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  • ताइवान में तूफान चांपी से जनजीवन ठप…. 931 उड़ानें रद्द, स्कूलों से लेकर शेयर बाजार तक बंद

    ताइवान में तूफान चांपी से जनजीवन ठप…. 931 उड़ानें रद्द, स्कूलों से लेकर शेयर बाजार तक बंद


    ताइपे।
    ताइवान (Taiwan) में तूफान चांपी (Cyclone Champi) के खतरे को देखते हुए शुक्रवार को लगभग पूरे द्वीप पर जनजीवन ठप हो गया। तूफान कमजोर जरूर पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद ताइवान पर सीधे टकराने का खतरा बना हुआ है। तेज हवाओं (Strong Winds) और मूसलाधार बारिश (Torrential Rain) की आशंका के बीच अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए हैं। अब तक तूफान के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि 94 लोग घायल हुए हैं। सरकार के मुताबिक, पहाड़ी इलाकों से करीब 1,300 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

    तूफान के चलते हवाई यातायात पर व्यापक असर पड़ा है। ताइवान के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, शुक्रवार को सभी 262 घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं। इसके अलावा 669 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी रद्द करनी पड़ीं। हालांकि, उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाली हाई-स्पीड रेल सेवा सामान्य रूप से चल रही थी। राजधानी ताइपे में बारिश के बीच मेट्रो समेत सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी जारी रहीं, लेकिन उनमें कटौती की गई।

    तूफान के खतरे को देखते हुए ताइवान के वित्तीय बाजार भी शुक्रवार को बंद रहे। चीन के तट के पास स्थित ताइवान के नियंत्रण वाले किनमेन द्वीप समूह में ही स्कूल और कार्यालय सामान्य रूप से खुले रहने थे।


    191 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहीं हवाएं

    ताइवान के केंद्रीय मौसम प्रशासन के मुताबिक, तूफान चांपी के केंद्र के आसपास हवा के झोंकों की रफ्तार करीब 191 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही थी। यह तूफान एक समय सुपर टाइफून की श्रेणी में था और इस साल प्रशांत महासागर में आए सबसे शक्तिशाली तूफानों में शामिल रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार, तूफान ताइवान के दक्षिणी छोर से करीब 320 किलोमीटर पूर्व में था। अनुमान है कि यह ताइवान के पूर्वोत्तर तट के पास से गुजरने के बाद उत्तर की ओर मुड़ेगा और चीन के तट की दिशा में बढ़ते हुए अंततः दक्षिणी जापान की ओर चला जाएगा।

    हालांकि, ताइवान के मौसम विभाग के पूर्वानुमानकर्ता लियू पेई-तेंग ने कहा कि तूफान के सीधे ताइवान से टकराने की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। अगर यह आगे बढ़ने के बजाय एक जगह ठहरता है, चक्कर लगाता है या अपना रास्ता बदलता है, तो इसके ताइवान में दस्तक देने की संभावना बनी रहेगी।


    तूफान का दायरा बड़ा, दो दिन तक रह सकता है असर

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, चांपी का दायरा करीब 320 किलोमीटर है। इसका विस्तार इतना बड़ा है कि यह ताइवान के ज्यादातर हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि तूफान का असर करीब दो दिनों तक रह सकता है।

    लियू पेई-तेंग ने कहा कि हाल के वर्षों के बड़े तूफानों की तुलना में चांपी का हवा का दायरा काफी व्यापक है। अगर इसकी गति धीमी पड़ती है, तो ताइवान में तेज हवाओं का असर लंबे समय तक बना रह सकता है।


    तटीय इलाकों में अलर्ट, पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश का अनुमान

    ताइवान के तटीय कस्बों में मोबाइल फोन के जरिए अलर्ट भेजे गए। लोगों को 150 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाले हवा के झोंकों के प्रति आगाह करते हुए तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। ताइपे के आसपास समेत उत्तरी पहाड़ी इलाकों में करीब एक मीटर तक बारिश होने का अनुमान जताया गया है।

    पूर्वोत्तर ताइवान के यिलान काउंटी में तेज हवाओं और भारी बारिश का असर बढ़ने लगा था। यहां अधिकारियों ने लोगों को सुरक्षित रखने के लिए रेत से भरी बोरियां बांटीं। साथ ही, उभयचर वाहनों और हवा भरकर इस्तेमाल की जाने वाली बचाव नौकाओं को तैयार रखा गया।

    सुआओ बंदरगाह कस्बे के प्रमुख ली मिंग-चेन ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सेना की मदद ली जाएगी। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और आपदा राहत कार्यों के लिए उभयचर वाहनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।


