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  • SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश

    SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश


    नई दिल्ली । बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का स्पष्ट और व्यापक विजन दुनिया के सामने रखा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी ने आतंकवाद वैश्विक सुरक्षा संवाद कूटनीति कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की सोच रखी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ ने संवाद और सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है और अब आने वाले 25 वर्षों में इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलने का समय आ गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन प्रमुख स्तंभों सिक्योरिटी कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी को फिर से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अब इन विचारों को केवल विजन तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक परिणामों में बदलना होगा और इसके लिए सबसे पहली जरूरत शांति और सुरक्षा की है। पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई या जवाबी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करना जरूरी है। आतंकवाद की फंडिंग भर्ती कट्टरपंथ और आतंकियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों को खत्म किए बिना इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर किसी तरह के दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और सभी देशों को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी।

    प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी को भी क्षेत्रीय सुरक्षा और युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ड्रग ट्रैफिकिंग केवल अपराध नहीं बल्कि समाज और भविष्य के लिए बड़ा संकट है। सुरक्षा संबंधी खतरे संगठित अपराध सूचना सुरक्षा और नार्कोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ के तहत बनाए जा रहे केंद्रों को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया।

    वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने शांति के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने साबित किया है कि किसी एक क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल उसी इलाके तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक नुकसान ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध और तनाव का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही खोजा जाना चाहिए।

    पीएम मोदी ने साझा विकास और कनेक्टिविटी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए अवसर पैदा करते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कनेक्टिविटी पहल में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने इसे एससीओ चार्टर की मूल भावना से भी जोड़ा।

    प्रधानमंत्री ने एससीओ की सबसे बड़ी पूंजी सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को बताया। उनके अनुसार महान सभ्यताओं संस्कृतियों और विचारों का यह संगठन तभी मजबूत होगा जब इसका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं के लिए नए अवसर खोलने उद्यमियों के लिए नए बाजार तैयार करने किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने और नागरिकों का जीवन बेहतर बनाने को सफलता की वास्तविक कसौटी बताया। पीएम मोदी ने सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित न रखकर लोगों द्वारा संचालित बनाने की जरूरत बताई। स्टार्टअप फोरम यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसे भारतीय प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एससीओ के भविष्य को युवा शक्ति संवाद और जनसंपर्क से जोड़ने का संदेश दिया। बिश्केक के मंच से भारत ने साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में उसकी प्राथमिकता सुरक्षित शांतिपूर्ण और अधिक सहयोगपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने की होगी।

  • आतंकी धमकी से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में चिंता, पत्र में कई लोगों की निजी जानकारी का किया गया जिक्र

    आतंकी धमकी से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में चिंता, पत्र में कई लोगों की निजी जानकारी का किया गया जिक्र

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को कथित आतंकी संगठन की ओर से धमकी भरे पत्र मिलने का मामला सामने आया है। इन पत्रों में कई कश्मीरी पंडितों के नाम और उनके पते का उल्लेख किए जाने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रों के स्रोत और इसके पीछे शामिल लोगों की जांच शुरू कर दी है।

    बताया गया है कि धमकी भरे पत्र में कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ लोगों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है। पत्र में लोगों के नाम के साथ उनके घर और गली से जुड़ी जानकारी भी दर्ज होने की बात सामने आई है। इस तरह की निजी जानकारी का इस्तेमाल किए जाने से प्रभावित लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है।

    जानकारी के अनुसार, पत्र में कश्मीर से बाहर चले गए कश्मीरी पंडितों को लेकर आपत्तिजनक आरोप लगाए गए हैं। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि पत्र वास्तव में किस संगठन या व्यक्ति की ओर से भेजे गए हैं और इनमें किए गए दावों की वास्तविकता क्या है।

