Tag: TeamIndia

  • इंदौर के सारांश जैन का टीम इंडिया में सपना हुआ साकार पहली बार टेस्ट टीम में मिली जगह श्रीलंका दौरे पर दिखाएंगे दम

    इंदौर के सारांश जैन का टीम इंडिया में सपना हुआ साकार पहली बार टेस्ट टीम में मिली जगह श्रीलंका दौरे पर दिखाएंगे दम


    इंदौर  इंदौर के लिए गर्व का पल सामने आया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया है जिसमें मध्यप्रदेश के होनहार स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है। वर्षों की मेहनत निरंतर प्रदर्शन और धैर्य के बाद आखिरकार सारांश का टीम इंडिया तक पहुंचने का सपना पूरा हो गया है। उनके चयन से न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के क्रिकेट प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

    33 वर्षीय सारांश जैन लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। हाल ही में श्रीलंका दौरे पर इंडिया ए टीम की ओर से दूसरे चार दिवसीय मुकाबले में उन्होंने नाबाद 70 रन बनाने के साथ छह विकेट लेकर अपनी ऑलराउंड क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। यही प्रदर्शन उनके लिए राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खोलने में निर्णायक साबित हुआ।

    प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सारांश का रिकॉर्ड भी बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 54 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में 2223 रन बनाए हैं और 188 विकेट अपने नाम किए हैं। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में लगातार योगदान देने की उनकी क्षमता उन्हें एक उपयोगी ऑलराउंडर बनाती है। यही वजह है कि चयनकर्ताओं ने श्रीलंका दौरे के लिए उन पर भरोसा जताया है।

    सारांश जैन का क्रिकेट सफर इंदौर के विजय क्लब से शुरू हुआ था। इसी मैदान पर उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं और अपने खेल को निखारा। इसी क्लब में भारतीय बल्लेबाज रजत पाटीदार के साथ भी उन्होंने अभ्यास किया। वर्षों तक घरेलू क्रिकेट में मेहनत करने के बाद अब उन्हें देश की सर्वोच्च क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का अवसर मिला है।

    सारांश के चयन के पीछे उनके परिवार का संघर्ष भी प्रेरणादायक है। उनके पिता सुबोध जैन मध्यप्रदेश की ओर से रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं। उनका सपना भारत के लिए खेलना था लेकिन वह पूरा नहीं हो सका। अब बेटे सारांश के जरिए उनका सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। कठिन परिस्थितियों में भी पिता ने बेटे का मनोबल कभी टूटने नहीं दिया। वहीं बड़े भाई ने अपना क्रिकेट करियर छोड़कर सारांश के सपनों को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया।

    भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में खेला जाएगा जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर होगा। इस दौरे पर सारांश के पास टेस्ट कैप हासिल कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने करियर की शानदार शुरुआत करने का सुनहरा अवसर होगा।

    भारतीय टीम की कप्तानी शुभमन गिल करेंगे जबकि केएल राहुल उपकप्तान होंगे। बल्लेबाजी में यशस्वी जायसवाल ऋषभ पंत देवदत्त पडिक्कल और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं। वहीं स्पिन विभाग में रविंद्र जडेजा कुलदीप यादव मानव सुथार और सारांश जैन पर बड़ी जिम्मेदारी रहेगी। यदि उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिलता है तो यह उनके करियर का सबसे यादगार क्षण होगा और भारतीय क्रिकेट में एक नई शुरुआत भी।

  • टीम इंडिया का अगला मिशन श्रीलंका 15 अगस्त से शुरू होगी टेस्ट सीरीज अक्टूबर तक का पूरा कार्यक्रम आया सामने

    टीम इंडिया का अगला मिशन श्रीलंका 15 अगस्त से शुरू होगी टेस्ट सीरीज अक्टूबर तक का पूरा कार्यक्रम आया सामने


