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  • जर्मनी-नीदरलैंड दौरा…. ट्रंप की टैरिफ नीति और ट्रेड डील पर अनिश्चितता के बीच भारत का नया दांव

    जर्मनी-नीदरलैंड दौरा…. ट्रंप की टैरिफ नीति और ट्रेड डील पर अनिश्चितता के बीच भारत का नया दांव


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) ने बीते डेढ़ साल में भारतीय माल (Indian goods) पर शुल्क (Tariff) की दर तीन बार बदली। अब अधिकतर भारतीय सामान पर सामान्य शुल्क के ऊपर 10 फीसदी लगता है। फरवरी 2026 में 18% की दर वाले जिस अंतरिम ढांचे का एलान हुआ था, उस पर आठ महीने बाद भी हस्ताक्षर नहीं हुए। इसी अनिश्चितता के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) 22 से 24 अक्तूबर तक जर्मनी (Germany) और 24 से 27 अक्तूबर तक नीदरलैंड (Netherlands) के दौरे पर रहेंगे। उनके साथ करीब 100 कंपनियों और नवउद्यमों का दल है।

    बीते चार साल में भारत ने एक के बाद एक समझौते किए हैं और यूरोपीय संघ उसका 22वां मुक्त व्यापार साझेदार बना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के व्यापार समझौते पर सकारात्मक बयान के बावजूद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर का कहना है कि घोषणा तुरंत होने वाली नहीं है। यानी तस्वीर अब भी साफ नहीं।


    यूरोप का दरवाजा खुला, पर ताला अब तक नहीं हटा

    यूरोपीय संघ के साथ हुआ समझौता भारत का अब तक का सबसे बड़ा सौदा है। यूरोपीय संघ अपने 99.3 प्रतिशत और भारत अपने 96.6 प्रतिशत कारोबार पर शुल्क हटाएगा या घटाएगा। भारत यूरोपीय कारों पर शुल्क 110 प्रतिशत तक के स्तर से घटाकर 40 प्रतिशत पर लाएगा। पर नौ महीने बाद भी यह लागू नहीं हुआ है। गोयल का यह दौरा इसलिए नीतिगत कम और व्यावहारिक ज्यादा है।


    बर्लिन और हेग में क्या होगा

    गोयल बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में हिस्सा लेंगे और जर्मनी के आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री तथा चांसलर कार्यालय के जी-7 और जी-20 शेरपा से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। भारतीय कारोबारी दल की अलग बैठकें वाहन और उन्नत विनिर्माण, सूचना तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि एवं उपभोक्ता सामान, दवा और स्वास्थ्य में होंगी।

    नीदरलैंड में बातचीत सरकार से सरकार के स्तर पर होगी। 25 अक्तूबर को भारतीय दल रॉटरडम बंदरगाह देखने जाएगा और 26 अक्तूबर को हेग में भारत-नीदरलैंड कारोबार मंच की बैठक होगी।


    अब तक की कोशिशों से क्या मिला

    वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। इसमें वस्तुओं का निर्यात 441.8 अरब डॉलर और सेवाओं का 421.3 अरब डॉलर रहा। यह उसी साल हुआ जिस साल अमेरिका ने शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया था।

    मुक्त व्यापार समझौते वाले बाजारों में आसियान देश सबसे ऊपर रहे, जहां 38.42 अरब डॉलर का माल गया। संयुक्त अरब अमीरात 37.36 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ब्रिटेन के साथ समझौता 15 जुलाई 2026 को लागू हुआ और उसी वित्त वर्ष में वहां 13.44 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज हुआ।

    ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौते से पहले वित्त वर्ष 2020-21 में वहां भेजे माल के लिए सिर्फ 1,482 मूल प्रमाणपत्र जारी हुए थे, समझौते के बाद यह औसतन 45 हजार से ऊपर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया को निर्यात चार अरब डॉलर से बढ़कर 7.28 अरब डॉलर हो गया।

    ओमान के साथ समझौता एक जून 2026 को लागू हुआ और जून में ही वहां निर्यात पिछले महीने से 54.7 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले 189.6 प्रतिशत बढ़ गया। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के साथ समझौता अक्तूबर 2025 से लागू है और अब तक 7,885 मूल प्रमाणपत्र जारी हो चुके हैं।

  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 अक्टूबर को आएंगे भारत दौरे पर… ट्रेड डील पर बड़ी उम्मीद!

