Tag: TeamIndia

  • गॉल टेस्ट में श्रीलंका पर धमाकेदार जीत से भारतीय टीम की डब्ल्यूटीसी स्थिति मजबूत, फाइनल का समीकरण हुआ दिलचस्प

    गॉल टेस्ट में श्रीलंका पर धमाकेदार जीत से भारतीय टीम की डब्ल्यूटीसी स्थिति मजबूत, फाइनल का समीकरण हुआ दिलचस्प

    नई दिल्ली ।गॉल में खेले गए पहले टेस्ट मैच के पांचवें दिन भारतीय क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान श्रीलंका को 165 रनों के भारी अंतर से हरा दिया। इस बड़ी जीत के साथ ही भारत ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। इस मुकाबले में मिली जीत से आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की अंक तालिका में भारतीय टीम के खाते में महत्वपूर्ण अंक जुड़े हैं और उसकी फाइनल में पहुंचने की संभावनाएं काफी मजबूत हुई हैं।

    मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का भारतीय कप्तान का फैसला पूरी तरह सही साबित हुआ। पहली पारी में देवदत्त पड़िक्कल ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए अपने करियर का पहला टेस्ट शतक जमाया और 167 रनों की यादगार पारी खेली। भारत की पहली पारी 462 रनों पर समाप्त हुई, जिसके जवाब में श्रीलंकाई टीम अपनी पहली पारी में 284 रन ही बना सकी। इससे भारतीय टीम को पहली पारी के आधार पर 178 रनों की मजबूत बढ़त हासिल हुई।

    दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने तेज गति से रन बनाते हुए श्रीलंका के सामने जीत के लिए 372 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। दूसरी पारी के दौरान विकेटकीपर बल्लेबाज ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए एक बड़ा कीर्तिमान भी अपने नाम किया। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी मेजबान टीम भारतीय गेंदबाजों के सटीक आक्रमण के सामने टिक नहीं सकी और पूरी टीम सस्ते में सिमट गई।

    भारत की इस जीत में गेंदबाजों का योगदान बेहद सराहनीय रहा। युवा स्पिनर मानव सुथार ने मैच में घातक गेंदबाजी करते हुए पहली पारी में चार और दूसरी पारी में छह विकेट झटके। पूरे मैच में कुल दस विकेट लेकर उन्होंने श्रीलंकाई टीम को मुकाबले में वापसी का कोई अवसर नहीं दिया। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने भारत की जीत की राह आसान कर दी।

    वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 की ताजा रैंकिंग के अनुसार भारतीय टीम अब 10 मैचों में 5 जीत, 4 हार और 1 ड्रॉ के साथ 64 अंक अर्जित कर 53.33 प्रतिशत पीसीटी के साथ पांचवें स्थान पर बनी हुई है। वहीं भारत से करारी हार झेलने के बाद श्रीलंकाई टीम तालिका में खिसक कर छठे पायदान पर आ गई है। वर्तमान तालिका में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष स्थान पर बना हुआ है, जबकि दक्षिण अफ्रीका दूसरे और न्यूजीलैंड तीसरे स्थान पर मौजूद हैं।

    सीरीज का दूसरा और अंतिम टेस्ट मैच 23 अगस्त से कोलंबो के ऐतिहासिक मैदान पर खेला जाएगा। इस सीरीज के समाप्त होने के बाद भारतीय टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला खेलनी है। मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भारतीय टीम आगामी मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन बरकरार रखकर फाइनल में अपनी जगह कैसे पक्की करती है।

  • CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

    CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का दसवां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे जिसने भारत की पदक तालिका को और मजबूत कर दिया। मुक्केबाजी से लेकर पैरा एथलेटिक्स तक भारतीय खिलाड़ियों ने हर मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। खिलाड़ियों की इस शानदार उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पदक विजेताओं को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की खुलकर सराहना की और इसे देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

    दसवें दिन भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा सबसे ज्यादा देखने को मिला। भारत ने बॉक्सिंग में कुल 10 पदक अपने नाम किए और कई खिलाड़ियों ने स्वर्ण जीतकर तिरंगा ऊंचा लहराया। पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के मुक्केबाजों को प्रेरित करेगी और वे भविष्य में भी देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

    महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने उनके संघर्ष और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनका समर्पण देशभर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उनकी तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल की प्रधानमंत्री ने खुलकर तारीफ की। वहीं 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घांगस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सफलता उनके कौशल और मानसिक मजबूती का प्रमाण है।

    भारत की एक और महिला मुक्केबाज साक्षी ने 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें निर्णायक जीत के लिए बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दीं। पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में जदुमणि सिंह मंडेंगबाम ने रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और महत्वपूर्ण पदक जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी दृढ़ता अनुशासन और संघर्ष की सराहना की।

    पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों के शॉट पुट एफ57 वर्ग में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। यह इस स्पर्धा में भारत का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी प्रतियोगिता के दौरान उनका फोकस और अटूट संकल्प साफ दिखाई दिया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी तकनीक और समर्पण की प्रशंसा करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    भारतीय खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि देश अब हर खेल में वैश्विक स्तर पर मजबूती से अपनी पहचान बना रहा है। एक ही दिन में 16 पदकों का ऐतिहासिक प्रदर्शन भारतीय खेलों के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है और खिलाड़ियों की यह सफलता देशवासियों के लिए गर्व का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बधाई ने खिलाड़ियों का उत्साह और बढ़ाया है तथा पूरे देश में इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया जा रहा है।

  • सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत का दमदार पंच, लवलीना सहित 10 मुक्केबाज पहुंचे फाइनल

    सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत का दमदार पंच, लवलीना सहित 10 मुक्केबाज पहुंचे फाइनल


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। ग्लासगो में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में भारत के दस मुक्केबाजों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर फाइनल में जगह बनाई है। अब पूरा देश इन खिलाड़ियों से स्वर्ण पदकों की उम्मीद लगाए बैठा है। जिस आत्मविश्वास और आक्रामक अंदाज के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने अपने मुकाबले जीते हैं उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि टीम इस बार केवल पदक जीतने नहीं बल्कि बॉक्सिंग में अपना दबदबा स्थापित करने उतरी है।

    महिलाओं की 75 किलोग्राम स्पर्धा में ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने एक बार फिर अपने अनुभव और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने तुवालू की प्रतिद्वंद्वी को एकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराते हुए फाइनल में प्रवेश किया। मुकाबले के पहले राउंड से ही लवलीना ने अपने लंबे रीच बेहतरीन फुटवर्क और सटीक पंचों के दम पर विरोधी पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा। उनकी जीत ने भारत की स्वर्ण पदक की उम्मीदों को और मजबूत कर दिया।

    विश्व चैंपियन जैस्मिन लेंबोरिया ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 57 किलोग्राम स्पर्धा में अपनी प्रतिद्वंद्वी को लगातार दबाव में रखा। मुकाबले के दौरान विरोधी खिलाड़ी को कई बार स्टैंडिंग काउंट मिला जिसके बाद रेफरी ने मुकाबला रोकते हुए जैस्मिन को विजेता घोषित कर दिया। उनकी दमदार जीत ने भारतीय टीम का मनोबल और ऊंचा कर दिया।

    महिलाओं की 70 किलोग्राम स्पर्धा में अरुंधति चौधरी ने दिन का सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए गत चैंपियन को हराकर फाइनल में जगह बनाई। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और अपने शानदार पंचों से विरोधी को संभलने का मौका नहीं दिया। इस जीत ने साबित कर दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाज अब दुनिया की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    प्रीति पवार साक्षी और प्रिया घणघस ने भी अपने मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट पक्का किया। इन तीनों खिलाड़ियों ने एकतरफा जीत दर्ज कर यह दिखाया कि भारतीय महिला बॉक्सिंग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है और भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करती रहेगी।

    पुरुष वर्ग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। जादुमणि सिंह सचिन सिवाच अंकुश पंघाल और नरेंद्र बरवाल ने अपने अपने मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बनाई। इन सभी खिलाड़ियों ने तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। खासकर सुपर हैवीवेट वर्ग में नरेंद्र बरवाल की जीत ने दर्शकों को बेहद प्रभावित किया और भारत के लिए एक और संभावित स्वर्ण पदक की उम्मीद जगा दी।

    भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन केवल पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह देश में बॉक्सिंग के लगातार मजबूत होते स्तर का भी प्रमाण है। पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों ने विश्व स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया है और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उनका दबदबा साफ दिखाई दे रहा है। यदि फाइनल में भी यही लय बरकरार रही तो भारत के खाते में कई स्वर्ण पदक आ सकते हैं और यह अभियान भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार अभियानों में शामिल हो सकता है।

  • नीरज चोपड़ा का सिल्वर, यशवीर सिंह का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज; सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत की पदकों की झड़ी

    नीरज चोपड़ा का सिल्वर, यशवीर सिंह का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज; सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत की पदकों की झड़ी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया। मेंस जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत के दो खिलाड़ियों ने एक साथ पोडियम पर जगह बनाकर देश का गौरव बढ़ाया। ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के शानदार थ्रो के साथ रजत पदक अपने नाम किया जबकि युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह ने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीत लिया। एक ही स्पर्धा में दो भारतीय खिलाड़ियों का पदक जीतना भारतीय एथलेटिक्स के लगातार मजबूत होते प्रदर्शन का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    प्रतियोगिता की शुरुआत नीरज चोपड़ा ने 80.97 मीटर के थ्रो से की लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 85.83 मीटर की दूरी तय कर मुकाबले में मजबूत दावेदारी पेश कर दी। इसके बाद भी उन्होंने लगातार स्थिर प्रदर्शन करते हुए 81.29 मीटर और 80.73 मीटर के थ्रो किए। हालांकि श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया और नीरज को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद नीरज का यह प्रदर्शन उनके मौजूदा सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा जिसने आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी।

    दूसरी ओर यशवीर सिंह ने शानदार संघर्ष का परिचय दिया। शुरुआती प्रयासों में वह पदक की दौड़ से कुछ पीछे दिखाई दे रहे थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में 78.55 मीटर और तीसरे प्रयास में 81.33 मीटर का थ्रो करने के बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर की दूरी तय कर मुकाबले का रुख बदल दिया। यह उनके करियर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा और इसी के दम पर उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। यशवीर का यह प्रदर्शन भारतीय जैवलिन थ्रो की नई पीढ़ी की क्षमता को भी साबित करता है।

    भारत के एक अन्य खिलाड़ी रोहित यादव भी फाइनल में उतरे और उन्होंने 81.56 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए सातवां स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक नहीं जीत सके लेकिन उनका प्रदर्शन भी संतोषजनक माना गया।

    इन दो पदकों के साथ भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल पदकों का आंकड़ा 23 तक पहुंच गया है। देश के खाते में अब 5 स्वर्ण 12 रजत और 6 कांस्य पदक दर्ज हो चुके हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में भारत ने अब तक 11 पदक जीत लिए हैं जबकि वेटलिफ्टिंग में 8 पदक जूडो में 3 पदक और पैरा पावरलिफ्टिंग में 1 कांस्य पदक हासिल हुआ है।

    पदक तालिका में भारत फिलहाल दसवें स्थान पर बना हुआ है जबकि ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर कायम है। इंग्लैंड दूसरे और कनाडा तीसरे स्थान पर है। भारतीय खिलाड़ियों का लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या और बढ़ सकती है। नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह की यह उपलब्धि न केवल भारतीय खेल इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है बल्कि युवा खिलाड़ियों को भी बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत का कमाल, राष्ट्रपति ने स्वर्ण विजेताओं अस्मिता डे और हर्ष सिंह को सराहा

    कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत का कमाल, राष्ट्रपति ने स्वर्ण विजेताओं अस्मिता डे और हर्ष सिंह को सराहा


    नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जूडो में नया इतिहास रच दिया है। भारतीय खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर पूरे देश में खुशी की लहर है। महिलाओं की 48 किलोग्राम स्पर्धा में अस्मिता डे और पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा में हर्ष सिंह ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इन दोनों खिलाड़ियों की ऐतिहासिक सफलता पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में कहा कि अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडो खिलाड़ी बनकर इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं बल्कि पूरे देश के खेल जगत के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि अस्मिता आगे भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन करती रहेंगी और भारत का नाम दुनिया भर में ऊंचा करेंगी।

