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  • PM मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी घमासान… विपक्षी दलों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

    PM मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी घमासान… विपक्षी दलों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली।
    80वें स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) (15 अगस्त 2026) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के लाल किले से दिए गए भाषण में “दिमागी नक्सल” (“Intellectual Naxal”) शब्द के इस्तेमाल ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश में जहां एक तरफ हथियारबंद नक्सलवाद खात्मे की कगार पर है, वहीं दूसरी तरफ ‘दिमागी नक्सल’ समाज में अराजकता फैलाने और युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान पर कांग्रेस, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समेत तमाम विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

    लाल किले से PM मोदी का क्या था बयान?
    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैचारिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, “सुरक्षा बलों ने जंगलों में जारी बंदूकधारी माओवादी उग्रवाद को लगभग ध्वस्त कर दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन नक्सली विचारधारा वाले लोग अब ‘दिमागी नक्सल’ के रूप में देश को गलत रास्ते पर ले जाने और युवाओं को गुमराह करने के मौकों की तलाश में हैं।”

    पीएम ने कहा कि माओवादी विचारधारा ने दशकों तक सत्ता के गलियारों और सलाहकार समितियों में पैठ बनाकर सरकारी नीतियों को प्रभावित किया था। हमें इन ‘दिमागी नक्सलियों’ को अलग-थलग करना होगा।

    विपक्षी नेताओं का तीखा पलटवार
    प्रधानमंत्री के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने उन पर स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए करने का आरोप लगाया।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पहले उन्होंने अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा, अब वे उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। यह उनकी हताशा का स्पष्ट संकेत है। पीएम अक्सर उन्हीं नीतियों को अपनाते हैं जिनकी सलाह उनकी तरफ से निशाना बनाए गए लोग देते हैं।”

    वहीं CJP के मुख्य प्रवक्ता और स्वतंत्र पत्रकार सौरभ दास ने पीएम की शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, “दिमागी नक्सल या ऐसा कोई भी ठप्पा काम नहीं आने वाला, प्रधानमंत्री जी! आप देश के शिक्षित युवाओं को सिर्फ इसलिए ‘नक्सली’ कैसे कह सकते हैं क्योंकि वे आपकी सरकार से सवाल पूछते हैं? यह सरासर अहंकार और युवाओं की समस्याओं को हल करने में नाकामी है।”

    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि राइट-विंग ट्रॉप्स में ‘एंटी-नेशनल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के बाद अब पीएम ने ‘दिमागी नक्सल’ का एक नया निरर्थक लेबल जोड़ दिया है। यह असहमति की आवाजों को दबाने और रोजगार-शिक्षा मांगने वाले युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पीएम के बयान पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “हां, मैं एक दिमागी नक्सल हूं। परिभाषा के मुताबिक सभी कॉकरोच होते हैं।” 2027 और 2028 के आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले लाल किले से आया यह बयान आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा बहस का एक मुख्य केंद्र बनने वाला है।

  • ट्रंप के बयान पर ईरान का पलटवार… कहा- ट्वीट कर देने से नहीं हो जाएगा होर्मुज पर कब्जा

    ट्रंप के बयान पर ईरान का पलटवार… कहा- ट्वीट कर देने से नहीं हो जाएगा होर्मुज पर कब्जा


    वाशिंगटन।
    ईरान (Iran) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ((American President Donald Trump)) के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने युद्ध में ईरान को हराने के बाद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को अपना क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने एक्स पर कहा कि होर्मुज को न तो किसी ट्वीट के जरिए कब्जे में लिया जा सकता है और न ही विमानवाहक पोत, सैन्य आदेश या चुनावी भाषण के जरिए। उन्होंने कहा कि ईरान धमकियों से डरने वाला नहीं है और शक्ति प्रदर्शन के आगे झुकता नहीं है। गरीबाबादी ने दो टूक कहा कि होर्मुज ईरान का था, ईरान का है और ईरान का ही रहेगा।

