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  • निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर दिया जोर, बातचीत अंतिम चरण में पहुंची

    निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर दिया जोर, बातचीत अंतिम चरण में पहुंची

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते का निष्पादन वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के हित में होगा। उनके अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत अब अंतिम चरण के करीब पहुंचती दिखाई दे रही है। ऐसे में समझौते को जल्द पूरा करना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    सीतारमण ने यह बात बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों से इतर अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत के दौरान कही। उन्होंने संकेत दिया कि व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार चर्चा हो रही है और इसके जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार होने की उम्मीद है।
    वित्त मंत्री ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हालिया बयान का भी उल्लेख किया। गोयल ने एक-दो दिन पहले उम्मीद जताई थी कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार हो सकता है। इससे पहले उन्होंने बताया था कि समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और फिलहाल उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है।
    गोयल के अनुसार, समझौते को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि भारत को समान प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिले। इस रुख से स्पष्ट है कि समझौते को आगे बढ़ाने के साथ भारत अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों को भी ध्यान में रख रहा है।
    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष की ओर से भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को कहा था कि प्रस्तावित समझौते का व्यापक ढांचा तैयार हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में यह बात कही थी।
    व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था विभिन्न अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे माहौल में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और इसके लागू होने की तारीख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
    बातचीत के दौरान सीतारमण ने भारत की आर्थिक वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश अपनी विकास दर बनाए रखने में सफल रहा है। उनके अनुसार, कोविड महामारी के बाद पिछले चार से पांच वर्षों के दौरान भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है।
    वित्त मंत्री ने इस प्रदर्शन का श्रेय समावेशी विकास नीतियों, कौशल विकास में निवेश और वित्तीय अनुशासन को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझती है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सहायता करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ सरकारी खर्च को अनुशासित बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
    सीतारमण ने बुनियादी ढांचे के विकास में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय की भूमिका पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, इस खर्च से देश में आधारभूत सुविधाओं के निर्माण को गति मिली है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर इसका व्यापक गुणक प्रभाव पड़ा है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की उनकी अपील के साथ आर्थिक विकास, वित्तीय अनुशासन और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
  • पीयूष गोयल की अमेरिकी कंपनियों से अहम मुलाकातें, भारत में निवेश बढ़ाने को लेकर इन क्षेत्रों पर हुई चर्चा

    पीयूष गोयल की अमेरिकी कंपनियों से अहम मुलाकातें, भारत में निवेश बढ़ाने को लेकर इन क्षेत्रों पर हुई चर्चा

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इन बैठकों में भारत में निवेश बढ़ाने, कारोबार के विस्तार और दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा हुई। बातचीत के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं और भारत में कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया गया।

    पीयूष गोयल ने ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी जोनाथन ग्रे और अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट इक्विटी कारोबार के चेयरमैन प्रकाश मेलवानी के साथ बैठक की। इसमें भारत में निवेश और साझेदारी को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश के विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बैठक में भारत में कारोबार के लिए मौजूद अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    उन्होंने न्यूबर्गर बरमन के चेयरमैन एवं सीईओ जॉर्ज वॉकर और उनकी नेतृत्व टीम से भी मुलाकात की। इस दौरान वित्तीय सेवाओं और वेल्थ मैनेजमेंट के क्षेत्र में निवेश सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर बातचीत हुई। भारत में इन क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी अवसरों और भविष्य की साझेदारी की संभावनाओं को चर्चा में शामिल किया गया।

    एस्टी लॉडर कंपनीज के अध्यक्ष एवं सीईओ स्टेफान डी फावेरी के साथ हुई बैठक में भारत के तेजी से बढ़ते ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार पर चर्चा की गई। इस दौरान भारत में विनिर्माण गतिविधियों और स्थानीय सोर्सिंग को बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। बैठक में भारतीय बाजार की जरूरतों और कंपनी की संभावित भागीदारी से जुड़े विषयों पर बातचीत की गई।

    आईबीएम के चेयरमैन और सीईओ अरविंद कृष्णा के साथ बैठक में भारत में कंपनी की भागीदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विशेष रूप से विचार किया गया। तकनीकी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के अवसर भी चर्चा का हिस्सा रहे।

