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  • FATF ने पाकिस्तान पर नहीं की सख्ती, आतंकी फंडिंग के मामलों की जांच अब 2030 तक टली..

    FATF ने पाकिस्तान पर नहीं की सख्ती, आतंकी फंडिंग के मामलों की जांच अब 2030 तक टली..

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन और आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण पर निगरानी रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की पाकिस्तान को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया चर्चा में है। पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों की ओर से डिजिटल माध्यमों से कथित तौर पर धन जुटाए जाने के आरोपों के बावजूद संस्था ने फिलहाल कोई नई कार्रवाई नहीं की है। इसके बजाय पाकिस्तान से जुड़े मूल्यांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस प्रक्रिया के तहत संबंधित समूह को 31 मार्च 2029 तक अपना मूल्यांकन पूरा कर रिपोर्ट जमा करनी है। इसके बाद वर्ष 2030 में होने वाली पूर्ण बैठक में रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी और आगे के कदमों पर फैसला लिया जा सकता है।

    पेरिस में आयोजित चार दिवसीय पूर्ण बैठक के दौरान पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे पर चर्चा हुई। इसमें पाकिस्तान में सक्रिय वैश्विक आतंकी संगठनों की डिजिटल माध्यमों से होने वाली फंडिंग का मुद्दा भी उठाया गया। हालांकि, इन आरोपों के बावजूद तत्काल किसी नई कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। मूल्यांकन और समीक्षा की मौजूदा प्रक्रिया को जारी रखने का फैसला किया गया है। इस समयसीमा के कारण पाकिस्तान के खिलाफ किसी संभावित नए कदम पर निर्णय आने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं।

    पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की ऑनलाइन फंडिंग को लेकर पहले भी गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं। पिछले वर्ष सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ऑनलाइन माध्यमों से पाकिस्तान में 391 करोड़ रुपये का चंदा जुटाया था। आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल संगठन की गतिविधियों और उसके ठिकानों के पुनर्निर्माण में किया गया।

    इसी मामले में दावा किया गया कि जैश-ए-मोहम्मद ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ध्वस्त हुए अपने मुख्यालय का दोबारा निर्माण कराया है। बताया गया कि चंदे और पाकिस्तान सरकार से मिलने वाली कथित मदद के जरिए यह काम पूरा किया गया। हालांकि, इन आरोपों और दावों को लेकर अलग-अलग स्तर पर आधिकारिक पुष्टि तथा स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों का विवरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

    FATF के प्रमुख गिल्स थॉम्पसन ने पाकिस्तान की निगरानी और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उनके अनुसार, अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद से पाकिस्तान के साथ एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) के माध्यम से बातचीत और मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है।

    ग्रे लिस्ट से बाहर होने के बाद भी पाकिस्तान को वित्तीय निगरानी से पूरी तरह मुक्त नहीं माना जा सकता। FATF की व्यवस्था के तहत सदस्य देशों और संबंधित समूहों के माध्यम से वित्तीय पारदर्शिता, धन शोधन रोकने और आतंकवादी वित्तपोषण पर नियंत्रण से जुड़े मानकों का आकलन किया जाता है। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत पाकिस्तान की स्थिति की समीक्षा की जा रही है।

    अब 31 मार्च 2029 तक मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर जमा करने की समयसीमा निर्धारित की गई है। इसके बाद 2030 की पूर्ण बैठक में इस रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान से जुड़े मामलों में FATF की अगली महत्वपूर्ण कार्रवाई का समय मूल्यांकन के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस प्रक्रिया के पूरा होने तक पाकिस्तान को लेकर निगरानी और समीक्षा जारी रहेगी।

  • मुंबई में रैपिडो राइडर गिरफ्तार, जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध और टेलीग्राम पर भड़काऊ भाषण साझा करने का आरोप

    मुंबई में रैपिडो राइडर गिरफ्तार, जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध और टेलीग्राम पर भड़काऊ भाषण साझा करने का आरोप

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंध होने के संदेह में 33 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मोहम्मद हसन अबू सरमद अख्तर के रूप में हुई है। उसे माहिम मेट्रो स्टेशन के पास से पकड़ा गया। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी रैपिडो राइडर के रूप में काम करने के साथ इत्र बेचने का व्यवसाय भी करता था। उसके सोशल मीडिया इस्तेमाल और मोबाइल फोन में मिली संदिग्ध सामग्री की जांच की जा रही है।

