Tag: strategic partnership

  • भारत और दक्षिण कोरिया के बीच '2030 का मास्टरप्लान' तैयार; 50 बिलियन डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य के साथ शुरू हुआ आर्थिक दोस्ती का नया स्वर्णिम युग!

    भारत और दक्षिण कोरिया के बीच '2030 का मास्टरप्लान' तैयार; 50 बिलियन डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य के साथ शुरू हुआ आर्थिक दोस्ती का नया स्वर्णिम युग!

    नई दिल्ली। दिल्ली के हैदराबाद हाउस में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक आयोजित हुई जिसमें दोनों देशों ने अपने रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी संबंधों को नई मजबूती देने पर सहमति जताई। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के प्रधानमंत्री और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के बीच व्यापक चर्चा हुई जिसमें व्यापार विस्तार, निवेश सहयोग, तकनीकी विकास, सांस्कृतिक आदान प्रदान और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर गहन विचार किया गया। बैठक के बाद दोनों देशों ने आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई नए कदमों की घोषणा की और आने वाले वर्षों में साझेदारी को अधिक व्यापक और परिणाममुखी बनाने का संकल्प दोहराया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध पिछले कई वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं और दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की नींव और अधिक गहरी हुई है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों को एक मजबूत साझेदार बनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और दक्षिण कोरिया की साझेदारी इंडो पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    बैठक के दौरान आर्थिक सहयोग पर विशेष जोर दिया गया और दोनों देशों ने मौजूदा व्यापार को बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया। वर्तमान में यह व्यापार लगभग 27 बिलियन डॉलर के स्तर पर है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वित्तीय सहयोग को आसान बनाने, औद्योगिक साझेदारी को बढ़ाने और निवेश के नए अवसर खोलने पर सहमति बनी। इसके लिए एक नए वित्तीय सहयोग मंच की शुरुआत की गई है जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक लेनदेन और निवेश प्रक्रिया अधिक सरल हो सकेगी।

    औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है जो विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेगी। इसके साथ ही आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए एक नया संवाद तंत्र शुरू किया गया है। भारत में कोरियाई कंपनियों के लिए औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने की योजना पर भी सहमति बनी है जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।

    तकनीकी क्षेत्र में दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक नए डिजिटल सहयोग मंच की शुरुआत की जा रही है जो नवाचार और तकनीकी विकास को नई गति देगा। इसके अलावा जहाज निर्माण, इस्पात उद्योग और पर्यावरण अनुकूल विकास परियोजनाओं में भी संयुक्त प्रयासों पर सहमति बनी है।

    सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। दोनों देशों ने फिल्म, एनीमेशन और गेमिंग जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। शिक्षा, अनुसंधान और पर्यटन के क्षेत्र में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी नई पहल की जाएगी। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने भविष्य में सांस्कृतिक उत्सवों और आदान प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की बात कही।

    अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी दोनों देशों ने साझा दृष्टिकोण अपनाते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर सहमति जताई और एक शांतिपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की दिशा में सहयोग जारी रखने का संकल्प लिया।

  • मोम्बासा में भारतीय युद्धपोत ‘त्रिकंद’ का आगमन, सौंपे 100 राइफल और 50,000 गोलियां, रक्षा सहयोग को सशक्त किया गया

    मोम्बासा में भारतीय युद्धपोत ‘त्रिकंद’ का आगमन, सौंपे 100 राइफल और 50,000 गोलियां, रक्षा सहयोग को सशक्त किया गया


    नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन गाइडेड प्रक्षेपास्त्र युद्धपोत ‘त्रिकंद’ केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर पहुंच चुका है। इस दौरान भारत ने केन्याई रक्षा बलों को 100 इंसास राइफल और करीब 50,000 गोलियां सौंपे। इसके अतिरिक्त, भारत ने केन्या को 1.5 टेस्ला क्षमता वाली एमआरआई मशीन भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    युद्धपोत ‘त्रिकंद’ दक्षिण-पश्चिम हिन्द महासागर क्षेत्र में अपनी ऑपरेशनल तैनाती के तहत मोम्बासा पहुंचा है। इस दौरे के दौरान भारतीय उप-नौसेनाध्यक्ष कृष्णा स्वामीनाथन केन्या में मौजूद हैं। पोत के मोम्बासा प्रवास के दौरान कई पेशेवर, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही भारतीय दल केन्या रक्षा बलों को आवश्यक सामग्रियां भी सौंप रहा है।

