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  • विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बॉन्ड यील्ड में नरमी से सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त

    विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बॉन्ड यील्ड में नरमी से सेंसेक्स-निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए 26 से 30 अक्टूबर तक का कारोबारी सप्ताह बढ़त वाला रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से बाजार को समर्थन मिला। इस दौरान प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब दो प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन तक बाजार ने अपनी साप्ताहिक बढ़त बनाए रखी, हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता भी देखने को मिली।

    सप्ताह के पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 1,335.70 अंक यानी 1.83 प्रतिशत बढ़कर 74,459.53 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 453.10 अंकों यानी 2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 23,053.10 पर पहुंच गया। बॉन्ड यील्ड में कमी आने से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ, जिसका असर शेयर बाजार की खरीदारी पर दिखाई दिया।

    इस दौरान अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, तीनों केंद्रीय बैंकों ने महंगाई को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा। इसके कारण जल्द मौद्रिक नरमी की उम्मीदों को सीमित समर्थन मिला। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, बॉन्ड यील्ड में नरमी और बेहतर आर्थिक परिस्थितियों ने शेयर बाजार में व्यापक खरीदारी को प्रोत्साहित किया।

    सप्ताह के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन प्रमुख सूचकांकों से बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.69 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 चार प्रतिशत चढ़ा। इससे पता चलता है कि बाजार में खरीदारी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने भी बाजार को मजबूती दी। इस सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुल 6,304.67 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 3,109.79 करोड़ रुपये की खरीदारी की। विदेशी निवेशकों की वापसी को बाजार में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा गया।

    सेक्टर के लिहाज से फार्मा और हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। इसकी प्रमुख वजह कंपनियों के सकारात्मक वित्तीय नतीजे रहे। बॉन्ड यील्ड में नरमी से रियल एस्टेट शेयरों को भी फायदा मिला। वहीं, इनपुट लागत कम होने की उम्मीदों के चलते मेटल, एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इसके विपरीत सीमेंट और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

    हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिनों में बाजार का रुख कुछ सतर्क हो गया। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इससे व्यापक बाजार में निवेशकों ने मुनाफावसूली की, लेकिन सेंसेक्स और निफ्टी अपनी साप्ताहिक बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

    सप्ताह के अंत में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा। अब निवेशकों की नजर ओपेक प्लस की आगामी समीक्षा पर है। इस बैठक में तेल उत्पादन और आपूर्ति को लेकर कोई महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और शेयर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

  • शेयर बाजार में तेजी के साथ कारोबार शुरू, सेंसेक्स 156 अंक चढ़ा, मीडिया और आईटी शेयरों में खरीदारी

    शेयर बाजार में तेजी के साथ कारोबार शुरू, सेंसेक्स 156 अंक चढ़ा, मीडिया और आईटी शेयरों में खरीदारी


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 29 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। सुबह 9:25 बजे सेंसेक्स 156 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,401 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 36 अंक यानी 0.16 प्रतिशत चढ़कर 22,743 पर कारोबार कर रहा था। बाजार में शुरुआती तेजी को मीडिया और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों से समर्थन मिला।

    शुरुआती कारोबार के दौरान कई क्षेत्रीय सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मीडिया और निफ्टी आईटी के अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी इंफ्रा और निफ्टी पीएसई भी हरे निशान में रहे। इसके साथ ही निफ्टी एनर्जी, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर में भी मजबूती देखने को मिली। हालांकि, बाजार के सभी क्षेत्रों में एक जैसी तेजी नहीं रही।

    कुछ क्षेत्रीय सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग शुरुआती कारोबार में नुकसान में रहे। इससे संकेत मिला कि बाजार में तेजी के बावजूद कुछ क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव बना हुआ था।

    बाजार में खरीदारी का रुझान केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूती दर्ज की गई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 60 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,695 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 167 अंक यानी 0.29 प्रतिशत चढ़कर 57,441 पर कारोबार कर रहा था। इन आंकड़ों से शुरुआती सत्र में व्यापक बाजार में खरीदारी का संकेत मिला।

    सेंसेक्स में शामिल कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो अदाणी पोर्ट्स, पावर ग्रिड, टीसीएस, टाइटन और कोटक महिंद्रा बैंक बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। एनटीपीसी, इन्फोसिस, एचयूएल, बीईएल और टेक महिंद्रा में भी मजबूती रही। इसके अलावा एसबीआई, सन फार्मा, इंडिगो, भारती एयरटेल और एक्सिस बैंक के शेयर भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।