    एटीएस का आरोप है कि आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों के बीच नफरत फैलाने वाली सामग्री साझा कर रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, वह टेलीग्राम पर एक समूह भी संचालित करता था। आरोप है कि इस समूह में उसने 1 जून को जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के भड़काऊ भाषण साझा किए थे। इन भाषणों में बाबरी मस्जिद सहित कुछ अन्य मुद्दों का उल्लेख होने की बात कही गई है।

    जांचकर्ताओं का यह भी दावा है कि आरोपी पाकिस्तान समर्थित बताए जा रहे ‘इब्न-ए-कासिम’ नाम के टेलीग्राम चैनल से जुड़ा हुआ था। हालांकि, उसके कथित संबंधों और गतिविधियों की वास्तविक प्रकृति का पता लगाने के लिए जांच जारी है। मोबाइल फोन से मिली सामग्री, सोशल मीडिया पर उसकी गतिविधियों और संबंधित डिजिटल संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में था और उसके ऑनलाइन समूह में किस तरह की सामग्री साझा की जाती थी।

    इसी बीच, गुजरात में भी जैश-ए-मोहम्मद से कथित तौर पर जुड़े मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ रही है। गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते ने बिलाल आबिदभाई शेरा, मोहम्मद अयूब कदीवाला, मोहम्मद पालनपुरी उर्फ खाली अयूब सुनसारा, शफिया रईस मुख्ती और मोहम्मद हसन करदिया को गिरफ्तार किया था। इन पांचों को गुजरात के पाटन जिले के खडियाल गांव से पकड़े जाने की जानकारी दी गई है।

    अधिकारियों के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद के आठ कथित सदस्यों से संबंधित जांच के दौरान इन पांच लोगों के नाम सामने आए थे। मामले में उनकी भूमिका और अन्य संदिग्धों के साथ उनके संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी यह स्पष्ट करने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क था और कथित गतिविधियों में उनकी क्या भूमिका रही।

    अदालती कार्यवाही के दौरान सरकारी वकील पी.आर. दंतानी ने पांचों आरोपियों से पूछताछ की आवश्यकता बताई थी। उनके अनुसार, एक आरोपी पर टाइम बम बनाने की कोशिश करने का आरोप है। जांच एजेंसी को कथित तौर पर बम बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और प्रतिबंधित संगठन से संबंधित उर्दू में लिखे साहित्य की तलाश है।

    एटीएस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदिग्ध सामग्री कहां से लाई गई, उसे कहां रखा गया था और प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी बताई जा रही सामग्री आरोपियों तक कैसे पहुंची। इन सवालों के जवाब जुटाने के लिए आरोपियों से पूछताछ की आवश्यकता बताई गई थी। अदालत ने पांचों आरोपियों को एटीएस की हिरासत में भेज दिया था।

    मुंबई और गुजरात के इन मामलों में जांच एजेंसियां कथित आतंकी संपर्कों, डिजिटल गतिविधियों और संदिग्ध सामग्री से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही

  • भारत ने UN में मानवाधिकार रिपोर्ट पर उठाए सवाल…. आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा

    भारत ने UN में मानवाधिकार रिपोर्ट पर उठाए सवाल…. आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा


    वाशिंगटन।
    न्यूयॉर्क (New York) में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के 81वें सत्र में मानवाधिकार उच्चायोग के साथ ‘इंटरैक्टिव डायलॉग’ के दौरान प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने भारत का बयान रखा. उन्होंने ओएचसीएचआर (OHCHR) के चयनात्मक रवैये और दोहरे मानदंडों पर चिंता जाहिर करते हुए सवाल खड़े किए. उनकी ओर से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिका के उल्लंघनों पर रिपोर्ट की मांग की गई।

    दरअसल, अनुज स्वरूप ने मानवाधिकार परिषद में भारत के सदस्य के रूप में अपनी रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका को रेखांकित किया. अपने संबोधन के दौरान उम्होंने कहा कि मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) की ओर से चुनिंदा मुद्दों पर ध्यान देने और दोहरे मानदंड अपनाने से बहुपक्षीय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है।


