Tag: Student Protest

  • जंतर मंतर पुलिस कार्रवाई के विरोध में भोपाल में बड़ा आंदोलन, प्रदेशभर से नीलम पार्क पहुंचेंगे छात्र-युवा

    जंतर मंतर पुलिस कार्रवाई के विरोध में भोपाल में बड़ा आंदोलन, प्रदेशभर से नीलम पार्क पहुंचेंगे छात्र-युवा


    मध्यप्रदेश । राजधानी भोपाल गुरुवार को प्रदेशव्यापी छात्र आंदोलन का केंद्र बनने जा रही है। दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से छात्र और युवा भोपाल के नीलम पार्क में एकत्र होंगे। यह प्रदर्शन मूवमेंट अगेंस्ट अनएम्प्लॉयमेंट के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है, जिसमें नर्सिंग छात्र सहित विभिन्न छात्र संगठनों और युवाओं के शामिल होने का दावा किया गया है।

    आयोजकों के अनुसार आंदोलन का उद्देश्य केवल दिल्ली की घटना का विरोध करना नहीं बल्कि युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से उठाना भी है। प्रदर्शन के दौरान बढ़ती बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं, परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताएं, मध्यप्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े, सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने का विरोध तथा विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर भर्ती की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी प्रदर्शन का प्रमुख हिस्सा रहेगी।

    आयोजकों का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा भोपाल पहुंच रहे हैं। उनका दावा है कि आंदोलन में हजारों प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए विभिन्न जिलों में पहले से तैयारियां की गई थीं और बड़ी संख्या में छात्र संगठनों ने समर्थन देने की घोषणा भी की है।

    दूसरी ओर संभावित भीड़ और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भोपाल पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। नीलम पार्क और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदर्शन स्थल के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई है तथा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बल और आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखे गए हैं।

    प्रशासन की ओर से प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कानून व्यवस्था प्रभावित न हो। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। वहीं आयोजकों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

    हाल के दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और रोजगार के मुद्दों को लेकर युवाओं में असंतोष लगातार बढ़ा है। ऐसे में भोपाल में होने वाला यह राज्यव्यापी प्रदर्शन प्रदेश की राजनीति और छात्र आंदोलनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आंदोलन के बाद सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

  • NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग

    NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने NEET परीक्षा विवाद पेपर लीक और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के जरिए अपने आरोपों और मांगों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है लेकिन सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे नजरअंदाज कर रही है। राहुल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ धक्का मुक्की की और उन्हें घसीटा गया जिससे उनके मुंह से खून निकल आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनके कान में सरकार बदलने की बात कही।

    राहुल गांधी ने कहा कि NEET पेपर लीक का असर केवल परीक्षा देने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है बल्कि लगभग साढ़े सात करोड़ छात्र और उनके परिवार इससे प्रभावित हुए हैं। उनका आरोप था कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं लेकिन किसी भी बड़े मामले में दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है और मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े वीडियो भी दिखाए और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने भविष्य को लेकर आवाज उठा रहे थे तब उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है न कि उन्हें दबाना।

    राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार NEET परीक्षा की तैयारी पर लगभग उतनी ही राशि खर्च करते हैं जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर खर्च करती है। उनके अनुसार लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक आर्थिक और मानसिक संघर्ष करते हैं लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार ने उसे कमजोर किया है।

    इस दौरान राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। दूसरी मांग छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। तीसरी मांग प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो उसे जवाबदेही तय करनी होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष छात्रों की हर लोकतांत्रिक मांग के साथ खड़ा है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और यदि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा खत्म हो गया तो देश की प्रतिभा और विकास दोनों प्रभावित होंगे। इसी कारण विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सरकार से जवाब मांगता रहेगा।

    Tags (English)

    Rahul Gandhi, NEET Paper Leak, Dharmendra Pradhan, Student Protest, Indian Politics

  • पेपर लीक के विरोध में शिवपुरी के छात्र लामबंद, आंदोलन की अनुमति के लिए कलेक्टर को दिया ज्ञापन