    पीयूष गोयल ने मेटलाइफ के अध्यक्ष एवं सीईओ मिशेल ए. खलाफ से भी मुलाकात की। बैठक में भारत के बीमा और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों तथा कंपनी के संभावित विस्तार पर चर्चा हुई। इसके अलावा जनरल अटलांटिक के चेयरमैन एवं सीईओ विलियम ई. फोर्ड के साथ निवेश और व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

    एआईए ग्रुप के गैर-कार्यकारी चेयरमैन मार्क टकर के साथ हुई बातचीत में भारत के बीमा और वित्तीय सेवाओं के अवसरों पर चर्चा की गई। इस दौरान वर्ष 2047 तक सभी के लिए बीमा के लक्ष्य को भी रेखांकित किया गया। बैठक में इस क्षेत्र में निवेश और कारोबारी भागीदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार हुआ।

    इन बैठकों में वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और निवेश से जुड़े अवसरों पर व्यापक चर्चा हुई। भारत में अमेरिकी कंपनियों की कारोबारी भागीदारी बढ़ाने और दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

  • भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील

    भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को भारत यात्रा (India Trip) पर आए स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाई पारमेलिन (Swiss President Guy Parmelin) से द्विपक्षीय वार्ता की। इस मौके पर हरित ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी, परिवहन, आवाजाही समेत कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक के बाद संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) देशों के साथ हुए व्यापार समझौते से अगले 15 सालों में देश में सौ अरब डॉलर का निवेश आएगा और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

    एफ्टा यूरोपीय देशों का एक मुक्त व्यापार संगठन है जिसे 1960 में स्थापित किया गया था। इसमें चार देश स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बयान में कहा कि राष्ट्रपति पारमेलिन के सहयोग से एफ्टा देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू हुआ है। यह यूरोप के किसी भी आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला समझौता है जो निवेश, नवाचार और साझा समृद्धि का दस्तावेज है।

    मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड की मित्रता सदियों पुरानी है। 19वीं सदी में स्वामी विवेकानंद ने स्विस आल्प्स में हिमालय की झलक देखी थी। महात्मा गांधी ने भी स्विट्जरलैंड में समय बिताया और वहां के लोगों से संवाद किया। इन ऐतिहासिक यात्राओं की स्मृतियां हमारी मित्रता में गूंजती हैं। मोदी ने स्विट्जरलैंड के पार्मेलिन को भारत की तीन विशेष चीज़- गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर तथा हाथ से नक्काशी किया कश्मीरी अखरोट की लकड़ी का दीवार पैनल भेंट किया।


    स्विस बाजार में पहुंच बढ़ेगी

    मोदी ने कहा कि बैठक में हमने अपनी साझेदारी को एक नई गति और नई ऊंचाई दी है। स्विट्जरलैंड के बाजार में भारत की पहुंच बढ़ाने और निवेश को सुगम बनाने के लिए अहम निर्णय लिए हैं। इससे कृषि, फार्मा, वस्त्र तथा इंजीनियरिंग सामानों का स्विट्जरलैंड को निर्यात बढ़ेगा।


    अनुसंधान पर जोर

    इस दौरान स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में नए साझा अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करने पर भी सहमति जताई गई। भारत के साइंस स्टार्टअप की क्षमता निर्माण के लिए ज्यूरिख विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया गया है।


    वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करेंगे

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। वे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर कार्य करेंगे। PM मोदी ने अगले वर्ष एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए स्विट्जरलैंड को शुभकामनाएं भी दीं। इस दौरान कहा कि दोनों देश एआई को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने को बढ़ते रहेंगे।


    भारत स्विट्जरलैंड के बीच 5 प्रमुख समझौते

    प्रवासन और आवागमन साझेदारी पर समझौता हुआ। इसमें पांच साल तक के लिए बहु-प्रवेश वीजा का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक यात्रा पर छह महीने तक का प्रवास शामिल है। साथ ही नवीकरणीय एक वर्षीय छात्र परमिट भी शामिल है।

    युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान पर समझौता (वाईपीएस)हुआ। इसका उद्देश्य युवा पेशेवरों के एक से दूसरे देश में अस्थायी रोजगार ग्रहण करने के काम को नियंत्रित करना है। इससे वे अपने क्षेत्र में पेशेवर और भाषायी कौशल को बढ़ा सकते हैं। वाईपीएस में प्रति देश प्रतिवर्ष तीन सौ लोगों का आदान-प्रदान शामिल है, जिसे बढ़ाकर पांच सौ किया जा सकता है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता में सहयोग के लिए कार्यान्वयन समझौता हुआ। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग के माध्यम से प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप के लिए अकादमिक-उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करना है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और स्विस राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (एसएनएसएफ) के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य खोजपूर्ण वैज्ञानिक सहयोग का समर्थन करके, भविष्य में संयुक्त अनुसंधान के लिए साझेदारी का निर्माण करना है।

    संघीय आर्थिक कार्य, शिक्षा और अनुसंधान विभाग (ईएईआर) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच चिह्नित क्षेत्रों में परिवहन प्रौद्योगिकियों, गतिशीलता प्रणालियों और अवसंरचना के संवर्धन एवं सहयोग पर समझौता हुआ। इसका मकसद सतत अवसंरचना विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें ई-वाहनों, रोपवे, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सुरंगों और अन्य परिवहन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों और अवसंरचना को बढ़ाकर परिवहन और गतिशीलता प्रणालियों पर ध्यान दिया गया है।

  • भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे बढ़ना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल

    भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे बढ़ना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल

    नई दिल्ली ।भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन दोनों देश फिलहाल ऐसे पड़ाव पर पहुंच गए हैं, जहां आगे बढ़ना मुश्किल दिखाई दे रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि समझौते पर बेहद कठिन और गहन बातचीत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है, जबकि अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच वार्ता अभी खत्म नहीं हुई है। दोनों पक्ष यह देखने की कोशिश कर सकते हैं कि क्या आगे बातचीत की कोई गुंजाइश बाकी है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा स्थिति में दोनों देशों के लिए कुछ और देना या लेना आसान नहीं होगा। प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत काफी कठिन और व्यापक स्तर पर हुई है।

    सीतारमण ने कहा कि व्यापार संतुलन इस समय भारत के पक्ष में है और अमेरिका की प्रमुख चिंता अपने व्यापार घाटे को कम करना है। उनके अनुसार, अमेरिका की यह चिंता कई वर्षों से भारत के साथ होने वाले व्यापार में उसके नुकसान से जुड़ी हुई है। दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के लिए तय रूपरेखा के तहत हो रही है। भारत और अमेरिका ने उस समय व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखते हुए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करने की बात कही थी।

    वित्त मंत्री ने इस दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे व्यापार समझौतों को लेकर भारत के दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में पेश किया। सीतारमण के अनुसार, यह समझौता करीब दो अरब लोगों और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करेगा। उन्होंने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के इस्तेमाल किए गए वाक्यांश का उल्लेख करते हुए इसे “सभी समझौतों की मां” कहना उचित बताया।

    सीतारमण ने बताया कि भारत-यूरोपीय संघ समझौते के तहत भारत ने अपनी 92.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों और व्यापार मूल्य के करीब 97 प्रतिशत हिस्से को खोल दिया है। वहीं, यूरोपीय संघ ने व्यापार मूल्य के करीब 99 प्रतिशत और लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोला है। उन्होंने कहा कि बाजार पहुंच से जुड़ी प्रतिबद्धताओं का चयन दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता को ध्यान में रखकर किया गया। साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि इन प्रतिबद्धताओं का भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अमेरिका के साथ बातचीत में भी आगे की संभावनाओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी है।

  • भारत समुद्री बीमा पूल ने कारोबारियों को दिया युद्ध-जोखिम कवरेज, अब तक 3000 से अधिक पॉलिसी जारी

    भारत समुद्री बीमा पूल ने कारोबारियों को दिया युद्ध-जोखिम कवरेज, अब तक 3000 से अधिक पॉलिसी जारी

    नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण समुद्री कारोबार से जुड़े जोखिम बढ़ने के बीच भारत समुद्री बीमा पूल ने भारतीय समुद्री क्षेत्र के लिए युद्ध-जोखिम बीमा की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की है। इसके तहत अब तक 3000 से अधिक माल युद्ध-जोखिम बीमा पॉलिसी जारी की जा चुकी हैं। पश्चिम एशिया में टकराव के बाद युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम में करीब 35 से 40 प्रतिशत की गिरावट आने की जानकारी भी सामने आई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 7 सितंबर 2026 तक भारत समुद्री बीमा पूल ने 3000 माल युद्ध-जोखिम पॉलिसी जारी की थीं। इसके अलावा 92 जलपोत ढांचा युद्ध-जोखिम पॉलिसी और तीन संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति यानी पीएंडआई बीमा पॉलिसी भी जारी की गई हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य समुद्री व्यापार से जुड़े भारतीय पक्षकारों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

