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  • त्योहारों से पहले चीनी की बिक्री बढ़ाने की छूट, भारत की जीडीपी वृद्धि 7.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान

    त्योहारों से पहले चीनी की बिक्री बढ़ाने की छूट, भारत की जीडीपी वृद्धि 7.3 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान

    नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन में बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को अतिरिक्त बिक्री की अनुमति दी है। इस फैसले के तहत मिलें अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी को अक्टूबर और नवंबर, दोनों महीनों में बेच सकेंगी। यह बिक्री उनके नियमित मासिक कोटे के अतिरिक्त होगी। सरकार के इस कदम का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार में आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना और मांग के अनुरूप चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

    खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों को जारी निर्देश में अक्टूबर में उत्पादित चीनी की दोनों महीनों में बिक्री की अनुमति दी है। सामान्य मासिक आवंटन के अलावा अतिरिक्त मात्रा बेचने की छूट से बाजार में आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, इस अतिरिक्त बिक्री की अनुमति से बाजार में कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

    इस बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर भी सकारात्मक अनुमान सामने आया है। डेलॉयट इंडिया के आकलन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि दर 7.1 से 7.3 प्रतिशत के बीच रह सकती है। इस अनुमान के पीछे निजी निवेश में सुधार को एक प्रमुख कारण बताया गया है। निजी क्षेत्र की ओर से निवेश बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों और बाजार की मांग को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    आकलन के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष 2027-28 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर मजबूत रह सकती है, हालांकि इसके कुछ धीमी रहने का अनुमान है। इस अवधि में जीडीपी वृद्धि दर 6.6 से 7 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई गई है। यह अनुमान दर्शाता है कि आने वाले वित्त वर्षों में भी आर्थिक विस्तार जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन विकास की वास्तविक गति कई घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

    आर्थिक विकास के सामने कुछ जोखिम भी बताए गए हैं। इनमें भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आने वाली बाधाएं शामिल हैं। ऊर्जा की कीमतों में तेजी से उत्पादन और परिवहन की लागत प्रभावित हो सकती है। वहीं, वैश्विक व्यापार में रुकावटों का असर वस्तुओं की आपूर्ति और कारोबारी गतिविधियों पर पड़ सकता है। इन परिस्थितियों के कारण आर्थिक विकास के अनुमान में बदलाव की संभावना बनी रहती है।

    इसी बीच, केंद्र सरकार ने वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो यानी एफएसआईबी का नए सिरे से गठन किया है। पूर्व सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के सचिव एससीएल दास को ब्यूरो का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल अधिसूचना जारी होने की तारीख से तीन साल का होगा। एफएसआईबी सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों में शीर्ष पदों पर नियुक्तियों के लिए सिफारिशें करता है। इस संस्था की भूमिका वित्तीय क्षेत्र में वरिष्ठ पदों पर चयन प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    नए अध्यक्ष के साथ ब्यूरो में छह सदस्य भी शामिल किए गए हैं। इनमें भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक अरिजीत बसु, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व निदेशक सतीश काशीनाथ मराठे और पूर्व कार्यकारी निदेशक रमनाथन सुब्रमणियन शामिल हैं। इनके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम के पूर्व प्रमुख सिद्धार्थ मोहंती, न्यू इंडिया एश्योरेंस की पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नीरजा कपूर और भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण की पूर्व सदस्य टीएल अलामेलु को भी सदस्य बनाया गया है।

    इस प्रकार, त्योहारी मांग को ध्यान में रखते हुए चीनी की अतिरिक्त बिक्री की अनुमति, आर्थिक विकास के अनुमान और वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो के नए गठन से जुड़े फैसले एक साथ सामने आए हैं। चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए उठाया गया कदम निकट अवधि की बाजार मांग से जुड़ा है, जबकि जीडीपी वृद्धि के अनुमान और एफएसआईबी में नियुक्तियां अर्थव्यवस्था तथा वित्तीय संस्थानों से संबंधित व्यापक घटनाक्रम हैं।

  • कमजोर मानसून के बीच सरकार का बड़ा फैसला, चीनी और गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर लगाई रोक

    कमजोर मानसून के बीच सरकार का बड़ा फैसला, चीनी और गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर लगाई रोक