    पाकिस्तान पर OHCHR रिपोर्ट जारी करने की मांग

    इस दौरान भारत ने पाकिस्तान पर एक ओएचसीएचआर रिपोर्ट जारी करने की मांग की, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की ओर से लोगों की हत्या के मामलों की निष्पक्ष जांच, हिरासत में रखे गए आवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक अधिकार दिए जाने और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं पर लगी सभी पाबंदियां हटाने जैसे मुद्दों को शामिल करने की बात कही।


    भारत की पाकिस्तान को दो टूक

    भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वह इस बात पर आत्ममंथन करें कि उसके देश के कई हिस्सों, खासकर उसके अवैध कब्जे वाले क्षत्रों में मानवाधिकारों का किस तरीके से उल्लंघन हो रहा है. प्रथम सचिव की ओर से कहा गया कि मानवाधिकारों की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है और इस दिशा में निष्पक्षता तथा पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

    बता दें इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया गया था. स्थायी मिशन के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर बेदी ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर परमाणु हथियारों की धमकी से दबने वाला नहीं है. बेदी ने कहा कि भारत परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी आतंकी हमले का जवाब देगा।


    भारत ने पाकिस्तान को दी सीधी चेतावनी

    उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत के खिलाफ होने वाली किसी भी आतंकी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा. भारत आतंकवाद को समर्थन देने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा. बेदी ने यह भी कहा कि पिछले साल पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद किया गया था. पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी।

  • UNGA में जयशंकर का PAK को कड़ा संदेश, बोले- दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते

    UNGA में जयशंकर का PAK को कड़ा संदेश, बोले- दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते


    नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में आतंकवाद को लेकर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ किसी तरह की ढील नहीं दी जा सकती। उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि एक देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और हाल ही में उसने तथ्यों को भी गलत तरीके से पेश किया।

    जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद फैलाने वालों को अपना रवैया बदलना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के साथ दोस्ती और सद्भावना की बात साथ-साथ नहीं चल सकती। भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है और इस मुद्दे पर लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना पक्ष रखता रहा है।

    शांति और सुरक्षा के लिए बना था संयुक्त राष्ट्र
    न्यूयॉर्क में UNGA को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से हुई थी। इसके बावजूद आज भी संघर्ष और टकराव दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियों के रूप में मौजूद हैं।

    उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने में नाकामी का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विकास और प्रगति भी प्रभावित होती है। वैश्वीकृत दुनिया में किसी एक हिस्से में होने वाले युद्ध और संघर्ष का असर दूसरे हिस्सों पर भी पड़ता है। ऐसे में तनाव कम करना और संवाद के जरिए समाधान तलाशना जरूरी है।

    समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा पर जोर
    जयशंकर ने कमर्शियल शिपिंग और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और समुद्री कर्मचारियों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। इससे पहले भारत और लाइबेरिया की ओर से समुद्री सुरक्षा और सीफेयरर्स की सुरक्षा को लेकर ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ पहल पर भी जोर दिया गया है। जयशंकर ने कहा था कि दुनिया में जारी संघर्षों का असर भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त जैसी बुनियादी जरूरतों पर भी पड़ रहा है।

    यूक्रेन युद्ध पर बोले- अंतहीन युद्ध खत्म होना चाहिए
    यूक्रेन में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह युद्ध पांचवें साल में पहुंच गया है और यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अंतहीन युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए।

    जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि संघर्षों का समाधान केवल सैन्य रास्ते से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए तलाशा जाना चाहिए। उनका संबोधन ऐसे समय हुआ है, जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी यूक्रेन में तत्काल युद्धविराम और लंबे समय तक कायम रहने वाली शांति की जरूरत पर जोर दे चुके हैं।

    फिलिस्तीनियों के लिए भारत की मानवीय मदद जारी
    पश्चिम एशिया की स्थिति पर जयशंकर ने कहा कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में मदद कर रहा है। भारत लंबे समय से फिलिस्तीन के मुद्दे पर मानवीय सहायता और दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन की बात करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने स्वतंत्र, संप्रभु और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के साथ इजराइल के साथ शांति और सुरक्षा में रहने वाले दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन दोहराया है।

