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  • थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी

    थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की सत्ताधारी तमिळगा वेत्री कड़गम यानी TVK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से खुद को अलग कर लिया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। हालांकि थलपति विजय की पार्टी ने इस मांग का समर्थन नहीं किया है।

    TVK की ओर से कहा गया है कि किसी एक व्यक्ति को पद से हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पार्टी ने इसे मुद्दे से ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताया है। हालांकि इसके साथ ही TVK ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का विरोध जारी रखने की बात भी स्पष्ट की है।

    यह विवाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सामने आई आपत्तियों के बाद तेज हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले 10 महीनों में SIR की प्रक्रिया को लेकर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए और उनके खिलाफ इस्तीफे के साथ कानूनी कार्रवाई की मांग भी सामने आई।

    TVK के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री ए राजमोहन ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि CEC को पद से हटाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, किसी एक व्यक्ति को हटाने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा और पार्टी किसी भटकाने वाली रणनीति का हिस्सा नहीं बनेगी।

    हालांकि राजमोहन ने यह भी कहा कि TVK SIR का विरोध करती रहेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष विजय ने सत्ता में आने से पहले ही SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की थी। राजमोहन के मुताबिक, SIR के दौरान चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाए गए और अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत और बड़ी होती।

    विजय और कांग्रेस के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। इससे पहले TVK के नेताओं और मंत्रियों की ओर से वर्ष 2029 के लिए विजय को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताए जाने के बाद विवाद पैदा हुआ था। उस समय कांग्रेस के मंत्रियों की ओर से कैबिनेट से इस्तीफा देने की धमकी तक सामने आई थी।

    फिलहाल तमिलनाडु में कांग्रेस के पांच विधायक हैं, जिनके समर्थन से TVK ने सरकार बनाई थी। इनमें से दो विधायकों को विजय ने मंत्री भी बनाया है। ऐसे में CEC के इस्तीफे के मुद्दे पर TVK का कांग्रेस से अलग रुख गठबंधन के भीतर मतभेदों को सामने लाता है।

    दूसरी ओर, डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। डीएमके ने कहा है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव आता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।

    डीएमके प्रवक्ता टी के एस एलंगोवन ने कहा कि जब भी विपक्षी दल किसी मुद्दे पर बीजेपी का विरोध करेंगे, उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।

    इससे पहले 23 सितंबर को स्टालिन ने बयान जारी कर कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इस तरह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस और डीएमके की मांग के बीच TVK ने अलग रुख अपनाया है। पार्टी ने SIR के विरोध को बरकरार रखते हुए CEC को हटाने की मांग को व्यवस्था में बदलाव का समाधान मानने से इनकार किया है।

  • शाहरुख के साथ जवान बनाने से पहले विजय ने एटली से कही थी ये बात, डायरेक्टर बोले- मेरी जिंदगी सच में बदल गई

    शाहरुख के साथ जवान बनाने से पहले विजय ने एटली से कही थी ये बात, डायरेक्टर बोले- मेरी जिंदगी सच में बदल गई


    नई दिल्ली। शाहरुख खान की फिल्म जवान ने साल 2023 में बॉक्स ऑफिस पर ऐसा धमाल मचाया था जिसने न सिर्फ अभिनेता के करियर में एक नया अध्याय जोड़ा बल्कि डायरेक्टर एटली कुमार की पहचान को भी देशभर में मजबूत कर दिया। तमिल सिनेमा में अपनी खास पहचान बना चुके एटली ने जवान के जरिए बॉलीवुड में कदम रखा और शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आई। अब एटली ने खुलासा किया है कि शाहरुख के साथ काम करने का फैसला लेने से पहले उन्हें थलपति विजय से एक ऐसी सलाह मिली थी जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।

    चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एटली ने अपने करियर और थलपति विजय के साथ अपने रिश्ते को लेकर कई बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि आज वह जिस मुकाम पर हैं उसमें विजय का बड़ा योगदान है। एटली के मुताबिक उनकी दूसरी फिल्म राजा रानी के बाद उन्हें पहचान मिलनी शुरू हुई थी और इसके बाद विजय ने उन्हें लगातार बड़े मौके दिए। थेरी मर्सल और बिगिल जैसी फिल्मों के जरिए एटली और विजय की जोड़ी ने दर्शकों के बीच अपनी खास जगह बनाई।