    उप विदेश मंत्री ने डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका को वास्तविकता स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अब तक ईरान के खिलाफ अमेरिका को रणनीतिक और भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज को बंद या खोलने का फैसला केवल ईरान के नियंत्रण में होगा। जब तक अमेरिका ईरान की शर्तों को स्वीकार नहीं करता और अपनी हार की वास्तविकता को नहीं मानता, तब तक ईरान स्ट्रेट पर लगाए गए अवरोध को जारी रखेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर बातचीत में गतिरोध बना हुआ है।


    डोनाल्ड ट्रंप ने क्या किया था दावा

    इससे पहले न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड में रैली को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान को हराने के बाद वह जल्द ही होर्मुज को अमेरिका का क्षेत्र घोषित करेंगे। ट्रंप ने इससे पहले यह भी दावा किया था कि अमेरिका का इस जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण है और वह इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को स्टील की दीवार बताते हुए कहा कि ईरान इसका कुछ नहीं कर सकता। ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर किए जाने का दावा भी किया और तेहरान पर महंगाई व केवल बयानबाजी करने का आरोप लगाया।

    राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के तुरंत बाद ईरान ने उन्हें खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज अभी भी बंद है और ईरान की शर्तें स्वीकार होने तक इसे नहीं खोला जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार किए जा रहे दावे वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकते। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। मौजूदा तनाव के बीच नौसैनिक गश्त बढ़ाई गई है, कई वाणिज्यिक जहाजों ने अपने मार्गों में बदलाव किया है।

  • मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष हमलावर, पत्र लिखने के समय को लेकर उठाए सवाल

    मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष हमलावर, पत्र लिखने के समय को लेकर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । मॉनसून सत्र के आखिरी दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सदन में बयान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। विपक्ष लगातार मांग करता रहा है कि गृहमंत्री सदन में आकर संबंधित मुद्दों पर अपना पक्ष रखें। इसी बीच अमित शाह की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात सामने आने के बाद भी विपक्ष का रुख नरम नहीं हुआ है।

    समाजवादी पार्टी के नेताओं ने गृहमंत्री के रुख और सदन में बयान देने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि विपक्ष लगातार अमित शाह के सदन में आने की मांग करता रहा है, लेकिन अब तक वह सदन में नहीं आए। उन्होंने कहा कि सत्र का अंतिम दिन है और सदन की कार्यवाही भी बार-बार स्थगित हो रही है।

    अवधेश प्रसाद ने सवाल उठाया कि यदि गृहमंत्री को बयान देना था तो उन्हें सदन में आने में क्या परेशानी थी। उनके मुताबिक विपक्ष की मांग लगातार बनी रही, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई।

    सपा सांसद राम गोपाल यादव ने भी गृहमंत्री के बयान को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री बयान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष से पहले सवाल लिखित रूप में देने को कहा गया है। उनके अनुसार संसद में सामान्य परंपरा यह रही है कि मंत्री सदन में बयान देते हैं और इसके बाद सांसद उनसे संबंधित विषयों पर स्पष्टीकरण मांगते हैं।

    कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी गृहमंत्री के पत्र लिखने के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब मॉनसून सत्र समाप्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है, तब 17वें दिन पत्र लिखे जाने का क्या उद्देश्य है। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृहमंत्री सदन में आने के बजाय घर से ही जवाब देना चाहते हैं।

    भगत ने कहा कि 19 दिन के सत्र में 17वें दिन पत्र लिखना अपने आप में सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रक्रिया के जरिए जनता और विपक्ष को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर सत्ता पक्ष की ओर से सदन में आगे क्या रुख अपनाया जाता है, यह कार्यवाही के दौरान स्पष्ट होगा।

    सपा नेता हरेंद्र सिंह मलिक ने इस दौरान राम मंदिर से जुड़े चंदा और चोरी के आरोपों का मुद्दा उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले को लेकर प्रदर्शन करेगी और इसे लोगों की आस्था तथा भावनाओं से जुड़ा विषय बताया।