    इस यात्रा के दौरान भारत और केन्या के बीच उच्चस्तरीय रक्षा संवाद भी हुआ। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने केन्या के रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की और सैन्य नेतृत्व के नियमित उच्चस्तरीय दौरों, संस्थागत बैठकों और बढ़ते रक्षा सहयोग की सराहना की। इसी क्रम में केन्या रक्षा बलों को 1.5 टेस्ला क्षमता वाली एमआरआई मशीन प्रदान करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

    मोम्बासा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उप-नौसेनाध्यक्ष कृष्णा स्वामीनाथन ने केन्या नौसेना के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओटिएनो को 100 राइफल और 50,000 गोलियां सौंपकर दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और भरोसे को मजबूत किया। मोम्बासा से प्रस्थान के बाद युद्धपोत ‘त्रिकंद’ केन्या नौसेना के जहाजों के साथ समुद्री अभ्यास करेगा। इस अभ्यास के माध्यम से दोनों देशों की नौसेनाएं सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करेंगी और संयुक्त संचालन क्षमता को और मजबूत करेंगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा भारत के ‘महासागर’ विजन के अनुरूप हिन्द महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस यात्रा के माध्यम से भारत और केन्या दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, समुद्री सहयोग और मानव सुरक्षा में सहयोग को और प्रगाढ़ किया जा रहा है।

  • जयशंकर ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला से की मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर हुई चर्चा

    जयशंकर ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला से की मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर हुई चर्चा


    नई दिल्ली/ भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत के राजकीय दौरे पर आए राष्ट्रपति लूला से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं उन्होंने बताया कि लूला ने साझा हितों और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए अपनी गाइडेंस और गर्मजोशी भरी भावनाओं का प्रदर्शन किया उन्होंने यह भी कहा कि आज बाद में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक से द्विपक्षीय संबंधों को नई रफ्तार मिलेगी इसके बाद ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और पीएम मोदी से भी मुलाकात की और उसके बाद दोनों नेता द्विपक्षीय बैठक करेंगे विदेश मंत्रालय ने पहले ही बताया था
    कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे प्रधानमंत्री आने वाले गणमान्य व्यक्ति के सम्मान में लंच होस्ट करेंगे और आपसी हितों के क्षेत्रीय और ग्लोबल मुद्दों पर विचार करेंगे जिसमें बहुपक्षीय फोरम में सहयोग रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरलिज्म ग्लोबल गवर्नेंस और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दे शामिल हैं राष्ट्रपति लूला दूसरे एआई इम्पैक्ट समिट के लिए 18 फरवरी को भारत आए उनके साथ करीब 14 मंत्री और ब्राजील की कंपनियों के टॉप सीईओ का डेलीगेशन भी है जो अपने भारतीय समकक्षों के साथ मीटिंग करेंगे
    यह राष्ट्रपति लूला का भारत का छठा दौरा है वे पहली बार 2004 में रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन के गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में भारत आए थे और आखिरी बार सितंबर 2023 में जी20 समिट के लिए भारत आए थे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला अक्सर मिलते रहे हैं प्रधानमंत्री 7 से 8 जुलाई 2025 तक राजकीय दौरे पर ब्रासीलिया में थे और नवंबर 2025 में जी20 के दौरान जोहान्सबर्ग में भी उनकी मुलाकात हुई भारत और ब्राजील के बीच करीबी और रणनीतिक साझेदारी साझा डेमोक्रेटिक मूल्यों लोगों के बीच गहरे रिश्तों और खास सेक्टरों में बढ़ते सहयोग पर आधारित है दोनों देश 2006 से रणनीतिक साझेदार हैं
    ब्राजील एलएसी इलाके में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और व्यापार निवेश रक्षा कृषि स्वास्थ्य फार्मास्यूटिकल्स ऊर्जा जिसमें रिन्यूएबल्स जरूरी मिनरल्स रेयर अर्थ मटीरियल्स साइंस टेक्नोलॉजी और नवाचार शामिल हैं जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का जुड़ाव लगातार गहरा होता जा रहा है
    इसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एआई स्पेस और लोगों के बीच जुड़ाव के क्षेत्र में सहयोग भी शामिल है दोनों देश यूएन रिफॉर्म्स क्लाइमेट चेंज और आतंकवाद से लड़ने जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समान विचार रखते हैं विदेश मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति लूला का यह राजकीय दौरा दोनों पक्षों को आपसी फायदे के मुद्दों पर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और द्विपक्षीय क्षेत्रीय और ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर सहयोग को और गहरा करने का अवसर देगा
  • भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर

    भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि भारत और फ्रांस मिलकर विश्व का पहला हेलीकॉप्टर बनाएंगे, जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकेगा।

    पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा:

    फ्रांस भारत का सबसे पुराना स्ट्रैटजिक पार्टनर है। दोनों देश अब स्पेशल, ग्लोबल और स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप के रूप में संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य वैश्विक स्थिरता और प्रगति सुनिश्चित करना है। भारत और फ्रांस मिलकर इंडस्ट्री और इनोवेशन में सहयोग करेंगे, और स्टूडेंट और रिसर्च एक्सचेंज को बढ़ावा देंगे।

    हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी भारत-फ्रांस संबंधों में अभूतपूर्व गति लाएगा। यह परियोजना दोनों देशों के उच्च तकनीक और एविएशन अनुसंधान में सहयोग को भी दर्शाती है और हेलीकॉप्टर उद्योग में नई प्रौद्योगिकी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

    एवरेस्ट तक उड़ान भरने वाला हेलीकॉप्टर: दुनिया में पहला भारत-फ्रांस तकनीकी और औद्योगिक सहयोग ग्लोबल स्ट्रैटिजिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूती शिक्षा और रिसर्च एक्सचेंज को सुगम बनाना यह घोषणा भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते तकनीकी, औद्योगिक और वैश्विक सहयोग का प्रतीक है।

    तीन दिन का आधिकारिक दौरा
    फ्रांस के राष्ट्रपति 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा दौरा है और मुंबई में उनका पहला आधिकारिक कार्यक्रम है। राष्ट्रपति मैक्रों भारत सरकार के निमंत्रण पर एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं। इस दौरे के दौरान वह 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में भी शामिल होंगे।

    भारत रवाना होने से पहले क्या बोले मैक्रों
    भारत आने से पहले राष्ट्रपति मैक्रों ने एक्स पर लिखा था कि वह मुंबई से नई दिल्ली तक तीन दिन के दौरे पर आ रहे हैं, ताकि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि उनके साथ व्यापार, उद्योग, संस्कृति और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोग भी भारत आ रहे हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आगे लिखा, साथ मिलकर हम अपने सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे। कल मिलते हैं, मेरे प्यारे दोस्त नरेंद्र मोदी।

  • मुंबई में मोदी मैक्रों शिखर वार्ता: रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी, ‘नवाचार वर्ष 2026’ का होगा शुभारंभ

    मुंबई में मोदी मैक्रों शिखर वार्ता: रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी, ‘नवाचार वर्ष 2026’ का होगा शुभारंभ


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 फरवरी 2026 को मुंबई के दौरे पर रहेंगे जहां वे फ्रांस गणराज्य के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत की औपचारिक यात्रा पर रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा भारत फ्रांस संबंधों के लिए विशेष महत्व रखती है और इसे रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा और मुंबई का पहला दौरा होगा जिससे इस मुलाकात की प्रतीकात्मक और कूटनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

    मुंबई प्रवास के दौरान लगभग दोपहर 3:15 बजे दोनों नेता लोक भवन में द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे। इन बैठकों में भारत फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न आयामों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। रक्षा समुद्री सुरक्षा अंतरिक्ष परमाणु ऊर्जा जलवायु परिवर्तन शिक्षा प्रौद्योगिकी और इंडो पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे। दोनों नेता साझेदारी को नए और उभरते क्षेत्रों विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता साइबर सुरक्षा हरित ऊर्जा और डिजिटल नवाचार तक विस्तारित करने की संभावनाओं पर भी विचार करेंगे। साथ ही वे क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण साझा करेंगे जिनमें बदलता भू राजनीतिक परिदृश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने जैसे विषय शामिल रह सकते हैं।

