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  • दिग्विजय सिंह बोले- ‘मैं सनातन धर्म का समर्थक हूं, हिंदुत्व का नहीं’, सावरकर को लेकर किया दावा

    दिग्विजय सिंह बोले- ‘मैं सनातन धर्म का समर्थक हूं, हिंदुत्व का नहीं’, सावरकर को लेकर किया दावा


    शाजापुर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह सनातन धर्म का समर्थन करते हैं, लेकिन हिंदुत्व का नहीं। सिंह ने दावा किया कि ‘हिंदुत्व’ शब्द विनायक दामोदर सावरकर ने दिया था। अपनी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के सिलसिले में शाजापुर पहुंचे कांग्रेस नेता ने कहा कि सनातन धर्म का संदेश प्रेम, स्नेह और करुणा है। उन्होंने यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए सभी धर्मों के लोगों से इससे जुड़ने की अपील भी की।

    बोले- मां ने सनातन धर्म की सीख दी

    शाजापुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें सनातन धर्म के बारे में सिखाया था। उनके अनुसार, सनातन धर्म प्रेम, स्नेह और करुणा का प्रतीक है।

    सिंह ने कहा, “मैं सनातन धर्म का समर्थन करता हूं, हिंदुत्व का नहीं।” उन्होंने दावा किया कि हिंदुत्व शब्द सावरकर ने दिया था। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि हिंदुत्व का समानता से कोई लेना-देना नहीं है।

    कुरान का भी किया जिक्र

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने कुरान का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुरान पढ़ी है। कांग्रेस नेता ने ‘काफिर’ शब्द का अर्थ बताते हुए दावा किया कि इसका इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए होता है, जो किसी धर्म का पालन नहीं करता और ‘अधर्म’ यानी गलत रास्ते पर चलता है।

    उज्जैन से शुरू हुई यात्रा अयोध्या में होगी समाप्त

    दिग्विजय सिंह इन दिनों ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर हैं। यह यात्रा इसी सप्ताह उज्जैन से शुरू हुई थी और अयोध्या में समाप्त होगी। शाजापुर के बाद यात्रा राजगढ़ जिले की ओर बढ़ेगी।

    सिंह ने इस यात्रा को गैर-राजनीतिक पहल बताया। उन्होंने कहा, “अगर यह राजनीतिक होती, तो इसमें केवल कांग्रेस कार्यकर्ता ही शामिल होते।” उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि सभी धर्मों के लोग यात्रा से जुड़ें।

    यात्रा के जरिए दिग्विजय सिंह सनातन धर्म से जुड़े अपने विचार रख रहे हैं। शाजापुर में उनके बयान के बाद सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर उनकी टिप्पणी चर्चा में आ गई है।

  • ईरान की अमेरिका को दो टूक: 'यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं भेजेंगे', आसिम मुनीर कर रहे मध्यस्थता

    ईरान की अमेरिका को दो टूक: 'यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं भेजेंगे', आसिम मुनीर कर रहे मध्यस्थता


    नई दिल्ली। अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर ईरान ने अपना रुख सख्त कर दिया है। तेहरान ने साफ कहा है कि वह अपने यूरेनियम का एक ग्राम भी देश से बाहर नहीं भेजेगा। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत तभी आगे बढ़ेगी, जब वॉशिंगटन भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाएगा और उसकी सभी शर्तें पूरी करने की दिशा में कार्रवाई करेगा। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ईरान यात्रा के बीच आया यह बयान दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान से यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पहले विश्वास बहाली के लिए कदम उठाने होंगे। बातचीत की प्रक्रिया ईरान की सभी शर्तों को पूरी तरह पूरा करने से शुरू होनी चाहिए।

    रेजाई ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बैठक में भी तेहरान का यही रुख दोहराया। मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा बातचीत का रास्ता निकालने के प्रयासों के तहत ईरान पहुंचे हैं।

    राष्ट्रपति पेजेश्कियन और संसद स्पीकर से मिले मुनीर
    ईरानी मीडिया के मुताबिक, मंगलवार को राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने तेहरान में आसिम मुनीर के साथ बैठक की। इस दौरान क्षेत्रीय घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों पर चर्चा हुई।