    पेपर लीक के विरोध में शिवपुरी के छात्र लामबंद, आंदोलन की अनुमति के लिए कलेक्टर को दिया ज्ञापन


    शिवपुरी । पेपर लीक की लगातार सामने आ रही घटनाओं के विरोध में अब शिवपुरी के छात्र-छात्राओं ने भी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को लेकर छात्राओं ने जिला प्रशासन से शांतिपूर्ण धरना और रैली की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग रहा है और अब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ सरकार की जवाबदेही तय होना जरूरी है।

    मंगलवार को छात्रा सोम्या और श्रुति जैन ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने बताया कि देशभर में पेपर लीक के मामलों को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन से प्रेरित होकर शिवपुरी के छात्र भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए अपने जिले में शांतिपूर्ण आंदोलन आयोजित करने का निर्णय लिया है।

    छात्राओं ने 21 से 24 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक शहर के पोलो ग्राउंड और माधव चौक पर धरना देने की अनुमति मांगी है। इसके साथ ही शहर में शांतिपूर्ण रैली निकालने का भी प्रस्ताव रखा गया है। उनका कहना है कि आंदोलन पूरी तरह संविधान के दायरे में रहेगा और किसी प्रकार की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।

    आवेदन में छात्राओं ने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का प्रयोग है। प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा जाएगा, जिसमें परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

    छात्राओं का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं का मनोबल पेपर लीक जैसी घटनाओं से टूट रहा है। इससे न केवल ईमानदार अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है बल्कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो युवाओं का भरोसा पूरी परीक्षा व्यवस्था से उठ सकता है।

    फिलहाल छात्र-छात्राएं जिला प्रशासन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यदि अनुमति मिलती है तो शिवपुरी में आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में युवा सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। यह आंदोलन केवल पेपर लीक के विरोध तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, निष्पक्ष जांच और जवाबदेह व्यवस्था की मांग को भी प्रमुखता से उठाएगा। अब निगाहें प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं कि वह इस शांतिपूर्ण आंदोलन को अनुमति देता है या नहीं।

  • NEET और भर्ती घोटालों के खिलाफ छात्रों का अनोखा आंदोलन, डिलीवरी बॉय से ड्राइवर तक कर रहे सहयोग

    NEET और भर्ती घोटालों के खिलाफ छात्रों का अनोखा आंदोलन, डिलीवरी बॉय से ड्राइवर तक कर रहे सहयोग


    इंदौर । इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर 23 सूत्रीय मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार आठवें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी राजनीतिक दल या बड़े संगठन के बजाय आम लोगों का सहयोग मिल रहा है। धरना स्थल पर टेंट, गद्दे, भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं समाज के लोगों और छात्रों के सहयोग से संचालित की जा रही हैं। कई युवा अपनी रोज की कमाई का हिस्सा भी आंदोलन के लिए दे रहे हैं ताकि प्रदर्शन बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

    प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने आंदोलन शुरू किया था तब उनके पास बैठने और बारिश से बचने तक की व्यवस्था नहीं थी। शुरुआती दिनों में बारिश से बचने के लिए उन्हें अपने बैठने वाले गद्दों को ही ओढ़ना पड़ा। इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो कई सामाजिक संगठन और स्थानीय नागरिक उनकी मदद के लिए आगे आए। इसके बाद धरना स्थल पर टेंट, गद्दे और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई।

    छात्रों की मांग है कि नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, रिक्त और बैकलॉग पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू हो तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि जब तक उनकी 23 सूत्रीय मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    धरना स्थल पर मौजूद पवन अहिरवार और अरुण बड़ोले ने बताया कि रोजाना टेंट और अन्य व्यवस्थाओं पर करीब 1500 रुपये खर्च होते हैं। यह राशि आम नागरिकों के स्वैच्छिक सहयोग से जुटाई जा रही है। इसके लिए धरना स्थल पर सहयोग पेटी भी रखी गई है, जिसमें लोग अपनी इच्छा से आर्थिक सहायता दे रहे हैं। कई छात्र स्वयं लोगों से संपर्क कर आंदोलन के लिए सहयोग की अपील भी कर रहे हैं।

