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  • US: चीनी रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स से देश की सुरक्षा पर खतरा…! ट्रंप सरकार ने किए बैन

    US: चीनी रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स से देश की सुरक्षा पर खतरा…! ट्रंप सरकार ने किए बैन


    वाशिंगटन।
    रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स (Robotic Vacuum Cleaners) इनोवेशन और इंजीनियरिंग (Innovation and Engineering) का शानदार नमूने की तरह हैं. लेकिन रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स सुरक्षा के लिहाज से कई बार खतरनाक साबित हो सकते हैं. अमेरिका (America) में अब रोबोट वैक्यूम क्लीनर को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. अमेरिकी सरकार ने नए नियम लागू किए हैं, जिनकी वजह से चीन समेत दूसरे देशों में बने कई नए रोबोट वैक्यूम क्लीनर अमेरिकी बाजार में नहीं आ पाएंगे. इस फैसले के पीछे वजह नैशनल सिक्योरिटी बताई गई है।

    यह फैसला अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने लिया है. पहले माना जा रहा था कि यह नियम सिर्फ ह्यूमनॉइड रोबोट और रोबोट डॉग पर लागू होगा, लेकिन बाद में साफ किया गया कि इसमें ऐसे रोबोट वैक्यूम क्लीनर भी शामिल हैं जो सेंसर, कैमरा, वायरलेस कनेक्टिविटी और सॉफ्टवेयर की मदद से अपने आसपास का नक्शा बनाकर काम करते हैं।


    रोबोट वैक्यूम से डर क्यों?

    आज के रोबोट वैक्यूम सिर्फ फर्श साफ नहीं करते. इनमें कैमरा, LiDAR सेंसर, Wi-Fi और कई स्मार्ट फीचर होते हैं. ये घर का नक्शा तैयार करते हैं और मोबाइल ऐप से कंट्रोल किए जाते हैं. यही नहीं, रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स आपके घर का पूरा खाका तैयार करते हैं ताकि बेहतर तरीके से सफाई की जा सके. लेकिन इससे ये भी सवाल उठता है कि अगर लोगों के घरों के मैप्स गलती से किसी साइबर क्रिमिनल्स या स्टेट स्पॉन्सर्ड स्पाई एजेंसी को मिल जाए तो किसी मुल्क के लिए काफी खतरनाक हो सकता है.

    रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर में सेंसर्स के साथ कैमरे भी लगे होते हैं. यानी घर का कोना कोना इनकी जद में होता है और बाकायदा रिकॉर्डिंग भी की जाती है. पूरे घर का वीडियो बनता है. घर में कौन रह रहा है कितने लोग हैं और क्या कर रहे हैं सबकुछ रिकॉर्ड हो सकता है. हालांकि बड़ी रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर्स कंपनियां प्राइवेसी को लेकर बड़े दावे करती हैं. जैसे – यूजर डेटा एन्क्रिप्टेड होता है और इसका मिसयूज किसी भी हालत में नहीं किया जा सकता है।

    बहरहाल, अमेरिकी सरकार का कहना है कि ऐसे डिवाइस बड़ी मात्रा में डेटा इकट्ठा करते हैं. अगर यह डेटा गलत हाथों में चला जाए तो सुरक्षा से जुड़ी चिंता पैदा हो सकती है. इसी वजह से यह कदम उठाया गया है।


    किन कंपनियों पर पड़ सकता है असर?

    रोबोट वैक्यूम बाजार में चीन की कंपनियों का दबदबा है. Roborock, Ecovacs, Xiaomi, Narwal और Dreame जैसे ब्रांड दुनिया के कई देशों में अपने प्रोडक्ट बेचते हैं. नए नियमों का सबसे ज्यादा असर इन्हीं कंपनियों पर पड़ सकता है।


    क्या पुराने रोबोट वैक्यूम बंद हो जाएंगे?