    जापान के ओकिनावा की ओर भी बढ़ सकता है तूफान

    पूर्वानुमान के मुताबिक, चांपी सबसे पहले जापान के ओकिनावा प्रांत के सबसे पश्चिमी आबादी वाले द्वीप योनागुनी के ऊपर से गुजर सकता है। इसके बाद तूफान के आगे बढ़ने की दिशा पर नजर रखी जा रही है।

    ताइवान में आमतौर पर तूफानों से निपटने की अच्छी तैयारी रहती है, जिससे जनहानि सीमित रखने में मदद मिलती है। हालांकि, ऐसे तूफान गर्मियों में ज्यादा आम हैं, लेकिन शरद ऋतु में भी इनका असर देखने को मिल सकता है।

  • शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता

    शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 9 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाली है। लगातार दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी के सामने अब बाजार को संभालने की चुनौती है। 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी और सेंसेक्स 1045 अंक से ज्यादा टूटकर 71593.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में करीब 1.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22231.80 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का यह स्तर करीब 18 महीने का निचला स्तर माना जा रहा है।

    बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद मौद्रिक नीति का रुख भी सख्त किया गया है। रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया है। महंगाई के दबाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच RBI का यह फैसला बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका रहती है जिसका असर निवेश और मुनाफे की उम्मीदों पर पड़ सकता है।

    दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है इसलिए महंगा तेल देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है। इसका असर रुपये और शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ा दबाव बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही कमजोर रुपया बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों में उतार चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 8 अक्टूबर की गिरावट में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे जबकि मेटल रियल्टी और ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    अब 9 अक्टूबर को निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी। सितंबर तिमाही के नतीजों का दौर शुरू हो चुका है और TCS के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है लेकिन कमजोर नतीजे मौजूदा दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना जरूरी है। बाजार में भारी उतार चढ़ाव के बीच किसी भी शेयर में केवल गिरावट देखकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है। 9 अक्टूबर को कच्चे तेल की चाल रुपये की स्थिति विदेशी निवेशकों की गतिविधियां RBI की नीति और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल है और निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है।

  • शेयर बाजार में चार दिन बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 473 अंक चढ़ा; निफ्टी 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद

    शेयर बाजार में चार दिन बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 473 अंक चढ़ा; निफ्टी 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद


    नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए सोमवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी की आशंकाएं कम होने और वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया। प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में 0.66 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 72,382.47 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त रही और यह 22,555.75 के स्तर पर बंद हुआ।

    निफ्टी 50 में आईटीसी के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही और इसमें 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। इसके बाद बीएसई, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, इटरनल, एनटीपीसी और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। दूसरी ओर, एचसीएल टेक, मैक्स हेल्थ, एचडीएफसी बैंक, अपोलो हॉस्पिटल, एशियन पेंट्स, इंफोसिस और सन फार्मा के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बाजारों में भी खरीदारी का रुझान रहा। निफ्टी मिडकैप में 0.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.47 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी एफएमसीजी ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा कमजोर रहे। एक मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बाद कुछ राहत भरी रिकवरी देखने को मिली। इस बढ़त को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका के कमजोर जॉब्स डेटा के बाद ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी की उम्मीद कम होने से समर्थन मिला। इन परिस्थितियों ने वैश्विक बाजारों में धारणा को बेहतर किया, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।

    हालांकि, दिन के उच्चतम स्तर से बाजार में आई गिरावट से संकेत मिलता है कि निवेशक अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेश की लगातार निकासी और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर बाजार में सतर्कता बनी हुई है। एक्सपर्ट ने कहा कि फाइनेंशियल, आईटी और कंज्यूमर सेक्टर के शेयर बाजार को सहारा दे रहे हैं, जबकि कुछ चुनिंदा आईटी और हेल्थकेयर शेयरों में कमजोरी व्यापक स्तर पर भरोसे की कमी को दर्शाती है। ऐसे में निवेशकों को आगे कमाई की संभावनाओं पर ध्यान देने और बाजार की रिकवरी के पीछे भागने के बजाय गिरावट के दौरान चुनिंदा शेयरों में खरीदारी करने पर विचार करना चाहिए।

  • लगातार चौथे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 571 अंक टूटा; निफ्टी 0.88 प्रतिशत नीचे, ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

    लगातार चौथे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 571 अंक टूटा; निफ्टी 0.88 प्रतिशत नीचे, ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

    मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र गिरावट जारी रही। ऊर्जा की स्थिर कीमतों, बॉन्ड यील्ड में अस्थिरता और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच निवेशकों में सतर्कता बढ़ी, जिससे बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ।