    दूसरी ओर, कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। ट्रेंट, एलएंडटी, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी नुकसान में रहे। बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट और इटरनल के शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई। इस तरह प्रमुख सूचकांकों में तेजी के बावजूद कई बड़े शेयरों पर दबाव बना रहा।

    वैश्विक बाजारों से भी मिले-जुले संकेत मिले। एशियाई बाजारों में शंघाई, हांगकांग, सोल और जकार्ता गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि टोक्यो का बाजार बढ़त में था। इससे पहले बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे।

    कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.30 प्रतिशत गिरकर 101 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 1.23 प्रतिशत कमजोर होकर 110.28 डॉलर प्रति बैरल पर था। सोने और चांदी की कीमतों में भी नरमी रही। कॉमेक्स पर सोना 0.10 प्रतिशत गिरकर 4,047 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.86 प्रतिशत फिसलकर 53.20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

    शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजार की तेजी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी भी प्रमुख घटनाक्रम रही। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और कंपनियों के प्रदर्शन में अंतर के कारण बाजार की चाल एकसमान नहीं रही।

  • सेंसेक्स-निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद, स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार तेजी से बाजार में लौटी रौनक

    सेंसेक्स-निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद, स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार तेजी से बाजार में लौटी रौनक

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट बंद हुए। प्रमुख सूचकांकों में मामूली गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.69 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 2.67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टरों में मीडिया इंडेक्स सबसे आगे रहा, जबकि बैंकिंग शेयरों पर दबाव बना रहा। अक्टूबर सीरीज के वायदा एवं विकल्प कारोबार की मासिक एक्सपायरी के दिन बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

    सेंसेक्स मंगलवार को 8.08 अंक यानी 0.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,598.67 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में इसने 73,762.98 का ऊपरी और 73,179.41 का निचला स्तर छुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 3.45 अंक यानी 0.02 प्रतिशत फिसलकर 22,749.75 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,636.85 से 22,829.75 के दायरे में रहा। दोनों प्रमुख सूचकांकों में सीमित उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की दिलचस्पी छोटे और मझोले शेयरों में अधिक दिखाई दी।

    स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में खरीदारी बाजार की प्रमुख विशेषता रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.69 प्रतिशत, निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 2.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 2.19 प्रतिशत की तेजी आई। निफ्टी नेक्स्ट 50 में 1.30 प्रतिशत और निफ्टी 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 भी 1.01 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी मिडकैप 50 में 0.90 प्रतिशत की तेजी रही। इससे संकेत मिला कि सेंसेक्स और निफ्टी की सुस्ती के बावजूद व्यापक बाजार में खरीदारी का रुझान मजबूत रहा।

    शेयर बाजार की मजबूती का असर कारोबार की व्यापकता में भी नजर आया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार करने वाले 3,665 शेयरों में से 2,455 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,103 शेयरों में गिरावट रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कुल 4,547 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 2,936 शेयर चढ़े और 1,383 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इस आंकड़े से पता चलता है कि प्रमुख सूचकांकों के लगभग स्थिर रहने के बावजूद बाजार में बढ़त वाले शेयरों की संख्या अधिक रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन में निफ्टी मीडिया इंडेक्स 3.52 प्रतिशत उछलकर सबसे आगे रहा। निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर में 2.78 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 1.91 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा में 1.89 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में 1.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो 1.48 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.20 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी 0.74 प्रतिशत बढ़कर बंद हुए। निफ्टी मेटल में भी 0.63 प्रतिशत की बढ़त रही।

    इसके विपरीत, बैंकिंग और कुछ अन्य क्षेत्रों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.73 प्रतिशत और निफ्टी बैंक 0.72 प्रतिशत गिर गया। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.62 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 0.26 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी सीमेंट 1.80 प्रतिशत टूटकर कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।

    बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स 4.74 प्रतिशत गिरकर 16.35 पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 115.90 डॉलर प्रति बैरल रहा। कुल मिलाकर, मंगलवार को प्रमुख सूचकांकों में खास तेजी नहीं दिखी, लेकिन स्मॉलकैप, मिडकैप और मीडिया शेयरों की बढ़त ने बाजार के व्यापक रुझान को मजबूती दी।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 396 अंक तक फिसला

    कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 396 अंक तक फिसला

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 27 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। बाजार में यह लगातार छठा कारोबारी सत्र रहा, जब गिरावट का दबाव देखने को मिला। इस सप्ताह भी बाजार लगातार दूसरे दिन कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया।

    शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 122.37 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 73,484.38 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 44.40 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,708.80 के स्तर पर खुला। कारोबार आगे बढ़ने के साथ प्रमुख सूचकांकों पर दबाव और बढ़ गया। सेंसेक्स एक समय अपने पिछले बंद स्तर 73,606.75 से 395.99 अंक यानी 0.53 प्रतिशत नीचे आकर 73,210.76 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। निफ्टी 50 भी अपने पिछले बंद स्तर 22,753.20 से 100 अंक यानी 0.43 प्रतिशत गिरकर 22,653.20 तक फिसल गया।

    हालांकि, व्यापक बाजार में प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.54 प्रतिशत चढ़ा। इससे संकेत मिला कि प्रमुख कंपनियों के शेयरों में दबाव के बावजूद छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के कुछ शेयरों में खरीदारी बनी रही।

    सेक्टरवार कारोबार में आईटी, सीमेंट और ऑयल एंड गैस कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी आईटी इंडेक्स एक प्रतिशत से अधिक गिर गया। निफ्टी सीमेंट में 0.98 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.53 प्रतिशत की कमजोरी रही। दूसरी ओर, फार्मा, हेल्थकेयर और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में खरीदारी दर्ज की गई। निफ्टी पीएसयू बैंक 0.68 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी फार्मा में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर में 0.39 प्रतिशत की बढ़त रही।

    मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूती दिखाई। रुपया दो पैसे बढ़कर 95.17 प्रति डॉलर पर खुला। इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.19 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। हालांकि, रुपये का कमजोर स्तर और कच्चे तेल की महंगाई बाजार के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

    बाजार के सामने प्रमुख चुनौतियों में ब्रेंट क्रूड का 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का लगभग 4.97 प्रतिशत पर रहना शामिल है। ऐसे माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशकों के जोखिम लेने से बचने की आशंका जताई गई है। हालांकि, दूसरी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों में दिखाई दे रहे बेहतर कारोबारी संकेत और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकते हैं।

    तकनीकी स्तरों के लिहाज से निफ्टी 50 के लिए 22,690 के आसपास रिकवरी की कोशिश और कमजोरी, दोनों संभावनाएं बनी हुई हैं। यदि सूचकांक 22,630 के ऊपर टिकता है, तो 23,000 से 23,500 तक पहुंचने की संभावना पर नजर रखी जा सकती है। हालांकि, 22,800 से 22,900 के दायरे में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत, 22,630 का स्तर टूटने पर निफ्टी 22,250 से 22,000 तक फिसल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।

    संस्थागत निवेशकों के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,462 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार दसवें कारोबारी सत्र में खरीदारी जारी रखते हुए 2,609 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वैश्विक बाजारों में अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए। एसएंडपी 500 में 0.7 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.82 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान मिला-जुला रुख रहा।

    आगे बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर पड़ सकता है। साप्ताहिक और मासिक डेरिवेटिव अनुबंधों की समाप्ति के कारण कारोबार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक और कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 609 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 609 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले। बाजार में गिरावट का यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में दबाव देखने को मिला। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 600 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी एक प्रतिशत के करीब गिरावट के साथ अपने निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बीएसई का सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र में 73,123.83 अंक पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 72,990.04 अंक पर खुला, जो पिछले बंद स्तर से 133.79 अंक यानी 0.18 प्रतिशत नीचे था। कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ा और सेंसेक्स 609.25 अंक यानी 0.83 प्रतिशत गिरकर 72,514.57 अंक के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    इसी तरह एनएसई का निफ्टी 50 पिछले बंद स्तर 22,600 अंक के मुकाबले 22,524.40 अंक पर खुला। इसमें शुरुआती स्तर पर 75.59 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाद में सूचकांक 212.65 अंक यानी 0.94 प्रतिशत फिसलकर 22,387.35 अंक के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    बाजार में कमजोरी केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.81 प्रतिशत और स्मॉलकैप सूचकांक में 0.91 प्रतिशत की कमी आई। इससे व्यापक बाजार में भी निवेशकों के सतर्क रुख का संकेत मिला।

