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  • मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर पड़ेगा असर: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

    मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर पड़ेगा असर: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों और मठों में प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी वर्ग विशेष को बाहर रखना समाज को विभाजित कर सकता है और इसका नकारात्मक प्रभाव हिंदू धर्म पर पड़ सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सभी मंदिरों और मठों में जाने का अधिकार होना चाहिए।

    यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने शबरिमला मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान की। पीठ धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और उसके विस्तार पर भी विचार कर रही है।

    पीठ में शामिल न्यायाधीश

    संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं। उनके साथ न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।

    अदालत ने क्या कहा

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यदि परंपरा के नाम पर किसी वर्ग को मंदिर प्रवेश से रोका जाता है, तो इससे हिंदू धर्म पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को मंदिर और मठ में प्रवेश का अधिकार होना चाहिए।

    इससे सहमति जताते हुए न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने कहा कि इस तरह का निष्कासन समाज को बांट देगा।

    संगठनों की दलील

    सुनवाई के दौरान नायर सर्विस सोसाइटी, अयप्पा सेवा समाजम और क्षेत्र संरक्षण समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने दलील दी कि कुछ मंदिर विशेष वर्ग तक सीमित हो सकते हैं।

    ‘वेंकटरमण देवरू’ मामले का जिक्र

    अदालत ने वेंकटरमण देवरू मामला का हवाला देते हुए कहा कि प्रवेश पर रोक लगाने की परंपरा का व्यापक असर धर्म पर पड़ सकता है।

    शबरिमला विवाद की पृष्ठभूमि

    2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के शबरिमला अयप्पा मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाया था। बाद में 2019 में इस मुद्दे को व्यापक विचार के लिए बड़ी पीठ को भेज दिया गया।

    अदालत फिलहाल धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सात प्रमुख सवालों पर विचार कर रही है और सुनवाई जारी है।

  • सलकनपुर मंदिर परिसर में सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं सभी व्यवस्थाएं

    सलकनपुर मंदिर परिसर में सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं सभी व्यवस्थाएं

    सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित विजयासन देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का सलकनपुर आगमन हो रहा है। श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना एवं दर्शन में किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसके लिए कलेक्टर बालागुरू के. के निर्देशानुसार प्रशासन द्वारा सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

    मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पार्किंग, पेयजल, साफ-सफाई तथा पर्याप्त बिजली की व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के सुगम आगमन एवं निर्गमन के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ ही मेला स्थल पर दुकानों को व्यवस्थित ढंग से लगाया गया है, जिससे किसी प्रकार की असुविधा न हो। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए भी पर्याप्त संख्या में पुलिस एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।

    जनसम्पर्क अधिकारी देवेन्द्र ओगारे ने शुक्रवार को बताया कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए हेल्थ कैंप लगाया गया हैं। जिससे श्रद्धालुओं को चिकित्सा की आवश्यकता पड़ने पर तत्काल रूप से मेडिकल सहायता प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही इमरजेंसी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में कोई परेशानी न हो, इसके लिए मुख्य स्थानों पर हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर में कन्ट्रोल रूम भी बनाए गए हैं, जिससे ड्यूटी के दौरान सभी अधिकारी-कर्मचारी सतत संपर्क में हैं और पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं।

  • सलकनपुर में चैत्र नवरात्रि की धूम, मां विजयासन देवी मंदिर सज-धज कर स्वागत को तैयार

    सलकनपुर में चैत्र नवरात्रि की धूम, मां विजयासन देवी मंदिर सज-धज कर स्वागत को तैयार

    बुधनी । मध्यप्रदेश के मशहूर शक्तिपीठ मां विजयासन देवी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का उत्सव फिर से देखने को मिलेगा। 19 मार्च 2026 से शुरू होने वाले चैत्र नवरात्रि के लिए मंदिर समिति ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। बुधनी विधानसभा क्षेत्र में स्थित यह दिव्य धाम हर साल लाखों श्रद्धालुओं का आकर्षण केंद्र बनता है और इस बार भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

    गुरुवार सुबह 10:47 बजे शुभ मुहूर्त में घट स्थापना और ज्योति स्थापना के साथ नौ दिवसीय नवरात्रि का शुभारंभ होगा। यह पर्व 27 मार्च को राम नवमी के दिन समाप्त होगा। भक्तों की आस्था उत्साह और भक्ति का संगम इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में साफ दिखाई देगा।