    भारत समुद्री बीमा पूल भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ-साथ उन जहाजों से जुड़े जोखिमों के लिए समुद्री बीमा उपलब्ध कराता है, जिनका स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण भारतीय संस्थाओं के पास है। इसके दायरे में भारत से आने या भारत से शुरू होने वाले माल को ले जाने वाले पोत भी शामिल हैं।

    इस पूल की शुरुआत मई 2026 में 13,906.50 करोड़ रुपये यानी 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक के कवरेज के साथ की गई थी। इसके जरिए जहाज के ढांचे, माल, संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति और युद्ध से जुड़े जोखिमों के लिए घरेलू स्तर पर बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाता है। इसका एक उद्देश्य विदेशी बीमाकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और वैश्विक व्यवधानों के दौरान भारतीय समुद्री कारोबार को निरंतर बीमा सुरक्षा देना है।

    इस व्यवस्था के तहत बीमा पॉलिसियां घरेलू बीमा कंपनियों द्वारा जारी की जाती हैं। जोखिमों का पुनर्बीमाकरण सदस्यों की प्रतिबद्धताओं के आधार पर सामूहिक रूप से किया जाता है। 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक के दावों का निपटान आरक्षित निधियों के माध्यम से किया जाता है, जबकि इससे बड़े दावों के लिए संप्रभु गारंटी का प्रावधान रखा गया है।

    भारत समुद्री बीमा पूल के माध्यम से तटीय जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम और पीएंडआई पॉलिसियां भी जारी की गई हैं। इसका उद्देश्य समुद्री कारोबार से जुड़े जोखिमों को कम करने के साथ बीमा लागत को नियंत्रित रखना और देश की समुद्री वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है।

    बीमा कवरेज के तहत जहाज के मुख्य ढांचे, उसे चलाने वाली मशीनरी और उसमें लगे उपकरणों को होने वाले नुकसान से सुरक्षा मिलती है। इससे भारतीय व्यापारिक जहाजों में लगी पूंजी को बीमा सुरक्षा मिलती है और इस तरह के जोखिमों के लिए घरेलू बीमा व्यवस्था मजबूत होती है।

    इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से भेजे जाने वाले माल को नुकसान या खराब होने के जोखिम से भी सुरक्षा मिलती है। विशेष रूप से ऐसे समुद्री रास्तों पर यह कवरेज महत्वपूर्ण है, जहां जोखिम सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक रहता है। इससे भारतीय निर्यातकों और आयातकों को अपने माल की सुरक्षा के लिहाज से सहायता मिलती है।

    युद्ध-जोखिम बीमा में सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती, आतंकवाद और दुश्मन के जहाज द्वारा कब्जे जैसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को भी शामिल किया गया है। लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले भारतीय व्यापारिक मार्गों के लिए इस तरह की सुरक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    भारत समुद्री बीमा पूल को देश की समुद्री वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य समुद्री कारोबार से जुड़े पक्षकारों को भरोसेमंद संचालन, प्रतिस्पर्धी बीमा दरों और दावों के निपटान की विश्वसनीय व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

  • पीयूष गोयल बोले- PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 20 ट्रिलियन डॉलर, 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

    पीयूष गोयल बोले- PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 20 ट्रिलियन डॉलर, 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

    नई दिल्ली ।वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि क्रय शक्ति समता यानी PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार करीब 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मंत्री ने यह बात राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 13वें पीएएफआई एनुअल फोरम 2026 में कही।

    गोयल ने कहा कि भारत अब 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, जैसे-जैसे देश इस लक्ष्य की ओर बढ़ेगा, अलग-अलग आर्थिक मापदंडों के बीच मौजूद अंतर भी कम होता जाएगा। उन्होंने भारत की बदलती आर्थिक स्थिति और वैश्विक बाजारों के साथ बढ़ते जुड़ाव को व्यापार वार्ताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

    क्रय शक्ति समता ऐसी विनिमय दरों को दर्शाती है, जिनका उद्देश्य अलग-अलग देशों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के स्तर में अंतर को ध्यान में रखते हुए मुद्राओं की वास्तविक खरीद क्षमता की तुलना करना है। इसी आधार पर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार की तुलना की जाती है।

