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  • आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप

    आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े तत्वों की रहस्यमयी मौतों को लेकर हाल के दिनों में सुरक्षा और खुफिया हलकों में हलचल तेज हो गई है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है कि क्या देश के भीतर किसी प्रकार का संगठित टारगेट ऑपरेशन चल रहा है या यह आपसी संघर्ष का परिणाम है।

    सूत्रों और सामने आई रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में हाल के दिनों में तीन आतंकियों के शव मिलने से आतंकी नेटवर्क में बेचैनी बढ़ी है। इनमें गाजी मुमताज, मोहम्मद खुजैमा कासिम और खालिद बशीर जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जो कथित रूप से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इन मौतों के कारण संगठन के भीतर असुरक्षा का माहौल गहराने की बात कही जा रही है।

    पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी संगठनों को संरक्षण देने के आरोपों का सामना करता रहा है। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को लेकर भी विभिन्न समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि वर्तमान घटनाक्रम में जिस तरह से एक के बाद एक संदिग्ध मौतों की खबरें सामने आ रही हैं, उसने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

    सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार इस तरह की घटनाएं या तो आंतरिक संघर्ष, गुटीय टकराव या फिर किसी गुप्त ऑपरेशन का संकेत हो सकती हैं। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय स्तर पर कुछ घटनाओं में हमलों और गोलीबारी का जिक्र भी सामने आया है, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।

    इसी क्रम में खैबर पख्तूनख्वा और अन्य संवेदनशील इलाकों में पहले भी आतंकी कमांडरों पर हमलों की खबरें आती रही हैं, जिनमें अज्ञात हमलावरों की भूमिका की बात कही जाती है। इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी ढांचे की स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी नेटवर्क अब पहले जितना सुरक्षित नहीं रह गया है और आंतरिक व बाहरी दबाव दोनों के बीच उसकी स्थिति कमजोर हो रही है। लगातार हो रही घटनाओं से संगठनों के भीतर नेतृत्व और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ती दिखाई दे रही है।

    हालांकि इन सभी घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, यह स्पष्ट नहीं है और जांच एजेंसियों की ओर से भी कोई ठोस निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही संदिग्ध मौतों ने आतंकी संगठनों की गतिविधियों और उनकी आंतरिक संरचना को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • POK में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड, हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या

    POK में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड, हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या



    नई दिल्ली। 2019 के चर्चित पुलवामा आतंकी हमला के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हत्या कर दी गई है। ‘डॉक्टर’ के नाम से पहचाने जाने वाले हमजा को मुजफ्फराबाद के पास अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियों से भून डाला। हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई वर्षों से POK में एक स्कूल टीचर की फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। इसी आड़ में वह आतंकी नेटवर्क, ट्रेनिंग कैंप और घुसपैठ गतिविधियों को संचालित कर रहा था।

    सूत्रों के अनुसार, मुजफ्फराबाद के घने जंगल वाले इलाके में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया। हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे कई गोलियां लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। फिलहाल हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है।

    हमजा आतंकी संगठन अल-बद्र का प्रमुख कमांडर था और वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी नेटवर्क के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था। भारत सरकार ने वर्ष 2022 में उसे UAPA के तहत आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की पुलवामा हमले से जुड़ी चार्जशीट में भी उसका नाम प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल था।

    बताया जाता है कि हमजा पाकिस्तान जाकर आतंकी संगठन अल-बद्र में शामिल हुआ था और बाद में उसका कमांडर बन गया। वह पाकिस्तान से ही जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, युवाओं को संगठन में भर्ती करने और फंडिंग जुटाने का काम करता था।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, हमजा युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने और आतंकी संगठनों के लिए आर्थिक मदद जुटाने में भी सक्रिय था। पुलवामा हमले के अलावा उसे कई अन्य आतंकी घटनाओं का भी मास्टरमाइंड माना जाता था।

    14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। उस दिन जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर जा रहा था, तभी पुलवामा के लेथपोरा इलाके में विस्फोटकों से भरी एक कार जवानों की बस से टकरा गई थी। धमाका इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़ गए थे। इस आत्मघाती हमले को स्थानीय आतंकी आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया था, जबकि इसकी जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।