    एटली ने बताया कि जब शाहरुख खान उनके ऑफिस पहुंचे और जवान को लेकर उनसे मुलाकात हुई तो उनके सामने एक बड़ा फैसला था। उन्होंने इस बारे में थलपति विजय से बात की थी। एटली के अनुसार विजय ने उन्हें कहा था कि उन्हें नहीं पता कि वह शाहरुख खान के साथ इस फिल्म को किस तरह बनाएंगे या इसे कैसे संभालेंगे लेकिन उन्हें विजय के पीछे घूमने के बजाय यह फिल्म करनी चाहिए। विजय ने कथित तौर पर उन्हें भरोसा दिलाया था कि यह फिल्म उनके करियर की दिशा बदल सकती है।

    एटली ने बताया कि विजय की यह बात आगे चलकर सच साबित हुई। जवान रिलीज होने के बाद एटली की पहचान तमिल सिनेमा से निकलकर देशभर में पहुंच गई। फिल्म में शाहरुख खान के साथ नयनतारा और विजय सेतुपति जैसे कलाकार नजर आए थे और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की। इस कामयाबी के बाद एटली का नाम भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के बड़े निर्देशकों में गिना जाने लगा।

    कार्यक्रम में एटली से यह भी पूछा गया कि वह अक्सर थलपति विजय का जिक्र क्यों करते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग ऐसा सोच सकते हैं कि वह विजय का नाम इसलिए लेते हैं ताकि उनके साथ दोबारा फिल्म बनाने का मौका मिल सके। हालांकि एटली ने कहा कि अब विजय मुख्यमंत्री बन चुके हैं इसलिए उनके साथ अगली फिल्म करना संभव नहीं होगा। इसके बावजूद एटली ने विजय को अपना भाई बताते हुए उनके प्रति सम्मान और आभार जताया।

    फिलहाल एटली अपनी अगली बड़ी फिल्म राका को लेकर चर्चा में हैं। इस प्रोजेक्ट में अल्लू अर्जुन दीपिका पादुकोण मृणाल ठाकुर रश्मिका मंदाना और जाह्नवी कपूर जैसे कलाकारों के जुड़े होने की बात सामने आई है। फिल्म का बजट करीब 800 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। ऐसे में जवान के बाद एटली की अगली फिल्म पर भी दर्शकों की नजर बनी हुई है।

  • लंदन में थलपति विजय की एक झलक पाने पहुंचे थे फैंस सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम हुआ रद्द

    लंदन में थलपति विजय की एक झलक पाने पहुंचे थे फैंस सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम हुआ रद्द


    नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता थलपति विजय इन दिनों लंदन दौरे पर हैं। उनके इस दौरे के दौरान मंगलवार को उस समय फैंस को निराशा हुई जब लंदन में प्रस्तावित उनका एक कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। विजय की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक लंदन की मशहूर इमारत द शार्ड के बाहर पहुंच गए थे। कई लोग घंटों तक उनका इंतजार करते रहे लेकिन आखिरकार उन्हें बिना विजय को देखे ही वापस लौटना पड़ा।

    रिपोर्ट के मुताबिक विजय के कार्यक्रम को लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस से अनुमति नहीं मिली थी। पुलिस की ओर से सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला दिया गया। इसके बाद विजय की टीम की ओर से आयोजन स्थल के बाहर लाउडस्पीकर के जरिए कार्यक्रम रद्द किए जाने की जानकारी दी गई। फैंस को बताया गया कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं मिली है।

    विजय के इंतजार में कुछ प्रशंसक करीब चार घंटे तक द शार्ड के बाहर मौजूद रहे। कार्यक्रम रद्द होने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। वहां मौजूद एक प्रशंसक ने कहा कि सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम रद्द करना ठीक है लेकिन वह और दूसरे लोग काफी समय से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि लंदन में मौजूद भीड़ तमिलनाडु में विजय के कार्यक्रमों के दौरान जुटने वाली भीड़ की तुलना में काफी कम थी।