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने और गन्ने से बनने वाली चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से एथेनॉल खरीद की नीति में बदलाव किया है। नए निर्देशों के तहत सरकारी ईंधन कंपनियां एक नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष में चीनी और गन्ने के रस से तैयार एथेनॉल की खरीद के लिए प्रस्ताव नहीं मांगेंगी। इस फैसले के पीछे कमजोर मानसून और गन्ने के उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रमुख कारण माना गया है।

    सरकारी तेल कंपनियों ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने का संयुक्त टेंडर जारी किया है। इसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड शामिल हैं। टेंडर में एथेनॉल की खरीद के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल से संबंधित शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

    नए टेंडर के अनुसार, गन्ने के रस, चीनी, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति के लिए प्रस्ताव आमंत्रित नहीं किए गए हैं। इसका मतलब है कि सरकारी तेल कंपनियां इस आपूर्ति वर्ष में इन स्रोतों से बनने वाले एथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। हालांकि, एथेनॉल की कुल खरीद के लिए अन्य निर्धारित कच्चे माल का इस्तेमाल जारी रहेगा।

    भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। इस वर्ष देश में चीनी उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम रहने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अल नीनो के प्रभाव के बीच एक दशक से अधिक समय में कमजोर मानसून दर्ज किया गया, जिससे गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। गन्ने की उपलब्धता में कमी का असर चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार चीनी की आपूर्ति और कीमतों को ध्यान में रखते हुए एथेनॉल खरीद के लिए उपलब्ध कच्चे माल के इस्तेमाल में बदलाव कर रही है।

    भारत अपनी आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे परिवहन क्षेत्र में पेट्रोलियम ईंधन की खपत को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके उत्पादन के लिए गन्ने के साथ-साथ अनाज और अन्य अनुमत कच्चे माल का भी उपयोग किया जाता है। नए टेंडर में भी इन वैकल्पिक स्रोतों से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति का प्रावधान रखा गया है।

    टेंडर में भाग लेने वाले आपूर्तिकर्ता सी-हेवी शीरे, खराब हो चुके खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम से खरीदे गए अतिरिक्त चावल, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत अनुमत अन्य कच्चे माल से उत्पादित एथेनॉल की पेशकश कर सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत एथेनॉल की खरीद के लिए वैकल्पिक कच्चे माल के विकल्प उपलब्ध रहेंगे। इससे चीनी आधारित स्रोतों पर निर्भरता कम करते हुए निर्धारित मात्रा में एथेनॉल की खरीद की जा सकेगी।

    एथेनॉल खरीद से जुड़े बदलावों के साथ सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी की बिक्री के लिए भी अतिरिक्त अनुमति दी है। इसके तहत मिलें अक्टूबर में उत्पादित चीनी को अक्टूबर और नवंबर 2026 के दौरान नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त बेच सकती हैं। यह अनुमति निर्धारित शर्तों के अनुसार लागू होगी।

    उदाहरण के तौर पर, यदि कोई चीनी मिल अक्टूबर में 1,000 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन करती है, तो वह इस मात्रा को अक्टूबर और नवंबर के दौरान बेच सकेगी। यह बिक्री दोनों महीनों के नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त होगी। सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य कमजोर मानसून के कारण गन्ने की उपलब्धता पर पड़ रहे असर के बीच चीनी की आपूर्ति और एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखना है।

  • इथेनॉल बनाने में अब नहीं होगा चीनी का इस्तेमाल… दाम बढ़ने के बाद सरकार का बड़ा कदम…

    इथेनॉल बनाने में अब नहीं होगा चीनी का इस्तेमाल… दाम बढ़ने के बाद सरकार का बड़ा कदम…


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (India Government) ने चीनी (Sugar) की बढ़ती कीमतों (Rising Prices) पर काबू पाने और घरेलू बाजार में इसकी सप्लाई बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तेल कंपनियों (Oil Companies) को निर्देश दिया है कि साल 2026-27 के सप्लाई में चीनी से इथेनॉल (Ethanol) बनाने के लिए चीनी का इस्तेमाल शून्य किया जाए। इसके तहत गन्ने के रस, चीनी, चीनी की चाशनी और बी-हैवी मोलासेस (गुड़ बनाने की प्रक्रिया में बचने वाला गाढ़ा लिक्विड पदार्थ) से बने इथेनॉल की खरीद के लिए ताजा टेंडर में बोली नहीं मांगी गई है।


