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  • एचडीएफसी बैंक में बड़ा कदम इस्तीफे की जांच के लिए बाहरी लॉ फर्म की नियुक्ति

    एचडीएफसी बैंक में बड़ा कदम इस्तीफे की जांच के लिए बाहरी लॉ फर्म की नियुक्ति


    नई दिल्ली:HDFC Bank ने अपने पूर्व अंशकालिक अध्यक्ष और स्वतंत्र निदेशक अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने इस पूरे मामले की जांच के लिए बाहरी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनी फर्मों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। यह निर्णय बैंक के बोर्ड की 23 मार्च को हुई बैठक में लिया गया।

    बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस जांच का उद्देश्य इस्तीफे की परिस्थितियों को स्पष्ट करना और गवर्नेंस से जुड़े मानकों को और मजबूत बनाना है। कानूनी फर्मों को निर्देश दिया गया है कि वे चक्रवर्ती के इस्तीफा पत्र की गहराई से समीक्षा करें और एक तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

    गौरतलब है कि अतानु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे में उन्होंने संकेत दिया था कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थे। हालांकि उन्होंने किसी विशिष्ट घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया।

    बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा किसी गड़बड़ी या कदाचार के कारण नहीं बल्कि विचारधाराओं और दृष्टिकोण में मतभेद के चलते लिया गया है। वे वर्ष 2021 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे और अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल रहे।

    इस बीच Reserve Bank of India ने बैंक के संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने की मंजूरी दी है। उन्होंने यह संकेत भी दिया है कि चक्रवर्ती के जाने के बाद बैंक के संचालन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाहरी जांच का उद्देश्य केवल पारदर्शिता और मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस को सुनिश्चित करना है। यह कदम निवेशकों और ग्राहकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके साथ ही रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक ने अपने विदेशी कारोबार से जुड़े एनआरआई ग्राहकों को हाई-रिस्क एटी1 बॉन्ड की बिक्री के मामले में भी सख्त कार्रवाई की है। आंतरिक जांच के बाद बैंक ने तीन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

    शेयर बाजार में HDFC Bank के शेयर में हलचल देखने को मिली। मंगलवार दोपहर 12 बजे बैंक का शेयर 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 757.45 रुपये पर कारोबार कर रहा था। हालांकि बीते एक सप्ताह में शेयर में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

     यह मामला बैंक के भीतर गवर्नेंस और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है। बाहरी जांच के बाद आने वाली रिपोर्ट से ही इस पूरे प्रकरण पर और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

  • शेयर बाजार में जोरदार उछाल सेंसेक्स 1500 अंक उछला बैंक और डिफेंस स्टॉक्स चमके

    शेयर बाजार में जोरदार उछाल सेंसेक्स 1500 अंक उछला बैंक और डिफेंस स्टॉक्स चमके


    नई दिल्ली:मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूत शुरुआत की और निवेशकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। बाजार खुलते ही प्रमुख सूचकांकों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया।

    बेंचमार्क इंडेक्स SENSEX 1516.08 अंक यानी 2.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74212.47 के स्तर पर खुला। वहीं NIFTY 50 365.80 अंक यानी 1.62 प्रतिशत की तेजी के साथ 22878.45 पर पहुंच गया। इस तेजी ने पूरे बाजार में सकारात्मक माहौल बना दिया।

    शुरुआती कारोबार में लगभग सभी सेक्टर हरे निशान में नजर आए और चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। खासतौर पर निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे।

    लार्जकैप के साथ साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। NIFTY Midcap 100 करीब 772 अंक यानी 1.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ 53490 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं NIFTY Smallcap 100 भी 219 अंक यानी 1.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 15318 पर कारोबार करता नजर आया। इससे साफ है कि बाजार में केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि छोटे और मिड साइज कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    ब्रोकरेज हाउस चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल एनालिस्ट आकाश शाह के अनुसार निफ्टी फिलहाल अपने शॉर्ट टर्म सपोर्ट जोन से नीचे ट्रेड कर रहा है जिससे बाजार का रुझान अभी कमजोर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि 22650 से 22700 के स्तर पर मजबूत रुकावट देखी जा रही है जबकि 22300 से 22400 के बीच सपोर्ट जोन है। अगर यह स्तर टूटता है तो आने वाले समय में बाजार में गिरावट और गहरी हो सकती है।

