Tag: Thalapathy Vijay

  • विजय-संगीता की कहानी में आया बड़ा ट्विस्ट, 27 साल बाद तलाक की नौबत और फिर अचानक बदल गया फैसला

    विजय-संगीता की कहानी में आया बड़ा ट्विस्ट, 27 साल बाद तलाक की नौबत और फिर अचानक बदल गया फैसला


    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी पत्नी संगीता सोर्नलिंगम की ओर से तलाक की याचिका दायर किए जाने और फिर अचानक उसे वापस लिए जाने की खबर ने फैंस के बीच चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। करीब 27 साल पुराने इस रिश्ते की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक समय विजय की फैन बनकर उनसे मिलने पहुंचीं संगीता धीरे धीरे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बनीं और दोनों ने परिवार की सहमति से शादी कर ली। लेकिन कई साल बाद रिश्ते में आई दरार और तलाक की कानूनी प्रक्रिया ने सबको हैरान कर दिया। अब याचिका वापस लिए जाने के बाद इस कहानी में एक नया मोड़ आ गया है।

    संगीता सोर्नलिंगम श्रीलंका के एक तमिल कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं और लंबे समय तक ब्रिटेन में रही हैं। बताया जाता है कि वह विजय की बड़ी प्रशंसक थीं। साल 1996 में विजय की फिल्म पूवे उनाक्कागा को जबरदस्त सफलता मिली तो संगीता उनसे मिलने भारत पहुंचीं। वह विजय की शूटिंग लोकेशन पर पहुंचीं और अभिनेता से मुलाकात कर उन्हें फिल्म की सफलता के लिए बधाई दी। विजय को संगीता का सहज स्वभाव और तमिल सिनेमा के प्रति उनका लगाव पसंद आया। इसके बाद विजय ने उन्हें अपने घर आने और परिवार से मिलने का न्योता दिया। यहीं से दोनों के रिश्ते की शुरुआत हुई और धीरे धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया।

    विजय के माता पिता निर्देशक एसए चंद्रशेखर और गायिका शोभा चंद्रशेखर को भी संगीता पसंद आईं। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत आगे बढ़ी और शादी का फैसला हुआ। रिपोर्टों के अनुसार दोनों ने 1998 में लंदन में अपनी शादी रजिस्टर कराई। इसके बाद 1999 में चेन्नई के राजाह मुथैया हॉल में पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ दोनों विवाह बंधन में बंधे। शादी के बाद दोनों ने परिवार और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए रिसेप्शन भी आयोजित किया। विजय और संगीता के दो बच्चे हैं। उनके बेटे का नाम जेसन संजय और बेटी का नाम दिव्या साशा है।

    करीब ढाई दशक तक साथ रहने के बाद फरवरी 2026 में संगीता की ओर से विजय से तलाक लेने की याचिका दायर किए जाने की खबर सामने आई। रिपोर्टों में दावा किया गया कि याचिका में विजय पर विवाहेतर संबंधों से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। बताया गया कि संगीता को कथित तौर पर अप्रैल 2021 में इस बारे में जानकारी मिली थी। हालांकि इन निजी आरोपों को लेकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित रही है। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों के बीच लंबे समय से दूरी बनी हुई थी और बाद में मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचा।

    लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट 7 अगस्त 2026 को आया जब संगीता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होकर अपनी तलाक याचिका वापस ले ली। बताया गया कि अदालत में करीब 15 मिनट की कार्यवाही के बाद मामले को बंद कर दिया गया। तलाक की अर्जी वापस लेने के बाद अब विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि दोनों की ओर से अपने रिश्ते की मौजूदा स्थिति को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    विजय और संगीता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी शुरुआत एक फैन और सुपरस्टार की मुलाकात से हुई थी। एक छोटी सी मुलाकात प्यार में बदली और फिर दोनों ने परिवार की सहमति से जिंदगी साथ बिताने का फैसला किया। 27 साल बाद तलाक की अर्जी ने इस रिश्ते को फिर सुर्खियों में ला दिया लेकिन याचिका वापस लिए जाने के बाद कहानी एक बार फिर अधूरी तस्वीर जैसी नजर आ रही है। अब फैंस की नजर इस बात पर है कि विजय और संगीता आने वाले समय में अपने रिश्ते को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।

  • राजनीति में नया चेहरा, सबसे ज्यादा दौलत थलपति विजय के पास, लेकिन पढ़ाई में पीछे रह गए सभी सीएम