    दिनभर के कारोबार में प्रमुख सूचकांकों में उतार-चढ़ाव के साथ भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर 72,573 से फिसलकर 71,293 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस दौरान इसमें करीब 1,280 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और सूचकांक 2 अप्रैल 2026 को बने 71,545 के पिछले कैलेंडर वर्ष के न्यूनतम स्तर से भी नीचे चला गया। निफ्टी 50 में भी दिन के दौरान 1.7 प्रतिशत यानी 394 अंकों की गिरावट दर्ज हुई। सूचकांक 22,611 के उच्च स्तर से गिरकर 22,217 के निचले स्तर तक पहुंचा। अप्रैल में निफ्टी ने कैलेंडर वर्ष का 22,183 का न्यूनतम स्तर छुआ था।

    निफ्टी 50 में बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, श्रीराम फाइनेंस, टाटा स्टील, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, आयशर मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट रही। इसके विपरीत इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई लाइफ, मैक्स हेल्थ और टीसीएस के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.01 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार समाप्त हुआ। क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया और निफ्टी एफएमसीजी में सबसे ज्यादा कमजोरी रही, जबकि निफ्टी आईटी में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई।

    एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे मुख्य रूप से बाहरी कारण रहे। बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बने रहने से 2026-27 के आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। घरेलू स्तर पर निवेशक दूसरी तिमाही यानी क्यू2 के नतीजों और अगले सप्ताह आने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति को लेकर भी सतर्क हैं। विशेषज्ञ ने कहा कि क्यू2 की कमाई क्यू1 की तुलना में कमजोर रह सकती है, क्योंकि क्यू1 में परिचालन लागत के प्रभाव का लाभ मिला था, जो इस बार उसी स्तर पर नहीं मिल सकता।

    विशेषज्ञ के मुताबिक, पिछली मौद्रिक नीति में आरबीआई का रुख अपेक्षाकृत खुला था, लेकिन वैश्विक महंगाई के दबाव और रुपये को समर्थन देने की जरूरत को देखते हुए उसके रुख में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा सकता है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और मौजूदा चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है। लंबे समय के निवेशकों के लिए बाजार की कमजोरी में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने की बात कही गई है, जबकि कम अवधि के निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और सरकार के कदमों से वैश्विक वित्तीय बाजारों में स्थिरता आने तक इंतजार और निगरानी की रणनीति अपनाने की सलाह दी गई है।

  • SEBI ने बदले निवेश के नियम: PMS के लिए विदेशी शेयर, IPO, REIT-InvIT समेत कई नए रास्ते खुले

    SEBI ने बदले निवेश के नियम: PMS के लिए विदेशी शेयर, IPO, REIT-InvIT समेत कई नए रास्ते खुले


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने कई अहम बदलावों को मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स (PMS) के निवेश का दायरा बढ़ेगा। अब विदेशी लिस्टेड शेयर, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज जैसे विकल्प भी उनके निवेश दायरे में आ सकेंगे। इसके साथ ही IPO, प्राइमरी मार्केट डेट, FPI, REIT-InvIT, विज्ञापन और सेटलमेंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। SEBI ने 2026 के नए PMS रेगुलेशन को मंजूरी दी है।

    PMS के जरिए निवेश के विकल्प बढ़ेंगे
    SEBI ने 2020 के पुराने नियमों की जगह 2026 के नए पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशन को मंजूरी दी है। इसके बाद PMS के लिए निवेश के विकल्प बढ़ जाएंगे। तय नियमों और सीमाओं के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स विदेशी लिस्टेड शेयरों, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे।

    क्लाइंट की मंजूरी मिलने पर पोर्टफोलियो मैनेजर उसके कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 10% तक इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डेट सिक्योरिटीज में भी लगा सकेगा।

    IPO और प्राइमरी मार्केट में भी निवेश
    नए नियमों के तहत PMS के लिए IPO और प्राइमरी मार्केट डेट में निवेश का रास्ता भी खुला है। इसका मतलब है कि PMS के जरिए अपना पैसा मैनेज कराने वाले निवेशकों के लिए नए शेयर जारी होने के समय निवेश का विकल्प उपलब्ध होगा।

    भारतीय म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट प्लान स्कीमों में निवेश की भी अनुमति दी गई है। इनमें ETF, इंडेक्स फंड और स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड शामिल हैं। इस सुविधा के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपए रखी गई है।