    गोयल ने कहा कि भारत व्यापार और आर्थिक साझेदारी को लेकर ऐसी अर्थव्यवस्था के रूप में बातचीत कर रहा है, जिसके 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। उन्होंने व्यापक आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं पर भी जोर दिया। इसमें सामान, सेवाओं, पर्यटकों, शिक्षण संस्थानों और खेलों से जुड़े लोगों के आसान आवागमन को बढ़ावा देने की बात शामिल है।

    उन्होंने बताया कि भारत की कई देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार वार्ताएं चल रही हैं। इनमें कनाडा, चिली, पेरू, सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन, मेक्सिको, मालदीव, यूरेशिया, मध्य एशिया, रूस, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल और इजरायल शामिल हैं।

    इन वार्ताओं का प्रमुख उद्देश्य भारत के लिए वैश्विक वैल्यू चेन और सप्लाई चेन में भागीदारी के अवसर बढ़ाना है। इसके साथ ही सामान और सेवाओं के आवागमन को आसान बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजारों से जुड़ाव बढ़ाने के लिए आर्थिक साझेदारी महत्वपूर्ण है।

    सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर की सालाना खपत की मांग 150 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है। उन्होंने इस क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों के अनुरूप क्षमताओं के विकास पर जोर दिया।

    मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बड़े लैंग्वेज मॉडल और एजेंटिक मॉडल सहित एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही भारतीय स्टार्टअप्स के लिए इनोवेशन और डीप-टेक इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने की बात कही।

    गोयल ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत निजी क्षेत्र द्वारा अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाला तीसरा देश बन गया है। इसके अलावा उन्होंने भारत की युवा आबादी के वैश्विक घटनाक्रमों और अवसरों को लेकर बढ़ती जागरूकता का जिक्र किया। उन्होंने युवाओं की अपने भविष्य से जुड़े फैसले लेने की क्षमता पर भरोसा जताया और देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की वृद्धि का भी उल्लेख किया।

  • 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य कैसे होगा हासिल, पीयूष गोयल ने बताया आर्थिक विकास का पूरा रोडमैप

    2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य कैसे होगा हासिल, पीयूष गोयल ने बताया आर्थिक विकास का पूरा रोडमैप

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता, इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और लक्षित समाज कल्याण योजनाओं के जरिए भारत 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को मजबूत आधार के रूप में विकसित करने पर सरकार का विशेष जोर है।

    गोयल ने एक आर्थिक सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में देश मजबूत आधार तैयार कर रहा है। उन्होंने इसके लिए आर्थिक स्थिरता, बुनियादी ढांचे के विस्तार और लक्षित समाज कल्याण योजनाओं को प्रमुख एजेंडा बताया।

    केंद्रीय मंत्री के अनुसार व्यापार, विनिर्माण और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के विस्तार से भारत वैश्विक आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में भारत की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है।

    गोयल ने वैश्विक स्तर पर साझेदारियों के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं देशों और लोगों का है, जो साझेदारी बनाने की क्षमता रखते हैं। उनके मुताबिक भारत ने विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है और विकसित तथा विकासशील दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाया है।

    इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में निवेश को लेकर गोयल ने कहा कि केंद्र सरकार निजी क्षेत्र के साथ मिलकर हर साल करीब 12 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इस निवेश में बंदरगाह, एक्सप्रेसवे, जलमार्ग और रेलवे जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।

    उन्होंने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचा देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ कारोबार और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

    व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में कई देशों के साथ द्विपक्षीय और मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इन समझौतों से भारतीय घरेलू उद्योग और कारोबारियों के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के अवसर बढ़े हैं।

    गोयल के अनुसार 2014 से अब तक हुए व्यापार समझौतों के जरिए भारत को कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच मिली है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में हुए नौ मुक्त व्यापार समझौतों के परिणामस्वरूप भारतीय कारोबारियों को 38 देशों के बाजारों में तरजीही पहुंच मिली है।

    इन देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार करीब 60 ट्रिलियन डॉलर बताया गया है। इससे भारतीय कंपनियों और कारोबारियों के लिए निर्यात तथा अंतरराष्ट्रीय कारोबार के नए अवसर उपलब्ध होने की बात कही गई है।