    विजय का यह लंदन दौरा केवल प्रशंसकों से मुलाकात तक सीमित नहीं है। वह तमिलनाडु में निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से ब्रिटेन गए प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार लंदन दौरे के दौरान तमिलनाडु से जुड़े कई निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन समझौतों का कुल निवेश लगभग 12300 करोड़ रुपये बताया गया है।

    इन प्रस्तावित निवेशों में वाहन कलपुर्जा निर्माण अनुसंधान और विकास नवीकरणीय ऊर्जा पावर ग्रिड उपकरण और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। तमिलनाडु सरकार के अनुसार इन निवेशों से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

    इनमें प्रमुख समझौता मदरसन इंटरनेशनल लिमिटेड से जुड़ा बताया गया है। कंपनी तमिलनाडु में अपने डिजाइन इंजीनियरिंग निर्माण एकीकरण और लॉजिस्टिक केंद्रों के विस्तार के लिए करीब 11000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रही है। इससे लगभग 7000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।

    इसके अलावा ब्रिटेन की विल्सन पावर सॉल्यूशंस तिरुवल्लूर जिले में ट्रांसफॉर्मर निर्माण से जुड़े अपने संचालन के अगले चरण के लिए करीब 300 करोड़ रुपये निवेश करेगी। इस परियोजना से लगभग 400 नए रोजगार मिलने की उम्मीद है।

    विजय के बुधवार को ब्रिटेन से भारत लौटने का कार्यक्रम बताया गया है। लंदन में उनका कार्यक्रम सुरक्षा कारणों से रद्द होने के बावजूद उनका दौरा तमिलनाडु में निवेश से जुड़े समझौतों के कारण चर्चा में बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक तरफ विजय के प्रशंसकों को निराश किया है तो दूसरी तरफ उनके राजनीतिक और प्रशासनिक दौरे से जुड़े निवेश प्रयासों को भी सुर्खियों में ला दिया है।

  • निवेश के लिए लंदन गए थे CM विजय या दोस्त की रेस देखने DMK के सवालों पर TVK ने दिया करारा जवाब

    निवेश के लिए लंदन गए थे CM विजय या दोस्त की रेस देखने DMK के सवालों पर TVK ने दिया करारा जवाब


    नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय इन दिनों ब्रिटेन की यात्रा पर हैं और उनकी इस विदेश यात्रा को लेकर राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विजय की लंदन यात्रा का आधिकारिक उद्देश्य निवेशकों से मुलाकात और तमिलनाडु में निवेश लाने से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा करना बताया गया है। लेकिन इसी दौरान अभिनेता अजित के साथ उनकी मुलाकात और अभिनेत्री तृषा के साथ नजर आने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दल डीएमके ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

    शनिवार को सोशल मीडिया पर थलपति विजय और अभिनेता अजित का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में दोनों काफी सहज और दोस्ताना अंदाज में नजर आए। बताया जा रहा है कि अजित इन दिनों लंदन में मोटर रेसिंग से जुड़े कार्यक्रम में मौजूद हैं। विजय की उनसे मुलाकात के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि विजय ने लंदन जाकर निवेश लाने की बात कही थी लेकिन अब तस्वीर सामने है कि वह अपने दोस्त की कार रेस देखने भी पहुंचे हैं।

    डीएमके विधायक मार्कंडेयन ने भी विजय की लंदन यात्रा को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में किसानों और मछुआरों समेत कई वर्गों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को पहले राज्य की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए था। उनके मुताबिक निवेशकों से मुलाकात कुछ समय के लिए टाली भी जा सकती थी लेकिन राज्य के लोगों से जुड़े मुद्दे अधिक प्राथमिकता वाले हैं।

    हालांकि विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता नारायणन ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं और विदेश दौरे के दौरान किसी परिचित या दोस्त से मुलाकात करना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने कहा कि अजित केवल तमिल फिल्मों के बड़े अभिनेता ही नहीं बल्कि मोटर रेसिंग की दुनिया में भी अपनी पहचान रखते हैं। ऐसे में उनसे मुलाकात को तमिलनाडु की ब्रांड वैल्यू से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