    राष्ट्रपति मैक्रों अपनी यात्रा के दौरान भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भी हिस्सा लेंगे जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण मंच है। इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और अनुसंधान साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने पर बल दिए जाने की संभावना है।

    शाम लगभग 5:15 बजे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से भारत फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर दोनों देश व्यवसायिक नेताओं स्टार्ट अप प्रतिनिधियों वैज्ञानिकों शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों के एक विशेष सम्मेलन को संबोधित करेंगे। नवाचार वर्ष का उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों स्टार्ट अप पारिस्थितिकी तंत्र अनुसंधान एवं विकास तथा युवा उद्यमिता के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देना है। इससे दोनों देशों के उद्योग जगत और अकादमिक संस्थानों के बीच साझेदारी को सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह शिखर वार्ता न केवल पारंपरिक रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करेगी बल्कि भविष्य की प्रौद्योगिकियों और सतत विकास के क्षेत्रों में भी साझा दृष्टि को आगे बढ़ाएगी। मुंबई में होने वाली यह उच्चस्तरीय मुलाकात भारत फ्रांस संबंधों को नई ऊर्जा देने और वैश्विक मंच पर दोनों देशों की साझी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।

  • भारत की आबादी ही उसकी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत है: अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो

    भारत की आबादी ही उसकी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत है: अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो


    नई दिल्ली ।अमेरिका में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो अगस्टिन कॉसिनो ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर बड़ा बयान दिया है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ खास बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत उसकी विशाल आबादी है। उनके अनुसार भारत न केवल दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है बल्कि यहां के लोगों में टैलेंट और क्रिएटिव सोच की भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

    राजदूत कॉसिनो ने कहा कि जब भारत सरकार ने पाबंदियां, सीमाएं और अनावश्यक रेगुलेशन हटाए तो भारतीय लोगों की क्षमताएं खुलकर सामने आईं। यही वजह है कि पिछले दस से पंद्रह वर्षों में भारत ने उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति की है। उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत उसके लोग हैं और यही उसे आगे बढ़ा रही है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण पर बात करते हुए अर्जेंटीना के राजदूत ने कहा कि पीएम मोदी को बड़ी सफलता मिली है क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में छह से आठ प्रतिशत की दर से बढ़ी है। उन्होंने इसे आर्थिक नीति और विनियमन में ढील का सफल उदाहरण बताया।

    कॉसिनो ने यह भी साझा किया कि जब प्रधानमंत्री मोदी अर्जेंटीना गए थे तब उन्हें राष्ट्रपति जेवियर माइली के साथ हुई बैठक में शामिल होने का अवसर मिला था। इस दौरान विनियमन में ढील अनावश्यक नियमों को हटाने और लोगों को कम से कम सरकारी हस्तक्षेप के साथ आगे बढ़ने का मौका देने जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।भारत में विदेशी निवेश को लेकर पूछे गए सवाल पर राजदूत ने कहा कि वह भारत को यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि उसे क्या करना चाहिए क्योंकि यह एक घरेलू नीति का विषय है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि जब देश अपनी अर्थव्यवस्था खोलते हैं और ज्यादा उत्पादों को आने की अनुमति देते हैं तो इसका फायदा उपभोक्ताओं और घरेलू खपत दोनों को मिलता है।

    उन्होंने आगे कहा कि भारत इस दिशा में अच्छा काम कर रहा है और अर्जेंटीना भारत की खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा में और अधिक योगदान देने के लिए तैयार है। उनके अनुसार भारत और अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के लिए पूरक हैं और यह रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकती है।

  • भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा

    भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को चार साल बाद भारत पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेता गले मिले और एक ही कार में बैठकर PM निवास पहुंचे, जहां पुतिन के सम्मान में प्राइवेट डिनर आयोजित किया गया। यह दृश्य सिर्फ कूटनीति नहीं था बल्कि दुनिया को भारत-रूस की रणनीतिक गहराई का मजबूत संदेश भी था। इस दौरे को अमेरिका, यूरोप, यूक्रेन और ग्लोबल मीडिया ने बेहद करीब से कवर किया क्योंकि यह ऐसे वक्त हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की धुरी बदल रही है-ट्रम्प के दोबारा सत्ता में आने रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच।