    सेक्टर के स्तर पर निफ्टी पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और आईटी सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक तक की गिरावट देखी गई। इसके विपरीत निजी बैंकिंग शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 0.49 प्रतिशत चढ़ा। फार्मा और हेल्थकेयर से जुड़े शेयरों में भी अन्य प्रमुख क्षेत्रों की तुलना में कम दबाव रहा।

    निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक पर है। बाजार में व्यापक उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, बैठक के बाद भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर मिलने वाले संकेत अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा सितंबर तिमाही के कंपनियों के नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

    कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड दो प्रतिशत से अधिक गिरकर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई क्रूड दो प्रतिशत से अधिक टूटकर 100.70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालिया नरमी के बावजूद तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंताएं कायम हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सप्ताह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज गिरावट की एक वजह मार्जिन फंडिंग पर आधारित सौदों का बंद होना भी रही। हालांकि, गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में निवेश के अवसर बन सकते हैं, लेकिन निवेशकों को आर्थिक जोखिमों पर नजर रखनी होगी।

    विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के आंकड़े बाजार के लिए एक अलग संकेत भी देते हैं। 23 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 887 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार चौथे कारोबारी सत्र खरीदारी जारी रखते हुए 3,236 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी थी।

    एशियाई बाजारों में भी निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। वैश्विक केंद्रीय बैंकों की बैठकें, कंपनियों के तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कीमतें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी निवेश धारणा आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।

  • भारतीय शेयर बाजार में फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, अगले वित्त वर्ष में कॉरपोरेट आय 17 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान

    भारतीय शेयर बाजार में फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, अगले वित्त वर्ष में कॉरपोरेट आय 17 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार इस साल डॉलर के लिहाज से 15.6 प्रतिशत गिरावट के बावजूद अन्य क्षेत्रीय बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। अगले वित्त वर्ष में कंपनियों की आय में 17 प्रतिशत तक वृद्धि होने का अनुमान है। बाजार में गिरावट के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि, बैंक ऋण, कॉरपोरेट कर्ज और मशीनरी आयात से जुड़े आंकड़े आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत दे रहे हैं। इन संकेतकों के आधार पर भारतीय बाजार की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक अनुमान जताया गया है।

    एक वैश्विक इक्विटी रणनीति रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बाजारों में भारत को अपेक्षाकृत अधिक हिस्सेदारी देने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट तैयार करने वाले जेफरीज के इक्विटी रणनीति विभाग के ग्लोबल प्रमुख क्रिस वुड ने एमएससीआई एशिया पैसिफिक, जापान को छोड़कर, इंडेक्स में भारत के लिए 12 प्रतिशत आवंटन की सिफारिश की। इस इंडेक्स में भारत का भार 10.5 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में गिरावट के बावजूद देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं बनी हुई हैं और उपलब्ध आर्थिक आंकड़े भी मजबूत स्थिति दर्शाते हैं।

    स्थानीय मुद्रा में निफ्टी इस साल 13.4 प्रतिशत नीचे है। इस प्रदर्शन के आधार पर इंडोनेशिया के बाद भारतीय बाजार क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में दूसरे स्थान पर है। इंडोनेशिया के बाजार में इस अवधि के दौरान 42.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। डॉलर के आधार पर भारतीय बाजार की गिरावट 15.6 प्रतिशत बताई गई है। इसके बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की संरचनात्मक विकास की कहानी बरकरार है। इस आकलन में आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की आय में संभावित बढ़ोतरी को महत्वपूर्ण माना गया है।

    रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं, नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर 11 से 12 प्रतिशत रहने की संभावना बताई गई है। कॉरपोरेट आय के मामले में चालू वित्त वर्ष के दौरान 14 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जबकि अगले वित्त वर्ष में यह दर बढ़कर 17 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। कंपनियों की आय में संभावित तेजी शेयर बाजार के प्रदर्शन के लिए अहम संकेतक मानी जा रही है। हालांकि, ये आंकड़े अनुमान हैं और वास्तविक वृद्धि आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

    बैंकिंग क्षेत्र के आंकड़ों में भी ऋण गतिविधियों में बढ़ोतरी दिखाई गई है। सितंबर के मध्य तक बैंक ऋण में सालाना आधार पर 18.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अगस्त में कॉरपोरेट ऋण 21.6 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई को दिए गए कर्ज में 25.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसी अवधि में जमा राशि 17.3 प्रतिशत बढ़ी। रिपोर्ट के अनुसार, कॉरपोरेट ऋण में यह वृद्धि इस संभावना की ओर संकेत करती है कि निजी क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित पूंजीगत व्यय का चक्र शुरू हो सकता है।

