Tag: Terrorism

  • पाकिस्तान को अल कायदा की सीधी धमकी, अफगानिस्तान मुद्दे पर आर्मी चीफ आसिम मुनीर निशाने पर

    पाकिस्तान को अल कायदा की सीधी धमकी, अफगानिस्तान मुद्दे पर आर्मी चीफ आसिम मुनीर निशाने पर


    नई दिल्ली ।
    आतंकवाद को लेकर लंबे समय से आलोचना झेल रहे पाकिस्तान के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। दुनिया के कुख्यात आतंकी संगठन अल कायदा ने पाकिस्तान की नेतृत्व व्यवस्था पर सीधा हमला बोलते हुए खुली चेतावनी दी है। संगठन ने खास तौर पर अफगानिस्तान के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान के रुख की कड़ी आलोचना की है और तालिबान के समर्थन का ऐलान किया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अल कायदा की केंद्रीय नेतृत्व की ओर से जारी यह संदेश शाहदा न्यूज एजेंसी के माध्यम से उसके मीडिया विंग ‘अस-सहब’ द्वारा गुप्त प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब इस्लामाबाद और काबुल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

    अपने बयान में संगठन ने पाकिस्तान की सिविल-मिलिट्री व्यवस्था को निशाना बनाते हुए आरोप लगाया कि वह अफगानिस्तान के हितों के खिलाफ काम कर रही है और पश्चिमी देशों के साथ गठजोड़ कर रही है। साथ ही, अल कायदा ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह अफगानिस्तान से दूरी बनाए रखे, वरना परिणाम गंभीर होंगे।

    आतंकी संगठन ने पाकिस्तानी जनता और सेना को भी भड़काने की कोशिश की। उसने लोगों से सरकार के आदेशों का पालन न करने और अपने एजेंडे के समर्थन की अपील की। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संदेशों के जरिए संगठन पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करना चाहता है और जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर लगातार अफगान तालिबान को चेतावनी देते रहे हैं। वहीं, तालिबान और पाकिस्तान के बीच हाल के महीनों में तनाव बढ़ा है।

    दरअसल, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर कई बार हवाई हमले किए हैं, जबकि तालिबान ने जवाबी कार्रवाई में डूरंड लाइन के पास पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को निशाना बनाया है। अफगानिस्तान डूरंड लाइन को मान्यता नहीं देता, जबकि पाकिस्तान वहां बाड़बंदी कर घुसपैठ रोकने की कोशिश कर रहा है।

  • अंडरग्राउंड हुआ आतंकी सरगना? मसूद अजहर की हालत और ठिकाने पर उठे सवाल..

    अंडरग्राउंड हुआ आतंकी सरगना? मसूद अजहर की हालत और ठिकाने पर उठे सवाल..


    नई दिल्ली। पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed के सरगना Masood Azhar को लेकर इस समय कई तरह की अटकलें और चर्चाएं सामने आ रही हैं। लंबे समय से सार्वजनिक रूप से नजर न आने के कारण उसके स्वास्थ्य और वर्तमान स्थिति को लेकर संगठन के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं, जिससे असमंजस का माहौल बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार, संगठन के भीतर यह चर्चा तेज है कि मसूद अजहर की तबीयत ठीक नहीं है और वह लंबे समय से सक्रिय रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि, कुछ आकलन यह भी बताते हैं कि उसकी स्थिति को लेकर जानबूझकर जानकारी छिपाई जा रही है, ताकि संगठन के भीतर मनोबल पर असर न पड़े बताया जा रहा है कि पहले जहां वह नियमित रूप से अपने कैडरों को संबोधित करता था और गतिविधियों में सक्रिय रहता था, वहीं अब उसकी सार्वजनिक उपस्थिति लगभग समाप्त हो चुकी है। इससे संगठन के अंदर भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई है।

    खुफिया आकलनों में यह भी संकेत मिलता है कि हाल की घटनाओं और आंतरिक दबावों के कारण उसका प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    इसी बीच यह भी कहा जा रहा है कि संगठन अब संभावित रूप से नए नेतृत्व की तैयारी कर रहा है, क्योंकि मौजूदा हालात में निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे पुराने और नए सदस्यों के बीच अनिश्चितता और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