    ब्रिटेन: रूस अलग-थलग नहीं, भारत उसका अहम साथी
    मिडिया के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा इस बात का संकेत है कि रूस वैश्विक मंच पर अकेला नहीं है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, विशाल मार्केट है और रूस के लिए ऊर्जा, रक्षा और कौशल-आधारित कामगारों का प्रमुख स्रोत भी। रूस को उम्मीद है कि भारत सस्ती तेल खरीद और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाएगा।रूस भारत को Su-57 फाइटर जेट और नए एयर डिफेंस सिस्टम की पेशकश कर सकता है।

    कीव इंडिपेंडेंट यूक्रेन: भारत की कूटनीति की कठिन परीक्षा

    यूक्रेनी मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक परीक्षा बताया। भारत को रूस और यूक्रेन दोनों से रिश्ते संभालने हैं। रूस चाहता है कि भारत उसके साथ खड़ा दिखे, जबकि अमेरिका-यूरोप उम्मीद करते हैं कि मोदी पुतिन पर दबाव डालें ताकि युद्ध कमजोर पड़े।
    यूक्रेन को यह चिंता भी है कि क्या मोदी उस वादे पर टिके रहेंगे जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से युद्ध खत्म कराने में मदद का आश्वासन दिया था। साथ ही, भारत का तटस्थ रुख ध्यान खींचता है-UN में रूस के खिलाफ कई प्रस्तावों पर भारत ने वोटिंग से दूरी बनाई है।

    द डॉन पाकिस्तान: रक्षा से ज्यादा व्यापार पर फोकस
    पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने लिखा कि पुतिन का यह दौरा रक्षा सहयोग और खासकर आर्थिक रिश्तों को मजबूती देने पर केंद्रित है। अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है, वहीं ट्रम्प प्रशासन ने अगस्त में भारत के कई उत्पादों पर 50% टैरिफ भी लगा दिया था। रूस भारत को अधिक S-400 सिस्टम और Su-57 जेट के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दे सकता है।भारत को डर है कि रूस से किसी बड़ी डील का असर अमेरिका के साथ उसके आर्थिक रिश्तों पर पड़ सकता है।

    अल जजीरा कतर: मोदी-पुतिन का व्यक्तिगत रिश्ता जगजाहिर
    अल जजीरा ने जोर दिया कि मोदी द्वारा एयरपोर्ट पर जाकर गले लगाना व्यक्तिगत संबंधों की मजबूती का संकेत है। पुतिन ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को रूसी तेल खरीदने का पूरा हक है और यह साझेदारी यूक्रेन युद्ध से प्रभावित नहीं होगी। भारत के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है2022 से पहले रूस से सिर्फ 2.5% तेल आता था, अब यह बढ़कर करीब 36% हो गया है, जिससे भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया है।

    द गार्डियन (ब्रिटेन): रूस-भारत अमेरिकी दबाव से नहीं डरते

    द गार्डियन के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-भारत संबंध ट्रम्प की टैरिफ नीति के कारण तनावपूर्ण हैं। इस पृष्ठभूमि में पुतिन का दिल्ली पहुंचना यह संकेत है कि भारत-रूस अपने रणनीतिक हितों को किसी तीसरे देश के दबाव पर आधारित नहीं करते। रूस के लिए यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय अलगाव की धारणा तोड़ने का मंच है जबकि भारत के लिए यह संतुलन साधने का कठिन लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास।

    भारत-रूस रिश्तों की नई परिभाषा

    पुतिन की यह यात्रा प्रतीकात्मक भी है और रणनीतिक भी।
    यह दिखाती है कि- भारत रूस को ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा का अनिवार्य स्तंभ मानता है
    रूस भारत को एशिया में अपना सबसे विश्वसनीय साझेदार और अमेरिका को यह संदेश है कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है। दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थीं, बल्कि उस रिश्ते की झलक थीं जो वैश्विक ध्रुवीयता के बदलते दौर में भी मजबूती से खड़ा है