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 अक्टूबर को आएंगे भारत दौरे पर… ट्रेड डील पर बड़ी उम्मीद!


    वॉशिंगटन।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच ट्रेड डील (Trade deal) को लेकर जारी बातचीत के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री (US Secretary of State) मार्को रुबियो (Marco Rubio) 17 से 22 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर आएंगे. इस दौरान वह मुंबई और जामनगर भी जाएंगे. अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, रुबियो की यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और व्यापार, ऊर्जा तथा क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना है।

    रुबियो की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को संकेत दिया कि वार्ता किसी नतीजे के करीब पहुंच रही है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है।

    नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के दौरान जयशंकर ने ट्रेड डील से संबंधित एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्हें लगता है कि यह मुद्दा अब किसी निष्कर्ष की ओर बढ़ रहा है. जयशंकर के मुताबिक, अमेरिका अपनी घरेलू औद्योगिक क्षमता को फिर मजबूत करने और दूसरे देशों को अपने बाजार तक पहुंच देने की शर्तों में बदलाव करने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में भारत को भी अमेरिका के साथ अपने आर्थिक संबंधों की शर्तों का नए सिरे से आकलन करना होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और दूसरे देशों को उसके साथ अपने रिश्तों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ रहा है।


    उज्बेकिस्तान के बाद भारत आएंगे रुबियो

    अमेरिकी विदेश विभाग की घोषणा के मुताबिक, रुबियो पहले उज्बेकिस्तान के समरकंद जाएंगे. वहां वह मध्य एशिया के पांच गणराज्यों के साथ होने वाली सी5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे. इसके बाद वह भारत पहुंचेंगे. यह इस साल भारत की उनकी दूसरी आधिकारिक यात्रा होगी। भारत में रुबियो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. बातचीत में द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी, क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम तथा ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी. वह कारोबार जगत के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे, ताकि निवेश और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाया जा सके.

    इससे पहले मार्को रुबियो इसी मई में चार दिवसीय भारत दौरे पर आए थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की थी. उस समय रुबियो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पीएम मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी दिया था. जयशंकर के साथ बैठक के दौरान रुबियो ने भरोसा जताया था कि दोनों देश टिकाऊ व्यापार समझौते तक पहुंच सकते हैं. उन्होंने कहा था कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है और अमेरिका ऐसा समझौता करना चाहता है, जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो।

    मई की बातचीत में ऊर्जा स्रोतों में विविधता, परमाणु सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज, प्रौद्योगिकी और भारतीय यात्रियों के वीजा से जुड़े मुद्दे भी उठे थे. रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की थी. वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी लेकर आए थे।


    टैरिफ और बाजार तक पहुंच अब भी बड़ी चुनौती

    मई में हुई बातचीत के बावजूद व्यापार वार्ता में अमेरिकी शुल्क नीति और बाजार तक पहुंच को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 अक्टूबर को कहा था कि बातचीत एक ठहराव पर पहुंच गई है और दोनों पक्षों के लिए आगे रियायत देना कठिन होता जा रहा है। अमेरिका अपने व्यापार असंतुलन को दूर करने और भारतीय बाजार में अधिक पहुंच हासिल करने की कोशिश कर रहा है. वहीं, भारत चाहता है कि समझौते की शर्तें घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा करें और भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित न हो.

  • भारत-US ट्रेड डील में फंसा पेंच…. निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे कुछ और देना- लेना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल

    भारत-US ट्रेड डील में फंसा पेंच…. निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे कुछ और देना- लेना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां दोनों देशों के लिए एक-दूसरे से नई रियायत हासिल करना आसान नहीं दिख रहा. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने सोमवार को इस मुद्दे पर एक सवाल के जवाब में कहा कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, जहां इसके आगे कुछ और देना या लेना दोनों पक्षों के लिए बहुत मुश्किल होगा।

    भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत फरवरी 2025 से चल रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की वॉशिंगटन में हुई मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई थी. दोनों देशों ने 2030 तक आपसी कारोबार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था.