    सेंसेक्स पैक में कई बड़े स्टॉक्स ने मजबूती दिखाई। एशियन पेंट्स, इंडिगो, ट्रेंट, टाइटन, बीईएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, अदाणी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, कोटक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी और एसबीआई जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। केवल पावर ग्रिड एकमात्र ऐसा शेयर रहा जो लाल निशान में ट्रेड कर रहा था।

    ग्लोबल मार्केट की बात करें तो एशियाई बाजारों में भी तेजी देखने को मिली। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल जैसे प्रमुख बाजार हरे निशान में खुले। वहीं अमेरिकी बाजार भी सोमवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे जहां डाओ और नैस्डैक इंडेक्स में करीब 1.38 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।

    बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत और वैश्विक स्तर पर बेहतर निवेश माहौल को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी पक्ष द्वारा ईरान के पावर प्लांट्स पर संभावित हमले को फिलहाल टालने के फैसले से तनाव में कमी आई है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बाजार में खरीदारी तेज हुई है।

  • ग्लोबल मार्केट में भूचाल: एशिया में भारी गिरावट, क्या भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा असर?

    ग्लोबल मार्केट में भूचाल: एशिया में भारी गिरावट, क्या भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा असर?


    नई दिल्ली। हफ्ते की शुरुआत के साथ ही वैश्विक शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट देखने को मिलेगी? बीते शुक्रवार को जहां सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती के साथ बंद हुए थे वहीं आज विदेशी बाजारों से बेहद कमजोर संकेत मिल रहे हैं।

    एशियाई बाजारों में सोमवार को भारी बिकवाली का माहौल है। जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 4.10 फीसदी गिरकर 50 800 के स्तर पर आ गया जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी लगभग 3 फीसदी की गिरावट के साथ 24 532 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

    सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी का असर दिख रहा है। DAX 2.01 फीसदी CAC 1.90 फीसदी और FTSE-100 करीब 1.50 फीसदी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

    गिफ्ट निफ्टी से मिल रहे कमजोर संकेत

    भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेत देने वाला गिफ्ट निफ्टी भी गिरावट के साथ रेड जोन में ट्रेड करता दिखा। खबर लिखे जाने तक यह करीब 50 अंक फिसलकर 23 737 के स्तर पर था। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली थी जहां डाउ जोंस और उसके फ्यूचर्स लगभग 1 फीसदी गिरकर बंद हुए थे। इन नकारात्मक वैश्विक संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है जो पिछले सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव से गुजरा है।

    शुक्रवार को दिखी थी मजबूती
    अगर पिछले कारोबारी दिन की बात करें तो गुरुवार की गिरावट के बाद शुक्रवार को बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली थी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 325.72 अंक चढ़कर 74 532.96 पर बंद हुआ था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 112.35 अंकों की बढ़त के साथ 23 114.50 के स्तर पर पहुंच गया था। नोट: शेयर बाजार में निवेश करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • निवेशकों के चार दिन में 13 लाख करोड़ रुपये डूबे, ईरान-इजरायल युद्ध के बीच शेयर बाजार में कोहराम

    निवेशकों के चार दिन में 13 लाख करोड़ रुपये डूबे, ईरान-इजरायल युद्ध के बीच शेयर बाजार में कोहराम


    नई दिल्ली। ईरान-इजरायल युद्ध के लगातार खिंचने के असर से भारतीय शेयर बाजार में पिछले चार कारोबारी सत्रों में भारी गिरावट आई है। निवेशकों की कुल संपत्ति इस दौरान 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गई है। कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 315.45 अंक गिरकर 24,450.45 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स करीब 1100 अंक टूटकर 79,000 के नीचे बंद हुआ। शुक्रवार को ही लगभग 3 लाख करोड़ का मार्केट कैप स्वाहा हो गया।