    मंदिर समिति ने गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पानी छांव और परिक्रमा मार्ग में कारपेट बिछाने जैसी व्यवस्थाओं का खास इंतजाम किया है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए समिति हर संभव प्रयास कर रही है। मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्त लगभग 1400 सीढ़ियों का रास्ता तय कर सकते हैं। इसके अलावा रोपवे और सड़क मार्ग की सुविधा भी उपलब्ध है जिससे बुजुर्ग और छोटे बच्चों वाले परिवार भी आसानी से दर्शन कर सकते हैं।

    सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हैं। नवरात्रि के दौरान सैकड़ों पुलिस जवान और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहेंगे ताकि भक्तों के लिए व्यवस्था सुचारू बनी रहे और किसी भी तरह की असुविधा न हो। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के साथ साथ भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।

    मंदिर का वातावरण नवरात्रि की शुरुआत से ही भक्तिमय हो जाएगा। श्रद्धालु सुबह शाम पूजन हवन और आरती में भाग लेंगे। इस दौरान देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा और भजन कीर्तन का आयोजन भी होगा। मंदिर के आसपास स्थानीय बाजार भी सज धज कर उत्सव का रंग बिखेरेंगे जहां भक्त पूजा सामग्री और नवरात्रि से जुड़े अन्य सामान खरीद सकते हैं।

    भक्ति श्रद्धा और उत्साह के इस महापर्व में सलकनपुर एक बार फिर आस्था के रंग में रंगने को तैयार है। हर उम्र के भक्त इस अवसर पर माता के दर्शन के लिए दूर दूर से यहां पहुंचते हैं। नौ दिन तक चलने वाले इस पर्व में भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए देवी की उपासना करेंगे और मंदिर परिसर में चारों ओर भक्तों की भीड़ भजन और आरती का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा।

    सलकनपुर और मां विजयासन देवी मंदिर इस बार भी श्रद्धालुओं को यादगार अनुभव देने के लिए पूरी तरह सज धज कर तैयार हैं। नवरात्रि के इस महापर्व में हर कोई आस्था उल्लास और भक्तिभाव में डूबकर माता के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करेगा।

  • करीलाधाम देश का एकमात्र मंदिर जहां माता सीता अपने दोनों पुत्रों के साथ हैं विराजमान

    करीलाधाम देश का एकमात्र मंदिर जहां माता सीता अपने दोनों पुत्रों के साथ हैं विराजमान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि करीलाधाम श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अदभुत संगम है। इस पावन स्थल पर माता सीता अपने दोनों पुत्र लव-कुश के साथ विराजमान हैं। यह देश का एकमात्र अद्वितीय मंदिर है, जहाँ माता सीता अपने दोनों पुत्रों के साथ पूजी जाती हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को अशोकनगर जिले के करीलाधाम में रंगपंचमी मेला महोत्सव में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश मंदिर भगवान श्रीराम को समर्पित हैं। करीलाधाम लव-कुश की जन्मस्थली भी है, जो लव-कुश की बाल लीलाओं की साक्षी है। इस पवित्र स्थली के सम्पूर्ण विकास की योजना बनाई जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने करीलाधाम में माता जानकी के दर्शन भी किए और जिले को 115 करोड़ रुपये लागत के 50 विकास कार्यों की सौगात भी दी। इसमें 57 करोड़ तीन लाख की लागत के 11 विकास कार्यों का लोकार्पण और 58 करोड़ 32 लाख की लागत के 39 विकास कार्यों का भूमि-पूजन शामिल है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि माता सीता धैर्य, साहस और आत्म-सम्मान का प्रतीक हैं। जब हम नारी शक्ति की बात करते हैं तो माता सीता का ध्यान आता है। माता सीता ने यह संदेश दिया कि नारी का आत्म-सम्मान ही सबसे बड़ी शक्ति है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश को मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम का भी विशेष स्नेह मिला है। यहाँ चित्रकूट में उन्होंने वनवास काल के 11 वर्ष बिताए। मध्य प्रदेश सरकार राम वन गमन वथ विकसित कर रही है। जहाँ-जहाँ भगवान श्रीराम के श्रीचरण पड़े हैं, उन्हें तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि करीलाधाम में आस्था के साथ श्रद्धालु माता जानकी के दर्शन करने आते हैं। माता जानकी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करती हैं। आज के दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर माता जानकी के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया है। माता सीता शक्ति एवं पराक्रम की देवी हैं, उनका प्रताप गौरवशाली संस्कृति है। इस पवित्र स्थान से महर्षि वाल्मीकि, सीता माता एवं लव-कुश की कहानी जुड़ती है।