    राजनीति में नया चेहरा, सबसे ज्यादा दौलत थलपति विजय के पास, लेकिन पढ़ाई में पीछे रह गए सभी सीएम


    नई दिल्ली ।भारतीय राजनीति में हाल ही में हुए चुनावों के बाद पांच अलग-अलग राज्यों में नए नेतृत्व की तस्वीर सामने आई है, जिसमें फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए Thalapathy Vijay सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थलपति विजय ने न केवल अपनी राजनीतिक जीत से सबको चौंकाया है, बल्कि संपत्ति के मामले में भी वह इन पांचों मुख्यमंत्रियों में सबसे आगे निकल गए हैं। उनके साथ पश्चिम बंगाल के नेता Shubhendu Adhikari, असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma, केरल के नेता वीडी सतीशन और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी की तुलना ने एक दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर पेश की है, जिसमें संपत्ति, शिक्षा और आपराधिक मामलों के आधार पर स्पष्ट अंतर देखने को मिला है।

    थलपति विजय की सबसे बड़ी पहचान उनकी लोकप्रियता और फिल्मी करियर रही है, लेकिन अब राजनीति में भी उन्होंने मजबूत पकड़ बना ली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनके पास करीब 648.85 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई जाती है, जो इस सूची में शामिल सभी मुख्यमंत्रियों में सबसे अधिक है। शिक्षा के मामले में वह 12वीं पास हैं, जो इस तुलना में उन्हें सबसे कम शैक्षणिक योग्यता वाले नेता के रूप में दर्शाता है। हालांकि उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या सीमित बताई जाती है, लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा ने उन्हें बेहद तेज़ी से एक बड़े नेता के रूप में स्थापित कर दिया है।

    पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर भी काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कांग्रेस और तृणमूल जैसे दलों से होते हुए उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और बाद में सत्ता की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी संपत्ति अन्य नेताओं की तुलना में काफी कम बताई जाती है, लेकिन उनके खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की चर्चा है, जो उन्हें विवादों के घेरे में भी रखता है।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इस सूची में सबसे अधिक शिक्षित नेता के रूप में सामने आते हैं। डॉक्टरेट की डिग्री रखने वाले हिमंत का राजनीतिक अनुभव भी लंबा रहा है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक का सफर तय किया है। उनकी संपत्ति मध्यम स्तर पर बताई जाती है और उनके खिलाफ किसी प्रकार के आपराधिक मामलों की अनुपस्थिति उन्हें एक अलग छवि प्रदान करती है।

    केरल के नेता वीडी सतीशन का पेशेवर पृष्ठभूमि वकालत से जुड़ा रहा है। उनकी संपत्ति इन सभी नेताओं में सबसे कम मानी जाती है, जबकि उनके खिलाफ कई कानूनी मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आती है। इसके बावजूद वे लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और कांग्रेस संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

    पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी इस सूची में सबसे अनुभवी नेता के रूप में देखे जाते हैं। कई बार मुख्यमंत्री रह चुके रंगास्वामी की छवि एक स्थिर और अनुभवी नेतृत्व की रही है। उनकी संपत्ति मध्यम स्तर की बताई जाती है और उनके खिलाफ किसी प्रकार के आपराधिक मामलों का उल्लेख नहीं मिलता, जो उन्हें एक साफ छवि वाला नेता बनाता है।

    इन पांचों नेताओं की तुलना से यह साफ होता है कि भारतीय राजनीति में नेतृत्व केवल लोकप्रियता या अनुभव पर ही नहीं, बल्कि संपत्ति, शिक्षा और छवि जैसे कई पहलुओं पर भी निर्भर करता है। थलपति विजय का सबसे अमीर होना, हिमंत बिस्वा सरमा का सबसे शिक्षित होना और अन्य नेताओं की अलग-अलग विशेषताएं मिलकर यह दिखाती हैं कि राजनीतिक नेतृत्व की तस्वीर कितनी विविध और जटिल हो चुकी है।

  • प्रभाकरन पर बयान से बढ़ा राजनीतिक टकराव, विजय के समर्थन में राहुल गांधी पर तीखे हमले

    प्रभाकरन पर बयान से बढ़ा राजनीतिक टकराव, विजय के समर्थन में राहुल गांधी पर तीखे हमले