    अस्मिता डे ने महिलाओं की 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में कनाडा की हेइडी क्वैच को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह जीत इसलिए भी विशेष रही क्योंकि पहली बार किसी भारतीय महिला जूडो खिलाड़ी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल किया है। उनकी तकनीक आत्मविश्वास और संयम ने पूरे मुकाबले में दर्शकों का दिल जीत लिया।

    अस्मिता की ऐतिहासिक जीत के कुछ ही समय बाद हर्ष सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही हर्ष सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय जूडो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने हर्ष सिंह को भी बधाई देते हुए कहा कि उनका धैर्य अनुशासन और खेल कौशल भारत के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने आशा जताई कि हर्ष भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए ऐसे ही गौरवशाली प्रदर्शन करते रहेंगे।

    भारत के लिए जूडो में यह दिन इसलिए भी यादगार रहा क्योंकि यामिनी मौर्य ने महिलाओं की 57 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश की पदक संख्या में महत्वपूर्ण योगदान दिया। फाइनल मुकाबले में उन्हें इंग्लैंड की एसेलिया टोपराक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा लेकिन उनका प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में सराहनीय रहा।

    जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक भारत के लिए इस बात का संकेत है कि देश अब इस खेल में भी लगातार मजबूत होता जा रहा है। खिलाड़ियों की मेहनत आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह खिलाड़ियों को अवसर और संसाधन मिलते रहे तो आने वाले वर्षों में भारत जूडो सहित कई अन्य खेलों में भी विश्व स्तर पर बड़ी ताकत बन सकता है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है। अस्मिता डे हर्ष सिंह और यामिनी मौर्य ने यह साबित कर दिया कि समर्पण कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता पूरे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनकर लंबे समय तक याद की जाएगी।

  • नीली जर्सी से ऑरेंज तक भारतीय हॉकी का नया सफर हॉकी इंडिया ने बताया बदलाव का बड़ा तकनीकी कारण

    नीली जर्सी से ऑरेंज तक भारतीय हॉकी का नया सफर हॉकी इंडिया ने बताया बदलाव का बड़ा तकनीकी कारण


    नई दिल्ली। भारतीय हॉकी टीम की नई ऑरेंज जर्सी को लेकर उठे सवालों पर हॉकी इंडिया ने कहा कि नीली जर्सी और नीले टर्फ के कारण खिलाड़ियों की दृश्यता प्रभावित हो रही थी। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ की सलाह के बाद यह फैसला लिया गया।
    भारतीय हॉकी टीम की नई ऑरेंज जर्सी को लेकर उठे सवालों पर हॉकी इंडिया ने कहा कि नीली जर्सी और नीले टर्फ के कारण खिलाड़ियों की दृश्यता प्रभावित हो रही थी। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ की सलाह के बाद यह फैसला लिया गया।

    भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। हॉकी इंडिया ने साफ किया है कि टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को बदलकर ऑरेंज रंग अपनाने का फैसला किसी प्रचार या ब्रांडिंग के लिए नहीं बल्कि खिलाड़ियों की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। संस्था का कहना है कि आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हॉकी टर्फ का रंग भी नीला होता है जिससे खिलाड़ियों की जर्सी मैदान में आसानी से घुलमिल जाती थी और इससे दृश्यता के साथ खेल पर भी असर पड़ रहा था।

    दरअसल हाल ही में हॉकी इंडिया ने एफआईएच हॉकी विश्व कप से पहले भारतीय टीम की नई ऑरेंज जर्सी लॉन्च की थी। इसके बाद भारतीय टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान हमेशा से नीली जर्सी रही है और फैंस भी टीम को उसी रंग में देखना पसंद करते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर ऑरेंज रंग चुनने का क्या कारण है।