    नूरन्यूज के अनुसार, मुनीर ने ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ से भी मुलाकात की। इन बैठकों में क्षेत्रीय तनाव कम करने और दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान ने रखीं सात शर्तें
    ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा तब तक नहीं जीत सकता, जब तक वह पिछले महीने तेहरान की ओर से रखी गई सात शर्तों को पूरा नहीं करता।

    इन शर्तों का संबंध स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने से भी है। प्रमुख मांगों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करना, ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के सभी मोर्चों पर शत्रुता रोकना शामिल है।

    रेजाई ने यह भी कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के रुख के मुताबिक, हथियार बनाने के स्तर के करीब पहुंच चुके यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा।

    परमाणु कार्यक्रम पर अटका समझौता
    ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के साथ किसी संभावित समझौते की राह में प्रमुख बाधा बना हुआ है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि युद्ध समाप्त करने और समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए ईरान को अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता में महत्वपूर्ण कमी करनी होगी।

    अमेरिका, इजरायल और कई अन्य पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह ईरान की ओर से यूरेनियम का 60 प्रतिशत तक संवर्धन करना है। यह स्तर आम नागरिक परमाणु उपयोग के लिए जरूरी संवर्धन स्तर से काफी अधिक है और लगभग 90 प्रतिशत संवर्धन वाले हथियार-ग्रेड यूरेनियम के स्तर के करीब है।

    हालांकि, ईरान लगातार परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने के आरोपों से इनकार करता रहा है। यूरेनियम संवर्धन की सीमा और संवर्धित यूरेनियम के भंडार का भविष्य दोनों देशों के बीच बातचीत के अहम मुद्दे बने हुए हैं।

    पाकिस्तान फिर करा रहा बातचीत की कोशिश
    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इससे पहले पाकिस्तान की मध्यस्थता के प्रयासों के बाद जून में अंतरिम शांति समझौता हुआ था। हालांकि, कुछ ही हफ्तों बाद दोनों देशों के बीच लड़ाई दोबारा शुरू होने से यह समझौता टूट गया।

    आसिम मुनीर की मौजूदा ईरान यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देशों के बीच मतभेद दूर करने और बातचीत दोबारा शुरू कराने के प्रयास जारी हैं। ईरान ने यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजने और बातचीत से पहले अपनी शर्तें पूरी करने की मांग दोहराकर स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु कार्यक्रम पर किसी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

  • ‘पेपर लीक अब रोग बन चुका है’, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए सरकारें सतर्क

    ‘पेपर लीक अब रोग बन चुका है’, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए सरकारें सतर्क


    पटना। देश में प्रतियोगी और अन्य परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक की घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक अब एक रोग बन चुका है और इससे निपटने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारें लगातार सतर्कता बरत रही हैं। सरकारों का प्रयास है कि परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में आयोजित हों, ताकि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा की जा सके।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री पटना से दिल्ली रवाना होने के दौरान एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पेपर लीक की समस्या के साथ बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों पर भी अपनी बात रखी।

    छात्रों के खर्च की भरपाई पर क्या बोले शिक्षा मंत्री?

    परीक्षा में पेपर लीक होने की स्थिति में विद्यार्थियों के खर्च का भुगतान शिक्षा विभाग की ओर से किए जाने संबंधी सवाल पर प्रह्लाद जोशी ने कहा कि संबंधित अध्यक्ष ने इस बारे में क्या बयान दिया है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में जनता पर अनावश्यक खर्च का बोझ नहीं पड़ना चाहिए।

    पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देने, यात्रा करने और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना और गड़बड़ियों की आशंका कम करना महत्वपूर्ण है।

    बिहार की शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा

    प्रह्लाद जोशी ने बताया कि बिहार में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ बैठक हुई है। इसमें प्राथमिक शिक्षा सहित शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा विभाग समेत विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

    शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने परीक्षा संचालन में सतर्कता और पारदर्शिता की जरूरत पर भी जोर दिया।