    PMS के नियमों का आकार भी हुआ छोटा
    SEBI ने निवेश के विकल्प बढ़ाने के साथ नियमों को आसान बनाने पर भी जोर दिया है। नए PMS नियमों का दस्तावेज 70 पेज से घटाकर 33 पेज कर दिया गया है। SEBI के मुताबिक, इसमें शब्दों की संख्या भी करीब 42% कम की गई है।

    इसके अलावा इंडिपेंडेंट फंड मैनेजर का नया कॉन्सेप्ट भी मंजूर किया गया है। ऐसे फंड मैनेजर रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर के साथ मिलकर क्लाइंट का पोर्टफोलियो संभाल सकेंगे। हालांकि, उनके काम की जिम्मेदारी और देनदारी रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर की ही रहेगी।

    प्रिंसिपल ऑफिसर बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तों में भी राहत दी गई है। वहीं, 100 करोड़ रुपए से कम AUM वाले पोर्टफोलियो मैनेजर्स को डीलिंग रूम की अनिवार्य शर्त से छूट मिलेगी। हालांकि, उन्हें ऑडिट ट्रेल और मजबूत इंटरनल कंट्रोल बनाए रखना होगा।

    FPI को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में नया विकल्प
    SEBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI के लिए भी निवेश का दायरा बढ़ाया है। अब FPI फिजिकली सेटल्ड नॉन-एग्रीकल्चर कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगे।

    इनमें ऐसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस शामिल होते हैं, जिनका अंतर्निहित मूल्य कृषि उत्पादों के बजाय अन्य कच्चे माल, धातुओं या ऊर्जा स्रोतों से जुड़ा होता है। हालांकि, इसके लिए समयसीमा तय की गई है। FPI को टेंडर पीरियड शुरू होने से पहले और एक्सपायरी से कम से कम तीन दिन पहले अपनी पोजिशन खत्म करनी होगी।

    5 करोड़ की संपत्ति वाले व्यक्ति भी बन सकेंगे Accredited Investor
    SEBI ने Accredited Investor की कैटेगरी का दायरा भी बढ़ाया है। अब सिक्योरिटीज मार्केट में 5 करोड़ रुपए की संपत्ति रखने वाले व्यक्तिगत निवेशक और 20 करोड़ रुपए की संपत्ति वाले बॉडी कॉरपोरेट्स भी कुछ मौजूदा आय और नेटवर्थ शर्तें पूरी करने पर इस कैटेगरी में शामिल हो सकेंगे।

    Accredited Investor ऐसे निवेशकों की श्रेणी है, जिन्हें कुछ विशेष निवेश विकल्पों में निवेश के लिए अपेक्षाकृत अधिक वित्तीय क्षमता वाला माना जाता है। SEBI ने अगस्त 2026 में इस फ्रेमवर्क की समीक्षा से जुड़ा कंसल्टेशन पेपर भी जारी किया था।

    सेलिब्रिटी के वित्तीय विज्ञापनों पर नए नियम
    वित्तीय कंपनियों और मार्केट इंटरमीडियरी के विज्ञापनों में सेलिब्रिटी की भूमिका को लेकर भी नियम बदले गए हैं। SEBI ने Common Advertisement Code को मंजूरी दी है।

    इसके तहत कोई सेलिब्रिटी किसी ब्रांड या कंपनी का प्रचार कर सकता है, लेकिन किसी खास वित्तीय प्रोडक्ट या सर्विस को सीधे एंडोर्स नहीं कर सकेगा। यानी वह किसी कंपनी के विज्ञापन में नजर आ सकता है, लेकिन निवेशकों से किसी विशेष वित्तीय प्रोडक्ट को खरीदने या उसमें पैसा लगाने की अपील नहीं कर सकेगा। इस विषय पर SEBI ने जून 2026 में कंसल्टेशन पेपर जारी किया था।

    10 लाख रुपए तक के मामलों में फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट
    शेयर बाजार से जुड़े विवादों और नियमों के उल्लंघन के मामलों में सेटलमेंट प्रक्रिया को भी बदला गया है। SEBI ने सेटलमेंट अमाउंट तय करने का नया फॉर्मूला मंजूर किया है।

    10 लाख रुपए तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट का रास्ता होगा। गलत तरीके से कमाई गई रकम, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की वसूली अलग से तय होगी। नए फॉर्मूले का उद्देश्य सेटलमेंट राशि तय करते समय एक ही नुकसान या रकम की दो बार गणना की समस्या को दूर करना है।