    एनआईए की विस्तृत जांच में मसूद अजहर, अब्दुल रऊफ असगर, उमर फारूक और हमजा बुरहान समेत कई आतंकियों को इस हमले की साजिश में शामिल पाया गया था। अब हमजा की मौत को आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

    हालांकि, उसकी हत्या किसने और किन कारणों से की, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

  • पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत

    पुलवामा हमले के कथित मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की हत्या: PoK में गोलीबारी से मौत



    नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2019 के पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े बताए जा रहे हमजा बुरहान की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है।कहा जा रहा है कि उस पर PoK क्षेत्र में कई राउंड फायरिंग की गई, जिसके बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    कौन था हमजा बुरहान?
    रिपोर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों के दावों के अनुसार:

    असली नाम: अर्जुमंद गुलजार डार

    उर्फ: हमजा बुरहान / “डॉक्टर”

    मूल रूप से: पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) का निवासी

    संगठन से जुड़ाव: आतंकी संगठन Al Badr

    उसे 2019 के पुलवामा हमले की साजिश में शामिल माना जाता था, जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।

     भारत की कार्रवाई और दर्ज स्थिति
    भारत सरकार ने 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था

    उस पर आतंकी भर्ती, फंडिंग और हमलों की साजिश में शामिल होने के आरोप थे

    वह पाकिस्तान और PoK में सक्रिय नेटवर्क चलाने का आरोप झेल रहा था

    किन गतिविधियों में नाम सामने आया था?
    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार उस पर आरोप थे कि वह:

    युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करता था

    फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था

    CRPF पर ग्रेनेड हमलों जैसी घटनाओं में भूमिका में था

    विस्फोटक बरामदगी मामलों से जुड़ा था

    हत्या को लेकर क्या दावा है?
    रिपोर्ट्स में कहा गया है कि:

    PoK में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया

    कई गोलियां लगने से मौके पर ही मौत हो गई

    हमले के पीछे कौन था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है

     आधिकारिक स्थिति अभी तक:

    किसी भी सरकार ने इस हत्या की स्वतंत्र पुष्टि या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है

    यह घटना फिलहाल मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से सामने आई है

  • भारत में आतंकी मिशन छोड़ मेकओवर में उलझे लश्कर के आतंकी, स्लीपर सेल प्लान बीच में रह गया अधूरा!

    भारत में आतंकी मिशन छोड़ मेकओवर में उलझे लश्कर के आतंकी, स्लीपर सेल प्लान बीच में रह गया अधूरा!

    नई दिल्ली । भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दो आतंकियों की प्राथमिकता उनका मिशन नहीं बल्कि उनका लुक और व्यक्तिगत दिखावट बन गई। इन दोनों आतंकियों की योजना भारत में घुसपैठ कर स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार करने की थी, लेकिन जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार उनका ध्यान अपने उद्देश्य से हटकर निजी इच्छाओं की ओर चला गया, जिससे पूरा ऑपरेशन प्रभावित हो गया।

    पहला आतंकी उस्मान जट्ट पाकिस्तान से भारत में घुसा था और उसका मकसद देश के भीतर एक संगठित नेटवर्क तैयार करना था, जो भविष्य में बड़ी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे सके। लेकिन भारत में आने के बाद उसने अपने मिशन को प्राथमिकता देने के बजाय अपने रूप-रंग में बदलाव पर ध्यान देना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि वह श्रीनगर में स्थित एक निजी क्लिनिक पहुंचा और वहां हेयर ट्रांसप्लांट जैसी प्रक्रिया करवाई। इस प्रक्रिया में समय और ध्यान लगाने के कारण उसका मूल उद्देश्य पीछे छूटता चला गया और उसकी गतिविधियां संदेह के घेरे में आ गईं।

    इसी तरह एक अन्य आतंकी शब्बीर अहमद लोन भी इसी नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया गया है, जिसका काम भारत और आसपास के क्षेत्रों में एक स्लीपर सेल तैयार करना था। लेकिन जांच में सामने आया कि वह भी अपने काम से भटक गया और अपने स्वास्थ्य तथा व्यक्तिगत लुक से जुड़ी प्रक्रियाओं में उलझ गया। वह इलाज और डेंटल ट्रीटमेंट के लिए कई स्थानों पर गया, जिनमें एक निजी चिकित्सा केंद्र भी शामिल बताया जाता है। इस दौरान उसका ध्यान लगातार अपने मिशन से हटता गया और उसकी गतिविधियां सामान्य संदिग्ध व्यवहार से अलग दिखने लगीं।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत लापरवाही का नहीं बल्कि एक बड़ी विफल योजना का संकेत देता है, जिसमें आतंकी संगठन अपने सदस्यों को अनुशासित रखने में सफल नहीं हो पाया। आधुनिक समय में जहां सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं, वहीं ऐसे मिशन में शामिल लोगों का भटक जाना पूरी साजिश को कमजोर कर देता है।

    जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात का भी संकेत देता है कि आतंकियों की योजनाएं केवल हथियारों और नेटवर्क पर ही निर्भर नहीं होतीं, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति और व्यक्तिगत प्राथमिकताएं भी उनके मिशन की सफलता या विफलता को प्रभावित कर सकती हैं। इस मामले ने सुरक्षा तंत्र को भी सतर्क कर दिया है कि घुसपैठ के बाद संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखना कितना आवश्यक है।

    फिलहाल दोनों मामलों की गहन जांच जारी है और एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर कैसे ये आतंकी अपने मूल उद्देश्य से इतनी आसानी से भटक गए। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी नेटवर्क की अंदरूनी कमजोरियों को उजागर कर दिया है।

  • असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं

    असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने बलूचिस्तान की धरती से एक बार फिर भारत का नाम लिए बिना कड़ा बयान दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने बाहरी ताकतों पर पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने और दुष्प्रचार चलाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी कोशिशें देश की तरक्की और स्थिरता को रोक नहीं सकतीं।

    मुनीर ने कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, क्वेटा में अधिकारियों और सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान का “निश्चित उदय” किसी भी प्रकार के प्रॉक्सी वॉर, गलत सूचना अभियान या आतंकवाद से प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना और जनता मिलकर देश से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    अपने भाषण में उन्होंने बलूचिस्तान में तैनात सैन्य अधिकारियों की ट्रेनिंग और पेशेवर क्षमता की भी सराहना की। मुनीर ने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है और ऐसे में सेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, नई तकनीक और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार काम करना होगा।

    उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते सुरक्षा हालात में निरंतर प्रशिक्षण और उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

    मुनीर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ “शत्रु ताकतें” पाकिस्तान के खिलाफ फर्जी खबरों और दुष्प्रचार के जरिए देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सेना और जनता की एकता के आगे ये प्रयास सफल नहीं होंगे।

    बलूचिस्तान में स्थायी शांति और विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र की प्रगति सुरक्षा, समावेशी विकास और बेहतर शासन पर निर्भर करती है।

  • अमेरिका का बड़ा एंटी-ISIS ऑपरेशन: अफ्रीका में छिपा नंबर-2 कमांडर ढेर, ट्रम्प का दावा,संगठन की कमर टूटी

    अमेरिका का बड़ा एंटी-ISIS ऑपरेशन: अफ्रीका में छिपा नंबर-2 कमांडर ढेर, ट्रम्प का दावा,संगठन की कमर टूटी



    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अफ्रीका में एक बड़े सैन्य ऑपरेशन के दौरान आतंकी संगठन ISIS का दूसरा सबसे बड़ा कमांडर अबू बिलाल अल मिनुकी मारा गया है। यह कार्रवाई अमेरिकी सेना और नाइजीरियाई सुरक्षा बलों के संयुक्त ऑपरेशन के तहत की गई, जिसमें लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

    ट्रम्प के अनुसार, यह आतंकी संगठन के सबसे सक्रिय और रणनीतिक दिमागों में से एक था, जो फंडिंग नेटवर्क और हमलों की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाता था। उसके मारे जाने से ISIS के कमांड स्ट्रक्चर और वित्तीय नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा है। हालांकि इस ऑपरेशन की सटीक जगह और समय को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

    सूत्रों के मुताबिक, अबू बिलाल अल मिनुकी का जन्म 1982 में नाइजीरिया के बोर्नो राज्य में हुआ था और वह लंबे समय से अफ्रीका में छिपकर ISIS की गतिविधियों को संचालित कर रहा था। उसे 2023 में अमेरिका ने “ग्लोबल टेररिस्ट” घोषित किया था, जिसके बाद उसकी संपत्तियां फ्रीज कर दी गई थीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी।