    निष्पक्ष परीक्षा के लिए व्यवस्थाएं मजबूत करना जरूरी

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। केंद्र और राज्य सरकारें परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए सावधानी बरत रही हैं। बिहार सरकार भी इस दिशा में जरूरी व्यवस्थाएं कर रही है।

    परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है। पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों की मेहनत, समय और भविष्य प्रभावित हो सकता है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली को भरोसेमंद बनाना और अनियमितताओं की गुंजाइश कम करना सरकारों के सामने अहम चुनौती है।

  • बागेश्वर धाम विवाद: बयान पर सवाल उठाने के बाद धमकी का दावा, साध्वी हर्षा बोलीं- मुझे डराने की कोशिश न करें

    बागेश्वर धाम विवाद: बयान पर सवाल उठाने के बाद धमकी का दावा, साध्वी हर्षा बोलीं- मुझे डराने की कोशिश न करें


    भोपाल।
    बागेश्वर धाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच साध्वी हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने एक नया वीडियो जारी कर लगातार धमकियां मिलने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें गंदे कमेंट, मैसेज, ई-मेल और धमकियां भेजी जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह इन धमकियों से डरने वाली नहीं हैं और अपनी कही बात पर अब भी कायम हैं।

    साध्वी हर्षा ने कहा कि यदि उन्हें कुछ होता है तो इसकी आशंका उन लोगों पर जाएगी, जिनके श्रद्धालुओं की ओर से उन्हें धमकियां दिए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो में उन्होंने किसी व्यक्ति, संत, आश्रम या संस्था का नाम नहीं लिया है। धमकी मिलने के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर उठाया था सवाल

    विवाद की शुरुआत साध्वी हर्षा के उस वीडियो से हुई थी, जिसमें उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयान पर सवाल उठाए थे।

    धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं, खासकर महिलाओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यदि कोई महिला अकेले धाम आती है तो उसे किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि धाम के मंदिर और हॉल की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली जा सकती है, लेकिन करीब पांच किलोमीटर के पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं है।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से लंबे समय तक धाम में नहीं रुकने तथा अपनी सुरक्षा और सामान का स्वयं ध्यान रखने की अपील भी की थी।

    हर्षा ने पूछा- फिर भरोसा किस पर करें?

    धीरेंद्र शास्त्री के इसी बयान पर साध्वी हर्षा ने सवाल उठाया था कि जब धाम के प्रमुख स्वयं अपने सेवादारों को लेकर श्रद्धालुओं को सावधान कर रहे हैं, तो परिवार अपने बच्चों और महिलाओं को वहां भेजते समय आखिर किस आधार पर भरोसा करें।

    उन्होंने लोगों से अपील की थी कि दर्शन के बाद ज्यादा समय तक धाम में न रुकें और वापस अपने घर लौट जाएं। नए वीडियो में हर्षा ने कहा कि वह अपनी इस सलाह से पीछे नहीं हटेंगी।

    कुंभ के दौरान भी धमकी मिलने का किया दावा

    साध्वी हर्षा ने नए वीडियो में कुंभ के दौरान भी धमकियां मिलने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने डरकर पीछे हटने के बजाय अपनी बात रखी थी। उनका कहना है कि अब भी धमकियों के बावजूद वह अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटेंगी।

    उन्होंने कहा कि वह किसी के खिलाफ अपशब्द नहीं बोल रही हैं। किसी मुद्दे पर जो बात उन्हें सही या गलत लगती है, उस पर अपनी राय रखना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि धमकियों के जरिए उन्हें डराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

  • SIR के खिलाफ INDIA के प्रदर्शन से AAP ने बनाई दूरी, संजय सिंह बोले- हम अपनी लड़ाई अलग तरीके से लड़ रहे

    SIR के खिलाफ INDIA के प्रदर्शन से AAP ने बनाई दूरी, संजय सिंह बोले- हम अपनी लड़ाई अलग तरीके से लड़ रहे


    नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन के 6 अक्टूबर के प्रदर्शन से आम आदमी पार्टी ने दूरी बना ली है। AAP ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर अपना आंदोलन अलग तरीके से जारी रखेगी और इसे किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि जनता से जुड़ा मुद्दा मानती है।