    नई दिल्ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार 3-0 की जीत दर्ज करने के बाद अब भारतीय क्रिकेट टीम की नजर अगले विदेशी दौरे पर है। करीब 15 दिन के ब्रेक के बाद टीम इंडिया श्रीलंका का दौरा करेगी जहां उसे दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। इस दौरे के साथ भारतीय टीम एक बार फिर लाल गेंद के क्रिकेट में मैदान पर उतरेगी। माना जा रहा है कि इस सीरीज के लिए टीम का ऐलान 28 जुलाई को किया जा सकता है।

    आईपीएल 2026 के बाद भारतीय टीम लगातार विदेशी दौरों पर व्यस्त रही है। सबसे पहले टीम ने आयरलैंड का दौरा किया जहां उसे सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी भारत वनडे और टी20 दोनों सीरीज जीतने में सफल नहीं रहा। हालांकि जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम इंडिया ने टी20 सीरीज 3-0 से अपने नाम कर आत्मविश्वास हासिल किया है।

    अब भारतीय टीम का अगला मुकाबला श्रीलंका से होगा। दोनों देशों के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 15 अगस्त से गॉल में शुरू होगा जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। श्रीलंका की घरेलू परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजी बड़ी भूमिका निभाती है इसलिए यह दौरा भारतीय टीम के लिए आसान नहीं माना जा रहा।

    श्रीलंका दौरे के बाद भारतीय खिलाड़ियों को लगभग एक महीने का आराम मिलेगा। इसके बाद सितंबर के आखिर में वेस्टइंडीज की टीम भारत दौरे पर आएगी। इस दौरे में तीन वनडे और पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जाएंगे। घरेलू मैदान पर होने वाली इस सीरीज में भारतीय टीम मजबूत प्रदर्शन के इरादे से उतरेगी।

    अक्टूबर तक टीम इंडिया का शेड्यूल
    15 अगस्त 2026 -पहला टेस्ट, श्रीलंका बनाम भारत, गॉल, सुबह 10 बजे
    23 अगस्त 2026 -दूसरा टेस्ट, श्रीलंका बनाम भारत, कोलंबो (SSC), सुबह 10 बजे

    वेस्टइंडीज का भारत दौर
    27 सितंबर 2026 -पहला वनडे, तिरुवनंतपुरम, दोपहर 2 बजे
    30 सितंबर 2026 -दूसरा वनडे, गुवाहाटी, दोपहर 2 बजे
    3 अक्टूबर 2026 -तीसरा वनडे, न्यू चंडीगढ़, दोपहर 2 बजे

    टी20 सीरी
    6 अक्टूबर 2026 -पहला टी20, लखनऊ, शाम 7 बजे
    9 अक्टूबर 2026  -दूसरा टी20, रांची, शाम 7 बजे
    11 अक्टूबर 2026  -तीसरा टी20, इंदौर, शाम 7 बजे
    14 अक्टूबर 2026 -चौथा टी20, हैदराबाद, शाम 7 बजे
    17 अक्टूबर 2026 -पांचवां टी20, बेंगलुरु, शाम 7 बजे

    भारतीय टीम के सामने अब लगातार चुनौतीपूर्ण मुकाबलों का सिलसिला है। श्रीलंका में टेस्ट सीरीज जीतने के बाद टीम घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ सीमित ओवरों की सीरीज खेलेगी। ऐसे में आने वाले महीनों में क्रिकेट प्रशंसकों को लगातार रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे।

  • ई रिक्शा चलाने वाले बिहार के लाल ने रचा इतिहास कॉमनवेल्थ गेम्स में झंडू कुमार ने दिलाया भारत को पहला मेडल

    ई रिक्शा चलाने वाले बिहार के लाल ने रचा इतिहास कॉमनवेल्थ गेम्स में झंडू कुमार ने दिलाया भारत को पहला मेडल


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए पहला पदक जीत लिया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने हासिल की जिन्होंने पुरुषों की हेवीवेट स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पूरे देश को गर्व का अवसर दिया। ग्लासगो में आयोजित इस मुकाबले में झंडू कुमार ने अपने दमदार प्रदर्शन से साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां कभी भी मजबूत इरादों को नहीं रोक सकतीं। उनका यह पदक केवल भारत के लिए पहला मेडल नहीं बल्कि संघर्ष और मेहनत की जीत का प्रतीक भी बन गया।