    नहीं. अगर आपने पहले से कोई रोबोट वैक्यूम खरीदा हुआ है तो उसे इस्तेमाल करने पर कोई रोक नहीं है. यह नियम सिर्फ नए मॉडल और फ्यूचर में होने वाले नए आयात पर लागू होगा. यानी पहले से बिक चुके या मंजूरी पा चुके डिवाइस फिलहाल प्रभावित नहीं होंगे।


    क्या सिर्फ रोबोट वैक्यूम पर ही असर होगा?

    नहीं. यह फैसला सिर्फ रोबोट वैक्यूम तक लिमिटेड नहीं है. कुछ दूसरे एडवांस मोबाइल रोबोट भी इस दायरे में आते हैं. हालांकि ड्रोन, मेडिकल रोबोट, कनेक्टेड वाहन और कई दूसरे रोबोट इस नियम से बाहर रखे गए हैं.


    चीन ने क्या कहा?

    अमेरिका के इस फैसले के बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. चीन का कहना है कि नैशनल सिक्योरिटी का हवाला देकर चीनी कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है. उसने चेतावनी दी है कि अगर यह नीति जारी रही तो जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं.


    भारत के यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

    फिलहाल इस फैसले का भारत में सीधे तौर पर कोई असर नहीं पड़ेगा. भारत में Roborock, Dreame, Ecovacs, Xiaomi और दूसरे ब्रांड अपने प्रोडक्ट बेचते रहेंगे. हालांकि अगर अमेरिका में इन कंपनियों की बिक्री प्रभावित होती है, तो फ्यूचर में में उनकी ग्लोबल स्ट्रैटिजी, कीमतों या नए प्रोडक्ट लॉन्च पर कुछ असर देखने को मिल सकता है।

  • MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'

    MP कांग्रेस अध्यक्ष की दतिया में अधिकारियों को धमकी, कहा- 'जीतू पटवारी कहते हैं, गड़बड़ी हुई तो देख लूंगा'


    दतिया । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव का प्रचार चरम पर पहुंचने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी तीखी होती जा रही है. बसई इलाके के ठकुरपुरा गांव में कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह के समर्थन में आयोजित एक नुक्कड़ सभा में पहुंचे मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है.

    सभा को संबोधित करते हुए जीतू पटवारी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर दिया और पुलिस व प्रशासनिक अमले को आड़े हाथों लिया. मंच से बोलते हुए उनके बोल काफी कड़े नजर आए.

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अधिकारियों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, ”मुझे जीतू पटवारी कहते हैं, अगर चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात हुआ तो समझ लेना, चुनाव के बाद में देखूंगा.”

    उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए. अगर किसी भी कर्मचारी या अधिकारी ने एकतरफा कार्रवाई की, तो चुनाव के बाद उनसे हिसाब लिया जाएगा.

    बढ़ते अपराधों और स्थानीय मुद्दों पर घेरा
    अधिकारियों पर निशाना साधने के साथ-साथ जीतू पटवारी ने दतिया क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी शिवराज या मोहन सरकार और स्थानीय सत्ता तंत्र पर जमकर हमला बोला.

    उन्होंने क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अपराध, हत्या, आत्महत्या और जमीन विवाद से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए जनता के प्रति संवेदना जताई.उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी हर सुख-दुख में दतिया की जनता के साथ मजबूती से खड़ी है.

    फिलहाल कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस तीखे बयान पर जिला प्रशासन या पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान के बाद दतिया में चुनावी मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है.

  • न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप

    न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप


    नई दिल्‍ली । New York इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी से जूझ रहा है. तापमान 100 डिग्री और हीट इंडेक्स 112 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है. इस बीच, शहर के नए मेयर ज़ोहरान मम्दानी (Zohran Mamdani) ने न्यू यॉर्कर्स के लिए एक बेहद जरूरी और कड़ा संदेश जारी किया है. यूरोप में हाल ही में आए AC नियमों के बाद अब न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड भी खतरे में है. मेयर ने साफ कहा है कि अगर ग्रिड को बचाना है और लोगों की जान सुरक्षित रखनी है, तो AC चलाने के तरीकों में तुरंत बदलाव करना होगा.