    संसद भवन परिसर में सोमवार को मीडिया से बातचीत में AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि SIR में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 6 अक्टूबर का प्रदर्शन INDIA गठबंधन का है, इसलिए आम आदमी पार्टी इसमें शामिल नहीं होगी।

    संजय सिंह ने कहा, “जहां तक कल के प्रदर्शन की बात है, तो ये INDIA गठबंधन का प्रोटेस्ट है। इसलिए आम आदमी पार्टी इसका हिस्सा नहीं है। हम इस लड़ाई को अपने तरीके से लगातार लड़ रहे हैं।”

    पार्टी बैनर के बिना आंदोलन की बात

    AAP नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को व्यापक जन आंदोलन के रूप में देख रही है। उन्होंने बताया कि AAP अपने प्रदर्शन में पार्टी का बैनर तक इस्तेमाल नहीं कर रही है, क्योंकि उसका मानना है कि यह देश के नागरिकों से जुड़ा मुद्दा है और इसमें हर व्यक्ति की भागीदारी होनी चाहिए।

    संजय सिंह ने यह भी कहा कि CJP और वाम दल समेत कई संगठन अलग-अलग स्थानों पर SIR के खिलाफ अपने स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी भी अपनी रणनीति के तहत इस मुद्दे को उठा रही है।

    30 सितंबर की विपक्षी बैठक में भी नहीं पहुंची थी AAP

    AAP ने 30 सितंबर को हुई विपक्षी दलों की बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था। उस बैठक में 19 विपक्षी दलों के नेताओं ने SIR और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की थी। बैठक के बाद INDIA गठबंधन ने 6 अक्टूबर को अपने सांसदों के साथ चुनाव आयोग तक मार्च करने और राष्ट्रपति से मुलाकात करने का फैसला किया था।

    इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, RJD नेता तेजस्वी यादव, NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले, PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती और वाम दलों के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।

    शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक में वर्चुअली हिस्सा लिया था। AAP के साथ DMK भी इस बैठक में शामिल नहीं हुई थी।

    SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग आमने-सामने

    SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। INDIA गठबंधन ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में तीन सदस्यीय आयोग के भीतर किसी विभाजन के दावों को खारिज किया है और कहा है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

    AAP की ओर से हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि पार्टी SIR के मुद्दे से पीछे नहीं हट रही है। उसका कहना है कि वह इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी, लेकिन 6 अक्टूबर को होने वाले INDIA गठबंधन के संयुक्त प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनेगी।

  • चीन को अमेरिकी हथियार बेचने के दावे पर ट्रंप का यू-टर्न? अपने ही राजदूत के बयान से किया किनारा

    चीन को अमेरिकी हथियार बेचने के दावे पर ट्रंप का यू-टर्न? अपने ही राजदूत के बयान से किया किनारा

    वाशिंगटन। चीन को अमेरिकी हथियार बेचने के दावे को लेकर ट्रंप प्रशासन में ही विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। अमेरिका में चीन के राजदूत डेविड पर्ड्यू ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से पूछा था कि क्या चीन अमेरिका से हथियार खरीदना चाहेगा। हालांकि, ट्रंप ने इस दावे से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी बातचीत की जानकारी नहीं है। बाद में उन्होंने यह जरूर कहा कि चीन अमेरिकी हथियार खरीदना चाहेगा, क्योंकि अमेरिका बेहतर हथियार बनाता है।

    ट्रंप से सोमवार को पत्रकारों ने पर्ड्यू के बयान को लेकर सवाल किया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शी के साथ चीन को हथियार बेचने की बात नहीं की थी और संकेत दिया कि संभव है पर्ड्यू ताइवान से संबंधित बातचीत का जिक्र कर रहे हों। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि चीन अमेरिकी हथियार खरीदना चाहे तो यह अच्छा विचार हो सकता है।