    मामले में यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल नाम के संगठन का उल्लेख सामने आया है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक मोर्चा बताया जा रहा है। हालांकि, पत्र की वास्तविकता, इसे जारी करने वाले व्यक्ति या संगठन और इसके पीछे की मंशा की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। सुरक्षा एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले भी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी भरे पत्र मिलने की जानकारी सामने आई थी। पिछले मामले में कुछ सरकारी कर्मचारियों के नाम और संपर्क संबंधी जानकारी पत्र में शामिल होने की बात कही गई थी। इसके बाद संबंधित विभागों ने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई थी।

    हालिया घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब घाटी में अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों की सुरक्षा पहले से संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। कुछ समय पहले कुलगाम में दो प्रवासी मजदूरों पर हमला कर उनकी हत्या किए जाने की घटना ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी हाल में घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही आतंकी धमकियों को गंभीरता से लेने की बात कही थी। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों से ऐसे मामलों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की थी। मुख्यमंत्री ने पूर्व में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया था।

    प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी प्राथमिकता धमकी की विश्वसनीयता का आकलन करने के साथ प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सुरक्षा एजेंसियां पत्रों की जांच, उनके प्रसार के स्रोत और संभावित जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के आधार पर की जाएगी।

    कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए इस घटनाक्रम ने सुरक्षा और विश्वास से जुड़े पुराने सवालों को फिर सामने ला दिया है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और समय रहते आवश्यक कदम उठाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि धमकी के कारण लोगों में भय का माहौल न बने और किसी संभावित घटना को रोका जा सके।

  • 26/11 मुंबई आतंकी हमले के छह पाकिस्तानी आरोपियों पर गैरहाजिरी में मुकदमा शुरू, हाफिज सईद और लखवी भी आरोपी

    26/11 मुंबई आतंकी हमले के छह पाकिस्तानी आरोपियों पर गैरहाजिरी में मुकदमा शुरू, हाफिज सईद और लखवी भी आरोपी

    नई दिल्ली । 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में भारत ने फरार पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुंबई की विशेष अदालत में हाफिज सईद और जकी उर रहमान लखवी समेत छह आरोपियों के खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 356 के तहत की जा रही है। आरोपियों के भारत में मौजूद नहीं होने के बावजूद अब अदालत मामले की सुनवाई को आगे बढ़ा सकेगी।

    इस मामले में हाफिज सईद, जकी उर रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकामा, अबू कहफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमले की साजिश और उससे जुड़े षड्यंत्र में भूमिका होने के आरोप हैं। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर इन आरोपियों की कथित भूमिका अलग अलग स्तर पर बताई गई है।

    26/11 का हमला भारत के सबसे बड़े आतंकी हमलों में शामिल है। पाकिस्तान से समुद्री रास्ते के जरिए मुंबई पहुंचे आतंकवादियों ने शहर के कई महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया था। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ताज होटल, ट्राइडेंट होटल, नरीमन हाउस और अन्य स्थानों पर कई घंटों तक आतंक का माहौल रहा था। इस हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।

    हमले में शामिल दस आतंकवादियों में से नौ सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए थे, जबकि अजमल कसाब को जिंदा गिरफ्तार किया गया था। कसाब के खिलाफ भारत में मुकदमा चला और अदालत ने उसे दोषी ठहराया था। बाद में उसे कानून के तहत फांसी दी गई। हालांकि हमले की साजिश और उसके संचालन से जुड़े कई आरोपी भारत की पहुंच से बाहर रहे हैं।

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 356 ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराती है, जहां कोई आरोपी फरार है और अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हो रहा है। निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी की गैरमौजूदगी में मुकदमे को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी आरोपी के लंबे समय तक फरार रहने के कारण न्यायिक प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक रुकी न रहे।

    मामले में आरोपियों को अदालत के समक्ष उपस्थित होने का अवसर दिया गया है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और अन्य दस्तावेजों पर विचार करेगी। अभियोजन पक्ष का कहना है कि फरार आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और नई कानूनी व्यवस्था के माध्यम से मुकदमे को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है।

    हाफिज सईद पर 26/11 हमले की साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप है, जबकि जकी उर रहमान लखवी पर आतंकवादियों की तैयारी और हमले के संचालन से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। जांच में कराची स्थित कथित नियंत्रण कक्ष से हमले की निगरानी और निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई थी। अब अदालत इन आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की न्यायिक जांच करेगी।