    Europe का AC नियम और New York का संकट
    यूरोपियन कमीशन ने हाल ही में एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत AC इंस्टॉल करने वालों को ग्राहकों को एनर्जी एफिशिएंसी की पूरी जानकारी देनी होगी. फ्रांस और स्पेन जैसे देशों में रिकॉर्ड गर्मी के कारण AC की बिक्री अचानक बहुत बढ़ गई है. अब ठीक वैसा ही संकट न्यू यॉर्क के सामने खड़ा हो गया है. न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड इस समय शहर को ठंडा रखने के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है.

    Mayor Mamdani का ’78 डिग्री रूल’
    मेयर ज़ोहरान मम्दानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से अपील की है. उन्होंने लिखा कि न्यू यॉर्क में बाहर बहुत गर्मी है और हमारा पावर ग्रिड ओवरटाइम काम कर रहा है. मेयर ने सभी नागरिकों से अपने AC को 78 डिग्री पर सेट करने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने इस्तेमाल में न आने वाली लाइटों और इलेक्ट्रॉनिक्स को बंद करने और प्लग निकालने के लिए कहा है. मेयर का मानना है कि ग्रिड स्थिर रहेगा तो AC चलता रहेगा और लोगों की जान बचाई जा सकेगी.

    सरकार खुद कर रही है नियमों का पालन
    इस संकट से निपटने के लिए सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि खुद न्यू यॉर्क प्रशासन भी कड़े कदम उठा रहा है. मेयर ने बताया कि सभी सरकारी इमारतों में भी 78 डिग्री का नियम लागू कर दिया गया है. पीक ऑवर्स के दौरान सरकारी दफ्तरों की लाइटें डिम या पूरी तरह बंद की जा रही हैं. गैर-जरूरी उपकरणों को पावर डाउन किया जा रहा है. प्रशासन ने न्यू यॉर्क की प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की है कि वे इस संकट में शहर का साथ दें और बिजली की खपत कम करें.

    112 डिग्री का टॉर्चर और हीट इमरजेंसी
    नेशनल वेदर सर्विस ने न्यू यॉर्क सिटी के लिए ‘एक्सट्रीम हीट वॉर्निंग’ जारी की है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह पिछले एक दशक की सबसे खतरनाक हीटवेव हो सकती है. गर्मी का अहसास (Heat Index) 112 डिग्री तक जा सकता है. इसके लिए शहर में ‘हीट इमरजेंसी प्लान’ एक्टिव कर दिया गया है. प्रशासन ने उन लोगों के लिए कूलिंग सेंटर्स खोले हैं, जिनके घरों में AC की सुविधा नहीं है. बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को घरों के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है.

    मेयर की कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल
    एक तरफ जहां मेयर मम्दानी शहर को गर्मी से बचाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यू यॉर्क का बिजनेस माहौल गरमा गया है. दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल जेफ बेजोस (Jeff Bezos) ने न्यू यॉर्क के स्कूल सिस्टम पर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद मेयर के साथ उनकी बहस छिड़ गई है. शार्क टैंक के केविन ओ’लेरी ने भी बेजोस का समर्थन करते हुए न्यू यॉर्क को ‘कम्पलीट डिजास्टर’ करार दिया है. ब्लैकरॉक के लैरी फिंक ने भी चेतावनी दी है कि भारी टैक्स और खराब माहौल के कारण अमीर लोग न्यू यॉर्क छोड़ सकते हैं, जिससे शहर को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा.

  • ईरान युद्ध के बीच ट्रंप की धमकी… 4 साल से जंग लड़ रहा ये छोटा सा देश बन सकता है बलि का बकरा!

    ईरान युद्ध के बीच ट्रंप की धमकी… 4 साल से जंग लड़ रहा ये छोटा सा देश बन सकता है बलि का बकरा!


