम करने का एक पारदर्शी, पेशेवर और भरोसेमंद माहौल हमेशा कायम रहे।

  • ‘अपने बयान पर कायम हूं’: कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामले में माफी से किया इनकार

    ‘अपने बयान पर कायम हूं’: कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामले में माफी से किया इनकार

    महाराष्ट्र। मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा की एक कमेटी के सामने पेश हुए।
    यह मामला उनके द्वारा राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है। पूछताछ के दौरान कामरा ने स्पष्ट कहा कि उन्हें अपने बयान पर कोई पछतावा नहीं है और वे माफी भी नहीं मांगेंगे।

    कमेटी के समक्ष पेशी के बाद कामरा ने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि वे अपने बयान पर कायम हैं और झूठी या औपचारिक माफी नहीं देंगे। उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी होने के बाद इस मामले की जांच के लिए विधानसभा की कमेटी गठित की गई थी।

    कमेटी में पूछे गए सवाल

    कमेटी के अध्यक्ष प्रसाद लाड ने बताया कि कामरा से करीब 24 सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अपने बयान पर पछतावा है, जिस पर उन्होंने इनकार किया। माफी मांगने के सवाल पर भी उन्होंने साफ कहा कि यदि वे माफी मांगते हैं तो वह सच्ची नहीं होगी और इससे कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

    माफी पर कमेटी का रुख

    कमेटी ने कामरा को बताया कि यदि वे बिना शर्त माफी मांगते हैं तो मामले पर अलग तरीके से विचार किया जा सकता है। इस पर उनके वकील ने कहा कि वे इस बारे में चर्चा कर लिखित जवाब ईमेल के जरिए देंगे।

    गौरतलब है कि इस मामले की शिकायत प्रवीण दरेकर ने दर्ज कराई थी, जो भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य हैं।

  • LPG की कमी पर पार्टी लाइन से हटकर कमलनाथ का बयान, बोले- ऐसा कुछ नहीं, बस माहौल बनाया जा रहा

    LPG की कमी पर पार्टी लाइन से हटकर कमलनाथ का बयान, बोले- ऐसा कुछ नहीं, बस माहौल बनाया जा रहा


    छिंदवाड़ा। कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने देश में LPG की कमी को लेकर पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता में कोई कमी नहीं है बल्कि सिर्फ एक माहौल बनाया जा रहा है जिससे आम लोगों के बीच संकट का भ्रम फैल रहा है। उन्होंने इसे कमी नहीं बल्कि अव्यवस्था बताया।

    कमलनाथ का बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लगातार देश में LPG की किल्लत और लंबी लाइनों की शिकायत कर रही है। गुरुवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच एलपीजी और ईंधन की उपलब्धता को लेकर बहस भी हुई। भाजपा ने कहा कि सरकार स्थिति को सक्रिय रूप से प्रबंधित कर रही है जबकि कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर ईंधन की उपलब्धता पर सवाल उठाए।

    कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा अगर संकट नहीं है तो इसका असर जमीन पर दिखना चाहिए। उपभोक्ता को भरोसा होना चाहिए कि उन्हें मांग पर LPG पेट्रोल और डीजल मिलेंगे। अगर दबाव है तो प्रधानमंत्री के दावे सही नहीं हैं।

    सांसद मनीष तिवारी ने सवाल उठाया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार कब तक अस्थायी समाधान अपनाएगी। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति से निपटने के लिए उत्पाद शुल्क कम करना और सीमा शुल्क हटाना जरूरी है। उधर कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा कि अप्रैल के बाद से हर चीज की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और चुनाव खत्म होने के बाद उर्वरक पेट्रोल और डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

  • ईरान जंग के बीच शियाओं पर आसिम मुनीर का बयान, पाकिस्तान में बढ़ा विवाद

    ईरान जंग के बीच शियाओं पर आसिम मुनीर का बयान, पाकिस्तान में बढ़ा विवाद

    तेहरान। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर Asim Munir के एक बयान को लेकर पाकिस्तान में नया विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कथित तौर पर कहा कि जिन शिया धर्मगुरुओं को Iran से “ज्यादा लगाव” है, वे वहां चले जाएं। उनका यह बयान रावलपिंडी में आयोजित एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जिसके बाद शिया समुदाय के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

    शिया धर्मगुरुओं ने इसे अपमानजनक और भड़काऊ बताते हुए आरोप लगाया कि सैन्य नेतृत्व देश के भीतर सांप्रदायिक तनाव बढ़ा रहा है। कुछ नेताओं ने यहां तक कहा कि सेना प्रमुख बाहरी शक्तियों के प्रभाव में काम कर रहे हैं, जो पाकिस्तान के हितों के खिलाफ है।

    सरकारों को गिराने तक के आरोप
    शिया उलेमा काउंसिल पाकिस्तान के केंद्रीय उपाध्यक्ष आलम सैयद सिब्तैन हाइडर सब्ज़वारी ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि सेना प्रमुख को अमेरिका और इजरायल से इतना लगाव है तो उन्हें खुद पाकिस्तान छोड़ देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार सरकारों को गिराकर देश को नुकसान पहुंचाया गया है।

