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  • सेबी का बड़ा एक्शन, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर एक साल का बैन

    सेबी का बड़ा एक्शन, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर एक साल का बैन


    नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े गंभीर उल्लंघनों के मामले में जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड और उसके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। सेबी ने कंपनी के प्रबंध निदेशक पुनीत गोयनका और एस्सेल समूह के प्रमुख सुभाष चंद्रा को एक वर्ष के लिए प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके साथ ही जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड पर भी दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है। नियामक ने तीनों पक्षों पर कुल 1.48 करोड़ रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया है।

    सेबी की जांच में सामने आया कि कंपनी की हैदराबाद स्थित मूल्यवान जमीन को आवश्यक कॉरपोरेट मंजूरियों के बिना एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के बदले गिरवी रखा गया था। नियामक ने इसे कॉरपोरेट गवर्नेंस और लिस्टिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन माना। अंतिम आदेश में कहा गया कि इस प्रक्रिया में नियामकीय प्रावधानों का पालन नहीं किया गया और आवश्यक स्वीकृतियां भी नहीं ली गईं।

    सेबी के आदेश के अनुसार जी एंटरटेनमेंट पर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है जबकि पुनीत गोयनका पर 58 लाख रुपए और सुभाष चंद्रा पर 60 लाख रुपए का दंड लगाया गया है। नियामक ने सभी संबंधित पक्षों को 45 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी माना कि लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स रेगुलेशंस 2015 और प्रोहिबिशन ऑफ फ्रॉडुलेंट एंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज रेगुलेशंस 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।

    मामले की शुरुआत वित्त वर्ष 2018-19 के वैधानिक ऑडिट के दौरान हुई थी। ऑडिट में कंपनी की कुछ अचल संपत्तियों के मूल स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद सेबी ने विस्तृत जांच शुरू की। जांच में पता चला कि दिसंबर 2016 में एस्सेल समूह की चार कंपनियों ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से 726 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इन कंपनियों पर पुनीत गोयनका सुभाष चंद्रा और उनके परिवार का प्रभावी नियंत्रण था।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जब कर्ज लेने वाली कंपनियां आवश्यक सुरक्षा बनाए रखने में विफल रहीं तब नवंबर 2018 में अतिरिक्त संपार्श्विक उपलब्ध कराने के लिए नोटिस जारी किया गया। इसके बाद दिसंबर 2018 में जी एंटरटेनमेंट की हैदराबाद स्थित जमीन के मूल दस्तावेज कर्ज के लिए अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में जमा कराए गए ताकि उस संपत्ति पर प्रथम श्रेणी का बंधक बनाया जा सके।

    हालांकि कंपनी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त की गई थीं लेकिन सेबी की जांच में ऑडिट समिति निदेशक मंडल या शेयरधारकों की ओर से ऐसी किसी पूर्व स्वीकृति का कोई प्रमाण नहीं मिला। बाद में कंपनी ने स्वयं नियामक को बताया कि प्रबंधन और निदेशक मंडल इस बंधक की प्रक्रिया से अनभिज्ञ थे और उन्होंने इस लेनदेन को मंजूरी नहीं दी थी।

    सेबी ने अपने आदेश में कहा कि यह संबंधित पक्षों के बीच हुआ लेनदेन था जिसके लिए नियमानुसार पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक था। वित्तीय विवरणों में भी इस संबंध में आवश्यक खुलासे और स्वीकृतियों का पालन नहीं किया गया। नियामक ने स्पष्ट किया कि सूचीबद्ध कंपनियों में निवेशकों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

  • अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव

    अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। इसी दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

    बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले करीब 250 से 300 अंकों की कमजोरी के साथ खुला जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 80 से 100 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में निवेशकों ने नई खरीदारी से दूरी बनाई और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया जिससे बाजार में दबाव बना रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय वैश्विक घटनाक्रम भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है।

    एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भी मिला जुला रहा। जापान के निक्केई और टॉपिक्स सूचकांक दबाव में रहे जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती गिरावट के बाद संभलता नजर आया। हांगकांग के हैंगसेंग फ्यूचर्स में हल्की मजबूती देखने को मिली लेकिन कुल मिलाकर एशियाई बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रहा। निवेशक फिलहाल किसी बड़े फैसले से पहले वैश्विक घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

    वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। डॉव जोन्स एसएंडपी 500 और नैस्डैक तीनों प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के बावजूद भू राजनीतिक तनाव ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। हालांकि बाद में अमेरिकी फ्यूचर्स में हल्की रिकवरी देखने को मिली लेकिन उसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर नहीं दिखाई दिया।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेने से बचना चाहिए। वैश्विक हालात सामान्य होने तक बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि अल्पकालिक निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और विदेशी बाजारों में स्थिरता लौटती है तो भारतीय शेयर बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर नए संकेत पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

  • सेंसेक्स निफ्टी की आज कैसी रहेगी दिशा बाजार खुलने से पहले जानिए एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति

    सेंसेक्स निफ्टी की आज कैसी रहेगी दिशा बाजार खुलने से पहले जानिए एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में आज का कारोबारी सत्र कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। निवेशकों की नजर एक ओर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी तो दूसरी ओर विदेशी बाजारों की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में फिलहाल सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के संकेत मौजूद हैं इसलिए कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली थी लेकिन मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और निवेशकों का भरोसा अभी भी भारतीय बाजार को सहारा दे रहा है। अगर विदेशी बाजारों से अच्छे संकेत मिलते हैं और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर किसी तरह की अनिश्चितता बढ़ती है तो बाजार दबाव में भी आ सकता है।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी बाजार को ऊपर ले जाने में मदद कर सकती है जबकि आईटी कंपनियों पर अमेरिकी बाजार और डॉलर की चाल का असर देखने को मिल सकता है। ऑटो सेक्टर में बिक्री के आंकड़े और इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों से जुड़ी खबरें निवेशकों की रुचि बढ़ा सकती हैं। फार्मा सेक्टर भी रक्षात्मक निवेश के लिहाज से मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर परिणाम देने वाली कंपनियों में दबाव बन सकता है। ऐसे में केवल अफवाहों के आधार पर निवेश करने के बजाय कंपनियों की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना जरूरी होगा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिक्री पर भी बाजार की नजर रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार निवेश आता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स में होने वाले बदलाव का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई देगा।

    जानकारों का मानना है कि छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी गतिविधि बनी रह सकती है लेकिन इनमें जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। इसलिए निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी के निवेश से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है। वहीं अल्पकालिक निवेश करने वालों को स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए ताकि अचानक आने वाले उतार चढ़ाव से नुकसान सीमित रखा जा सके।

    कुल मिलाकर आज शेयर बाजार में मिश्रित लेकिन सक्रिय कारोबार देखने को मिल सकता है। वैश्विक संकेत यदि अनुकूल रहे तो बाजार मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है लेकिन किसी भी नकारात्मक खबर के चलते दबाव भी बन सकता है। ऐसे में निवेशकों को धैर्य बनाए रखते हुए सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए और केवल विश्वसनीय जानकारी के आधार पर ही निवेश करना चाहिए।

  • शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

    शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल


    नई दिल्ली । 30 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की चाल कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित हो सकती है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल देखने को मिला है और अब निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों वैश्विक बाजारों की चाल विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी रहेगी। ऐसे में बाजार खुलने से पहले निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किन वजहों से सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो भारतीय बाजार में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता बढ़ती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों को हर खबर पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

    इन दिनों कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर होंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजे देने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बन सकता है। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर निवेशकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने रह सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी करते हैं तो बाजार को मजबूती मिलती है जबकि बिकवाली का असर पूरे बाजार पर दिखाई देता है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती या कमजोरी और रुपये की स्थिति भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करती है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। वहीं तेल की कीमतों में नरमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को किसी भी तेजी या गिरावट में भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए। मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना बेहतर रणनीति मानी जाती है। जिन लोगों की जोखिम उठाने की क्षमता कम है उन्हें एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए। साथ ही पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है ताकि किसी एक सेक्टर में गिरावट आने पर पूरे निवेश पर बड़ा असर न पड़े।