    गैरहाजिरी में शुरू हुआ यह मुकदमा 26/11 मामले में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि आरोपियों के खिलाफ अंतिम फैसला तभी होगा जब अदालत सभी साक्ष्यों और कानूनी दलीलों पर विचार करने के बाद अपना निर्णय देगी। BNSS की धारा 356 के तहत शुरू हुई यह प्रक्रिया भारत की न्याय व्यवस्था में उन गंभीर मामलों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जिनमें आरोपी देश से बाहर रहकर लंबे समय तक न्यायिक कार्रवाई से बचते रहे हैं।

  • पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, 36 घंटे चले सैन्य ऑपरेशन में 62 आतंकवादी ढेर।

    पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, 36 घंटे चले सैन्य ऑपरेशन में 62 आतंकवादी ढेर।

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा के उत्तरी वजीरिस्तान और बन्नू जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा संचालित खुफिया आधारित अभियानों में व्यापक सफलता प्राप्त हुई है। 36 घंटे से अधिक समय तक चले इन सैन्य ऑपरेशनों के दौरान सुरक्षा बलों ने 62 आतंकवादियों को मार गिराया है। इस दौरान चार प्रमुख कमांडरों समेत अनेक आतंकी ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया।

    सैन्य कार्रवाई की शुरुआत मंगलवार सुबह उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र से हुई, जहां संदिग्ध गतिविधियों की निरंतर निगरानी के बाद सटीक हमले किए गए। क्षेत्र में घने वृक्षों के नीचे छिपे आतंकियों की लोकेशन का पता लगाने के लिए आधुनिक क्वाडकॉप्टर तकनीक का सहारा लिया गया। इसके माध्यम से जमीनी बलों को आतंकवादियों की सटीक स्थिति की जानकारी मिली, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

    सुरक्षा बलों के अनुसार, उत्तरी वजीरिस्तान में हुए प्राथमिक ऑपरेशन में 52 आतंकवादी मारे गए, जिनमें चार मुख्य कमांडर शामिल थे। इस दौरान भागने का प्रयास कर रहे घायल आतंकियों को भी सुरक्षा बलों ने निशाना बनाया। ठिकाने से बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और अन्य सैन्य सामग्री बरामद की गई है, जिसका इस्तेमाल क्षेत्र में हिंसक घटनाओं को अंजाम देने के लिए किया जाना था।

    उत्तरी वजीरिस्तान के बाद बुधवार को बन्नू जिले में भी कई अलग-अलग स्थानों पर अभियानों की श्रृंखला शुरू की गई। बन्नू में चलाए गए ऑपरेशनों में ड्रोन तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 10 अन्य आतंकवादी मारे गए तथा 16 घायल हुए। इससे पूर्व जानी खेल क्षेत्र में एक खेल स्टेडियम के समीप चलाए गए एक अलग अभियान में भी दो आतंकी ढेर किए गए थे।

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बन्नू में आतंकवादियों द्वारा एक धार्मिक शैक्षणिक संस्थान अर्थात मदरसे को अपने ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई प्रारंभ करने से पूर्व आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित रूप से खाली कराया। क्षेत्र को खाली कराने के उपरांत आतंकियों के ठिकानों पर लक्षित हमले किए गए।

    अभियान के अंतिम चरण में बन्नू तथा आसपास के क्षेत्रों में सर्च और क्लीयरेंस ऑपरेशन चलाए गए ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। मध्य प्रदेश तथा अन्य क्षेत्रों के रणनीतिक विशेषज्ञों की नजर भी पड़ोसी देश में बढ़ते आतंकवाद और सैन्य अभियानों पर टिकी हुई है। सुरक्षा अधिकारियों ने प्रतिबद्धता व्यक्त की है कि प्रांत से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया होने तक खुफिया आधारित अभियानों का यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद LoC पर बढ़ी सतर्कता, लश्कर जैश और हिज्बुल की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद LoC पर बढ़ी सतर्कता, लश्कर जैश और हिज्बुल की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    नई दिल्ली । भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। खुफिया इनपुट के हवाले से सामने आई जानकारी में दावा किया गया है कि नियंत्रण रेखा के पार 500 से अधिक आतंकियों के भारत में घुसपैठ के मौके का इंतजार करने की आशंका है। इस बीच पाकिस्तान की रणनीति में भी बदलाव की बात सामने आई है, जिसके तहत लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया है।