    मॉनसून सत्र के अंतिम दिन अब सभी की नजर सदन की कार्यवाही पर है। विपक्ष गृहमंत्री के बयान और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। दूसरी ओर गृहमंत्री की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आखिरी दिन सदन में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है या राजनीतिक गतिरोध आगे भी जारी रहता है।

  • ट्रंप के बयान से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर से नीचे

    ट्रंप के बयान से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर से नीचे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ट्रंप ने संकेत दिए कि वह अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले रोकने का निर्देश देंगे और मध्य पूर्व में संघर्ष समाप्त करने की दिशा में समझौता करीब है। इसके बाद वैश्विक तेल बाजार में राहत देखने को मिली।

    ब्रेंट और अमेरिकी क्रूड दोनों सस्ते
    रविवार रात कारोबार के दौरान अमेरिकी WTI क्रूड करीब 5 प्रतिशत गिरकर 80.79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड भी लगभग 5 प्रतिशत लुढ़ककर 83.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 84 डॉलर के स्तर से नीचे है। हालांकि, मौजूदा कीमतें अब भी संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं।

    संघर्ष से बाजार में बना रहा उतार-चढ़ाव
    फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से तेल बाजार में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। इस दौरान कई बार कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी पहुंच गई थीं।

    संघर्ष थमने से सप्लाई सुधरने की उम्मीद
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव कम होता है, तो फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति सामान्य हो सकेगी। पिछले कई महीनों से संघर्ष के कारण तेल और अन्य सामान लेकर चलने वाले कई टैंकर प्रभावित हुए थे, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना रहा।

    महंगाई पर भी पड़ा था असर
    तेल की ऊंची कीमतों का असर दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF) की लागत पर पड़ा। कई देशों में ईंधन महंगा होने से परिवहन खर्च बढ़ा, हवाई किराए महंगे हुए और कुछ जगहों पर ईंधन की कमी के चलते राशनिंग जैसी व्यवस्था भी लागू करनी पड़ी।

    तेल कंपनियों को मिला फायदा
    ऊंची कीमतों के दौर में तेल और गैस कंपनियों को अच्छा मुनाफा हुआ। सप्लाई बाधित होने और परिवहन लागत बढ़ने से ईंधन की कीमतों में तेजी आई, जिसका लाभ ऊर्जा कंपनियों को मिला।

    भारत में तुरंत नहीं घटते पेट्रोल-डीजल के दाम
    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने का असर भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर तुरंत नहीं दिखता। यहां ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव, रुपये-डॉलर विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत और केंद्र व राज्यों के टैक्स जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। इसलिए वैश्विक बाजार में आई गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

  • प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं- "हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, अब रोने की जरूरत नहीं"

    प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं- "हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, अब रोने की जरूरत नहीं"

    नई दिल्ली। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में अपनी बात रखने वाले लोगों को आलोचना और प्रतिक्रिया का सामना करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए गए अपने संदेश में कंगना ने प्रदर्शनकारियों के व्यवहार, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

    कंगना रनौत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सड़कों पर जिन प्रदर्शनकारियों को आम लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, उसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर उनकी अभद्र और आपत्तिजनक सामग्री के कारण जनता में नाराजगी बढ़ी है। कंगना ने कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखता है, तो उसे दूसरों की प्रतिक्रिया सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने आगे लिखा कि यदि कोई सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो जनता भी उसके प्रति नाराजगी व्यक्त कर सकती है। कंगना के अनुसार यदि किसी को सरकार या देश की नीतियों से असहमति है और वह सार्वजनिक मंचों पर अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता है, तो उन लोगों को भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है जो देश और सरकार का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी राय रखने का समान अधिकार है।

    अपनी पोस्ट में कंगना ने न्यूटन के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए लिखा कि हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि यदि अब तक लोग कारण और प्रभाव के सिद्धांत को नहीं समझ पाए हैं, तो मौजूदा परिस्थितियां उन्हें यह बात अच्छी तरह समझा देंगी। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और समर्थक व आलोचक दोनों अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