    क्या है डिटेल

    शुक्रवार को जारी टेंडर के मुताबिक, तेल कंपनियां नवंबर से शुरू होने वाले सप्लाई वर्ष के लिए करीब 11 अरब लीटर इथेनॉल खरीदने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, इस बार कंपनियां मक्का, टूटे चावल और भारतीय खाद्य निगम (FCI) से खरीदे गए अतिरिक्त चावल से बने इथेनॉल की सप्लाई के लिए बोली लगा सकती हैं।


    चीनी की कीमतों पर काबू पाने की कोशिश

    भारत दुनिया में चीनी की सबसे ज्यादा खपत करने वाले देशों में शामिल है। पिछले कुछ समय से देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की चिंता बनी हुई है। वहीं, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना प्रोडक्शन राज्यों में कम बारिश के कारण चीनी प्रोडक्शन प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि गन्ने और चीनी का ज्यादा हिस्सा घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए उपलब्ध रहे। इसी वजह से इथेनॉल बनाने में चीनी के इस्तेमाल को सीमित करने का फैसला लिया गया है।


    मक्का और चावल से बने इथेनॉल को मिलेगा मौका

    सरकार के नए टेंडर में इथेनॉल बनाने के लिए मक्का, टूटे चावल और अतिरिक्त चावल के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। इससे चीनी आधारित कच्चे माल के बजाय अनाज से इथेनॉल बनाने पर जोर बढ़ सकता है। इथेनॉल पेट्रोल में मिलाया जाता है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है। भारत ने इसी दिशा में इस साल देशभर में पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य यानी E20 लागू किया है। हालांकि, कुछ वाहन चालकों ने चिंता जताई है कि ज्यादा इथेनॉल मिला पेट्रोल पुराने वाहनों के इंजन और उनके पुर्जों पर असर डाल सकता है।


    मक्का से बने इथेनॉल की खरीद कीमत भी घटाई

    तेल कंपनियों ने मक्का से बने इथेनॉल के लिए मिलने वाले प्रोत्साहन में भी कटौती की है। टेंडर के मुताबिक, यह प्रोत्साहन 5.79 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.79 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत 71.86 रुपये प्रति लीटर से घटकर 68.86 रुपये प्रति लीटर रह गई है। इस बदलाव से इथेनॉल उत्पादकों की कमाई और उत्पादन से जुड़े फैसलों पर असर पड़ सकता है।


    पहले भी चीनी उत्पादन बढ़ाने पर हो रहा था विचार

    इससे पहले अगस्त में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले नए सीजन में इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्ने की मात्रा सीमित करने पर विचार कर रही थी। इसका मकसद चीनी उत्पादन बढ़ाना और कीमतों को काबू में लाना था। अब ताजा टेंडर में चीनी आधारित कच्चे माल से बने इथेनॉल की खरीद को शामिल नहीं किया गया है। इससे साफ है कि फिलहाल सरकार घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दे रही है।

  • दीवाली से पहले चावल, चीनी और दालों की कीमतों में तेजी, खराब मौसम और महंगी ढुलाई से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित

    दीवाली से पहले चावल, चीनी और दालों की कीमतों में तेजी, खराब मौसम और महंगी ढुलाई से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित

    नई दिल्ली ।दीवाली से पहले खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव डाल रही हैं। चावल, चीनी, दाल और खाने के तेल समेत कई कृषि उत्पादों के दाम में तेजी देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इन वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके पीछे खराब मौसम, फसलों के उत्पादन में संभावित कमी, अंतरराष्ट्रीय तनाव और सामान की ढुलाई महंगी होने जैसे कारण बताए जा रहे हैं। त्योहारों के दौरान खाद्य वस्तुओं की मांग के बीच आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है।