    ISIS के इस नंबर-2 कमांडर को संगठन के भीतर “शैडो ऑपरेटर” माना जाता था, क्योंकि वह सीधे सामने नहीं आता था और नेटवर्क व फंडिंग को नियंत्रित करता था। उसके कई नाम भी बताए जाते थे, लेकिन उसकी कोई आधिकारिक तस्वीर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी।

    नाइजीरिया और आसपास के पश्चिमी अफ्रीकी देशों में ISIS और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियां लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई हैं। बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस जैसे संगठन इस क्षेत्र में लगातार हिंसा फैला रहे हैं, जिसमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऑपरेशन को ISIS के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है, लेकिन संगठन के पूरी तरह खत्म होने की संभावना अभी भी नहीं है क्योंकि इसके नेटवर्क कई देशों में फैले हुए हैं और यह समय-समय पर नए नेतृत्व के साथ सक्रिय हो जाता है।

    कुल मिलाकर, यह कार्रवाई अफ्रीका में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक अहम उदाहरण मानी जा रही है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा विवाद: लश्कर कमांडर के दावों से पाकिस्तान में मचा हड़कंप, सैन्य ठिकानों पर हमले के आरोप

    ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा विवाद: लश्कर कमांडर के दावों से पाकिस्तान में मचा हड़कंप, सैन्य ठिकानों पर हमले के आरोप



    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच कथित “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर सामने आए दावों के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया और क्षेत्रीय मीडिया में अलग-अलग तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई वायरल वीडियो और बयानों में यह दावा किया जा रहा है कि मई 2025 में हुए इस कथित ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के मुरीदके और कुछ अन्य इलाकों में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा था, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

    वायरल दावों में यह भी कहा जा रहा है कि हमलों के बाद स्थिति काफी गंभीर हो गई थी और कुछ आतंकी ढांचों को बड़ा नुकसान हुआ था, यहां तक कि मलबे से शवों के टुकड़े इकट्ठा करने जैसे दावे भी सामने आए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवरण अक्सर अपुष्ट स्रोतों और प्रचार वीडियो पर आधारित होते हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि जरूरी होती है।

    इसी तरह कुछ वीडियो क्लिप्स में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाया गया, और हमले के बाद वहां सुरक्षा और प्रतिक्रिया व्यवस्था पर सवाल उठे। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने धार्मिक दुआओं और धार्मिक आयतों का सहारा लिया, लेकिन इन सभी बातों पर किसी भी सरकारी स्तर से आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    भारत सरकार या भारतीय सेना की ओर से भी इस नाम से किसी बड़े “ऑपरेशन सिंदूर” की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कई रिपोर्ट्स अभी तक अपुष्ट और दावे आधारित हैं।

    रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अक्सर सूचना युद्ध (information warfare) की भूमिका बढ़ जाती है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और नैरेटिव पेश करते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले केवल विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना जरूरी होता है।

    फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया दावों, वीडियो क्लिप्स और अनौपचारिक बयानों के बीच उलझा हुआ है और इसकी सच्चाई को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आना बाकी है।

  • आसिम मुनीर की भारत को चेतावनी: ‘भविष्य में होगा दर्दनाक अंजाम’, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर फिर बढ़ा तनाव

    आसिम मुनीर की भारत को चेतावनी: ‘भविष्य में होगा दर्दनाक अंजाम’, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर फिर बढ़ा तनाव



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने एक बार फिर भारत के खिलाफ सख्त बयान देते हुए भविष्य में “दर्दनाक परिणाम” भुगतने की चेतावनी दी है। यह बयान रावलपिंडी स्थित GHQ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जो कथित तौर पर ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान की वायुसेना और नौसेना के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे।

    आसिम मुनीर ने दावा किया कि 6 और 7 मई की रात भारत ने पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया था, जिसका जवाब पाकिस्तान ने पूरी ताकत से दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई होती है, तो उसका जवाब “बहुत बड़ा और दर्दनाक” होगा।

    अपने संबोधन में उन्होंने भारत पर कई पुराने आतंकी हमलों के बाद की गई कार्रवाइयों को “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” बताने का आरोप लगाया और कहा कि भारत पाकिस्तान पर दबाव बनाने की कोशिश करता है। हालांकि भारत इन सभी आरोपों को पहले ही सिरे से खारिज कर चुका है और उसका कहना है कि उसकी सभी कार्रवाइयां आतंकवाद के खिलाफ और आत्मरक्षा में होती हैं।

