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  • शानदार शुरुआत के बाद शेयर बाजार में बिकवाली, IT और ऑटो शेयरों की कमजोरी से सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

    शानदार शुरुआत के बाद शेयर बाजार में बिकवाली, IT और ऑटो शेयरों की कमजोरी से सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की, लेकिन कारोबार के अंतिम चरण में तेज बिकवाली के चलते प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों की मुनाफावसूली, आईटी और ऑटो शेयरों में कमजोरी तथा बाजार में बढ़ी अस्थिरता ने दिनभर की बढ़त को पूरी तरह खत्म कर दिया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 372.10 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,728.37 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 109.75 अंक यानी 0.46 प्रतिशत टूटकर 23,946.25 अंक पर आ गया। दिनभर के कारोबार में गिरावट वाले शेयरों की संख्या बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों से अधिक रही, जिससे बाजार में व्यापक बिकवाली का संकेत मिला।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में लगातार तेजी देखने को मिली थी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और विदेशी निवेशकों की संभावित खरीदारी से बाजार पहले ही ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका था। ऐसे में निवेशकों ने ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली करना उचित समझा, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया।

    दिन की गिरावट में आईटी और ऑटो सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जबकि ऑटो सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में खरीदारी का रुख बना रहा, लेकिन यह तेजी पूरे बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही।

    तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,100 से 24,250 अंक का दायरा फिलहाल मजबूत प्रतिरोध स्तर बना हुआ है। बाजार इस स्तर को पार करने में सफल नहीं हो सका, जिसके बाद बिकवाली तेज हो गई। अब 24,000 और 23,800 अंक के स्तर को निकट भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है।

    इस दौरान बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX भी करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 13.88 के आसपास पहुंच गया। आमतौर पर VIX में बढ़ोतरी आने वाले समय में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देती है। यही वजह रही कि कई निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए अपने निवेश में मुनाफावसूली की।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निफ्टी 24,100 के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर बनी रहेगी।

  • शेयर बाजार जून अपडेट: ग्लोबल संकेतों के बीच उतार-चढ़ाव, निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी

    शेयर बाजार जून अपडेट: ग्लोबल संकेतों के बीच उतार-चढ़ाव, निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी


    नई दिल्ली । 5 जून को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मिलाजुली और अस्थिर (Volatile) रहने की संभावना जताई जा रही है। ग्लोबल मार्केट के संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों के चलते बाजार में दिनभर हलचल देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सीमित दायरे में रह सकते हैं, जहां तेजी और गिरावट दोनों ही स्थितियां देखने को मिलेंगी। शुरुआती ट्रेडिंग में निवेशकों की नजरें वैश्विक बाजारों और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर टिकी रहेंगी।

    ग्लोबल संकेत तय करेंगे बाजार की दिशा
    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हो रहे बदलाव भारतीय बाजार पर सीधा असर डाल सकते हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों के रुख के आधार पर आज सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय होगी। अगर वैश्विक बाजार सकारात्मक रहते हैं तो भारतीय बाजार को समर्थन मिल सकता है, वहीं कमजोरी की स्थिति में दबाव देखने को मिल सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी या गिरावट भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगा। तेल महंगा होने पर महंगाई की आशंका बढ़ती है, जिसका असर ऑटो और पेंट जैसे सेक्टरों पर पड़ सकता है।

    FII-DII की चाल से तय होगा मू
    विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीद-बिक्री भी आज के बाजार की दिशा को प्रभावित करेगी। हाल के दिनों में FII की गतिविधियां अस्थिर रही हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अगर FII की ओर से खरीदारी बढ़ती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है, जबकि बिकवाली दबाव बना सकती है। DII की स्थिर खरीदारी बाजार को सपोर्ट देने का काम कर सकती है।

    सेक्टोरल मूवमेंट में दिख सकती है तेजी और कमजोरी
    आज के सत्र में सेक्टोरल मूवमेंट महत्वपूर्ण रहेगा। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में अलग-अलग रुझान देखने को मिल सकते हैं। बैंकिंग सेक्टर में हल्की मजबूती की उम्मीद है, जबकि आईटी सेक्टर ग्लोबल संकेतों पर अधिक निर्भर रहेगा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सावधानी के साथ ट्रेडिंग करने की सलाह दी जा रही है।