    विरोध प्रदर्शनों के बाद बढ़ा तनाव
    इससे पहले, कराची, स्कार्डू और इस्लामाबादसमेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। ये प्रदर्शन शिया अयातुल्लाह खामेनेई से जुड़े घटनाक्रमों के विरोध में बताए गए। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत होने की खबरें सामने आई थीं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई।

    मुनीर की चेतावनी
    विरोध प्रदर्शनों के बाद मुनीर ने कहा था कि किसी दूसरे देश की घटनाओं को लेकर पाकिस्तान में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बाद में “ईरान चले जाएं” वाली टिप्पणी सामने आने के बाद शिया समुदाय के एक हिस्से में नाराजगी और बढ़ गई।
    Inter-Services Public Relations ने अपने बयान में कहा कि सेना प्रमुख ने उलेमाओं से मुलाकात कर राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में उनकी भूमिका पर चर्चा की। हालांकि विवादित टिप्पणी पर आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

  • ‘कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता अमीर’ -लखनऊ में राहुल गांधी का बड़ा बयान, BJP पर भी साधा निशाना

    ‘कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता अमीर’ -लखनऊ में राहुल गांधी का बड़ा बयान, BJP पर भी साधा निशाना


    लखनऊ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लखनऊ में आयोजित संविधान सम्मेलन में अपनी ही पार्टी को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक गरीबों की पार्टी है, लेकिन उसके कई बड़े नेता अमीर हैं।

    राहुल गांधी ने कहा, “कांग्रेस गरीब पार्टी है, लेकिन उसके जो बड़े-बड़े नेता हैं वे बहुत अमीर हैं। हम अमीर पार्टी बनना भी नहीं चाहते, क्योंकि जिस दिन कांग्रेस अमीर पार्टी बन जाएगी, वह Bharatiya Janata Party बन जाएगी।”

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह ढांचा Mahatma Gandhi के समय से ही तय किया गया था और पार्टी का उद्देश्य हमेशा गरीबों और वंचितों की आवाज बनना रहा है।

    कांशीराम की जयंती पर सम्मेलन

    लखनऊ में Kanshi Ram की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी की कुछ कमजोरियों के कारण ही बहुजन आंदोलन को ताकत मिली और कांशीराम राजनीति में बड़ी सफलता हासिल कर पाए।

    उनका कहना था कि अगर कांग्रेस ने सामाजिक बदलाव की दिशा में तेज़ी से काम किया होता, तो शायद कांशीराम को इतनी बड़ी राजनीतिक सफलता नहीं मिलती।

    केवल इच्छा से नहीं होता बदलाव

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि राजनीति में केवल चाहने से कुछ नहीं होता। बदलाव के लिए विचारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
    उन्होंने कहा कि जब तक लोग यह तय नहीं करेंगे कि अन्याय को स्वीकार नहीं करना है और उसके खिलाफ खड़ा होना है, तब तक समाज में बदलाव संभव नहीं है।

    संविधान और मौजूदा सरकार पर टिप्पणी

    संविधान पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत के संविधान में हजारों साल पुरानी सभ्यता की आवाज़ है और इसकी मूल भावना सामाजिक न्याय और बराबरी की है।

    उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज की सत्ता इस मूल भावना को स्वीकार नहीं करती।

    अंबेडकर और कांशीराम के संघर्ष का जिक्र

    अपने संबोधन में राहुल गांधी ने B. R. Ambedkar और कांशीराम के संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने शिक्षा और संगठन के जरिए समाज को नई दिशा दी, जबकि कांशीराम ने बिना समझौता किए अपने सिद्धांतों पर संघर्ष किया।

    ऊर्जा नीति और सरकार पर आरोप

    राहुल गांधी ने देश की ऊर्जा नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण भारत की ऊर्जा नीतियों पर असर पड़ रहा है।

    समाज में असमानता का मुद्दा

    राहुल गांधी ने कहा कि देश का समाज आज 15 प्रतिशत और 85 प्रतिशत में बंट गया है, जहां संसाधनों और अवसरों का लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंच रहा है।

    2027 चुनाव की तैयारी

    कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि राजनीति को बदलने का समय आ गया है और सबकी हिस्सेदारी वाली राजनीति ही देश को आगे ले जा सकती है।
    गौरतलब है कि हालिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया था। अब यही गठबंधन 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उसी सफलता को दोहराने की रणनीति पर काम कर रहा है।

  • उमंग सिंघार ने आदिवासी इलाकों से बढ़ते पलायन पर सरकार पर साधा निशाना, बोले- ये गंभीर मानवीय संकट है

    उमंग सिंघार ने आदिवासी इलाकों से बढ़ते पलायन पर सरकार पर साधा निशाना, बोले- ये गंभीर मानवीय संकट है


    भोपाल। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचलों से लगातार हो रहे पलायन को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की तलाश में अपने ही राज्य से बाहर जाने को मजबूर हो रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा गंभीर मानवीय संकट है।

