भारत और दक्षिण कोरिया के बीच '2030 का मास्टरप्लान' तैयार; 50 बिलियन डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य के साथ शुरू हुआ आर्थिक दोस्ती का नया स्वर्णिम युग!

नई दिल्ली। दिल्ली के हैदराबाद हाउस में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक आयोजित हुई जिसमें दोनों देशों ने अपने रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी संबंधों को नई मजबूती देने पर सहमति जताई। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के प्रधानमंत्री और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के बीच व्यापक चर्चा हुई जिसमें व्यापार विस्तार, निवेश सहयोग, तकनीकी विकास, सांस्कृतिक आदान प्रदान और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर गहन विचार किया गया। बैठक के बाद दोनों देशों ने आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई नए कदमों की घोषणा की और आने वाले वर्षों में साझेदारी को अधिक व्यापक और परिणाममुखी बनाने का संकल्प दोहराया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के संबंध पिछले कई वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं और दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की नींव और अधिक गहरी हुई है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों को एक मजबूत साझेदार बनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और दक्षिण कोरिया की साझेदारी इंडो पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

बैठक के दौरान आर्थिक सहयोग पर विशेष जोर दिया गया और दोनों देशों ने मौजूदा व्यापार को बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया। वर्तमान में यह व्यापार लगभग 27 बिलियन डॉलर के स्तर पर है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वित्तीय सहयोग को आसान बनाने, औद्योगिक साझेदारी को बढ़ाने और निवेश के नए अवसर खोलने पर सहमति बनी। इसके लिए एक नए वित्तीय सहयोग मंच की शुरुआत की गई है जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक लेनदेन और निवेश प्रक्रिया अधिक सरल हो सकेगी।

औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है जो विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेगी। इसके साथ ही आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए एक नया संवाद तंत्र शुरू किया गया है। भारत में कोरियाई कंपनियों के लिए औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने की योजना पर भी सहमति बनी है जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।

तकनीकी क्षेत्र में दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक नए डिजिटल सहयोग मंच की शुरुआत की जा रही है जो नवाचार और तकनीकी विकास को नई गति देगा। इसके अलावा जहाज निर्माण, इस्पात उद्योग और पर्यावरण अनुकूल विकास परियोजनाओं में भी संयुक्त प्रयासों पर सहमति बनी है।

सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। दोनों देशों ने फिल्म, एनीमेशन और गेमिंग जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। शिक्षा, अनुसंधान और पर्यटन के क्षेत्र में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी नई पहल की जाएगी। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने भविष्य में सांस्कृतिक उत्सवों और आदान प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की बात कही।

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी दोनों देशों ने साझा दृष्टिकोण अपनाते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर सहमति जताई और एक शांतिपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की दिशा में सहयोग जारी रखने का संकल्प लिया।