    दरअसल, हाल के दिनों में छात्र आंदोलन और उससे जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। इन्हीं घटनाओं के संदर्भ में कंगना लगातार अपनी प्रतिक्रिया देती रही हैं। इससे पहले भी उन्होंने प्रदर्शनकारियों की भाषा और विरोध के तरीके पर सवाल उठाते हुए कई पोस्ट साझा किए थे। उन्होंने कुछ वायरल वीडियो का उल्लेख करते हुए प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की थी।

    कंगना ने इससे पहले एक अन्य पोस्ट में प्रदर्शनकारी युवाओं को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए लिखा था कि उन्होंने एक साथ इतनी अभद्रता पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने कुछ वीडियो को परेशान करने वाला बताते हुए युवाओं की भाषा, व्यवहार और परवरिश पर भी सवाल उठाए थे। उनके इन बयानों ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस को जन्म दिया था और विभिन्न वर्गों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

    भाजपा सांसद होने के साथ-साथ कंगना रनौत सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। उनके कई बयान पहले भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुके हैं। इस बार भी उनका ताजा बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हालांकि, इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों या संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर बृज भूषण ने लिया यू-टर्न, दी सफाई, बोले- भावनाएं आहत हुई हों तो क्षमा चाहता हूं

    हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर बृज भूषण ने लिया यू-टर्न, दी सफाई, बोले- भावनाएं आहत हुई हों तो क्षमा चाहता हूं


    गोंडा। हनुमानगढ़ी में नमाज को लेकर दिए गए बयान पर मचे राजनीतिक विवाद के बीच पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए क्षमा मांगने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का खंडन करना या उसका विरोध करना नहीं था।

    मुख्यमंत्री के बयान के बाद शुरू हुआ विवाद
    हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि सपा शासनकाल में हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाई गई थी। इसके बाद 17 जुलाई को गोंडा में मीडिया से बातचीत के दौरान बृज भूषण शरण सिंह ने कहा था कि वहां नमाज नहीं पढ़ी गई थी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई।

    सीढ़ियों और परिसर को लेकर दिया स्पष्टीकरण
    विवाद बढ़ने के बाद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि मीडिया ने उनसे विशेष रूप से यह सवाल किया था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी? इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें उसी समय यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए था कि सीढ़ियों पर नमाज नहीं हुई, लेकिन 52 बीघा परिसर, किसी संत के स्थान या परिसर के अन्य हिस्से में नमाज पढ़े जाने की बात अलग विषय है। यदि वह यह बात उसी समय जोड़ देते, तो शायद इतना विवाद पैदा नहीं होता।

    ‘मुख्यमंत्री की बात काटने का सवाल ही नहीं’
    पूर्व सांसद ने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का विरोध करना नहीं था। उन्होंने कहा, “अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो जैसी स्थिति बन गई है। एक तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान भी सही है, अयोध्या के संतों का बयान भी सही है और मेरा बयान भी सही है। मैंने सिर्फ इतना कहा था कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी।”

    भावनाएं आहत हुई हों तो मांगी माफी
    बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि यदि किसी को उनके बयान से ठेस पहुंची है या ऐसा लगा कि वह मुख्यमंत्री के बयान का विरोध कर रहे हैं, तो यह उनकी मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह क्षमा मांगने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

  • अफवाहों के बीच करणवीर बोहरा ने तोड़ी चुप्पी, बोले- निजी जीवन पर अभी नहीं करना चाहता कोई बात, काम पर है पूरा फोकस

    अफवाहों के बीच करणवीर बोहरा ने तोड़ी चुप्पी, बोले- निजी जीवन पर अभी नहीं करना चाहता कोई बात, काम पर है पूरा फोकस

    नई दिल्ली । टीवी अभिनेता करणवीर बोहरा ने पिछले कुछ समय से उनकी शादीशुदा जिंदगी को लेकर चल रही तलाक की चर्चाओं पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है। हालांकि उन्होंने इन अफवाहों पर विस्तार से बोलने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि वह फिलहाल अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं बनाना चाहते। अभिनेता ने कहा कि जब वह किसी मुद्दे पर बात नहीं करना चाहते तो सम्मानपूर्वक मना कर देते हैं और उन्हें उम्मीद है कि लोग भी उनकी निजता का सम्मान करेंगे।