    निवेशकों के लिए सलाह
    विशेषज्ञों का कहना है कि आज का दिन शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और स्टॉप लॉस का उपयोग करने की सलाह दी गई है। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह उतार-चढ़ाव अवसर भी प्रदान कर सकता है, लेकिन चयन सोच-समझकर करना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर 5 जून को शेयर बाजार में मिश्रित रुझान और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ग्लोबल संकेतों और निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की पूरी दिशा निर्भर करेगी। सतर्क रणनीति ही आज के दिन सफलता की कुंजी होगी।

  • Suzlon Energy को मिला बड़ा विंड एनर्जी ऑर्डर, शेयर में तेजी, ऑर्डर बुक और मजबूत हुई

    Suzlon Energy को मिला बड़ा विंड एनर्जी ऑर्डर, शेयर में तेजी, ऑर्डर बुक और मजबूत हुई


    नई दिल्ली। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी एक बार फिर बाजार में चर्चा का केंद्र बन गई है। कंपनी को हाल ही में सनश्योर एनर्जी से 195 मेगावाट क्षमता वाले विंड एनर्जी उपकरणों की सप्लाई और इंस्टॉलेशन का नया ऑर्डर मिला है। इस खबर के सामने आने के बाद कंपनी के शेयरों में हल्की लेकिन स्पष्ट तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी एक बार फिर इस स्टॉक की ओर बढ़ी है।

    बाजार में यह भी ध्यान देने योग्य रहा कि सुजलॉन एनर्जी का स्टॉक अपने 52 हफ्तों के उच्च स्तर से करीब 28 प्रतिशत नीचे चल रहा था, ऐसे में इस नए ऑर्डर ने निवेशकों के बीच सकारात्मक संकेत दिए हैं। ट्रेडिंग के दौरान शेयर ने इंट्राडे स्तर पर मजबूती दिखाते हुए लगभग 53 रुपये से ऊपर का स्तर छुआ। यह तेजी संकेत देती है कि बाजार फिलहाल कंपनी के दीर्घकालिक ऑर्डर पाइपलाइन और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में उसकी मजबूत पकड़ को लेकर आशावादी नजर आ रहा है।

    कंपनी को मिले इस नए ऑर्डर के तहत 65 विंड टर्बाइन जनरेटर की सप्लाई और इंस्टॉलेशन किया जाएगा। प्रत्येक टरबाइन की क्षमता 3 मेगावाट निर्धारित की गई है। इस पूरे प्रोजेक्ट को कर्नाटक के बीजापुर जिले में स्थापित किया जाएगा, जो राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस ऑर्डर के जुड़ने के बाद कंपनी की 3 मेगावाट टर्बाइन प्लेटफॉर्म से कुल बिक्री लगभग 9 गीगावाट तक पहुंच चुकी है, जो कंपनी की तकनीकी और व्यावसायिक क्षमता को मजबूत दर्शाती है।

    सुजलॉन एनर्जी की मौजूदा ऑर्डर बुक में भी लगातार सुधार देखा जा रहा है। विशेष रूप से कर्नाटक राज्य कंपनी के लिए एक प्रमुख बाजार के रूप में उभर रहा है, जहां कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 2 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा, कंपनी कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है, जिनमें कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए कुल 664 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट शामिल हैं। यह दर्शाता है कि कंपनी केवल सरकारी या बड़े प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी क्षेत्र में भी उसकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।

    कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के अनुसार, देश में विंड एनर्जी की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर उन कंपनियों के बीच जो चौबीसों घंटे स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा की तलाश में हैं। बड़े औद्योगिक ग्राहक अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के बजाय रिन्यूएबल विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे इस सेक्टर में ग्रोथ के नए अवसर बन रहे हैं।

    सनश्योर एनर्जी, जो इस ऑर्डर देने वाली कंपनी है, भारत में एक प्रमुख स्वतंत्र बिजली उत्पादक के रूप में काम करती है। कंपनी की स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी और यह विभिन्न कॉरपोरेट ग्राहकों को लॉन्ग टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट के माध्यम से रिन्यूएबल एनर्जी उपलब्ध कराती है। यह मॉडल उद्योगों को स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करने में मदद करता है।