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है, जब LTTE प्रमुख वी. प्रभाकरन को लेकर दिए गए एक बयान और श्रद्धांजलि ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया। यह मामला केवल राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली की राजनीति तक इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जिससे सियासी तनाव और बढ़ गया है।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब तमिलनाडु के एक प्रमुख नेता ने प्रभाकरन को लेकर टिप्पणी करते हुए उनके संघर्ष और तमिल समुदाय के मुद्दों का जिक्र किया। इस बयान के बाद राजनीतिक विरोधियों ने इसे गंभीर मुद्दा बनाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। कहा जा रहा है कि इस टिप्पणी ने पुराने विवादों को फिर से हवा दे दी है, जिनमें LTTE की भूमिका और उसके हिंसक इतिहास को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

    भारतीय राजनीति में इस मुद्दे के आने के बाद बहस और तेज हो गई, जब विपक्षी दलों ने इस बयान को लेकर सख्त रुख अपनाया। आरोप लगाए गए कि ऐसे बयान इतिहास के संवेदनशील अध्यायों को फिर से विवादों में ला रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि इससे राजनीतिक रिश्तों और सार्वजनिक विमर्श पर असर पड़ सकता है।

    इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया, जब विपक्षी दलों ने उन पर तीखे आरोप लगाए। उनका कहना था कि राजनीतिक समर्थन और मेलजोल के संदर्भ में ऐसे मुद्दों पर और अधिक स्पष्टता की जरूरत है, क्योंकि यह मामला एक ऐसे संगठन से जुड़ा है जिसे भारत में प्रतिबंधित किया गया है। इस बयान के बाद राजनीतिक तापमान और बढ़ गया।

    LTTE और उसके संस्थापक वी. प्रभाकरन का इतिहास श्रीलंका के गृहयुद्ध से जुड़ा हुआ है, जो दशकों तक चला और हजारों लोगों की जान गई। संगठन पर कई गंभीर आरोप रहे हैं और भारत में भी इसे प्रतिबंधित किया गया है। 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या से जुड़े मामले में भी इस संगठन का नाम सामने आया था, जिसके कारण यह विषय हमेशा संवेदनशील माना जाता रहा है।

    इसी पृष्ठभूमि के कारण जब भी प्रभाकरन या LTTE का जिक्र राजनीतिक मंचों पर होता है, तो विवाद तेज हो जाता है। इस बार भी वही स्थिति देखने को मिली, जब एक श्रद्धांजलि और बयान ने राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की नई लहर पैदा कर दी।

    वहीं समर्थकों का कहना है कि यह बयान तमिल समुदाय के ऐतिहासिक दर्द और उनके अधिकारों से जुड़ा है, जिसे केवल एक राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस मुद्दे को भावनात्मक और ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की जरूरत है।

  • पहली बड़ी परीक्षा में सफल हुए थलापति विजय, TVK ने गठबंधन के दम पर हासिल किया बहुमत

    पहली बड़ी परीक्षा में सफल हुए थलापति विजय, TVK ने गठबंधन के दम पर हासिल किया बहुमत


    नई दिल्ली ।तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम यानी TVK ने अपनी पहली बड़ी परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली है। लंबे समय से जिस फ्लोर टेस्ट को लेकर राजनीतिक हलचल बनी हुई थी, उसका परिणाम अब सामने आ चुका है और TVK ने 144 विधायकों के समर्थन के साथ बहुमत हासिल कर लिया है।

    यह पूरा घटनाक्रम राज्य की सत्ता समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 सदस्यीय सदन में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का दर्जा हासिल किया था, लेकिन पूर्ण बहुमत से थोड़ी दूरी पर रह गई थी। इसके बाद गठबंधन की राजनीति ने अहम भूमिका निभाई और कई सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार गठन की स्थिति बनी।

    फ्लोर टेस्ट के दौरान विधानसभा में राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। सत्ता पक्ष ने अपने समर्थन को मजबूत करते हुए सदन में संख्या बल साबित करने की कोशिश की, वहीं विपक्ष ने सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए। मतदान प्रक्रिया के दौरान कई अहम मोड़ देखने को मिले, जहां कुछ विधायकों के समर्थन ने समीकरण बदल दिए और TVK को स्पष्ट बढ़त मिल गई।