    झंडू कुमार की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उनका जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता है। कभी ई रिक्शा चलाकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाले झंडू के पिता सड़क किनारे सब्जियां बेचकर घर चलाते थे। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा ऊंचा कर दिखाया।

    29 वर्षीय झंडू कुमार ने प्रतियोगिता की शुरुआत पूरे आत्मविश्वास के साथ की। दूसरे प्रयास में उन्होंने 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और खुद को पदक की दौड़ में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। यह वजन उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से थोड़ा कम जरूर था लेकिन प्रतियोगिता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में 196 किलोग्राम वजन उठाकर बड़ा रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की लेकिन मामूली अंतर से सफल नहीं हो सके। हालांकि उनका पहले का प्रदर्शन उन्हें पदक दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ।

    मुकाबले में आखिरी क्षण तक रोमांच बना रहा। नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने अंतिम प्रयास में 212 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की लेकिन वह इसमें असफल रहे। इसी के साथ झंडू कुमार का ब्रॉन्ज मेडल पूरी तरह पक्का हो गया। इस रोमांचक नतीजे के बाद भारतीय दल और दर्शकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

    प्रतियोगिता में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 208 किलोग्राम की सफल लिफ्ट के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 199 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक हासिल किया। झंडू कुमार ने 190 किलोग्राम की सफल लिफ्ट और 130.9 अंक के साथ तीसरा स्थान प्राप्त करते हुए भारत की झोली में पहला पदक डाल दिया।

    इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि दिन की शुरुआत भारत के लिए निराशाजनक रही थी। पुरुषों की लाइटवेट स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ी पदक से चूक गया था लेकिन झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन कर पूरे भारतीय दल का मनोबल बढ़ा दिया। उनकी जीत ने यह संदेश दिया कि भारतीय खिलाड़ी हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।

    झंडू कुमार की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित किया कि सफलता पाने के लिए महंगे संसाधनों से ज्यादा जरूरी मजबूत इरादे और लगातार मेहनत होती है। बिहार के एक साधारण परिवार से निकलकर कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच पर देश के लिए पदक जीतना उनके संघर्ष और समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण है। अब पूरे देश को उम्मीद है कि इस पहले पदक के बाद भारतीय खिलाड़ी आने वाले मुकाबलों में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों की संख्या लगातार बढ़ाएंगे।

  • हरारे में फिर होगा वैभव का धमाका टीम इंडिया की नजर सीरीज पर जिम्बाब्वे के लिए करो या मरो का मुकाबला

    हरारे में फिर होगा वैभव का धमाका टीम इंडिया की नजर सीरीज पर जिम्बाब्वे के लिए करो या मरो का मुकाबला


    नई दिल्ली। भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा जहां टीम इंडिया की नजरें जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने पर होंगी। पहले मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम ने सात विकेट से जीत दर्ज की थी और अब उसके पास अजेय बढ़त हासिल करने का सुनहरा मौका है। दूसरी ओर मेजबान जिम्बाब्वे के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा होगा क्योंकि हार के साथ सीरीज भी हाथ से निकल जाएगी। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को एक बार फिर रोमांच से भरपूर मुकाबले की उम्मीद है।

    पहले मैच के सबसे बड़े हीरो युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी रहे जिन्होंने अपनी बेखौफ बल्लेबाजी से सभी का दिल जीत लिया। महज 19 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का दमदार परिचय दिया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों की पूरी रणनीति को ध्वस्त कर दिया था। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वैभव दूसरे मुकाबले में भी उसी अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए विपक्षी गेंदबाजों पर कहर बरपा पाएंगे। अगर उनका बल्ला एक बार फिर चल पड़ा तो जिम्बाब्वे की मुश्किलें कई गुना बढ़ सकती हैं।