    दरअसल थलपति विजय की लंदन यात्रा को तमिलनाडु में मोटर स्पोर्ट्स से जुड़ी बड़ी योजना से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चेन्नई में एक आधुनिक मोटर स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसी सिलसिले में ब्रिटेन में मौजूद विश्वस्तरीय मोटर स्पोर्ट्स सुविधाओं और व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी यात्रा का हिस्सा बताया जा रहा है।

    विजय के साथ अभिनेत्री तृषा के नजर आने और अजित के साथ उनकी मुलाकात के वीडियो वायरल होने के बाद मामला अब केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं रहा है। मुख्यमंत्री की यात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो चुकी है। एक तरफ डीएमके इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का मुद्दा बना रही है तो दूसरी तरफ टीवीके इसे मुख्यमंत्री के कामकाज और तमिलनाडु की वैश्विक पहचान से जोड़कर देख रही है। ऐसे में विजय की लंदन यात्रा आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकती है।

  • विजय-संगीता की कहानी में आया बड़ा ट्विस्ट, 27 साल बाद तलाक की नौबत और फिर अचानक बदल गया फैसला

    विजय-संगीता की कहानी में आया बड़ा ट्विस्ट, 27 साल बाद तलाक की नौबत और फिर अचानक बदल गया फैसला


    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी पत्नी संगीता सोर्नलिंगम की ओर से तलाक की याचिका दायर किए जाने और फिर अचानक उसे वापस लिए जाने की खबर ने फैंस के बीच चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। करीब 27 साल पुराने इस रिश्ते की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक समय विजय की फैन बनकर उनसे मिलने पहुंचीं संगीता धीरे धीरे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बनीं और दोनों ने परिवार की सहमति से शादी कर ली। लेकिन कई साल बाद रिश्ते में आई दरार और तलाक की कानूनी प्रक्रिया ने सबको हैरान कर दिया। अब याचिका वापस लिए जाने के बाद इस कहानी में एक नया मोड़ आ गया है।

    संगीता सोर्नलिंगम श्रीलंका के एक तमिल कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं और लंबे समय तक ब्रिटेन में रही हैं। बताया जाता है कि वह विजय की बड़ी प्रशंसक थीं। साल 1996 में विजय की फिल्म पूवे उनाक्कागा को जबरदस्त सफलता मिली तो संगीता उनसे मिलने भारत पहुंचीं। वह विजय की शूटिंग लोकेशन पर पहुंचीं और अभिनेता से मुलाकात कर उन्हें फिल्म की सफलता के लिए बधाई दी। विजय को संगीता का सहज स्वभाव और तमिल सिनेमा के प्रति उनका लगाव पसंद आया। इसके बाद विजय ने उन्हें अपने घर आने और परिवार से मिलने का न्योता दिया। यहीं से दोनों के रिश्ते की शुरुआत हुई और धीरे धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया।

    विजय के माता पिता निर्देशक एसए चंद्रशेखर और गायिका शोभा चंद्रशेखर को भी संगीता पसंद आईं। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत आगे बढ़ी और शादी का फैसला हुआ। रिपोर्टों के अनुसार दोनों ने 1998 में लंदन में अपनी शादी रजिस्टर कराई। इसके बाद 1999 में चेन्नई के राजाह मुथैया हॉल में पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ दोनों विवाह बंधन में बंधे। शादी के बाद दोनों ने परिवार और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए रिसेप्शन भी आयोजित किया। विजय और संगीता के दो बच्चे हैं। उनके बेटे का नाम जेसन संजय और बेटी का नाम दिव्या साशा है।

    करीब ढाई दशक तक साथ रहने के बाद फरवरी 2026 में संगीता की ओर से विजय से तलाक लेने की याचिका दायर किए जाने की खबर सामने आई। रिपोर्टों में दावा किया गया कि याचिका में विजय पर विवाहेतर संबंधों से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। बताया गया कि संगीता को कथित तौर पर अप्रैल 2021 में इस बारे में जानकारी मिली थी। हालांकि इन निजी आरोपों को लेकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित रही है। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों के बीच लंबे समय से दूरी बनी हुई थी और बाद में मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचा।

    लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट 7 अगस्त 2026 को आया जब संगीता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होकर अपनी तलाक याचिका वापस ले ली। बताया गया कि अदालत में करीब 15 मिनट की कार्यवाही के बाद मामले को बंद कर दिया गया। तलाक की अर्जी वापस लेने के बाद अब विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि दोनों की ओर से अपने रिश्ते की मौजूदा स्थिति को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    विजय और संगीता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी शुरुआत एक फैन और सुपरस्टार की मुलाकात से हुई थी। एक छोटी सी मुलाकात प्यार में बदली और फिर दोनों ने परिवार की सहमति से जिंदगी साथ बिताने का फैसला किया। 27 साल बाद तलाक की अर्जी ने इस रिश्ते को फिर सुर्खियों में ला दिया लेकिन याचिका वापस लिए जाने के बाद कहानी एक बार फिर अधूरी तस्वीर जैसी नजर आ रही है। अब फैंस की नजर इस बात पर है कि विजय और संगीता आने वाले समय में अपने रिश्ते को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।

  • राजनीति में नया चेहरा, सबसे ज्यादा दौलत थलपति विजय के पास, लेकिन पढ़ाई में पीछे रह गए सभी सीएम

    राजनीति में नया चेहरा, सबसे ज्यादा दौलत थलपति विजय के पास, लेकिन पढ़ाई में पीछे रह गए सभी सीएम


    नई दिल्ली ।भारतीय राजनीति में हाल ही में हुए चुनावों के बाद पांच अलग-अलग राज्यों में नए नेतृत्व की तस्वीर सामने आई है, जिसमें फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए Thalapathy Vijay सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थलपति विजय ने न केवल अपनी राजनीतिक जीत से सबको चौंकाया है, बल्कि संपत्ति के मामले में भी वह इन पांचों मुख्यमंत्रियों में सबसे आगे निकल गए हैं। उनके साथ पश्चिम बंगाल के नेता Shubhendu Adhikari, असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma, केरल के नेता वीडी सतीशन और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी की तुलना ने एक दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर पेश की है, जिसमें संपत्ति, शिक्षा और आपराधिक मामलों के आधार पर स्पष्ट अंतर देखने को मिला है।

    थलपति विजय की सबसे बड़ी पहचान उनकी लोकप्रियता और फिल्मी करियर रही है, लेकिन अब राजनीति में भी उन्होंने मजबूत पकड़ बना ली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनके पास करीब 648.85 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई जाती है, जो इस सूची में शामिल सभी मुख्यमंत्रियों में सबसे अधिक है। शिक्षा के मामले में वह 12वीं पास हैं, जो इस तुलना में उन्हें सबसे कम शैक्षणिक योग्यता वाले नेता के रूप में दर्शाता है। हालांकि उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या सीमित बताई जाती है, लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा ने उन्हें बेहद तेज़ी से एक बड़े नेता के रूप में स्थापित कर दिया है।

    पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर भी काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कांग्रेस और तृणमूल जैसे दलों से होते हुए उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और बाद में सत्ता की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी संपत्ति अन्य नेताओं की तुलना में काफी कम बताई जाती है, लेकिन उनके खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की चर्चा है, जो उन्हें विवादों के घेरे में भी रखता है।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इस सूची में सबसे अधिक शिक्षित नेता के रूप में सामने आते हैं। डॉक्टरेट की डिग्री रखने वाले हिमंत का राजनीतिक अनुभव भी लंबा रहा है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक का सफर तय किया है। उनकी संपत्ति मध्यम स्तर पर बताई जाती है और उनके खिलाफ किसी प्रकार के आपराधिक मामलों की अनुपस्थिति उन्हें एक अलग छवि प्रदान करती है।