    30 जुलाई का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए कई नए अवसर लेकर आ सकता है लेकिन बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रहना भी उतना ही जरूरी होगा। सही जानकारी मजबूत रिसर्च और धैर्य के साथ लिया गया निवेश निर्णय भविष्य में बेहतर रिटर्न देने में मदद कर सकता है।

  • सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन बाजार में बन सकते हैं नए मौके निवेश से पहले जान लें एक्सपर्ट्स की अहम सलाह

    सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन बाजार में बन सकते हैं नए मौके निवेश से पहले जान लें एक्सपर्ट्स की अहम सलाह


    नई दिल्ली। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को शेयर बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक संकेतों से तय हो सकती है। निवेशकों की नजर विदेशी बाजारों की चाल कच्चे तेल की कीमतों विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय शेयर बाजार में अच्छी शुरुआत देखने को मिल सकती है। वहीं वैश्विक स्तर पर किसी भी तरह की अनिश्चितता का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार में उतार चढ़ाव का दौर बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सोच समझकर निवेश करना चाहिए। खासतौर पर छोटे और नए निवेशकों के लिए यह समय धैर्य बनाए रखने का है। मजबूत कंपनियों के शेयरों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना अपेक्षाकृत बेहतर रणनीति मानी जा रही है।

    मंगलवार के कारोबार में बैंकिंग आईटी ऑटो एफएमसीजी फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर रह सकती है। यदि इन क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर कमजोर नतीजे या नकारात्मक वैश्विक संकेत बाजार में दबाव भी बढ़ा सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है। वहीं लगातार बिकवाली होने पर प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट जानकारियों के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति कारोबार की संभावनाओं और बाजार की मौजूदा परिस्थितियों का आकलन करना जरूरी है। जोखिम को कम करने के लिए निवेश को अलग अलग सेक्टरों में बांटना भी एक बेहतर रणनीति मानी जाती है।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बाजारों की चाल एशियाई बाजारों का प्रदर्शन डॉलर की मजबूती या कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता बनी रहती है तो घरेलू निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है। इसके अलावा रुपये की स्थिति भी विदेशी निवेश के प्रवाह को प्रभावित करती है।

    बाजार जानकारों का मानना है कि जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है उन्हें रोजाना होने वाले उतार चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है। अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करना लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकता है। वहीं अल्पकालिक कारोबार करने वाले निवेशकों को स्टॉप लॉस और जोखिम प्रबंधन के नियमों का पालन करना चाहिए।

    कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबार कई महत्वपूर्ण संकेतों पर निर्भर रहेगा। बाजार में अवसर भी बन सकते हैं और उतार चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को संयम धैर्य और सही रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि वे बदलते बाजार माहौल में बेहतर निवेश निर्णय ले सकें।

  • मध्य पूर्व संकट से सहमा भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स 77000 के नीचे फिसला निवेशकों की बढ़ी चिंता

    मध्य पूर्व संकट से सहमा भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स 77000 के नीचे फिसला निवेशकों की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारी बिकवाली के साथ हुई और निवेशकों में सतर्कता का माहौल नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 649 अंकों की गिरावट के साथ 76920 के स्तर पर पहुंच गया जबकि निफ्टी 184 अंक टूटकर 24022 पर कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक घटनाक्रमों से बढ़ी अनिश्चितता और ऊर्जा कीमतों में तेजी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया।

    सुबह के कारोबार में केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 280 अंक टूट गया जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।

    सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो सबसे अधिक दबाव मेटल फाइनेंशियल सर्विसेज और कंजम्प्शन शेयरों पर रहा। इसके अलावा ऑटो प्राइवेट बैंक पीएसयू बैंक कमोडिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑयल एंड गैस एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते रहे। केवल आईटी और फार्मा सेक्टर ने मजबूती दिखाई और सीमित बढ़त के साथ कारोबार किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आईटी और दवा कंपनियों को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है इसलिए इन शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में टाटा स्टील इंडिगो मारुति सुजुकी एशियन पेंट्स बजाज फिनसर्व बजाज फाइनेंस एचडीएफसी बैंक एलएंडटी अल्ट्राटेक सीमेंट बीईएल टाइटन महिंद्रा एंड महिंद्रा भारती एयरटेल एसबीआई सन फार्मा आईसीआईसीआई बैंक इन्फोसिस और आईटीसी जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं टीसीएस एचसीएल टेक पावर ग्रिड और एनटीपीसी के शेयर सीमित बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

    भारतीय बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान पर की गई नई सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है।

    एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल रहा। टोक्यो शंघाई हांगकांग बैंकॉक और सोल के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए जबकि जकार्ता का बाजार हल्की बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। दूसरी ओर शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे लेकिन ताजा घटनाओं के बाद वैश्विक बाजारों का रुख बदल गया।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड चार प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई आयात बिल और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी रहेगी। यदि तनाव और बढ़ता है तो बाजार में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है जबकि हालात सामान्य होने पर निवेशकों का भरोसा दोबारा लौटने की संभावना भी बनी रहेगी।

  • 13 जुलाई को शेयर बाजार में क्या होगा बड़ा उलटफेर या नई तेजी निवेशकों के लिए जानना क्यों है जरूरी

    13 जुलाई को शेयर बाजार में क्या होगा बड़ा उलटफेर या नई तेजी निवेशकों के लिए जानना क्यों है जरूरी


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में 13 जुलाई का कारोबारी दिन निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है और अब सभी की नजर सोमवार के कारोबार पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कंपनियों के तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

    यदि एशियाई और अमेरिकी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार की शुरुआत मजबूती के साथ हो सकती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता सामने आती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

    इस सप्ताह कई बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने वाले हैं। इन नतीजों का असर बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर साफ दिखाई दे सकता है। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं कमजोर नतीजों की स्थिति में मुनाफावसूली का दबाव भी बढ़ सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल तय करेंगी। पिछले कुछ दिनों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है। यदि यह रुझान सोमवार को भी जारी रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी की संभावना मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर बिकवाली बढ़ने पर बाजार में कमजोरी भी आ सकती है।

    तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए कुछ प्रमुख स्तरों पर नजर रखना जरूरी होगा। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर टिकता है तो आगे तेजी का रास्ता खुल सकता है। वहीं महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर टूटने पर बाजार में गिरावट तेज हो सकती है। इसलिए ट्रेडर्स को स्टॉप लॉस के साथ ही कारोबार करने की सलाह दी जा रही है।

    लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य बनाए रखने का है। बाजार में आने वाले छोटे उतार चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना बेहतर रणनीति हो सकती है। जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश करने पर विचार करना चाहिए।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई का कारोबारी दिन कई महत्वपूर्ण संकेत लेकर आएगा। वैश्विक बाजारों की चाल तिमाही नतीजे विदेशी निवेशकों का रुख और आर्थिक घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह होगी कि वे अफवाहों से दूर रहें सही जानकारी के आधार पर निर्णय लें और जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता दें। यही रणनीति उन्हें बाजार के उतार चढ़ाव के बीच बेहतर अवसर दिला सकती है।

  • देश की शीर्ष कंपनियों के मार्केट वैल्यू में भारी उतार-चढ़ाव, ICICI बैंक सबसे आगे, रिलायंस-एचडीएफसी समेत कई दिग्गजों ने बढ़ाया बाजार पूंजीकरण

    देश की शीर्ष कंपनियों के मार्केट वैल्यू में भारी उतार-चढ़ाव, ICICI बैंक सबसे आगे, रिलायंस-एचडीएफसी समेत कई दिग्गजों ने बढ़ाया बाजार पूंजीकरण