    वोटिंग के अंत में TVK को कुल 144 विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक था। इस समर्थन में विभिन्न दलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जिसने सरकार की स्थिति को मजबूत किया। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने मतदान से दूरी बनाने का निर्णय लिया, जिससे राजनीतिक स्थिति और भी दिलचस्प बन गई।

    मुख्यमंत्री थलापति विजय ने सदन में अपने संबोधन में सहयोगी दलों का आभार जताया और कहा कि उनकी सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से काम करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों और प्रशासनिक स्थिरता को बनाए रखना है।

    इस परिणाम के साथ थलापति विजय ने राजनीति में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है। फिल्मी पर्दे पर सफलता के बाद अब राजनीतिक मंच पर उनकी यह जीत उनके करियर का एक नया अध्याय मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि TVK सरकार इस समर्थन को कितनी मजबूती से बनाए रखती है और राज्य की राजनीति में कितना प्रभाव डालती है।

  • CM बनने की चर्चा के बीच बड़ा धमाका: क्या रिलीज होगी विजय की ‘जना नायकन’?

    CM बनने की चर्चा के बीच बड़ा धमाका: क्या रिलीज होगी विजय की ‘जना नायकन’?


    नई दिल्ली। तमिल सुपरस्टार और राजनीतिक पारी की ओर बढ़ रहे विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। अब इस इंतजार पर जल्द ही विराम लग सकता है।
    फिल्म के प्रोड्यूसर वेंकट के नारायण ने संकेत दिया है कि अगर सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो फिल्म अगले 14 दिनों के भीतर सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है।

     CBFC प्रक्रिया में अंतिम चरण, तेजी से हो रहा काम
    प्रोड्यूसर के अनुसार फिल्म फिलहाल सेंसर सर्टिफिकेशन (CBFC) की अंतिम प्रक्रिया में है।
    टीम लगातार बोर्ड के संपर्क में है ताकि सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी की जा सकें। निर्माताओं का कहना है कि वे फिल्म को जल्द से जल्द दर्शकों तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


    विजय की राजनीतिक पारी और फिल्म का खास कनेक्श
    फिल्म ‘जन नायकन’ सिर्फ एक एंटरटेनमेंट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि विजय के राजनीतिक सफर से भी जुड़ी मानी जा रही है। प्रोड्यूसर के मुताबिक, फिल्म का टाइटल “जनता का नायक” उनके वास्तविक जीवन और तमिलनाडु की राजनीति में उनकी नई भूमिका से मेल खाता है। इसी वजह से इसे उनकी राजनीति में सक्रिय होने से पहले आखिरी फिल्म भी माना जा रहा है।

    सेट पर विजय की अनुशासन की तारीफ
    प्रोड्यूसर वेंकट के नारायण ने विजय के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि विजय बेहद अनुशासित और कमिटेड अभिनेता हैं, जो अपने हर वादे को पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं। फिल्म की शूटिंग के दौरान उनका प्रोफेशनल रवैया टीम के लिए प्रेरणादायक रहा।

    लीक विवाद और चुनौतियों के बावजूद मजबूत टीम
    फिल्म का सफर आसान नहीं रहा। पिछले समय में इसे ऑनलाइन लीक होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। इसके बावजूद फिल्म की टीम ने हार नहीं मानी और अब पूरी फोकस ग्रैंड थिएट्रिकल रिलीज पर है।

    ‘जन नायकन’ को लेकर बनी हलचल साफ दिखाती है कि यह फिल्म सिर्फ एक रिलीज नहीं, बल्कि विजय के करियर और राजनीतिक सफर का अहम मोड़ मानी जा रही है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगले 2 हफ्तों में यह फिल्म बड़े पर्दे पर धमाका कर सकती है।

  • तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में लंबे इंतजार और गहन राजनीतिक हलचलों के बाद आखिरकार वह क्षण आ गया जिसने राज्य की सत्ता संरचना को नया रूप दे दिया। चेन्नई में आयोजित एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह में लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने Thalapathy Vijay ने आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस घटना को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां परंपरागत राजनीतिक ढांचे से बाहर निकलकर एक नए नेतृत्व ने जिम्मेदारी संभाली है।

    इस समारोह की खास बात यह रही कि इसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख राजनीतिक नेता भी शामिल हुए। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कार्यक्रम में मौजूद रहकर नई सरकार को शुभकामनाएं दीं और इसे जनता की बदलती सोच का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने इस बार नई पीढ़ी, नए विचार और नई राजनीतिक कल्पना को अवसर दिया है, जो आने वाले समय में शासन की दिशा तय कर सकता है।