    विदेश विभाग बोला- चीन को हथियार बेचने की कोई योजना नहीं

    ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने भी स्थिति स्पष्ट की। विभाग ने कहा कि अमेरिकी कानून चीन को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाता है और चीन को हथियार बेचने का न तो कोई प्रस्ताव है और न ही ऐसी कोई योजना। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी कहा कि सरकार की चीन को हथियार बेचने की कोई योजना नहीं है।

    इससे पर्ड्यू के बयान और प्रशासन की आधिकारिक स्थिति के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। पर्ड्यू ने यह नहीं बताया था कि ट्रंप ने शी से यह सवाल कब और किस संदर्भ में पूछा था। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि शी ने इसके जवाब में क्या कहा।

    पर्ड्यू ने फॉक्स न्यूज पर किया था दावा

    अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू ने रविवार को फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम में ट्रंप-शी बैठक से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप दुनिया के दूसरे देशों को अमेरिकी हथियार बेचने की बात करते रहे हैं और उन्होंने एक मौके पर शी जिनपिंग से भी पूछा था कि क्या वह कुछ अमेरिकी हथियार खरीदना चाहेंगे।

    पर्ड्यू का यह बयान ऐसे समय आया जब ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बना हुआ है। पर्ड्यू ने साथ ही कहा था कि ट्रंप ताइवान के प्रति अमेरिकी नीति में बदलाव नहीं कर रहे हैं और ‘वन चाइना’ नीति पर उनका रुख कायम है।

    ताइवान को हथियारों की बिक्री पर चीन का विरोध

    ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच विवाद का मुद्दा रही है। बीजिंग वॉशिंगटन से ताइवान को हथियारों की बिक्री रोकने की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ताइवान को अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए सैन्य उपकरण उपलब्ध कराता रहा है।

    ट्रंप प्रशासन ने ताइवान के लिए करीब 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज पर फिलहाल रोक लगा रखी है। इस मुद्दे को ट्रंप ने चीन के साथ बातचीत में एक संभावित सौदेबाजी के विषय के रूप में भी पेश किया है।

    अगर चीन को हथियार बेचने की बात होती तो क्यों अहम होता मामला?

    अमेरिका और चीन के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा को देखते हुए चीन को अमेरिकी हथियारों की बिक्री अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव होती। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका ने आखिरी बार 1980 के दशक में चीन को हथियार बेचे थे। मौजूदा समय में चीन को अमेरिका का प्रमुख रणनीतिक प्रतिस्पर्धी माना जाता है।

    फिलहाल अमेरिकी प्रशासन की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट है कि चीन को हथियार बेचने का कोई प्रस्ताव या योजना नहीं है। वहीं, ट्रंप और उनके राजदूत डेविड पर्ड्यू के बयानों में अंतर ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। चीन ने भी ट्रंप के कथित प्रस्ताव की पुष्टि नहीं की है।

  • ट्रंप बोले- चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो हम भी करते हैं, जिनपिंग की यात्रा से पहले बड़ा बयान

    ट्रंप बोले- चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो हम भी करते हैं, जिनपिंग की यात्रा से पहले बड़ा बयान


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगले सप्ताह होने वाली अमेरिका यात्रा से पहले दोनों देशों के रिश्तों और जासूसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो संभव है कि अमेरिका भी चीन की जासूसी करता हो। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और उनकी आगामी मुलाकात अच्छी रहने की उम्मीद है।

    ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शी जिनपिंग अगले सप्ताह अमेरिका आएंगे। उन्होंने चीन के साथ अमेरिका के संबंधों को भी अच्छा बताया। ट्रंप के मुताबिक, जिनपिंग के साथ उनकी अच्छी रिलेशनशिप है और उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अलग-अलग समझौते होने की संभावना है।

    टैरिफ से चीन को हो रहा नुकसान

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन से जुड़े व्यापारिक मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि चीन अमेरिका को काफी टैरिफ दे रहा है। ट्रंप के अनुसार, इन टैरिफ की वजह से चीन को काफी नुकसान हो रहा था और वह ऐसा नहीं करना चाहते थे।

    चीन की कथित जासूसी को लेकर सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि किसी ने उनसे कहा था कि चीन अमेरिका की जासूसी करता है। इस पर उन्होंने कहा कि शायद चीन ऐसा करता हो, लेकिन अमेरिका भी चीन की जासूसी करता है।