    SEBI के आंकड़ों के मुताबिक, FY24-25 में सेटलमेंट के 703 आवेदन आए थे। FY25-26 में 439 आवेदन आए और 170 मामलों का निपटारा हुआ। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2014 से 30 सितंबर 2015 के बीच BSE के इलिक्विड स्टॉक ऑप्शंस में गैर-असली ट्रेड से जुड़े मामलों के लिए चौथी सेटलमेंट स्कीम, 2026 को भी मंजूरी दी गई है।

    REIT और InvIT के लिए विदेशी फंड जुटाने का रास्ता
    SEBI ने REIT और पब्लिकली लिस्टेड InvIT से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब ये मंजूर विदेशी बाजारों में डिपॉजिटरी रिसीट्स जारी कर सकेंगे। इससे इन साधनों के लिए विदेशी निवेश जुटाने का एक नया माध्यम उपलब्ध हो सकता है। REIT और InvIT से जुड़े नियमों को आसान बनाने के लिए SEBI ने अगस्त 2026 में अलग-अलग कंसल्टेशन पेपर भी जारी किए थे।

    वोटिंग नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब 75% आउटस्टैंडिंग यूनिट्स की जगह डाले गए वोट्स का 75% होना पर्याप्त होगा। स्पॉन्सर बदलने की स्थिति में एग्जिट ऑफर के नियमों में भी बदलाव किया गया है और असहमत यूनिटहोल्डर्स के साथ व्यवहार को स्पष्ट किया गया है।

    रिसर्च एनालिस्ट और वॉल्ट मैनेजर के नियमों में बदलाव
    SEBI ने रिसर्च एनालिस्ट और रिसर्च एंटिटीज के लिए कुछ कंप्लायंस नियमों को भी आसान किया है। संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग रखने से जुड़ी शर्तों में राहत दी गई है।

    वहीं, वॉल्ट मैनेजर्स के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की सीमा 50 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपए कर दी गई है। नए नियमों में स्टोरेज, सुरक्षा, इंश्योरेंस, गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया गया है। वॉल्ट मैनेजर्स के नियमों में गोल्ड और सिल्वर ETF तथा बुलियन डेरिवेटिव्स से जुड़े बुलियन को भी शामिल किया गया है।

    इस तरह SEBI के हालिया फैसलों में एक तरफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स और कुछ निवेशकों के लिए निवेश के विकल्प बढ़ाए गए हैं, वहीं विज्ञापन, सेटलमेंट, रिस्क मैनेजमेंट और अनुपालन से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया गया है।

  • सेंसेक्स और निफ्टी में बन सकता है बड़ा मूवमेंट शेयर बाजार में निवेश से पहले जानें जरूरी बातें

    सेंसेक्स और निफ्टी में बन सकता है बड़ा मूवमेंट शेयर बाजार में निवेश से पहले जानें जरूरी बातें


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए बाजार की चाल हमेशा महत्वपूर्ण रहती है। कभी तेजी निवेशकों का उत्साह बढ़ाती है तो कभी अचानक गिरावट बाजार की चिंता बढ़ा देती है। ऐसे में शेयर बाजार की दिशा को समझने के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी के उतार चढ़ाव को देखना पर्याप्त नहीं होता बल्कि देश और दुनिया की आर्थिक गतिविधियों का भी असर बाजार पर पड़ता है। निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे बाजार में किसी भी फैसले से पहले मौजूदा परिस्थितियों और प्रमुख संकेतकों को ध्यान से समझें।

    शेयर बाजार पर सबसे बड़ा असर वैश्विक बाजारों की चाल का भी पड़ता है। अमेरिका समेत दूसरे प्रमुख बाजारों में होने वाली हलचल का असर भारतीय बाजार पर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों के फैसले महंगाई के आंकड़े और आर्थिक विकास से जुड़े संकेत भी बाजार की धारणा को प्रभावित करते हैं। यदि आर्थिक माहौल मजबूत दिखाई देता है तो निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है वहीं कमजोर संकेतों की स्थिति में बाजार में दबाव देखने को मिल सकता है।

    भारतीय बाजार के लिए कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बेहद अहम होते हैं। किसी कंपनी के मुनाफे में बढ़ोतरी बिक्री में सुधार और भविष्य के कारोबार को लेकर सकारात्मक संकेत उसके शेयर को मजबूती दे सकते हैं। इसके उलट कमजोर नतीजे या कारोबार से जुड़ी चिंता किसी शेयर में बिकवाली बढ़ा सकती है। यही वजह है कि निवेशकों को केवल शेयर की कीमत देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार और वित्तीय स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।

    बाजार में कच्चे तेल की कीमतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इसका असर अर्थव्यवस्था के साथ बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत मानी जा सकती है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है जबकि लगातार बिकवाली से दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने का काम कर सकती है।