    हमारी भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को प्रथम स्थान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को प्रथम स्थान दिया गया है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के कल्याण के लिए अनेकों योजनाएं संचालित की जा रही है। साथ ही आगामी लोकसभा एवं विधानसभा निर्वाचन में भी 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों को प्रदेश सरकार प्रतिमाह 1500 रुपये की राशि प्रदान कर रही है। महिलाओं को विभिन्न विभागों में आरक्षण देकर उच्च पदों पर नियुक्ति दी गईं हैं। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष का आयोजन प्रदेश में किया जा रहा है। किसानों के उत्थान के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा 6-6 हजार रुपये की राशि किसान सम्मन निधि के रूप में दी जा रही है।


    जानकी मंदिर में की विधि-विधान से पूजा-अर्चना

    मुख्यमंत्री ने करीलाधाम में जानकी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। साथ ही मंदिर परिसर में ढोल बजाकर शंखनाद किया। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ फूलों की होली भी खेली। मुख्यमंत्री ने ग्राम दीपनाखेड़ा से करीलाधाम तक 10 किलोमीटर की सड़क स्वीकृत किये जाने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने करीलाधाम तीर्थ के संपूर्ण विकास की कार्ययोजना बनाने के निर्देश कलेक्टर को दिए। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन कर समूह की महिलाओं से संवाद भी किया।


    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को किया सम्मानित

    मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली जिले की सात महिलाओं को सम्मानित किया। इनमें शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. अमिता सेठी, धार्मिक क्षेत्र में नैना शर्मा, खेल के क्षेत्र में पूनम रघुवंशी, पर्यावरण के क्षेत्र में विनीता साहू, स्वंयसिद्धा के क्षेत्र में गायत्री शर्मा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में छाया बैस तथा समाजसेवा के क्षेत्र में कुलविंदर कौर को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, पूर्व मंत्री बृजेन्द्र सिंह यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह यादव सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में महिलाएं एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

  • उज्जैन में फाग महोत्सव की धूम, भक्तों ने मंदिरों में गुलाल-फूल से खेली होली, अन्य शहरों से भी उमड़े श्रद्धालु

    उज्जैन में फाग महोत्सव की धूम, भक्तों ने मंदिरों में गुलाल-फूल से खेली होली, अन्य शहरों से भी उमड़े श्रद्धालु


    उज्जैनधर्मनगरी उज्जैन में फाल्गुन मास के आगमन के साथ ही फाग महोत्सव का भव्य आयोजन शुरू हो गया है। शनिवार को शहर के प्रमुख मंदिरों में भक्तों ने रंग-बिरंगी होली खेलते हुए भगवान के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा दिखाई। नई पेठ स्थित गजलक्ष्मी मंदिर, छत्री चौक का गोपाल मंदिर और खाटू श्याम जी मंदिर में भक्तों ने गुलाल और फूलों से भगवान के चरणों को सजाया और भजन-कीर्तन के मधुर गीतों के बीच पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    मंदिरों में फाग उत्सव का आयोजन भक्ति, संगीत और रंगों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु अपने परिवार के साथ शामिल होकर भगवान के चरणों में प्रार्थना करते हुए गुलाल उड़ाते और फूलों की होली खेलते नजर आए। भजन-कीर्तन और कीर्तन के बीच भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा की रासलीला का स्मरण करते हुए होली के पारंपरिक उत्सव में भाग लिया।

    इस बार फाग महोत्सव में उज्जैन के अलावा देवास, इंदौर, रतलाम और आसपास के अन्य शहरों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर प्रशासन और पुजारियों ने बताया कि फाल्गुन मास में होली का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और राधा के साथ गोपियों द्वारा खेली गई होली की परंपरा का प्रतीक है। पुजारी अनिमेश शर्मा ने बताया कि यह उत्सव भक्तों के लिए भक्ति और उल्लास का अवसर होता है और प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी के बाद फाल्गुन मास की शुरुआत से इसे विशेष रूप से मनाया जाता है।