    जयशंकर ने कहा कि शांति का मतलब केवल युद्ध का खत्म होना नहीं है। यदि दुनिया लगातार खतरों और दबावों से घिरी रहेगी तो स्थिरता और सुरक्षा कमजोर होगी। स्थायी शांति के लिए स्थिरता, सुरक्षा और भरोसे का माहौल बनाना जरूरी है। इनमें से किसी भी आधार को कमजोर करने से शांति की स्थिति भी प्रभावित होगी।

    हथियार की तरह इस्तेमाल हो रही अर्थव्यवस्था और तकनीक
    विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के दशकों बाद भी दुनिया में हर चीज को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। प्रतिस्पर्धा की सोच हावी हो रही है और संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।

    उन्होंने वित्त और बाजारों तक पहुंच सीमित करने, सप्लाई चेन में रुकावट डालने और तकनीक को रोकने जैसे कदमों का जिक्र किया। उनका कहना था कि ऐसे उपायों का असर सिर्फ संबंधित देशों तक नहीं रहता, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास पर भी पड़ता है।

    ग्लोबल साउथ के सामने 4F का संकट
    जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि विकासशील देशों के सामने चुनौतियां और गंभीर हैं। उन्होंने ‘4F’ संकट की बात कही। इसमें Food यानी भोजन, Fuel यानी ईंधन, Fertilizer यानी उर्वरक और Finance यानी वित्त शामिल हैं।

    उनके मुताबिक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों और तनाव का सीधा असर इन चारों क्षेत्रों पर पड़ रहा है। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं और देशों के सामने चुनौती यह है कि वे स्थिरता और भरोसे का ऐसा वातावरण तैयार करें, जिससे विकासशील देशों की बुनियादी जरूरतों और विकास पर संकट का असर कम हो।

    पश्चिम एशिया में टू-स्टेट सॉल्यूशन पर भारत का रुख
    पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि टू-स्टेट सॉल्यूशन यानी दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है। इसके तहत इजराइल और फिलिस्तीन को शांति और सुरक्षा के साथ रहने का रास्ता तलाशने की बात कही जाती है।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी 81वें महासभा सत्र के दौरान दो-राष्ट्र समाधान को पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का महत्वपूर्ण आधार बता चुके हैं।

    जयशंकर के संबोधन में आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, फिलिस्तीन को मानवीय सहायता और ग्लोबल साउथ की आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। भारत ने इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को दोहराने के साथ वैश्विक स्तर पर शांति, स्थिरता और संवाद की जरूरत पर जोर दिया।

  • UN में पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद पर पूछा सवाल, जयशंकर बोले- ‘एक आतंकी देश मुझसे ये पूछ रहा’

    UN में पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद पर पूछा सवाल, जयशंकर बोले- ‘एक आतंकी देश मुझसे ये पूछ रहा’


    नई दिल्ली। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया। जयशंकर ने जवाब देते हुए कहा, “एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है। कम ऑन।” इसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए वहां से चले गए। घटना के दौरान भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने भी पत्रकार से कहा कि उसे उसका जवाब साफ तौर पर मिल चुका है।

    पत्रकार ने बीच में टोककर पूछा- आतंकवाद कब बंद करेंगे?

    जयशंकर न्यूयॉर्क में भारत और लाइबेरिया की ओर से शुरू किए गए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’ से जुड़े प्रेस इंटरैक्शन में बोल रहे थे। उनके साथ लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यांती भी मौजूद थीं।

    प्रेस बातचीत के बाद एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर को बीच में टोकते हुए पूछा कि भारत सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगी। उसने भारत पर ‘प्रॉक्सी टेररिज्म’ को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए सवाल किया।

    जयशंकर ने बिना लंबी प्रतिक्रिया दिए कहा, “एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है। कम ऑन।” इसके बाद वह मुस्कुराए और वहां से चले गए।

    भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने इसके बाद पत्रकार से कहा, “आपने अपना जवाब सुन लिया है। आपने अपना जवाब साफ तौर पर सुन लिया है।” इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