    ऐसे माहौल में छोटे निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें। शेयर बाजार में तेजी देखकर केवल मुनाफे की उम्मीद में पैसा लगाना और गिरावट देखकर घबराकर बिकवाली करना नुकसान का कारण बन सकता है। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी चाहिए। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है इसलिए मजबूत कंपनियों और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

    शेयर बाजार में किसी भी निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की मौजूदा दिशा और आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करना जरूरी है। बाजार में अवसर लगातार बनते रहते हैं इसलिए धैर्य और सोच समझकर लिया गया फैसला निवेशकों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।

  • शेयर मार्केट में पहली बार लगाने जा रहे हैं पैसा तो न करें ये गलती डीमैट अकाउंट से लेकर शेयर खरीदने तक समझें पूरा तरीका

    शेयर मार्केट में पहली बार लगाने जा रहे हैं पैसा तो न करें ये गलती डीमैट अकाउंट से लेकर शेयर खरीदने तक समझें पूरा तरीका


    नई दिल्ली । शेयर मार्केट आज के दौर में निवेश का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। बहुत से लोग अपनी बचत को बढ़ाने के लिए शेयर बाजार का रुख कर रहे हैं लेकिन बाजार में कदम रखने से पहले इसकी बुनियादी जानकारी होना बेहद जरूरी है। शेयर मार्केट में कमाई के अवसर मौजूद हैं लेकिन यहां जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए बिना जानकारी और बिना रणनीति के पैसा लगाना नुकसान का कारण बन सकता है। खासतौर पर नए निवेशकों को किसी शेयर के तेजी से बढ़ने की खबर देखकर तुरंत निवेश करने से बचना चाहिए।

    शेयर मार्केट में शुरुआत करने के लिए सबसे पहले डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। डीमैट अकाउंट में आपके खरीदे गए शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाते हैं जबकि ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए शेयरों की खरीद और बिक्री की जाती है। इसके बाद बैंक अकाउंट को इनसे जोड़ा जाता है ताकि निवेश के लिए पैसा भेजा जा सके और जरूरत पड़ने पर रकम वापस ली जा सके। अकाउंट खोलने से पहले ब्रोकरेज चार्ज और दूसरे शुल्क की जानकारी जरूर समझ लेनी चाहिए।

    नए निवेशक के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि शुरुआत छोटी रकम से की जाए। शेयर बाजार में एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे धीरे निवेश करने की आदत बनाना ज्यादा बेहतर हो सकता है। किसी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार कंपनी की कमाई कर्ज भविष्य की योजनाओं और उद्योग की स्थिति को समझना चाहिए। केवल सोशल मीडिया या किसी दोस्त की सलाह पर शेयर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।

    शेयर मार्केट में निवेश करते समय यह भी समझना जरूरी है कि हर दिन शेयर की कीमत ऊपर नहीं जाएगी। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य बात है। कई बार अच्छी कंपनियों के शेयर भी बाजार की परिस्थितियों के कारण नीचे आ सकते हैं। ऐसे समय में घबराकर तुरंत बेचने के बजाय निवेश के उद्देश्य और कंपनी की वास्तविक स्थिति को देखना चाहिए। हालांकि किसी भी निवेश में नुकसान की संभावना बनी रहती है इसलिए अपनी जोखिम क्षमता को समझना बेहद जरूरी है।

    शुरुआती निवेशकों के लिए लंबी अवधि का नजरिया रखना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में शोध के बाद निवेश करके समय के साथ अपने निवेश को बढ़ाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। इसके अलावा अलग अलग कंपनियों और क्षेत्रों में पैसा बांटकर निवेश करने से किसी एक शेयर पर निर्भरता कम की जा सकती है। इसे डायवर्सिफिकेशन कहा जाता है।

    अगर कोई व्यक्ति रोज शेयर खरीदने और बेचने यानी ट्रेडिंग की शुरुआत करना चाहता है तो उसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। ट्रेडिंग में कीमतों में छोटे बदलाव से भी तेजी से लाभ या नुकसान हो सकता है। बिना पर्याप्त ज्ञान के इंट्राडे ट्रेडिंग या जोखिम वाले कारोबार में उतरना नुकसानदेह हो सकता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शेयर मार्केट को जल्दी अमीर बनने का रास्ता नहीं समझना चाहिए। सही जानकारी अनुशासन धैर्य और जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश की शुरुआत करना ज्यादा जरूरी है। निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें आप कितना जोखिम उठा सकते हैं यह समझें और जिस पैसे की जल्द जरूरत पड़ सकती है उसे बाजार में लगाने से बचें। शेयर बाजार में सफलता किसी एक टिप या एक शेयर पर निर्भर नहीं होती बल्कि समझदारी और लगातार सीखने की आदत पर निर्भर करती है।

  • शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल

    शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल


    नई दिल्ली। शुक्रवार 4 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बीते कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार पर वैश्विक अनिश्चितता का दबाव रहा है और निवेशकों की नजर अब घरेलू संकेतों के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी बनी हुई है। 3 सितंबर को बाजार में शुरुआती बढ़त के बाद बिकवाली लौट आई और सेंसेक्स करीब 417 अंक गिरकर बंद हुआ जबकि निफ्टी 23900 के स्तर से नीचे चला गया। इससे संकेत मिल रहा है कि बाजार में फिलहाल तेजी को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं बन पाया है।

    4 सितंबर के कारोबार में सबसे अहम भूमिका कच्चे तेल की कीमतों की रह सकती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में अगर शुक्रवार को तेल की कीमतों में दोबारा तेज उछाल आता है तो इसका असर बाजार की धारणा पर दिखाई दे सकता है।

    दूसरी ओर ग्लोबल बाजार से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में हालिया कारोबार के दौरान मजबूती देखने को मिली है और गुरुवार को भारतीय बाजार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया था। विदेशी मुद्रा प्रवाह से भारतीय बैंकों की तरलता स्थिति को भी समर्थन मिला है। ऐसे संकेत बाजार में गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकते हैं।

    निवेशकों की नजर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर भी रहेगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में सतर्कता बढ़ी है। यदि अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की संभावना बढ़ाते हैं तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ कमजोर आर्थिक आंकड़े दरों में नरमी की उम्मीद को बढ़ा सकते हैं जिससे उभरते बाजारों को कुछ राहत मिल सकती है।

    घरेलू स्तर पर बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयर बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हाल के कारोबार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिली है। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। हालांकि बाजार में उतार चढ़ाव को देखते हुए किसी एक सेक्टर या शेयर में जल्दबाजी से दांव लगाने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर 4 सितंबर का कारोबार बेहद अहम रह सकता है। बाजार में तेजी की कोशिश दिखाई दे सकती है लेकिन महंगा कच्चा तेल वैश्विक तनाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव डाल सकती हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा। बाजार की दिशा को लेकर किसी निश्चित तेजी या गिरावट का अनुमान लगाने के बजाय सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। यह खबर निवेश सलाह नहीं है और निवेश का फैसला अपनी रिसर्च तथा विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए।

  • Nifty-Sensex के लिए आसान नहीं होगा 3 सितंबर का कारोबार! क्रूड ऑयल से लेकर विदेशी बाजारों तक कई संकेत देंगे दिशा

    Nifty-Sensex के लिए आसान नहीं होगा 3 सितंबर का कारोबार! क्रूड ऑयल से लेकर विदेशी बाजारों तक कई संकेत देंगे दिशा


    नई दिल्ली। 3 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी माहौल चुनौतीपूर्ण रह सकता है। बुधवार 2 सितंबर को बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र दबाव देखने को मिला और निफ्टी 50 करीब 0.59 फीसदी गिरकर 23914.45 के स्तर पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.49 फीसदी टूटकर 76570.35 पर पहुंच गया। बाजार में कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ा तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। ऐसे में गुरुवार 3 सितंबर को निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार शुरुआती दबाव के बाद संभलता है या बिकवाली का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।

    मौजूदा हालात में कच्चे तेल की कीमत बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक बन गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल आया है। तेल महंगा होने से भारत जैसे बड़े आयातक देश पर आयात बिल बढ़ने का दबाव बन सकता है और इससे महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ सकती है। बुधवार को वैश्विक बाजारों में भी इसी वजह से जोखिम लेने की क्षमता कमजोर दिखाई दी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ाया है।

    3 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर निफ्टी के अहम स्तरों पर भी रहेगी। बाजार में हालिया कमजोरी को देखते हुए 24000 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस क्षेत्र के आसपास मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर बिकवाली का दबाव और तेज हो सकता है। बाजार में अभी स्पष्ट तेजी के बजाय उतार चढ़ाव और सीमित दायरे में कारोबार की संभावना बनी हुई है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। सितंबर की शुरुआत में वैश्विक जोखिम बढ़ने से विदेशी पूंजी के रुख पर नजर बनी हुई है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने का काम कर सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़े भी निवेशकों के लिए सकारात्मक पहलू हैं। हाल में जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही है जो बाजार की घरेलू बुनियाद को मजबूती देती है।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। कच्चे तेल की तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से रुपये को कुछ सहारा मिल रहा है।