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) नाटो (NATO) समूह के अन्य साथी देशों पर बुरी तरह भड़के हुए हैं। ईरान युद्ध (Iran War) के बीच नाटो देशों ने अमेरिका को एक के बाद एक झटके दिए हैं जिससे ट्रंप खिसियाए हुए हैं और यह धमकी भी दी है कि अमेरिका खुद को नाटो से अलग कर लेगा। इस बीच अब खबर है कि इन सब का खामियाजा एक छोटे से देश को भुगतना पड़ सकता है। यह देश है यूक्रेन। बीते 4 सालों से खुद रूस के साथ जंग लड़ रहा यूक्रेन अब ईरान युद्ध में बलि का बकरा बन सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने के लिए ट्रंप यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई पर रोक लगाने की बात कर रहे हैं।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने हाल ही में यूक्रेन के लिए हथियारों की सप्लाई रोकने की धमकी दी है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप की इस धमकी का मकसद पश्चिमी देशों पर दबाव डालना है ताकि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के अमेरिका की मदद करें। विश्लेषकों के अनुसार, यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध के बीच नाटो सहयोगियों के लिए ट्रंप का यह बयान बेहद चिंता का विषय है।

    कई देशों ने दिया झटका
    ट्रंप की यह धमकी नाटो देशों से मिले झटके के बाद आई है। फ्रांस, स्पेन, इटली समेत कई देशों ने ट्रंप को करारा झटका देते हुए ट्रंप को अपने बेस इस्तेमाल करने देने से इनकार कर दिया है। वहीं कई पश्चिमी देशों ने ट्रंप के उस प्लान का हिस्सा बनने से भी इनकार दिया, जिसके तहत ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए एक गठबंधन बनाने का ऐलान किया था। यूरोपीय देशों ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया है कि यह उनकी लड़ाई नहीं है।

    बता दें कि ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्ग में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है और ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना रहा है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके बाद अब ट्रंप इस रास्ते को खुलवाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।

    नाटो को बताया ‘कागजी शेर’
    इसके बाद से ट्रंप नाटो देशों पर लगातार हमलवार हैं। ट्रंप ने टेलीग्राफ को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि वह उस नाटो सदस्यता को समाप्त करने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने नाटो से संभावित अलगाव पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, “हां, यह अब इस पर विचार किया जा रहा है। कभी भी नाटो से प्रभावित नहीं रहा। मुझे हमेशा पता था कि यह एक ‘पेपर टाइगर’ है, और (रूस के राष्ट्रपति) व्लादिमीर पुतिन भी यह जानते हैं।”

    लंबे समय से की है आलोचना
    गौरतलब है कि ट्रंप लंबे समय से नाटो की आलोचना करते रहे हैं और इसे अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर बताते हुए कई बार इससे बाहर निकलने की चेतावनी दे चुके हैं। हालांकि अमेरिकी कानून के तहत नाटो से बाहर निकलने या सदस्यता निलंबित करने के लिए वाइट हाउस को सीनेट की “सलाह और सहमति” प्राप्त करनी होती है, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है।

  • मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग

    मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग




    मुरैना।
    वकील मृत्युंजय चौहान के सुसाइड केस में नया मोड़ आया है। बुधवार को मृतक वकील की मां, शिवकुमारी जादौन, मुरैना एसपी समीर सौरभ से मिलने पहुंचीं और भावुक होकर बोलीं कि उनके बेटे के साथ जो अत्याचार हुआ, उसकी न्यायिक कार्रवाई सिर्फ ग्वालियर में नहीं, बल्कि मुरैना में भी हो। उन्होंने कहा, “मुझे भी यहीं मार डालो, मेरा बेटा तो चला ही गया।

    मृत्युंजय की मां ने आरोप लगाया कि मुरैना पुलिस अब तक किसी ठोस कार्रवाई में नहीं जुटी है।

    12 दिसंबर को मुरैना सिविल लाइन की महिला एसआई प्रीति जादौन और कॉन्स्टेबल अराफात खान ने मृत्युंजय के साथ मारपीट की थी। इसी के चलते मृत्युंजय ने 15 दिसंबर को ग्वालियर में अपने किराए के मकान में फांसी लगाई। उन्होंने मांग की कि आरोपी महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी एफआईआर दर्ज की जाए, अवैध पिस्टल जब्त की जाए और दोनों को जिले से बाहर अटैच किया जाए क्योंकि वे परिवार को धमका रहे हैं।

