वैश्विक तनाव का घरेलू बाजार पर असर, ऑयल-गैस शेयरों में बिकवाली से शुरुआती कारोबार रहा सुस्त


नई दिल्ली । कमजोर वैश्विक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनावपूर्ण माहौल के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने सपाट शुरुआत की। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल दिखाई दिया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ तौर पर नजर आया। शुरुआती कारोबार में बाजार सीमित दायरे में चलता दिखाई दिया और कई प्रमुख सेक्टर दबाव में कारोबार करते रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मिश्रित संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियां फिलहाल निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रही हैं और इसी कारण घरेलू बाजार में भी सतर्कता का रुख देखने को मिल रहा है।

शुरुआती कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हल्की गिरावट के साथ खुले। सेंसेक्स में गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी दबाव में नजर आया। बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर सबसे अधिक दबाव ऑयल और गैस क्षेत्र के शेयरों की ओर से दिखाई दिया। इस क्षेत्र में बिकवाली के चलते निवेशकों का रुझान कमजोर रहा। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो, प्राइवेट बैंकिंग, रियल्टी, मेटल और वित्तीय सेवाओं से जुड़े सेक्टरों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी दर्ज की गई।

हालांकि बाजार की पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं रही। कुछ सेक्टरों ने सीमित स्तर पर बाजार को सहारा देने की कोशिश की। मीडिया, रक्षा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े शेयरों में मजबूती दिखाई दी। टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। चुनिंदा बड़ी कंपनियों में भी तेजी देखने को मिली, जिससे बाजार में गिरावट अधिक गहरी नहीं हो सकी। इससे यह संकेत भी मिला कि निवेशक पूरी तरह सतर्क जरूर हैं, लेकिन चुनिंदा क्षेत्रों में अवसर तलाशने की रणनीति भी अपनाई जा रही है।

लार्जकैप कंपनियों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार के इन दोनों वर्गों में खरीदारी का माहौल दिखाई दिया और सूचकांकों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार के कुछ हिस्सों में बना हुआ है। छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी से बाजार के भीतर अलग रुझान देखने को मिला।

दूसरी ओर, वैश्विक बाजारों में भी मिश्रित स्थिति बनी रही। कई एशियाई बाजार दबाव में कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि कुछ बाजारों में सीमित बढ़त दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और समुद्री क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ऊर्जा लागत और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि तेल की कीमतों में यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका प्रभाव विभिन्न सेक्टरों की लागत और बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम और आने वाले कारोबारी संकेतों पर टिकी हुई है।