    इस आंदोलन में आम लोगों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। पेशे से ड्राइवर दिनेश वास्कले ने बताया कि उनके छोटे बच्चे हैं और वे नहीं चाहते कि भविष्य में उन्हें भी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का सामना करना पड़े। उन्होंने अपना जन्मदिन भी धरना स्थल पर मनाया और उस दिन सभी छात्रों के भोजन की व्यवस्था की। वहीं डिलीवरी बॉय चंदन मोवेल ने कहा कि वह अपनी कमाई का एक हिस्सा आंदोलन के लिए नियमित रूप से दे रहे हैं। इसी तरह कई अन्य युवाओं ने भी छात्रों के समर्थन में आर्थिक सहयोग दिया है।

    धरने में शामिल छात्रों के अनुसार रात के समय भी 15 से 20 छात्र लगातार धरना स्थल पर मौजूद रहते हैं, जबकि सुबह और शाम करीब 100 छात्र आंदोलन में शामिल होते हैं। उनका आरोप है कि अब तक प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी मांगों पर चर्चा करने नहीं पहुंचा है।

    एलएलएम के छात्र अनिल विद्याराणा ने बताया कि विभिन्न छात्र संगठनों का भी आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। कई संगठन धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों का मनोबल बढ़ा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।

  • NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    इंदौर । इंदौर में NEET पेपर लीक मामले और छात्रों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। टंट्याभील चौराहे पर छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बारिश के बावजूद धरनास्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने टेंट लगाकर अपना आंदोलन जारी रखा और नारेबाजी, कैंडल मार्च, हवन तथा क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठनों का कहना है कि देशभर में सामने आए NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के संबंध में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।

    धरने में केवल NEET परीक्षा का मुद्दा ही नहीं बल्कि प्रदेश के छात्रों से जुड़े कई अन्य विषय भी शामिल किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान, छात्रावास की बेहतर सुविधाएं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कुल 23 मांगों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा है। उनका कहना है कि छात्रों की समस्याओं का लंबे समय से समाधान नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    धरनास्थल पर पिछले सात दिनों के दौरान कई प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने दिवंगत छात्रों की स्मृति में कैंडल मार्च निकाला, हवन किया और थाली बजाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य छात्रों की आवाज शासन तक पहुंचाना है।

    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों के सामने सभी मांगें रखी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में आगामी दिनों में विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छात्र संगठनों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। उनका आग्रह है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में भी शीघ्र कदम उठाए जाएं।

  • शिकायतों पर नहीं हुई सुनवाई, सड़क पर उतरीं छात्राएं तो दौड़ी बिजली कंपनी

    शिकायतों पर नहीं हुई सुनवाई, सड़क पर उतरीं छात्राएं तो दौड़ी बिजली कंपनी


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के पिछोर कस्बे की पाल कॉलोनी में चार दिनों तक बिजली आपूर्ति ठप रहने से लोगों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। लगातार शिकायतों और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कॉलोनी की छात्राएं सड़क पर उतर आईं। गुरुवार रात बिजली वितरण कंपनी के कार्यालय के सामने उन्होंने चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। करीब आधे घंटे तक मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और जैसे ही मामला प्रशासन तक पहुंचा बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हरकत में आ गए। इसके बाद टूटी हुई बिजली लाइन की मरम्मत का काम शुरू किया गया और बिजली बहाल करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई।

    जानकारी के अनुसार पाल कॉलोनी की घरेलू बिजली लाइन टूट जाने के कारण पूरे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति पिछले चार दिनों से बंद थी। लगातार अंधेरे में रहने से लोगों को पीने के पानी घरेलू कामकाज और गर्मी से राहत पाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा था। सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्राओं को हो रही थी जो परीक्षा और नियमित पढ़ाई की तैयारी कर रही थीं। बिजली नहीं होने के कारण रात में पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही थी और मोबाइल फोन तक चार्ज नहीं हो पा रहे थे जिससे ऑनलाइन पढ़ाई और जरूरी संपर्क भी बाधित हो रहे थे।