    रिपोर्टों के अनुसार, इन संगठनों की गतिविधियों पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की निगरानी और नियंत्रण पहले की तुलना में अधिक बढ़ा है। पहले अलग-अलग आतंकी संगठनों के अपने कमांड ढांचे और नेतृत्व के माध्यम से गतिविधियां संचालित होने की बात कही जाती थी। अब इनके बीच तालमेल को एक केंद्रीय व्यवस्था के तहत मजबूत किए जाने का दावा किया जा रहा है।

    खुफिया अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान की ओर से आतंकी नेटवर्क को लेकर पुनर्गठन किया गया है। इसका कथित उद्देश्य अलग-अलग संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और उनकी गतिविधियों पर केंद्रीय स्तर से निगरानी बढ़ाना है। हालांकि ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से नहीं हुई है।

    सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता नियंत्रण रेखा के पार मौजूद संभावित आतंकियों की संख्या को लेकर है। रिपोर्ट में 500 से अधिक आतंकियों के घुसपैठ के अवसर की प्रतीक्षा करने की आशंका जताई गई है। ऐसे इनपुट के बाद सीमा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ना स्वाभाविक है।

    बताया गया है कि हाल के महीनों में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों में तेजी देखी गई है, जबकि जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन की गतिविधियों में अपेक्षाकृत कमी का आकलन किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे पाकिस्तान की बदली हुई रणनीति के संदर्भ में देख रही हैं।

    रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब जम्मू-कश्मीर में स्थानीय स्तर पर नेटवर्क तैयार करने पर अधिक जोर दे रहा है। स्थानीय युवाओं को प्रभावित करने और आतंकी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिशों की आशंका सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे प्रयासों का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली गतिविधियों के साथ स्थानीय नेटवर्क को जोड़ना बताया जा रहा है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अलग-अलग आतंकी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ता है तो सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती का स्वरूप बदल सकता है। इसी वजह से सीमा सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और आतंकवाद के लिए होने वाली भर्ती को रोकना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

    भारत की सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों को लेकर सतर्क रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के बीच इस तरह के इनपुट को और गंभीरता से देखा जा रहा है। हालांकि किसी भी खुफिया आकलन को अंतिम तथ्य मानने से पहले उसकी पुष्टि जरूरी होती है।

    फिलहाल 500 से अधिक आतंकियों की संभावित मौजूदगी और आतंकी संगठनों पर आईएसआई के बढ़ते नियंत्रण से जुड़े दावे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हैं। आने वाले दिनों में सीमा पर गतिविधियों, घुसपैठ के प्रयासों और जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क से जुड़े घटनाक्रम पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी।

  • पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर कारी सईद की संदिग्ध मौत, हाफिज सईद से तीन दशक पुराना था संबंध

    पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर कारी सईद की संदिग्ध मौत, हाफिज सईद से तीन दशक पुराना था संबंध

    नई दिल्ली । पाकिस्तान में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कमांडर कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी एक मस्जिद में नमाज से पहले वह अचानक जमीन पर गिर गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे संभालने और प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। उसकी मौत के कारणों को लेकर फिलहाल अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।

    कारी सईद को लश्कर-ए-तैयबा के पुराने और प्रभावशाली कमांडरों में गिना जाता था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह संगठन के साथ लंबे समय से जुड़ा हुआ था और आतंकी सरगना हाफिज सईद के करीबी लोगों में शामिल था। बताया जाता है कि कारी सईद वर्ष 1990 से हाफिज सईद के साथ जुड़ा हुआ था। शुरुआती वर्षों में उसने संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई और आतंकियों की भर्ती जैसे कामों में भी उसकी जिम्मेदारी रही।