    चावल की कीमतों में तेजी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के दाम पिछले दो वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। इसकी प्रमुख वजह बाजार में आपूर्ति कम होना और माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की लागत बढ़ना बताई जा रही है। कंटेनर के जरिए सामान भेजने का खर्च पांच हजार डॉलर से बढ़कर करीब 55 हजार डॉलर तक पहुंचने का उल्लेख किया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार की लागत में बड़ा अंतर आया है और खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है।

    खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुमान के अनुसार, दुनिया में चावल का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 2.4 प्रतिशत घट सकता है। भारत में भी उत्पादन कम होने का अनुमान जताया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में चावल का उत्पादन 15.4 करोड़ टन से घटकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के वायदा भाव में 30 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की बात कही गई है। उत्पादन में संभावित गिरावट और आपूर्ति की बढ़ती लागत का असर बाजार की कीमतों पर पड़ रहा है।

    चीनी के बाजार में भी तेजी बनी हुई है। अक्टूबर में कच्ची चीनी के वायदा भाव करीब 8 प्रतिशत बढ़े हैं। वहीं, जुलाई में दर्ज निचले स्तर से कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ब्राजील, भारत, थाईलैंड और यूरोपीय संघ में खराब मौसम के कारण चीनी उत्पादन में 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आने की आशंका जताई गई है। यूरोपीय संघ में उत्पादन 19 प्रतिशत और थाईलैंड में 17 प्रतिशत तक घट सकता है। यदि उत्पादन में यह गिरावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

    खाने के तेल की कीमतों पर भी वैश्विक ऊर्जा बाजार का असर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी परिस्थितियों के बीच जैव ईंधन की मांग बढ़ रही है। जैव ईंधन बनाने में इस्तेमाल होने वाले वनस्पति तेल की मात्रा भी बढ़ रही है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक, दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल वनस्पति तेल का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा जैव ईंधन उत्पादन में खर्च हो रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग के अनुमान में जैव ईंधन के लिए वनस्पति तेल का इस्तेमाल 30 से 32 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना जताई गई है। इससे खाद्य तेलों की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

    दालों और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले एक वर्ष में चने के दाम 23 प्रतिशत, उड़द के 24 प्रतिशत और मटर के 47 प्रतिशत तक बढ़े हैं। इनकी कीमतों में तेजी के पीछे आयात पर अधिक शुल्क को भी एक कारण बताया गया है। इसके अलावा, जौ की कीमतों में 44 प्रतिशत, मक्का में 9 प्रतिशत और चाय में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    खराब मौसम के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय तनाव से परिवहन तथा आपूर्ति व्यवस्था में रुकावट आने की स्थिति में महंगाई का दबाव आगे भी बना रह सकता है। चावल, चीनी, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ सकता है। हालांकि, आने वाले समय में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह उत्पादन, उपलब्धता और ढुलाई की लागत में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।

  • दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें नियंत्रण में रखने की तैयारी, सरकार और उद्योग ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा

    दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें नियंत्रण में रखने की तैयारी, सरकार और उद्योग ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा


    नई दिल्ली ।दशहरा और दिवाली समेत आगामी त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए सरकार और चीनी उद्योग मिलकर काम कर रहे हैं। त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने पर जोर दिया जा रहा है।

    इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि त्योहारी मौसम में उपभोक्ताओं को उचित दर पर चीनी उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दशहरा और इसके बाद दिवाली सहित कई प्रमुख त्योहार आने वाले हैं, ऐसे में मांग में संभावित बढ़ोतरी के बावजूद चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखना जरूरी है।

    उन्होंने बताया कि घरेलू बाजार में फिलहाल चीनी की आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है। खुदरा कीमतों में भी नरमी की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले सप्ताहों में इसमें और कमी आने की संभावना जताई गई है।

    चीनी की कीमतों में कमी का असर खुदरा बाजार में पूरी तरह दिखाई देने में कुछ समय लग सकता है। इसका कारण एक्स-मिल कीमतों और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली खुदरा कीमतों के बीच रहने वाला अंतर है। मिल स्तर पर कीमत कम होने के बाद इसका लाभ आपूर्ति श्रृंखला के अलग-अलग चरणों से गुजरते हुए धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंचता है।

    बताया गया है कि एक्स-मिल चीनी की कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ चुकी है। पूरे देश में एक्स-मिल कीमत का औसत वर्तमान में करीब 4,450 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है।