    25 देशों के साथ समुद्री सुरक्षा पर पहल

    यह सवाल-जवाब उस प्रेस इंटरैक्शन के दौरान हुआ, जिसमें जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा को लेकर नई पहल की जानकारी दे रहे थे। भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’ की शुरुआत की है।

    जयशंकर ने कहा कि समुद्र में कमर्शियल जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमलों को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों को रुकना ही चाहिए।

    विदेश मंत्री के मुताबिक, भारत समुद्री कर्मचारियों का एक प्रमुख सोर्स देश है, जबकि लाइबेरिया के पास टनेज के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग रजिस्ट्रियों में से एक है। दोनों देशों ने समान हितों वाले अन्य देशों और प्रमुख जहाज मालिकों को भी इस पहल से जोड़ने की कोशिश की है।

    ‘हमलों को रुकना ही चाहिए’

    जयशंकर ने कहा कि हाल के महीनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, रेड सी और ब्लैक सी समेत अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में कमर्शियल शिपिंग और मर्चेंट मैरिनर्स पर हमले हुए हैं। उनके मुताबिक, इन घटनाओं से समुद्री व्यापार प्रभावित होता है और लोगों की जान जाती है।

    उन्होंने कहा कि इस तरह की हिंसा और जान-माल के नुकसान का कोई औचित्य नहीं हो सकता। भारत और लाइबेरिया की पहल का उद्देश्य समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर दुनिया का ध्यान बढ़ाना है।

    जयशंकर के मुताबिक, दुनिया के मर्चेंट फ्लीट को करीब 20 लाख समुद्री कर्मचारी चलाते हैं। उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है और हाल के घटनाक्रम ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।

    पीएम मोदी भी उठा चुके हैं नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

    नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया जाता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स बैठक के दौरान समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उठाया है।

    जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर बयानबाजी भी चर्चा में है।

  • मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, FIA की नई सूची में 70 लाख रुपये का इनाम और गिरफ्तारी वारंट जारी

    मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, FIA की नई सूची में 70 लाख रुपये का इनाम और गिरफ्तारी वारंट जारी


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का दावा करते हुए उसे गिरफ्तार करने के लिए वारंट जारी किया है। पाकिस्तान की जांच एजेंसी फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में मसूद अजहर पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब अक्टूबर में एफएटीएफ की बैठक प्रस्तावित है।

    FIA की नई सूची में मसूद अजहर को वांछित बताया गया है। पाकिस्तान का कहना है कि वह देश से गायब है और अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। वहीं, भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़ी जानकारी में उसके पाकिस्तान में छिपे होने की संभावना जताई गई है। पिछले कुछ महीनों में ऐसी जानकारी सामने आने का दावा किया गया है कि वह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह इलाके में हो सकता है।

    मसूद अजहर पर इससे पहले भी पाकिस्तान की ओर से इनाम घोषित किया जा चुका है। वर्ष 2021 में FIA ने उस पर 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। अब पांच साल बाद इस रकम में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल इनाम 70 लाख रुपये हो गया है।

    FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में 26/11 मुंबई हमले से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इन लोगों पर हमले में अलग-अलग तरह से मदद करने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ पर हमलावरों को समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचाने में सहायता करने का आरोप है, जबकि कुछ पर हमले के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

    नई सूची में 17 लोगों की तस्वीरें और उनके काम से जुड़ी जानकारी दी गई है। वहीं दो लोगों के नाम सूची में मौजूद होने के बावजूद उनकी तस्वीर और संगठन से संबंधित विवरण हटा दिए गए हैं। तुर्बत के मोहम्मद खान पर हमलावरों को मुंबई पहुंचाने वाली नाव उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया था। नई सूची में उसके नाम के साथ तस्वीर और अन्य जानकारी नहीं दी गई है।

    बहावलनगर के अब्दुल रहमान का नाम भी सूची में मौजूद है, लेकिन उसकी तस्वीर और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी जानकारी हटा दी गई है। वर्ष 2021 की पुरानी सूची में दोनों के बारे में अधिक विवरण मौजूद था।

    नई सूची में 11 ऐसे लोगों के नाम भी हैं, जिन पर हमलावरों को दो नावों के जरिए समुद्र पार कराने में मदद करने का आरोप लगाया गया है। इनमें मुहम्मद अमजद खान, शाहिद गफूर, मुहम्मद उस्मान, अतीक उर रहमान, रियाज अहमद, मुहम्मद मुश्ताक, मुहम्मद नईम, अब्दुल शकूर, मुहम्मद साबिर सल्फी, मुहम्मद उस्मान और शकील अहमद शामिल हैं।