    प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने बताया कि वे समय पर बिजली बिल जमा करती हैं लेकिन इसके बावजूद विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा था। उन्होंने कई बार बिजली वितरण कंपनी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन भी किए लेकिन किसी ने समस्या का समाधान नहीं किया। उनका आरोप था कि कई अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे थे और शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। इसी उपेक्षा से नाराज होकर छात्राओं ने सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया।

    गुरुवार रात प्रियंका लोधी सहित दर्जनभर छात्राएं बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचीं और मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्काजाम शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने साफ कहा कि जब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होगी तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगी। अचानक हुए प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब आधे घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों ने भी छात्राओं की मांगों का समर्थन करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

    स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन भी सक्रिय हो गया। एसडीएम ममता शाक्य के निर्देश पर पुलिस और बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें जल्द समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। इसके साथ ही बिजली कर्मचारियों ने तत्काल टूटी लाइन की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। जैसे ही मरम्मत कार्य शुरू हुआ छात्राओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग ने शुरुआती शिकायतों पर ही कार्रवाई कर दी होती तो लोगों को चार दिनों तक अंधेरे में नहीं रहना पड़ता और सड़क पर उतरकर विरोध करने की नौबत भी नहीं आती। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम लोगों की समस्याओं का समाधान आखिर शिकायतों से होगा या फिर प्रदर्शन के बाद ही प्रशासन और विभाग जागेंगे।

  • NEET एग्जाम रद्द होने से बवाल, छात्रों की पीड़ा आई सामने-“डिप्रेशन का इलाज करने वाले खुद डिप्रेशन में

    NEET एग्जाम रद्द होने से बवाल, छात्रों की पीड़ा आई सामने-“डिप्रेशन का इलाज करने वाले खुद डिप्रेशन में


    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित परीक्षा को कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतों के बाद रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया है। इस फैसले ने देशभर के करीब 22 लाख छात्रों को सीधे प्रभावित किया है।

    परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों में गहरा आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है। कई छात्रों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से केवल इसी परीक्षा की तैयारी में जुटे थे, लेकिन बार-बार होने वाले बदलाव और अनिश्चितता ने उनके मानसिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

    इस पूरे मामले ने परीक्षा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि जिस परीक्षा के जरिए उनकी योग्यता तय होती है, उसी को आयोजित करने वाली एजेंसी की पारदर्शिता पर बार-बार सवाल उठना चिंता का विषय है।

    NEET-UG जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा को लेकर यह स्थिति छात्रों के भविष्य पर सीधा असर डाल रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार बदलते फैसलों और दोबारा परीक्षा के निर्णय से उनका मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल छात्रों के आत्मविश्वास को कमजोर करती हैं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर भी सवाल खड़े करती हैं। अभ्यर्थी अब मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

    फिलहाल, दोबारा परीक्षा की नई तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन छात्रों की नजरें अब आगे के आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं।

  • झांसी बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में लॉ छात्र से मारपीट का मामला: विरोध के बाद गार्ड सस्पेंड, छात्रों का धरना जारी

    झांसी बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी में लॉ छात्र से मारपीट का मामला: विरोध के बाद गार्ड सस्पेंड, छात्रों का धरना जारी



    नई दिल्ली। झांसी स्थित Bundelkhand University में लॉ छात्र के साथ हुई कथित मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद छात्रों के भारी विरोध और प्रदर्शन के बीच आरोपी सिक्योरिटी गार्ड को निलंबित कर दिया गया है।

    क्या है पूरा मामला?
    घटना विश्वविद्यालय के परीक्षा भवन में हुई बताई जा रही है, जहां लॉ विभाग के छात्र परीक्षा देने पहुंचे थे। इसी दौरान सुरक्षा गार्ड और छात्रों के बीच विवाद हो गया, जो बाद में मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

    छात्रों का गुस्सा और प्रदर्शन
    आरोपी गार्ड पर कार्रवाई न होने से नाराज छात्रों ने सोमवार को  यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। करीब 5 घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की  इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हल्की झड़प भी हुई।

    गार्ड सस्पेंड, लेकिन छात्र अब भी नाराज
    बढ़ते विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी सिक्योरिटी गार्ड अमित को निलंबित कर दिया है।लेकिन छात्र अभी भी मांग कर रहे हैं किअन्य जिम्मेदार गार्डों पर भी कार्रवाई होसार्वजनिक माफी दी जाए।सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जाए।

    छात्र संगठनों का समर्थन
    इस आंदोलन को कई छात्र संगठनों का समर्थन मिला, जिनमें शामिल हैं:एबीवीपी एनएसयूआई
    समाजवादी छात्रसभाआजाद समाज पार्टी छात्र संगठन सभी ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर 7 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा।आंदोलन और तेज किया जाएगाBundelkhand University में हुआ यह मामला अब सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत और तनाव दोनों जारी हैं।

  • जेएनयू में फिर टकराव की स्‍थ‍िति बनी, अभाविप का उग्र विरोध सामने आया

    जेएनयू में फिर टकराव की स्‍थ‍िति बनी, अभाविप का उग्र विरोध सामने आया


    नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर छात्र राजनीति और प्रशासनिक फैसलों को लेकर विवाद के केंद्र में आ गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की जेएनयू इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्कासन और भारी जुर्माने की कार्रवाई को तानाशाही करार दिया है। संगठन का कहना है कि छात्र आंदोलनों को दबाने के लिए प्रशासन दमनकारी नीतियों का सहारा ले रहा है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    अभाविप के अनुसार, हाल के दिनों में कई छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, जिसमें निष्कासन और आर्थिक दंड शामिल हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन इन कदमों के जरिए सक्रिय छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन है, उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ भी सीधा खिलवाड़ है।

    संगठन ने इन फैसलों को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि जुर्माने की राशि इतनी अधिक रखी गई है कि आम छात्र के लिए उसे भर पाना बेहद मुश्किल है। अभाविप जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि कुछ मामलों में जुर्माना करीब 4,83,000 रुपये तक लगाया गया है, जो प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। उनका कहना है कि यह कदम छात्रों को डराने और आंदोलन को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

    विरोध जताने के लिए अभाविप कार्यकर्ताओं ने परिसर में दमनकारी आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। संगठन ने इसे प्रतीकात्मक विरोध बताते हुए कहा कि यह उस व्यवस्था के खिलाफ चेतावनी है जो छात्रों के अधिकारों को कुचलने की कोशिश कर रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई मजबूती से जारी रहेगी।

    इस पूरे विवाद के केंद्र में CPO (चीफ प्रॉक्टर ऑफिस) मैनुअल भी है, जिसे लेकर अभाविप शुरू से ही विरोध जता रही है। संगठन का कहना है कि यह मैनुअल जेएनयू जैसे खुले और लोकतांत्रिक माहौल वाले विश्वविद्यालय के लिए खतरा है। अभाविप के मुताबिक, इसके प्रावधान छात्रों की स्वतंत्रता को सीमित करते हैं और प्रशासन को अत्यधिक अधिकार देते हैं। संगठन ने मांग की है कि इस मैनुअल को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

    अभाविप नेताओं का आरोप है कि प्रशासन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए कठोर नियमों का सहारा ले रहा है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय को संवाद और सहयोग के जरिए चलाया जाना चाहिए, न कि दंड और निष्कासन के जरिए। संगठन ने साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रवादी छात्र किसी भी तरह की कायराना कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। हालांकि, अभाविप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह विरोध के नाम पर अराजकता और तोड़-फोड़ का समर्थन नहीं करती। संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय की सार्वजनिक संपत्ति उसकी धरोहर है और उसे नुकसान पहुंचाना किसी भी तरह से उचित नहीं है। इस दौरान अभाविप ने वामपंथी छात्र संगठनों पर परिसर में तोड़-फोड़ की राजनीति करने का आरोप लगाया और उसकी कड़ी निंदा की।

    अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने प्रशासन की कार्रवाई को गुंडागर्दी करार देते हुए कहा कि छात्रों को डराने की रणनीति अब काम नहीं आने वाली है। उन्होंने कहा कि निष्कासन और भारी जुर्मानों के आदेशों को जलाकर संगठन ने यह साफ संदेश दे दिया है कि वह इन फैसलों को स्वीकार नहीं करता। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने अपने फैसलों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो विरोध और तेज हो सकता है। मयंक पंचाल ने कहा कि उनका मुख्य विरोध उस ढांचे के खिलाफ है, जिसमें छात्रों को निष्कासित कर उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने निष्कासित छात्रों की तत्काल बहाली और लगाए गए जुर्मानों को वापस लेने की मांग दोहराई। उनके अनुसार, यह पूरे परिसर के लोकतांत्रिक माहौल का सवाल है।

    इस घटनाक्रम ने जेएनयू में एक बार फिर प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच तनाव को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर छात्र संगठन इसे अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इस दौरान अभाविप ने अंत में दोहराया कि वह सामान्य छात्रों के हितों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। संगठन का कहना है कि प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ उसकी लड़ाई अंतिम निर्णय तक जारी रहेगी और वह किसी भी स्तर पर छात्रों की आवाज को दबने नहीं देगा।

  • आधी रात का विद्रोह: हरदा एकलव्य विद्यालय के 400 बच्चों का पैदल मार्च, अधीक्षिका पर मानसिक प्रताड़ना और बदइंतजामी के आरोप

    आधी रात का विद्रोह: हरदा एकलव्य विद्यालय के 400 बच्चों का पैदल मार्च, अधीक्षिका पर मानसिक प्रताड़ना और बदइंतजामी के आरोप


    हरदा । हरदा जिले के रहटगांव तहसील स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में उस समय सनसनी फैल गई, जब सैकड़ों छात्र-छात्राएं आधी रात को हॉस्टल की दीवार फांदकर पैदल मार्च पर निकल पड़े। यह घटना न सिर्फ प्रशासन के लिए चौंकाने वाली थी, बल्कि आवासीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गई। बच्चों का आरोप है कि विद्यालय में लंबे समय से उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही थी, भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब थी और शिकायत करने पर डराया-धमकाया जाता था।बताया जा रहा है कि विद्यालय में अध्ययनरत करीब 300 से 400 छात्र-छात्राएं तड़के करीब चार बजेअचानक एकजुट हुए और हॉस्टल परिसर की दीवार फांदकर जिला मुख्यालय हरदा की ओर पैदल निकल पड़े। बच्चों का कहना था कि उन्होंने कई बार अधीक्षिका सोनिया आनंद और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से अपनी समस्याएं साझा कीं, लेकिन हर बार उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया गया। मजबूर होकर बच्चों ने यह अनोखा और साहसिक कदम उठाया।
    पैदल मार्च के दौरान बच्चों में गुस्सा और पीड़ा साफ नजर आ रही थी। वे प्राचार्य हाय-हाय मानसिक प्रताड़ना बंद करोऔर ऐसा भोजन नहीं चलेगा जैसे नारे लगाते हुए अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। करीब दस किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद ग्राम सोडलपुर के पास फोरलेन मार्ग पर जिला प्रशासन को इस असाधारण घटना की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और जिला कलेक्टर सिद्धार्थ जैन स्वयं मौके पर पहुंचे। कलेक्टर के पहुंचते ही सभी बच्चे सड़क किनारे बैठ गए और खुलकर अपनी समस्याएं बताईं। बच्चों ने बताया कि उन्हें समय पर पौष्टिक भोजन नहीं दिया जाता, साफ-सफाई की हालत खराब है और अनुशासन के नाम पर अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने वालों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, जिससे वे भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
    कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने बच्चों को शांत करते हुए भरोसा दिलाया कि उनकी सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने मौके पर ही पालकों की एक निगरानी समिति गठित करने की घोषणा की, जो विद्यालय की व्यवस्थाओं, भोजन और अनुशासन पर नजर रखेगी। कलेक्टर के आश्वासन के बाद बच्चों ने अपना विरोध समाप्त किया। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा बसों की व्यवस्था कर सभी बच्चों को सुरक्षित वापस हॉस्टल पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एकलव्य आवासीय विद्यालयों की कार्यप्रणाली और बच्चों के अधिकारों को लेकर एक बड़ी चेतावनी के रूप में सामने आई है, जिस पर समय रहते ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।