    अब तक मसूद अजहर की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है, और पूरा मामला रहस्य बना हुआ है। इसी वजह से उसके भविष्य और संगठन में उसकी भूमिका को लेकर लगातार अटकलें जारी हैं।

  • जंग की 9वीं सुबह: मासूमों की मौत, शहरों में तबाही और दुनिया में विरोध-समर्थन की लहर

    जंग की 9वीं सुबह: मासूमों की मौत, शहरों में तबाही और दुनिया में विरोध-समर्थन की लहर


    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष का रविवार को नौवां दिन है। इस जंग ने ईरान के कई शहरों को तबाह कर दिया है और अब तक 1,400 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। घरों और मोहल्लों में मलबा सड़कों पर खून और अस्पतालों में घायल लोग इस जंग की भयावहता बयान कर रहे हैं।

    तेहरान में हेल्थ केयर वर्कर्स ने गांधी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया जहां हाल ही में एयर स्ट्राइक हुई थी। अस्पताल परिसर में ईरान का झंडा लहराते हुए लोग घायल मरीजों और खोए हुए लोगों की याद में खड़े थे। इसी बीच जैनब साहेबी नाम की एक मासूम बच्ची की कब्र को फूलों से सजाया गया और उस पर ईरान का झंडा रखा गया। महिलाएं उसकी कब्र तक उसका शव लेकर गईं हर कदम पर मातम और दर्द नजर आ रहा था।

    शहरों में फैली तबाही ने लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। आपातकालीन केंद्रों और राहत शिविरों में लोग पानी भोजन और दवाइयों के लिए इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों ने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह से खो दी है कई बच्चों की पढ़ाई और भविष्य अस्थायी तौर पर थम गया है।

    दुनिया भर में इस जंग के खिलाफ और समर्थन में प्रदर्शन हुए। ब्रिटेन में शनिवार को ईरान समर्थक और अमेरिका समर्थक दोनों ही समूहों ने मार्च निकाला। विरोध-समर्थन के ये विरोध मार्च वैश्विक स्तर पर इस जंग के राजनीतिक और सामाजिक असर को दर्शा रहे हैं। साथ ही लेबनान में भी इजराइल और ईरान समर्थक ग्रुप हिज़बुल्लाह के बीच हिंसक टकराव जारी है। शहरों में धमाके हवाई हमले और सड़क संघर्ष ने आम नागरिकों की जिंदगी को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है।

    इन हालातों के बीच बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों की कहानियां सबसे ज्यादा दिल दहला रही हैं। जैनब साहेबी की तस्वीरें घायल मरीज बिखरी हुई सड़कें और मलबे में फंसे लोग इस जंग की भयंकर तस्वीर पेश कर रहे हैं। वैश्विक समुदाय की नजरें ईरान अमेरिका और इजराइल के राजनीतिक फैसलों पर टिकी हुई हैं। राहत कार्य मानवाधिकार संगठन और स्वास्थ्य कर्मचारी लगातार संघर्षरत नागरिकों की मदद में जुटे हैं लेकिन जंग की भयावहता के बीच राहत की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण है।

  • भारत-ब्राजील के बीच हुई ट्रेड डील, पीएम मोदी ने कहा- ‘आतंकवाद और विकास के मुद्दों पर दोनों देश साथ हैं’

    भारत-ब्राजील के बीच हुई ट्रेड डील, पीएम मोदी ने कहा- ‘आतंकवाद और विकास के मुद्दों पर दोनों देश साथ हैं’


    नई दिल्ली । भारत और ब्राजील ने अपने द्विपक्षीय संबंधों में नया मुकाम हासिल किया है। दोनों देशों ने ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा की द्विपक्षीय वार्ता के बाद औपचारिक रूप दिया गया।