    एयरपोर्ट पर जिनपिंग का स्वागत कर सकते हैं ट्रंप

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि ट्रंप अगले सप्ताह वॉशिंगटन डीसी के बाहर जॉइंट बेस एंड्रयूज पहुंचने पर शी जिनपिंग का एयरपोर्ट पर स्वागत करने की योजना बना रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि किसी विदेशी नेता का अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा एयरपोर्ट पर स्वागत किया जाना दुर्लभ है।

    अधिकारियों के मुताबिक, शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस में स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद रोज गार्डन में सैन्य समीक्षा और शाम को स्टेट डिनर का कार्यक्रम भी शामिल होगा।

    डिनर में टेक कंपनियों के CEO भी होंगे शामिल

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, स्टेट डिनर में कई बड़ी टेक कंपनियों के CEO के शामिल होने की संभावना है। इनमें Amazon के जेफ बेजोस, Alphabet के सुंदर पिचाई, OpenAI के सैम ऑल्टमैन, Apple के टिम कुक, Tesla के एलन मस्क, Nvidia के जेनसन हुआंग और Dell Technologies के माइकल डेल शामिल हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि जिनपिंग की यात्रा के दौरान अमेरिका और चीन के बीच व्यापार के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में रेयर अर्थ की आपूर्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यात्रा को दोनों देशों के बीच व्यापार और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • गोलन हाइट्स पर पहले इजरायल को 'कब्जाधारी' बताया, फिर पलटे अमेरिकी राजदूत टॉम बराक

    गोलन हाइट्स पर पहले इजरायल को 'कब्जाधारी' बताया, फिर पलटे अमेरिकी राजदूत टॉम बराक


    नई दिल्ली। गोलन हाइट्स को लेकर अमेरिकी राजदूत टॉम बराक के बयान से नया विवाद खड़ा हो गया है। बराक ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा था कि इजरायल अब भी गोलन हाइट्स पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है। उनका यह बयान अमेरिका की मौजूदा नीति से अलग माना गया, क्योंकि 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दी थी। विवाद बढ़ने के बाद बराक ने रविवार को सफाई देते हुए कहा कि अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    बराक ने लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी और पत्रकार मारियो नौफल को दिए इंटरव्यू में गोलन हाइट्स का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि इजरायल अभी भी इस इलाके पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप नहीं है।

    1967 में इजरायल ने किया था कब्जा

    गोलन हाइट्स सीरिया का रणनीतिक क्षेत्र है। 1967 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान इजरायल ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया था। 1981 में इजरायल ने इसे अपने में मिला लिया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और अधिकांश देश आज भी इस कदम को मान्यता नहीं देते।

    अमेरिका का रुख हालांकि अलग रहा है। 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दी थी। यह इस मुद्दे पर दशकों पुरानी अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव था।

    विवाद बढ़ा तो बराक ने दी सफाई

    गोलन हाइट्स को लेकर दिए बयान के बाद अमेरिकी राजदूत सवालों के घेरे में आ गए। इजरायल की ओर से भी उनके बयान पर आपत्ति जताई गई। इसके बाद रविवार को बराक ने स्पष्ट किया कि उनके बयान का मतलब संयुक्त राष्ट्र के रुख का समर्थन करना नहीं था।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, बराक ने कहा कि 2019 में ट्रंप ने गोलन हाइट्स को लेकर जो अमेरिकी नीति तय की थी, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वह गोलन हाइट्स का उदाहरण दक्षिणी लेबनान की स्थिति को समझाने के लिए दे रहे थे। उनका कहना था कि बातचीत के जरिए हुए समझौते केवल नक्शे बदलने की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होते हैं।

    अमेरिकी सांसद और इजरायल ने जताई आपत्ति

    बराक के बयान पर रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अमेरिकी राजदूत ट्रंप के उस फैसले को भूल गए हैं, जिसमें गोलन हाइट्स को इजरायल का हिस्सा माना गया था।

    इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने भी बराक के बयान का विरोध किया और इसे ट्रंप की नीति के बिल्कुल विपरीत बताया।

    सीरिया एयरबेस पर भी बयान से विवाद

    टॉम बराक इसी इंटरव्यू में सीरिया के एक एयरबेस पर इजरायली हमले की आलोचना को लेकर भी चर्चा में आए। इजरायल ने मंगलवार को एयरबेस पर हमला किया था। उसका कहना था कि वह सीरिया में तुर्की की सैन्य मौजूदगी को रोकने के लिए की गई कार्रवाई थी।

    रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने रविवार को इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि इजरायल सीरिया में तुर्की की ऐसी सैन्य मौजूदगी स्वीकार नहीं करेगा, जिससे उसकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो।

    हिजबुल्लाह पर भी देनी पड़ी सफाई

    बराक का एक अन्य बयान भी विवाद का कारण बना। उन्होंने इजरायल-लेबनान मुद्दे पर कहा था कि बातचीत की मेज से हिजबुल्लाह और ईरान गायब हैं। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि वह दोनों को वार्ता में शामिल करने की बात कर रहे हैं।

    हालांकि, बराक ने बाद में स्पष्ट किया कि अमेरिका हिजबुल्लाह से बातचीत नहीं करता। उनका मकसद केवल यह बताना था कि इजरायल-लेबनान का मुद्दा जटिल है, क्योंकि हिजबुल्लाह को हथियार और आर्थिक मदद ईरान से मिलती है।

  • अखिलेश के बयान पर सियासी घमासान: जयंत के समर्थन में उतरीं मायावती, बोलीं- तुरंत माफी मांगें सपा प्रमुख

    अखिलेश के बयान पर सियासी घमासान: जयंत के समर्थन में उतरीं मायावती, बोलीं- तुरंत माफी मांगें सपा प्रमुख


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के ‘चवन्नी को रुपया बना दिया’ वाले बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) अध्यक्ष जयंत चौधरी के जाट समाज को निशाना बनाए जाने के आरोप के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती भी उनके समर्थन में उतर आई हैं। मायावती ने अखिलेश यादव के बयान को अहंकारी और अशोभनीय बताते हुए उनसे तुरंत माफी मांगने की मांग की है।

    जयंत बोले- राजनीतिक लड़ाई में मेरा नाम लेते, समाज को क्यों घसीटा?

    जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध के बीच अखिलेश ने पूरे जाट समाज को निशाना बनाया। जयंत ने कहा कि अगर अखिलेश को उनसे कोई शिकायत थी तो सीधे उनका नाम लेकर बात करनी चाहिए थी। पूरे समाज को इस विवाद में घसीटना उचित नहीं है।

    जयंत ने अखिलेश के रवैये को अहंकारी बताते हुए कहा कि उन्होंने इस तरह के राजनीतिक अहंकार को करीब से देखा है और यही किसी के राजनीतिक पतन की वजह बनता है।

    मायावती ने जयंत का किया समर्थन

    मायावती ने भी X पर पोस्ट कर जयंत चौधरी का समर्थन किया। उन्होंने अखिलेश यादव के बयान को न केवल जयंत और राष्ट्रीय लोकदल का अपमान बताया, बल्कि इसे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और जाट समाज का भी अपमान करार दिया।

    मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव को अपने बयान के लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।

    1993 के सपा-बसपा गठबंधन का भी किया जिक्र

    मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए 1993 के सपा-बसपा गठबंधन का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के इसी अहंकारी रवैये के कारण गठबंधन टूट गया था और इसके बाद स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ।

    मायावती का कहना है कि बाद में दोनों दलों के बीच राजनीतिक गठबंधन जरूर हुआ, लेकिन अखिलेश यादव के रवैये में भी कथित तौर पर वही अहंकार दिखाई दिया। उन्होंने सपा पर राजनीतिक जरूरत के हिसाब से रुख बदलने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी काम निकलने के बाद ‘गिरगिट की तरह रंग बदलती है।’

    PDA में पंडितों को शामिल करने पर भी साधा निशाना

    मायावती ने अखिलेश यादव के PDA में ‘P’ को पंडितों से जोड़ने वाले बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अब पंडित समाज को अपना हितैषी बताने की कोशिश कर रही है, जबकि उनके मुताबिक पार्टी ने कभी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों या ब्राह्मण समाज के हित में वास्तविक रूप से काम नहीं किया।

    क्या था अखिलेश का ‘चवन्नी’ वाला बयान?