    बैंकिंग और बड़े शेयरों पर दबाव

    सबसे अधिक दबाव ICICI बैंक के शेयर पर रहा जो 3.39 प्रतिशत गिरा। इसके अलावा एक्सिस बैंक अल्ट्राटेक सीमेंट HDFC बैंक और SBI के शेयरों में भी 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 27 फरवरी को 463.25 लाख करोड़ रुपये था जो अब घटकर 449.79 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों FII ने भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की है। वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक अक्सर सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करते हैं जिससे उभरते बाजारों जैसे भारत में दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की गिरावट को तेज किया। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

    लार्ज-कैप और 52-वीक लो पर शेयर

    चार दिन की बिकवाली में सबसे अधिक दबाव बड़े शेयरों यानी लार्ज-कैप स्टॉक्स पर पड़ा जिससे सेंसेक्स में ज्यादा गिरावट आई। बीएसई 500 इंडेक्स के कई शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए। इनमें ACC अंबुजा सीमेंट एल्काइल एमिन्स केमिकल्स साइएंट बर्जर पेंट्स इंडिया कोहांस लाइफसाइंसेज इंद्रप्रस्थ गैस एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस बिरला कॉर्पोरेशन जेके लक्ष्मी सीमेंट जुबिलेंट फार्मावा प्रॉक्टर एंड गैंबल हाइजीन एंड हेल्थ केयर और सोनाटा सॉफ्टवेयर शामिल हैं।

    विशेषज्ञों की राय और भविष्य का अनुमान

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट करीब 2–3 प्रतिशत के करेक्शन के रूप में देखी जा सकती है। हालांकि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ा है और बाजार पहले ही लगभग 8 प्रतिशत टूट चुका है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्थिति अवसर भी पैदा कर सकती है। यदि वैश्विक हालात स्थिर होते हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन पर रहेगी।

  • निवेशकों के लिए सुनहरा सप्ताह: 23 फरवरी से 9 IPO की बहार, 4 कंपनियों की होगी लिस्टिंग

    निवेशकों के लिए सुनहरा सप्ताह: 23 फरवरी से 9 IPO की बहार, 4 कंपनियों की होगी लिस्टिंग


    नई दिल्ली। प्राइमरी मार्केट में अगले सप्ताह जबरदस्त हलचल देखने को मिलेगी। 23 फरवरी से शुरू हो रहे कारोबारी सप्ताह में कुल नौ नए आईपीओ निवेश के लिए खुलने जा रहे हैं। इनमें चार मेनबोर्ड सेगमेंट के बड़े इश्यू शामिल हैं, जबकि शेष SME प्लेटफॉर्म से हैं। इसके साथ ही दो पहले से खुले आईपीओ में भी निवेश का मौका रहेगा। इतना ही नहीं, 24 से 27 फरवरी के बीच चार कंपनियां शेयर बाजार में डेब्यू करने वाली हैं, जिससे बाजार में उत्साह और बढ़ेगा।

    मेनबोर्ड में बड़े दांव, निवेशकों की नजरें टिकीं
    23 फरवरी को ₹3100 करोड़ का बड़ा इश्यू लेकर Clean Max Enviro Energy Solutions बाजार में उतरेगी। इसका प्राइस बैंड ₹1000-₹1053 प्रति शेयर तय है और 14 शेयरों के लॉट में आवेदन किया जा सकेगा। इसी दिन Shree Ram Twistex का ₹110.24 करोड़ का आईपीओ खुलेगा, जिसका प्राइस बैंड ₹95-₹104 है।