    गोयल ने बताया कि सरकार फिलहाल आठ और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रही है। इन समझौतों के पूरा होने पर भारतीय कारोबारियों को लगभग 15 ट्रिलियन डॉलर के अतिरिक्त बाजारों में तरजीही पहुंच मिलने की संभावना है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्थिक स्थिरता, इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, व्यापार विस्तार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को साथ लेकर भारत 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को संसद की मंजूरी, पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने जताई खुशी, व्यापार और रोजगार बढ़ने की उम्मीद

    भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को संसद की मंजूरी, पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने जताई खुशी, व्यापार और रोजगार बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली ।भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिल गई है। बुधवार को हुए मतदान में समझौते के पक्ष में 93 वोट पड़े, जबकि 29 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। संसद से मंजूरी मिलने के बाद न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने खुशी जताई और कहा कि इस समझौते से देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

    प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि कई लोगों ने उनसे कहा था कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता संभव नहीं होगा, लेकिन अब संसद ने इसे मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि उनकी नेशनल पार्टी ने पहले कार्यकाल में भारत के साथ एफटीए करने का वादा किया था और सरकार ने उस लक्ष्य को पूरा किया है।

    लक्सन के मुताबिक समझौते से न्यूजीलैंड के लोगों के लिए अधिक नौकरियां और आय के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के करीब 1.4 अरब उपभोक्ताओं तक पहुंच बनने से न्यूजीलैंड के उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अवसर बढ़ेंगे। उनके अनुसार यह समझौता न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

    न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने समझौते से जुड़े शुल्क प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि एफटीए लागू होने के बाद भारत को न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। समझौते के पूरी तरह लागू होने पर 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क या तो समाप्त कर दिया जाएगा या उसे काफी कम कर दिया जाएगा।

    मैक्ले ने कहा कि समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में भी सुविधा बढ़ेगी। इसके तहत सीमा पर क्लीयरेंस प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उन्होंने भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग तक न्यूजीलैंड के कारोबारियों की बेहतर पहुंच को भी समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

    उन्होंने कहा कि भारत में भोजन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, पर्यटन, प्रोफेशनल सेवाओं और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में मुक्त व्यापार समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारतीय बाजार में अपने कारोबारी संबंधों का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस व्यापार समझौते की बातचीत की घोषणा मार्च 2025 में की गई थी। न्यूजीलैंड सरकार को उम्मीद है कि संसद की मंजूरी के बाद एफटीए इस साल के अंत तक लागू हो जाएगा। हालांकि इसके लिए समझौते में निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी होगा।

    मैक्ले ने कहा कि एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने के लक्ष्य को भी समर्थन देगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। नए समझौते को इसी लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

    संसद की मंजूरी के साथ भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक नया ढांचा तैयार हुआ है। समझौते के लागू होने के बाद शुल्क में बदलाव और बाजार तक पहुंच से जुड़े प्रावधानों का असर दोनों देशों के निर्यातकों और कारोबारियों पर पड़ने की उम्मीद है।

  • ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत का ट्रेड प्लान, जयशंकर बोले- कारोबार के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल जरूरी

    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत का ट्रेड प्लान, जयशंकर बोले- कारोबार के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल जरूरी


    नई दिल्ली ।
    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत ने सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद कारोबारी माहौल बनाने पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने और अलग-अलग भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही।

    एस जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स अपनी सदस्यता, एजेंडे और सहयोग के तरीकों के लिहाज से लगातार विकसित हो रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में अस्थिरता और अनिश्चितता बनी हुई है, सदस्य देशों के लिए आर्थिक सहयोग को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया बड़े राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के दौर से गुजर रही है और जटिल परिस्थितियां वैश्विक व्यवस्था की पहचान बन गई हैं।

    विदेश मंत्री के अनुसार, ब्रिक्स देशों के लिए आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने का अर्थ अपनी आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े और प्रतिस्पर्धी बने रहते हुए आर्थिक झटकों को सहने की क्षमता को मजबूत करना है। इसके लिए कारोबारी व्यवहार को बाजार के वास्तविक सिद्धांतों के अनुरूप बनाए रखना और व्यापारिक साझेदारियों में भरोसे को बढ़ाना जरूरी है।

