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  • निफ्टी की सीमित रेंज टूटते ही बाजार में आ सकता है बड़ा ट्रेंड, वोल्टास पर दबाव बरकरार और तेजस नेटवर्क में मजबूत रिकवरी के संकेत

    निफ्टी की सीमित रेंज टूटते ही बाजार में आ सकता है बड़ा ट्रेंड, वोल्टास पर दबाव बरकरार और तेजस नेटवर्क में मजबूत रिकवरी के संकेत

    नई दिल्ली । शेयर बाजार इस समय लगातार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है, जहां निवेशक किसी स्पष्ट दिशा के इंतजार में नजर आ रहे हैं। बाजार की चाल फिलहाल सीमित दायरे में घूम रही है, जिससे यह समझना मुश्किल हो गया है कि अगली बड़ी मूव किस दिशा में होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक निफ्टी अपनी मौजूदा रेंज से बाहर नहीं निकलता, तब तक किसी मजबूत ट्रेंड की पुष्टि नहीं की जा सकती। उनका मानना है कि एक बार यह दायरा टूटने के बाद बाजार किसी एक दिशा में तेज और स्पष्ट रुख अपना सकता है, जो आने वाले दिनों में निर्णायक साबित होगा।

    इस समय बाजार की स्थिति को प्रभावित करने वाले कई वैश्विक कारण भी सामने हैं, जिनमें भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख हैं। इन वजहों से निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और खरीदारी में सतर्कता देखी जा रही है। इसके साथ ही आईटी और बैंकिंग जैसे बड़े सेक्टरों में कमजोरी ने भी बाजार की रफ्तार को सीमित कर दिया है, जिससे प्रमुख इंडेक्स ऊपर की ओर मजबूत बढ़त नहीं दिखा पा रहे हैं।

    इसी बीच वोल्टास के शेयरों पर दबाव लगातार बना हुआ है। यह स्टॉक पिछले कुछ समय से एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है और हाल के सत्रों में इसमें गिरावट का रुझान देखने को मिला है। तकनीकी संकेत भी इसकी कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं, जहां मोमेंटम में गिरावट और बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक यह स्टॉक एक निश्चित स्तर के ऊपर मजबूती नहीं दिखाता, तब तक इसमें सुधार की संभावना सीमित बनी रह सकती है।

    दूसरी ओर तेजस नेटवर्क के शेयरों में हाल के दिनों में मजबूत रिकवरी देखने को मिली है। यह स्टॉक अपने निचले स्तर से तेजी से उभरता हुआ दिखाई दिया है और इसमें बढ़ते वॉल्यूम के साथ खरीदारी भी बढ़ी है। तकनीकी रूप से यह अपने महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज के ऊपर बना हुआ है, जो इसे सकारात्मक संकेत देता है। हालांकि, इस तेजी को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि स्टॉक मौजूदा स्तरों पर स्थिरता बनाए रखे, अन्यथा इसमें फिर से उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    कुल मिलाकर बाजार की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि निफ्टी की अगली बड़ी दिशा उसके रेंज ब्रेकआउट पर निर्भर करेगी। वहीं स्टॉक स्तर पर वोल्टास में कमजोरी और तेजस नेटवर्क में सुधार के संकेत अलग-अलग अवसर और जोखिम दोनों को दर्शा रहे हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए चयनात्मक और सतर्क रणनीति अपनाना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

  • शेयर बाजार में अगले हफ्ते बड़ा उतार-चढ़ाव संभव, ग्लोबल फैक्टर्स रहेंगे अहम..

    शेयर बाजार में अगले हफ्ते बड़ा उतार-चढ़ाव संभव, ग्लोबल फैक्टर्स रहेंगे अहम..


    नई दिल्ली।
    भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह कई अहम घटनाओं से भरा रहने वाला है, जिनका सीधा असर बाजार की दिशा और निवेशकों की रणनीति पर पड़ सकता है। इस समय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और वैश्विक से लेकर घरेलू स्तर तक कई ऐसे कारक हैं जो आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकते हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण घटना अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक मानी जा रही है, जो 28 और 29 अप्रैल के बीच होने वाली है। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले फैसले पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां पहले से ही अस्थिर हैं और ऐसे में किसी भी नीति निर्णय का प्रभाव सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर देखने को मिल सकता है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ेगा।

    इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। वैश्विक तनाव और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में किसी भी तरह का बदलाव महंगाई और कंपनियों की लागत संरचना को प्रभावित कर सकता है, जिससे बाजार की चाल पर सीधा असर पड़ता है।

    वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियां भी इस समय बाजार की दिशा को प्रभावित कर रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों में चल रही अनिश्चितताओं और बातचीत की स्थिति में बदलाव का असर निवेशकों की धारणा पर साफ दिखाई देता है। यही कारण है कि अगले सप्ताह बाजार में सतर्कता और अस्थिरता दोनों बनी रह सकती है।

    घरेलू स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं, जिनमें औद्योगिक उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े आंकड़े शामिल हैं। ये डेटा देश की आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर बाजार में सेक्टर आधारित हलचल देखने को मिल सकती है।

    इसके अलावा, कॉरपोरेट सेक्टर में भी चौथी तिमाही के नतीजों का सिलसिला जारी रहेगा। कई बड़ी कंपनियां अपने वित्तीय परिणाम घोषित करेंगी, जिनमें बैंकिंग, ऑटो, एनर्जी और अन्य प्रमुख सेक्टर शामिल हैं। इन नतीजों के आधार पर संबंधित कंपनियों के शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है और निवेशकों की रणनीति भी इसी के अनुसार बदलेगी।

    पिछला सप्ताह बाजार के लिए कमजोर साबित हुआ था, जहां प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई थी। कई सेक्टरों में दबाव देखने को मिला था, जबकि कुछ क्षेत्रों में सीमित मजबूती भी दिखाई दी थी। कुल मिलाकर बाजार में अनिश्चितता और अस्थिरता का माहौल बना रहा था।

    आने वाले सप्ताह में भी यही स्थिति जारी रहने की संभावना है, जहां वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक डेटा और कंपनियों के नतीजे मिलकर बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता और सोच-समझकर निर्णय लेने का रहेगा।

  • आईपीओ बाजार में फाइनेंशियल सेक्टर की मजबूत पकड़ 34% हिस्सेदारी

    आईपीओ बाजार में फाइनेंशियल सेक्टर की मजबूत पकड़ 34% हिस्सेदारी

    नई दिल्ली:  नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी एनएसई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग IPO के जरिए फंड जुटाने में फाइनेंशियल सेक्टर ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया है। अप्रैल से फरवरी की अवधि में जुटाई गई कुल राशि में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत रही, जो अन्य सभी क्षेत्रों से अधिक है

    रिपोर्ट में बताया गया कि फाइनेंशियल सेक्टर के बाद कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही, जबकि इंडस्ट्रियल सेक्टर ने 11 प्रतिशत योगदान दिया। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान मुख्य रूप से वित्तीय और उपभोक्ता आधारित कंपनियों की ओर बना हुआ है

    एसएमई SME सेगमेंट में अलग रुझान देखने को मिला। यहां इंडस्ट्रियल सेक्टर 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा, जबकि कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी 23 प्रतिशत और मटेरियल सेक्टर 10 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शामिल रहे। यह दिखाता है कि छोटे और मझोले उद्योगों में औद्योगिक कंपनियों की भागीदारी ज्यादा है

    मेनबोर्ड आईपीओ की बात करें तो अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच 99 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 1,65,036 करोड़ रुपए जुटाए। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में भी मजबूत वृद्धि को दर्शाता है, जहां 79 कंपनियों ने 1,62,517 करोड़ रुपए जुटाए थे

    हालांकि, एसएमई आईपीओ में कुछ गिरावट देखी गई है। वित्त वर्ष 2026 में अब तक 105 एसएमई आईपीओ लिस्ट हुए, जिनसे कुल 5,121 करोड़ रुपए जुटाए गए, जबकि पिछले वर्ष 163 आईपीओ के जरिए 7,111 करोड़ रुपए जुटाए गए थे

    निवेशकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। फरवरी 2026 तक एनएसई पर पंजीकृत निवेशकों की संख्या 12.8 करोड़ तक पहुंच गई। हर महीने औसतन 13.6 लाख नए निवेशक बाजार से जुड़ रहे हैं, जो भारत के पूंजी बाजार की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है

    राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र 2 करोड़ से अधिक निवेशकों के साथ पहला राज्य बन गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल और राजस्थान प्रमुख निवेशक आधार वाले राज्य हैं

  • बैंकों, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर की बढ़त के बीच सेंसेक्स 75,500 के पार