    करणवीर बोहरा और उनकी पत्नी तीजय सिद्धू को लंबे समय से टेलीविजन इंडस्ट्री के चर्चित और लोकप्रिय कपल्स में गिना जाता है। पिछले कुछ महीनों से दोनों के रिश्ते को लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में सामने आ रही थीं। इन खबरों के बीच पहली बार करणवीर ने अपनी चुप्पी तोड़ी, लेकिन उन्होंने किसी भी अफवाह की पुष्टि या खंडन करने के बजाय अपनी निजी सीमाओं का सम्मान करने की अपील की।

    अभिनेता ने सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और नकारात्मक टिप्पणियों पर भी अपनी राय साझा की। उनका कहना था कि वह किसी भी नकारात्मक बात को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। इंटरनेट पर लोग क्या लिखते हैं, उससे वह मानसिक रूप से प्रभावित नहीं होते। उनके अनुसार हर व्यक्ति की अपनी राय हो सकती है, लेकिन उसका असर अपने काम और जीवन पर नहीं पड़ने देना चाहिए। उन्होंने सकारात्मक सोच बनाए रखने को सबसे महत्वपूर्ण बताया।

    करणवीर ने अपने पेशेवर सफर को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया है और अब केवल अभिनय तक सीमित रहने के बजाय निर्माण और निर्देशन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनका मानना है कि मनोरंजन उद्योग लगातार बदल रहा है और कलाकारों को समय के साथ अपनी भूमिका का विस्तार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल अभिनय के भरोसे पूरा करियर नहीं चलाया जा सकता, इसलिए नए अवसरों और नए माध्यमों को अपनाना जरूरी है।

    उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उनके करियर के दौरान उन्हें टेलीविजन के दो बड़े और लोकप्रिय शो ऑफर हुए थे, लेकिन उस समय दूसरी परियोजनाओं में व्यस्त होने के कारण वह उनका हिस्सा नहीं बन सके। अभिनेता ने स्वीकार किया कि आज भी उन्हें इस बात का अफसोस होता है कि वह उन चर्चित धारावाहिकों में काम नहीं कर पाए। हालांकि उनका मानना है कि हर कलाकार के करियर में ऐसे अवसर आते हैं, जिन्हें परिस्थितियों के कारण छोड़ना पड़ता है।

    करणवीर बोहरा ने यह भी कहा कि रियलिटी शोज ने उनके व्यक्तित्व को दर्शकों के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों ने उन्हें केवल एक अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक पिता, दोस्त और सामान्य इंसान के रूप में भी जाना। यही वजह है कि दर्शकों के साथ उनका जुड़ाव पहले से अधिक मजबूत हुआ है।

    करणवीर बोहरा और तीजय सिद्धू की प्रेम कहानी भी लंबे समय से चर्चा में रही है। दोनों की मुलाकात एक साझा मित्र के माध्यम से हुई थी, जिसके बाद दोस्ती प्यार में बदली और वर्ष 2006 में दोनों ने विवाह कर लिया। आज यह दंपति तीन बेटियों के माता-पिता हैं। हालिया अफवाहों के बीच करणवीर की प्रतिक्रिया ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल अपने निजी जीवन से अधिक अपने काम और परिवार की गरिमा बनाए रखने पर ध्यान देना चाहते हैं।

  • 'भारत आकर लगा जैसे अपने घर में हूं, हमारा डीएनए एक जैसा है', अफगान मंत्री ने की भारत की तारीफ

    'भारत आकर लगा जैसे अपने घर में हूं, हमारा डीएनए एक जैसा है', अफगान मंत्री ने की भारत की तारीफ


    नई दिल्ली। भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई एवं पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने नई दिल्ली में आयोजित एक व्यापारिक कार्यक्रम के दौरान भारत के आतिथ्य और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत पहुंचने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह अपने ही देश और अपने लोगों के बीच हों। साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि “हमारा डीएनए एक है।”

