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  • Su-57D स्टील्थ जेट: रूस का नया दो-सीट फाइटर, भविष्य के युद्धों में बन सकता है फ्लाइंग कमांड सेंटर

    Su-57D स्टील्थ जेट: रूस का नया दो-सीट फाइटर, भविष्य के युद्धों में बन सकता है फ्लाइंग कमांड सेंटर




    नई दिल्ली। रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने नए Su-57D दो-सीट स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। यह विमान 19 मई को अपनी पहली उड़ान भर चुका है और इसे भविष्य के युद्धों में एक मल्टी-रोल एयरबोर्न कमांड सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के बीच इस विमान को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है, खासकर भारत की संभावित जरूरतों के संदर्भ में।

    दूसरा पायलट बनेगा “कमांड पोस्ट”
    पायलट सर्गेई बोगदान के अनुसार Su-57D का सबसे महत्वपूर्ण फीचर इसका ट्विन-सीट कॉन्फिगरेशन है। इसमें दूसरा पायलट केवल सह-उड़ान नहीं करेगा, बल्कि हवा में रहते हुए पूरे मिशन का कमांड और कंट्रोल संभाल सकता है। यह स्थिति खासकर बड़े सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण होगी, जहां ग्राउंड कम्युनिकेशन बाधित होने की संभावना रहती है।

    उन्होंने बताया कि यदि रेडियो या नेटवर्क कम्युनिकेशन में बाधा आती है, तो अनुभवी पायलट हवा में ही निर्णय लेकर ऑपरेशन को आगे बढ़ा सकता है, जिससे मिशन की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

    ड्रोन और AI नेटवर्क से लैस क्षमता
    Su-57D को केवल फाइटर जेट नहीं बल्कि एक नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। इसमें एडवांस एआई और ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन सिस्टम को कंट्रोल करने की क्षमता विकसित की जा रही है। यह जेट दुश्मन के रडार को जाम करने और स्टील्थ ड्रोन स्क्वाड्रन को गाइड करने में सक्षम बताया जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में युद्ध के स्वरूप को बदल सकती है, जहां एक ही विमान कई ड्रोन और यूनिट्स को नियंत्रित करेगा।

    भारत के संदर्भ में रणनीतिक अहमियत
    रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि Su-57D भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर लद्दाख और तवांग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में। यहां चीन द्वारा तैनात एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने के लिए ऐसे एयरबोर्न कमांड प्लेटफॉर्म की आवश्यकता मानी जाती है।

    यह विमान भारतीय स्वदेशी CATS (Combat Air Teaming System) और ‘वारियर’ ड्रोन प्रोजेक्ट के साथ इंटीग्रेट होकर एक मजबूत नेटवर्क वॉरफेयर क्षमता दे सकता है।

    चीन की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा
    चीन पहले से ही दो-सीट 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट और ड्रोन-आधारित नेटवर्क वॉरफेयर पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इसी तरह की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

    FGFA प्रोजेक्ट और आगे की चर्चा
    भारत और रूस ने पहले FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोजेक्ट पर मिलकर काम शुरू किया था, जिसमें ट्विन-सीट स्टील्थ जेट की मांग भी शामिल थी। हालांकि 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया था। अब Su-57D के परीक्षण के बाद एक बार फिर इस प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

  • Su-57D फाइटर जेट: रूस का नया दो-सीट स्टील्थ विमान, भारत के लिए क्यों माना जा रहा है संभावित गेमचेंजर

    Su-57D फाइटर जेट: रूस का नया दो-सीट स्टील्थ विमान, भारत के लिए क्यों माना जा रहा है संभावित गेमचेंजर


    नई दिल्ली। रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने Su-57D दो-सीट स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। इस विमान ने 19 मई को अपनी पहली उड़ान भरी है और इसे भविष्य के युद्धों में कमांड और कंट्रोल क्षमता वाला एक एडवांस प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है।

    पायलट के अनुसार, Su-57D में दूसरा कॉकपिट केवल सह-पायलट के लिए नहीं बल्कि एक ऐसे कमांडर के लिए है जो हवा में रहते हुए पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित कर सकता है। यह विमान युद्ध के दौरान कम्युनिकेशन बाधित होने पर भी मिशन को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने में सक्षम माना जा रहा है।

    एयरबोर्न कमांड सेंटर की तरह काम करेगा विमान
    Su-57D को केवल फाइटर जेट नहीं बल्कि एक फ्लाइंग कमांड सेंटर के रूप में देखा जा रहा है, जो ड्रोन और अन्य युद्ध प्रणालियों को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। इसे ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन नेटवर्क के साथ जोड़कर बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।