    बैंकों, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर की बढ़त के बीच सेंसेक्स 75,500 के पार


    नई दिल्ली: 
    भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को लगातार तीन सत्रों की गिरावट के बाद जोरदार रिकवरी दिखाई और हरे निशान में बंद होकर निवेशकों का मनोबल बढ़ाया। शुरुआती कारोबार में उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बैंकों, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर की मजबूत पकड़ ने बाजार को मजबूती प्रदान की। बीएसई सेंसेक्स अंततः 939 अंक या 1.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,502.85 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 ने 1.11 प्रतिशत या 257.70 अंक की तेजी के साथ 23,408.80 पर बंद किया।

    सत्र के दौरान सेंसेक्स ने दिन के उच्चतम स्तर 75,805.27 को छूते हुए 1,241 अंक या 1.66 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। वहीं निफ्टी50 अपने उच्चतम स्तर 23,502 तक पहुंच गया, जिसमें 351 अंक या 1.5 प्रतिशत की बढ़त शामिल थी। हालांकि, व्यापक बाजारों में मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक कमजोर रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.43 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.65 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

    सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो निफ्टी ऑटो में सबसे अधिक 1.67 प्रतिशत की तेजी रही। निफ्टी एफएमसीजी 1.14 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.50 प्रतिशत और निफ्टी बैंक 1.22 प्रतिशत की मजबूती के साथ हरे निशान में बंद हुए। इसके विपरीत निफ्टी रियल्टी 1.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ कमजोर प्रदर्शन करता नजर आया। वहीं निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 1.58 प्रतिशत की बढ़त तो निफ्टी आईटी में मामूली 0.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

    निफ्टी50 में कुछ प्रमुख शेयरों में गिरावट देखी गई। बीईएल, मैक्स हेल्थकेयर, विप्रो, कोल इंडिया, ओएनजीसी, डॉ. रेड्डीज, सन फार्मा, श्रीराम फाइनेंस, सिप्ला और पावर ग्रिड के शेयरों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही। वहीं अल्ट्राटेक सीमेंट, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इटरनल, ट्रेंट, एचडीएफसी, बजाज फाइनेंस, जेएसडब्ल्यू और बजाज-ऑटो के शेयरों में 2.1 से 4.4 प्रतिशत तक की सबसे अधिक तेजी देखने को मिली।

    कच्चे तेल की कीमतों में लगातार मजबूती देखी गई और यह 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही। यह बढ़ोतरी मध्य पूर्व में आपूर्ति संबंधी जोखिमों के चलते हुई, खासकर फुजैराह में तीसरे दिन हुए हमले के बाद। फुजैराह संयुक्त अरब अमीरात का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है और यह होर्मुज जलडमरूमध्य के बिल्कुल बाहर स्थित है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को बाजार में इस तरह की उतार-चढ़ाव वाली स्थितियों में धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि मजबूत सेक्टरों की पकड़ बाजार को स्थिर करने में मदद करती है। बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी क्षेत्रों में सुधार और तेजी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं और आने वाले कारोबारी सत्रों में इसी तरह की रिकवरी की उम्मीद जताई जा रही है।

  • शेयर बाजार गिरा लेकिन निवेशकों का भरोसा बना, जनवरी में खुले 36.2 लाख नए डीमैट खाते

    शेयर बाजार गिरा लेकिन निवेशकों का भरोसा बना, जनवरी में खुले 36.2 लाख नए डीमैट खाते


    नई दिल्ली। जनवरी महीने में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशकों का उत्साह कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ गया। एनएसडीएल और सीडीएसएल के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी में कुल 36.2 लाख नए डीमैट खाते खोले गए। यह पिछले 16 महीनों का सबसे ऊंचा आंकड़ा है और सितंबर 2024 के बाद का सबसे बड़ा उछाल माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह लगातार दूसरा महीना है जब नए डीमैट खातों की संख्या 30 लाख से अधिक रही, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे और बाजार में उनकी दिलचस्पी को दर्शाता है।

    दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान प्रमुख शेयर सूचकांक कमजोर रहे। सेंसेक्स में लगभग 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई जबकि निफ्टी करीब 3.1 प्रतिशत नीचे आया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते 2025 की शुरुआत बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रही। हालांकि इस अस्थिरता ने खुदरा निवेशकों को रोक नहीं पाया।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि बाजार की हालिया गिरावट ने कई कंपनियों के शेयरों को सस्ते स्तर पर ला दिया। लंबे समय तक निवेश करने वाले निवेशक इसे अवसर मानते हैं। इस गिरावट का फायदा उठाकर कई खुदरा निवेशकों ने जनवरी में सस्ते शेयरों में निवेश किया। WealthMills Securities के इक्विटी स्ट्रैटेजी निदेशक क्रांति बाथिनी का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और आसान खाता खोलने की प्रक्रिया ने नए निवेशकों को बाजार से जोड़ने में मदद की है।

    यदि पिछले महीनों के आंकड़ों को देखें तो तस्वीर और स्पष्ट हो जाती है। सितंबर 2024 में नए डीमैट खाते 4.55 मिलियन थे, इसके बाद अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच यह क्रमशः 3.45 मिलियन, 3.15 मिलियन और 3.26 मिलियन पर आया। जनवरी 2025 में गिरावट तेज हुई और नए खाते घटकर 2.83 मिलियन हुए। फरवरी और मार्च में क्रमशः 2.26 मिलियन और 1.84 मिलियन नए खाते खुले। यह संकेत देता है कि उस समय निवेशकों का भरोसा कमजोर था।

    हालांकि अप्रैल 2025 से धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला। अप्रैल में 2.22 मिलियन, मई में 2.17 मिलियन, जून में 2.53 मिलियन और जुलाई में 2.98 मिलियन नए खाते खुले। अगस्त और सितंबर में यह आंकड़ा थोड़ा नरम रहा। अक्टूबर से दिसंबर तक फिर तेजी देखने को मिली और जनवरी 2026 में यह उछाल 3.62 मिलियन तक पहुंच गया।

    इस उछाल ने साबित कर दिया कि भारतीय खुदरा निवेशक अब पहले से ज्यादा जागरूक और साहसी हो चुके हैं। वे बाजार में गिरावट को डर के बजाय अवसर मान रहे हैं। डिजिटलाइजेशन, आसान खाता खोलने की प्रक्रिया और ऑनलाइन निवेश के विकल्प ने निवेशकों की भागीदारी बढ़ाई है। बाजार की अस्थिरता के बावजूद निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है, और यह संकेत देता है कि शेयर बाजार में लंबी अवधि के निवेशक लगातार बढ़ रहे हैं।

  • जोमाटो-स्विगी को बाजार में भी मिलेगी टक्कर होश उड़ाने आ रहा Zepto IPO

    जोमाटो-स्विगी को बाजार में भी मिलेगी टक्कर होश उड़ाने आ रहा Zepto IPO


    नई दिल्ली । जहां एक ओर जोमाटो और स्विगी को डिलीवरी के मोर्चे पर सड़क पर तगड़ी टक्कर मिल रही है. वहीं अब शेयर बाजार में भी बड़ी चुनौती का सामना भी करना पड़ सकता है. दोनों कंपनियों का होश उड़ाने के लिए रोजमर्रा की जरूरत के सामान डिलीवर करने वाली कंपनी जेप्टो अपना आईपीओ लेकर आ रही है. शुक्रवार यानी आज कंपनी गुपचुप तरीके से अपना ड्राफ्ट पेपर सेबी दफ्तर में दाखिल करेगी. जानकारों का कहना है कि जेप्टो आईपीओ का साइज 11 हजार करोड़ या उससे ऊपर जा सकता है.
    लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. अभी तक जितनी भी जानकारी सामने आई है वो सभी सूत्रों के हवाले से की गई है.कंपनी का अगले साल शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इरादा है. मामले से परिचित सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि जेप्टो 26 दिसंबर को सेबी के पास निर्गम संबंधी मसौदा प्रस्ताव डीआरएचपी दाखिल करने जा रही है.

    जोमैटो-स्विगी की राह पर जेप्टो

    आईपीओ संबंधी मसौदा प्रस्ताव को सेबी की मंजूरी मिलने की स्थिति में जेप्टो भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाले सबसे नई स्टार्टअप फर्मों में से एक बन जाएगी. आईपीओ लाने के साथ ही जेप्टो वह अपने क्षेत्र के प्रतिद्वंद्वियों जोमैटो एवं स्विगी की कतार में खड़ी हो जाएगी जो पहले से ही शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं. कंपनी का अगले साल शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इरादा है. मामले से परिचित सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि जेप्टो 26 दिसंबर को सेबी के पास निर्गम संबंधी मसौदा प्रस्ताव डीआरएचपी दाखिल करने जा रही है. अभी तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
    गुपचुप तरीका अपना आईपीओ
    सूत्रों के मुताबिक जेप्टो गोपनीय मार्ग से आईपीओ के लिए आवेदन करने की तैयारी में है. इस मार्ग के तहत कंपनी सेबी के साथ अपने मसौदा दस्तावेज को सार्वजनिक किए बगैर उस पर शुरुआती चर्चा कर सकती है. हाल के वर्षों में गोपनीय मार्ग से आईपीओ लाने का तरीका उन कंपनियों के बीच लोकप्रिय हुआ है जो आईपीओ से पहले बाजार की स्थिति को देखते हुए अधिक लचीलापन चाहती हैं और नियामक से प्रारंभिक सुझाव लेना चाहती हैं.
    कंपनी कितना जुटा सकी पैसा
    जेप्टो का मौजूदा मूल्यांकन सात अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है. कंपनी अपने गठन से लेकर अब तक कुल 1.8 अरब डॉलर करीब 16000 करोड़ रुपये का कोष जुटा चुकी है. कंपनी ने अगस्त 2023 में एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली कंपनी यानी यूनिकॉर्न होने का दर्जा हासिल किया था. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई अधूरी छोड़ने वाले युवाओं आदित पलिचा और कैवल्य वोहरा ने इस कंपनी की स्थापना की थी. जेप्टो ने 10 मिनट में किराना के सामान की आपूर्ति का मॉडल अपनाकर बड़े भारतीय शहरों में तेजी से विस्तार किया.

  • 1 फरवरी 2026 को रविवार को खुलेगा शेयर बाजार, पेश होगा आम बजट

    1 फरवरी 2026 को रविवार को खुलेगा शेयर बाजार, पेश होगा आम बजट


    नई दिल्ली। आमतौर पर सप्ताहांत में बंद रहने वाले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 1 फरवरी 2026 (रविवार) को खुलेंगे। इस दिन केंद्र सरकार आम बजट पेश करेगी, इसलिए बाजार नियामकों और वित्त मंत्रालय की सहमति के बाद एक्सचेंज खुलने का निर्णय लिया गया है।

    बजट डे पर बाजार खुलने का मकसद

    सरकार का यह कदम निवेशकों को सीधे बजट के प्रभाव को बाजार में तुरंत देखने का मौका देने के लिए है। आम दिनों में शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहते हैं, लेकिन बजट जैसे अहम आर्थिक दिन को अपवाद माना गया है।

    बजट के फैसले सीधे शेयर बाजार पर असर डालते हैं। टैक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल मार्केट से जुड़े एलानों के आधार पर निवेशक अपनी रणनीति बनाते हैं। इसलिए बजट के दिन बाजार खुला रहने से अगले दिन बड़े उतार-चढ़ाव से बचा जा सकेगा।

    इकोनॉमिक सर्वे की तारीख

    आम बजट के दिन इकोनॉमिक सर्वे भी पेश किया जाता है। इस बार यह संभवत: 31 जनवरी (शनिवार) या 30 जनवरी (शुक्रवार) को संसद में पेश किया जाएगा। इकोनॉमिक सर्वे देश की आर्थिक स्थिति और नीतिगत दिशा का संकेत देता है, जिस पर निवेशकों की खास नजर रहती है।

    पहले भी खुल चुका है बाजार

    पहले भी बजट के दिन शेयर बाजार रविवार या शनिवार को खुल चुका है। उदाहरण के लिए, 1 फरवरी 2025 को शनिवार था और बाजार खुला था। वहीं, 28 फरवरी 1999 को रविवार को बजट पेश किया गया था।

    बजट की थीम पर कयास

    हालांकि बजट में अभी करीब 50 दिन बाकी हैं, लेकिन निवेशक पहले से ही अटकलें लगाने लगे हैं। उम्मीद है कि बजट में आयकर में राहत, इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े खर्च, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और कैपिटल मार्केट सुधार जैसे फैसले हो सकते हैं।

    कुल मिलाकर, रविवार को बजट पेश होना और शेयर बाजार खुलना निवेशकों के लिए रोमांचक रहेगा। सरकार का मकसद है कि बजट का असर अर्थव्यवस्था और बाजार पर तुरंत स्पष्ट रूप से दिखाई दे।