    रिपोर्ट के अनुसार, कारी सईद वर्ष 2017 तक लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी गतिविधियों से जुड़े कामों में सक्रिय रहा। बाद के वर्षों में संगठन ने उसे प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंप दी थीं। वह दक्षिण पंजाब क्षेत्र में संगठन से जुड़े एक विभाग की जिम्मेदारी संभालता था। इस विभाग का काम भारत में मारे गए आतंकियों के परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने और संगठन से जुड़े लोगों का रिकॉर्ड तैयार करने से संबंधित बताया जाता है।

    कारी सईद की मौत से जुड़ी घटनाओं का क्रम भी सामने आया है। बताया गया है कि वह इस्लामाबाद की मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए पहुंचा था। वहां उसने अपना बैग एक साथी को सौंपा और वुजू किया। इसके बाद जब वह नमाज के लिए मुख्य हॉल की ओर बढ़ा और चप्पल उतारने के लिए बैठा, तभी अचानक जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लश्कर के अन्य सदस्यों ने उसे उठाया और मदद की कोशिश की। उसकी सांस रुकने के बाद कथित तौर पर सीपीआर भी दिया गया, लेकिन उसे होश नहीं आया।

    इसके बाद कारी सईद को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकी अचानक हुई मौत ने उसके संगठन से जुड़े लोगों के बीच भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस घटना को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और मेडिकल जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

    बताया जाता है कि सक्रिय आतंकी भूमिका से हटने के बाद कारी सईद को लश्कर-ए-तैयबा के प्रशासनिक नेटवर्क में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। दक्षिण पंजाब के मुल्तान, बहावलपुर और डेरा गाजी खान जैसे क्षेत्रों से जुड़े आतंकियों के बारे में जानकारी जुटाना और उनके परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना उसकी जिम्मेदारियों में शामिल था। उसकी मौत ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े कई पुराने चेहरों की गतिविधियों और उनके नेटवर्क को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। कारी सईद की संदिग्ध मौत के कारण और उससे जुड़े अन्य पहलुओं पर आगे मिलने वाली जानकारी से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

  • आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप

    आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े तत्वों की रहस्यमयी मौतों को लेकर हाल के दिनों में सुरक्षा और खुफिया हलकों में हलचल तेज हो गई है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है कि क्या देश के भीतर किसी प्रकार का संगठित टारगेट ऑपरेशन चल रहा है या यह आपसी संघर्ष का परिणाम है।

    सूत्रों और सामने आई रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में हाल के दिनों में तीन आतंकियों के शव मिलने से आतंकी नेटवर्क में बेचैनी बढ़ी है। इनमें गाजी मुमताज, मोहम्मद खुजैमा कासिम और खालिद बशीर जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जो कथित रूप से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इन मौतों के कारण संगठन के भीतर असुरक्षा का माहौल गहराने की बात कही जा रही है।

    पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी संगठनों को संरक्षण देने के आरोपों का सामना करता रहा है। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को लेकर भी विभिन्न समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि वर्तमान घटनाक्रम में जिस तरह से एक के बाद एक संदिग्ध मौतों की खबरें सामने आ रही हैं, उसने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

    सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार इस तरह की घटनाएं या तो आंतरिक संघर्ष, गुटीय टकराव या फिर किसी गुप्त ऑपरेशन का संकेत हो सकती हैं। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय स्तर पर कुछ घटनाओं में हमलों और गोलीबारी का जिक्र भी सामने आया है, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।

    इसी क्रम में खैबर पख्तूनख्वा और अन्य संवेदनशील इलाकों में पहले भी आतंकी कमांडरों पर हमलों की खबरें आती रही हैं, जिनमें अज्ञात हमलावरों की भूमिका की बात कही जाती है। इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी ढांचे की स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी नेटवर्क अब पहले जितना सुरक्षित नहीं रह गया है और आंतरिक व बाहरी दबाव दोनों के बीच उसकी स्थिति कमजोर हो रही है। लगातार हो रही घटनाओं से संगठनों के भीतर नेतृत्व और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ती दिखाई दे रही है।