    मशीनरी आयात के आंकड़े भी निवेश गतिविधियों में बदलाव का संकेत देते हैं। अगस्त में समाप्त 12 महीनों के दौरान भारत का मशीनरी आयात 66 अरब डॉलर रहा। वित्त वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 29 अरब डॉलर था। इसके अलावा, रिपोर्ट में भारतीय रुपये को लेकर भी आकलन प्रस्तुत किया गया है। क्रिस वुड के मुताबिक, वर्ष 2025 की शुरुआत से 10.7 प्रतिशत गिरावट के बाद रुपया संभवतः अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है। इन आर्थिक संकेतकों के आधार पर रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार के लिए अन्य क्षेत्रीय बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई गई है।

  • शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को लगातार दो कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद तेजी लौटी। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 879.09 अंक यानी 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 288.65 अंक यानी 1.30 प्रतिशत मजबूत होकर 22,520.45 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे आईटी शेयरों में खरीदारी की प्रमुख भूमिका रही। इसके साथ ही लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी दिखाई दी। हाल की गिरावट के बाद शेयरों के आकर्षक मूल्य स्तर पर खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग से बाजार को सहारा मिला।

    शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक रहा। इसमें लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मेटल, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कमोडिटीज भी बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार के प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में केवल निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में रहा। इससे संकेत मिला कि तेजी का दायरा आईटी शेयरों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में भी खरीदारी देखने को मिली।

    बाजार में मजबूती का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 904.80 अंक यानी 1.56 प्रतिशत चढ़कर 58,787.30 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 103.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 19,153.70 पर बंद हुआ। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी व्यापक खरीदारी हुई। सेंसेक्स में शामिल आईटीसी, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड बढ़त के साथ बंद हुए। मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, टाटा स्टील, एचयूएल, टाइटन, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, एमएंडएम, इंडिगो, एनटीपीसी, भारती एयरटेल और बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी तेजी रही। सेंसेक्स पैक में केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    बाजार के जानकारों के अनुसार, हाल में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग की, जबकि शॉर्ट पोजिशन बंद किए जाने से भी बाजार को मजबूती मिली। दूसरी तिमाही के नतीजों के शुरुआती संकेतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़ी आय की संभावनाओं को लेकर बढ़ते भरोसे ने आईटी कंपनियों के शेयरों को समर्थन दिया। आईटी क्षेत्र में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों की तेजी में अहम योगदान दिया। दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में मदद की। ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका कम होने के संकेतों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। इससे निवेशकों की चिंताओं को कुछ राहत मिली।

    हालांकि, बाजार में आई तेजी के बावजूद कई चुनौतियां बनी हुई हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर घरेलू शेयर बाजार की रिकवरी पर दबाव डाल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी चरणबद्ध सख्ती वाले रुख के बाद निवेशक ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर अधिक संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस संदर्भ में सोमवार को जारी होने वाले घरेलू उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़ों पर बाजार की नजर रहेगी। महंगाई के ये आंकड़े निवेशकों की उम्मीदों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे भी अहम रहेंगे। कंपनियों का वास्तविक प्रदर्शन तय करेगा कि शुक्रवार को आई तेजी आगे भी कायम रह पाती है या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव बढ़ता है।

  • Index Option में पैसा लगाने से पहले जान लें पूरा तरीका CE और PE कैसे काम करते हैं समझें आसान भाषा में

    Index Option में पैसा लगाने से पहले जान लें पूरा तरीका CE और PE कैसे काम करते हैं समझें आसान भाषा में


    नई दिल्ली। Index Option Trading शेयर बाजार में ट्रेडिंग का एक ऐसा तरीका है जिसमें किसी एक कंपनी के शेयर के बजाय पूरे इंडेक्स के उतार चढ़ाव पर ट्रेड किया जाता है। Nifty और Bank Nifty जैसे इंडेक्स के Options में ट्रेड करने वाले लोग बाजार की दिशा के अनुसार Call Option या Put Option खरीदने या बेचने की रणनीति अपनाते हैं। हालांकि Index Option में कम समय में बड़ा मुनाफा होने की संभावना के साथ नुकसान का जोखिम भी काफी अधिक होता है। इसलिए शुरुआत करने से पहले इसके बेसिक नियमों को समझना जरूरी है।