    इसी अवसर पर Mallikarjun Kharge ने भी विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से सामाजिक न्याय, समानता और प्रगतिशील विचारों पर आधारित रही है और उम्मीद है कि नई सरकार इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाएगी। उनके अनुसार यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक सोच के विकास का संकेत है।

    शपथ ग्रहण समारोह चेन्नई के प्रमुख आयोजन स्थल पर बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया, जहां राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। माहौल में उत्साह और ऐतिहासिक बदलाव की झलक साफ दिखाई दे रही थी। लंबे समय से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है और राज्य को एक नई सरकार और नया नेतृत्व मिल गया है।

    मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में थलपति विजय ने खुद को जनता का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक सफर किसी पारंपरिक राजनीतिक परिवार से नहीं जुड़ा है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन ने उन्हें इस स्थान तक पहुंचाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार झूठे वादों की बजाय ठोस काम और पारदर्शी प्रशासन पर ध्यान देगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिवर्तन तमिलनाडु की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत है, जहां जनता ने एक गैर-पारंपरिक नेतृत्व को मौका दिया है। यह बदलाव न केवल सत्ता परिवर्तन है, बल्कि राजनीतिक सोच और जन अपेक्षाओं में आए बदलाव का भी प्रतीक है।

    नई सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरे और प्रशासनिक अनुभव के साथ विकास कार्यों को गति दे। रोजगार, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दे आने वाले समय में सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।

    इस तरह तमिलनाडु ने एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत की है, जहां नेतृत्व, उम्मीदें और जनता की भूमिका मिलकर एक नए शासन मॉडल की ओर इशारा कर रही हैं।

  • फिल्मों से लेकर जननायक बनने तक: कैसे बने तमिलनाडु के नए ‘थलापति’ विजय, जानिए पूरी कहानी

    फिल्मों से लेकर जननायक बनने तक: कैसे बने तमिलनाडु के नए ‘थलापति’ विजय, जानिए पूरी कहानी

    नई दिल्ली । फिल्मों की दुनिया से निकलकर राजनीति के शिखर तक पहुंचने की कहानी अक्सर कल्पना जैसी लगती है, लेकिन तमिल सुपरस्टार विजय थलापति के जीवन में यह सच बनती दिख रही है। आमिर खान की फिल्म ‘3 इडियट्स’ का गाना “जैसा फिल्मों में होता है, हो रहा है हूबहू…” जैसे उनके सफर पर बिल्कुल फिट बैठता है। पर्दे पर कई बार नेता बनकर जनता का दिल जीतने वाले विजय अब असल जीवन में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा नाम बन चुके हैं।

    विजय को फिल्मी दुनिया की प्रेरणा उनके परिवार से मिली। उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर निर्देशक हैं, जबकि मां शोभा चंद्रशेखर प्लेबैक सिंगर रही हैं। घर में कला और संगीत के माहौल ने उन्हें बचपन से ही अभिनय की ओर खींचा। अभिनय के साथ-साथ उन्हें गायन का भी शौक है।

    बाल कलाकार से शुरुआत
    22 जून 1974 को जन्मे जोसेफ विजय चंद्रशेखर ने 1984 में फिल्म ‘वेट्री’ से बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘कुडुम्बम’, ‘नान सिगप्पू मणिथन’, ‘वसंत रागम्’, ‘सत्तम ओरु विलायाट्टू’ और ‘इधु एंगळ नीति’ जैसी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों का निर्देशन उनके पिता ने ही किया था।

    हीरो बनने की राह में संघर्ष
    18 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘नालया थीरपू’ से बतौर लीड हीरो शुरुआत की, लेकिन फिल्म असफल रही और उनके लुक की आलोचना भी हुई। इसके बाद उनके पिता ने अभिनेता विजयकांत के साथ ‘सेंथूरपांडी’ (1993) बनाई, जो हिट रही और यहीं से विजय के करियर ने रफ्तार पकड़ी।

    हिट फिल्मों से सुपरस्टार तक
    अपने करियर में उन्होंने अब तक 69 फिल्में की हैं। ‘थेरी’, ‘राजविन परवैयिले’, ‘मिन्सरा कन्ना’, ‘बीस्ट’, ‘शाहजहां’, ‘लियो’ और ‘द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बड़ी सफलता दिलाई। 2023 की ‘लियो’ ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड तोड़े। बताया जाता है कि वह एक फिल्म के लिए करीब 250 करोड़ रुपये तक फीस लेते हैं।