    हॉकी इंडिया ने इस पर विस्तृत जवाब देते हुए बताया कि यह निर्णय खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के साथ कई दौर की चर्चा के बाद लिया गया। संस्था के अनुसार खिलाड़ियों ने महसूस किया कि नीले रंग की जर्सी और नीली सिंथेटिक हॉकी पिच का रंग लगभग एक जैसा होने से मैच के दौरान खिलाड़ियों की पहचान और दृश्यता प्रभावित होती है। इससे पासिंग मूवमेंट और खेल की गति पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने पीले या ऑरेंज जैसे अलग रंगों का सुझाव दिया था। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ऑरेंज रंग को अंतिम रूप दिया गया।

    हॉकी इंडिया ने यह भी कहा कि ऑरेंज रंग केवल तकनीकी दृष्टि से ही उपयुक्त नहीं है बल्कि इसका राष्ट्रीय महत्व भी है। यह रंग भारतीय तिरंगे का हिस्सा है और साहस त्याग ऊर्जा और राष्ट्र गौरव का प्रतीक माना जाता है। संस्था का मानना है कि नई जर्सी खिलाड़ियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ भारतीय पहचान को भी मजबूत करेगी।

    संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दौरान टीम की किट में बदलाव किए जा चुके हैं। वर्ष 2014 के हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम पीले रंग की जर्सी में उतरी थी जबकि 2018 के विश्व कप में आसमानी नीले रंग की अलग डिजाइन वाली जर्सी का उपयोग किया गया था। इसलिए मौजूदा बदलाव को परंपरा से अलग नहीं बल्कि समय और आवश्यकता के अनुसार किया गया निर्णय बताया गया है।

    हॉकी इंडिया का कहना है कि खिलाड़ियों का प्रदर्शन सर्वोच्च प्राथमिकता है और यदि किसी तकनीकी बदलाव से उनकी दृश्यता और खेल बेहतर होता है तो ऐसे फैसले भविष्य में भी लिए जा सकते हैं। संस्था को उम्मीद है कि नई ऑरेंज जर्सी में भारतीय टीम विश्व मंच पर शानदार प्रदर्शन करेगी और एक नई पहचान के साथ देश का गौरव बढ़ाएगी।

  • अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा जानिए उनके करियर की पांच सबसे यादगार उपलब्धियां

    अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा जानिए उनके करियर की पांच सबसे यादगार उपलब्धियां


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। शांत स्वभाव मजबूत तकनीक और मुश्किल परिस्थितियों में शानदार बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले रहाणे ने अपने करियर में कई ऐसी पारियां खेलीं जिन्होंने भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। टेस्ट क्रिकेट में संकटमोचक की भूमिका निभाने वाले इस बल्लेबाज ने कई बार टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला और अपनी कप्तानी से भी अलग पहचान बनाई। आइए जानते हैं उनके करियर की पांच सबसे बड़ी उपलब्धियां जिन्होंने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल किया।

    साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेली गई 147 रन की पारी रहाणे के करियर की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। उस समय ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल जॉनसन रयान हैरिस जोश हेजलवुड और शेन वॉटसन बेहद खतरनाक लय में थे लेकिन रहाणे ने धैर्य और शानदार तकनीक का परिचय देते हुए 147 रन बनाए। विराट कोहली के साथ उनकी बड़ी साझेदारी ने भारत को हार से बचाया और मुकाबला ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई।

    इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेला गया उनका शतक भी हमेशा याद रखा जाएगा। जब भारतीय टीम शुरुआती झटकों के बाद मुश्किल में थी तब रहाणे ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए 103 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत भारत सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा और बाद में मुकाबला जीतकर लॉर्ड्स में 28 साल बाद ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह पारी उनके धैर्य और जिम्मेदारी का शानदार उदाहरण बनी।

    बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी 2020-21 में रहाणे की कप्तानी भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्यायों में शामिल है। एडिलेड टेस्ट में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद पूरी दुनिया ने भारतीय टीम को कमजोर माना था। विराट कोहली के स्वदेश लौटने के बाद रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न टेस्ट में शतक जड़ते हुए टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनकी शांत कप्तानी और आत्मविश्वास ने पूरी टीम का मनोबल बढ़ाया। भारत ने बाद में सीरीज 2-1 से जीतकर इतिहास रच दिया।