    24 फरवरी को ज्वेलरी सेक्टर की कंपनी PNGS Reva Diamond Jewellery ₹380 करोड़ का इश्यू लेकर आएगी। इसका प्राइस बैंड ₹367-₹386 प्रति शेयर है। वहीं 25 फरवरी से Omnitech Engineering का ₹583 करोड़ का आईपीओ खुलेगा, जो 27 फरवरी तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा। इन कंपनियों की संभावित लिस्टिंग क्रमशः 2, 4 और 5 मार्च को बीएसई और एनएसई पर हो सकती है।

    SME सेगमेंट में भी रौनक

    SME प्लेटफॉर्म पर भी गतिविधियां तेज रहेंगी। Kiaasa Retail 23 से 25 फरवरी के बीच ₹69.72 करोड़ जुटाने की योजना के साथ आएगी। इसी अवधि में Mobilise App और Accord Transformer & Switchgear के इश्यू खुलेंगे। 25 फरवरी से Yaap Digital और 26 फरवरी से Striders Impex का पब्लिक इश्यू निवेशकों के लिए उपलब्ध रहेगा। इन सभी कंपनियों की लिस्टिंग मार्च के पहले सप्ताह में BSE SME या NSE SME प्लेटफॉर्म पर संभावित है।

    पहले से खुले इश्यू और लिस्टिंग पर नजर
    20 फरवरी से खुले Gaudium IVF के ₹165 करोड़ के आईपीओ को अब तक लगभग 90 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन मिल चुका है। वहीं Manilam Industries का ₹39.95 करोड़ का इश्यू अपेक्षाकृत धीमा रहा है। दोनों की संभावित लिस्टिंग 27 फरवरी को हो सकती है। 24 फरवरी को Fractal Industries और 25 फरवरी को Yashhtej Industries (India) की बाजार में एंट्री संभावित है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कर्ज की स्थिति और वैल्यूएशन का आकलन जरूर करें, क्योंकि शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। 23 फरवरी से शुरू हो रहे सप्ताह में नौ नए आईपीओ और चार लिस्टिंग के साथ प्राइमरी मार्केट में जबरदस्त हलचल रहेगी। निवेशकों के लिए अवसर तो भरपूर हैं, लेकिन समझदारी से निर्णय लेना जरूरी होगा।

  • निफ्टी आईटी में 5.5% की भारी गिरावट, मार्केट कैप 1.6 लाख करोड़ रुपए घटा..

    निफ्टी आईटी में 5.5% की भारी गिरावट, मार्केट कैप 1.6 लाख करोड़ रुपए घटा..


    नई दिल्ली। मुंबई। गुरुवार के कारोबारी सत्र में आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स 5.51 प्रतिशत गिरकर चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे न केवल इंडेक्स प्रभावित हुआ बल्कि आईटी कंपनियों की कुल बाजार पूंजी में भी 1.6 लाख करोड़ रुपए की भारी कमी दर्ज की गई।

    इस दौरान निफ्टी आईटी कंपनियों का मार्केट कैप घटकर 27,32,579 करोड़ रुपए रह गया। प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में गिरावट विशेष रूप से गंभीर रही। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का शेयर 5.48 प्रतिशत गिरकर 2,750 रुपए पर पहुंच गया, जो पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। इंफोसिस में भी 5.48 प्रतिशत की गिरावट आई। टेक महिंद्रा 6.40 प्रतिशत गिरा, जबकि एचसीएल टेक, एमफैसिस और विप्रो के शेयरों में 4.5 से 5 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस बिकवाली के पीछे सबसे बड़ा कारण उभरती एआई तकनीक है। हाल ही में ‘एंथ्रोपिक’ नामक कंपनी ने ‘क्लॉड कोवर्क’ नामक नया एआई टूल लॉन्च किया है, जो कई व्यावसायिक कामों को स्वतः पूरा करने में सक्षम है। इस एआई टूल में ऐसे ऑटोमेशन सिस्टम शामिल हैं जो पहले कई अलग-अलग सॉफ्टवेयर की जरूरत वाले कामों को एक ही प्लेटफॉर्म पर कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस स्थिति को ‘सासपोकैलिप्स’ कहा है, यानी एआई पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों की जगह ले सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर एआई ने पारंपरिक आईटी सेवाओं का काम ले लिया, तो कंपनियों की आमदनी में 40 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है।