    रूसी विशेषज्ञों का दावा है कि यह जेट भविष्य में जटिल मिशनों में तेजी से निर्णय लेने और दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को बाधित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    भारत के संदर्भ में रणनीतिक महत्व
    रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह विमान भारतीय वायुसेना के साथ जुड़ता है तो लद्दाख और तवांग जैसे संवेदनशील इलाकों में चीनी एयर डिफेंस सिस्टम के खिलाफ गहरे हमलों में मदद मिल सकती है। यह भारतीय स्वदेशी ड्रोन प्रोजेक्ट CATS के साथ भी इंटीग्रेट होकर नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता को मजबूत कर सकता है।हालांकि भारत पहले ही रूस के FGFA प्रोजेक्ट से बाहर हो चुका है, लेकिन दो-सीट Su-57D के आने के बाद रक्षा हलकों में एक बार फिर इस प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    चीन की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा
    चीन पहले से ही दो-सीट 5th जनरेशन फाइटर और ड्रोन-नेटवर्क आधारित एयर वॉरफेयर सिस्टम पर काम कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इसी तरह की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि तिब्बत क्षेत्र में किसी भी रणनीतिक चुनौती का जवाब दिया जा सके।

  • F-47 Jet: अमेरिका का सबसे एडवांस और महंगा फाइटर जेट हो रहा तैयार, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

    F-47 Jet: अमेरिका का सबसे एडवांस और महंगा फाइटर जेट हो रहा तैयार, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश


    नई दिल्ली । दुनियाभर में बदलते सामरिक हालात और बढ़ते एरियल थ्रेट के बीच आधुनिक फाइटर जेट्स की रेस और तेज हो गई है। लंबी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन तकनीक ने सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना दिया है, जिसके चलते कई देश नई पीढ़ी के एयर डिफेंस सिस्टम और फाइटर एयरक्राफ्ट विकसित कर रहे हैं। भारत का ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ और अमेरिका का ‘गोल्डन डोम’ इसी दिशा में बड़े प्रयास माने जा रहे हैं।

    6th जेनरेशन फाइटर जेट पर फोकस

    इसी बदलाव के बीच अब छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर दुनिया का ध्यान केंद्रित हो गया है। यूरोप, भारत और अमेरिका सभी अपने-अपने एडवांस एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। भारत ने जहां AMCA प्रोजेक्ट शुरू किया है, वहीं अमेरिका ने अपने नए फाइटर जेट प्रोग्राम के तहत Boeing को बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया है। अमेरिका के इस नए फाइटर जेट का नाम F-47 रखा गया है, जिसे F-22 Raptor का अगला और ज्यादा एडवांस संस्करण माना जा रहा है।

    कीमत ने उड़ाए होश

    F-47 को दुनिया का सबसे महंगा फाइटर जेट बताया जा रहा है। इसकी प्रति यूनिट कीमत करीब 300 मिलियन डॉलर (लगभग 3000 करोड़ रुपये) आंकी गई है। यह F-35 की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा महंगा है। इस कीमत में लगभग 4 से 5 हल्के लड़ाकू विमान HAL Tejas खरीदे जा सकते हैं, जिसकी एक यूनिट लागत करीब 600–650 करोड़ रुपये बताई जाती है।

    F-47 को केवल एक लड़ाकू विमान नहीं बल्कि डिजिटल क्वार्टरबैक की तरह डिजाइन किया जा रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑल-एंगल स्टील्थ और एडवांस मिशन सिस्टम जैसी तकनीकें शामिल होंगी। यह विमान मानव रहित ड्रोन (CCA) के साथ मिलकर काम करेगा और पूरे नेटवर्क सेंट्रिक युद्ध संचालन का नेतृत्व करेगा।

    भारी-भरकम बजट खर्च

    इस प्रोजेक्ट पर अब तक अरबों डॉलर खर्च किए जा चुके हैं और आने वाले वर्षों में इसमें और तेजी लाई जा रही है। अमेरिकी वायुसेना का लक्ष्य 185 से अधिक F-47 विमान तैयार करने का है, जो F-22 बेड़े के बराबर होंगे। हालांकि, इस परियोजना को फंडिंग और अन्य रक्षा कार्यक्रमों से प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।

    F-22 की विरासत और आगे की रणनीति

    F-47 को F-22 की तकनीकी विरासत को आगे बढ़ाने वाला विमान माना जा रहा है, लेकिन इसकी भूमिका और भी व्यापक होगी। यह अकेले लड़ाई लड़ने के बजाय ड्रोन और अन्य सिस्टम के साथ मिलकर एक समन्वित युद्ध नेटवर्क का हिस्सा होगा।

    वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज

    एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा और चीन जैसे देशों द्वारा छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर काम करने के चलते अमेरिका इस प्रोजेक्ट को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है।