    कुल मिलाकर, सुजलॉन एनर्जी को मिला यह नया ऑर्डर कंपनी के लिए केवल एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं बल्कि बाजार में उसके भविष्य को लेकर भरोसे का संकेत भी माना जा रहा है। आने वाले समय में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बढ़ती मांग के बीच कंपनी की स्थिति और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

  • .मल्टीबैगर स्टॉक बना निवेशकों की लॉटरी, 3 साल में 2400% रिटर्न के बाद अब बोनस शेयर का बड़ा ऐलान

    .मल्टीबैगर स्टॉक बना निवेशकों की लॉटरी, 3 साल में 2400% रिटर्न के बाद अब बोनस शेयर का बड़ा ऐलान

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में एक बार फिर मल्टीबैगर स्टॉक्स ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। स्मॉलकैप कैटेगरी की एक कंपनी वी-मार्क इंडिया ने हाल ही में ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने निवेशकों को चौंका दिया है। कंपनी ने 5:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करने का फैसला लिया है, जिसके बाद इसके शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली और यह करीब 11 प्रतिशत तक उछल गया।

    बोनस शेयर का मतलब यह है कि जिन निवेशकों के पास कंपनी का एक शेयर होगा, उन्हें अतिरिक्त पांच शेयर मुफ्त में दिए जाएंगे। इस फैसले से बाजार में सकारात्मक माहौल बना और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ गई। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी शेयरधारकों की मंजूरी मिलना बाकी है।

    इस कंपनी की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टीबैगर रिटर्न है। पिछले तीन वर्षों में इस स्टॉक ने लगभग 2400 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, यानी निवेशकों की पूंजी कई गुना बढ़ चुकी है। अगर किसी ने कुछ साल पहले इसमें निवेश किया होता, तो उसकी रकम आज कई गुना ज्यादा हो सकती थी। यही कारण है कि यह स्टॉक लगातार चर्चा में बना हुआ है।

    कंपनी वायर और केबल निर्माण के क्षेत्र में काम करती है और इसका उपयोग पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में बड़े पैमाने पर होता है। इसके उत्पादों की मांग सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में बनी रहती है, जिससे इसका बिजनेस लगातार मजबूत हो रहा है।

    बीते कुछ वर्षों में कंपनी के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया है। एक साल के भीतर भी इसमें कई गुना तेजी देखने को मिली है, जबकि एक महीने के अंदर भी इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया है। इस मजबूत प्रदर्शन ने इसे स्मॉलकैप से मल्टीबैगर स्टॉक की श्रेणी में ला दिया है।

    कंपनी का भविष्य विस्तार पर भी जोर है। आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों में विस्तार करने की योजना है। इसके साथ ही कंपनी का फोकस पावर ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल एनर्जी और निर्यात जैसे क्षेत्रों पर भी है।

    कुल मिलाकर यह स्टॉक उन निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है जो लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न की तलाश में रहते हैं। बोनस शेयर की घोषणा ने इसके प्रति बाजार की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।

  • सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम: शेयर बाजार की बड़ी गिरावट से निवेशकों में घबराहट

    सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम: शेयर बाजार की बड़ी गिरावट से निवेशकों में घबराहट


    नई दिल्ली।  घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को भारी उतार-चढ़ाव और बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कारोबारी सप्ताह के दूसरे दिन बाजार खुलते ही निवेशकों में हड़कंप मच गया। बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर में तेज बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बड़े नुकसान के साथ कारोबार करते नजर आए। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स सैकड़ों अंक टूट गया, जबकि निफ्टी भी अहम स्तर के नीचे फिसल गया।
    विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और आर्थिक अनिश्चितताओं का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। मिडिल ईस्ट तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने भी निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। इसके चलते निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया।
    बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। कई दिग्गज बैंकिंग स्टॉक्स लाल निशान में कारोबार करते रहे। आईटी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे टेक इंडेक्स पर असर पड़ा। मेटल और ऑटो सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि कुछ एफएमसीजी शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का मूड नकारात्मक बना रहा।
    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को बाजार की चाल पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
    इस गिरावट के चलते निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए। छोटे निवेशकों में सबसे ज्यादा बेचैनी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर भी बाजार की गिरावट को लेकर चर्चा तेज रही। कई निवेशकों ने इसे हाल के महीनों की बड़ी गिरावटों में से एक बताया।
  • L&T का धमाका: मुनाफा उछला, ₹38 प्रति शेयर डिविडेंड; ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर

    L&T का धमाका: मुनाफा उछला, ₹38 प्रति शेयर डिविडेंड; ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर


    नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से चर्चा में रही इंजीनियरिंग दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) ने अपने तिमाही और सालाना नतीजों से निवेशकों को खुश कर दिया है। कंपनी ने न सिर्फ मुनाफे में जबरदस्त बढ़त दर्ज की, बल्कि हर शेयर पर ₹38 के भारी-भरकम डिविडेंड का ऐलान भी किया है।

    कंपनी की ओर से जारी एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, L&T का ग्रुप ऑर्डर इनफ्लो 22% की बढ़त के साथ ₹4.35 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का साफ संकेत देता है।

    वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का समेकित राजस्व ₹82,762 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 11% ज्यादा है। खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार से ₹43,747 करोड़ की कमाई हुई, जो कुल राजस्व का 53% हिस्सा है।

    पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो कंपनी का Recurring PAT ₹17,238 करोड़ रहा, जिसमें सालाना आधार पर 18% की मजबूत बढ़त दर्ज की गई। वहीं, Consolidated PAT ₹16,084 करोड़ रहा। इसमें ₹1,155 करोड़ का एक बार का प्रावधान (Exceptional Item) शामिल है, जो नए श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों के लिए किया गया है।

    निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी डिविडेंड को लेकर आई है। L&T ने ₹2 फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹38 का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है, जो पिछले साल के ₹34 प्रति शेयर से ज्यादा है।

    कंपनी ने इसके लिए 22 मई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट अकाउंट में L&T के शेयर होंगे, उन्हें यह डिविडेंड मिलेगा। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद डिविडेंड का भुगतान 10 जून 2026 तक किया जा सकता है।

    कुल मिलाकर, मजबूत ऑर्डर बुक, बढ़ता मुनाफा और आकर्षक डिविडेंड—तीनों फैक्टर L&T को निवेशकों के लिए एक बार फिर चर्चा में ले आए हैं। बाजार के जानकार मानते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर में कंपनी की पकड़ आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।

  • मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान

    मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान


    नई दिल्ली। बुधवार सुबह 9:18 बजे भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला। सेंसेक्स 306 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,193 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 88 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,085 पर कारोबार करता नजर आया। वैश्विक संकेतों में सुधार और निवेशकों की मजबूत धारणा के चलते बाजार में शुरुआती खरीदारी हावी रही।

    डिफेंस और ऑटो सेक्टर बने बाजार के स्टार परफॉर्मर

    शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी डिफेंस और ऑटो सेक्टर में देखने को मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑटो इंडेक्स टॉप गेनर्स में रहे। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑयल एंड गैस, रियल्टी, FMCG, एनर्जी और फार्मा सेक्टर भी मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि दूसरी ओर मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसई सेक्टर में हल्की गिरावट देखने को मिली, जिससे बाजार में सेक्टोरल मिक्स ट्रेंड बना रहा।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी जारी

    बाजार में सिर्फ लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 149 अंक यानी 0.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,125 पर पहुंच गया।
    निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 208 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,628 पर कारोबार कर रहा था। इससे साफ है कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में मारुति सुजुकी, आईटीसी, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, एचयूएल, टीसीएस और एसबीआई जैसे शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। वहीं टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स और एचसीएल टेक में हल्का दबाव देखने को मिला।

    वैश्विक बाजारों और तेल की कीमतों का असर

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यूएई के ओपेक से बाहर होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों पर थोड़ा दबाव देखने को मिला है, हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव के कारण तेल अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी है, जिसका फैसला आज रात आने वाला है। यह निर्णय वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख

    एशियाई बाजारों में भी बुधवार को मजबूती देखने को मिली। शंघाई, हांगकांग, सोल, जकार्ता और बैंकॉक के बाजार हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि जापानी बाजार राष्ट्रीय अवकाश के कारण बंद रहे।

    अमेरिकी बाजारों में कमजोरी

    इसके विपरीत, अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स 0.05 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत देखने को मिले।

    कुल मिलाकर वैश्विक संकेतों और घरेलू खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की है। हालांकि निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेड के फैसले पर है, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है।

  • ब्रोकरेज ने जताया 64 रुपये के टारगेट का भरोसा; क्या अब मल्टीबैगर रिटर्न के लिए तैयार हैं निवेशक?