    टीम इंडिया के लिए सिर्फ वैभव ही नहीं बल्कि सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा भी बेहद अहम खिलाड़ी होंगे। टी20 क्रिकेट में उनकी तेज शुरुआत किसी भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखती है। यदि अभिषेक और वैभव शुरुआती ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी करते हैं तो भारत एक बार फिर बड़ा स्कोर खड़ा कर सकता है। मध्यक्रम में मौजूद बल्लेबाज भी अच्छी लय में दिखाई दे रहे हैं जिससे भारतीय बल्लेबाजी पहले से अधिक मजबूत नजर आ रही है।

    गेंदबाजी विभाग में तेज रफ्तार के लिए मशहूर मयंक यादव पर भी सभी की नजरें रहेंगी। पहले मुकाबले में उन्होंने अपनी रफ्तार और सटीक लाइन लेंथ से जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों को खूब परेशान किया था। दो महत्वपूर्ण विकेट लेने के साथ उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया था। उनकी 150 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार विपक्षी बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। अगर मयंक एक बार फिर नई गेंद से शुरुआती झटके दिलाते हैं तो भारत की जीत की राह और आसान हो जाएगी।

    भारतीय टीम पहले मुकाबले की तरह बल्लेबाजी गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में शानदार प्रदर्शन दोहराना चाहेगी। कप्तान की कोशिश होगी कि टीम शुरुआती बढ़त का पूरा फायदा उठाए और सीरीज पर कब्जा जमाए। वहीं जिम्बाब्वे अपनी घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाकर वापसी करने की पूरी कोशिश करेगा। मेजबान टीम जानती है कि इस मुकाबले में हार का मतलब सीरीज गंवाना होगा इसलिए वह पूरी ताकत के साथ मैदान पर उतरेगी।

    हरारे में होने वाला यह मुकाबला युवा खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का बड़ा अवसर भी माना जा रहा है। वैभव सूर्यवंशी के प्रदर्शन पर पूरे क्रिकेट जगत की नजरें टिकी होंगी क्योंकि उन्होंने कम उम्र में जिस आत्मविश्वास और आक्रामक अंदाज का परिचय दिया है उसने उन्हें भारतीय क्रिकेट का नया सितारा बना दिया है। यदि वह दूसरी बार भी धमाकेदार पारी खेलते हैं तो यह सीरीज उनके करियर का एक और यादगार अध्याय बन सकती है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए पीएम मोदी का भारतीय दल को संदेश, कहा- खिलाड़ियों का जज्बा देश को नई प्रेरणा देगा

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए पीएम मोदी का भारतीय दल को संदेश, कहा- खिलाड़ियों का जज्बा देश को नई प्रेरणा देगा

    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के शुभारंभ के साथ भारत ने भी अपने अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय दल को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि देश के खिलाड़ी पूरे जोश, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ प्रतियोगिता में उतरेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय एथलीट केवल पदक जीतने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनुशासन, मेहनत और समर्पण से देश के करोड़ों लोगों को प्रेरित करने के लिए भी पहचाने जाते हैं। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब भारतीय खेल जगत की निगाहें ग्लासगो में होने वाले मुकाबलों पर टिकी हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिभा और कठिन परिश्रम हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी भारतीय दल खेल भावना का परिचय देते हुए शानदार प्रदर्शन करेगा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाएगा। उनके संदेश को खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए उत्साहवर्धक माना जा रहा है।

    स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का उद्घाटन रंगारंग समारोह के साथ हुआ। उद्घाटन की औपचारिक घोषणा किंग चार्ल्स तृतीय ने की। वर्ष 2014 के बाद दूसरी बार ग्लासगो इस बहु-खेल प्रतियोगिता की मेजबानी कर रहा है। उद्घाटन समारोह में विभिन्न देशों के खिलाड़ियों ने परेड ऑफ नेशंस में भाग लिया और अपनी सांस्कृतिक पहचान का प्रदर्शन किया।