    ट्रेड डील में कहां फंसी बात?

    म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब तक हुई बातचीत काफी कड़ी रही है और दोनों पक्षों ने अपने-अपने हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते पर चर्चा की है. उनके मुताबिक, मौजूदा स्थिति से आगे बढ़कर ज्यादा देना या लेना भारत और अमेरिका दोनों के लिए काफी मुश्किल होगा. सीतारमण ने यह भी कहा कि वह यह मानना चाहेंगी कि दोनों देश बातचीत में एक ‘प्लैटो’ (Plateau) पर पहुंच गए हैं. यानी अब समझौते के अगले चरण में पहुंचने के लिए दोनों पक्षों को अपनी मौजूदा स्थिति से आगे बढ़ना होगा, जो आसान नहीं है.


    अंतरिम समझौते पर सहमति

    दोनों देश एक साल से ज्यादा समय से बड़े व्यापार समझौते से पहले अंतरिम समझौते पर भी काम कर रहे हैं. फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका ने इस अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट के लिए एक फ्रेमवर्क का ऐलान किया था. उस समय यह भी साफ किया गया था कि व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए आगे और बातचीत की जरूरत होगी. इसके बाद पूरे 2026 में दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रही, लेकिन अब तक अंतिम समझौता नहीं हो सका है. अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने 1 अक्टूबर को भी कहा था कि ट्रेड डील अभी करीब नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह साफ किया था कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है।


    टैरिफ-मार्केट एक्सेस बड़े मुद्दे

    बातचीत के मौजूदा दौर में टैरिफ, बाजार तक पहुंच और दोनों देशों के बीच बड़े व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे अहम बने हुए हैं. यानी मामला सिर्फ आयात शुल्क (Import Duty) तक सीमित नहीं है, बल्कि कई बड़े आर्थिक मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश हो रही है. इसी सिलसिले में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका के दौरे पर थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत हुई।

    अभी डील फाइनल नहीं हुई
    फिलहाल वित्त मंत्री के बयान से यह स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अभी अंतिम रूप नहीं ले पाई है. निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि दोनों देशों के व्यापार में फिलहाल भारत फायदे में हैं और अमेरिका अपने पुराने नुकसान की भरपाई करने और इस व्यापारिक अंतर को कम करने की कोशिश में जुटा है. वित्त मंत्री ने व्यापार घाटा कम करने के लिए अमेरिका द्वारा बार-बार टैरिफ बढ़ाने के तरीके पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसे मामले बातचीत से ही सुलझाए जाते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बहुत बड़ा है, फिर भी इसे सिर्फ भारी टैक्स लगाकर ठीक नहीं किया जा सकता, इसके लिए आपसी बातचीत और लेन-देन का रास्ता अपनाना होगा।

  • भारत-अमेरिका के बीच निर्णायक मोड़ पर पहुंची ट्रेड डील, 90 फीसदी से ज्यादा काम पूरा

    भारत-अमेरिका के बीच निर्णायक मोड़ पर पहुंची ट्रेड डील, 90 फीसदी से ज्यादा काम पूरा


    नई दिल्‍ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के संबंधों में सालो से व्‍यापार सबसे बड़ा अड़चन बना हुआ था, लेकिन अब दोनों देश एक निर्णायक मोड़ क करीब दिख रहे हैं. अमेरिकी विदेश विभाग के सीनियर अधिकारी ने कहा है कि प्रस्‍ताव‍ित समझौता 90 फीसदी (Agreement 90% Complete) से ज्‍यादा पूरा हो चुका है, बस मसले बचे हुए हैं.।

    अधिकारी ने कहा कि यह डील दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जा सकता है। इस सवाल- कब डील पर साइन हो सकता है, के जवाब में अधिकार ने कहा कि मैं यही कहूंगा कि देखते रहिए, जैसा कि हम बार-बार कहते हैं, 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है और बस कुछ आखिरी चीजें तय की जा रही हैं. इस कारण मुझे उम्‍मीद है कि आपको इस बारे में बहुत जल्‍द कुछ जानकारी मिलेगी.।