    केरल के नेता वीडी सतीशन का पेशेवर पृष्ठभूमि वकालत से जुड़ा रहा है। उनकी संपत्ति इन सभी नेताओं में सबसे कम मानी जाती है, जबकि उनके खिलाफ कई कानूनी मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आती है। इसके बावजूद वे लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और कांग्रेस संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

    पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी इस सूची में सबसे अनुभवी नेता के रूप में देखे जाते हैं। कई बार मुख्यमंत्री रह चुके रंगास्वामी की छवि एक स्थिर और अनुभवी नेतृत्व की रही है। उनकी संपत्ति मध्यम स्तर की बताई जाती है और उनके खिलाफ किसी प्रकार के आपराधिक मामलों का उल्लेख नहीं मिलता, जो उन्हें एक साफ छवि वाला नेता बनाता है।

    इन पांचों नेताओं की तुलना से यह साफ होता है कि भारतीय राजनीति में नेतृत्व केवल लोकप्रियता या अनुभव पर ही नहीं, बल्कि संपत्ति, शिक्षा और छवि जैसे कई पहलुओं पर भी निर्भर करता है। थलपति विजय का सबसे अमीर होना, हिमंत बिस्वा सरमा का सबसे शिक्षित होना और अन्य नेताओं की अलग-अलग विशेषताएं मिलकर यह दिखाती हैं कि राजनीतिक नेतृत्व की तस्वीर कितनी विविध और जटिल हो चुकी है।

  • प्रभाकरन पर बयान से बढ़ा राजनीतिक टकराव, विजय के समर्थन में राहुल गांधी पर तीखे हमले

    प्रभाकरन पर बयान से बढ़ा राजनीतिक टकराव, विजय के समर्थन में राहुल गांधी पर तीखे हमले


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है, जब LTTE प्रमुख वी. प्रभाकरन को लेकर दिए गए एक बयान और श्रद्धांजलि ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया। यह मामला केवल राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली की राजनीति तक इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जिससे सियासी तनाव और बढ़ गया है।

    विवाद की शुरुआत तब हुई जब तमिलनाडु के एक प्रमुख नेता ने प्रभाकरन को लेकर टिप्पणी करते हुए उनके संघर्ष और तमिल समुदाय के मुद्दों का जिक्र किया। इस बयान के बाद राजनीतिक विरोधियों ने इसे गंभीर मुद्दा बनाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। कहा जा रहा है कि इस टिप्पणी ने पुराने विवादों को फिर से हवा दे दी है, जिनमें LTTE की भूमिका और उसके हिंसक इतिहास को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

    भारतीय राजनीति में इस मुद्दे के आने के बाद बहस और तेज हो गई, जब विपक्षी दलों ने इस बयान को लेकर सख्त रुख अपनाया। आरोप लगाए गए कि ऐसे बयान इतिहास के संवेदनशील अध्यायों को फिर से विवादों में ला रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि इससे राजनीतिक रिश्तों और सार्वजनिक विमर्श पर असर पड़ सकता है।

    इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया, जब विपक्षी दलों ने उन पर तीखे आरोप लगाए। उनका कहना था कि राजनीतिक समर्थन और मेलजोल के संदर्भ में ऐसे मुद्दों पर और अधिक स्पष्टता की जरूरत है, क्योंकि यह मामला एक ऐसे संगठन से जुड़ा है जिसे भारत में प्रतिबंधित किया गया है। इस बयान के बाद राजनीतिक तापमान और बढ़ गया।

    LTTE और उसके संस्थापक वी. प्रभाकरन का इतिहास श्रीलंका के गृहयुद्ध से जुड़ा हुआ है, जो दशकों तक चला और हजारों लोगों की जान गई। संगठन पर कई गंभीर आरोप रहे हैं और भारत में भी इसे प्रतिबंधित किया गया है। 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या से जुड़े मामले में भी इस संगठन का नाम सामने आया था, जिसके कारण यह विषय हमेशा संवेदनशील माना जाता रहा है।

    इसी पृष्ठभूमि के कारण जब भी प्रभाकरन या LTTE का जिक्र राजनीतिक मंचों पर होता है, तो विवाद तेज हो जाता है। इस बार भी वही स्थिति देखने को मिली, जब एक श्रद्धांजलि और बयान ने राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की नई लहर पैदा कर दी।