    फाग महोत्सव के दौरान मंदिरों में रंगों के साथ-साथ फूलों और पिचकारियों का भी आनंद लिया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में रंगीन गुलाल डालते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया और भक्ति गीतों में सम्मिलित होकर उत्सव का आनंद लिया। मंदिरों में साफ-सफाई और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, ताकि बड़े पैमाने पर आए श्रद्धालु सुरक्षित रूप से इस रंगीन महोत्सव में भाग ले सकें।

    इस साल फाग महोत्सव में मंदिरों की सजावट भी आकर्षक थी। मंदिरों में फूलों और रंग-बिरंगी वस्तुओं से विशेष आयोजन किया गया, जिससे भक्तों को न केवल भक्ति का अनुभव मिला बल्कि होली के पारंपरिक रंगों का भी आनंद लेने का अवसर मिला।

    शहरवासियों और मंदिर प्रशासन ने फाग महोत्सव को सफल बनाने के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं का ख्याल रखा। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस उत्सव के दौरान मंदिरों में रंग और फूलों से होली खेलना भगवान के प्रति उनकी आस्था और प्रेम को दर्शाता है।

    उज्जैन में फाग महोत्सव न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व रखता है बल्कि यह शहर में पर्यटन और सामाजिक मेलजोल को भी बढ़ावा देता है। इस उत्सव ने पूरे शहर को रंगों और खुशियों से सराबोर कर दिया।

  • पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

    पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

    नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन ने जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को MBBS कोर्स चलाने की अनुमति को रद्द कर देन का फैसला लिया है.

    यह फैसला 2 जनवरी 2026 को हुए अचानक निरीक्षण के बाद लिया गया है. जांच में कॉलेज के शिक्षा देने की व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सुविधाओं में कई गंभीर कमियां पाई गई हैं. मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने इसे न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं पाया है. जिसके कारण से NMC अध्यक्ष की मंजूरी लेकर उस कॉलेज की अनुमति रद्द कर दी गई है.

    50 छात्रों में से 42 छात्र मुस्लिम
    ये विवाद तब उभरा जब कॉलेज में 50 छात्रों में से 42 कश्मीरी मुस्लिम छात्रों का प्रवेश हुआ था. भाजपा और कुछ हिंदू संगठन इसे लेकर नाराज हुए और सवाल उठाया कि मंदिर ट्रस्ट के फंड से चलने वाले इस कॉलेज में मुस्लिम छात्रों को प्राथमिकता क्यों मिली है. मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि दाखिले पूरी तरह NEET और मेरिट के आधार पर हुए और धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि कोई संस्था अल्पसंख्यक दर्जा लेना चाहती थी तो उसी समय आवेदन करना चाहिए था.

    MARB ने शिकायतों को जांचने के लिए 2 जनवरी 2026 को अचानक निरीक्षण किया. निरीक्षण में पता चला कि शिक्षण फैकल्टी में 39 फीसदी की कमी थी, ट्यूटर, डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या 65 फीसदी कम थी. मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सेवाएं भी तय मानकों से बहुत कम थीं. OPD में 400 मरीजों की जगह केवल 182 मरीज आए, बेड ऑक्यूपेंसी 80 फीसदी की जगह 45 फीसदी रही और ICU में केवल आधे बेड भरे थे. प्रसव की संख्या हर महीने 25 थी, जबकि यह MARB के अनुसार गंभीर रूप से अपर्याप्त थी.

    हिंदू मुस्लिम नहीं, कॉलेज में थी कमी
    मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए और उन्हें अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा. उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया में सांप्रदायिक राजनीति की कोशिशें हुई हैं, लेकिन NMC और MARB ने साफ किया कि फैसले का आधार केवल कॉलेज की कमियां और नियमों का उल्लंघन था. छात्रों के अच्छाई के लिए उन्हें दूसरे कॉलेजों में बचे हुए सीटों पर भेजा जाएगा.

    इस पूरे विवाद से साफ संदेश गया कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और संचालन में नियमों का पालन अनिवार्य है. छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव, या धर्म के आधार पर प्रभावित नहीं होना चाहिए. NMC और MARB का यह कदम स्वास्थ्य शिक्षा में गुणवत्ता, समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी माना जा रहा है.