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  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेमौसम बारिश से फसलें बर्बाद होने पर उठे सवाल पर सरकार को किया ज़िम्मेदार सर्वे और मुआवजे का आश्वासन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेमौसम बारिश से फसलें बर्बाद होने पर उठे सवाल पर सरकार को किया ज़िम्मेदार सर्वे और मुआवजे का आश्वासन


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से अचानक बदला मौसम किसानों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गया है। तेज बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के चलते राज्य के कई जिलों में गेहूं चना लहसुन समेत कई रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है जिससे अन्नदाताओं में भारी मायूसी और परेशानी का माहौल है। समस्या इतनी गंभीर हो गई कि इसे मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में भी उठाया गया।

    उज्जैन जिले में लगातार दूसरे दिन बारिश ने तबाही मचाई। नागदा खाचरोद उन्हेल और महिदपुर तहसीलों में तेज बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है। पारा गिरने और मौसम में बदलाव के कारण किसानों के चेहरे पर निराशा साफ़ देखी जा रही है।

    रतलाम धार और शुजालपुर सहित अन्य जिलों में भी फसलें बर्बाद हुई हैं। रतलाम में कृषि क्षेत्र में लगभग 50% के आसपास नुकसान का अनुमान है जिसमें गेहूं चना और लहसुन शामिल हैं। नगरा और कांडरवासा जैसे इलाकों में किसान खासा प्रभावित हुए हैं। धार और शुजालपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अति बारिश के कारण गेहूं और अन्य रबी फसलें बुरी तरह खराब हो गई हैं।

    इस गंभीर विषय को विधानसभा में भी उठाया गया। बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि पिछले दो दिनों में प्रदेशभर में हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है और तुरंत सर्वे कर मुआवजा दिया जाना चाहिए। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही सभी कलेक्टर्स को प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करने के निर्देश दे दिए हैं।

    सरकार ने कहा कि तहसीलदार और पटवारियों को खेतों में जाकर नुकसान का आकलन करने का आदेश दिया गया है। प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सर्वे के आधार पर मुआवजा राशि दी जाएगी जिसमें अगर नुकसान 50% से अधिक पाया जाता है तो 32 000 रुपये और 50% से कम होने पर 16 000 रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। इससे पहले भी सरकार ने सोयाबीन नुकसान पर 2 000 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की थी।

    मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि 23–24 फरवरी को फिर बारिश हो सकती है जिससे पहले से ही क्षतिग्रस्त फसलों के लिए और जोखिम बढ़ सकता है। तेज हवाओं ओलावृष्टि और बरसात से खेतों में खड़ी फसलें दब गई हैं और कृषि उत्पादन पर इसका नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

    किसानों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि सर्वे में निष्पक्षता बरती जाए और उन्हें समय पर मुआवजा दिया जाए ताकि बेमौसम बारिश से हुई क्षति का आर्थिक बोझ कम हो सके। कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही हैं और जल्द रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन दिया गया है।

    यह स्थिति यह भी दर्शाती है कि बदलते मौसम के पैटर्न से किसानों की खेती अहम है खासकर जब किसान पहले से ही मौसम-संवेदनशील खेती के दबाव में हैं।पर कितना सीधा प्रभाव पड़ता है और समय रहते राहत उपाय तथा सरकारी सहायता की आवश्यकता कितनी

  • Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील

    Survey : 45 फीसदी भारतीयों ने मोदी सरकार से की अमेरिका पर टैरिफ लगाने की अपील


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) में जल्द ही बड़ी ट्रेड डील (Big Trade Deal) होने के आसार हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (Indian Foreign Minister S. Jaishankar) की आगामी अमेरिका यात्रा के दौरान डील पर बड़ा फैसला आ सकता है। इसी बीच एक सर्वे से पता चला है कि भारतीय चाहते हैं कि भारत सरकार टैरिफ का जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को टैरिफ से ही दे।

    एक सर्वे के अनुसार, उत्तर देने वाले करीब 45 फीसदी लोगों ने मोदी सरकार से जवाबी टैरिफ लगाने की अपील की है। सर्वे से पता चला है कि सिर्फ 6 प्रतिशत ही मानते हैं कि भारत सरकार को ट्रंप की मांगों को स्वीकार कर लेना चाहिए। जबकि, 34 फीसद उत्तरदाता जीएसटी में कमी और ऐसे ही उपाय करने के पक्ष में हैं।


    भारत और ईयू में हुई बड़ी डील

    भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एफटीए पर वार्ता के समापन की घोषणा की थी। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया जा रहा है। इस समझौते के तहत भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को 27 देशों वाले यूरोपीय संघ में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय संघ से लग्जरी कारों और वाइन का आयात सस्ता हो जाएगा।

    करीब दो दशक तक चली बातचीत के बाद हुए इस समझौते से भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग दो अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, और यूरोपीय संघ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक इकाई है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ किया गया मुक्त व्यापार समझौता (FTA) महत्वाकांक्षी भारत के लिए है और इससे देश के विनिर्माताओं के लिए नए बाजार खुलेंगे। उन्होंने उद्योग जगत से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।