    वहीं समर्थकों का कहना है कि यह बयान तमिल समुदाय के ऐतिहासिक दर्द और उनके अधिकारों से जुड़ा है, जिसे केवल एक राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस मुद्दे को भावनात्मक और ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की जरूरत है।

  • पहली बड़ी परीक्षा में सफल हुए थलापति विजय, TVK ने गठबंधन के दम पर हासिल किया बहुमत

    पहली बड़ी परीक्षा में सफल हुए थलापति विजय, TVK ने गठबंधन के दम पर हासिल किया बहुमत


    नई दिल्ली ।तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम यानी TVK ने अपनी पहली बड़ी परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली है। लंबे समय से जिस फ्लोर टेस्ट को लेकर राजनीतिक हलचल बनी हुई थी, उसका परिणाम अब सामने आ चुका है और TVK ने 144 विधायकों के समर्थन के साथ बहुमत हासिल कर लिया है।

    यह पूरा घटनाक्रम राज्य की सत्ता समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में TVK ने 234 सदस्यीय सदन में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का दर्जा हासिल किया था, लेकिन पूर्ण बहुमत से थोड़ी दूरी पर रह गई थी। इसके बाद गठबंधन की राजनीति ने अहम भूमिका निभाई और कई सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार गठन की स्थिति बनी।

    फ्लोर टेस्ट के दौरान विधानसभा में राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। सत्ता पक्ष ने अपने समर्थन को मजबूत करते हुए सदन में संख्या बल साबित करने की कोशिश की, वहीं विपक्ष ने सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाए। मतदान प्रक्रिया के दौरान कई अहम मोड़ देखने को मिले, जहां कुछ विधायकों के समर्थन ने समीकरण बदल दिए और TVK को स्पष्ट बढ़त मिल गई।

    वोटिंग के अंत में TVK को कुल 144 विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक था। इस समर्थन में विभिन्न दलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जिसने सरकार की स्थिति को मजबूत किया। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने मतदान से दूरी बनाने का निर्णय लिया, जिससे राजनीतिक स्थिति और भी दिलचस्प बन गई।

    मुख्यमंत्री थलापति विजय ने सदन में अपने संबोधन में सहयोगी दलों का आभार जताया और कहा कि उनकी सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से काम करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों और प्रशासनिक स्थिरता को बनाए रखना है।

    इस परिणाम के साथ थलापति विजय ने राजनीति में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है। फिल्मी पर्दे पर सफलता के बाद अब राजनीतिक मंच पर उनकी यह जीत उनके करियर का एक नया अध्याय मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि TVK सरकार इस समर्थन को कितनी मजबूती से बनाए रखती है और राज्य की राजनीति में कितना प्रभाव डालती है।

  • CM बनने की चर्चा के बीच बड़ा धमाका: क्या रिलीज होगी विजय की ‘जना नायकन’?

    CM बनने की चर्चा के बीच बड़ा धमाका: क्या रिलीज होगी विजय की ‘जना नायकन’?


    नई दिल्ली। तमिल सुपरस्टार और राजनीतिक पारी की ओर बढ़ रहे विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। अब इस इंतजार पर जल्द ही विराम लग सकता है।
    फिल्म के प्रोड्यूसर वेंकट के नारायण ने संकेत दिया है कि अगर सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो फिल्म अगले 14 दिनों के भीतर सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है।

     CBFC प्रक्रिया में अंतिम चरण, तेजी से हो रहा काम
    प्रोड्यूसर के अनुसार फिल्म फिलहाल सेंसर सर्टिफिकेशन (CBFC) की अंतिम प्रक्रिया में है।
    टीम लगातार बोर्ड के संपर्क में है ताकि सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी की जा सकें। निर्माताओं का कहना है कि वे फिल्म को जल्द से जल्द दर्शकों तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।