    भारतीय दल की अगुवाई इस बार ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने की। मीराबाई चानू ने हाथों में तिरंगा लेकर भारतीय खिलाड़ियों का नेतृत्व किया, जबकि लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन के साथ समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय दल का उत्साह और बढ़ा दिया।

    भारत ने इस बार 126 सदस्यीय दल भेजा है, जो पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में चुनौती पेश करेगा। भारतीय खिलाड़ियों का लक्ष्य कॉमनवेल्थ खेलों में अपने मजबूत प्रदर्शन की परंपरा को आगे बढ़ाना है। प्रतियोगिता के शुरुआती चरण में ही भारत का अभियान शुरू हो चुका है और कुछ खिलाड़ियों ने प्रभावशाली शुरुआत भी की है। मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन पहले ही सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के लिए एक पदक सुनिश्चित कर चुकी हैं, जिससे दल का आत्मविश्वास बढ़ा है।

    भारत की पदक उम्मीदें कई अनुभवी और स्टार खिलाड़ियों पर टिकी हैं। भाला फेंक में नीरज चोपड़ा, वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू और मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन से शानदार प्रदर्शन की अपेक्षा की जा रही है। इनके अलावा कई युवा खिलाड़ी भी पहली बार बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तैयार हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करते हैं तो इस बार भी पदक तालिका में भारत मजबूत स्थान हासिल कर सकता है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 74 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी 11 दिनों तक विभिन्न खेलों में प्रतिस्पर्धा करेंगे। यह आयोजन न केवल खिलाड़ियों के कौशल की परीक्षा है, बल्कि खेल भावना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। भारतीय दल का लक्ष्य बेहतर प्रदर्शन के साथ देश का गौरव बढ़ाना और वैश्विक खेल मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना रहेगा।

  • ICC वनडे रैंकिंग में शुभमन गिल नंबर-1 से सिर्फ एक कदम दूर, टॉप-5 में भारत के तीन बल्लेबाज बरकरार

    ICC वनडे रैंकिंग में शुभमन गिल नंबर-1 से सिर्फ एक कदम दूर, टॉप-5 में भारत के तीन बल्लेबाज बरकरार

    नई दिल्ली । इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई वनडे सीरीज के बाद जारी ताजा ICC ODI बल्लेबाजी रैंकिंग में भारतीय बल्लेबाजों का दबदबा कायम है। कप्तान शुभमन गिल नंबर-1 बल्लेबाज बनने से सिर्फ एक रेटिंग अंक दूर हैं, जबकि विराट कोहली और रोहित शर्मा टॉप-5 में बने हुए हैं।

    बल्लेबाजी रैंकिंग: मुख्य बातें
    शुभमन गिल: इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में 188 रन बनाने के बाद गिल के खाते में 801 रेटिंग अंक हो गए हैं। वह शीर्ष पर मौजूद न्यूजीलैंड के डेरिल मिचेल (802 अंक) से सिर्फ एक अंक पीछे हैं।

    विराट कोहली: 767 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर बने हुए हैं।

    रोहित शर्मा: 758 अंकों के साथ चौथे स्थान पर काबिज हैं।

    श्रेयस अय्यर: दो स्थान की छलांग लगाकर 13वें नंबर पर पहुंच गए हैं।

    इंग्लैंड के खिलाड़ियों को फायदा

    जो रूट: भारत के खिलाफ सीरीज में 249 रन बनाकर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुने गए जो रूट ने चार स्थान की छलांग लगाई है और अब आठवें नंबर पर पहुंच गए हैं।

    बेन डकेट: 11 पायदान चढ़कर संयुक्त रूप से 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

    जैकब बेथेल: पांच स्थान के सुधार के साथ 64वें नंबर पर आ गए हैं।

    गेंदबाजी रैंकिंग का हाल
    कुलदीप यादव: भारत के स्टार स्पिनर को नुकसान हुआ है और वह टॉप-10 से बाहर होकर 11वें स्थान पर खिसक गए हैं।