    हालांकि इन सभी घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, यह स्पष्ट नहीं है और जांच एजेंसियों की ओर से भी कोई ठोस निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही संदिग्ध मौतों ने आतंकी संगठनों की गतिविधियों और उनकी आंतरिक संरचना को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • POK में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड, हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या

    POK में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड, हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या



    नई दिल्ली। 2019 के चर्चित पुलवामा आतंकी हमला के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हत्या कर दी गई है। ‘डॉक्टर’ के नाम से पहचाने जाने वाले हमजा को मुजफ्फराबाद के पास अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियों से भून डाला। हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई वर्षों से POK में एक स्कूल टीचर की फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। इसी आड़ में वह आतंकी नेटवर्क, ट्रेनिंग कैंप और घुसपैठ गतिविधियों को संचालित कर रहा था।

    सूत्रों के अनुसार, मुजफ्फराबाद के घने जंगल वाले इलाके में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया। हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे कई गोलियां लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। फिलहाल हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है।

    हमजा आतंकी संगठन अल-बद्र का प्रमुख कमांडर था और वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी नेटवर्क के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था। भारत सरकार ने वर्ष 2022 में उसे UAPA के तहत आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की पुलवामा हमले से जुड़ी चार्जशीट में भी उसका नाम प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल था।

    बताया जाता है कि हमजा पाकिस्तान जाकर आतंकी संगठन अल-बद्र में शामिल हुआ था और बाद में उसका कमांडर बन गया। वह पाकिस्तान से ही जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, युवाओं को संगठन में भर्ती करने और फंडिंग जुटाने का काम करता था।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, हमजा युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने और आतंकी संगठनों के लिए आर्थिक मदद जुटाने में भी सक्रिय था। पुलवामा हमले के अलावा उसे कई अन्य आतंकी घटनाओं का भी मास्टरमाइंड माना जाता था।

    14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। उस दिन जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर जा रहा था, तभी पुलवामा के लेथपोरा इलाके में विस्फोटकों से भरी एक कार जवानों की बस से टकरा गई थी। धमाका इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़ गए थे। इस आत्मघाती हमले को स्थानीय आतंकी आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया था, जबकि इसकी जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।

    एनआईए की विस्तृत जांच में मसूद अजहर, अब्दुल रऊफ असगर, उमर फारूक और हमजा बुरहान समेत कई आतंकियों को इस हमले की साजिश में शामिल पाया गया था। अब हमजा की मौत को आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

    हालांकि, उसकी हत्या किसने और किन कारणों से की, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

  • पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत

    पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत



    नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े बताए जा रहे हमजा बुरहान की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है।कहा जा रहा है कि उस पर PoK क्षेत्र में कई राउंड फायरिंग की गई, जिसके बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    कौन था हमजा बुरहान?
    रिपोर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों के दावों के अनुसार:

    असली नाम: अर्जुमंद गुलजार डार

    उर्फ: हमजा बुरहान / “डॉक्टर”

    मूल रूप से: पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) का निवासी

    संगठन से जुड़ाव: आतंकी संगठन Al Badr

    उसे 2019 के पुलवामा हमले की साजिश में शामिल माना जाता था, जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।

     भारत की कार्रवाई और दर्ज स्थिति
    भारत सरकार ने 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था

    उस पर आतंकी भर्ती, फंडिंग और हमलों की साजिश में शामिल होने के आरोप थे

    वह पाकिस्तान और PoK में सक्रिय नेटवर्क चलाने का आरोप झेल रहा था

    किन गतिविधियों में नाम सामने आया था?
    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार उस पर आरोप थे कि वह:

    युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करता था

    फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था

    CRPF पर ग्रेनेड हमलों जैसी घटनाओं में भूमिका में था

    विस्फोटक बरामदगी मामलों से जुड़ा था

    हत्या को लेकर क्या दावा है?
    रिपोर्ट्स में कहा गया है कि:

    PoK में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया

    कई गोलियां लगने से मौके पर ही मौत हो गई

    हमले के पीछे कौन था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है

     आधिकारिक स्थिति अभी तक:

    किसी भी सरकार ने इस हत्या की स्वतंत्र पुष्टि या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है

    यह घटना फिलहाल मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से सामने आई है

  • भारत में आतंकी मिशन छोड़ मेकओवर में उलझे लश्कर के आतंकी, स्लीपर सेल प्लान बीच में रह गया अधूरा!

    भारत में आतंकी मिशन छोड़ मेकओवर में उलझे लश्कर के आतंकी, स्लीपर सेल प्लान बीच में रह गया अधूरा!

    नई दिल्ली । भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दो आतंकियों की प्राथमिकता उनका मिशन नहीं बल्कि उनका लुक और व्यक्तिगत दिखावट बन गई। इन दोनों आतंकियों की योजना भारत में घुसपैठ कर स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार करने की थी, लेकिन जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार उनका ध्यान अपने उद्देश्य से हटकर निजी इच्छाओं की ओर चला गया, जिससे पूरा ऑपरेशन प्रभावित हो गया।

    पहला आतंकी उस्मान जट्ट पाकिस्तान से भारत में घुसा था और उसका मकसद देश के भीतर एक संगठित नेटवर्क तैयार करना था, जो भविष्य में बड़ी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे सके। लेकिन भारत में आने के बाद उसने अपने मिशन को प्राथमिकता देने के बजाय अपने रूप-रंग में बदलाव पर ध्यान देना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि वह श्रीनगर में स्थित एक निजी क्लिनिक पहुंचा और वहां हेयर ट्रांसप्लांट जैसी प्रक्रिया करवाई। इस प्रक्रिया में समय और ध्यान लगाने के कारण उसका मूल उद्देश्य पीछे छूटता चला गया और उसकी गतिविधियां संदेह के घेरे में आ गईं।

    इसी तरह एक अन्य आतंकी शब्बीर अहमद लोन भी इसी नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया गया है, जिसका काम भारत और आसपास के क्षेत्रों में एक स्लीपर सेल तैयार करना था। लेकिन जांच में सामने आया कि वह भी अपने काम से भटक गया और अपने स्वास्थ्य तथा व्यक्तिगत लुक से जुड़ी प्रक्रियाओं में उलझ गया। वह इलाज और डेंटल ट्रीटमेंट के लिए कई स्थानों पर गया, जिनमें एक निजी चिकित्सा केंद्र भी शामिल बताया जाता है। इस दौरान उसका ध्यान लगातार अपने मिशन से हटता गया और उसकी गतिविधियां सामान्य संदिग्ध व्यवहार से अलग दिखने लगीं।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत लापरवाही का नहीं बल्कि एक बड़ी विफल योजना का संकेत देता है, जिसमें आतंकी संगठन अपने सदस्यों को अनुशासित रखने में सफल नहीं हो पाया। आधुनिक समय में जहां सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं, वहीं ऐसे मिशन में शामिल लोगों का भटक जाना पूरी साजिश को कमजोर कर देता है।

    जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात का भी संकेत देता है कि आतंकियों की योजनाएं केवल हथियारों और नेटवर्क पर ही निर्भर नहीं होतीं, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति और व्यक्तिगत प्राथमिकताएं भी उनके मिशन की सफलता या विफलता को प्रभावित कर सकती हैं। इस मामले ने सुरक्षा तंत्र को भी सतर्क कर दिया है कि घुसपैठ के बाद संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखना कितना आवश्यक है।

    फिलहाल दोनों मामलों की गहन जांच जारी है और एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर कैसे ये आतंकी अपने मूल उद्देश्य से इतनी आसानी से भटक गए। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी नेटवर्क की अंदरूनी कमजोरियों को उजागर कर दिया है।