    पीएम मोदी ने राष्ट्रपति लूला और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और विजन ने भारत-ब्राजील संबंधों को लंबे समय से मजबूती दी है। मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों में हुई कई बैठकों ने भारत के प्रति राष्ट्रपति लूला की गहरी मित्रता और भरोसा स्पष्ट किया है।

    व्यापार को 20 अरब डॉलर से आगे ले जाने का लक्ष्य
    प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि ब्राजील लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साथी है। दोनों देश अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर से ऊपर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, “हमारा व्यापार सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि आपसी भरोसे की झलक में भी निहित है। राष्ट्रपति लूला के साथ आया बिजनेस डेलीगेशन इसी भरोसे को दर्शाता है।”

    टेक्नोलॉजी और ग्लोबल साउथ पर ध्यान
    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग न केवल भारत और ब्राजील के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी नई संभावनाएं खोलेगा। AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम में साझेदारी से विकासशील देशों को तेजी से विकास का मार्ग मिल सकता है।

  • आतंकवाद के मुद्दे पर मिला इस देश का साथ … PM मोदी बोले- भारत का संदेश स्पष्ट

    आतंकवाद के मुद्दे पर मिला इस देश का साथ … PM मोदी बोले- भारत का संदेश स्पष्ट

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने रविवार को कहा कि आतंकवाद (Terrorism) के मुद्दे पर भारत (Indore) का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। भारत इस मुद्दे पर न तो दोहरे मापदंड अपनाता है और न ही किसी तरह का समझौता करता है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (Malaysian Prime Minister Anwar Ibrahim) के साथ बैठक के बाद उन्होंने यह बात कही। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने सीमापार आतंकवाद की कड़ी निंदा की।

    दोनों ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाने और इससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयासों पर जोर दिया। दोनों ने आतंक के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने और नई तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।

    मलेशिया दौरे के आखिरी दिन विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों से मुलाकात के बाद PM मोदी ने कहा, भारत और मलेशिया के बीच विशेष संबंध हैं और दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष आतंकवाद और खुफिया क्षेत्र में सहयोग एवं समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तालमेल मजबूत करेंगे। साथ ही रक्षा सहयोग को भी और व्यापक बनाया जाएगा। PM मोदी ने कहा कि AI और डिजिटल तकनीक के साथ सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाया जाएगा।

    PM मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र दुनिया की विकास धुरी के रूप में उभर रहा है और भारत आसियान देशों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मलेशियाई प्रधानमंत्री इब्राहिम ने कहा कि भारत और मलेशिया व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और रक्षा सहयोग को लगातार विस्तार दे रहे हैं। उन्होंने वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत की तेज प्रगति की सराहना की।


    उद्योगपतियों से मुलाकात की

    PM मोदी ने मलेशिया के चार प्रमुख उद्योगपतियों से मुलाकात कर भारतीय अर्थव्यवस्था में उनकी बढ़ती दिलचस्पी की सराहना की। प्रधानमंत्री ने भारत और मलेशिया के बीच बढ़ते कारोबारी रिश्तों को सकारात्मक बताया और कहा कि भारतीय विकास यात्रा में मलेशियाई कंपनियों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने पेट्रोनास के प्रमुख तेंगकु मोहम्मद तौफिक, बरजाया कॉरपोरेशन के संस्थापक विंसेंट टैन, खजानाह नेशनल के प्रबंध निदेशक अमीरुल फैसल वान जाहिर और फिसन इलेक्ट्रॉनिक्स के संस्थापक पुआ खेन सेंग से अलग-अलग मुलाकात की।


    भारतीय मूल के नेताओं से मिले

    PM मोदी ने भारतीय मूल के मंत्रियों, सांसदों, सीनेटरों से मुलाकात की और भारत-मलेशिया संबंध मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की। PM मोदी ने कहा कि इन नेताओं का भारत से भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट दिखता है और सार्वजनिक जीवन में उनकी उपलब्धियां गर्व की बात हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की भागीदारी भारत-मलेशिया मित्रता के समर्थन को दर्शाती है।