    अधिकारी ने आगे कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाएगा. अधिकारी ने यह भी कहा कि और इससे वास्तव में अमेरिका-भारत संबंधों में एक नया आयाम जुड़ेगा, जो व्यापार के मामले में दशकों से हमारे लिए संभव नहीं हो पाया है. यह हमेशा से ही संबंधों में सबसे बड़ी बाधा रही है।


    पीयूष गोयल ने कहा- बस ये काम बाकी

    इससे पहले कमर्शियल और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी संकेत दिया था कि बातचीत लगभग पूरी होने वाली है. गुरुवार को नई दिल्ली में पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दे दिया है, जिनमें अमेरिका के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है. उन्होंने आगे कहा कि हमें बस अपने लिए सही लाभ खोजना है ताकि हम समझौते को जल्‍द से लागू कर सकें।

    भारत और अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे का ऐलान किया था. हालांकि, अमेरिकी टैरिफ में बदलाव के कारण आगे की बातचीत की आवश्यकता पड़ी. गोयल ने कहा कि भारत के व्यापार समझौते वैश्विक जीडीपी के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से वाले बाजारों तक तरजीही पहुंच प्रदान करेंगे।


    पीएम मोदी दिसंबर में अमेरिकी यात्रा पर

    अमेरिकी अधिकरी ने संबंधों में चल रही व्‍यस्‍तता की ओर भी इशारा किया. विदेश मंत्री मार्को रुबियो अक्‍टूबर में भारी दौरे पर आने वाले हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले G20 शिखर सम्‍मेलन के लिए अमेरिका की यात्रा करेंगे. अधिकारी ने कहा कि संबंधों में बहुत कुछ चल रहा है. अधिकारी ने कहा कि क्वाड देशों के विदेश मंत्री इस साल तीसरी बार मिलने वाले हैं।

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तब लागू होगा जब भारत को तुलनात्मक लाभ मिलेगा: गोयल

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तब लागू होगा जब भारत को तुलनात्मक लाभ मिलेगा: गोयल


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण तभी लागू होगा, जब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में लाभ मिले।

    पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने भरोसा जताया कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण तब लागू हो जाएगा, जब अमेरिका भारतीय निर्यात को पड़ोसी देशों और आसियान देशों के मुकाबले टैरिफ के मामले में बेहतर स्थिति देगा।

    संवाददाताओं से बात करते हुए गोयल ने कहा कि भारत ने बीटीए के शुरुआती चरण पर बातचीत पूरी कर ली है और अब अमेरिका की तरफ से ज़रूरी कदमों का इंतज़ार कर रहा है। उन्होंने कहा कि यही इस समझौते के पहले चरण का मूल आधार है और जैसे ही यह आधार फिर से स्थापित होगा, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता लागू करने के लिए तैयार होगा। अमेरिका ने उस जांच के तहत भारत पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाया है।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की कानूनी समीक्षा अंतिम चरण में है। गोयल ने कहा, ‘‘जब तक भारत को प्रतिस्पर्धी बढ़त या कम से कम प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर शुल्क दरें मिलती रहेंगी, तबतक भारत, अमेरिका को अपना निर्यात बढ़ाता रहेगा और वहां उपलब्ध विशाल बाजार के अवसरों का लाभ भी उठाता रहेगा।’

    उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान में इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा की थी।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, 3-4 महीने में साइनिंग की उम्मीद, जाने क्‍यों अटका समझौता?

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, 3-4 महीने में साइनिंग की उम्मीद, जाने क्‍यों अटका समझौता?


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित ट्रेड डील अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, समझौते की शर्तों पर सहमति बन चुकी है और दस्तावेज भी तैयार हैं। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगले तीन से चार महीनों के भीतर दोनों देशों के बीच इस अहम व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

    आखिर देरी क्यों हो रही है?
    मनीला में आयोजित आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की शर्तें अंतिम रूप ले चुकी हैं। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर फिलहाल अमेरिका में चल रही सेक्शन 301 (Section 301) ट्रेड जांच के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

    अधिकारी के मुताबिक, भारत सहित करीब 60 देशों से जुड़े मामलों की जांच इस प्रावधान के तहत चल रही है, जिसके नतीजे अगले दो से तीन सप्ताह में आने की संभावना है। जांच पूरी होने के बाद अमेरिका भारत समेत अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।