    ‘थलापति’ नाम कैसे मिला
    फैंस ने उन्हें प्यार से ‘थलापति’ यानी कमांडर का नाम दिया। 1994 की फिल्म ‘रसिगन’ की सफलता के बाद उन्हें ‘इलाया थलापति’ (छोटा कमांडर) कहा गया। 2017 में फिल्म ‘मार्सल’ की बड़ी सफलता के बाद वे पूरी तरह ‘थलापति’ बन गए।

    फिल्मों में विवाद भी साथ-साथ
    उनकी फिल्मों ने कई बार विवाद भी झेले। 2013 की ‘थलाइवा’ और 2018 की ‘सरकार’ पर राजनीतिक विवाद हुए। हाल ही में उनकी फिल्म ‘जन नायकन’ भी सेंसर और कानूनी अड़चनों में फंसी रही और रिलीज नहीं हो सकी।

    राजनीति में एंट्री और बड़ा बदलाव
    फरवरी 2024 में विजय ने राजनीति में कदम रखते हुए अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) बनाई। इसके बाद उनकी पार्टी ने तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से मजबूत पकड़ बनाई और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई।

    करूर रैली हादसा
    27 सितंबर 2025 को करूर में हुई रैली के दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद विजय ने पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की और गहरा दुख जताया। इस मामले में जांच भी आगे बढ़ी और पुलिस केस दर्ज हुआ।

    निजी जीवन भी चर्चा में
    विजय ने 1999 में अपनी एक फैन से शादी की थी। हाल ही में उनके निजी जीवन को लेकर तलाक की खबरें सामने आई हैं। उनका नाम अभिनेत्री तृषा कृष्णन के साथ भी जोड़ा जाता रहा है।

    नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत
    आज 10 मई 2026 को विजय का राजनीतिक सफर एक नए मोड़ पर पहुंचने वाला है। बड़े पर्दे पर निभाए गए उनके नेता के किरदार अब असल जिंदगी में भी आकार लेते दिख रहे हैं। उनके समर्थक इस बदलाव को एक ऐतिहासिक शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।

  • विजय की राजनीतिक पारी पर सस्पेंस कायम, सत्ता समीकरणों के बीच निजी जिंदगी को लेकर अफवाहें तेज, तृषा की पोस्ट बनी चर्चा का केंद्र

    विजय की राजनीतिक पारी पर सस्पेंस कायम, सत्ता समीकरणों के बीच निजी जिंदगी को लेकर अफवाहें तेज, तृषा की पोस्ट बनी चर्चा का केंद्र


    नई दिल्ली
    तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों एक अनिश्चित लेकिन बेहद दिलचस्प दौर से गुजर रही है, जहां चुनाव परिणामों के बाद सत्ता गठन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसी बीच अभिनेता से नेता बने थलपति विजय को लेकर मुख्यमंत्री बनने की चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। उनके राजनीतिक दल के प्रदर्शन ने उन्हें राज्य की सत्ता की दौड़ में एक मजबूत चेहरा बना दिया है, और समर्थकों के बीच यह उम्मीद गहराती जा रही है कि वह आने वाले समय में राज्य का नेतृत्व संभाल सकते हैं।

    इसी राजनीतिक माहौल के बीच उनकी निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चाओं का दौर फिर से तेज हो गया है। खासकर अभिनेत्री तृषा कृष्णन के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर अटकलों का बाजार गर्म है। यह चर्चा तब और बढ़ गई जब तृषा का एक रहस्यमयी पोस्ट सामने आया, जिसे लोगों ने अलग-अलग अर्थों में समझना शुरू कर दिया। इस पोस्ट में इस्तेमाल किए गए संकेतात्मक शब्दों और कैप्शन को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं, जिससे यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।

    विजय और तृषा की दोस्ती और प्रोफेशनल जुड़ाव पहले भी चर्चा का विषय रह चुका है। फिल्मों में उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने काफी पसंद किया था, जिसके बाद समय-समय पर दोनों को लेकर तरह-तरह की अफवाहें सामने आती रही हैं। हालांकि दोनों कलाकारों ने कभी भी इन अफवाहों पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है और हमेशा अपने काम को प्राथमिकता दी है।