    इसके अलावा अमेरिका से मिले मजबूत रोजगार आंकड़े भी बाजार पर दबाव बनाने वाले रहे। जनवरी में अमेरिका में 1.3 लाख नई नौकरियां जुड़ीं और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत हो गई। इससे संकेत मिला कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्दी ब्याज दरें कम नहीं करेगा। इससे भारतीय आईटी कंपनियों की विदेशी आय पर असर पड़ सकता है और शेयरों पर दबाव बढ़ा।

    ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि आने वाले समय में नए एआई टूल पुराने सॉफ्टवेयर और टेस्टिंग सेवाओं की मांग को घटा सकते हैं। पारंपरिक आईटी कंपनियों को इस बदलाव के लिए तैयार रहना होगा।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निवेशक एआई तकनीक के प्रभाव और अमेरिका की मौद्रिक नीति पर नजर बनाए रखें। आईटी सेक्टर में उच्च लागत वाले पारंपरिक सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स की मांग में कमी आने की संभावना है, जिससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

    निवेशक और कंपनियां दोनों ही इस बदलाव की जटिलताओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं। आईटी कंपनियों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें न केवल टेक्नोलॉजी में बदलाव अपनाना होगा बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों के आधार पर अपनी रणनीति भी बदलनी होगी।

  • Gold-Silver Crash: चांदी का फूटा बुलबुला… एक दिन में ₹1 लाख सस्ती, सोना 33000 रुपये फिसला

    Gold-Silver Crash: चांदी का फूटा बुलबुला… एक दिन में ₹1 लाख सस्ती, सोना 33000 रुपये फिसला


    नई दिल्ली । सोना-चांदी की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है. एक ही दिन में जहां चांदी का भाव 1 लाख रुपये से ज्यादा टूट गया है, तो वहीं सोना भी एक झटके में 33000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हो गया है. न सिर्फ वायदा कारोबार में, बल्कि घरेलू मार्केट में भी इन कीमती धातुओं के दाम में अचानक तगड़ी गिरावट देखने को मिली है. एक्सपर्ट पहले से ही ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचे कीमती धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट का अनुमान जता रहे थे और हुआ भी कुछ ऐसा है. आइए जानते हैं गोल्ड-सिल्वर प्राइस क्रैश के पीछे के बड़े कारणों के बारे में…

    देखते ही देखते फूटा चांदी का बुलबुला

    एक्सपर्ट्स के अनुमान सच साबित हुए हैं और आखिर चांदी का बुलबुला फूट गया (Silver Bubble Burst) है. जी हां, सिर्फ एक ही दिन में 1 Kg Silver Price एक लाख रुपये से ज्यादा कम हो गया है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर बीते गुरुवार को तूफानी तेजी के साथ उछाल भरते हुए अपना नया हाई लेवल छूने के बाद अंत में 3,99,893 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुई थी, वहीं शुक्रवार को वायदा कारोबार बंद होने पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का रेट क्रैश (Silver Price Crash) हो गया और ये तेजी से गिरते हुए 2,91,922 रुपये पर आ गई. यानी एक झटके में ये 1,07,971 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई.