    राशिद खान: अफगानिस्तान के राशिद खान गेंदबाजों की सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं।

    जोफ्रा आर्चर: भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में 5 विकेट लेने के बाद इंग्लैंड के जोफ्रा आर्चर एक स्थान ऊपर चढ़कर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। पाकिस्तान के अबरार अहमद उनसे ऊपर दूसरे स्थान पर हैं।

  • ICC ODI Ranking में शुभमन गिल नंबर-1 से सिर्फ एक कदम दूर, डेरिल मिशेल से महज 1 अंक पीछे

    ICC ODI Ranking में शुभमन गिल नंबर-1 से सिर्फ एक कदम दूर, डेरिल मिशेल से महज 1 अंक पीछे


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा जारी ताजा वनडे रैंकिंग में भारतीय कप्तान शुभमन गिल विश्व के नंबर-1 बल्लेबाज बनने की दहलीज पर पहुंच गए हैं। न्यूजीलैंड के स्टार बल्लेबाज डेरिल मिशेल 802 रेटिंग अंकों के साथ पहले स्थान पर कायम हैं, जबकि शुभमन गिल उनसे महज एक रेटिंग अंक पीछे दूसरे स्थान पर मौजूद हैं। ऐसे में आगामी मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन गिल को वनडे का नया नंबर-1 बल्लेबाज बना सकता है।

    भारतीय बल्लेबाजों का दबदबा रैंकिंग में साफ दिखाई दे रहा है। विराट कोहली तीसरे और रोहित शर्मा चौथे स्थान पर बने हुए हैं। हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स वनडे में शानदार 138 रन की पारी खेलने का फायदा रोहित को भी मिला है। अफगानिस्तान के युवा बल्लेबाज इब्राहिम जादरान पांचवें स्थान पर हैं।

    पाकिस्तान के बाबर आजम और आयरलैंड के हैरी टैक्टर ने भी एक-एक स्थान का सुधार किया है और वे क्रमशः छठे तथा सातवें स्थान पर पहुंच गए हैं। भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने वाले इंग्लैंड के अनुभवी बल्लेबाज जो रूट को चार स्थानों का फायदा मिला है। वह आठवें स्थान पर पहुंचकर एक बार फिर शीर्ष-10 बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो गए हैं।

    वेस्टइंडीज के शे होप को तीन स्थान का नुकसान हुआ है और वह नौवें स्थान पर खिसक गए हैं, जबकि श्रीलंका के चरिथ असलांका दसवें स्थान पर बने हुए हैं।

    वनडे गेंदबाजों की रैंकिंग में भी बदलाव

    गेंदबाजों की रैंकिंग में अफगानिस्तान के राशिद खान पहले स्थान पर कायम हैं, जबकि पाकिस्तान के अबरार अहमद दूसरे नंबर पर हैं। इंग्लैंड के जोफ्रा आर्चर एक स्थान की छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।

    न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर को तीन स्थान का फायदा मिला है और वह चौथे नंबर पर पहुंच गए हैं। दक्षिण अफ्रीका के केशव महाराज और श्रीलंका के महेश थीक्षाना क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर हैं।

    पाकिस्तान के शाहीन शाह अफरीदी दो स्थान के सुधार के साथ सातवें और बांग्लादेश के मेहदी हसन मिराज आठवें स्थान पर पहुंच गए हैं। इंग्लैंड के आदिल रशीद नौवें स्थान पर खिसक गए हैं, जबकि वेस्टइंडीज के गुडाकेश मोती ने सात स्थान की बड़ी छलांग लगाते हुए टॉप-10 में दसवां स्थान हासिल कर लिया है।

    अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर आगामी वनडे मुकाबलों पर होगी, जहां शुभमन गिल के पास दुनिया के नंबर-1 वनडे बल्लेबाज बनने का सुनहरा अवसर होगा।

  • हरारे में वापसी को तैयार वैभव सूर्यवंशी, कहा- प्रक्रिया पर भरोसा है, बड़ी पारी खेलने की कोशिश करूंगा