    इसके अलावा छह लोगों पर हमले के लिए आर्थिक मदद देने का आरोप लगाया गया है। मुहम्मद इफ्तिखार अली पर VOIP कनेक्शन के लिए करीब 70 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च करने का आरोप है। मोहम्मद जिया पर 80 हजार रुपये, मोहम्मद अब्बास नासिर पर 2.53 लाख रुपये, जावेद इकबाल पर 1.86 लाख रुपये और मुख्तार अहमद पर करीब 2.98 लाख रुपये देने का आरोप है। अहमद सईद पर करीब 21 लाख रुपये देने का आरोप लगाया गया है।

    FIA के मुताबिक 26/11 हमले से जुड़े ये लोग करीब 18 साल से फरार हैं। वहीं भारतीय खुफिया सूत्रों का दावा है कि इनमें से कई पाकिस्तान में ही मौजूद हैं। भारत का कहना है कि केवल नाम मोस्ट वांटेड सूची में शामिल करना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। पाकिस्तान की 2021 की सूची में 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकियों के नाम थे, जबकि नई सूची में यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है।

  • अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज, 1993 मुंबई ब्लास्ट केस में जेल में रहेगा

    अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज, 1993 मुंबई ब्लास्ट केस में जेल में रहेगा

    नई दिल्ली । 1993 मुंबई सीरियल बम धमाके मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। उसकी समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने उसकी दलील को नहीं माना और उसकी उम्मीदों को फिलहाल के लिए झटका दे दिया है।

    यह मामला देश के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक से जुड़ा है। 12 मार्च 1993 को मुंबई के 12 अलग-अलग इलाकों में एक के बाद एक बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 257 लोगों की जान चली गई थी और लगभग 800 लोग घायल हुए थे।

    जांच में यह बात सामने आई कि बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने के मकसद से ये धमाके करवाए गए थे। अबू सलेम को इस पूरी साजिश का मुख्य किरदार माना गया। जांच में यह साबित हुआ कि वह हमले की योजना बनाने में शामिल था और उसी ने गुजरात के भरुच से मुंबई तक हथियार और विस्फोटक पहुंचाए थे। इसके अलावा उसे हत्या का भी दोषी ठहराया गया था। इन सभी आरोपों के आधार पर विशेष टाडा अदालत ने उसे 25 साल कैद की सजा सुनाई थी।

    इससे पहले भी सलेम कोर्ट में यह दलील दे चुका है कि पुर्तगाल के साथ हुए प्रत्यर्पण समझौते के मुताबिक उसे 25 साल से ज्यादा समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। लेकिन अदालतें इस दलील को कई बार खारिज कर चुकी हैं।

    इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट भी सलेम की ऐसी ही याचिका ठुकरा चुका है। हाईकोर्ट ने कहा था कि सजा में मिलने वाली छूट की गणना रिहाई की तय तारीख से सिर्फ एक महीने पहले ही की जा सकती है। यानी अभी यह मानना सही नहीं होगा कि उसकी सजा पूरी हो चुकी है।

    अब सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला भी इसी रुख को आगे बढ़ाता है और साफ करता है कि सलेम की जल्द रिहाई फिलहाल संभव नहीं है।

  • SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश

    SCO मंच से पीएम मोदी का बड़ा विजन: सिक्योरिटी, कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी पर दिया जोर, आतंकवाद पर भी कड़ा संदेश


    नई दिल्ली । बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का स्पष्ट और व्यापक विजन दुनिया के सामने रखा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में पीएम मोदी ने आतंकवाद वैश्विक सुरक्षा संवाद कूटनीति कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की सोच रखी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में एससीओ ने संवाद और सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है और अब आने वाले 25 वर्षों में इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलने का समय आ गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ को लेकर भारत की सोच के तीन प्रमुख स्तंभों सिक्योरिटी कनेक्टिविटी और अपॉर्च्युनिटी को फिर से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अब इन विचारों को केवल विजन तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक परिणामों में बदलना होगा और इसके लिए सबसे पहली जरूरत शांति और सुरक्षा की है। पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई या जवाबी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को समाप्त करना जरूरी है। आतंकवाद की फंडिंग भर्ती कट्टरपंथ और आतंकियों को मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों को खत्म किए बिना इस चुनौती का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर किसी तरह के दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और सभी देशों को एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी।