    मौलवी अताउल्लाह ओमारी पहली बार भारत की यात्रा पर आए हैं। विदेश मंत्रालय के सहयोग से PHDCCI द्वारा आयोजित भारत-अफगानिस्तान व्यापार अवसर उद्योग इंटरैक्टिव सेशन में उन्होंने कहा कि भारत सरकार, विदेश मंत्री और यहां के लोगों ने उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके अनुसार यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे अफगानिस्तान के लोगों के लिए सकारात्मक संदेश है।

    भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर दिया जोर
    अपने संबोधन में ओमारी ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि भारत में उन्हें अपनापन महसूस हुआ और दोनों देशों के लोगों के बीच गहरा जुड़ाव दिखाई देता है। उनके अनुसार यह रिश्ते भविष्य में भी सहयोग को नई मजबूती दे सकते हैं।

    कृषि क्षेत्र में भारत से मांगा सहयोग
    अफगान मंत्री ने कहा कि उनके देश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि, पशुपालन और सिंचाई पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान अपने कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ना चाहता है और इस दिशा में भारत की विशेषज्ञता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

    संयुक्त समिति की बैठक के बाद आया बयान
    ओमारी का यह बयान भारत और अफगानिस्तान के बीच संयुक्त समिति की चौथी बैठक के अगले दिन सामने आया। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. आनंद प्रकाश और अफगानिस्तान की ओर से विदेश मंत्रालय के महानिदेशक शुएब बयारलाई ने की।

    कई अहम क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा
    विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में मानवीय सहायता, विकास साझेदारी, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, खेल, व्यापार, वीजा सुविधा और क्षेत्रीय संपर्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत ने दोहराया कि वह अफगानिस्तान के विकास और वहां के लोगों के कल्याण के लिए सहयोग जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • E20 विवाद के बीच नितिन गडकरी का जवाब, बताई एथनॉल कारोबार में अपनी हिस्सेदारी

    E20 विवाद के बीच नितिन गडकरी का जवाब, बताई एथनॉल कारोबार में अपनी हिस्सेदारी


    नई दिल्ली। E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि एथनॉल उत्पादन में उनकी हिस्सेदारी बेहद मामूली है और इससे उन्हें कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि एथनॉल प्रोडक्शन में उनकी हिस्सेदारी केवल 0.07 प्रतिशत है।

    गडकरी ने कहा, “एथनॉल पॉलिसी से मुझे कोई फायदा नहीं मिल रहा है। इतनी छोटी हिस्सेदारी के आधार पर किसी बड़े आर्थिक लाभ की बात करना सही नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह आरोप पूरी तरह निराधार है कि एथनॉल नीति उनके निजी हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

    किसानों को फायदा पहुंचाने का दावा
    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह केवल एथनॉल ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल के समर्थक रहे हैं। उन्होंने कहा कि एथनॉल के बढ़ते उपयोग से किसानों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि एथनॉल नीति किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं था। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पेट्रोलियम मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रिमंडल और वैज्ञानिक शोध की प्रक्रिया के बाद लिया गया है।

    परिवार की कंपनियों पर भी दी सफाई
    गडकरी ने उन आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके परिवार से जुड़ी कंपनियां एथनॉल उत्पादन में शामिल हैं और इसी वजह से वह E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें जरूर हैं, लेकिन उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं।

    मक्के से एथनॉल उत्पादन से किसानों को लाभ का दावा
    गडकरी ने कहा कि देश में एथनॉल की उपलब्धता बढ़ी है और मक्के से एथनॉल बनाने के फैसले का फायदा किसानों को मिला है। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को करीब 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है।

    उन्होंने बताया कि मक्के से एथनॉल उत्पादन का फैसला लेने से पहले मक्के की बाजार कीमत करीब 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,800 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके बाद मक्के की कीमत बढ़कर करीब 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई।

    E20 पेट्रोल पर दिया था चैलेंज
    इससे पहले गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा था कि इसके कारण किसी वाहन में खराबी आने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि अगर किसी कार में E20 पेट्रोल से समस्या आई है तो उसका उदाहरण बताया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिक एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और इसके पीछे एक अभियान चलाया जा रहा है।