    क्या है सेक्शन 301?
    अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 के तहत सेक्शन 301 अमेरिका को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी देश की व्यापारिक नीतियों की जांच कर सके। यदि जांच में अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव या अनुचित व्यापारिक व्यवहार पाया जाता है तो अमेरिका उस देश पर व्यापारिक प्रतिबंध, अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) या अन्य कार्रवाई कर सकता है।

    हाल के दिनों में अमेरिका ने इसी प्रावधान के तहत ब्राजील और कनाडा पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ व्यापारिक वार्ता में भी इस प्रावधान का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकते हैं।

    टैरिफ भी बना बड़ी चुनौती
    भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता के दौरान टैरिफ का मुद्दा भी प्रमुख बाधाओं में शामिल रहा है। अमेरिका पहले ही कई देशों पर 12.5 प्रतिशत तक नए टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दे चुका है। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने जेनेरिक दवाओं पर भी चरणबद्ध तरीके से 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की योजना की घोषणा की है। प्रस्ताव के अनुसार पहले दो वर्षों तक टैरिफ में राहत, उसके बाद एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत तक शुल्क लागू किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका सेक्शन 301 और टैरिफ नीति के जरिए अपनी शर्तों के अनुरूप समझौता करना चाहता है। वहीं भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह केवल ऐसे व्यापारिक समझौतों को स्वीकार करेगा, जो उसके राष्ट्रीय और आर्थिक हितों के अनुरूप हों।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद की खबरों को सर्जियो गोर ने बताया गलत, बोले- बातचीत सकारात्मक दिशा में जारी

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर विवाद की खबरों को सर्जियो गोर ने बताया गलत, बोले- बातचीत सकारात्मक दिशा में जारी


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर चल रही अटकलों पर अब अमेरिकी पक्ष की ओर से सफाई सामने आई है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अटक गया है या किसी पक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया है।

    सर्जियो गोर ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ऐसी खबरें गलत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका दोनों ही व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हाल की बातचीत सकारात्मक रही है।

    सर्जियो गोर ने कहा- किसी पक्ष ने डील रिजेक्ट नहीं की
    अमेरिकी राजदूत ने एक्स पर लिखा, “फेक न्यूज अलर्ट! किसी ने कुछ भी रिजेक्ट नहीं किया है।” उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ रही है और ट्रेड डील को पूरा करने के लिए दोनों पक्ष सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि संबंधित पक्षों को इससे बेहतर काम करना चाहिए।

    भारत सरकार ने भी रिपोर्टों को बताया भ्रामक
    भारत सरकार ने भी उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि नई दिल्ली व्यापार समझौते में देरी कर रही है या पीछे हट गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इन दावों को झूठा, आधारहीन और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता लगातार जारी है और समझौते की दिशा में काफी प्रगति हुई है।

    गोयल ने यह भी कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील से दूरी नहीं बनाई है और न ही जानबूझकर इसमें देरी की जा रही है। उन्होंने रॉयटर्स की रिपोर्ट में किए गए दावों को पूरी तरह गलत बताया।

    क्या थी रिपोर्ट में कही गई बात?
    इससे पहले समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत और अमेरिका बेहतर शर्तों की तलाश में व्यापार समझौते को लेकर सहमति तक नहीं पहुंच सके हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए किसी ऐसे समझौते में जल्दबाजी नहीं करना चाहता, जिससे घरेलू स्तर पर नुकसान हो। इसमें यह भी दावा किया गया था कि दोनों देश अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेसन ग्रीयर की भारत यात्रा के दौरान अंतरिम समझौते की शर्तों को अंतिम रूप देने में सफल नहीं हो पाए।

    रिपोर्ट के अनुसार, एक भारतीय अधिकारी ने दावा किया था कि अमेरिका की ओर से कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। इनमें चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को लेकर टैरिफ लाभ और समझौते के बाद नए अमेरिकी शुल्कों से सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल बताए गए थे।

    संवेदनशील क्षेत्रों पर भारत का रुख
    रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि भारत कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करना चाहता। भारत का जोर ऐसे व्यापार समझौते पर है, जो दोनों देशों के हितों के अनुरूप हो। फिलहाल भारत और अमेरिका दोनों की ओर से यही संकेत दिए गए हैं कि बातचीत जारी है और ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