    राजनीतिक मोर्चे पर विजय के नाम को लेकर उत्साह और उम्मीद दोनों बढ़ते जा रहे हैं। चुनाव के बाद बनी परिस्थितियों में उनके समर्थक उन्हें एक संभावित नेता के रूप में देख रहे हैं, जबकि विपक्षी समीकरण अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। ऐसे में सत्ता गठन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन विजय का नाम लगातार चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।

    दूसरी ओर, तृषा कृष्णन की हालिया सोशल मीडिया गतिविधि ने मनोरंजन जगत में भी नई हलचल पैदा कर दी है। उनके पोस्ट को लेकर अलग-अलग तरह की व्याख्याएं सामने आ रही हैं, जिससे अफवाहों को और बल मिल रहा है। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर अक्सर छोटे संकेत भी बड़ी कहानियों का रूप ले लेते हैं, और यही स्थिति इस मामले में भी देखने को मिल रही है।

    फिलहाल दोनों ही हस्तियों की ओर से इन चर्चाओं पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उनके नाम लगातार राजनीतिक और मनोरंजन दोनों ही क्षेत्रों में सुर्खियों में बने हुए हैं। तमिलनाडु की राजनीति और ग्लैमर जगत के इस अनोखे संगम ने लोगों की दिलचस्पी को और बढ़ा दिया है, जिससे आने वाले दिनों में इस कहानी के नए मोड़ सामने आने की संभावना बनी हुई है।

  • फर्जी समर्थन पत्र विवाद के बाद थलपति विजय की सरकार गठन कोशिशों पर उठे बड़े सवाल

    फर्जी समर्थन पत्र विवाद के बाद थलपति विजय की सरकार गठन कोशिशों पर उठे बड़े सवाल

    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थलपति विजय की पार्टी सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में लगातार सक्रिय है, लेकिन इसी बीच एक नए विवाद ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा उलझा दिया है। एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने विजय की पार्टी पर फर्जी समर्थन पत्र तैयार कर राज्यपाल को सौंपने का गंभीर आरोप लगाया है। इस दावे के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया और मामला अब कानूनी दायरे तक पहुंच चुका है।

    दिनाकरन ने चेन्नई के गुइंडी थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि उनकी पार्टी के विधायक एस कामराज के नाम का गलत इस्तेमाल किया गया। उनका आरोप है कि विजय की पार्टी ने ऐसा दस्तावेज पेश किया जिसमें यह दिखाने की कोशिश की गई कि एएमएमके विधायक सरकार गठन के लिए टीवीके का समर्थन कर रहे हैं। दिनाकरन के अनुसार, जब मूल पत्र प्रस्तुत करने की बात आई तब उन्होंने खुद राज्यपाल से मुलाकात कर असली दस्तावेज सौंपा, जिसमें उनकी पार्टी का समर्थन किसी और गठबंधन के पक्ष में बताया गया था। उन्होंने इस पूरे मामले को लोकतंत्र के खिलाफ साजिश बताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    इस विवाद के केंद्र में मौजूद विधायक एस कामराज को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ समय पहले दिनाकरन ने दावा किया था कि उनके विधायक संपर्क से बाहर हैं और उन पर दबाव बनाया जा रहा है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गई थीं। हालांकि बाद में विजय की पार्टी की तरफ से एक वीडियो सामने आया जिसमें विधायक कामराज यह कहते दिखाई दिए कि उन्होंने अपनी मर्जी और सहमति से समर्थन देने का फैसला लिया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद मामला और ज्यादा उलझ गया क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर कायम हैं।

    थलपति विजय की पार्टी लगातार यह कह रही है कि उन्हें सरकार बनाने के लिए किसी प्रकार की खरीद-फरोख्त या दबाव की राजनीति की जरूरत नहीं है। पार्टी का दावा है कि उन्हें विधायकों का समर्थन स्वाभाविक रूप से मिल रहा है और विरोधी दल केवल भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर दिनाकरन इस पूरे मामले को गंभीर आपराधिक साजिश बता रहे हैं और उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गलत असर पड़ेगा।

    तमिलनाडु में इस समय सरकार गठन का गणित बेहद दिलचस्प स्थिति में पहुंच चुका है। हर राजनीतिक दल अपने समर्थन के आंकड़े मजबूत दिखाने में जुटा हुआ है। राजभवन में लगातार बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों का दौर जारी है। ऐसे माहौल में यह विवाद सत्ता की तस्वीर बदल सकता है। अगर जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो इसका सीधा असर सरकार गठन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