    दरअसल, कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने अपने सहयोगी दलों और राजनीतिक साथियों का जिक्र करते हुए बिना नाम लिए आरएलडी और जयंत चौधरी पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगियों को आगे बढ़ाया, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग पार्टी का साथ छोड़कर चले गए।

    अखिलेश ने इसी संदर्भ में कहा था कि ‘हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।’ इसी बयान को लेकर अब जयंत चौधरी और मायावती ने सपा प्रमुख पर हमला बोला है।

  • 'वंदे मातरम' पर शर्मिला टैगोर के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, कहा- कला और कविता पर विचार सीमित न रखें

    'वंदे मातरम' पर शर्मिला टैगोर के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, कहा- कला और कविता पर विचार सीमित न रखें


    नई दिल्ली । 
    राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन और उसके छंदों को लेकर शुरू हुई बहस में अब मनोरंजन जगत की दो प्रमुख हस्तियों के अलग-अलग विचार सामने आए हैं। वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर द्वारा ‘वंदे मातरम’ के छंदों को लेकर दिए गए बयान के बाद अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने उस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस विषय को लेकर दोनों कलाकारों की अलग-अलग सोच के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर नई चर्चा छिड़ गई है।

    पूरे विवाद की शुरुआत शर्मिला टैगोर के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को पर्याप्त और सर्वसमावेशी बताया था। उन्होंने कहा था कि शुरुआती दो छंदों के बाद के हिस्सों में जिन प्रतीकों और अभिव्यक्तियों का प्रयोग किया गया है, वे केवल एक ही ईश्वर में विश्वास रखने वाले लोगों या विभिन्न धर्मावलंबियों के लिए कहना थोड़ा असहज या मुश्किल हो सकता है। उनके अनुसार, देश की विविधता को ध्यान में रखते हुए प्रथम दो छंदों को गाना अधिक व्यावहारिक है।

    शर्मिला टैगोर की इस टिप्पणी पर असहमति जताते हुए कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि एक कलाकार के रूप में कला और कविता को देखने का नजरिया इतना सीमित नहीं होना चाहिए। किसी भी रचना या कविता में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द और प्रतीक रूपक की तरह होते हैं, जिनका उद्देश्य मनचाही भावना का संचार करना होता है। ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और देशवासियों को प्रेरित करने वाली भावना है।

    कंगना रनौत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह राष्ट्रगीत देश की आंतरिक शक्ति को जगाने का संदेश देता है। उन्होंने संकीर्ण सोच से बाहर निकलने का सुझाव देते हुए कहा कि किसी भी कलात्मक अभिव्यक्ति को हिंदू या मुस्लिम दृष्टिकोण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यदि कोई विचारधारा या धर्म किसी एक ही स्वरूप या अभिव्यक्ति तक सीमित है, तो यह उसका व्यक्तिगत या सीमित विषय हो सकता है, लेकिन इसे व्यापक राष्ट्रीय भावना पर लागू नहीं किया जा सकता।

    विभिन्न हिस्सों में इस विषय पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक ओर जहां कुछ लोग शर्मिला टैगोर के सुझाव को सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाला विचार मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग कंगना रनौत के इस पक्ष का समर्थन कर रहे हैं कि राष्ट्रीय गीत की मूल आत्मा और स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक संदर्भ के साथ कोई समझौता या उसका सीमित आंकलन नहीं होना चाहिए।

    सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषयों पर अक्सर इस प्रकार के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। ‘वंदे मातरम’ के छंदों को लेकर शुरू हुआ यह संवाद अब कलात्मक स्वतंत्रता, धार्मिक मान्यताओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़ी व्यापक बहस का रूप ले चुका है, जिस पर विभिन्न क्षेत्रों के लोग अपनी राय दे रहे हैं।