    साल 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रहाणे ने टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक लगाने का अनोखा रिकॉर्ड बनाया। पहली पारी में उन्होंने 127 रन बनाए जबकि दूसरी पारी में नाबाद 100 रन की शानदार पारी खेली। वह पांचवें या उससे नीचे बल्लेबाजी क्रम पर उतरकर टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। यह उपलब्धि उनकी निरंतरता और बड़े मैचों में शानदार प्रदर्शन की गवाही देती है।

    रहाणे की कप्तानी का रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा। उन्होंने भारत के लिए छह टेस्ट मैचों में कप्तानी की जिनमें चार मुकाबलों में जीत मिली जबकि दो मैच ड्रॉ रहे। सबसे खास बात यह रही कि उनकी कप्तानी में भारतीय टीम को एक भी टेस्ट मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा। शांत नेतृत्व और खिलाड़ियों पर भरोसा रखने की उनकी शैली की क्रिकेट जगत में खूब सराहना हुई।

    अजिंक्य रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि धैर्य अनुशासन और टीम के लिए समर्पण किसी भी खिलाड़ी को महान बना सकता है। भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी उपलब्धियां प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

  • ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्लासगो में आयोजित खेलों के सातवें दिन भारत ने एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में शानदार दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 10.71 सेकंड का समय निकालते हुए नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। वहीं उनके साथी मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के साथ सिल्वर जीतकर भारत को शानदार वन टू फिनिश दिलाई।

    भारत की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 में भी रजत पदक जीता था। फाइनल मुकाबले में जमैका के ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड हासिल किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने ब्रॉन्ज जीता। श्रीशंकर ने पूरे मुकाबले में शानदार निरंतरता दिखाई और अंतिम प्रयास तक पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    एथलेटिक्स के अलावा भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय बॉक्सिंग दल के सभी 10 खिलाड़ियों ने अपने अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाला प्रत्येक खिलाड़ी कम से कम कांस्य पदक का दावेदार बन जाता है। इस तरह भारत ने मुक्केबाजी में कम से कम 10 पदक पहले ही सुनिश्चित कर लिए हैं जो बर्मिंघम 2022 के प्रदर्शन से भी बेहतर उपलब्धि मानी जा रही है।

    इन शानदार प्रदर्शनों के बाद भारत की पदक तालिका भी मजबूत हुई है। देश के खाते में अब 15 पदक हो चुके हैं जिनमें 3 स्वर्ण 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की निरंतर सफलता ने भारतीय दल का मनोबल और बढ़ा दिया है।

    दिलीप गावित की ऐतिहासिक जीत और श्रीशंकर की शानदार छलांग ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलेटिक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वहीं मुक्केबाजों का दमदार प्रदर्शन आने वाले दिनों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद जगा रहा है। ग्लासगो से लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय खेल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया है और अब सभी की नजर आगामी फाइनल मुकाबलों पर टिकी हुई है जहां भारत के पास कई और पदक जीतने का सुनहरा अवसर होगा।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लंबी कूद में चमके मुरली श्रीशंकर 8.09 मीटर की छलांग लगाकर भारत को दिलाया सिल्वर

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लंबी कूद में चमके मुरली श्रीशंकर 8.09 मीटर की छलांग लगाकर भारत को दिलाया सिल्वर


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। भारत के स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश को सिल्वर मेडल दिलाया। ग्लासगो में आयोजित फाइनल मुकाबले में श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की शानदार छलांग लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया और एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया।

    केरल के पलक्कड़ के रहने वाले 27 वर्षीय श्रीशंकर ने प्रतियोगिता की शुरुआत 8.03 मीटर की छलांग से की। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने 8.09 मीटर की दूरी तय की जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साबित हुआ। इसके बाद कुछ प्रयास फाउल रहे लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखा और अंतिम दो प्रयासों में 7.94 मीटर तथा 7.97 मीटर की छलांग लगाकर अपना अभियान समाप्त किया। पूरे मुकाबले के दौरान वह पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    यह उपलब्धि श्रीशंकर के करियर की एक और बड़ी सफलता है। इससे पहले उन्होंने 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा था। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की लंबी कूद में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने थे। अब ग्लासगो में भी उन्होंने लगातार दूसरी बार सिल्वर जीतकर अपनी प्रतिभा और निरंतरता को साबित कर दिया है।