    राज्य की जनता अब पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है। राजनीतिक आरोपों, समर्थन पत्रों और कानूनी शिकायतों के बीच तमिलनाडु की राजनीति में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि बहुमत का दावा किसके पक्ष में जाता है और क्या यह विवाद राज्य की नई सरकार बनने की राह में बड़ी बाधा साबित होगा।

  • थलपति विजय से मुलाकात के बाद चर्चा में तृषा कृष्णन, जाति और धर्म को लेकर सोशल मीडिया पर गर्म बहस

    थलपति विजय से मुलाकात के बाद चर्चा में तृषा कृष्णन, जाति और धर्म को लेकर सोशल मीडिया पर गर्म बहस

    नई दिल्ली। साउथ फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री तृषा कृष्णन एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। वजह इस बार उनकी कोई नई फिल्म नहीं, बल्कि सुपरस्टार थलपति विजय के साथ उनकी पुरानी दोस्ती और निजी पृष्ठभूमि को लेकर उठ रही चर्चाएं हैं। हाल ही में तमिलनाडु में राजनीतिक हलचलों के बीच जब विजय के घर कई लोग पहुंचे, उसी दौरान तृषा कृष्णन की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींच लिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों के रिश्ते और उनकी बॉन्डिंग को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

    थलपति विजय और तृषा कृष्णन की जोड़ी साउथ सिनेमा की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक मानी जाती है। दोनों ने पहली बार साल 2004 में फिल्म ‘घिल्ली’ में साथ काम किया था, जो बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई। इस फिल्म ने न सिर्फ दोनों कलाकारों को नई पहचान दी, बल्कि उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को भी दर्शकों ने खूब सराहा। इसके बाद दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और हर बार उनकी जोड़ी को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला।

    ‘थिरुपाची’, ‘आथी’, ‘कुरुवी’ और बाद में ‘लियो’ जैसी फिल्मों में साथ नजर आने के बाद दोनों के बीच एक मजबूत प्रोफेशनल रिश्ता बना। कई इंटरव्यू में तृषा कृष्णन ने थलपति विजय के शांत और अनुशासित स्वभाव की तारीफ की है। उन्होंने कहा था कि विजय अपने काम को लेकर बेहद गंभीर रहते हैं और सेट पर उनका व्यवहार हमेशा प्रोफेशनल होता है।

    इसी बीच तृषा कृष्णन की निजी पृष्ठभूमि को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। तृषा एक तमिल पलक्काड अय्यर ब्राह्मण परिवार से आती हैं। उनका जन्म चेन्नई में हुआ और वे एक हिंदू तमिल भाषी परिवार से संबंध रखती हैं। उनका समुदाय केरल और तमिलनाडु की सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है, जहां तमिल और मलयालम संस्कृति का मिश्रण देखने को मिलता है।

    धार्मिक रूप से तृषा कृष्णन हिंदू धर्म का पालन करती हैं और आध्यात्मिक गतिविधियों में उनकी रुचि भी रही है। वे अक्सर मंदिरों के दर्शन करती नजर आती हैं और अपनी निजी आस्था को लेकर हमेशा सहज रही हैं। हालांकि, वे अपनी निजी जिंदगी को मीडिया से दूर रखना पसंद करती हैं और इस विषय पर ज्यादा सार्वजनिक बयान नहीं देतीं।

    थलपति विजय के साथ उनकी पुरानी दोस्ती एक बार फिर चर्चा में तब आई जब हाल के राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों के बाद उनके पुराने बयान और इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। फैंस दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को लेकर उत्साहित हैं और उनकी पुरानी फिल्मों को फिर से याद कर रहे हैं।

    हालांकि, दोनों कलाकारों ने हमेशा अपने रिश्ते को केवल दोस्ती और प्रोफेशनल सम्मान तक सीमित बताया है। वे निजी जीवन को लेकर सार्वजनिक बहसों से दूर रहते हैं और अपने करियर पर फोकस बनाए रखते हैं। इसके बावजूद, तृषा कृष्णन और थलपति विजय की जोड़ी को लेकर लोगों की दिलचस्पी समय-समय पर फिर से चर्चा में आ जाती है।