    एक्स-मिल कीमत वह दर होती है जिस पर चीनी मिल से निकलते समय चीनी की बिक्री की जाती है। इसके बाद परिवहन, भंडारण, थोक कारोबार और खुदरा स्तर से गुजरने के कारण अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कीमत अलग हो सकती है।

    त्योहारी सीजन में चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की जरूरत भी अधिक होती है। ऐसे में सरकार और उद्योग के सामने पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रखने के साथ कीमतों को स्थिर बनाए रखने की चुनौती रहती है।

    चीनी उद्योग की ओर से कहा गया है कि मौजूदा स्थिति में घरेलू बाजार में आपूर्ति को लेकर कोई बड़ी कमी नहीं है। एक्स-मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट का असर आने वाले समय में खुदरा बाजार पर भी दिखाई देने की उम्मीद है।

    बाजार में कम लागत के अनुरूप कीमतों में बदलाव होने के साथ उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, मिल स्तर से खुदरा बाजार तक कीमतों में बदलाव पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

    त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के बावजूद सरकार और उद्योग का लक्ष्य चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त कीमत का दबाव नहीं पड़ने देना है। मौजूदा एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट के आधार पर आने वाले समय में खुदरा चीनी की कीमतों में भी नरमी की उम्मीद जताई गई है।

    इससे दशहरा और दिवाली के दौरान चीनी की बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। सरकार और उद्योग की ओर से आपूर्ति तथा कीमतों पर लगातार नजर रखने की बात कही गई है।

  • SC की फटकार के बाद FSSAI का बड़ा कदम… खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर लिखी होगी चीनी-नमक की मात्रा

    SC की फटकार के बाद FSSAI का बड़ा कदम… खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर लिखी होगी चीनी-नमक की मात्रा


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने पैक फूड (Packaged food) पर शिंकजे की तैयारी शुरू कर दी है। जिन खाद्य पदार्थों में चीनी (Sugar), फैट और नमक की मात्रा तय मानक से अधिक होगी, उनके पैकेट या डिब्बे के ऊपरी हिस्से पर हाई शुगर, हाई फैट और हाई सॉल्ट के रूप में चेतावनी लाल रंग में अंकित करना अनिवार्य किया जा सकता है।

    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) (Food Safety and Standards Authority of India – FSSAI) ने जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पीठ के समक्ष दाखिल छह पन्नों के हलफनामे में यह जानकारी दी। कोर्ट को बताया गया कि इससे जुड़ा प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। एफएसएसएआई ने कहा कि यह चेतावनी तस्वीर (षट्भुजाकार) के रूप में अंकित होगी, ताकि ग्राहक आसानी से पहचान सकें कि किन खाद्य पदार्थ में नमक या चीनी जैसे पदार्थ अधिक ‌मात्रा में हैं। इसका फॉन्ट साइज पैकेट के पीछे न्यूट्रिशन की जानकारी देने वाली टेबल में इस्तेमाल होने वाले फॉन्ट साइज से एक पॉइंट बड़ा होगा।


    जनहित याचिका पर सुनवाई

    एफएसएसएआई ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में लगाई गई फटकार के बाद दाखिल किया है। कोर्ट गैर सरकारी संस्था ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा है।


    दो चरणों में लागू होगा

    प्रस्तावित नियम दो चरण में लागू किए जाएंगे, ताकि इंडस्ट्री को उत्पाद दोबारा तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिले। पहले चरण में उन उत्पादों पर नियम लागू होंगे, जिनमें दो या अधिक विशिष्ट पोषक तत्व एडेड फैट, एडेड शुगर या नमक अधिक मात्रा में हों। दूसरे चरण में वे उत्पाद शामिल होंगे, जिनमें एक पोषक तत्व अधिक मात्रा में हो।


    इन उत्पादों को छूट मिलेगी

    हलफनामे में एफएसएसएआई ने कहा है कि सिंगल-इंग्रीडिएंट यानी एक ही चीज से बने खाद्य पदार्थों और उन चीजों को प्रस्तावित नियम से छूट दी जाएगी, जिनमें प्राकृतिक रूप से वसा, चीनी या नमक अधिक होता है। जैसे घी, खाद्य तेल, गुड़ और शहद आदि। हालांकि, खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग के बाकी नियमों से छूट नहीं मिलेगी।