    प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी को भी क्षेत्रीय सुरक्षा और युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ड्रग ट्रैफिकिंग केवल अपराध नहीं बल्कि समाज और भविष्य के लिए बड़ा संकट है। सुरक्षा संबंधी खतरे संगठित अपराध सूचना सुरक्षा और नार्कोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ के तहत बनाए जा रहे केंद्रों को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया।

    वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने शांति के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने साबित किया है कि किसी एक क्षेत्र में होने वाला संघर्ष केवल उसी इलाके तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक नुकसान ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध और तनाव का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही खोजा जाना चाहिए।

    पीएम मोदी ने साझा विकास और कनेक्टिविटी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए अवसर पैदा करते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कनेक्टिविटी पहल में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने इसे एससीओ चार्टर की मूल भावना से भी जोड़ा।

    प्रधानमंत्री ने एससीओ की सबसे बड़ी पूंजी सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को बताया। उनके अनुसार महान सभ्यताओं संस्कृतियों और विचारों का यह संगठन तभी मजबूत होगा जब इसका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने युवाओं के लिए नए अवसर खोलने उद्यमियों के लिए नए बाजार तैयार करने किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने और नागरिकों का जीवन बेहतर बनाने को सफलता की वास्तविक कसौटी बताया। पीएम मोदी ने सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित न रखकर लोगों द्वारा संचालित बनाने की जरूरत बताई। स्टार्टअप फोरम यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसे भारतीय प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एससीओ के भविष्य को युवा शक्ति संवाद और जनसंपर्क से जोड़ने का संदेश दिया। बिश्केक के मंच से भारत ने साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में उसकी प्राथमिकता सुरक्षित शांतिपूर्ण और अधिक सहयोगपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाने की होगी।

  • आतंकी धमकी से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में चिंता, पत्र में कई लोगों की निजी जानकारी का किया गया जिक्र

    आतंकी धमकी से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में चिंता, पत्र में कई लोगों की निजी जानकारी का किया गया जिक्र

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को कथित आतंकी संगठन की ओर से धमकी भरे पत्र मिलने का मामला सामने आया है। इन पत्रों में कई कश्मीरी पंडितों के नाम और उनके पते का उल्लेख किए जाने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रों के स्रोत और इसके पीछे शामिल लोगों की जांच शुरू कर दी है।

    बताया गया है कि धमकी भरे पत्र में कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ लोगों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है। पत्र में लोगों के नाम के साथ उनके घर और गली से जुड़ी जानकारी भी दर्ज होने की बात सामने आई है। इस तरह की निजी जानकारी का इस्तेमाल किए जाने से प्रभावित लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है।

    जानकारी के अनुसार, पत्र में कश्मीर से बाहर चले गए कश्मीरी पंडितों को लेकर आपत्तिजनक आरोप लगाए गए हैं। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि पत्र वास्तव में किस संगठन या व्यक्ति की ओर से भेजे गए हैं और इनमें किए गए दावों की वास्तविकता क्या है।

    मामले में यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल नाम के संगठन का उल्लेख सामने आया है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक मोर्चा बताया जा रहा है। हालांकि, पत्र की वास्तविकता, इसे जारी करने वाले व्यक्ति या संगठन और इसके पीछे की मंशा की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। सुरक्षा एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले भी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी भरे पत्र मिलने की जानकारी सामने आई थी। पिछले मामले में कुछ सरकारी कर्मचारियों के नाम और संपर्क संबंधी जानकारी पत्र में शामिल होने की बात कही गई थी। इसके बाद संबंधित विभागों ने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई थी।

    हालिया घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब घाटी में अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों की सुरक्षा पहले से संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। कुछ समय पहले कुलगाम में दो प्रवासी मजदूरों पर हमला कर उनकी हत्या किए जाने की घटना ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी हाल में घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही आतंकी धमकियों को गंभीरता से लेने की बात कही थी। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों से ऐसे मामलों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की थी। मुख्यमंत्री ने पूर्व में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया था।