    नई दिल्ली ।
    देश के शेयर बाजार में बीते सप्ताह उतार-चढ़ाव के बीच बड़ी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। इस दौरान शीर्ष 10 कंपनियों में से छह कंपनियों ने संयुक्त रूप से 88,678.1 करोड़ रुपए से अधिक की बढ़त दर्ज की, जबकि चार कंपनियों के मार्केटकैप में गिरावट भी सामने आई। बाजार के इस मिश्रित रुझान में आईसीआईसीआई बैंक सबसे बड़ा लाभ हासिल करने वाली कंपनी रही।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर के निवेशकों के लिए यह सप्ताह महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि कुछ टेलीकॉम और आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों में दबाव देखने को मिला। आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप 29,588.75 करोड़ रुपए बढ़कर 9,95,610.74 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जिससे यह सप्ताह का सबसे बड़ा गेनर बनकर उभरा।

    एचडीएफसी बैंक ने भी मजबूत प्रदर्शन किया और इसका बाजार पूंजीकरण 24,718.3 करोड़ रुपए बढ़कर 12,25,981.44 करोड़ रुपए हो गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मार्केटकैप में 12,043.96 करोड़ रुपए की वृद्धि दर्ज हुई और इसका कुल मूल्यांकन 17,83,926.92 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। बजाज फाइनेंस ने भी 11,580.28 करोड़ रुपए की बढ़त के साथ 6,10,081.53 करोड़ रुपए का स्तर हासिल किया।

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के बाजार पूंजीकरण में 9,322.93 करोड़ रुपए की वृद्धि दर्ज हुई और यह 9,64,738 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। वहीं एलएंडटी ने भी 1,423.88 करोड़ रुपए की हल्की बढ़त के साथ अपना बाजार मूल्यांकन मजबूत किया।

    इसके विपरीत, कुछ बड़ी कंपनियों के मार्केटकैप में गिरावट देखने को मिली। भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 35,615.21 करोड़ रुपए घटकर 11,27,348.09 करोड़ रुपए पर आ गया। लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (एलआईसी) में 21,188.74 करोड़ रुपए की गिरावट दर्ज हुई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मार्केटकैप 11,143.71 करोड़ रुपए कम होकर 7,58,206.42 करोड़ रुपए रह गया, जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) का मूल्यांकन 5,321.83 करोड़ रुपए घटकर 5,10,624.92 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

    बीते सप्ताह सेंसेक्स में 0.39 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई और यह 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.18 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 24,056 पर बंद हुआ। बाजार में यह हल्की बढ़त वैश्विक संकेतों और घरेलू निवेशकों की सक्रियता के कारण देखने को मिली।

    आगामी सप्ताह को लेकर बाजार की नजरें कई अहम कारकों पर टिकी रहेंगी। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत निवेशकों के लिए प्रमुख संकेतक होगी। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि दोनों देश एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं, जिससे बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।

    इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां और घरेलू आर्थिक आंकड़े भी बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कुल मिलाकर आने वाला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए अत्यंत निर्णायक साबित हो सकता है, जिसमें वैश्विक और घरेलू दोनों कारक मिलकर निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करेंगे।

  • भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी, निफ्टी 24,000 के ऊपर मजबूत बंद

    भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी, निफ्टी 24,000 के ऊपर मजबूत बंद

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी का सिलसिला जारी रहा। वैश्विक संकेतों में सुधार और घरेलू सेक्टरों में मजबूत खरीदारी के चलते बाजार हरे निशान में बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निवेशकों का भरोसा मजबूत दिखाई दिया और प्रमुख सूचकांकों ने सकारात्मक रुख बनाए रखा।

    30 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स BSE Sensex 347.14 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,155.62 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, व्यापक बाजार की मजबूती के चलते Nifty 50 भी 96.55 अंक या 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,085.70 पर बंद हुआ।

    दिन की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने हल्की बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया था और धीरे-धीरे खरीदारी बढ़ने से इंट्रा-डे में नए उच्च स्तर भी देखने को मिले। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,218.99 और निफ्टी 24,108.20 के स्तर तक पहुंचा, जिससे बाजार में तेजी का माहौल मजबूत हुआ।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.52 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.79 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक और मेटल सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन सेक्टरों में 1 से 2 प्रतिशत तक की बढ़त देखी गई। वहीं आईटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी हल्की तेजी रही। इसके विपरीत ऑटो, रियल्टी और एफएमसीजी शेयरों में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

    कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों ने बाजार की तेजी में योगदान दिया। Trent Limited, Bharat Electronics Limited और Hindalco Industries जैसे शेयरों में मजबूती देखने को मिली। वहीं कुछ शेयरों जैसे टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, सिप्ला और ओएनजीसी में मुनाफावसूली देखी गई।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों में कमी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सुधार के संकेतों से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की संभावनाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की उम्मीदों ने भी बाजार को समर्थन दिया है।

    इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी बाजार को राहत दी है। तेल की कीमतें तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचने से भारत के आयात बिल में कमी की उम्मीद बढ़ी है, जिससे महंगाई पर नियंत्रण की संभावना मजबूत हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद है कि ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन भविष्य की दिशा को लेकर दिए जाने वाले संकेत बाजार की चाल तय करेंगे।

    तकनीकी विश्लेषण में निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 24,100 से 24,200 का दायरा तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर पार होता है तो बाजार में आगे और तेजी की संभावना बन सकती है।

  • विप्रो का बड़ा दांव बाजार में चर्चा का केंद्र: रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर ने पकड़ी रफ्तार, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    विप्रो का बड़ा दांव बाजार में चर्चा का केंद्र: रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर ने पकड़ी रफ्तार, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें


    नई दिल्ली।
    आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियों में शामिल Wipro एक बार फिर निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। कंपनी के शेयर में हालिया तेजी ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बायबैक प्रक्रिया की रिकॉर्ड डेट नजदीक आने के साथ निवेशकों के बीच उत्साह बढ़ता दिखाई दे रहा है। बाजार में यह माना जा रहा है कि कंपनी की इस बड़ी योजना का असर निवेशकों की भावनाओं पर साफ दिखाई दे रहा है, जिसका प्रभाव शेयर की चाल में भी देखा जा सकता है।

    शेयर बाजार में कारोबारी गतिविधियों के दौरान कंपनी के शेयर में मजबूती दर्ज की गई और शुरुआती कारोबार से ही सकारात्मक रुख देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कंपनी की बायबैक योजना निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है, क्योंकि इससे शेयरधारकों को अपने शेयर कंपनी को तय मूल्य पर बेचने का मौका मिलता है। यही वजह है कि रिकॉर्ड डेट नजदीक आते ही ऐसे शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने लगती है।

    कंपनी पहले ही अपने बड़े बायबैक कार्यक्रम का ऐलान कर चुकी है और इसे अब तक के सबसे बड़े बायबैक कदमों में से एक माना जा रहा है। रिकॉर्ड डेट तय होने के बाद निवेशकों के बीच इसको लेकर चर्चाएं और भी तेज हो गई हैं। रिकॉर्ड डेट का मुख्य उद्देश्य यह तय करना होता है कि कौन से शेयरधारक इस प्रक्रिया का लाभ लेने के पात्र होंगे। इस कारण निवेशक समय सीमा से पहले अपनी रणनीति तैयार करने में जुट जाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बायबैक केवल निवेशकों के लिए अतिरिक्त अवसर नहीं होता, बल्कि यह कंपनी के आत्मविश्वास का भी संकेत माना जाता है। अक्सर जब कोई कंपनी अपने शेयर वापस खरीदने का फैसला करती है, तो इसे कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं से भी जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि ऐसी घोषणाओं का असर शेयर बाजार में सकारात्मक रूप से दिखाई देता है।

    फिलहाल निवेशकों की नजर आने वाले दिनों पर बनी हुई है। बाजार में यह चर्चा तेज है कि रिकॉर्ड डेट के करीब पहुंचते-पहुंचते शेयर में और हलचल देखने को मिल सकती है। हालांकि बाजार से जुड़े जानकार हमेशा निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी निर्णय से पहले पूरी जानकारी और जोखिम का मूल्यांकन जरूर करें। निवेश की दुनिया में अवसरों के साथ सतर्कता भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है।