    इस मुकाबले में जमैका के विश्व चैंपियन ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर की छलांग के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा क्योंकि चार खिलाड़ियों ने आठ मीटर से अधिक दूरी तय की लेकिन श्रीशंकर का प्रदर्शन उन्हें दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सफल रहा।

    भारत के लिए इस स्पर्धा में एक और एथलीट लोकेश सत्यनाथन भी उतरे थे। उन्होंने 7.97 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर पांचवां स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक से चूक गए लेकिन उनका प्रदर्शन भी सराहनीय रहा और भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत छोड़ गया।

    श्रीशंकर के इस सिल्वर मेडल के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या और बढ़ गई। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स दोनों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारतीय खिलाड़ी अब विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में हर इवेंट में मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय दल का आत्मविश्वास लगातार बढ़ रहा है। वेटलिफ्टिंग पैरा एथलेटिक्स और अब लंबी कूद जैसे इवेंट में मिले पदकों ने देश की उम्मीदों को और मजबूत किया है। श्रीशंकर की यह सफलता आने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • गौतम गंभीर की टीम में बड़ा बदलाव रयान टेन डोशेट ने छोड़ा असिस्टेंट कोच का पद फील्डिंग कोच टी दिलीप का कार्यकाल भी खत्म

    गौतम गंभीर की टीम में बड़ा बदलाव रयान टेन डोशेट ने छोड़ा असिस्टेंट कोच का पद फील्डिंग कोच टी दिलीप का कार्यकाल भी खत्म


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम को श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही फील्डिंग कोच टी दिलीप का कार्यकाल भी समाप्त हो गया है और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उनके अनुबंध का नवीनीकरण नहीं करने का फैसला लिया है। इस बदलाव ने मुख्य कोच गौतम गंभीर के नेतृत्व वाले सपोर्ट स्टाफ में महत्वपूर्ण परिवर्तन कर दिया है।

    रयान टेन डोशेट पिछले दो वर्षों से भारतीय टीम के साथ जुड़े हुए थे। इस दौरान उन्होंने बल्लेबाजी और रणनीतिक तैयारियों में अहम भूमिका निभाई। गौतम गंभीर के करीबी सहयोगियों में शामिल टेन डोशेट ने इंग्लैंड दौरे के दौरान ही अपने इस्तीफे की जानकारी बीसीसीआई को दे दी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार अब वह दोबारा नाइट राइडर्स समूह के साथ नई जिम्मेदारी निभा सकते हैं।

    बीसीसीआई ने फील्डिंग कोच टी दिलीप का अनुबंध भी आगे नहीं बढ़ाया है। उनके स्थान पर सुभदीप घोष को नया फील्डिंग कोच नियुक्त किया गया है। बोर्ड का मानना है कि नए विश्व टेस्ट चक्र और आगामी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों को देखते हुए सपोर्ट स्टाफ में बदलाव जरूरी था।

    रयान टेन डोशेट का कार्यकाल भारतीय क्रिकेट के लिए कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों और कुछ चुनौतीपूर्ण दौर का गवाह रहा। उनके कार्यकाल में भारत ने सीमित ओवरों के क्रिकेट में उल्लेखनीय सफलता हासिल की लेकिन टेस्ट क्रिकेट में टीम को कुछ कठिन दौर से भी गुजरना पड़ा। इसके बावजूद डोशेट को खिलाड़ियों के साथ बेहतर तालमेल और रणनीतिक सोच के लिए जाना जाता रहा।

    अब भारतीय टीम की नजर 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज पर है। इस दौरे पर शुभमन गिल टीम की कप्तानी करेंगे जबकि कोचिंग स्टाफ में हुए बदलावों के बीच खिलाड़ियों के सामने नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की चुनौती भी होगी।

    बीसीसीआई और टीम प्रबंधन को उम्मीद है कि नए सपोर्ट स्टाफ के साथ टीम अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखेगी। श्रीलंका दौरा नए कोचिंग संयोजन की पहली बड़ी परीक्षा होगा और क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस बात पर रहेंगी कि इन बदलावों का टीम के प्रदर्शन पर कितना प्रभाव पड़ता है।