    सिंघार ने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन से जुड़े आदिवासी समुदाय आज अपने गांव और खेत छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए विवश हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का यह पलायन उनकी पहचान और सम्मान से जुड़ा एक गहरा सामाजिक संकट बनता जा रहा है।

    भाजपा सरकार की नीतियों को ठहराया जिम्मेदार

    आदिवासियों के पलायन के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि वर्षों से सत्ता में रही सरकार दलित और आदिवासी समाज के मुद्दों पर केवल घोषणाएं और प्रचार तक सीमित रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी गौरव के नाम पर कार्यक्रम तो आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आदिवासी परिवारों को रोजगार और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिसके कारण उन्हें प्रदेश छोड़कर जाना पड़ रहा है।

    सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट संकेत

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भी कमी बनी हुई है। उनका कहना है कि जब किसी प्रदेश के मूल निवासी ही अपनी जमीन और गांव छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएं, तो यह सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट संकेत है।

    उल्लेखनीय है कि मध्‍य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों से हर वर्ष बड़ी संख्या में मजदूर काम की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करते हैं। इस मुद्दे को लेकर अब कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया है।

  • हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”

    हिमंत सरमा का खुलासा: “राहुल और प्रियंका गांधी की आपसी लड़ाई का शिकार रहा”


    नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर तीखा हमला बोला है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान मीडिया से बातचीत में सरमा ने दावा किया कि भाजपा में शामिल होने से पहले वे राहुल और प्रियंका की अंदरूनी लड़ाई के शिकार रहे।

    सरमा ने कहा, “गांधी परिवार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। हाल के राजनीतिक फैसलों से यह साफ दिखता है कि राहुल गांधी नहीं चाहते कि प्रियंका गांधी केरल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करें।

    उन्हें असम में भेजा गया, इसका यही मतलब है।”

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस में राहुल गांधी अपने करीबी नेताओं और गुट के जरिए सत्ता बनाए रखना चाहते हैं, जबकि प्रियंका उस गुट का हिस्सा नहीं हैं। सरमा ने बताया, “मैं 22 साल तक कांग्रेस में रहा हूं, मुझे अंदर की पूरी जानकारी है। यही वजह है कि प्रियंका को केरल की बजाय असम में जिम्मेदारी दी गई।”

    हिमंत सरमा बीजेपी में शामिल होने के बाद से लगातार कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमलावर रहे हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सियासी जानकार अब इस सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या वाकई राहुल और प्रियंका के बीच अंदरूनी मतभेद हैं, या यह विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

  • ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    तेहरान। ईरान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण भड़के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ (HRANA) ने रविवार सुबह बताया कि ईरान के 31 प्रांतों में से 25 प्रांतों में 170 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं। एजेंसी के अनुसार, मरने वालों की संख्या कम से कम 15 पहुंच गई है और 580 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश में अशांति पैदा करने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा कि दंगाइयों को उनके स्थान पर रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर इजरायल की ओर से ऐसा बयान सामने आया है, जिसे सुनकर खामनेई आग-बबूला हो जाएंगे।

    दरअसल, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर अन्य देशों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि इस सप्ताह इस्लामी गणराज्य के कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान इजरायल ईरान के लोगों के साथ पूर्ण एकजुटता के साथ खड़ा है। नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में कहा कि हम ईरानी जनता के संघर्ष तथा उनकी स्वतंत्रता, आजादी और न्याय की आकांक्षाओं के साथ एकजुटता से खड़े हैं। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह बहुत संभव है कि हम ऐसे क्षण में खड़े हैं जब ईरानी लोग अपना भाग्य अपने हाथों में ले रहे हैं। बता दें कि ईरान में प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले रविवार को हुई थी, जब दुकानदारों ने आर्थिक समस्याओं को लेकर हड़ताल की थी। उस वक्त से इसका दायरा और आकार लगातार बढ़ रहा है और प्रदर्शनकारी राजनीतिक मांगें भी उठा रहे हैं।
    जून 2025 में 12 दिनों का चला था युद्ध

    बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच पिछले साल जून में 12 दिनों तक युद्ध चला था, जब इजरायल ने ईरानी परमाणु सुविधाओं के साथ-साथ आवासीय क्षेत्रों पर हमलों की श्रृंखला शुरू की थी। यह कहते हुए कि इसका उद्देश्य इस्लामी गणराज्य की परमाणु अनुसंधान और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना था। ईरान ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले करके जवाब दिया। बाद में संघर्ष के दौरान अमेरिका ने इजरायल का साथ देते हुए ईरानी परमाणु स्थलों को निशाना बनाया, जिसके बाद युद्धविराम की घोषणा की गई।

    रविवार को नेतन्याहू ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा की और कहा कि उन्होंने इस सप्ताह अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ इस पर बातचीत की थी। नेतन्याहू ने कहा कि हमने शून्य संवर्धन के अपने साझा रुख को दोहराया तथा ईरान से 400 किलोग्राम संवर्धित सामग्री हटाने और उन स्थलों को सख्त तथा वास्तविक निगरानी के अधीन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।