    हाई से इतना टूटा चांदी का भाव
    इससे ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार को ही चांदी की कीमतों ने रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर पार किया था और ये 4,20,048 रुपये प्रति किलो के हाई लेवल पर पहुंच गई थी. लेकिन झटके में बुलंदियों पर पहुंची चांदी ने अचानक ही निवेशकों को तगड़ा झटका दिया और इस हाई लेवल से 1,28,126 रुपये महज एक दिन में ही सस्ती हो गई.
    Silver ही नहीं, Gold भी धड़ाम
    न सिर्फ चांदी, बल्कि सोने का बुलबुला भी फूटा है. 10 Gram 24 Karat Gold Rate में सिर्फ एक कारोबारी दिन में ही 33,113 रुपये की बड़ी गिरावट आई है. सिल्वर प्राइस बुरी तरह फिसलने के साथ-साथ गोल्ड रेट भी क्रैश हो गया. एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले सोने का वायदा भाव गुरुवार को 1,83,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था और शुक्रवार को क्लोजिंग तक ये फिसलकर 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. अगर सोने के हाई लेवल से इसकी कीमत में आई गिरावट पर गौर करें, तो गुरुवार को ही Gold Rate भी चांदी की तरह ताबड़तोड़ तेजी लेकर 1,93,096 रुपये के अपने लाइफ टाइम हाई पर पहुंचे थे और फिर अचानक इसमें ऐसी गिरावट आई कि सोना इस हाई से 42,247 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया.

    अचानक क्यों आई ये बड़ी गिरावट?

    सोना-चांदी की कीमतों में तेज उछाल के बीच एक्सपर्ट्स पहले सी ही अनुमान जता रहे थे कि ये इस ऊंचाई पर पहुंचने के बाद तेजी से फिसल भी सकता है और उनके अनुमान शुक्रवार को सच भी साबित हो गए. अगर इन कीमती धातुओं के भाव में आई गिरावट के पीछे के कारणों के बारे में बात करें, तो एक नहीं बल्कि कई वजह नजर आती हैं.
    Gold-Silver Crash का एक बड़ा कारण मुनाफासूली रही, ऐतिहासिक लेवल पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने सोना-चांदी में प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी और बिकवाली के दबाव में झटके में दोनों के दाम बिखर गए. न सिर्फ सोना-चांदी, बल्कि इनके ईटीएफ भी बिखरे हुए नजर आए. इसमें अमेरिकी डॉलर में आई तेजी का भी बड़ा रोल रहा. आमतौर पर जब US Dollar मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के निवेशकों के लिए गोल्ड- सिल्वर खरीदना महंगा पड़ता है और इनकी डिमांड घट जाती है, जिससे कीमतें भी कम होती है.

    डॉलर के साथ ही US Treasury की यील्ड भी बढ़ी है और निवेशकों को सुरक्षित बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न नजर आने लगा है, जिससे ये बिकवाली देखने को मिली. वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से ग्लोबल टेंशन में कमी और US Fed में जेरोम पॉवेल की जगह उनके पसंदीदा व्यक्ति केविन वार्श की एंट्री से जुड़ी खबरों ने भी सोना-चांदी पर दबाव बढ़ाया है.

  • शेयर बाजार समाचार, सेंसेक्स गिरावट, निफ्टी अपडेट, विदेशी निवेशक बिकवाली, आईटी शेयर, ऑटो सेक्टर, आईपीओ न्यूज़।

    शेयर बाजार समाचार, सेंसेक्स गिरावट, निफ्टी अपडेट, विदेशी निवेशक बिकवाली, आईटी शेयर, ऑटो सेक्टर, आईपीओ न्यूज़।


    नई दिल्ली/मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बीते कुछ सत्रों से जारी अनिश्चितता का माहौल मंगलवार को भी बरकरार रहा। घरेलू शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में दबाव में नजर आयाजिसके चलते प्रमुख सूचकांकों ने लाल निशान के साथ विदाई ली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज BSE का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 245 अंक फिसलकर 83,383 के स्तर पर बंद हुआवहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज NSE का निफ्टी भी 67 अंकों की कमजोरी के साथ 25,666 के स्तर पर आ गया। बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका ऑटोआईटी और एफएमसीजी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में हुई बिकवाली ने निभाई।

    बिकवाली के चक्रव्यूह में फंसे निवेशक मंगलवार के कारोबार में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 18 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार जानकारों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों FII द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकालने और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता के कारण घरेलू सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक13 जनवरी को विदेशी निवेशकों ने 1,499 करोड़ रुपए के शेयर बेचेजिसने बाजार के मोमेंटम को धीमा कर दिया।

    आईटी और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा ‘दर्द’ सेक्टर आधारित प्रदर्शन पर नजर डालें तो आईटी IT और ऑटोमोबाइल शेयरों में सबसे ज्यादा मुनाफावसूली देखी गई। हालिया तेजी के बाद इन सेक्टर्स में निवेशकों ने अपनी पोजीशन हल्की की। इसके विपरीतमेटल और सरकारी बैंकिंग शेयरों में थोड़ी खरीदारी दर्ज की गईजिससे बाजार को निचली स्तरों पर कुछ सहारा मिला। घरेलू संस्थागत निवेशकों DII ने भी 1,181 करोड़ रुपए की खरीदारी कर बाजार को संभालने का प्रयास कियालेकिन एफआईआई FII की बिकवाली का दबाव भारी पड़ा।

    वैश्विक संकेतों का मिला-जुला असर अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेत मिले। जहां जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ बंद हुएवहीं चीन के शंघाई कंपोजिट में गिरावट रही। अमेरिकी बाजारोंविशेषकर डाउ जोंस में रही 0.80% की गिरावट का असर भी भारतीय बाजार की ओपनिंग और क्लोजिंग पर स्पष्ट रूप से देखा गया। ब्याज दरों को लेकर वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों को जोखिम लेने से दूर रखा है।

    प्राइमरी मार्केट में हलचल और आगे की राह सेकेंडरी मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर आईपीओ मार्केट पर बनी हुई है। अमागी मीडिया लैब्स के आईपीओ का दूसरा दिन रहाजिसके जरिए कंपनी 1,788 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की दिशा तय करेगा। फिलहालछोटे और मध्यम निवेशकों को ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही लंबी अवधि के लिए निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

  • एनएसई का बड़ा IPO आने वाला, निवेशकों के लिए संकेत: सेबी से जल्द मिल सकता है NOC

    एनएसई का बड़ा IPO आने वाला, निवेशकों के लिए संकेत: सेबी से जल्द मिल सकता है NOC

    नई दिल्ली| नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का आईपीओ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से जल्द ही नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) मिलने के करीब है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नियामक एनएसई को अप्रूवल देने की प्रक्रिया इस महीने के अंत तक पूरी कर सकता है। एनओसी मिलने के बाद एनएसई अपने पब्लिक इश्यू को बाजार में उतारने के लिए तैयार हो जाएगा, और लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय एक्सचेंज के हाथ में होगा।

    डार्क फाइबर विवाद ने रोके एनएसई के रास्ते

    एनएसई का आईपीओ कई सालों से अटका हुआ था, जिसका मुख्य कारण 2010-2014 के बीच हुए तथाकथित डार्क फाइबर केस हैं। आरोप था कि कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को एनएसई के को-लोकेशन सर्वर तक खास एक्सेस दिया गया था, जिससे वे अन्य बाजार भागीदारों की तुलना में तेजी से ट्रेडिंग कर पाते थे। अप्रैल 2019 में, सेबी ने एनएसई को कथित गैर-कानूनी मुनाफे के रूप में 62.58 करोड़ रुपये लौटाने और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को मार्केट से जुड़े पदों पर कार्य करने से रोकने का निर्देश दिया था। 2022 में एक्सचेंज पर 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसे बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने रद्द कर दिया।

    रिटेल निवेशकों की बड़ी भागीदारी

    एनएसई ने पिछले साल जुलाई में जानकारी दी थी कि लगभग 1.46 लाख रिटेल निवेशक उसके शेयरों में निवेश कर चुके हैं। ये शेयर ग्रे (अनलिस्टेड) मार्केट में हैं और हर निवेशक के पास की कीमत 2 लाख रुपये से कम है। इसके बावजूद रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईपीओ के बाद इस हिस्सेदारी और बढ़ सकती है, क्योंकि निवेशकों को लंबे समय से एक्सचेंज के शेयर में संभावित मुनाफा नजर आ रहा है।

    एनएसई के लिए रास्ता अब साफ

    सेबी से एनओसी मिलने के बाद एनएसई को अपने पब्लिक इश्यू को समयबद्ध तरीके से लॉन्च करने का अधिकार मिलेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, आईपीओ के लिए निवेशक पहले से उत्साहित हैं और बाजार में इसकी मांग अच्छी रहने की संभावना है। लंबे समय से रुका यह आईपीओ न केवल एनएसई के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि भारतीय शेयर बाजार में भी नया उत्साह और रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद करेगा।

  • बड़े निवेशकों के लिए अलर्ट! Reliance Jio का IPO जल्द होगा लॉन्च, जानें पूरी डिटेल और फायदे

    बड़े निवेशकों के लिए अलर्ट! Reliance Jio का IPO जल्द होगा लॉन्च, जानें पूरी डिटेल और फायदे

    नई दिल्ली। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) साल 2026 की पहली छमाही में अपना आईपीओ लेकर आ सकती है. हाल ही में हुई रिलायंस AGM में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जून 2026 तक कंपनी के शेयरों को लिस्ट कराने के अपने प्लान का जिक्र किया था. कई इंवेस्टमेंट बैंकरों के लगाए गए अनुमान के मुताबिक, , रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन 130 बिलियन डॉलर से 170 बिलियन डॉलर के बीच है.

    क्या है कंपनी का प्लान?
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीओ के जरिए रिलायंस ग्रुप की यह कंपनी अपनी 2.50 परसेंट की हिस्सेदारी बेचकर 4.5 अरब डॉलर जुटा सकती है. इसी के साथ यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है. इससे पहले साल 2025 में ह्युडई मोटर इंडिया 3.3 अरब डॉलर का आईपीओ लेकर आई थी इसलिए अभी तक का सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड इसी कंपनी के नाम है.
    जेरोधा वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, “अगस्त 2025 में 48वीं रिलायंस इंडस्ट्रीज AGM में मुकेश अंबानी ने औपचारिक रूप से कहा था कि जियो IPO के लिए फाइल करने की सभी तैयारियां कर रहा है. उन्होंने बताया कि कंपनी भारतीय मार्केट अथॉरिटीज से सभी जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल मिलने के बाद 2026 के पहले छमाही में जियो को लिस्ट करने का प्लान बनाकर चल रही है इसलिए रिलायंस जियो IPO के जून 2026 तक भारतीय प्राइमरी मार्केट में आने की उम्मीद है.

    कितना है GMP?
    रिलायंस जियो IPO GMP बिगुल के मुताबिक, रिलायंस जियो IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) फिलहाल 93 रुपये प्रति शेयर चल रहा है. इसका मतलब है कि कंपनी के शेयर DRHP फाइलिंग से काफी पहले ग्रे मार्केट में उपलब्ध हैं. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि कंपनी आईपीओ के जरिए 2.50 परसेंट हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है. इससे पहले, मार्केट रेगुलेटर सेबी IPO लाने वाली बड़ी कंपनियों के लिए शेयर बिक्री का न्यूनतम साइज 5 परसेंट की जगह घटाकर 2.5 परसेंट करने का प्रस्ताव लेकर आई थी, जो अभी वित्त मंत्रालय की मंजूरी के अधीन है.

    कितना रहेगा प्राइस बैंड?
    रिलायंस जियो IPO की अनुमानित प्राइस बैंड को लेकर बोनान्जा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी ने कहा, “कंपनी के बताए गए वैल्यूएशन रेंज 130 बिलियन डॉलर से 170 बिलियन डॉलर के हिसाब से और रिटेल इन्वेस्टर्स को 15-20 परसेंट तक डिस्काउंट मिलने की बात को लेकर चले, तो रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिलायंस जियो IPO शेयर की अनुमानित कीमत 1,048 से 1,457 प्रति शेयर के बीच रहने की संभावना है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आखिर में कौन सा वैल्यूएशन बैंड तय होता है.’