    विजय की राजनीतिक पारी और फिल्म का खास कनेक्श
    फिल्म ‘जन नायकन’ सिर्फ एक एंटरटेनमेंट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि विजय के राजनीतिक सफर से भी जुड़ी मानी जा रही है। प्रोड्यूसर के मुताबिक, फिल्म का टाइटल “जनता का नायक” उनके वास्तविक जीवन और तमिलनाडु की राजनीति में उनकी नई भूमिका से मेल खाता है। इसी वजह से इसे उनकी राजनीति में सक्रिय होने से पहले आखिरी फिल्म भी माना जा रहा है।

    सेट पर विजय की अनुशासन की तारीफ
    प्रोड्यूसर वेंकट के नारायण ने विजय के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि विजय बेहद अनुशासित और कमिटेड अभिनेता हैं, जो अपने हर वादे को पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं। फिल्म की शूटिंग के दौरान उनका प्रोफेशनल रवैया टीम के लिए प्रेरणादायक रहा।

    लीक विवाद और चुनौतियों के बावजूद मजबूत टीम
    फिल्म का सफर आसान नहीं रहा। पिछले समय में इसे ऑनलाइन लीक होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। इसके बावजूद फिल्म की टीम ने हार नहीं मानी और अब पूरी फोकस ग्रैंड थिएट्रिकल रिलीज पर है।

    ‘जन नायकन’ को लेकर बनी हलचल साफ दिखाती है कि यह फिल्म सिर्फ एक रिलीज नहीं, बल्कि विजय के करियर और राजनीतिक सफर का अहम मोड़ मानी जा रही है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगले 2 हफ्तों में यह फिल्म बड़े पर्दे पर धमाका कर सकती है।

  • तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में लंबे इंतजार और गहन राजनीतिक हलचलों के बाद आखिरकार वह क्षण आ गया जिसने राज्य की सत्ता संरचना को नया रूप दे दिया। चेन्नई में आयोजित एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह में लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने Thalapathy Vijay ने आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस घटना को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां परंपरागत राजनीतिक ढांचे से बाहर निकलकर एक नए नेतृत्व ने जिम्मेदारी संभाली है।

    इस समारोह की खास बात यह रही कि इसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख राजनीतिक नेता भी शामिल हुए। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कार्यक्रम में मौजूद रहकर नई सरकार को शुभकामनाएं दीं और इसे जनता की बदलती सोच का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने इस बार नई पीढ़ी, नए विचार और नई राजनीतिक कल्पना को अवसर दिया है, जो आने वाले समय में शासन की दिशा तय कर सकता है।

    इसी अवसर पर Mallikarjun Kharge ने भी विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से सामाजिक न्याय, समानता और प्रगतिशील विचारों पर आधारित रही है और उम्मीद है कि नई सरकार इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाएगी। उनके अनुसार यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक सोच के विकास का संकेत है।

    शपथ ग्रहण समारोह चेन्नई के प्रमुख आयोजन स्थल पर बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया, जहां राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। माहौल में उत्साह और ऐतिहासिक बदलाव की झलक साफ दिखाई दे रही थी। लंबे समय से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है और राज्य को एक नई सरकार और नया नेतृत्व मिल गया है।

    मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में थलपति विजय ने खुद को जनता का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक सफर किसी पारंपरिक राजनीतिक परिवार से नहीं जुड़ा है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन ने उन्हें इस स्थान तक पहुंचाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार झूठे वादों की बजाय ठोस काम और पारदर्शी प्रशासन पर ध्यान देगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिवर्तन तमिलनाडु की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत है, जहां जनता ने एक गैर-पारंपरिक नेतृत्व को मौका दिया है। यह बदलाव न केवल सत्ता परिवर्तन है, बल्कि राजनीतिक सोच और जन अपेक्षाओं में आए बदलाव का भी प्रतीक है।

    नई सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरे और प्रशासनिक अनुभव के साथ विकास कार्यों को गति दे। रोजगार, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दे आने वाले समय में सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।

    इस तरह तमिलनाडु ने एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत की है, जहां नेतृत्व, उम्मीदें और जनता की भूमिका मिलकर एक नए शासन मॉडल की ओर इशारा कर रही हैं।