    ग्वालियर पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन से पुष्टि हुई कि घटना वाले दिन आरोपी और वकील साथ थे।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला एसआई ने शादी का दबाव बनाया, पूर्व पत्नी से तलाक, जमीन-जायदाद और जेवरात हड़पने की कोशिश की। इस मामले में ग्वालियर पुलिस ने बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    एसपी ने कहा कि जांच जारी है और जैसे ही ग्वालियर पुलिस का एफआईआर प्रतिवेदन मिलेगा, दोनों आरोपियों को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया जाएगा। शिवकुमारी जादौन की यह मांग न्यायपालिका और पुलिस पर दबाव डालती है कि किसी भी तरह की अवहेलना या विलंब न्याय में बाधक न बने।

    इस पूरे मामले ने मुरैना और ग्वालियर में पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक वकील के परिवार ने स्पष्ट किया कि केवल ग्वालियर में कार्रवाई से संतोष नहीं होगा, बल्कि मुरैना में भी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।

  • तेज प्रताप यादव ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत, रंगदारी और धमकी का आरोप

    तेज प्रताप यादव ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत, रंगदारी और धमकी का आरोप


    नई दिल्ली ।तेज प्रताप यादव की ओर से पुलिस को दिए गए आवेदन में कहा गया है कि संतोष रेणु यादव लगातार फोन कॉल के जरिए उन पर दबाव बना रहे थे। आरोप है कि उनसे मोटी रकम की रंगदारी मांगी गई और मांग पूरी न होने पर राजनीतिक और व्यक्तिगत रूप से नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। तेज प्रताप ने इसे अपनी सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    सचिवालय थाना पुलिस ने तेज प्रताप यादव के आवेदन के आधार पर सनहा दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कॉल डिटेलमैसेज और अन्य सबूतों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अलर्ट मोड में है।

    संतोष रेणु यादव का पलटवार

    दूसरी ओरआरोपी बनाए गए संतोष रेणु यादव ने भी तेज प्रताप के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने पटना के बेऊर थाना में आवेदन देकर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है। संतोष रेणु यादव का आरोप है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और झूठे मामलों में उलझाकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

    संतोष रेणु यादव ने क्या कहा

    मीडिया से बातचीत में संतोष रेणु यादव ने कहा कि वे लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं और माधव सेवा नामक संगठन के अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनका रंगदारी या धमकी से कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है कि वे कानून में विश्वास रखते हैं और जांच में सच्चाई सामने आएगी।

    पुलिस का आधिकारिक बयान

    इस पूरे मामले पर पटना सिटी एसपी पश्चिमी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से लिखित आवेदन प्राप्त हुए हैं। पुलिस ने दोनों शिकायतों पर सनहा दर्ज कर ली है और निष्पक्ष जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

    पार्टी के भीतर विवाद ने बढ़ाई सियासी गर्मी

    इस घटनाक्रम ने राजद के अंदरूनी समीकरणों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर आपसी मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं। तेज प्रताप यादव जैसे बड़े नेता द्वारा अपनी ही पार्टी के पूर्व प्रवक्ता पर लगाए गए आरोपों ने विपक्ष को भी हमला बोलने का मौका दे दिया है।

    अब सबकी नजर पुलिस जांच पर


    फिलहाल पूरे मामले में सस्पेंस बना हुआ है। एक तरफ तेज प्रताप यादव के गंभीर आरोप हैंतो दूसरी ओर संतोष रेणु यादव खुद को निर्दोष बता रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और यह मामला आगे किस दिशा में जाता है।तेज प्रताप यादव से कथित रंगदारी मांगने का मामला सिर्फ एक कानूनी विवाद नहींबल्कि बिहार की राजनीति में नया सियासी तूफान बनकर उभरा है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और गर्मा सकती हैं।