    ब्रोकरेज ने जताया 64 रुपये के टारगेट का भरोसा; क्या अब मल्टीबैगर रिटर्न के लिए तैयार हैं निवेशक?


    नई दिल्ली।विंड एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में हाल के दिनों में तेज रफ्तार देखने को मिली है। लगातार खरीदारी के चलते स्टॉक में मजबूत तेजी बनी हुई है और निवेशकों का रुझान इस ओर बढ़ा है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में शेयर में लगभग 20 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि एक महीने के भीतर इसमें करीब 28 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली है।

    हाल के कारोबारी सत्र में शेयर लगभग 53 रुपये के स्तर पर बंद हुआ, जिससे बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह आगे चलकर 64 रुपये के स्तर को पार कर सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी में आई यह तेजी केवल अल्पकालिक नहीं है, बल्कि इसके पीछे सेक्टर की मजबूत संभावनाएं भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

    ब्रोकरेज हाउस जेएम फाइनेंशियल ने सुजलॉन एनर्जी पर अपनी BUY रेटिंग को बरकरार रखते हुए अगले 12 महीनों के लिए 64 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा स्तर से शेयर में लगभग 30 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़त की संभावना बनी हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण भारत में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग और नवीकरणीय ऊर्जा पर सरकार का बढ़ता फोकस माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार विंड एनर्जी सेक्टर आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब सोलर और गैस आधारित ऊर्जा उत्पादन दिन के कुछ समय तक सीमित रहता है। शाम और रात के समय बिजली की मांग को पूरा करने में विंड एनर्जी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है, जिससे इस सेक्टर की कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

    सरकारी स्तर पर भी विंड एनर्जी क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट्स शुरू होने की संभावना है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और विस्तार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इससे कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत होने और उत्पादन क्षमता में सुधार की उम्मीद है।

    कंपनी के प्रदर्शन में हाल के समय में सुधार देखने को मिला है। प्रोजेक्ट्स के निष्पादन और डिलीवरी में तेजी आई है, जिससे पहले की तुलना में कामकाज अधिक सुचारू हुआ है। इससे कंपनी के कैश फ्लो में सुधार और नए ऑर्डर्स मिलने की संभावना भी बढ़ी है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सुजलॉन के शेयर की दिशा आगे चलकर पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की मांग, सरकारी नीतियों और वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि सेक्टर में मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो शेयर में आगे और मजबूती देखने को मिल सकती है।

  • वैश्विक तनावों के बीच लाल निशान में बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी 2% लुढ़के

    वैश्विक तनावों के बीच लाल निशान में बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी 2% लुढ़के


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिकी-ईरान युद्ध में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन लाल निशान में बंद हुआ। प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी50 दोनों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

    सेंसेक्स और निफ्टी की स्थिति
    सेंसेक्स: दिन के अंत में 1,690.23 अंक यानी 2.25% की गिरावट के साथ 73,583.22 पर बंद हुआ।
    निफ्टी50: 486.85 अंक यानी 2.09% की गिरावट के साथ 22,819.60 पर बंद हुआ।

    दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 74,883.79 पर खुलकर 1,736 अंक यानी 2.30% से अधिक गिरकर 73,534.41 के निचले स्तर को छुआ। वहीं निफ्टी50 23,173.55 से शुरू होकर 501 अंक यानी 2.15% गिरकर 22,804.55 तक पहुंच गया।

    व्यापक बाजार और सेक्टर प्रदर्शन
    निफ्टी मिडकैप: 2.23% की गिरावट
    निफ्टी स्मॉलकैप: 1.74% की गिरावट