    भारत ने स्पष्ट किया है कि वह पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख जारी रखेगा। पिछले वर्षों में सीमा पार आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई को भारत अपनी सुरक्षा नीति का हिस्सा बताता रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • पाकिस्तान में खूनी आतंकी हमला: बन्नू पुलिस चौकी पर आत्मघाती विस्फोट, 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत

    पाकिस्तान में खूनी आतंकी हमला: बन्नू पुलिस चौकी पर आत्मघाती विस्फोट, 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में आतंकियों ने पुलिस चौकी पर बड़ा आत्मघाती हमला कर दिया। विस्फोटकों से भरी गाड़ी से किए गए धमाके और उसके बाद हुई भारी फायरिंग में कम से कम 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आतंकियों ने पहले विस्फोटकों से लदी गाड़ी को पुलिस पोस्ट की ओर बढ़ाया। सुरक्षा बलों ने जब वाहन को रोकने की कोशिश करते हुए फायरिंग की, तभी जोरदार धमाका हो गया। धमाका इतना भीषण था कि पुलिस चौकी की इमारत पूरी तरह तबाह हो गई और आसपास के कई घरों की छतें भी गिर गईं। कई सुरक्षाकर्मी मलबे में दब गए, जिन्हें बाद में रेस्क्यू टीमों ने बाहर निकाला।

    हमले के तुरंत बाद बड़ी संख्या में आतंकियों ने पुलिस पोस्ट पर धावा बोल दिया, जिसके बाद दोनों ओर से लंबे समय तक गोलीबारी चलती रही। इलाके को घेरकर सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कितने आतंकी मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं।

    खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायराना हरकत बताया है। उन्होंने घायलों के बेहतर इलाज और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

    गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में आतंकी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में दक्षिण वजीरिस्तान में भी सुरक्षा बलों ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी लेकर चेकपोस्ट की तरफ बढ़ रहे एक संदिग्ध आतंकी को मार गिराया था।

    हालिया हमले की जिम्मेदारी अभी किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन पाकिस्तान सरकार पहले भी प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर ऐसे हमलों के आरोप लगाती रही है। लगातार बढ़ते आतंकी हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और सरकार की आतंकवाद विरोधी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • ISIS कनेक्शन वाले परिवारों की ऑस्ट्रेलिया वापसी से हड़कंप, सीरिया कैंप से लौटे 13 लोग; सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    ISIS कनेक्शन वाले परिवारों की ऑस्ट्रेलिया वापसी से हड़कंप, सीरिया कैंप से लौटे 13 लोग; सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट




    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया में उस वक्त सुरक्षा एजेंसियां ​​सतर्क हो गई जब इस्लामिक स्टेट से कथित संबंध रखने वाली महिलाओं और बच्चों को लेकर दो फ्लाइट्स देश पहुंचीं। ये लोग कई वर्षों तक सीरिया के रेगिस्तानी कैंपों में रह रहे थे।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक विमान मेलबर्न पहुंचा, जिसमें तीन महिलाएं और आठ बच्चे सवार थे। वहीं दूसरी फ्लाइट सिडनी उतरी, जिसमें एक महिला और उसका बेटा मौजूद था। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने पुष्टि की है कि कुल 13 लोगों को वापस लाया गया है।

    महिलाओं पर हो सकती है जांच
    पुलिस अधिकारियों के अनुसार महिलाओं के खिलाफ संभावित आपराधिक जांच की जा सकती है। जांच इस बात को लेकर होगी कि उन्होंने आईएसआईएस  के कथित खिलाफत काल के दौरान सीरिया और इराक में क्या भूमिका थी।हालांकि अभी तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों फ्लाइट्स दोहा  से रवाना हुई थीं।

    सुरक्षा बनाम मानवाधिकार की बहस तेज
    इस वापसी के बाद ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक और सुरक्षा बहस तेज हो गई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित पुनर्वास और सामाजिक सहायता मिलनी चाहिए।

    वहीं सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि संभावित कट्टरपंथ और सुरक्षा जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी वजह से लौटने वाले सभी लोगों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में ISIS के कमजोर पड़ने के बाद कई देश अपने नागरिकों को वापस लाने की नीति पर काम कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ सुरक्षा चुनौतियां भी लगातार बनी हुई हैं।