    उन्होंने विविध व्यापारिक संबंधों, पारदर्शी व्यापार और निवेश व्यवस्था तथा ऐसे कारोबारी वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसका अनुमान लगाया जा सके। उनके मुताबिक, कारोबारियों के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद परिस्थितियां तैयार होने से उन्हें नए साझेदार तलाशने, नए बाजारों तक पहुंच बनाने और अलग-अलग देशों की क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलने में मदद मिलेगी।

    जयशंकर ने ब्रिक्स देशों के बीच आपूर्ति नेटवर्क को जोड़ने की जरूरत भी बताई। मजबूत सप्लाई चेन तैयार होने से सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए आपसी व्यापार और सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि देशों को अपनी क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलने के लिए समन्वित प्रयास करने चाहिए।

    व्यापार और निवेश में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ निष्पक्ष बाजार व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। भारत की ओर से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में विविधता लाने और आर्थिक सहयोग को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत बताई गई। इसके साथ ही सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव भी दिया गया।

    भारत नई दिल्ली में शनिवार और रविवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को इसमें शामिल किया गया। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी संगठन का सदस्य बना।

    ब्रिक्स के विस्तार के साथ संगठन के भीतर व्यापार और निवेश सहयोग का दायरा भी बढ़ा है। ऐसे में भारत ने सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए अधिक बाजारों तक पहुंच, बेहतर सप्लाई नेटवर्क, पारदर्शी व्यापार व्यवस्था और भरोसेमंद कारोबारी माहौल को महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा है। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को सदस्य देशों की आर्थिक क्षमता मजबूत करने से जोड़ा गया है।

  • ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीयूष गोयल और एस. जयशंकर ने व्यापार नियम सरल करने, बाजार खोलने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात कही

    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीयूष गोयल और एस. जयशंकर ने व्यापार नियम सरल करने, बाजार खोलने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात कही

    नई दिल्ली । दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम की बैठक में भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलते वैश्विक व्यापारिक और राजनीतिक माहौल के बीच सदस्य देशों के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने को महत्वपूर्ण बताया।

    बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था में व्यापार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और ये देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। दुनिया के कुल व्यापार में भी ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत बताई गई।

    गोयल ने भारत की व्यापारिक क्षमताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स दूसरे देशों को भेजता है। दवाओं के क्षेत्र में भी भारत की मजबूत स्थिति है और वह ब्रिक्स देशों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने वाला भरोसेमंद देश बन सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों से अपने बाजारों तक पहुंच आसान बनाने की अपील की। उनका कहना था कि केवल टैक्स कम करने से व्यापार में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होगी। इसके साथ ही सामान के आयात-निर्यात से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की आवश्यकता है।

    गोयल ने कहा कि कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए सामान की मंजूरी की प्रक्रिया में कम समय लगना चाहिए। उनका मानना है कि यदि व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाएं आसान होंगी और मंजूरी में तेजी आएगी तो कंपनियों के लिए अलग-अलग ब्रिक्स देशों के बाजारों में कारोबार करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

    बैठक में सप्लाई चेन को मजबूत बनाने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। गोयल ने कच्चे माल और जरूरी खनिजों के लिए अलग-अलग देशों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की जरूरत बताई। बदलते वैश्विक हालात के बीच आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत और अधिक भरोसेमंद बनाने को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ब्रिक्स देशों के बीच मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं और यह संगठन के लिए महत्वपूर्ण समय है। उनके अनुसार, इन वर्षों में ब्रिक्स के सदस्य, इसके काम और चर्चा के मुद्दों में बदलाव आया है।

    जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय राजनीतिक तनाव, महामारी और मौसम में बदलाव जैसी कई बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है। इन परिस्थितियों का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में देशों को तेजी से बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को तैयार करना होगा।

    विदेश मंत्री ने डिजिटल तकनीक के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक कारोबार करने के तरीकों को बदल रही है। डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से कंपनियों का काम तेजी से हो सकता है और उत्पादन बढ़ाने के साथ आर्थिक विकास के नए अवसर भी सामने आ सकते हैं।

    बैठक में भारत का मुख्य संदेश ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने पर केंद्रित रहा। बाजारों तक पहुंच सरल करने, व्यापार नियमों को सुगम बनाने, सामान की मंजूरी में तेजी लाने और सप्लाई चेन मजबूत करने को आपसी व्यापार बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया गया।