  • चीनी की किल्लत के बीच सरकार बोली- हमारे पास 20-25 लाख टन का अतिरिक्त स्टॉक… आयात की भी तैयारी

    चीनी की किल्लत के बीच सरकार बोली- हमारे पास 20-25 लाख टन का अतिरिक्त स्टॉक… आयात की भी तैयारी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में चीनी की किल्लत (Sugar Crisis) की खबरों के बीच अब सरकार (Government) एक्शन मोड में आ गई है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) ने रविवार को कहा है कि त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है। जोशी ने कहा कि रेड रॉट (गन्ने की फसल में होने वाली बीमारी) और अल नीनो की स्थितियों के कारण चीनी के उत्पादन में कमी आई है। इससे न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में चीनी सहित कुल कृषि उत्पादन में कमी आई है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि सरकार इसे लेकर चिंतित है और इसीलिए सरकार ने तुरंत कई कदम उठाए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया है कि भारत की जरूरत लगभग 280 लाख टन है और आज की स्थिति में हमारे पास 20 से 25 लाख टन से ज्यादा का अतिरिक्त स्टॉक है।


    ब्राजील से आएगी चीनी

    वहीं सहकारी चीनी मिलों की संस्था एनएफसीएसएफ के प्रमुख ने कहा कि भारत आने वाली चीनी की कुछ खेप 15 अक्तूबर से पहले देश में पहुंच सकती है। हालांकि अभी इसकी सही मात्रा का अंदाजा लगाना मुश्किल है। वहीं, जमाखोरी के खिलाफ सरकार की सख्ती से कीमतों में कुछ कमी आने लगी है।

    एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवारे ने रविवार को बताया कि फिलहाल आयात के लिए ब्राजील ही एकमात्र व्यावहारिक स्रोत है, क्योंकि पारंपरिक आपूर्तिकर्ता थाईलैंड खुद चीनी की कमी से जूझ रहा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सप्लाई सबसे पहले पहुंचेगी। ब्राजील से भारत तक सामान आने में 40-45 दिन लगते हैं।


    कीमतों में आ रही गिरावट

    नायकनवरे ने कहा कि केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने फेडरेशन और इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। उन्होंने बाजार में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने और कीमतों पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। इससे पहले चीनी की कीमत 65-67 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई थी, हालांकि शनिवार को खुले टेंडरों में 5 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गई।

  • चीनी के साथ प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में तेजी ने बढ़ाई चिंता, सरकार के कदमों के बावजूद महंगाई का दबाव जारी

    चीनी के साथ प्याज, दाल और खाद्य तेल की कीमतों में तेजी ने बढ़ाई चिंता, सरकार के कदमों के बावजूद महंगाई का दबाव जारी

    नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में पिछले कुछ समय से तेजी देखी जा रही है। चीनी, प्याज, दाल और खाद्य तेल के दाम बढ़ने से आम परिवारों के मासिक बजट पर दबाव बढ़ गया है। खास तौर पर चीनी की कीमतों में तेज उछाल ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में चीनी के दाम करीब 7 रुपये प्रति किलो तक बढ़े हैं, जबकि एक महीने में इसकी कीमत में लगभग 17 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि दर्ज की गई है। कई बाजारों में चीनी करीब 70 रुपये किलो तक बिक रही है।

    चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे आपूर्ति और बाजार में उपलब्ध स्टॉक को लेकर चिंता प्रमुख कारणों में शामिल है। सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसके तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा जमाखोरी रोकने के लिए कारोबारियों के स्टॉक पर सीमा निर्धारित की गई है। घरेलू स्तर पर नई चीनी की उपलब्धता जल्दी बढ़ाने के लिए चीनी मिलों में पेराई सत्र भी सामान्य से पहले शुरू करने की तैयारी है।

    प्याज की कीमतों में भी पिछले कुछ सप्ताह में बढ़ोतरी हुई है। 21 अगस्त को प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 40.79 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जबकि एक सप्ताह पहले यह लगभग 36.56 रुपये और एक महीने पहले 34.87 रुपये प्रति किलो था। इस तरह कुछ ही समय में प्याज के दाम में 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। खरीफ प्याज की नई फसल की आवक में देरी को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। दक्षिण भारत में आवक प्रभावित होने के साथ महाराष्ट्र के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की स्थिति का भी असर पड़ा है। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