    सबसे अधिक प्रभावित सेक्टर:

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSU) – 3.86% गिरावट
    निफ्टी रियल्टी – 3.17%
    निफ्टी ऑटो – 2.82%
    निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज – 2.69%
    निफ्टी प्राइवेट बैंक – 2.01%

    सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला सेक्टर:

    निफ्टी आईटी – केवल 0.44% की गिरावट
    शेयरों का दिनभर का प्रदर्शन

    सकारात्मक प्रदर्शन: केवल 6 कंपनियों में तेजी

    ओएनजीसी: +4.03%
    विप्रो: +1.22%
    भारती एयरटेल: +0.82%
    टीसीएस: +0.42%
    कोल इंडिया: +0.32%
    पावरग्रिड: +0.24%

    सबसे अधिक नुकसान:

    श्रीराम फाइनेंस: -5.54%
    टीएमपीवी: -4.92%
    रिलायंस: -4.61%
    इंडिगो: -4.48%
    बजाज फाइनेंस: -4.11%
    कुल बाजार पूंजीकरण और निवेशकों को नुकसान

    दिन के कारोबार में निवेशकों को लगभग 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 431 लाख करोड़ रुपए से घटकर 422 लाख करोड़ रुपए रह गया।

  • ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना हुआ महंगा Swiggy ने बढ़ाई डिलीवरी फीस..

    ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना हुआ महंगा Swiggy ने बढ़ाई डिलीवरी फीस..


    नई दिल्ली:फूड डिलीवरी सेक्टर में एक बार फिर कीमतों का बोझ बढ़ गया है। Swiggy ने अपने प्लेटफॉर्म पर लगने वाली फीस में बढ़ोतरी कर दी है जिससे अब ग्राहकों को हर ऑर्डर पर पहले से ज्यादा पैसे देने होंगे।

    कंपनी के अनुसार प्लेटफॉर्म फीस को बढ़ाकर अब 17.58 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया गया है जिसमें जीएसटी भी शामिल है। पहले यह फीस 14.99 रुपये थी। इस तरह करीब 2.59 रुपये यानी लगभग 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    स्विगी का कहना है कि यह बढ़ोतरी प्लेटफॉर्म के संचालन और रखरखाव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है। कंपनी लगातार अपने नेटवर्क को मजबूत करने और डिलीवरी अनुभव को बेहतर बनाने पर काम कर रही है जिसके चलते यह बदलाव किया गया है।

    यह पहली बार नहीं है जब स्विगी ने प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी कंपनी ने फीस बढ़ाकर 12 रुपये से करीब 14-15 रुपये के स्तर तक पहुंचा दिया था। अब एक बार फिर बढ़ोतरी ने ग्राहकों की जेब पर असर डालना शुरू कर दिया है।

    इसी तरह Zomato ने भी हाल ही में अपनी प्लेटफॉर्म फीस में इजाफा किया था। कंपनी ने फीस में करीब 19.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 12.5 रुपये से बढ़ाकर 14.90 रुपये कर दिया था। जीएसटी जोड़ने के बाद यह राशि करीब 17.58 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंच गई है।

    फूड डिलीवरी कंपनियों द्वारा यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि हुई है जिससे रेस्तरां की लागत बढ़ गई है। इससे पूरे फूड डिलीवरी इकोसिस्टम पर दबाव बढ़ा है और इसका असर ग्राहकों तक पहुंच रहा है।

    बाजार में इस खबर के बीच स्विगी के शेयरों में हल्की तेजी देखी गई। दोपहर 12:30 बजे कंपनी का शेयर करीब 2.55 प्रतिशत की बढ़त के साथ 279.55 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि पिछले कुछ समय में शेयर में गिरावट का रुख रहा है और बीते एक हफ्ते में यह 5 प्रतिशत से ज्यादा फिसल चुका है। वहीं एक महीने में करीब 10 प्रतिशत और पिछले छह महीनों में 36 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

    कुल मिलाकर फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती फीस ग्राहकों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये कंपनियां अपनी कीमतों को और बढ़ाती हैं या फिर प्रतिस्पर्धा के चलते कुछ राहत देती हैं।

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