    भारत-मलेशिया को जोड़ती है तमिल

    PM मोदी ने कहा, भारत और मलेशिया तमिल भाषा के प्रति साझा लगाव से जुड़े हुए हैं। मलेशिया में तमिल की मजबूत मौजूदगी शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक जीवन में साफ दिखाई देती है। मलेशिया में भारतीय मूल के करीब 30 लाख लोग रहते हैं, जो दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी है। इनमें बड़ी संख्या तमिल मूल के लोगों की है।


    आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिक से मिले

    PM मोदी आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिक जयराज राजा राव से भी मिले। उन्होंने उनके साहस, विरासत और बलिदान के लिए देशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज के वीरों का साहस भारत की नियति को आकार देने में अहम रहा। राव से मिलना बहुत विशेष रहा और उनके अनुभव बेहद प्रेरणादायक हैं।


    ‘इब्राहिम भी एमजीआर के बड़े प्रशंसक’

    PM मोदी ने कहा कि उनके मलेशियाई समकक्ष अनवर इब्राहिम भी तमिल अभिनेता और पूर्व मुख्यमंत्री एमजीआर के बड़े प्रशंसक हैं। उन्होंने यह टिप्पणी तब की जब इब्राहिम द्वारा आयोजित लंच के दौरान एमजीआर की फिल्म नालै नमथे का गीत प्रस्तुत किया गया। एमजीआर यानी मरुथुर गोपालन रामचंद्रन प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और निर्माता रहे हैं। उन्होंने तमिलनाडु में एआईएडीएमके की स्थापना की और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री बने। 1975 में रिलीज हुई नालै नमथे उनकी लोकप्रिय फिल्मों में शामिल है।

  • ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारत-पाकिस्तान बहस वीरांश भानुशाली की तीखी दलीलें और पाकिस्तान के खिलाफ कटाक्ष

    ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारत-पाकिस्तान बहस वीरांश भानुशाली की तीखी दलीलें और पाकिस्तान के खिलाफ कटाक्ष


    नई दिल्ली । ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारत और पाकिस्तान के बीच आयोजित एक बहस में विवादित बयानों और आरोपों का सिलसिला चल पड़ा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बेटे मूसा हर्राज पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर एक विशेषज्ञों वाली बहस को विफल किया और पाकिस्तान की जीत का दावा किया। इस विवाद के बीच भारतीय छात्र वीरांश भानुशाली ने पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और आतंकवाद के मुद्दे पर तीखा हमला बोला।

    वीरांश भानुशाली ने बहस की शुरुआत 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की यादों से की। उन्होंने बताया कि कैसे उनका परिवार और पूरा मुंबई उन तीन रातों में दहशत के साए में जी रहा था। भानुशाली ने कहा “1993 में मुंबई में हुए बम धमाके मेरे घर से महज 200 मीटर दूर हुए थे। मैं आतंकवाद की छाया में बड़ा हुआ हूं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत लोकलुभावन नीति अपनाता तो 26/11 के बाद ही युद्ध छेड़ देता लेकिन भारत ने संयम दिखाया और कूटनीति का रास्ता अपनाया।

    भारत की सुरक्षा नीति को चुनावी राजनीति से जोड़ने पर भानुशाली ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा “क्या हर आतंकी हमले के पीछे चुनाव था नहीं। आतंकवाद वोट के लिए नहीं आता वह इसलिए आता है क्योंकि पाकिस्तान से उसे संरक्षण मिलता है। भानुशाली ने पाकिस्तान पर हमला करते हुए कहा भारत जब कार्रवाई करता है तो पायलटों की डी-ब्रीफिंग होती है जबकि पाकिस्तान में गीतों की ऑटो-ट्यूनिंग होती है। जब आप अपने लोगों को रोटी नहीं दे सकते तो युद्ध का सर्कस दिखाते हैं।