    दालों की कीमतों में भी हल्की तेजी का रुख बना हुआ है। अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी प्रमुख दालों के दाम में पिछले एक महीने में लगभग 1 से 2 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। दलहन की बुवाई के रकबे में कमी और मानसून से जुड़ी अनिश्चितता को इसकी प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। कमजोर बारिश या फसल उत्पादन में कमी की आशंका आगे दालों की कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती है।

    खाद्य तेल भी महंगाई के इस दबाव से अछूते नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतों में तेजी आई है। उत्पादन वाले क्षेत्रों में मौसम संबंधी परिस्थितियों और वैश्विक आपूर्ति में बदलाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है। भारत खाद्य तेल की अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ता है। पिछले एक महीने में खाद्य तेलों की कीमतों में करीब 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है।

    इस तरह रसोई की महंगाई के पीछे किसी एक वस्तु की समस्या नहीं बल्कि आपूर्ति, मौसम, घरेलू उत्पादन, आयात लागत और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव दिखाई दे रहा है। सरकार चीनी और प्याज की उपलब्धता बढ़ाने तथा जमाखोरी पर रोक लगाने जैसे कदम उठा रही है, लेकिन आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा नई फसल की आवक, मानसून और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • देशभर में चीनी के दाम में तेज उछाल, उत्तर प्रदेश से महानगरों तक महंगी हुई रोजमर्रा की जरूरत

    देशभर में चीनी के दाम में तेज उछाल, उत्तर प्रदेश से महानगरों तक महंगी हुई रोजमर्रा की जरूरत

    नई दिल्ली ।देशभर में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। त्योहारों और शादियों के सीजन से पहले रोजमर्रा की इस जरूरी वस्तु के महंगे होने से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चीनी के दाम में 10 से 18 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    चीनी की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि ओडिशा में दर्ज की गई है। 21 अगस्त को यहां चीनी का भाव 64.72 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 17.80 रुपये अधिक है। इसके बाद मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    देश में चीनी की औसत कीमत फिलहाल करीब 58.23 रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। हालांकि कई राज्यों में खुदरा बाजार का भाव राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। असम, दिल्ली, गोवा, केरल, मध्य प्रदेश, मेघालय, पंजाब, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल समेत कई इलाकों में चीनी की कीमत 65 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक के स्तर तक पहुंच गई है।

    मध्य प्रदेश में भी चीनी के दाम में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले महीने की समान तारीख की तुलना में राज्य में कीमत करीब 15.70 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी है। पंजाब में भी लगभग 14.67 रुपये प्रति किलो की वृद्धि दर्ज की गई है। इन बढ़ती कीमतों का असर घरों के साथ-साथ मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य कारोबारों पर भी पड़ सकता है।

    उत्तर प्रदेश में स्थिति विशेष रूप से चर्चा में है। यहां चीनी मिलों से निकलने वाली चीनी का थोक भाव 5,400 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। थोक बाजार में तेजी का सीधा असर खुदरा कीमतों पर दिखाई दे रहा है और कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को चीनी के लिए 65 से 68 रुपये प्रति किलो तक खर्च करना पड़ रहा है।

    दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी अच्छी गुणवत्ता वाली चीनी की खुदरा कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ महानगरों में एक महीने के भीतर ही चीनी के दाम में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

    बढ़ती कीमतों के पीछे बाजार में आपूर्ति और मांग से जुड़े कई कारक अहम माने जा रहे हैं। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ती है। ऐसे में यदि बाजार में उपलब्धता अपेक्षाकृत सीमित रहती है तो कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

    सरकार भी चीनी बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि खुदरा बाजार में अलग-अलग शहरों और गुणवत्ता के आधार पर वास्तविक कीमत में अंतर हो सकता है।