    ISMA ने भी दावों को बताया गलत
    भारतीय चीनी एवं जैव ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) ने भी E20 पेट्रोल को लेकर किए जा रहे कुछ दावों को गलत और भ्रामक बताया है। संगठन ने कहा कि E20 से गाड़ियों को नुकसान, बीमा अमान्य होने या ईंधन में सीधे गन्ने का रस मिलाने जैसे दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत का एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक परीक्षणों, निगरानी और विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें पेट्रोलियम कंपनियों, वाहन निर्माताओं और ईंधन जांच एजेंसियों की भूमिका शामिल है।

  • दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल

    दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उज्जैन की एक जमीन से जुड़े मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों पर सवाल उठाने के बाद जहां भाजपा नेताओं ने दिग्विजय सिंह की खुले तौर पर सराहना की, वहीं कांग्रेस के भीतर उनके बयान को लेकर असहजता और विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे।

    वीर भारत न्यास की जमीन से शुरू हुआ विवाद
    पूरा विवाद 24 जून को उस समय शुरू हुआ, जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन ‘वीर भारत न्यास’ को मात्र एक रुपये में आवंटित कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी इस ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं और आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    दिग्विजय सिंह ने दस्तावेजों का हवाला देकर रखा अलग पक्ष
    कुछ दिनों बाद उज्जैन दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार संबंधित जमीन किसी निजी ट्रस्ट को नहीं, बल्कि एक सरकारी ट्रस्ट को दी गई थी।

    उन्होंने कहा कि वह किसी भी विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करते हैं। उनके अनुसार संबंधित ट्रस्ट का पदेन अध्यक्ष राज्य का मुख्यमंत्री होता है, इसलिए इसे निजी ट्रस्ट कहना सही नहीं है।

    इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए आरोप लगाने वाले लोगों की कमी नहीं है। बाद में इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई।

    भाजपा विधायक से मिली थी शुरुआती जानकारी
    बड़वानी में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने बताया कि जिस जानकारी के आधार पर विवाद खड़ा हुआ, वही जानकारी उन्हें भी एक भाजपा विधायक और स्थानीय अखबार के माध्यम से मिली थी। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें पता चला कि संबंधित ट्रस्ट सरकारी स्वरूप का है, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा।

    भाजपा नेताओं ने की सराहना
    दिग्विजय सिंह के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने उनकी तथ्य आधारित टिप्पणी की प्रशंसा की। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि झूठ ज्यादा समय तक नहीं टिकता और दावा किया कि कांग्रेस के आरोपों को उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता ने तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया।

    भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने भी कहा कि सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है और दिग्विजय सिंह ने यही किया।

    इतना ही नहीं, भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने उनकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए उन्हें भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण भी दे डाला। उन्होंने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह भाजपा में आते हैं तो उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाएगा।

    कांग्रेस के भीतर उठे विरोध के स्वर
    दूसरी ओर, कांग्रेस के अंदर इस बयान को लेकर असहमति सामने आई। पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर आपत्ति थी तो उन्हें यह बात सार्वजनिक मंच की बजाय पार्टी के भीतर उठानी चाहिए थी।

    वहीं, कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि कांग्रेस आखिर कब “दिग्विजय सिंह के नागपाश” से मुक्त होगी।

    साथ आए दिग्विजय और पटवारी, कहा- पार्टी एकजुट
    बढ़ते विवाद के बीच मंगलवार शाम दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी संयुक्त रूप से मीडिया के सामने आए। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार से जुड़े कथित भूमि मामलों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर पूरी तरह एकजुट होकर संघर्ष कर रही है।

    इस दौरान दिग्विजय सिंह ने अपनी ‘दलाल’ वाली टिप्पणी पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस के किसी नेता, विशेषकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, के लिए इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी उनके लिए पुत्र समान हैं और पार्टी में लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान उन्होंने कभी अपने किसी सहयोगी के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया।