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  • मार्केट में हलचल के संकेत: 20 मई को शेयर बाजार पर रहेंगी नजरें

    मार्केट में हलचल के संकेत: 20 मई को शेयर बाजार पर रहेंगी नजरें


    नई दिल्ली। 20 मई के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहने की संभावना है। एशियाई बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत और अमेरिकी बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल “वेट एंड वॉच” की स्थिति में रह सकते हैं। बीते सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी ने सीमित दायरे में कारोबार किया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में फिलहाल किसी बड़े ट्रिगर की कमी है। हालांकि बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में हल्की हलचल देखने को मिल सकती है।

    ग्लोबल मार्केट का असर रहेगा अहम
    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर इंडेक्स की चाल भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर रहेंगे। यदि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेत भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार में अस्थिरता ला सकती हैं।

    घरेलू बाजार में क्या रहेगा फोकस?
    देश के भीतर निवेशकों की नजर कुछ अहम आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। बैंकिंग सेक्टर में लोन ग्रोथ और ऑटो सेक्टर में बिक्री के आंकड़े बाजार को दिशा दे सकते हैं। आईटी कंपनियों के शेयरों में भी हल्की खरीदारी देखने को मिल सकती है, क्योंकि वैश्विक टेक सेक्टर में स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव बना रह सकता है।

     निवेशकों के लिए सावधानी जरूरी
    मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए बाजार में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है, जबकि लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह गिरावट के दौरान खरीदारी का अवसर हो सकता है।
    स्टॉप लॉस के साथ ट्रेडिंग करना और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना इस समय बेहतर रणनीति मानी जा रही है।

    कुल मिलाकर 20 मई को शेयर बाजार में हल्की अस्थिरता देखने को मिल सकती है। ग्लोबल संकेतों और घरेलू डेटा के आधार पर बाजार दिशा तय करेगा। निवेशकों के लिए यह समय सावधानी और रणनीति के साथ कदम बढ़ाने का है।

  • कच्चे तेल की तेजी से शेयर बाजार दबाव में, बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली

    कच्चे तेल की तेजी से शेयर बाजार दबाव में, बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली


    नई दिल्ली| कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कमजोरी के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर सीधे प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया।

    सुबह 9:17 बजे तक सेंसेक्स करीब 203 अंक गिरकर 77,099 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी लगभग 50 अंक टूटकर 24,042 पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को माना जा रहा है।

    सेक्टोरल फ्रंट पर बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। Nifty Bank Index में आधा प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर भी लाल निशान में रहे।

    हालांकि कुछ सेक्टरों में मजबूती भी देखी गई। एनर्जी, मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो और डिफेंस सेक्टर में खरीदारी का रुझान बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए हरे निशान में कारोबार किया, जिससे व्यापक बाजार में कुछ संतुलन देखने को मिला।

    एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख रहा। टोक्यो, शंघाई और हांगकांग के बाजार कमजोर रहे, जबकि बैंकॉक और सोल में हल्की तेजी देखी गई। वहीं अमेरिकी बाजारों में सोमवार को डाओ जोन्स में गिरावट और नैस्डैक में हल्की तेजी दर्ज की गई।

    बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 109 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव का परिणाम है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता के कारण। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के शांति प्रस्ताव पर अमेरिका की असहमति ने भी बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है, जिससे ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है।

    जब तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी 1.6% उछले

    वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी 1.6% उछले


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को शानदार तेजी दिखाई। कारोबारी सत्र के अंत में BSE Sensex और Nifty 50 दोनों करीब 1.6% की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखा।

    दिनभर ऐसा रहा बाजार का हाल
    30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,263.67 अंक (1.63%) चढ़कर 78,111.24 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 388.65 अंक (1.63%) की तेजी के साथ 24,231.30 के स्तर पर पहुंच गया।
    दिन के दौरान सेंसेक्स 77,981.10 पर खुला और 78,270.42 का हाई छुआ, जबकि निफ्टी ने 24,163.80 से शुरुआत कर 24,280.90 का इंट्रा-डे उच्च स्तर हासिल किया। यह पूरे सत्र में मजबूत खरीदारी का संकेत देता है।

    मिडकैप-स्मॉलकैप में और ज्यादा तेजी
    मुख्य इंडेक्स के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.20% और स्मॉलकैप 100 में 2.35% की बढ़त दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि निवेशक बड़े शेयरों के साथ-साथ मिड और स्मॉल कंपनियों में भी भरोसा जता रहे हैं।

     हर सेक्टर में खरीदारी, आईटी-रियल्टी में जोरदार उछाल
    बुधवार को लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में रहे। आईटी, मेटल, पीएसयू बैंक, मीडिया और रियल्टी सेक्टर में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। वहीं ऑटो, एफएमसीजी, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में भी 1% से अधिक की बढ़त देखने को मिली।

     किन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा तेजी
    निफ्टी 50 के ज्यादातर शेयरों में खरीदारी रही। खासतौर पर Wipro, Tata Consultancy Services, Tech Mahindra, Larsen & Toubro और Hindalco Industries जैसे दिग्गज शेयरों में 3% से 4% तक की तेजी दर्ज की गई।
    हालांकि Bharti Airtel, ICICI Bank, Axis Bank और ONGC जैसे कुछ शेयरों में हल्की गिरावट भी देखने को मिली।

    क्यों आई बाजार में तेजी?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, United States और Iran के बीच तनाव कम होने और शांति वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीदों ने बाजार का मूड पॉजिटिव किया। Donald Trump के बयान ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे बाजार में खरीदारी तेज हुई।

    कच्चे तेल में नरमी, रुपये को मिला सहारा
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट (94-95 डॉलर के आसपास) से भारत के आयात बिल पर दबाव कम हुआ है। इससे रुपये को मजबूती मिली और यह करीब 93.50 के स्तर तक पहुंच गया। यह भी बाजार की तेजी का एक बड़ा कारण रहा।

  • बजट से पहले निवेशकों में सतर्कता, बैंकिंग और एनर्जी शेयर कमजोर

    बजट से पहले निवेशकों में सतर्कता, बैंकिंग और एनर्जी शेयर कमजोर


    नई दिल्ली :घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को गिरावट का रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली के दबाव में प्रमुख सूचकांक कमजोर नजर आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स करीब 100 अंकों की गिरावट के साथ 82,250 के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 30 अंक फिसलकर 25,250 के स्तर पर बना रहा।
    बाजार की इस कमजोरी के पीछे बैंकिंग, एनर्जी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में दबाव को प्रमुख वजह माना जा रहा है।कारोबार के दौरान बैंकिंग सेक्टर के दिग्गज शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे बाजार को कोई ठोस सहारा नहीं मिल सका। निजी और सरकारी दोनों बैंकों के शेयरों में दबाव बना रहा। इसके अलावा तेल गैस और ऊर्जा कंपनियों में मुनाफावसूली ने भी बाजार की चाल को प्रभावित किया। एफएमसीजी शेयरों में सुस्ती के चलते निवेशकों की धारणा कमजोर रही और व्यापक बाजार पर इसका असर साफ दिखाई दिया।

    बजट से पहले बाजार में असमंजस
    विशेषज्ञों का मानना है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले शेयर बाजार फिलहाल स्पष्ट दिशा के अभाव में है। निवेशक बड़े फैसले लेने से बच रहे हैं और सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसी कारण आने वाले सत्रों में भी बाजार में उतार चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 25,000 का स्तर एक अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं ऊपर की ओर 25,400 से 25,500 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ निवेशकों को फिलहाल केवल मजबूत फंडामेंटल वाले चुनिंदा लार्ज कैप शेयरों में ही निवेश की सलाह दे रहे हैं।

    ग्लोबल बाजारों से मिले मिले जुले संकेत
    जहां घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती का रुख देखने को मिला। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 0.84 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,994 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। जापान का निक्केई भी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 53,870 पर पहुंच गया।हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.29 प्रतिशत चढ़कर 26,706 के स्तर पर रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.27 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,133 पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बाजारों में भी गुरुवार को मजबूती देखने को मिली थी। डाउ जोंस 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ था, जबकि नैस्डेक कंपोजिट और एसएंडपी 500 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई।

    FII की बिकवाली, DII बने सहारा
    निवेश प्रवाह की बात करें तो 22 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार में बिकवाली की। एफआईआई ने करीब 2,549 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 4,222 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में एफआईआई ने कुल 34,350 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे, जबकि डीआईआई ने 79,620 करोड़ रुपये की मजबूत खरीदारी की थी। इससे साफ है कि घरेलू निवेशक बाजार में स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

    पिछले सत्र में दिखी थी तेजी
    इससे पहले गुरुवार को बाजार में अच्छी मजबूती देखने को मिली थी। सेंसेक्स 398 अंक की तेजी के साथ 82,307 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 132 अंक चढ़कर 25,290 के स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि बजट से पहले मौजूदा सत्र में बाजार ने फिर से सतर्क रुख अपना लिया है।कुल मिलाकर बजट से जुड़ी उम्मीदें और वैश्विक संकेत आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।