    वर्तमान स्थिति में दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव करीब 60 से 63 रुपये किलो, मुंबई में 65 से 70 रुपये, कोलकाता में 64 से 70 रुपये, पंजाब और ओडिशा में 64 से 65 रुपये, लखनऊ में 65 से 68 रुपये तथा पटना में 65 से 68 रुपये किलो के आसपास बताया गया है। आने वाले दिनों में त्योहारों की मांग और बाजार की आपूर्ति के आधार पर कीमतों में आगे बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • चीनी के बढ़ते दामों ने बढ़ाई आम लोगों की चिंता, सोशल मीडिया पर महंगाई को लेकर वायरल हो रहे मजेदार मीम्स और जोक्स

    चीनी के बढ़ते दामों ने बढ़ाई आम लोगों की चिंता, सोशल मीडिया पर महंगाई को लेकर वायरल हो रहे मजेदार मीम्स और जोक्स

    नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी अब केवल बाजार और घरेलू बजट तक सीमित नहीं रही है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। महंगी होती चीनी को लेकर लोग तरह-तरह के मजेदार मीम्स, वीडियो और जोक्स साझा कर रहे हैं। बढ़ती कीमतों के बीच इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेजी से चर्चा में आ रही हैं।

    चीनी रोजमर्रा की जरूरत की प्रमुख खाद्य वस्तुओं में शामिल है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ता है। खासकर त्योहारों का मौसम नजदीक होने के कारण चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। मिठाइयों और घरेलू पकवानों में इसका इस्तेमाल अधिक होने से आने वाले दिनों में इसकी खपत भी बढ़ सकती है।

    बाजार से सामने आ रही जानकारी के अनुसार, देश के कुछ हिस्सों में खुदरा बाजार में चीनी की कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। अलग-अलग राज्यों और बाजारों में कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है। इसी वजह से उपभोक्ताओं के बीच बढ़ते खर्च को लेकर चिंता बढ़ी है।

    मुंबई के बाजार में भी चीनी के भाव में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगस्त के मध्य में एम30 ग्रेड चीनी की कीमत करीब 59 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। रोजाना इस्तेमाल की वस्तु होने के कारण कीमत में मामूली बढ़ोतरी भी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के घरेलू बजट को प्रभावित कर सकती है।

    पंजाब में स्थिति और अधिक चर्चा में है। यहां चीनी का थोक भाव करीब 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जबकि खुदरा दुकानों पर इसकी कीमत लगभग 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जा रही है। स्थानीय बाजार में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों का ध्यान खींचा है।

    त्योहारों से पहले मांग बढ़ना चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे बताए जा रहे प्रमुख कारणों में से एक है। इस अवधि में घरों के अलावा मिठाई और खाद्य कारोबार से जुड़े व्यवसायों में भी चीनी की मांग बढ़ती है। मांग और बाजार में उपलब्धता के बीच संतुलन बिगड़ने पर कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    बढ़ती कीमतों के बीच सरकार की ओर से भी बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखने और जमाखोरी पर नजर बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। बाजार में आपूर्ति सामान्य बनाए रखना और अनावश्यक रूप से कीमत बढ़ने से रोकना इस समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    हालांकि, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे अलग असर सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहा है। इंटरनेट यूजर्स महंगाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया सीधे शिकायत के बजाय हास्य और व्यंग्य के माध्यम से व्यक्त कर रहे हैं। कई मीम्स में चीनी की कीमतों की तुलना दूसरी महंगी वस्तुओं से की जा रही है, जबकि कुछ पोस्टों में त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले घरेलू खर्च को मजाकिया अंदाज में दिखाया जा रहा है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ये मीम्स इस बात का संकेत भी देते हैं कि रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बदलाव आम लोगों के बीच कितनी तेजी से चर्चा का विषय बन जाता है। हालांकि मीम्स और सोशल मीडिया पोस्ट मनोरंजन का माध्यम हैं, लेकिन इनके पीछे बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्च को लेकर लोगों की वास्तविक चिंता भी दिखाई दे रही है।

    आने वाले त्योहारों को देखते हुए चीनी की कीमतों पर बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि मांग बढ़ती है तो आपूर्ति और कीमतों का संतुलन महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए बढ़े हुए भाव राहत की खबर नहीं हैं, जबकि सोशल मीडिया ने इस आर्थिक परेशानी को हास्य और मीम्स के जरिए एक अलग चर्चा में बदल दिया है।