    Index Option में मुख्य रूप से दो तरह के कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जिन्हें Call और Put कहा जाता है। Call Option यानी CE का इस्तेमाल आम तौर पर तब किया जाता है जब ट्रेडर को लगता है कि इंडेक्स का स्तर ऊपर जा सकता है। वहीं Put Option यानी PE का इस्तेमाल तब किया जाता है जब बाजार में गिरावट की संभावना दिखाई देती है। Option खरीदने वाला ट्रेडर इसके लिए Premium चुकाता है। यह Premium बाजार की स्थिति और कई अन्य कारकों के आधार पर लगातार बदलता रहता है।

    Index Option में ट्रेड शुरू करने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किस इंडेक्स में ट्रेड करना है। इसके बाद Expiry Date और Strike Price को देखा जाता है। Strike Price वह स्तर होता है जिस पर Option Contract आधारित होता है। Expiry वह तारीख होती है जिस दिन उस Contract की अवधि समाप्त होती है। अलग अलग Index Options में Expiry से जुड़े नियम और कॉन्ट्रैक्ट की उपलब्धता अलग हो सकती है इसलिए ट्रेड करने से पहले एक्सचेंज की मौजूदा जानकारी देखना जरूरी है।

    मान लीजिए किसी ट्रेडर को लगता है कि इंडेक्स ऊपर जा सकता है। वह अपनी रणनीति और जोखिम क्षमता के अनुसार Call Option खरीदने पर विचार कर सकता है। अगर इंडेक्स की दिशा उसके अनुमान के अनुसार जाती है तो Option Premium बढ़ सकता है। इसी तरह बाजार में गिरावट की संभावना पर Put Option पर विचार किया जाता है। लेकिन केवल इंडेक्स के ऊपर या नीचे जाने का अनुमान सही होना पर्याप्त नहीं है क्योंकि Premium पर Time Decay और Implied Volatility जैसे कई कारकों का भी असर पड़ता है।

    Index Option में सबसे महत्वपूर्ण बात Risk Management है। शुरुआत में पूरी पूंजी को एक ही ट्रेड में लगाना जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए ट्रेड लेने से पहले यह तय करना चाहिए कि अधिकतम कितना नुकसान स्वीकार किया जा सकता है। Stop Loss का इस्तेमाल भी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। बिना योजना के बार बार ट्रेड करने या नुकसान की भरपाई के लिए बड़ी रकम लगाने से जोखिम तेजी से बढ़ सकता है।

    Options Trading में Leverage के कारण छोटी पूंजी से बड़ी Contract Value पर एक्सपोजर मिल सकता है। यही वजह है कि मुनाफे के साथ नुकसान भी तेजी से बढ़ सकता है। Option Selling में जोखिम और भी अलग तरीके का हो सकता है और कुछ परिस्थितियों में नुकसान काफी बड़ा हो सकता है। इसलिए शुरुआती ट्रेडर को किसी भी रणनीति को वास्तविक पैसे से इस्तेमाल करने से पहले उसके जोखिम और संभावित नुकसान को अच्छी तरह समझना चाहिए।

    Index Option में ट्रेड करने से पहले बाजार का ट्रेंड वॉल्यूम Volatility Support और Resistance जैसे संकेतकों को समझना उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही किसी एक संकेत के आधार पर निर्णय लेने के बजाय पूरी ट्रेडिंग योजना बनाना बेहतर होता है। सबसे जरूरी बात यह है कि Options को आसान कमाई का जरिया न समझें। बाजार में कोई भी रणनीति निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं देती। सीखने के लिए पहले Paper Trading या छोटे स्तर से अभ्यास करना और जरूरत पड़ने पर SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लेना अधिक सुरक्षित तरीका हो सकता है।

  • सेबी का बड़ा एक्शन, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर एक साल का बैन

    सेबी का बड़ा एक्शन, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर एक साल का बैन


    नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े गंभीर उल्लंघनों के मामले में जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड और उसके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। सेबी ने कंपनी के प्रबंध निदेशक पुनीत गोयनका और एस्सेल समूह के प्रमुख सुभाष चंद्रा को एक वर्ष के लिए प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके साथ ही जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड पर भी दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है। नियामक ने तीनों पक्षों पर कुल 1.48 करोड़ रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया है।