  • अमेरिका ने ट्रेड डील से पहले दिए सकारात्मक संकेत… 4 भारतीय कंपनियों को से हटाए बैन

    अमेरिका ने ट्रेड डील से पहले दिए सकारात्मक संकेत… 4 भारतीय कंपनियों को से हटाए बैन


    नई दिल्ली।
    भारत (India) के लिए अमेरिका (America) से अच्छी खबर आई है. रूस के साथ कथित व्यापार संबंधों को लेकर चार भारतीय कंपनियों (Indian Companies) पर लगाए गए प्रतिबंध हटा लिए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार से अमेरिका द्वारा ये बैन हटाए गए हैं और इसकी जानकारी अमेरिकी वित्त विभाग ने शेयर करते हुए कहा है कि US ने चार भारतीय कंपनियों पर उन बैन को हटाया है, जो रूस के सैन्य-औद्योगिक अड्डे का समर्थन करने के लिए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और उपकरण की आपूर्ति करने के आरोपों पर लगाए गए थे. अब अमेरिका की प्रतिबंध लिस्ट से अलग हो गई हैं।


    इन कंपनियों को बड़ी राहत

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक हैदराबाद स्थित आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (RRG Engineering Technologies) और लोकेश मशीन्स लिमिटेड पर से प्रतिबंध हटाए गए हैं. तो वहीं अहमदाबाद स्थित गैलेक्सी बियरिंग्स और नई दिल्ली स्थित शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड को विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFC) की बैन लिस्ट से हटा दिया गया है.


    गैलेक्सी पर 2024 में लगा था बैन

    भारतीय कंपनी गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड पर अक्टूबर 2024 में प्रतिबंध लगाया गया था. अमेरिका ने उस समय कंपनी पर रोलर बियरिंग और रोलर असेंबली समेत दर्जनों हाई क्वालिटी वाले दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं को रूसी संस्थाओं को निर्यात करने का आरोप लगाया था. अब अमेरिकी वित्त विभाग ने इन आरोपों को वापस लेते हुए कंपनी पर से हैन हटा दिए हैं.

    अन्य तीन कंपनियों में अगला नाम शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड का है, जिसे बैन मुक्त कर दिया गया है. इसपर कथित तौर पर रडार उपकरण, रेडियो नेविगेशनल एंड उपकरण, रेडियो रिमोट कंट्रोल उपकरण और दूसरे इलेक्ट्रिक उपकरण रूस को भेजने के आरोप लगा गए थे.


    RRG पर इसलिए था प्रतिबंध

    अमेरिका ने भारतीय कंपनी आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज पर रूस स्थित कंपनी आर्टेक्स लिमिटेड को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स की 100 से अधिक खेपें भेजने का आरोप लगाया गया था. इसके बाद इसे प्रतिबंध वाली अमेरिकी लिस्ट में शामिल किया गया था.

    एक अन्य भारतीय कंपनी अमेरिका की इस प्रतिबंधों वाली लिस्ट में शामिल थी, जिसका नाम लोकेश मशीन्स है और इस पर विभिन्न रूसी मैन्युफेक्चरिंग कंपनियों को मशीन टूल्स की दर्जनों खेपों की आपूर्ति करने का आरोप लगाया गया था.


    ट्रेड डील से पहले आई खबर

    US-Iran Trade Deal पर बातचीत का दौर जारी है और दोनों ही देश टैरिफ विवाद के बाद अब अपने रिश्तों को ट्रैक पर लाने की कोशिश में लगे हुए हैं. अमेरिका की ओर से भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध हटाया जाना एक पॉजिटिव सिग्नल माना जा रहा है. रिपोर्ट्स में दोनों देशों के बीच डील पर बातचीत अब अंतिम चरण में बताई जा रही है।

  • भारत-ब्राजील के बीच हुई ट्रेड डील, पीएम मोदी ने कहा- ‘आतंकवाद और विकास के मुद्दों पर दोनों देश साथ हैं’

    भारत-ब्राजील के बीच हुई ट्रेड डील, पीएम मोदी ने कहा- ‘आतंकवाद और विकास के मुद्दों पर दोनों देश साथ हैं’