    कुल मिलाकर 3 सितंबर को बाजार में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेड लेने के बजाय बाजार की शुरुआती दिशा और ग्लोबल संकेतों पर नजर रखना अहम होगा। खासकर क्रूड ऑयल अमेरिकी बाजारों बॉन्ड यील्ड रुपये और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से बाजार को अगले संकेत मिल सकते हैं। मौजूदा परिस्थितियों में सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर माना जा सकता है। यह बाजार विश्लेषण है निवेश का व्यक्तिगत सुझाव नहीं।

  • शेयर बाजार में आज बड़ा फैसला लेने से पहले रहें सतर्क! ग्लोबल मार्केट और आर्थिक संकेत तय करेंगे सेंसेक्स निफ्टी का रुख

    शेयर बाजार में आज बड़ा फैसला लेने से पहले रहें सतर्क! ग्लोबल मार्केट और आर्थिक संकेत तय करेंगे सेंसेक्स निफ्टी का रुख


    नई दिल्ली । 2 सितम्बर को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की नजर कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहने वाली है। पिछले कारोबारी सत्रों की गतिविधियों के बाद आज सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय करने में अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कच्चे तेल की कीमतें रुपये की स्थिति और प्रमुख कंपनियों से जुड़ी खबरें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए आज का दिन सतर्कता के साथ फैसले लेने का हो सकता है क्योंकि छोटी सी सकारात्मक या नकारात्मक खबर भी बाजार के मूड को तेजी से बदल सकती है।

    भारतीय शेयर बाजार लगातार घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों के प्रदर्शन से प्रभावित होता है लेकिन मौजूदा दौर में वैश्विक परिस्थितियां भी निवेशकों की रणनीति पर बड़ा असर डाल रही हैं। अमेरिका और यूरोप के बाजारों की चाल एशियाई बाजारों की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों से जुड़े संकेत भारतीय बाजार में भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर सुबह से ही ग्लोबल मार्केट के रुझानों पर रहेगी।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों की भूमिका भी अहम रहने वाली है। यदि विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में खरीदारी बढ़ाते हैं तो बाजार को मजबूती मिल सकती है जबकि लगातार बिकवाली होने पर प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ सकता है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को सहारा देने या दबाव बढ़ाने का काम कर सकती हैं। यही वजह है कि 2 सितम्बर के कारोबार में निवेशकों की नजर खरीद और बिक्री के आंकड़ों पर भी बनी रहेगी।

    कच्चे तेल की कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात खर्च पर असर पड़ सकता है जबकि कीमतों में नरमी अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। इसका प्रभाव तेल और गैस कंपनियों के साथ ही एयरलाइन ट्रांसपोर्ट और अन्य सेक्टरों के शेयरों पर भी देखने को मिल सकता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती है।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा मेटल एनर्जी और एफएमसीजी सेक्टरों के शेयरों पर आज खास नजर रहने की संभावना है। अलग अलग सेक्टरों में निवेशकों की खरीदारी और मुनाफावसूली बाजार की व्यापक तस्वीर को बदल सकती है। बैंकिंग शेयरों की मजबूती सेंसेक्स और निफ्टी को सहारा दे सकती है जबकि आईटी शेयरों की चाल वैश्विक टेक्नोलॉजी सेक्टर के संकेतों पर निर्भर रह सकती है। छोटे और मझोले शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रह सकती है लेकिन यहां उतार चढ़ाव अधिक देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में निवेश करते समय केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसले लेना सही रणनीति नहीं है। निवेशकों को कंपनियों की बुनियादी स्थिति सेक्टर की संभावनाओं और लंबे समय के निवेश लक्ष्यों को ध्यान में रखना चाहिए। शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए बाजार की तकनीकी स्थिति और महत्वपूर्ण स्तरों पर नजर रखना जरूरी हो सकता है।

    कुल मिलाकर 2 सितम्बर का कारोबारी दिन शेयर बाजार के लिए कई संकेतों से भरा रहने वाला है। घरेलू आर्थिक मजबूती और सकारात्मक कॉरपोरेट गतिविधियां बाजार को समर्थन दे सकती हैं जबकि वैश्विक अनिश्चितता अचानक दबाव भी बना सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना और बाजार की बदलती परिस्थितियों को समझकर रणनीति बनाना सबसे बेहतर कदम हो सकता है। आज सेंसेक्स और निफ्टी की चाल केवल खरीदारी और बिकवाली से नहीं बल्कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के पूरे मिश्रण से तय होगी।