    हरारे में वापसी को तैयार वैभव सूर्यवंशी, कहा- प्रक्रिया पर भरोसा है, बड़ी पारी खेलने की कोशिश करूंगा


    नई दिल्ली ।  भारत और जिम्बाब्वे के बीच 23 जुलाई से हरारे में शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज से पहले युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपने प्रदर्शन और तैयारी को लेकर भरोसा जताया है। इंग्लैंड के खिलाफ हालिया टी20 सीरीज में लगातार तीन मैचों में बड़ी पारी नहीं खेल पाने के बावजूद वैभव ने कहा कि क्रिकेट में फॉर्म का ऊपर-नीचे होना सामान्य बात है और उनका पूरा ध्यान प्रक्रिया पर कायम रहने तथा टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर है।

    बीसीसीआई टीवी से बातचीत में वैभव ने कहा कि पिछले चार महीनों में उनके क्रिकेट करियर में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन यही खेल की प्रकृति है। उन्होंने कहा कि वह अपनी तैयारियों पर पूरा भरोसा रखते हैं और कोचिंग स्टाफ से उन्हें लगातार सही मार्गदर्शन और अभ्यास का पूरा सहयोग मिल रहा है। इससे उनका आत्मविश्वास मजबूत हुआ है।

    वैभव ने हरारे स्पोर्ट्स क्लब को अपने करियर का बेहद खास मैदान बताया। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले इसी मैदान पर भारत ने अंडर-19 विश्व कप का फाइनल जीता था, जो उनके जीवन का अविस्मरणीय पल है। उसी मैदान पर फिर से भारत की सीनियर टीम का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलना उनके लिए गर्व की बात है।

    युवा बल्लेबाज ने कहा कि हरारे की पिच और परिस्थितियों की उन्हें अच्छी समझ है, क्योंकि अंडर-19 विश्व कप के दौरान यहां कई मुकाबले खेल चुके हैं। उनका मानना है कि उस टूर्नामेंट से मिले अनुभव का फायदा अब इस टी20 सीरीज में मिलेगा और वह उसी आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेंगे।

    उन्होंने कहा कि अभ्यास के दौरान जिस तरह की तैयारी की है, उसी पर भरोसा रखते हुए अपने स्वाभाविक खेल को जारी रखेंगे। उनका लक्ष्य व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान देना है। वैभव ने उम्मीद जताई कि हरारे में उनका पिछला शानदार प्रदर्शन इस बार भी उन्हें बड़ी पारी खेलने का आत्मविश्वास देगा।

    गौरतलब है कि अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें एक बार फिर हरारे में उनकी बल्लेबाजी पर टिकी होंगी।

  • टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

    टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे चतुर लेग स्पिनरों में शामिल युजवेंद्र चहल का सफर संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। आज बल्लेबाजों को अपनी फिरकी में फंसाने वाले चहल कभी शतरंज की बिसात पर देश का नाम रोशन करने का सपना देखते थे। आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें खेल बदलने पर मजबूर किया, लेकिन क्रिकेट में उन्होंने ऐसी पहचान बनाई कि उनका नाम भारतीय टीम के सफल स्पिनरों में शामिल हो गया।

    23 जुलाई 1990 को हरियाणा के जींद जिले में जन्मे युजवेंद्र चहल बचपन से ही शतरंज के प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे। उन्होंने अंडर-12 राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप अपने नाम की और जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

    हालांकि शतरंज में आगे बढ़ने के लिए लगातार आर्थिक सहयोग की जरूरत थी। संसाधनों की कमी के कारण उन्हें इस खेल को छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट को अपना करियर बनाने का फैसला किया। शुरुआती दिनों में चहल खेतों में अभ्यास करते थे। उनकी इच्छा तेज गेंदबाज बनने की थी, लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने लेग स्पिन गेंदबाजी अपनाई और यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

    घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर चहल को वर्ष 2016 में भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने 11 जून 2016 को जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे और इसके बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।

    चहल ने 1 फरवरी 2017 को इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए टी20 मुकाबले में इतिहास रच दिया। उन्होंने चार ओवर में केवल 25 रन देकर छह विकेट झटके और टी20 इंटरनेशनल में भारत की ओर से एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने। उनका यह प्रदर्शन आज भी भारतीय टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शनों में गिना जाता है।

    अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में चहल ने भारत के लिए 72 वनडे मैचों में 121 विकेट और 80 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 96 विकेट हासिल किए हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विविधता और दबाव में विकेट निकालने की क्षमता उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद स्पिनरों में शामिल करती है।

    शतरंज की बिसात से क्रिकेट के मैदान तक का युजवेंद्र चहल का सफर यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।

  • जिम्बाब्वे कप्तान सिकंदर रजा का भारत को खुला चैलेंज बोले एकतरफा नहीं होगी सीरीज रोमांच तय

    जिम्बाब्वे कप्तान सिकंदर रजा का भारत को खुला चैलेंज बोले एकतरफा नहीं होगी सीरीज रोमांच तय


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच 24 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज से पहले मेजबान टीम के कप्तान सिकंदर रजा ने बड़ा बयान देकर मुकाबले का रोमांच और बढ़ा दिया है। रजा ने भारत को सीरीज का प्रबल दावेदार मानने से साफ इनकार करते हुए कहा कि यह मुकाबला पूरी तरह संतुलित रहेगा और दोनों टीमों के पास जीत हासिल करने का समान अवसर होगा। उनका मानना है कि क्रिकेट में नाम से नहीं बल्कि मैदान पर प्रदर्शन से नतीजे तय होते हैं।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब में होने वाली इस टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 24 जुलाई को खेला जाएगा जबकि बाकी दो मैच 25 और 26 जुलाई को इसी मैदान पर आयोजित होंगे। भारतीय टीम हालिया सीमित ओवरों की सीरीज में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी है और अब वह नई शुरुआत की तलाश में जिम्बाब्वे पहुंची है। दूसरी ओर मेजबान टीम अपने घरेलू मैदान का पूरा फायदा उठाने की तैयारी में है।

    सिकंदर रजा ने कहा कि भारतीय टीम इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है लेकिन जिम्बाब्वे भी युवा खिलाड़ियों के साथ नई टीम तैयार कर रहा है। ऐसे में किसी एक टीम को पहले से विजेता घोषित करना सही नहीं होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे और दर्शकों को रोमांचक क्रिकेट देखने को मिलेगा।

    रजा ने कहा कि उनकी टीम का आत्मविश्वास हाल के प्रदर्शन से काफी बढ़ा है। जिम्बाब्वे ने इस वर्ष कई मजबूत टीमों के खिलाफ प्रभावशाली खेल दिखाया है और महत्वपूर्ण मुकाबलों में जीत दर्ज कर अपनी क्षमता साबित की है। यही कारण है कि टीम भारतीय चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    हालांकि भारत का टी20 क्रिकेट में रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है लेकिन हाल के विदेशी दौरों में मिली हार ने टीम पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में भारतीय खिलाड़ी वापसी की कोशिश करेंगे। वहीं जिम्बाब्वे की नजर घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर एक और बड़ी जीत दर्ज करने पर होगी।

    गौरतलब है कि पिछले दौरे पर भारतीय टीम ने शुरुआती हार के बाद शानदार वापसी करते हुए सीरीज अपने नाम की थी लेकिन इस बार मेजबान टीम पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगी। सिकंदर रजा का मानना है कि इस बार मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कड़ा होगा और परिणाम आखिरी क्षणों तक तय नहीं होगा।

    दोनों टीमों के हालिया प्रदर्शन और युवा खिलाड़ियों की मौजूदगी को देखते हुए क्रिकेट प्रेमियों को एक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी टी20 सीरीज की उम्मीद रहेगी जहां हर मुकाबले में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।