    नई दिल्ली । भारत और ब्राजील ने अपने द्विपक्षीय संबंधों में नया मुकाम हासिल किया है। दोनों देशों ने ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा की द्विपक्षीय वार्ता के बाद औपचारिक रूप दिया गया।

    पीएम मोदी ने राष्ट्रपति लूला और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और विजन ने भारत-ब्राजील संबंधों को लंबे समय से मजबूती दी है। मोदी ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच पिछले वर्षों में हुई कई बैठकों ने भारत के प्रति राष्ट्रपति लूला की गहरी मित्रता और भरोसा स्पष्ट किया है।

    व्यापार को 20 अरब डॉलर से आगे ले जाने का लक्ष्य
    प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि ब्राजील लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साथी है। दोनों देश अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर से ऊपर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, “हमारा व्यापार सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि आपसी भरोसे की झलक में भी निहित है। राष्ट्रपति लूला के साथ आया बिजनेस डेलीगेशन इसी भरोसे को दर्शाता है।”

    टेक्नोलॉजी और ग्लोबल साउथ पर ध्यान
    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग न केवल भारत और ब्राजील के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी नई संभावनाएं खोलेगा। AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम में साझेदारी से विकासशील देशों को तेजी से विकास का मार्ग मिल सकता है।

  • इंडिया-US ट्रेड डील पर अंतिम दौर में.. पीयूष गोयल बोले-मार्च में समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना

    इंडिया-US ट्रेड डील पर अंतिम दौर में.. पीयूष गोयल बोले-मार्च में समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना


    नई दिल्ली।
    वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने शुक्रवार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों (India-America Trade Agreements) को लेकर कई अहम जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच एक ‘अंतरिम व्यापार समझौते’ पर इस साल मार्च में हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है और इसे अप्रैल के महीने से पूरी तरह लागू (ऑपरेशनल) कर दिया जाएगा।


    भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

    इस समझौते के कानूनी मसौदे (लीगल टेक्स्ट) को अंतिम रूप देने के लिए 23 फरवरी से अमेरिका में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक शुरू होने जा रही है। गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह स्पष्ट कर दिया था कि इस अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क) पहले ही तय कर ली गई है।

    समझौते की प्रमुख शर्तों में कहा गया है कि भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं एवं अमेरिकी खाद्य व कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या घटाएगा। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम, ट्री नट्स, ताजे और प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। साथ ही भारत ने अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदने तथा ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य क्षेत्रों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।

    ‘समृद्ध भविष्य की राह’ शीर्षक वाले खंड में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी जनता के हितों को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच बढ़ा रहे हैं। साथ ही आर्थिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए शुल्क एवं गैर-शुल्क बाधाओं को कम कर रहे हैं। इसमें कहा गया- भारत ने दुनिया की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में अमेरिका पर सबसे अधिक शुल्क बनाए रखे हैं, जहां कृषि उत्पादों पर औसतन 37 प्रतिशत तक और कुछ वाहनों पर 100 प्रतिशत से अधिक शुल्क है। भारत का इतिहास अत्यधिक संरक्षणवादी गैर-शुल्क बाधाएं लगाने का भी रहा है जिनके कारण अमेरिका के कई निर्यात भारत में प्रतिबंधित रहे हैं।’ दस्तावेज के अनुसार- आने वाले हफ्तों में अमेरिका और भारत इस ढांचे को शीघ्र लागू करेंगे और अमेरिकी श्रमिकों तथा कारोबार के लिए लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारस्परिक रूप से लाभकारी बीटीए को अंतिम रूप देने की दिशा में अंतरिम समझौते पर काम करेंगे।’

    ब्रिटेन और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA): केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यह भी जानकारी दी कि केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन (UK) और ओमान के साथ भी भारत के बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) अप्रैल महीने में लागू होने की पूरी उम्मीद है। न्यूजीलैंड के साथ समझौता: इसके अलावा, भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले व्यापार समझौते के भी इसी साल सितंबर महीने तक लागू होने की संभावना जताई गई है। इन सभी व्यापारिक समझौतों के लागू होने से भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को एक नई गति मिलने और निर्यात के क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा होने की उम्मीद है।