    प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी प्राथमिकता धमकी की विश्वसनीयता का आकलन करने के साथ प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सुरक्षा एजेंसियां पत्रों की जांच, उनके प्रसार के स्रोत और संभावित जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के आधार पर की जाएगी।

    कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए इस घटनाक्रम ने सुरक्षा और विश्वास से जुड़े पुराने सवालों को फिर सामने ला दिया है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और समय रहते आवश्यक कदम उठाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि धमकी के कारण लोगों में भय का माहौल न बने और किसी संभावित घटना को रोका जा सके।

  • 26/11 मुंबई आतंकी हमले के छह पाकिस्तानी आरोपियों पर गैरहाजिरी में मुकदमा शुरू, हाफिज सईद और लखवी भी आरोपी

    26/11 मुंबई आतंकी हमले के छह पाकिस्तानी आरोपियों पर गैरहाजिरी में मुकदमा शुरू, हाफिज सईद और लखवी भी आरोपी

    नई दिल्ली । 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में भारत ने फरार पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुंबई की विशेष अदालत में हाफिज सईद और जकी उर रहमान लखवी समेत छह आरोपियों के खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 356 के तहत की जा रही है। आरोपियों के भारत में मौजूद नहीं होने के बावजूद अब अदालत मामले की सुनवाई को आगे बढ़ा सकेगी।

    इस मामले में हाफिज सईद, जकी उर रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकामा, अबू कहफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमले की साजिश और उससे जुड़े षड्यंत्र में भूमिका होने के आरोप हैं। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर इन आरोपियों की कथित भूमिका अलग अलग स्तर पर बताई गई है।

    26/11 का हमला भारत के सबसे बड़े आतंकी हमलों में शामिल है। पाकिस्तान से समुद्री रास्ते के जरिए मुंबई पहुंचे आतंकवादियों ने शहर के कई महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया था। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ताज होटल, ट्राइडेंट होटल, नरीमन हाउस और अन्य स्थानों पर कई घंटों तक आतंक का माहौल रहा था। इस हमले में 166 लोगों की जान चली गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।

    हमले में शामिल दस आतंकवादियों में से नौ सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए थे, जबकि अजमल कसाब को जिंदा गिरफ्तार किया गया था। कसाब के खिलाफ भारत में मुकदमा चला और अदालत ने उसे दोषी ठहराया था। बाद में उसे कानून के तहत फांसी दी गई। हालांकि हमले की साजिश और उसके संचालन से जुड़े कई आरोपी भारत की पहुंच से बाहर रहे हैं।

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 356 ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान उपलब्ध कराती है, जहां कोई आरोपी फरार है और अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हो रहा है। निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी की गैरमौजूदगी में मुकदमे को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी आरोपी के लंबे समय तक फरार रहने के कारण न्यायिक प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक रुकी न रहे।

    मामले में आरोपियों को अदालत के समक्ष उपस्थित होने का अवसर दिया गया है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और अन्य दस्तावेजों पर विचार करेगी। अभियोजन पक्ष का कहना है कि फरार आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और नई कानूनी व्यवस्था के माध्यम से मुकदमे को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है।

    हाफिज सईद पर 26/11 हमले की साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप है, जबकि जकी उर रहमान लखवी पर आतंकवादियों की तैयारी और हमले के संचालन से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। जांच में कराची स्थित कथित नियंत्रण कक्ष से हमले की निगरानी और निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई थी। अब अदालत इन आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की न्यायिक जांच करेगी।

    गैरहाजिरी में शुरू हुआ यह मुकदमा 26/11 मामले में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि आरोपियों के खिलाफ अंतिम फैसला तभी होगा जब अदालत सभी साक्ष्यों और कानूनी दलीलों पर विचार करने के बाद अपना निर्णय देगी। BNSS की धारा 356 के तहत शुरू हुई यह प्रक्रिया भारत की न्याय व्यवस्था में उन गंभीर मामलों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जिनमें आरोपी देश से बाहर रहकर लंबे समय तक न्यायिक कार्रवाई से बचते रहे हैं।