    यह बहस इस बात का उदाहरण बन गई कि आतंकवाद और सुरक्षा नीति पर भारत और पाकिस्तान के दृष्टिकोण में गहरी खाई है। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को विदेश नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आलोचना करते हुए भानुशाली ने साफ कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता भी नहीं करेगा। इस दौरान भारतीय वक्ताओं जे साई दीपक और प्रियंका चतुर्वेदी ने भी खुलासा किया कि उन्हें आखिरी समय पर जानकारी देकर जानबूझकर बहस से रोका गया। हालांकि इस बहस का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और वीरांश भानुशाली की दलीलों को व्यापक समर्थन मिल रहा है।

  • लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं

    लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं


    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

    अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
    भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी

    पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तालिबान सरकार अब इस्लामाबाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा डिप्लोमैटिक अभियान शुरू करने की तैयारी में है। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान उसकी सीमा के भीतर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए सैन्य हमले कर रहा है और आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। इसी को लेकर तालिबान प्रशासन दुनिया के अलग-अलग देशों में अपने प्रतिनिधि भेजने की योजना बना रहा है।

    तालिबान की ओर से तैयार किए गए एक विस्तृत डोजियर में पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने, मानवाधिकारों के उल्लंघन और अफगान नागरिकों व शरणार्थियों पर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस डोजियर में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान आर्थिक दबाव और जबरन निर्वासन के जरिए अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने मिलकर यह दस्तावेज तैयार किया है, जिसे तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा की मंजूरी के बाद प्रभावशाली और पड़ोसी देशों को सौंपा जाएगा। इसमें पाकिस्तान को “आतंकवादियों के लिए सुविधा केंद्र” बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ISIS और अन्य आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता दे रही हैं।

    अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों का इस्तेमाल अफगानिस्तान, भारत और ईरान जैसे देशों को अस्थिर करने के लिए कर रहा है और उसके पास इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार अफगान तालिबान पर टीटीपी को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा बंद है और हाल के महीनों में तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है।

    इस डिप्लोमैटिक अभियान के जरिए तालिबान का उद्देश्य पाकिस्तान की कथित नीतियों को वैश्विक मंच पर उजागर करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचना बताया जा रहा है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संसद भवन पर आतंकी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संसद भवन पर आतंकी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी


    मध्य प्रदेश/3 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुआ आतंकी हमला भारतीय लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला था, जिसमें आतंकियों ने संसद भवन में घुसने का प्रयास किया और भारी गोलाबारी शुरू कर दी। इस हमले में सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। कई जवानों ने अपनी जान की आहुति देकर संसद भवन और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित किया।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह घटना भारतीय इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद की जाती है। डॉ. यादव ने यह भी कहा कि आतंकवाद का सामना करते हुए हमारे वीर जवानों ने न केवल अपने प्राणों की आहुति दी, बल्कि देश के स्वाभिमान की रक्षा भी की। यह बलिदान देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे पराक्रमी जवानों ने उस समय आतंकवादियों को कड़ी टक्कर दी और आतंकियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। आज पूरा देश उन जवानों की वीरता को याद कर रहा है। यह घटना हम सभी को यह याद दिलाती है कि देश की रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों के जवान अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटते।
    शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके साहस और बलिदान को नमन किया और कहा कि उनका योगदान देश के लिए अविस्मरणीय है। “हम सभी शहीदों की वीरता को सलाम करते हैं, और उनकी बलिदान की भावना को अपने दिलों में हमेशा जिंदा रखते हैं।”
    यह हमला उस समय हुआ था जब संसद में एक सत्र चल रहा था और इसमें कई महत्वपूर्ण नेता उपस्थित थे। आतंकवादियों का मकसद संसद में घुसकर बड़े पैमाने पर आतंक फैलाना था, लेकिन सुरक्षा बलों की तत्परता और साहस ने उन्हें नाकाम कर दिया। इस हमले में 9 सुरक्षा कर्मी और 5 आतंकवादी मारे गए थे, जिनमें से कई जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह शहीद जवानों के परिवारों के लिए सबसे कठिन समय था, और उनके परिवारों का संघर्ष और बलिदान भी कभी भुलाया नहीं जाएगा। उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की और कहा कि राज्य सरकार हर संभव मदद देने के लिए तत्पर है।
    आज पूरा देश उन जवानों की वीरता को याद कर रहा है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें सुरक्षा प्रदान की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लिया और कहा कि हम सभी को इस प्रकार के हमलों को नाकाम करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

  • जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग में तेजी से बढ़ रही भर्ती, मसूद अजहर ने दिए कई खुलासे

    जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग में तेजी से बढ़ रही भर्ती, मसूद अजहर ने दिए कई खुलासे


    नई दिल्ली। बीते मई में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारी नुकसान झेलने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर ने हाल ही में संगठन की महिला विंग के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मसूद अजहर ने दावा किया है कि संगठन की महिला विंग में अब तक लगभग पांच हजार महिलाएं शामिल हो चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इन महिलाओं को कथित तौर पर आत्मघाती हमलों के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    पिछले साल अक्टूबर में मसूद अजहर ने जैश की महिला ब्रिगेड की घोषणा की थी, जिसे जमात-उल-मोमिनात नाम दिया गया। इस महिला ब्रिगेड की जिम्मेदारी मसूद अजहर की बहन सईदा संभाल रही हैं। मसूद अजहर ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि जमात-उल-मोमिनात का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और संगठन की रणनीति में इसका अहम स्थान है।

    मसूद अजहर ने बताया कि महिला विंग की गतिविधियों को और व्यवस्थित करने के लिए पाक अधिकृत कश्मीर के विभिन्न जिलों में इसका विस्तार किया जा रहा है। उनका कहना है कि हर जिले में एक महिला प्रमुख, जिसे मुंतजिमा कहा जाएगा, नियुक्त की जाएगी। यह प्रमुख स्थानीय स्तर पर महिला विंग की गतिविधियों की निगरानी करेगी और भर्ती एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालित करेगी।

    महिला विंग की भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए संगठन ने ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी शुरू किया है। इसे ‘तुफात अल-मुमिनात’ नाम दिया गया है। इस ऑनलाइन कोर्स के तहत महिलाओं को जिहादी विचारधारा और फिदायीन हमलों के लिए मानसिक और शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है। हर महिला के लिए इस कोर्स की फीस 500 रुपये रखी गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में चरमपंथी समूह महिलाओं का अकेले बाहर जाना मंजूर नहीं करते, इसलिए जैश-ए-मोहम्मद अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर महिलाओं की भर्ती और प्रशिक्षण कर रहा है। संगठन का उद्देश्य आईएसआईएस, हमास और लिट्टे जैसी अंतरराष्ट्रीय आतंकी संस्थाओं की तर्ज पर महिला आतंकी ब्रिगेड तैयार करना और उन्हें आत्मघाती हमलों में इस्तेमाल करना है।

    मसूद अजहर के खुलासों से यह स्पष्ट होता है कि जैश-ए-मोहम्मद अपने संगठन को पुनः संगठित करने और महिला आतंकियों के माध्यम से नई रणनीतियों को लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत महिलाओं को सक्रिय रूप से आतंकी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि महिला विंग की इस तरह की विस्तार योजना खतरे को और बढ़ा सकती है। महिलाओं के प्रशिक्षण और भर्ती के ऑनलाइन कार्यक्रम से संगठन न केवल अपनी पहुंच को बढ़ा रहा है, बल्कि उन्हें फिदायीन हमलों के लिए तैयार भी कर रहा है। यह कदम आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों के लिए नए खतरे पैदा कर सकता है।

    जैश-ए-मोहम्मद की इस नई रणनीति ने न केवल भारत बल्कि पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात पर विशेष ध्यान देना होगा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाएं कैसे आतंकवाद में शामिल हो रही हैं और उनका प्रशिक्षण किस हद तक जा रहा है।

    अंततः, मसूद अजहर द्वारा किए गए खुलासे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद अपनी महिला विंग के माध्यम से संगठन की ताकत बढ़ाने और नई रणनीतियों को लागू करने में जुटा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चुनौती पेश कर सकता है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सतर्कता की आवश्यकता है।