    सेबी की जांच में सामने आया कि कंपनी की हैदराबाद स्थित मूल्यवान जमीन को आवश्यक कॉरपोरेट मंजूरियों के बिना एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के बदले गिरवी रखा गया था। नियामक ने इसे कॉरपोरेट गवर्नेंस और लिस्टिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन माना। अंतिम आदेश में कहा गया कि इस प्रक्रिया में नियामकीय प्रावधानों का पालन नहीं किया गया और आवश्यक स्वीकृतियां भी नहीं ली गईं।

    सेबी के आदेश के अनुसार जी एंटरटेनमेंट पर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है जबकि पुनीत गोयनका पर 58 लाख रुपए और सुभाष चंद्रा पर 60 लाख रुपए का दंड लगाया गया है। नियामक ने सभी संबंधित पक्षों को 45 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी माना कि लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स रेगुलेशंस 2015 और प्रोहिबिशन ऑफ फ्रॉडुलेंट एंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज रेगुलेशंस 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।

    मामले की शुरुआत वित्त वर्ष 2018-19 के वैधानिक ऑडिट के दौरान हुई थी। ऑडिट में कंपनी की कुछ अचल संपत्तियों के मूल स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद सेबी ने विस्तृत जांच शुरू की। जांच में पता चला कि दिसंबर 2016 में एस्सेल समूह की चार कंपनियों ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से 726 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इन कंपनियों पर पुनीत गोयनका सुभाष चंद्रा और उनके परिवार का प्रभावी नियंत्रण था।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जब कर्ज लेने वाली कंपनियां आवश्यक सुरक्षा बनाए रखने में विफल रहीं तब नवंबर 2018 में अतिरिक्त संपार्श्विक उपलब्ध कराने के लिए नोटिस जारी किया गया। इसके बाद दिसंबर 2018 में जी एंटरटेनमेंट की हैदराबाद स्थित जमीन के मूल दस्तावेज कर्ज के लिए अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में जमा कराए गए ताकि उस संपत्ति पर प्रथम श्रेणी का बंधक बनाया जा सके।

    हालांकि कंपनी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त की गई थीं लेकिन सेबी की जांच में ऑडिट समिति निदेशक मंडल या शेयरधारकों की ओर से ऐसी किसी पूर्व स्वीकृति का कोई प्रमाण नहीं मिला। बाद में कंपनी ने स्वयं नियामक को बताया कि प्रबंधन और निदेशक मंडल इस बंधक की प्रक्रिया से अनभिज्ञ थे और उन्होंने इस लेनदेन को मंजूरी नहीं दी थी।

    सेबी ने अपने आदेश में कहा कि यह संबंधित पक्षों के बीच हुआ लेनदेन था जिसके लिए नियमानुसार पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक था। वित्तीय विवरणों में भी इस संबंध में आवश्यक खुलासे और स्वीकृतियों का पालन नहीं किया गया। नियामक ने स्पष्ट किया कि सूचीबद्ध कंपनियों में निवेशकों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

  • अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव

    अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। इसी दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

    बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले करीब 250 से 300 अंकों की कमजोरी के साथ खुला जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 80 से 100 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में निवेशकों ने नई खरीदारी से दूरी बनाई और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया जिससे बाजार में दबाव बना रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय वैश्विक घटनाक्रम भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है।

    एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भी मिला जुला रहा। जापान के निक्केई और टॉपिक्स सूचकांक दबाव में रहे जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती गिरावट के बाद संभलता नजर आया। हांगकांग के हैंगसेंग फ्यूचर्स में हल्की मजबूती देखने को मिली लेकिन कुल मिलाकर एशियाई बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रहा। निवेशक फिलहाल किसी बड़े फैसले से पहले वैश्विक घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

    वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। डॉव जोन्स एसएंडपी 500 और नैस्डैक तीनों प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के बावजूद भू राजनीतिक तनाव ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। हालांकि बाद में अमेरिकी फ्यूचर्स में हल्की रिकवरी देखने को मिली लेकिन उसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर नहीं दिखाई दिया।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेने से बचना चाहिए। वैश्विक हालात सामान्य होने तक बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि अल्पकालिक निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और विदेशी बाजारों में स्थिरता लौटती है तो भारतीय शेयर बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर नए संकेत पर पैनी नजर रखे हुए हैं।